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पानी-पानी झज्जर: महिलाओं का विरोध, बादली रोड पर लगाया ताला

झज्जर  झज्जर की लाल सिंह कॉलोनी में तीन दिन से हो रहे जल भराव से परेशान महिलाओं का सब्र शनिवार को टूट गया। कॉलोनी की दर्जनों महिलाओं ने झज्जर-बादली रोड पर उतरकर प्रदर्शन किया और सड़क पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर सुनवाई न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे लगातार तीन दिन से डीसी कार्यालय जाकर शिकायत कर रही हैं, लेकिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जाम के कारण करीब आधे घंटे तक झज्जर-बादली रोड पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा। राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया। स्थिति को गंभीर होता देख पुलिस ने नगर परिषद के कर्मचारियों को तत्काल मौके पर बुलाया। नगर परिषद की टीम ने जल निकासी के लिए पंप सेट लगाए और पानी निकालने का कार्य शुरू किया। इसके बाद महिलाओं को समझाकर जाम खुलवाया गया। जाम हटने के बाद झज्जर-बादली रोड पर ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य हो सकी।महिलाओं का कहना है कि कॉलोनी में जल भराव के कारण घरों में घुटनों तक पानी भरा है। बच्चों और बुजुर्गों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई घरों में नालियों का गंदा पानी भर गया है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।

GST सुधारों से मिलेगा लाभ! हरियाणा CM सैनी बोले- महंगाई पर लगेगी लगाम

हरियाणा  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में लिए गए निर्णय आम जनता, किसानों, उद्योग और मध्यम वर्ग के लिए ऐतिहासिक साबित होंगे। उन्होंने बताया कि अब केवल दो मानक जीएसटी दरें (5 और 18 प्रतिशत) रहेंगी। रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान, खाद्य पदार्थ, दवाइयां, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर टैक्स कम किया गया है। वे शनिवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थ। उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने सीमेंट, ट्रैक्टर और कारों पर भी दरें घटाई गई हैं। वहीं हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुधारों से महंगाई कम होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।   दो स्लैब में सिमटा जीएसटी जीएसटी काउंसिल ने कर ढांचे को सरल बनाते हुए 12 और 28 प्रतिशत की दरें खत्म कर दी हैं। अब केवल 5 और 18 प्रतिशत की मानक दरें लागू होंगी। अहितकारी वस्तुओं जैसे तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला और कैफीनयुक्त पेय पदार्थों पर 40 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि इससे कर प्रणाली सरल होगी और मुकदमेबाजी कम होगी। रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती काउंसिल ने आम आदमी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं पर टैक्स दरें कम की हैं। कुछ उत्पादों पर जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया है। कपड़ा और उर्वरक पर ड्यूटी समाप्त कर दी गई है। पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाकर तीन दिन में स्वत: पंजीकरण की सुविधा दी गई है। साथ ही प्रोविजनल रिफंड भी समय पर मिलेगा। बैठक में पैकेट दूध और पनीर पर जीएसटी हटा दिया गया है। घी, मक्खन और सूखे मेवों पर दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। रोटी और परांठे पर भी टैक्स पूरी तरह माफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेंगे। किसानों को बड़ी राहत कृषि प्रधान हरियाणा के लिए काउंसिल के फैसले अहम रहे। सिंचाई और जुताई उपकरणों पर टैक्स 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। उर्वरक इनपुट्स पर भी 5 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा। 1800 सीसी तक की क्षमता वाले ट्रैक्टर पर दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है जबकि इससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर पर 28 से घटाकर 18 प्रतिशत। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे किसानों की लागत घटेगी और कृषि का आधुनिकीकरण होगा। नवीकरणीय ऊर्जा और वस्त्र उद्योग को फायदा सौर और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर टैक्स 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। वस्त्र उद्योग में धागे और कपड़े जैसे इनपुट पर टैक्स 12 से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। सिलाई मशीन पर भी टैक्स 18 से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। सैनी ने कहा कि इन फैसलों से उत्पादन लागत घटेगी और रोजगार बढ़ेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं पर राहत जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया है। डायग्नोस्टिक किट पर 5 प्रतिशत और स्वास्थ्य व जीवन बीमा पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे इलाज की लागत कम होगी और गरीब व मध्यम वर्ग को सीधी राहत मिलेगी। वाहन और मकान बनेंगे सस्ते काउंसिल ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए छोटी कारों (पेट्रोल 1200 सीसी और डीजल 1500 सीसी तक) पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। 350 सीसी से अधिक बाइक पर भी दर 18 प्रतिशत कर दी गई है। सीमेंट पर टैक्स 28 से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। इससे मकान और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की लागत कम होगी। हरियाणा में बढ़ा कर संग्रह मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा का शुद्ध जीएसटी संग्रह 2018-19 में 18,910 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 39,743 करोड़ रुपये हो गया है। राज्य अब देश में जीएसटी संग्रह करने वाले शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संग्रह 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जीएसटी सुधार ‘वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट’ की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं। इन फैसलों से महंगाई पर नियंत्रण होगा, आमजन की बचत बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य और मजबूत होगा।

