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हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल पर सरकार का कड़ा एक्शन, ESMA के साथ ‘नो वर्क नो पे’ लागू

चंडीगढ़  हरियाणा में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों की दो दिन की हड़ताल को अब अनिश्चितकाल तक बढ़ाने के ऐलान पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने राज्य में आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों और अन्य लोगों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों व कर्मचारियों को बिना किसी रुकावट के अपनी ड्यूटी जारी रखनी होगी, क्योंकि हड़ताल से जनता के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा है। राज्यपाल ने धारा 4(क)(1) के तहत स्पष्ट किया है कि अगले छह महीनों तक स्वास्थ्य विभाग के सभी डॉक्टर और कर्मचारी किसी भी तरह की हड़ताल नहीं कर सकेंगे।   इधर, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन ने दो दिन की हड़ताल का ऐलान किया था और उनकी कई मांगों पर सरकार विचार कर रही है। हड़ताल के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बाधित नहीं हुईं और आम आदमी पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा। ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टरों की ड्यूटी लगी रही और बड़ी संख्या में बाहर से डॉक्टर बुलाए गए थे। नो वर्क नो पे का आदेश स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताली डॉक्टरों पर सख्ती करते हुए 'नो वर्क नो पे' का आदेश जारी किया है। हड़ताल में शामिल डॉक्टरों को इन दिनों का वेतन नहीं मिलेगा। इस फैसले पर डॉक्टर एसोसिएशन ने तीव्र विरोध जताया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजेश ख्यालिया ने बताया कि सरकार को कई बार वार्ता के लिए अनुरोध भेजा गया, लेकिन कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आया। राज्य कार्यकारिणी की बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, सभी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखेंगे। बता दें कि एसएमओ की सीधी भर्ती समेत कई मांगों को लेकर दो दिन से हड़ताल पर चल रहे डॉक्टरों ने आज बैठक की और 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया। एसोसिएशन ने बुधवार से आमरण अनशन शुरू करने की भी घोषणा की है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान नीति के तहत 75% एसएमओ पद प्रमोशन से और केवल 25% पद सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। सीधी भर्ती वाले डॉक्टर करियर में बहुत ऊंचे पदों (कई तो महानिदेशक तक) तक पहुंच जाते हैं, जबकि नौकरी में पहले से कार्यरत डॉक्टरों को पूरे करियर में मुश्किल से एक ही प्रमोशन मिलता है और वे वहीं के वहीं अटके रहते हैं। बच्ची का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका, ओपीडी में लंबी कतारें हड़ताल के कारण यमुनानगर, पानीपत, फतेहाबाद, जींद, कैथल, हिसार, झज्जर और चरखी दादरी जिलों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं और गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ा। महेंद्रगढ़ में एक छह साल की बच्ची का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका, शव को नारनौल भेजना पड़ा। पंचकूला सिविल अस्पताल में मरीज घंटों डॉक्टर का इंतजार करते रहे। हिसार में सड़क हादसे में घायल एक युवक को समय पर इलाज नहीं मिल सका।

स्वास्थ्य व्यवस्था में नई छलांग: हरियाणा सरकार ने रातों-रात खड़े किए ढाई हजार डॉक्टर

चंडीगढ़ हरियाणा में सरकारी डाक्टरों को अनिश्चितकालीन हड़ताल के पीछे प्रशासनिक कारणों से अधिक संगठनात्मक गुटबाजी और आगामी चुनाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के भीतर दी गुटों के टकराव से यह आंदोलन तेज हुआ है। एक गुट हड़ताल पर अडिग है. जबकि दूसरा मरीजों को परेशान कर आंदोलन के पक्ष में नहीं है। फिर भी आठ व नौ दिसंबर की हड़ताल के बाद बुधबार से डाक्टरों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया, जिसकी शुरुआत पंचकूला में हुई। सरकार द्वारा बातचीत के लिए बुलाने और अधिकांश मांगें मान लेने के बाद भी हड़ताल जारी रहने से प्रदेश में हजारों मरीज प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा डाक्टरों की अधिकतर मांगें पहले ही स्वीकार कर ली गई हैं और सरकार अब भी संवाद को तैयार है। मरीजों की परेशानी देख सरकार ने लगभग ढाई हजार वैकल्पिक डाक्टरों की तैनाती की है। दस दिसंबर को 2531 वैकल्पिक डाक्टर तैनात हुए और 74 डाक्टरों ने ड्यूटी ज्वाइन की। मामला पहुंचा हाई कोर्ट प्रदेश में डाक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस पर हाई कोर्ट वीरवार को सुनवाई करेगा। याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी अरविदर सेठ ने हाई कोर्ट को बताया कि सरकारी अस्पताल राज्य में मेडिकल सुविधाओं की रीढ़ है। अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के अक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है। इस निर्णय के चलते प्रदेश में मेडिकल सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई है। भते व स्पेशलिस्ट कैडर बनाने की मांग भी मानी है। माडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम की अधिसूचना पर जल्द निर्णय का संकेत दिया है। 

