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फतेहाबाद के रतिया शहर के लिए 1667 हेक्टेयर में विकास योजना, आबादी 2 लाख पहुंचने का अनुमान

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने फतेहाबाद जिले के रतिया शहर के लिए वर्ष 2041 तक का नया विकास खाका जारी कर दिया है। प्रस्तावित प्रारूप विकास योजना के तहत रतिया को आने वाले वर्षों की आबादी, आर्थिक गतिविधियों और शहरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी की गई है। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2041 तक रतिया की आबादी दो लाख के करीब पहुंच सकती है, जिसके अनुरूप शहर के विस्तार, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं और औद्योगिक विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। नोटिफिकेशन के अनुसार, इस योजना पर लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं। तय अवधि के भीतर प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। 2011 की तुलना में कई गुना आबादी का अनुमान योजना दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2011 में रतिया की आबादी 37,152 दर्ज की गई थी। प्रक्षेपण के आधार पर 2021 में यह 65 हजार से अधिक और वर्ष 2041 तक करीब 2.02 लाख पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इसी संभावित दबाव को देखते हुए विकास योजना तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि कृषि आधारित गतिविधियों, व्यापार और बढ़ती शहरी जरूरतों के कारण आने वाले वर्षों में रतिया का स्वरूप तेजी से बदलेगा। 1667 हेक्टेयर क्षेत्र के हिसाब से होगी प्लानिंग प्रारूप विकास योजना में शहर के लिए कुल 1667 हेक्टेयर क्षेत्र का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए रखा गया है। सरकार ने 634 हेक्टेयर आवासीय क्षेत्र के लिए, 116 हेक्टेयर वाणिज्यिक, 296 हेक्टेयर औद्योगिक, 193 हेक्टेयर परिवहन व संचार, 122 हेक्टेयर सार्वजनिक उपयोगिताएं, 101 हेक्टेयर सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक उपयोग तथा 205 हेक्टेयर भूमि खुले स्थान और हरित क्षेत्र के लिए प्रस्तावित की गई है। योजना में सड़क ढांचे को भी विस्तार देने का प्रस्ताव है। शहर के विभिन्न सेक्टरों को जोड़ने के लिए नई परिधीय सड़कें और सेक्टर सड़कें प्रस्तावित की गई हैं। प्रमुख सड़कों के साथ हरित पट्टी और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चौड़ाई का भी प्रावधान किया गया है। योजना में परिवहन और संचार उपयोग के लिए अलग क्षेत्र आरक्षित किया गया है ताकि बढ़ती आबादी के साथ ट्रैफिक और आवाजाही की चुनौतियों को नियंत्रित किया जा सके। पानी, बिजली और सार्वजनिक सेवाओं का भी रोडमैप दस्तावेज में जल आपूर्ति, सीवरेज, ग्रिड सब-स्टेशन और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए भी अलग क्षेत्र प्रस्तावित किए गए हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जलापूर्ति और विद्युत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में स्थान आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी अलग प्रावधान किए गए हैं ताकि शहर का विकास केवल आबादी बढ़ाने तक सीमित न रहे बल्कि सुविधाओं के साथ संतुलित ढंग से आगे बढ़ सके। लोगों से मांगे गए सुझाव सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारूप योजना है और अंतिम अधिसूचना से पहले नागरिक, संस्थाएं और अन्य हितधारक अपने सुझाव और आपत्तियां दे सकेंगे। इन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत परखा जाएगा। रतिया के लिए जारी यह विकास खाका आने वाले डेढ़ दशक की शहरी दिशा तय करेगा और इससे शहर के नियोजित विस्तार, निवेश तथा बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  