PM के जन्मदिन पर सेवा सप्ताह की शुरुआत, हरियाणा के CM ने की तैयारी बैठक

चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को पूरे देश में अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा। इसी कड़ी में हरियाणा में भी 17 सितंबर से सेवा पखवाड़ा शुरू होगा, जो 2 अक्टूबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसको लेकर आज चंडीगढ़ में अहम बैठक बुलाई है। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा और तैयारी को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री का जन्मदिन सेवा भाव के साथ मनाना गर्व की बात है। मुख्यमंत्री नायब सैनी पहले ही साफ कर चुके हैं कि इस सेवा पखवाड़े को लेकर प्रदेश में पूरी तैयारी चल रही है। शहरों और सरकारी अस्पतालों की सफाई व्यवस्था को लेकर कई बैठकों का आयोजन हो चुका है। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं और RWA से भी अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस दौरान प्रदेश के अस्पतालों में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत की जाएगी, जिससे सरकारी अस्पतालों को निजी अस्पतालों के बराबर बनाया जा सके। हरियाणा में PM के जन्मदिन पर सेवा पखवाड़े की शुरुआत सेवा पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य न सिर्फ सफाई व्यवस्था को मजबूत करना है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई ऊंचाई देना है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस दौरान MRI, डिजिटल एक्स-रे, डायलिसिस जैसी सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएंगी। 17 सितंबर को आधुनिक अस्पतालों के पहले चरण का उद्घाटन किया जाएगा। इसके अलावा, हरियाणा सरकार इस सेवा पखवाड़े के दौरान राज्य के शहरों की स्वच्छता रैंकिंग भी तय करेगी, जैसे कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर करती है। इससे नगर निकायों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा बैठक में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं ने विपक्ष की राजनीति को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार गरीबों और देश के विकास के लिए ठोस योजनाएं बनी हैं। विपक्ष केवल झूठ की राजनीति कर रहा है।

कुरुक्षेत्र दौरे पर CM नायब सैनी, मारकंडा नदी के पानी से बने हालात की करेंगे समीक्षा

