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निजी बैंकों में सरकारी पैसे का निवेश पड़ा भारी, अब 3 दिन में देनी होगी पाई-पाई की जानकारी

चंडीगढ़ आईडीएफसी फर्स्ट व कोटक महेंद्रा बैंक में सरकारी राशि के गबन के केस सामने आने के बाद हरियाणा सरकार सतर्क हो गई है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों को उनके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से संबंधित जानकारी तीन दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित प्रारूप में जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी विभाग, निगम व बोर्ड अपनी जानकारी पहले संबंधित विभाग को भेजेंगे, वहीं से इसका संकलन कर आगे भेजा जाएगा। नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। हरियाणा सरकार के कई विभागों का पैसा निजी बैंकों में पड़ा था जिसे बैंक कर्मियों ने मिलीभगत कर रियल एस्टेट व ज्वेलरी में निवेश कर दिया। इससे सबक लेते हुए अब हरियाणा सरकार ने निर्देश जारी किए हैं। हालांकि वित्त विभाग ने साल 2025 में भी निर्देश दिए थे। इन निर्देशों में सभी विभागों को अपने बैंक खातों और एफडी का आंतरिक ऑडिट कर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके बावजूद कई विभागों से अधूरी जानकारी मिली या निर्धारित फॉर्मेट में डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया। कुछ मामलों में फील्ड कार्यालयों ने सीधे वित्त विभाग को जानकारी भेज दी जबकि विभागीय स्तर पर इसके संकलन कर भेजा जाना था। वित्त विभाग ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के खिलाफ है और इससे डेटा की सटीकता भी प्रभावित होती है। तय फार्मेट में पांच तक भेजनी है जानकारी सभी विभागों को 20 मार्च 2026 तक की जानकारी 5 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग ने इसके लिए सभी विभागों को एक प्रारूप भेजा है। जारी प्रारूप में बैंक खाता संख्या, खाता खोलने की तिथि, बैंक और शाखा का नाम, बैलेंस, खाते का प्रकार व वित्त विभाग की अनुमति से खाता खोला गया या नहीं जैसी जानकारियां मांगी गई हैं। एफडी के लिए जमा राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तिथि और अन्य विवरण देने होंगे।  

प्रोफेसर अली खान पर दर्ज ‘ऑपरेशन सिंदूर’ टिप्पणी मामला खत्म, हरियाणा सरकार ने केस वापस लिया

 नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर पर की गई टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे अशोका यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को बड़ी राहत मिलती नजर आ रही है। हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में आगे अभियोजन की अनुमति नहीं देगी और इसे एक बार की उदारता मानते हुए कार्रवाई बंद करने का फैसला किया है। सरकार के इस रुख के बाद यह मामला अब लगभग खत्म होता दिखाई दे रहा है। कोर्ट में बताया गया कि राज्य सरकार ने प्रोफेसर अली खान के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को बंद करने का फैसला किया है।   सरकार ने इसे एक बार की उदारता (वन-टाइम मैग्नैनिमिटी) बताते हुए आपराधिक कार्रवाई को बंद करने का फैसला किया है। दरअसल, प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद पर आरोप था कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर टिप्पणी की थी। बता दें कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की वह जवाबी कार्रवाई थी जो पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ की गई थी। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कर रही थी सुनवाई इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के पहले दिए गए सुझाव के बाद सरकार ने इस मामले को बंद करने का फैसला किया है। कोर्ट ने प्रोफेसर को जिम्मेदारी से व्यवहार करने की सलाह दी सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राज्य सरकार ने बताया है कि वह इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए अभियोजन की अनुमति नहीं देगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है, लेकिन सरकार ने आगे केस न चलाने का फैसला लिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता एक पढ़े-लिखे और समझदार प्रोफेसर हैं और उम्मीद है कि वह आगे जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे। इस फैसले के बाद प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई अब खत्म होने की संभावना है।

Punjab Budget 2026: SC महिला को ₹1500, पेंशनर्स को राहत, वित्तमंत्री बोले—हम जुमलेबाज नहीं