अब तय समय में मिलेंगी पुलिस और प्रशासनिक सेवाएं, हरियाणा में नई व्यवस्था लागू

चंडीगढ़ हरियाणा गृह विभाग की 33 सेवाओं को हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम (राइट टू सर्विस), 2014 के दायरे में शामिल कर दिया गया है। इसके तहत अब विभिन्न लाइसेंस, सत्यापन, अनुमति और एनओसी से जुड़ी सेवाओं के लिए निश्चित समय-सीमा तय कर दी गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को निर्धारित अवधि के भीतर सेवाएं प्रदान करनी होंगी। ऐसा नहीं होने पर नागरिक शिकायत और अपील भी कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत हथियार लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया, यदि लाइसेंस की अवधि समाप्त नहीं हुई है और आवेदन उसी जिले में किया गया है, तो 15 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी। वहीं पुलिस सत्यापन वाले मामलों में यह प्रक्रिया 22 दिनों में पूरी होगी। हथियार लाइसेंस में हथियार जोड़ने या हटाने, हथियार खरीदने की अवधि बढ़ाने तथा धरना, प्रदर्शन, जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति जैसी सेवाएं 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाएंगी। विदेशियों के आगमन और प्रस्थान का पंजीकरण तत्काल किया जाएगा। इसके अलावा एफआईआर या डीडीआर की प्रति भी तुरंत या ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। लाउडस्पीकर उपयोग की अनुमति, मेले, प्रदर्शनी, खेल आयोजनों के लिए एनओसी, अजनबी सत्यापन, विदेशी नागरिकों के आवासीय परमिट का विस्तार और पुराने वाहनों के लिए एनओसी जैसी सेवाओं की समय-सीमा 5 दिन तय की गई है। घरेलू सहायक, किरायेदार, कर्मचारी और चरित्र सत्यापन, पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट तथा खोई हुई संपत्ति के निस्तारण से संबंधित सेवाएं 21 दिनों के भीतर पूरी की जाएंगी। पेट्रोल पंप और सिनेमा हॉल स्थापित करने के लिए एनओसी 15 दिनों में जारी होगी। सिनेमा लाइसेंस जारी करने में 30 दिन और उसके नवीनीकरण में 25 दिन का समय लगेगा। इसके अलावा पेट्रोलियम और विस्फोटक नियमों के तहत विभिन्न एनओसी, आतिशबाजी भंडारण एवं बिक्री अनुमति तथा लाइसेंस नवीनीकरण जैसी सेवाओं के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। ऑनलाइन शिकायतों और निजी सुरक्षा एजेंसियों के सत्यापन का निपटारा 60 दिनों में किया जाएगा। सरकार ने प्रत्येक सेवा के लिए नामित अधिकारी और शिकायत निवारण अधिकारियों की भी नियुक्ति की है। यदि किसी नागरिक को तय समय में सेवा नहीं मिलती है तो वह अधिनियम के तहत अपील कर सकेगा। इससे सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने और लोगों को समयबद्ध सेवाएं मिलने की उम्मीद है।  

महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, ‘स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार’ क्लीनिक के तहत नई सुविधा

 चंडीगढ़  हरियाणा में महिलाओं में समय से स्तन कैंसर की जांच के लिए आठ जिला अस्पतालों में फुल-फील्ड डिजिटल मैमोग्राफी (एफएफडीएम) मशीनें लगाई जाएंगी। ‘स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार’ क्लीनिक के तहत यह मैमोग्राफी मशीनें पंचकूला, रेवाड़ी, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, पानीपत, करनाल और नारनौल के साथ ही गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में स्थापित की जाएंगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जांच, परामर्श, निदान और निवारक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य खरीद एवं क्रय समिति ने 11 फुल-फील्ड डिजिटल मैमोग्राफी मशीनों की खरीद को मंजूरी प्रदान की है। प्रत्येक मशीन की कीमत लगभग 1.18 करोड़ रुपये है। वर्तमान में मैमोग्राफी सेवाएं केवल अंबाला छावनी के उपमंडल नागरिक अस्पताल तथा झज्जर और रोहतक जिलों में उपलब्ध हैं। अब विभिन्न जिलों में स्तन कैंसर की जांच सुविधा उपलब्ध होने से रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव होगी और उपचार की सफलता दर में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पीएम केयर्स योजना के तहत हरियाणा को पांच अतिरिक्त मैमोग्राफी यूनिट आवंटित करने की मंजूरी दी है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र के माध्यम से नौ मशीनों की मांग भेजी थी, जिसके विरुद्ध पांच मशीनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन अतिरिक्त मशीनों को रोगियों की संख्या, स्थानीय आवश्यकता और सेवा मांग के आधार पर अन्य जिलों में स्थापित किया जाएगा।

निजी बैंकों में सरकारी पैसे का निवेश पड़ा भारी, अब 3 दिन में देनी होगी पाई-पाई की जानकारी