कुम्हार समाज को राहत, हरियाणा में बर्तन उद्योग के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी

चंडीगढ़   प्रदेश में नगर निगमों, परिषद एवं पालिकाओं में शामिल गांवों में भी कुम्हार समाज के लोगों को बर्तन बनाने पकाने के लिए निर्धारित जमीन के आबंटन पत्र देने पर सरकार विचार कर रही है। निकाय विभाग ने पिछले दिनो सभी संबंधित 87 इकाइयों में पत्र लिख कर गांवों में आंवे पंजावें या कुम्हारधाना के लिए आरक्षित भूमि की रिपोर्ट मांगी है। सरकार द्वारा अगस्त माह 2025 में प्रदेश के सभी गांवों में कुम्हार समाज के नागरिकों को बर्तन बनाने एवं पकाने के लिए जमीन के आबंटन पत्र वितरित किए गए थे तब यह आवाज उठने लगी थी कि विशेषकर नगर निगम में शामिल गांवों में भी यह सुविधा प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार एवं वर्तमान में सोनीपत के मेयर राजीव जैन ने इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए 18 अगस्त 2025 को पत्र भेजा था। राजीव जैन ने पत्र में लिखा था कि शहरों में भी समाज के लोग बर्तन बनाने एवं पकाने का काम करते हैं जिनके लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं है, यह काम उन्हें सडक़ों पर करना पड़ता है। इस कारण वायु प्रदूषण तो फैलता ही है साथ में सडक़ पर भी रुकावटें खड़ी होती हैं।

शादीशुदा हैं? अब आपको ये काम ज़रूर करना होगा, हरियाणा सरकार ने जारी किया निर्देश

हरियाणा  हरियाणा सरकार की नई फैमिली ID नीति के तहत अब हर शादीशुदा व्यक्ति के लिए Marriage Certificate बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। चाहे शादी को कितने भी साल हो गए हों, अब बिना मैरिज सर्टिफिकेट के आप अपनी फैमिली ID में “Unmarried” से “Married” स्टेटस में बदलाव नहीं कर सकते। अगर मैरिज सर्टिफिकेट बना हुआ है तो करें ये ज़रूरी काम: 1. पत्नी को अपने घर की Family ID में जोड़ें 2. गलत बिजली बिल या पुरानी जानकारी हटवाएं 3. नाम के आगे माता-पिता का नाम सही करवाएं 4. Family ID में रिश्तों (Relations) को सही करवाएं क्यों जरूरी है मैरिज सर्टिफिकेट? मैरिज सर्टिफिकेट न केवल आपकी शादी का वैध सरकारी प्रमाण होता है, बल्कि यह फैमिली ID अपडेट , सरकारी योजनाओं का लाभ , और कानूनी दस्तावेजों में पहचान प्रमाण के लिए भी आवश्यक है। हरियाणा सरकार की विभिन्न सरकारी योजनाओं (₹71,000 तक) का लाभ लेने के लिए भी यह दस्तावेज़ जरूरी है। Marriage Certificate बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेज़: 1. दूल्हा और दुल्हन के Aadhaar Card नंबर 2. दूल्हा और दुल्हन की 10वीं की मार्कशीट (उम्र प्रमाण के लिए) 3. दोनों की अलग-अलग पासपोर्ट साइज फोटो 4. कपल फोटो (साथ में खिंचवाई गई) 5. दो फोटो माला पहनाते या मांग भरते हुए 6. शादी का कार्ड (यदि उपलब्ध हो)   आवेदन कहां करें? मैरिज सर्टिफिकेट के लिए आवेदन हरियाणा सरकार के Saral Portal ([https://saralharyana.gov.in](https://saralharyana.gov.in)) पर ऑनलाइन किया जा सकता है।इसके अलावा, आप अपने नज़दीकी CSC सेंटर (Common Service Center) या SDM ऑफिस जाकर भी आवेदन कर सकते हैं।  

राहत भरी खबर! हरियाणा के लाखों छात्रों के स्कूलों की मान्यता अब अगले साल तक मान्य