चंडीगढ़  पंजाब में बजट पेश करने से पहले वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने CM भगवंत मान से मुलाकात की थी। पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 1000 रुपए महीना देने का ऐलान कर दिया है। खास बात ये है कि SC वर्ग की महिलाओं को 500 रुपए ज्यादा यानी 1500 रुपए महीने दिए जाएंगे।  पेंशनधारकों को भी इसका लाभ मिलेगा। हालांकि सरकारी कर्मचारियों और सांसदों-विधायकों को इससे बाहर रखा गया है। खास बात ये है कि AAP सरकार ने इस स्कीम को लेकर हरियाणा की BJP सरकार पर भी तंज कसा है। वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने विधानसभा में बोलते हुए कहा कि हमारे पड़ोसी राज्य की सरकार ने इनकम लिमिट लगा दी। जिसमें सिर्फ 20% महिलाएं ही कवर होती हैं। वित्तमंत्री ने कहा कि हम जुमलेबाजी नहीं करते। पंजाब में इस स्कीम से 97% महिलाएं कवर होंगी। CM भगवंत मान सिर्फ 20% महिलाओं नहीं बल्कि 100% महिलाओं के मुख्यमंत्री हैं। महिलाओं के लिए 1 हजार रुपए राशि का ऐलान करते हुए वित मंत्री हरपाल सिंह चीमा। जिस पर जमकर तालियां बजी। महिलाओं के लिए 1 हजार रुपए राशि का ऐलान करते हुए वित मंत्री हरपाल सिंह चीमा। जिस पर जमकर तालियां बजी। SC महिलाओं को 500 रुपए ज्यादा मिलेंगे वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू की गई है। इस योजना के तहत पंजाब की हर बालिग महिला को हर महीने ₹1000 सीधे उसके बैंक खाते में दिए जाएंगे। इसके अलावा SC समुदाय की महिलाओं को हर महीने ₹1500 सीधे उनके खाते में दिए जाएंगे। वित्तमंत्री चीमा ने कहा- मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह योजना सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की पहली डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (यूनिवर्सल कैश ट्रांसफर) योजना होगी, जो महिलाओं के लिए शुरू की जा रही है। पंजाब में 18 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला इस योजना के तहत पंजीकरण करा सकेगी। चीमा ने कहा- केवल कुछ कैटेगरी की महिलाओं को इस स्कीम से बाहर रखा गया है, जिनमें मौजूदा या पूर्व स्थायी सरकारी कर्मचारी, मौजूदा या पूर्व सांसद/विधायक और आयकर देने वाली महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा जो महिलाएं पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं जैसे बुजुर्ग पेंशन, विधवा/निराश्रित महिला पेंशन या दिव्यांग पेंशन ले रही हैं, वे भी इस योजना के लिए पात्र होंगी। चीमा ने कहा- कुल मिलाकर पंजाब की लगभग 97% बालिग महिलाएं इस योजना के दायरे में आएंगी, जो भारत के किसी भी राज्य में सबसे अधिक कवरेज है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, घर के फैसलों में उनकी भूमिका को मजबूत करना, स्वास्थ्य और पोषण के स्तर में सुधार लाना और लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने तथा बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करना है। पड़ोसी राज्य ने इनकम लिमिट लगाई, सिर्फ 20% को लाभ चीमा ने कहा- कई राज्यों ने ऐसी योजनाओं की घोषणा तो की है, लेकिन वे उन्हें सिर्फ महिलाओं के एक छोटे वर्ग तक सीमित कर देते हैं और उन बड़ी संख्या में महिलाओं को नजरअंदाज कर देते हैं जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी पुरुषों पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं। उदाहरण के तौर पर, हमारे एक पड़ोसी राज्य ने भी ऐसी ही योजना घोषित की, लेकिन उसे सालाना ₹1 लाख से कम आय वाले परिवारों तक ही सीमित रखा, जिससे सिर्फ लगभग 20% बालिग महिलाएं ही कवर होती हैं। पंजाब ऐसी जुमलेबाजी नहीं करेगा। CM भगवंत मान पंजाब की सिर्फ 20% महिलाओं के नहीं, बल्कि पंजाब की हर महिला के मुख्यमंत्री हैं। इसीलिए हमने फैसला किया है कि इस योजना के तहत राज्य की सभी बालिग महिलाओं को कवर किया जाएगा। किताबों-कोचिंग, फिल्म देखने के लिए पैसे मांगने की जरूरत नहीं चीमा ने कहा कि चाहे कॉलेज में पढ़ने वाली बेटी हो जिसे अतिरिक्त किताबों की जरूरत हो, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही बेटी हो जिसे कोचिंग की जरूरत हो, कोई महिला जो सिनेमा हॉल में फिल्म देखना चाहती हो, या कोई दादी जो अपनी पोती के लिए नया खिलौना खरीदना चाहती हो, अब उन्हें अपने खर्चों के लिए किसी से पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब उनके बड़े भाई और बेटे सरदार भगवंत सिंह मान हर महीने ₹1000 से ₹1500 सीधे उनके बैंक खाते में जमा करवाएंगे। चीमा ने कहा कि इस योजना को पारदर्शी और समय पर लागू करने के लिए वित्त वर्ष 2026–27 में ₹9,300 करोड़ का विशेष बजट रखा गया है। वित्तमंत्री चीमा ने कहा- इस सीधी आर्थिक सहायता के साथ-साथ सरकार पंजाब में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा भी जारी रखेगी। यह सुविधा महिलाओं के लिए आवागमन, अवसर और पहुंच बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। पिछले एक साल में ही इस योजना के तहत महिलाओं ने लगभग 12 करोड़ मुफ्त बस यात्राएं की हैं, जो इसकी लोकप्रियता और सामाजिक प्रभाव को दिखाता है। इस सुविधा से महिलाओं को काम, पढ़ाई, इलाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए यात्रा करने में आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। इस योजना को जारी रखने के लिए वित्त वर्ष 2026–27 में ₹600 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