कुरुक्षेत्र हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज कुरुक्षेत्र जिले में बाढ़ और जलभराव से प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। हाल की भारी बारिश और नदियों के उफान के बाद यह उनका पहला दौरा है। सीएम सबसे पहले शाहाबाद पहुंचेंगे, जहां मारकंडा नदी के ओवरफ्लो से हालात गंभीर बने हुए हैं। यहां नदी किनारे बसे गांवों में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीएम प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनेंगे और राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे। शाहाबाद के बाद वे झांसा और पिहोवा क्षेत्र का भी जायजा लेंगे। पिहोवा के पंजाब बॉर्डर से लगे गांवों में जलभराव ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इस दौरान सीएम प्रशासन के कामकाज का आकलन भी करेंगे। झांसा और पिहोवा का जायजा शाहाबाद के बाद मुख्यमंत्री झांसा और पिहोवा जाएंगे। पिहोवा क्षेत्र खासकर पंजाब बॉर्डर से लगे गांवों में जलभराव की स्थिति गंभीर है। खेतों में खड़ी फसलों को पानी ने भारी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री यहां जाकर किसानों और ग्रामीणों से मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेगे। वे राहत सामग्री, भोजन-पानी और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन करेंगे। प्रशासनिक कामकाज की जांच मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि उनका दौरा केवल औपचारिकता नहीं है बल्कि वे प्रशासनिक कामकाज का भी गहराई से आकलन करेंगे। वे बचाव और राहत कार्यों की गति की समीक्षा करेंगे। साथ ही नदियों के तटबंधों की मजबूती और मरम्मत कार्यों पर विशेष ध्यान देंगे, ताकि भविष्य में ऐसी आपदा से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। लाडवा में होगा समापन दौरे का अंत सीएम अपनी विधानसभा सीट लाडवा से करेंगे। यहां भी वे नदियों की स्थिति और बाढ़ प्रबंधन कार्यों की जांच करेंगे। प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और सभी विभागों को मौके पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस दौरे का उद्देश्य न केवल वर्तमान स्थिति का जायजा लेना है बल्कि आगामी समय में बेहतर प्रबंधन के लिए ठोस कदम उठाना भी है।

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में हरियाणा में आयुष कॉलेजों की जांच शुरू

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने प्रदेश में आयुष (आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी) से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की जांच और निरीक्षण के लिए नई कमेटी गठित की गई है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार के अनुसार, कोई भी नया आयुष शैक्षणिक संस्थान शुरू करने से पहले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) या एसेंशियल सर्टिफिकेट (ईसी) लेना जरूरी होगा। इसके लिए गठित कमेटी स्थल का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। जिलों के लिए बनने वाली यह कमेटी एडीसी की अगुवाई में बनेगी। संबंधित जिले के आयुर्वेदिक अधिकारी इस कमेटी के मेंबर सेक्रेटरी व कंवीनर होंगे।   इसी तरह से संबंधित एरिया के तहसीलदार, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग, शहरी निकाय/टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के प्रतिनिधि तथा पीडब्ल्यूडी या पंचायत विभाग के एक्सईएन/एसडीओ तथा आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी, सोवा-रिग्पा, होम्योपैथिक और योग एवं नेचुरोपैथी के विषय विशेषज्ञ को बतौर सदस्य कमेटी में शामिल किया जाएगा। कॉलेज की श्रेणी के अनुसार 3-3 विषय विशेषज्ञ समिति में शामिल होंगे। नये कोर्स के साथ सीटें भी बढ़ेंगी अगर किसी मौजूदा आयुष संस्थान में सीटें बढ़ानी हों या नए कोर्स शुरू करने हों और भवन व भूमि का विस्तार न किया गया हो, तो केवल तकनीकी विशेषज्ञ ही निरीक्षण करेंगे। लेकिन यदि भूमि और भवन का विस्तार किया गया है, तो पूरी समिति निरीक्षण करेगी। अगर किसी आयुष संस्थान के खिलाफ शिकायत आती है तो मामले की जांच आयुष महानिदेशक द्वारा गठित कमेटी करेगी। जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी इसमें शामिल किया जा सकेगा। सुधीर राजपाल ने कहा कि इस कदम का मकसद प्रदेश में चल रहे आयुष शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। साथ ही, केंद्रीय नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुसार सीट वृद्धि और कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया को लागू करना है।

सिस्टम बंद, अधिकारी खुश: हरियाणा में अब बड़े बदलाव आने वाले हैं

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने राज्य के विभिन्न नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में तैनात खजाना एवं लेखा विभाग तथा स्थानीय लेखा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी प्रकार की भौतिक फाइल प्रक्रिया को बंद करें और बिल प्रक्रिया और अनुमोदन से सम्बन्धित सभी कार्य केवल हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स (एचईडब्ल्यूपी पोर्टल के माध्यम से ही किए जाएं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, ने इस सम्बन्ध में एक पत्र जारी किया है। पत्र के अनुसार, सरकार ने पाया है कि फाइलों का भौतिक रूप से आदान-प्रदान न केवल विलंब का कारण बनता है बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुशासन स्थापित करने के उद्देश्य को भी बाधित करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य के विभिन्न नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में तैनात खजाना एवं लेखा विभाग तथा स्थानीय लेखा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अब किसी भी प्रकार की भौतिक फाइल प्रक्रिया को बंद करें और सभी बिल संबंधी कार्यवाही, अनुमोदन तथा कार्यों की निगरानी केवल एचईडब्ल्यूपी पोर्टल के माध्यम से ही की जाए। पत्र में कहा गया है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।  