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य के 1032 अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों को शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए मान्यता का एक साल का विस्तार प्रदान कर दिया है। इस निर्णय से लगभग 3 लाख विद्यार्थियों को राहत मिली है, जिनकी बोर्ड परीक्षाएं मान्यता न मिलने की स्थिति में प्रभावित हो सकती थीं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से कई बार मुलाकात के बाद निजी स्कूल संचालकों की यह मांग पूरी की गई। इन स्कूलों में अधूरी सुविधाओं और निर्धारित मानकों की अनुपालना न होने के कारण शिक्षा विभाग ने पूर्व में मान्यता रोक दी थी। विभाग का कहना है कि आगामी सत्र तक सभी स्कूलों को निर्धारित मानक पूरे करने होंगे, अन्यथा नए प्रवेश बंद कर दिए जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार, जिन स्कूलों को विस्तार दिया गया है, वे 30 अप्रैल 2003 से पहले स्थापित हुए संस्थान हैं या फिर 30 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2007 के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी से मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। सभी स्कूलों को इस विस्तार की शर्तों को स्वीकार करते हुए एक शपथपत्र (एफिडेविट) जमा कराना होगा। प्रदेश में 2003 से अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों को हर वर्ष एक-एक वर्ष का विस्तार मिलता आ रहा है। उस समय कुल 3200 स्कूल थे, जिनमें से 2106 संस्थान अब स्थायी मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। शेष 1032 स्कूल अभी भी भूमि और अधोसंरचना संबंधी कमी के कारण मानक पूरे नहीं कर पाए हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी राहत अंतिम मानी जाए और आगामी शिक्षण सत्र तक सभी संबंधित संस्थानों को आवश्यक सुधार पूरे करने होंगे।

बुढ़ापा पेंशन बढ़ी: CM सैनी ने हरियाणा सरकार की सालगिरह पर बुजुर्गों को दिया खास तोहफा

चंडीगढ़ हरियाणा में नायब सैनी सरकार का आज यानी 17 अक्टूबर को एक साल पूरा हो रहा है। इस दौरान सीएम सैनी ने सरकार की सालगिरह पर बुजुर्गों को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने बुढ़ापा पेंशन के 3000 से  बढ़ाकर 3200 रुपये की वृद्धि की है। ये घोषणा 1 नबंवर से लागू होगी। जानकारी के अनुसार हरियाणा में नायब सैनी सरकार 1 साल पूरे हो गए हैं। इसको लेकर आज पंचकूला में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुजुर्गों के लिए बड़ी की है। उन्होंने बुढ़ापा पेंशन 3000 से बढ़ाकर 3200 रुपये की।  1 नवंबर से नई बुढ़ापा पेंशन लागू होगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में सरकारी नौकरी व बुढ़ापा पेंशन दो सबसे बड़े मुद्दे हैं। इसके अलावा सैनी ने कहा कि कल यानी शनिवार को छुट्टी के दिन सभी तहसीलें खुली रहेंगी। साथ में कार्यक्रम में हरियाणा सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में हरियाणा विकास की ‘नॉनस्टॉप रफ्तार’ के साथ आगे बढ़ रहा है। अपने पहले ही साल में हरियाणा सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले जनता से किए 217 में से 46 संकल्प पूरे कर लिए हैं। पिछले साल भी 250 रुपए बढ़ाई गई थी पेंशन हरियाणा में अब वृद्धावस्था पेंशन ₹3200 प्रति माह हो गई है, जो कि 1 नवंबर 2025 से होगी। इस वृद्धि का लाभ राज्य के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा। इससे पहले, जनवरी 2024 में पेंशन को ₹2750 से बढ़ाकर ₹3000 किया गया था। अब 200 रुपए और बढ़ाए गए है।

हरियाणा में 1,200 सांख्यिकीय कर्मियों को लेकर सरकार की योजना, 18 लाख रुपए होंगे खर्च