हरियाणा में छोटे-मोटे अपराधों में नहीं काटने होंगे अदालतों के चक्कर

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने हरियाणा जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2025 को मंजूरी देने के साथ ही इसे लागू कर दिया है। इसके तहत अब छोटे-मोटे अपराधों में लोगों की अदालतों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि जुर्माना अदा कर कानूनी प्रक्रियाओं से राहत मिल सकेगी। राज्य सरकार ने 17 विभागों से संबंधित 42 राज्य अधिनियमों के कुल 164 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से को बाहर कर दिया है। यह संशोधित कानून 30 अक्तूबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से प्रत्येक तीन वर्ष की समाप्ति के बाद न्यूनतम जुमनि की राशि में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति जुर्माने की राशि समय पर जमा नहीं करता है तो वह राशि भू-राजस्व को भांति वसूल की जाएगी। अधिनियम में अपील का भी प्रावधान रखा गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यदि कोई सफाई कर्मचारी बिना सूचना दिए ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है तो उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, पानी की पाइप लाइन तोड़ने या जल स्रोत को प्रदूषित करने पर 500 रुपये जुमनि का प्रावधान किया गया है। इसी तरह यदि किसी पशु से स्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होता है जैसे सूअर या अन्य पशुओं के कारण और उसे रोकने के लिए जारी आदेशों की अवहेलना की जाती है तो पहली चार 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा जबकि दोबारा उल्लंघन करने पर यह जुर्माना 1,000 रुपये होगा। वहीं, मिलीभगत कर किसी आरोपी को भगाने का प्रयास करने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। राज्य सरकार के अनुसार संबंधित अधिनियम के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले सुनवाई की जाएगी। सुनवाई के बिना कोई दंड नहीं लगाया जाएगा।

जमीन विवादों पर लगेगा ब्रेक, भूमि बंटवारे के केस जल्द निपटाने की तैयारी में हरियाणा सरकार