धन संपन्न मंत्रियों की झलक: हरियाणा के 12 मंत्री करोड़पति, 3 नाम देश के शीर्ष अरबपतियों में

पानीपत देश की 27 राज्य विधानसभाओं, 3 केंद्रशासित प्रदेशों व केंद्रीय मंत्रिपरिषद से विश्लेषण किए गए 643 मंत्रियों में से 36 अरबपति हैं। इनमें हरियाणा से 3 मंत्री शामिल हैं। चुनावी शपथपत्र के अनुसार, हरियाणा से सबसे अमीर तोशाम से विधायक व महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी हैं। उनकी संपत्ति 134.56 करोड़ है। गुरुग्राम से सांसद व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत (121.54 करोड़) दूसरे, फरीदाबाद से विधायक व राजस्व एवं आपदा मंत्री विपुल गोयल (101.81 करोड़) तीसरे स्थान पर हैं। प्रदेश के 14 में से 12. मंत्री करोड़पति हैं। किसी मंत्री पर केस नहीं है। यह खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) की रिपोर्ट में हुआ है। देखें आकड़े मंत्री संपत्ति देनवरी श्रुति चौधरी 134.56 करोड़ 13.37 करोड़ राव इंदीत  121.54 करोड़ 13 करोड़ आरती राव 101.81 करोड़ 5.28 करोड़ विपुल गोयल 68.27 करोड़ 2.55करोड़ कृष्णपाल गुर्जर  62.58 करोड़ 3.98 करोड़ राय नरबीर  58.79 करोड़ शून्य महीपाल ढांडा 14.29 करोड़ 1.60 करोड़ राजेश नागर 12.11करोड़ 34.82 लाख रणबीर मंगवा 11.62 करोड़ 52.53 लाख अरविंद शर्मा 6.90 करोड़ 3.56 करोड़ नायाब सिंह 5.80 करोड़  74 लाख कृष्णलाल 5.30 करोड़ 22 लाख कृष्णबेदी 4.80 करोड़ 2.28 लाख गौरव गौतम 4.50 करोड़ शून्य अनिल विज 1.49 करोड़ शून्य श्याम सिंह राणा 1.16 करोड़ शून्य  

विधानसभा से बाहर किए जाने का जिक्र, अनिल विज ने ममता पर साधा निशाना

हरियाणा  हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। विज ने कहा कि ममता बनर्जी का हाल भी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसा होने वाला है, क्योंकि दोनों का रवैया तानाशाही रहा है। हुड्डा ने भी मुझे विधानसभा से बाहर फिंकवाया मीडिया से बातचीत में विज ने कहा,“जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने मुझे कई बार विधानसभा से बाहर उठवाकर फिंकवाया था। अब ममता बनर्जी भी भाजपा विधायकों के साथ वही कर रही हैं, लेकिन यह प्रजातंत्र के खिलाफ है।” उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि आज हुड्डा ‘‘खुड्डे लाइन’’ लगे हुए हैं और ममता का भी यही हाल होने वाला है। प्रजातंत्र में विधायकों को बोलने का अधिकार विज ने कहा कि भारत की शासन प्रणाली प्रजातंत्र पर आधारित है और इसमें चुने हुए प्रतिनिधियों को विधानसभा में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन कुछ दल और नेता प्रजातंत्र को बर्दाश्त नहीं कर पाते और अपनी तानाशाही प्रवृत्ति दिखाते हैं। चुने हुए विधायकों की आवाज दबाना लोकतंत्र का अपमान है। ममता बैनर्जी का रवैया इसी दिशा को दिखाता है। भाजपा विधायकों को बाहर फिंकवाना गलत कोलकाता में विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायकों को मार्शलों से घसीटकर बाहर निकाले जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विज ने कहा, “यह कृत्य प्रजातंत्र की आत्मा को ठेस पहुंचाने वाला है। विपक्ष की बात सुनना और सहन करना लोकतंत्र की मूल भावना है। लेकिन ममता बैनर्जी इसको स्वीकार नहीं कर पा रही हैं।”