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य में डेटा संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्टिंग क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 1,200 सांख्यिकीय सहायकों और अधिकारियों के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम को मंज़ूरी दी है।  यह निर्णय  मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई “सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण हेतु सहयोग” (एस.एस.एस.) उप-योजना की राज्य कार्यान्वयन समिति की बैठक में लिया गया।  इस प्रशिक्षण पहल का उद्देश्य एक  सशक्त और समन्वित सांख्यिकीय तंत्र का निर्माण करना है, ताकि नीतिगत निर्णय सटीक और समयबद्ध डेटा पर आधारित हों। प्रदेश के हर जिले से लगभग 50 प्रतिभागियों को सांख्यिकीय तकनीकों, डिजिटल डेटा प्रबंधन और विश्लेषण पद्धतियों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर लगभग 18 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें प्रशिक्षण मॉड्यूल, लॉजिस्टिक व्यवस्था और विशेषज्ञ मानदेय शामिल हैं।  मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि राज्य के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने  के लिए निरंतर क्षमता निर्माण और अंतर-विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है।  वित्त विभाग के विशेष सचिव डॉ. जयेंद्र सिंह छिल्लर ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण सर्वेक्षण और अध्ययन किए जाएंगे। इनमें ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों से वित्तीय आँकड़ों का संकलन, ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के लिए राज्य-विशिष्ट उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सी.पी.आई.) का संकलन, चारे की फसलों की लागत का आकलन तथा पशुधन उत्पादों के थोक मूल्य आँकड़ों का संकलन शामिल है।  राज्य सरकार शोध की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों का भी सहयोग ले रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना चौधरी के साथ शुरुआती विचार-विमर्श भी किया जा चुका है।  आर्थिक एवं सांख्यिकीय कार्य विभाग (डी.ई.एस.ए.) इस योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। राज्य सरकार ने केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के साथ कुल 5.09 करोड़ रुपये की अनुदान राशि के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।  पहली किस्त के रूप में 55.73 लाख  रुपये की राशि से राज्य की सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली को आधुनिक बनाने हेतु कंप्यूटर, प्रिंटर और टैबलेट की खरीद की गई है। दूसरी किस्त के रूप में 13.99 लाख रुपये की राशि नवंबर 2024 में जारी की गई, जिससे डिजिटल अवसंरचना को और सुदृढ़ किया गया है।  मुख्य सचिव ने कहा कि इन प्रयासों से प्रदेश में एक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल सांख्यिकीय अवसंरचना के निर्माण में मदद मिलेगी। एस.एस.एस. उप-योजना के अंतर्गत किए जा रहे इन उपायों से विभागों को विश्वसनीय और अद्यतन आँकड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे नीतिगत निर्णयों की गुणवत्ता और जनसेवा की प्रभावशीलता में वृद्धि होगी।  बैठक में आर्थिक एवं सांख्यिकीय कार्य विभाग के निदेशक श्री मनोज कुमार गोयल, अतिरिक्त निदेशक श्री आर. के. मोर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

11 नए जिलों की लिस्ट तैयार, हरियाणा सरकार के पास पहुंचा अहम प्रस्ताव

हरियाणा  हरियाणा में 11 नए जिले बनाने के प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचे हैं। इनमें करनाल का असंध, अंबाला का नारायणगढ़, गुरुग्राम के मानेसर और पटौदी, कैथल का पिहोवा, हिसार के हांसी और बरवाला, जींद का सफीदों, सोनीपत का गोहाना और सिरसा का डबवाली शामिल हैं। इसके साथ ही 14 नए उपमंडल, चार तहसील और 27 उप तहसील बनाने के प्रस्ताव भी मंत्रियों की उप समिति को मिले हैं। डबवाली और हांसी को पहले ही पुलिस जिला घोषित किया जा चुका है। चंडीगढ़ के सिविल सचिवालय में मंगलवार को हुई पुनर्गठन उप-समिति की पांचवीं बैठक में विकास एवं पंचायत और खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि सरकार प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि अब तक समिति को कुल 73 प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद थे। बैठक में उपमंडल, तहसील और उप तहसील बनाने के लिए अलग-अलग मानदंड तय किए गए हैं। नए जिले बनाने के लिए कम से कम 125 से 200 गांव, चार लाख से अधिक आबादी और 80 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल आवश्यक है। समिति ने कुछ गांवों को उपमंडल और तहसील में शामिल करने की सिफारिश भी सरकार को भेजी है। कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि बैठक में लिए गए निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 31 दिसंबर तक नए जिले और तहसील नहीं बनाए गए, तो जनगणना के कारण अगले डेढ़ साल तक इस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हो सकेगा। रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने भी प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव के लिए 31 दिसंबर तक की समय सीमा निर्धारित की है। यदि इस अवधि में बदलाव नहीं होता है तो अगली कार्रवाई जून 2027 के बाद ही संभव होगी।  

सरकारी बंगले में बसा विवाद, हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा सख्त सवाल