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने लंबे समय से रुके हुए भूमि बंटवारे (पार्टिशन) के मामलों को जल्दी निपटाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। एफसीआर तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्यभर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व अधिकारी अब जल्दी और समयबद्ध तरीके से जमीन के विवाद निपटाएं। अब आम लोगों को सालों तक जमीन के मामले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब प्रत्येक सहायक कलेक्टर को महीने में कम से कम 12 जमीन के बंटवारे के मामले निपटाने होंगे। यह लक्ष्य तीन स्तर पर निगरानी के तहत पूरा होगा। उपायुक्त, मंडलायुक्त और वित्त आयुक्त (राजस्व)। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जो तहसीलदार कम काम वाले क्षेत्रों में हैं, उनके पास ज्यादा मामले भेजे जाएंगे ताकि सभी अधिकारी बराबर जिम्मेदारी निभाएं और लोगों को जल्दी न्याय मिल सके। जमीन के मामलों में अक्सर विवाद लंबित रहते हैं। इसे कम करने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र लागू किया गया है। सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारी गांव स्तर पर एडीआर शिविर लगाएंगे। विवादित पक्षकार आपसी सहमति से समाधान करने के लिए प्रेरित होंगे। सफल समाधान पर 10,000 रुपये का इनाम मिलेगा, जिसे विवादित पक्ष साझा करेगा। सरकार की कोशिश है कि लोग लंबे कोर्ट के झंझट से बचकर सीधे समझौते के जरिए अपनी जमीन का निपटारा कर सकें। अब राजस्व न्यायालयों में लगातार सुनवाई होगी। तहसीलदार और नायब तहसीलदार सप्ताह में कम से कम तीन दिन न्यायालय चलाएंगे। अन्य अधिकारी सप्ताह में पांच दिन जमीन के मामलों की सुनवाई करेंगे। इससे लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और लोगों को समय पर न्याय मिलेगा।    राजस्व अधिकारियों का प्रदर्शन त्रैमासिक रूप से देखा जाएगा। डॉ़ सुमिता मिश्रा ने कहा कि जो अधिकारी सबसे अच्छे काम करेंगे, उन्हें अपनी पसंद की तहसील में तैनाती दी जा सकती है। जो लगातार काम पूरा नहीं करेंगे, उन्हें अन्य गैर-राजस्व जिम्मेदारियों में भेजा जाएगा। इससे अधिकारी अपने काम में और जिम्मेदार बनेंगे, और आम लोगों के मामलों में देरी नहीं होगी। नई नियमावली के तहत संयुक्त खातेदारी की जमीनों का बंटवारा अब तेजी से होगा। मंडल आयुक्त तीन दिनों में अधिसूचना जारी करेंगे और मामले जल्द लागू होंगे। इससे लंबित जमीन के मामले जल्दी निपटेंगे। मुकदमेबाजी कम होगी, आपसी समझ से समाधान मिलेगा। अधिकारी जवाबदेह होंगे, इसलिए लोगों को न्याय समय पर मिलेगा। पारदर्शिता बढ़ेगी, कोई भी मामले में अन्याय नहीं कर पाएगा।  

हरियाणा सरकार ने जारी किए ये आदेश, इस कर्मचारियों पर होंगे लागू

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने जिलों में प्रशासनिक कार्यों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, अतिरिक्त उपायुक्त के अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे, चुनाव ड्यूटी पर होने अथवा स्थानांतरण/सेवानिवृत्ति के कारण पद रिक्त होने की स्थिति में संबंधित जिले के जिला नगर आयुक्त को लिंक अधिकारी-2 नामित किया है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे अथवा चुनाव ड्यूटी पर जाने से पूर्व लिंक अधिकारी को अनिवार्य रूप से सूचित करेंगे।

सरकारी नौकरी का मौका: हरियाणा में इस पद पर भर्ती शुरू, लिखित परीक्षा 100 अंकों की