खुशखबरी: हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं को तीन दिन में मिलेगा नया कनेक्शन

चंडीगढ़ हरियाणा में बिजली का कनैक्शन हासिल करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। चाहे अस्थाई कनेक्शन हासिल करना हो या फिर स्थाई कनैक्शन के लिए अप्लाई किया हो हरेक सेवा के लिए समय सीमा को कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है उसके अनुसार अब महानगरीय क्षेत्रों में एल.टी. आपूर्ति के लिए बिजली का स्थाई कनेक्शन निगमों द्वारा तीन दिन के अंदर जारी किया जाएगा। जबकि नगरपालिका क्षेत्रों में यह समयसीमा सात दिन तय की गई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में अगर कोई नया बिजली का कनेक्शन हासिल करना चाहता है तो 15 दिन के भीतर प्रोसेस पूरा हो जाएगा। अतिरिक्त भार जारी करने के लिए भी यही समय सीमा तय की गई है। हालांकि नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया है कि जहां प्रणाली का विस्तार कार्य चल रहा है वहां समय सीमा 34 दिन तक हो सकती है। अगर किसी उपभोक्ता को अस्थाई कनेक्शन चाहिए तो उसके लिए भी वही समय सीमा होगी जो कि स्थाई कनेक्शन के लिए तय की गई है। नोटिफिकेशन में इस कार्य के लिए अधिकारियों की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। स्थाई और अस्थाई कनेक्शन जारी करने के लिए उपमंडल अधिकारी (ऑपरेशंस), कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।   इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से नवम्बर 2023 में उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की सेवांए देने के लिए समयसीमा जारी की गई थी। जिसमें स्थाई कनैक्शन हासिल करने या फिर अतिरिक्त लोड के लिए निगमों को 37 दिन का समय दिया जाता था जिस कारण कई दिनों तक उपभोक्ताओं को बिना बिजली के रहना पड़ता था। जबकि 11 के.वी. आपूर्ति के नए कनैक्शन के लिए 78 दिन तक लगते थे। इसी तरह एल. टी. आपूर्ति का अस्थाई कनेक्शन जारी करने में भी 19 दिन का समय लिया जाता था। इस वजह से सबसे बड़ी परेशानी बड़े-बड़े उद्योग भी झेल रहे थे जिन्हें नए कनैक्शन के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था। 

राज्य में बदलेगा सिस्टम, हरियाणा के अफसरों के लिए नई व्यवस्था फायदे का सौदा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य के विभिन्न नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में तैनात खजाना एवं लेखा विभाग तथा स्थानीय लेखा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी प्रकार की भौतिक फाइल प्रक्रिया को बंद करें और बिल प्रक्रिया और अनुमोदन से सम्बन्धित सभी कार्य केवल हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स (एचईडब्ल्यूपी पोर्टल के माध्यम से ही किए जाएं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, ने इस सम्बन्ध में एक पत्र जारी किया है। पत्र के अनुसार, सरकार ने पाया है कि फाइलों का भौतिक रूप से आदान-प्रदान न केवल विलंब का कारण बनता है बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुशासन स्थापित करने के उद्देश्य को भी बाधित करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य के विभिन्न नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में तैनात खजाना एवं लेखा विभाग तथा स्थानीय लेखा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अब किसी भी प्रकार की भौतिक फाइल प्रक्रिया को बंद करें और सभी बिल संबंधी कार्यवाही, अनुमोदन तथा कार्यों की निगरानी केवल एचईडब्ल्यूपी पोर्टल के माध्यम से ही की जाए। पत्र में कहा गया है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।