चंडीगढ़ आईडीएफसी फर्स्ट व कोटक महेंद्रा बैंक में सरकारी राशि के गबन के केस सामने आने के बाद हरियाणा सरकार सतर्क हो गई है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों को उनके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से संबंधित जानकारी तीन दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित प्रारूप में जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी विभाग, निगम व बोर्ड अपनी जानकारी पहले संबंधित विभाग को भेजेंगे, वहीं से इसका संकलन कर आगे भेजा जाएगा। नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। हरियाणा सरकार के कई विभागों का पैसा निजी बैंकों में पड़ा था जिसे बैंक कर्मियों ने मिलीभगत कर रियल एस्टेट व ज्वेलरी में निवेश कर दिया। इससे सबक लेते हुए अब हरियाणा सरकार ने निर्देश जारी किए हैं। हालांकि वित्त विभाग ने साल 2025 में भी निर्देश दिए थे। इन निर्देशों में सभी विभागों को अपने बैंक खातों और एफडी का आंतरिक ऑडिट कर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके बावजूद कई विभागों से अधूरी जानकारी मिली या निर्धारित फॉर्मेट में डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया। कुछ मामलों में फील्ड कार्यालयों ने सीधे वित्त विभाग को जानकारी भेज दी जबकि विभागीय स्तर पर इसके संकलन कर भेजा जाना था। वित्त विभाग ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के खिलाफ है और इससे डेटा की सटीकता भी प्रभावित होती है। तय फार्मेट में पांच तक भेजनी है जानकारी सभी विभागों को 20 मार्च 2026 तक की जानकारी 5 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग ने इसके लिए सभी विभागों को एक प्रारूप भेजा है। जारी प्रारूप में बैंक खाता संख्या, खाता खोलने की तिथि, बैंक और शाखा का नाम, बैलेंस, खाते का प्रकार व वित्त विभाग की अनुमति से खाता खोला गया या नहीं जैसी जानकारियां मांगी गई हैं। एफडी के लिए जमा राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तिथि और अन्य विवरण देने होंगे।  

प्रोफेसर अली खान पर दर्ज ‘ऑपरेशन सिंदूर’ टिप्पणी मामला खत्म, हरियाणा सरकार ने केस वापस लिया

 नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर पर की गई टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे अशोका यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को बड़ी राहत मिलती नजर आ रही है। हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में आगे अभियोजन की अनुमति नहीं देगी और इसे एक बार की उदारता मानते हुए कार्रवाई बंद करने का फैसला किया है। सरकार के इस रुख के बाद यह मामला अब लगभग खत्म होता दिखाई दे रहा है। कोर्ट में बताया गया कि राज्य सरकार ने प्रोफेसर अली खान के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को बंद करने का फैसला किया है।   सरकार ने इसे एक बार की उदारता (वन-टाइम मैग्नैनिमिटी) बताते हुए आपराधिक कार्रवाई को बंद करने का फैसला किया है। दरअसल, प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद पर आरोप था कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर टिप्पणी की थी। बता दें कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की वह जवाबी कार्रवाई थी जो पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ की गई थी। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कर रही थी सुनवाई इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के पहले दिए गए सुझाव के बाद सरकार ने इस मामले को बंद करने का फैसला किया है। कोर्ट ने प्रोफेसर को जिम्मेदारी से व्यवहार करने की सलाह दी सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राज्य सरकार ने बताया है कि वह इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए अभियोजन की अनुमति नहीं देगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है, लेकिन सरकार ने आगे केस न चलाने का फैसला लिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता एक पढ़े-लिखे और समझदार प्रोफेसर हैं और उम्मीद है कि वह आगे जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे। इस फैसले के बाद प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई अब खत्म होने की संभावना है।

Punjab Budget 2026: SC महिला को ₹1500, पेंशनर्स को राहत, वित्तमंत्री बोले—हम जुमलेबाज नहीं