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में सरकारी आवास में अपने 2 अधिकारियों के निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने के मामले में हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के रुख में विरोधाभास पाए जाने के बाद यह जवाब मांगा गया है। मार्च 2025 में केंद्र शासित प्रदेश की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि वीरेंद्र सिंह शेरावत और नीरज कुमार नाम के 2 अधिकारी 6 माह की रियायती अवधि समाप्त होने के बाद भी सरकारी आवास में रह रहे हैं। हरियाणा सरकार ने दावा किया था कि किसी भी सरकारी आवास में इस तरह की कोई भी अवधि समाप्त होने से पहले नहीं रुकी है। अदालत ने कहा कि हरियाणा का रुख गलत प्रतीत होता है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने अतिरिक्त मुख्य सचिव एक अधिकारी से 14 अक्तूबर तक हलफनामा मांगते हुए कहा कि हरियाणा या उसके पदाधिकारियों के खिलाफ आगे बढ़ने से पहले हरियाणा को उपरोक्त विसंगति या गलत जानकारी बा स्पष्टीकरण देने का अवसर देना उचित होगा। न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन से यह भी पूछा कि हाईकोर्ट के कितने कर्मचारियों/अधिकारियों को सरकारी आवास आबंटित किया गया है और वे उसमें रह रहे हैं और कितने लोग इसका इंतजार कर रहे हैं। यह जानकारी हाईकोर्ट के कर्मचारियों को चंडीगढ़ में उचित सरकारी आवास नहीं मिलने के मुद्दे पर 2024 में शुरू की गई एक स्वप्रेरणा जनहित याचिका की पुनः सुनवाई दौरान मांगी गई थी।   इस वर्ष मार्च में न्यायालय ने कहा था कि जब चंडीगढ़ में न्यायिक अधिकारियों के लिए 45 मकान विशेष रूप से निर्धारित हैं तो फिर हाईकोर्ट के विशेष नियंत्रण में एक समान पूल न्यायालयों के कर्मचारियों को आबंटन के लिए क्यों नहीं उपलब्ध कराया जाए ?  

‘चिराग’ योजना के तहत हरियाणा में EWS बच्चों के लिए फंड जारी, स्कूलों को सीधे मिलेगा भुगतान

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के लिए 1 करोड़ 24 लाख 87 हजार 200 रुपये जारी किए हैं। यह राशि मुख्यमंत्री हरियाणा समान शिक्षा राहत, सहायता व अनुदान (चिराग) योजना के अंतर्गत दी जा रही है। इस धनराशि से निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे ईडब्ल्यूएस छात्रों की अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक की पूर्ण फीस की प्रतिपूर्ति की जाएगी। शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह भुगतान जिलेवार किया जाएगा। सबसे अधिक राशि सिरसा जिले को 23 लाख 62 हजार 800 रुपये मिलेगी, जबकि हिसार को 18 लाख 74 हजार 400 और भिवानी को 17 लाख 55 हजार रुपये मिलेंगे। इसके अलावा फरीदाबाद को 7 लाख 12 हजार 800 और जींद को 17 लाख 68 हजार 800 रुपये का भुगातन होगा। करनाल को 5 लाख 28 हजार, नूंह को 16 लाख 23 हजार 600, सोनीपत को 9 लाख 37 हजार, कुरुक्षेत्र को 3 लाख 16 हजार 800, पानीपत को 5 लाख 1 हजार 600, अंबाला और रेवाड़ी को 52-52 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस प्रतिपूर्ति का इंतजार कर रहे थे। सरकार की ओर से भुगतान में देरी के कारण उन्हें वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। कई स्कूल संचालकों ने तो हाल ही में सरकार को अल्टीमेटम तक दे डाला था कि यदि शीघ्र राशि जारी नहीं हुई तो वे नए शैक्षणिक सत्र में ईडब्ल्यूएस छात्रों का दाखिला रोकने पर मजबूर होंगे। शिक्षा विभाग ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यय स्वीकृत बजट के भीतर ही किया जाएगा और नियमों के अनुरूप खर्च होना चाहिए। यह राशि ‘2202-जनरल एजुकेशन-02 सेकेंडरी एजुकेशन-110 असिस्टेंस टू नॉन-गवर्नमेंट सेकेंडरी स्कूल्स (94) चीफ मिनिस्टर पॉलिसी फॉर इक्वल एजुकेशन रिलीफ, 34 अदर चार्जेज’ हेड से देय होगी। इस निर्णय से राज्य के हजारों ईडब्ल्यूएस छात्रों और निजी स्कूलों को बड़ी राहत मिलेगी। शिक्षा विभाग के निदेशक जितेंद्र कुमार ने कहा है कि विभाग सुनिश्चित करेगा कि राशि निर्धारित समय में ही स्कूलों तक पहुंचे और छात्र निर्बाध शिक्षा प्राप्त कर सकें। निजी स्कूल संचालक अब उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में सरकार समय पर प्रतिपूर्ति की राशि जारी करेगी, ताकि गरीब बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े और स्कूलों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।