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने चालक पदों की भर्ती प्रक्रिया और सेवा शर्तों में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित के उद्देश्य से अपने सभी विभागों में ग्रुप-सी चालकों के लिए समान (कॉमन) सेवा नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों को पत्र जारी कर 31 दिसंबर तक प्रारूप नियमों पर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। प्रस्तावित नियम 'हरियाणा ग्रुप-सी चालक (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 2025' के नाम से जाने जाएंगे और ये आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे। प्रारूप नियमों के अनुसार, चालक पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 42 वर्ष निर्धारित की गई है। अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, पूर्व सैनिक और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों को सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित नियमों के अनुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। चालक पद पर सीधी भर्ती अथवा स्थानांतरण/प्रतिनियुक्ति के माध्यम से नियुक्त सभी अभ्यर्थियों के पास 10 जमा दो या इसके समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। उनके पास कम से कम तीन वर्ष पुराना वैध लाइट या हैवी परिवहन वाहन ड्राइविंग लाइसेंस हो तथा निर्धारित ड्राइविंग टेस्ट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।   नियुक्ति के किसी भी माध्यम से चयनित सभी अभ्यर्थियों के लिए मैट्रिक स्तर पर हिंदी या संस्कृत विषय अथवा उच्च स्तर पर हिंदी विषय उत्तीर्ण होना चाहिए। प्रारूप नियमों के अनुसार, चालक पद के लिए चयन प्रक्रिया में 100 अंकों की लिखित परीक्षा होगी। इसके साथ-साथ संबंधित विभाग के सेवा नियमों के अनुसार लाइट/हैवी वाहन चलाने की दक्षता परीक्षा (स्किल टेस्ट) भी ली जाएगी।  

हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल पर सरकार का कड़ा एक्शन, ESMA के साथ ‘नो वर्क नो पे’ लागू

चंडीगढ़  हरियाणा में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों की दो दिन की हड़ताल को अब अनिश्चितकाल तक बढ़ाने के ऐलान पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने राज्य में आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों और अन्य लोगों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों व कर्मचारियों को बिना किसी रुकावट के अपनी ड्यूटी जारी रखनी होगी, क्योंकि हड़ताल से जनता के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा है। राज्यपाल ने धारा 4(क)(1) के तहत स्पष्ट किया है कि अगले छह महीनों तक स्वास्थ्य विभाग के सभी डॉक्टर और कर्मचारी किसी भी तरह की हड़ताल नहीं कर सकेंगे।   इधर, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन ने दो दिन की हड़ताल का ऐलान किया था और उनकी कई मांगों पर सरकार विचार कर रही है। हड़ताल के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाधित नहीं हुईं और आम आदमी पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा। ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टरों की ड्यूटी लगी रही और बड़ी संख्या में बाहर से डॉक्टर बुलाए गए थे। नो वर्क नो पे का आदेश स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताली डॉक्टरों पर सख्ती करते हुए 'नो वर्क नो पे' का आदेश जारी किया है। हड़ताल में शामिल डॉक्टरों को इन दिनों का वेतन नहीं मिलेगा। इस फैसले पर डॉक्टर एसोसिएशन ने तीव्र विरोध जताया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजेश ख्यालिया ने बताया कि सरकार को कई बार वार्ता के लिए अनुरोध भेजा गया, लेकिन कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आया। राज्य कार्यकारिणी की बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, सभी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखेंगे। बता दें कि एसएमओ की सीधी भर्ती समेत कई मांगों को लेकर दो दिन से हड़ताल पर चल रहे डॉक्टरों ने आज बैठक की और 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया। एसोसिएशन ने बुधवार से आमरण अनशन शुरू करने की भी घोषणा की है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान नीति के तहत 75% एसएमओ पद प्रमोशन से और केवल 25% पद सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। सीधी भर्ती वाले डॉक्टर करियर में बहुत ऊंचे पदों (कई तो महानिदेशक तक) तक पहुंच जाते हैं, जबकि नौकरी में पहले से कार्यरत डॉक्टरों को पूरे करियर में मुश्किल से एक ही प्रमोशन मिलता है और वे वहीं के वहीं अटके रहते हैं। बच्ची का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका, ओपीडी में लंबी कतारें हड़ताल के कारण यमुनानगर, पानीपत, फतेहाबाद, जींद, कैथल, हिसार, झज्जर और चरखी दादरी जिलों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं और गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ा। महेंद्रगढ़ में एक छह साल की बच्ची का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका, शव को नारनौल भेजना पड़ा। पंचकूला सिविल अस्पताल में मरीज घंटों डॉक्टर का इंतजार करते रहे। हिसार में सड़क हादसे में घायल एक युवक को समय पर इलाज नहीं मिल सका।