चंडीगढ़  पंजाब में बजट पेश करने से पहले वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने CM भगवंत मान से मुलाकात की थी। पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 1000 रुपए महीना देने का ऐलान कर दिया है। खास बात ये है कि SC वर्ग की महिलाओं को 500 रुपए ज्यादा यानी 1500 रुपए महीने दिए जाएंगे।  पेंशनधारकों को भी इसका लाभ मिलेगा। हालांकि सरकारी कर्मचारियों और सांसदों-विधायकों को इससे बाहर रखा गया है। खास बात ये है कि AAP सरकार ने इस स्कीम को लेकर हरियाणा की BJP सरकार पर भी तंज कसा है। वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने विधानसभा में बोलते हुए कहा कि हमारे पड़ोसी राज्य की सरकार ने इनकम लिमिट लगा दी। जिसमें सिर्फ 20% महिलाएं ही कवर होती हैं। वित्तमंत्री ने कहा कि हम जुमलेबाजी नहीं करते। पंजाब में इस स्कीम से 97% महिलाएं कवर होंगी। CM भगवंत मान सिर्फ 20% महिलाओं नहीं बल्कि 100% महिलाओं के मुख्यमंत्री हैं। महिलाओं के लिए 1 हजार रुपए राशि का ऐलान करते हुए वित मंत्री हरपाल सिंह चीमा। जिस पर जमकर तालियां बजी। महिलाओं के लिए 1 हजार रुपए राशि का ऐलान करते हुए वित मंत्री हरपाल सिंह चीमा। जिस पर जमकर तालियां बजी। SC महिलाओं को 500 रुपए ज्यादा मिलेंगे वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू की गई है। इस योजना के तहत पंजाब की हर बालिग महिला को हर महीने ₹1000 सीधे उसके बैंक खाते में दिए जाएंगे। इसके अलावा SC समुदाय की महिलाओं को हर महीने ₹1500 सीधे उनके खाते में दिए जाएंगे। वित्तमंत्री चीमा ने कहा- मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह योजना सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की पहली डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (यूनिवर्सल कैश ट्रांसफर) योजना होगी, जो महिलाओं के लिए शुरू की जा रही है। पंजाब में 18 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला इस योजना के तहत पंजीकरण करा सकेगी। चीमा ने कहा- केवल कुछ कैटेगरी की महिलाओं को इस स्कीम से बाहर रखा गया है, जिनमें मौजूदा या पूर्व स्थायी सरकारी कर्मचारी, मौजूदा या पूर्व सांसद/विधायक और आयकर देने वाली महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा जो महिलाएं पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं जैसे बुजुर्ग पेंशन, विधवा/निराश्रित महिला पेंशन या दिव्यांग पेंशन ले रही हैं, वे भी इस योजना के लिए पात्र होंगी। चीमा ने कहा- कुल मिलाकर पंजाब की लगभग 97% बालिग महिलाएं इस योजना के दायरे में आएंगी, जो भारत के किसी भी राज्य में सबसे अधिक कवरेज है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, घर के फैसलों में उनकी भूमिका को मजबूत करना, स्वास्थ्य और पोषण के स्तर में सुधार लाना और लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने तथा बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करना है। पड़ोसी राज्य ने इनकम लिमिट लगाई, सिर्फ 20% को लाभ चीमा ने कहा- कई राज्यों ने ऐसी योजनाओं की घोषणा तो की है, लेकिन वे उन्हें सिर्फ महिलाओं के एक छोटे वर्ग तक सीमित कर देते हैं और उन बड़ी संख्या में महिलाओं को नजरअंदाज कर देते हैं जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी पुरुषों पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं। उदाहरण के तौर पर, हमारे एक पड़ोसी राज्य ने भी ऐसी ही योजना घोषित की, लेकिन उसे सालाना ₹1 लाख से कम आय वाले परिवारों तक ही सीमित रखा, जिससे सिर्फ लगभग 20% बालिग महिलाएं ही कवर होती हैं। पंजाब ऐसी जुमलेबाजी नहीं करेगा। CM भगवंत मान पंजाब की सिर्फ 20% महिलाओं के नहीं, बल्कि पंजाब की हर महिला के मुख्यमंत्री हैं। इसीलिए हमने फैसला किया है कि इस योजना के तहत राज्य की सभी बालिग महिलाओं को कवर किया जाएगा। किताबों-कोचिंग, फिल्म देखने के लिए पैसे मांगने की जरूरत नहीं चीमा ने कहा कि चाहे कॉलेज में पढ़ने वाली बेटी हो जिसे अतिरिक्त किताबों की जरूरत हो, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही बेटी हो जिसे कोचिंग की जरूरत हो, कोई महिला जो सिनेमा हॉल में फिल्म देखना चाहती हो, या कोई दादी जो अपनी पोती के लिए नया खिलौना खरीदना चाहती हो, अब उन्हें अपने खर्चों के लिए किसी से पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब उनके बड़े भाई और बेटे सरदार भगवंत सिंह मान हर महीने ₹1000 से ₹1500 सीधे उनके बैंक खाते में जमा करवाएंगे। चीमा ने कहा कि इस योजना को पारदर्शी और समय पर लागू करने के लिए वित्त वर्ष 2026–27 में ₹9,300 करोड़ का विशेष बजट रखा गया है। वित्तमंत्री चीमा ने कहा- इस सीधी आर्थिक सहायता के साथ-साथ सरकार पंजाब में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा भी जारी रखेगी। यह सुविधा महिलाओं के लिए आवागमन, अवसर और पहुंच बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। पिछले एक साल में ही इस योजना के तहत महिलाओं ने लगभग 12 करोड़ मुफ्त बस यात्राएं की हैं, जो इसकी लोकप्रियता और सामाजिक प्रभाव को दिखाता है। इस सुविधा से महिलाओं को काम, पढ़ाई, इलाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए यात्रा करने में आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। इस योजना को जारी रखने के लिए वित्त वर्ष 2026–27 में ₹600 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