स्वास्थ्य व्यवस्था में नई छलांग: हरियाणा सरकार ने रातों-रात खड़े किए ढाई हजार डॉक्टर

चंडीगढ़ हरियाणा में सरकारी डाक्टरों को अनिश्चितकालीन हड़ताल के पीछे प्रशासनिक कारणों से अधिक संगठनात्मक गुटबाजी और आगामी चुनाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के भीतर दी गुटों के टकराव से यह आंदोलन तेज हुआ है। एक गुट हड़ताल पर अडिग है. जबकि दूसरा मरीजों को परेशान कर आंदोलन के पक्ष में नहीं है। फिर भी आठ व नौ दिसंबर की हड़ताल के बाद बुधबार से डाक्टरों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया, जिसकी शुरुआत पंचकूला में हुई। सरकार द्वारा बातचीत के लिए बुलाने और अधिकांश मांगें मान लेने के बाद भी हड़ताल जारी रहने से प्रदेश में हजारों मरीज प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा डाक्टरों की अधिकतर मांगें पहले ही स्वीकार कर ली गई हैं और सरकार अब भी संवाद को तैयार है। मरीजों की परेशानी देख सरकार ने लगभग ढाई हजार वैकल्पिक डाक्टरों की तैनाती की है। दस दिसंबर को 2531 वैकल्पिक डाक्टर तैनात हुए और 74 डाक्टरों ने ड्यूटी ज्वाइन की। मामला पहुंचा हाई कोर्ट प्रदेश में डाक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस पर हाई कोर्ट वीरवार को सुनवाई करेगा। याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी अरविदर सेठ ने हाई कोर्ट को बताया कि सरकारी अस्पताल राज्य में मेडिकल सुविधाओं की रीढ़ है। अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के अक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है। इस निर्णय के चलते प्रदेश में मेडिकल सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई है। भते व स्पेशलिस्ट कैडर बनाने की मांग भी मानी है। माडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम की अधिसूचना पर जल्द निर्णय का संकेत दिया है। 

कुम्हार समाज को राहत, हरियाणा में बर्तन उद्योग के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी

चंडीगढ़   प्रदेश में नगर निगमों, परिषद एवं पालिकाओं में शामिल गांवों में भी कुम्हार समाज के लोगों को बर्तन बनाने पकाने के लिए निर्धारित जमीन के आबंटन पत्र देने पर सरकार विचार कर रही है। निकाय विभाग ने पिछले दिनो सभी संबंधित 87 इकाइयों में पत्र लिख कर गांवों में आंवे पंजावें या कुम्हारधाना के लिए आरक्षित भूमि की रिपोर्ट मांगी है। सरकार द्वारा अगस्त माह 2025 में प्रदेश के सभी गांवों में कुम्हार समाज के नागरिकों को बर्तन बनाने एवं पकाने के लिए जमीन के आबंटन पत्र वितरित किए गए थे तब यह आवाज उठने लगी थी कि विशेषकर नगर निगम में शामिल गांवों में भी यह सुविधा प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार एवं वर्तमान में सोनीपत के मेयर राजीव जैन ने इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए 18 अगस्त 2025 को पत्र भेजा था। राजीव जैन ने पत्र में लिखा था कि शहरों में भी समाज के लोग बर्तन बनाने एवं पकाने का काम करते हैं जिनके लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं है, यह काम उन्हें सडक़ों पर करना पड़ता है। इस कारण वायु प्रदूषण तो फैलता ही है साथ में सडक़ पर भी रुकावटें खड़ी होती हैं।