हरियाणा में छोटे-मोटे अपराधों में नहीं काटने होंगे अदालतों के चक्कर

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने हरियाणा जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2025 को मंजूरी देने के साथ ही इसे लागू कर दिया है। इसके तहत अब छोटे-मोटे अपराधों में लोगों की अदालतों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि जुर्माना अदा कर कानूनी प्रक्रियाओं से राहत मिल सकेगी। राज्य सरकार ने 17 विभागों से संबंधित 42 राज्य अधिनियमों के कुल 164 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से को बाहर कर दिया है। यह संशोधित कानून 30 अक्तूबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से प्रत्येक तीन वर्ष की समाप्ति के बाद न्यूनतम जुमनि की राशि में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति जुर्माने की राशि समय पर जमा नहीं करता है तो वह राशि भू-राजस्व को भांति वसूल की जाएगी। अधिनियम में अपील का भी प्रावधान रखा गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यदि कोई सफाई कर्मचारी बिना सूचना दिए ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है तो उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, पानी की पाइप लाइन तोड़ने या जल स्रोत को प्रदूषित करने पर 500 रुपये जुमनि का प्रावधान किया गया है। इसी तरह यदि किसी पशु से स्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होता है जैसे सूअर या अन्य पशुओं के कारण और उसे रोकने के लिए जारी आदेशों की अवहेलना की जाती है तो पहली चार 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा जबकि दोबारा उल्लंघन करने पर यह जुर्माना 1,000 रुपये होगा। वहीं, मिलीभगत कर किसी आरोपी को भगाने का प्रयास करने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। राज्य सरकार के अनुसार संबंधित अधिनियम के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले सुनवाई की जाएगी। सुनवाई के बिना कोई दंड नहीं लगाया जाएगा।

जमीन विवादों पर लगेगा ब्रेक, भूमि बंटवारे के केस जल्द निपटाने की तैयारी में हरियाणा सरकार

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने लंबे समय से रुके हुए भूमि बंटवारे (पार्टिशन) के मामलों को जल्दी निपटाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। एफसीआर तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्यभर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व अधिकारी अब जल्दी और समयबद्ध तरीके से जमीन के विवाद निपटाएं। अब आम लोगों को सालों तक जमीन के मामले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब प्रत्येक सहायक कलेक्टर को महीने में कम से कम 12 जमीन के बंटवारे के मामले निपटाने होंगे। यह लक्ष्य तीन स्तर पर निगरानी के तहत पूरा होगा। उपायुक्त, मंडलायुक्त और वित्त आयुक्त (राजस्व)। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जो तहसीलदार कम काम वाले क्षेत्रों में हैं, उनके पास ज्यादा मामले भेजे जाएंगे ताकि सभी अधिकारी बराबर जिम्मेदारी निभाएं और लोगों को जल्दी न्याय मिल सके। जमीन के मामलों में अक्सर विवाद लंबित रहते हैं। इसे कम करने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र लागू किया गया है। सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारी गांव स्तर पर एडीआर शिविर लगाएंगे। विवादित पक्षकार आपसी सहमति से समाधान करने के लिए प्रेरित होंगे। सफल समाधान पर 10,000 रुपये का इनाम मिलेगा, जिसे विवादित पक्ष साझा करेगा। सरकार की कोशिश है कि लोग लंबे कोर्ट के झंझट से बचकर सीधे समझौते के जरिए अपनी जमीन का निपटारा कर सकें। अब राजस्व न्यायालयों में लगातार सुनवाई होगी। तहसीलदार और नायब तहसीलदार सप्ताह में कम से कम तीन दिन न्यायालय चलाएंगे। अन्य अधिकारी सप्ताह में पांच दिन जमीन के मामलों की सुनवाई करेंगे। इससे लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और लोगों को समय पर न्याय मिलेगा।    राजस्व अधिकारियों का प्रदर्शन त्रैमासिक रूप से देखा जाएगा। डॉ़ सुमिता मिश्रा ने कहा कि जो अधिकारी सबसे अच्छे काम करेंगे, उन्हें अपनी पसंद की तहसील में तैनाती दी जा सकती है। जो लगातार काम पूरा नहीं करेंगे, उन्हें अन्य गैर-राजस्व जिम्मेदारियों में भेजा जाएगा। इससे अधिकारी अपने काम में और जिम्मेदार बनेंगे, और आम लोगों के मामलों में देरी नहीं होगी। नई नियमावली के तहत संयुक्त खातेदारी की जमीनों का बंटवारा अब तेजी से होगा। मंडल आयुक्त तीन दिनों में अधिसूचना जारी करेंगे और मामले जल्द लागू होंगे। इससे लंबित जमीन के मामले जल्दी निपटेंगे। मुकदमेबाजी कम होगी, आपसी समझ से समाधान मिलेगा। अधिकारी जवाबदेह होंगे, इसलिए लोगों को न्याय समय पर मिलेगा। पारदर्शिता बढ़ेगी, कोई भी मामले में अन्याय नहीं कर पाएगा।  

हरियाणा सरकार ने जारी किए ये आदेश, इस कर्मचारियों पर होंगे लागू

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने जिलों में प्रशासनिक कार्यों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, अतिरिक्त उपायुक्त के अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे, चुनाव ड्यूटी पर होने अथवा स्थानांतरण/सेवानिवृत्ति के कारण पद रिक्त होने की स्थिति में संबंधित जिले के जिला नगर आयुक्त को लिंक अधिकारी-2 नामित किया है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे अथवा चुनाव ड्यूटी पर जाने से पूर्व लिंक अधिकारी को अनिवार्य रूप से सूचित करेंगे।

सरकारी नौकरी का मौका: हरियाणा में इस पद पर भर्ती शुरू, लिखित परीक्षा 100 अंकों की

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने चालक पदों की भर्ती प्रक्रिया और सेवा शर्तों में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित के उद्देश्य से अपने सभी विभागों में ग्रुप-सी चालकों के लिए समान (कॉमन) सेवा नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों को पत्र जारी कर 31 दिसंबर तक प्रारूप नियमों पर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। प्रस्तावित नियम 'हरियाणा ग्रुप-सी चालक (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 2025' के नाम से जाने जाएंगे और ये आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे। प्रारूप नियमों के अनुसार, चालक पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 42 वर्ष निर्धारित की गई है। अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, पूर्व सैनिक और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों को सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित नियमों के अनुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। चालक पद पर सीधी भर्ती अथवा स्थानांतरण/प्रतिनियुक्ति के माध्यम से नियुक्त सभी अभ्यर्थियों के पास 10 जमा दो या इसके समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। उनके पास कम से कम तीन वर्ष पुराना वैध लाइट या हैवी परिवहन वाहन ड्राइविंग लाइसेंस हो तथा निर्धारित ड्राइविंग टेस्ट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।   नियुक्ति के किसी भी माध्यम से चयनित सभी अभ्यर्थियों के लिए मैट्रिक स्तर पर हिंदी या संस्कृत विषय अथवा उच्च स्तर पर हिंदी विषय उत्तीर्ण होना चाहिए। प्रारूप नियमों के अनुसार, चालक पद के लिए चयन प्रक्रिया में 100 अंकों की लिखित परीक्षा होगी। इसके साथ-साथ संबंधित विभाग के सेवा नियमों के अनुसार लाइट/हैवी वाहन चलाने की दक्षता परीक्षा (स्किल टेस्ट) भी ली जाएगी।