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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: 60+ आयु वालों को मुफ्त यात्रा, सरल पोर्टल पर 6 जून तक पंजीकरण

सोनीपत  हरियाणा सरकार द्वारा बुजुर्गों को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के निशुल्क दर्शन करवाने के लिए सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत एक स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। आठ जून को कुरुक्षेत्र से रवाना होने वाली इस स्पेशल ट्रेन को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। 6 जून तक सरल पोर्टल पर करें पंजीकरण जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी राकेश गौतम ने बताया कि योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र वृद्धजन लाभार्थी 6 जून तक सरल पोर्टल (www.saraharyana.gov.in) पर अपना ऑनलाइन पंजीकरण करवा सकते हैं। कौन कर सकता है अप्लाई और कैसे होगा चयन? यात्रा के लिए लाभार्थी की उम्र 60 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आवेदक हरियाणा का मूल निवासी होना चाहिए। सभी चयनित लाभार्थियों को यात्रा के दौरान अपना मेडिकल सर्टिफिकेट साथ लाना होगा। इस यात्रा के लिए सीटें सीमित हैं और लाभार्थियों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। इसलिए इच्छुक बुजुर्ग जल्द अपना पंजीकरण कराएं। अधिक जानकारी के लिए लघु सचिवालय की तीसरी मंजिल पर स्थित जिला सूचना एवं जन संपर्क कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

पूर्व विधायक ईश्वर सिंह पलाका बने सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन, हरियाणा सरकार का फैसला

चंडीगढ़. हरियाणा में बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्य बनाने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। सबसे पहले नियुक्ति हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी चयन आयोग में हुई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन करते हुए चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति कर दी है। सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा अंत्योदय (सेवा) विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पूर्व विधायक ईश्वर सिंह पलाका को आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। सरकार द्वारा जारी आदेशों में भारत भूषण टाक को वाइस-चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा आयोग में मोहित वाल्मीकि, जितेंद्र वाल्मीकि, रेखा रानी, संजीव घरू और चंदर प्रकाश बोस्ती को सदस्य नियुक्त किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक यह आयोग वर्ष 2017 में गठित हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के तहत कार्य करेगा। सरकार ने कहा है कि नियुक्त सदस्यों की सेवा शर्तें और अन्य नियम अलग से जारी किए जाएंगे। यह नियुक्तियां सामाजिक न्याय एवं सफाई कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से की गई हैं। आदेश 27 मई 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। हरियाणा सरकार की ओर से जल्दी ही कई बोर्ड एवं निगमों के अध्यक्ष घोषित किया जा सकते हैं।

हरियाणा बोर्ड के नए चेयरमैन बने शंकर लाल धूपड़, नई शिक्षा नीति लागू करना पहली प्राथमिकता

भिवानी. वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर लाल धूपड़ को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। मंगलवार देर रात उनकी नियुक्ति और डा. पवन कुमार को रिलीव करने के आदेश जारी किए गए। जिसके बाद बुधवार को नवनियुक्त चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने स्वजन और भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड चेयरमैन का कार्यभार संभाला। कार्यभार संभालते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति को पूर्णरूपेण लागू करना मेरी प्राथमिकता होगी। इससे पूर्व उन्होंने बोर्ड की लाबी में स्थापित मां सरस्वती की पूजा की। बोर्ड अध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ का पूर्व बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार, बोर्ड अधिकारियों/कर्मचारियों, बीजेपी कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों ने फूलों के गुलदस्ते देकर स्वागत किया गया। कार्यग्रहण उपरांत धूपड़ ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा शिक्षा-परीक्षा को सुधारवादी कदमों को और अधिक गति देते हुए बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा। वे शिक्षा बोर्ड के उन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के हिमायती व पैरोकार रहे हैं, जिनसे शिक्षा जगत का बहुआयामी विकास हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा-परीक्षा में गुणात्मक सुधार, परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने तथा शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक उत्तरदायी, त्वरित, पारदर्शी व विद्यार्थियों/शिक्षकों के लिए संतुष्टिपूर्ण बनाने के लिए सत्त व सार्थक प्रयास किए जाएंगे। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को गुणवान, सुशील, ज्ञानवान, समाज व देश के प्रति समर्पित बनाया जा सकता है। शंकर लाल धूपड़ ने अपनी नियुक्ति के लिए केन्द्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया है वह उसे सार्थक सिद्ध करेंगे तथा बोर्ड सचिव व अधिकारियों के साथ मिलकर बोर्ड को उच्च मुकाम पर ले जाएंगे। शंकर लाल धूपड़ मूल रूप से जिला भिवानी के रहने वाले है जो कि पेशे से वकील है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी करने के बाद जयपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। उनकी राजनीतिक शुरूआत 1975 में हुई तथा वे लगभग 04 वर्षों तक जिला भिवानी के बीजेपी के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं।

नायब सैनी ने जताया पीएम मोदी का आभार, हरियाणा में दौड़ेगी ग्रीन एनर्जी ट्रेन

 जींद  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को देश की पहली हाइड्रोजन डेमू (DEMU) ट्रेन की सौगात मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। क्या होगा रूट यह देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन डेमू ट्रेन होगी, जिसे हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाया जाएगा। इसमें कुल 10 कोच होंगे। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली इस परियोजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विकास और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए 'मील का पत्थर': नायब सैनी मुख्यमंत्री ने इस ट्रेन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, "यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन न केवल प्रदूषण मुक्त सफर का एक आधुनिक विकल्प बनेगी, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा (Green Energy) परियोजनाओं को देखते हुए एक मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी।" हरित और आधुनिक हरियाणा का संकल्प इस ट्रेन के शुरू होने से हरियाणा देश में अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली रेल कनेक्टिविटी वाला पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और उद्योगों व रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें यह ट्रेन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करेगी। ट्रेन कुल 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेगी। नई ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से बिजली एक ही लोकोमोटिव पर निर्भर रहने के बजाय सभी डिब्बों में वितरित की जाती है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों को डीजल इंजनों का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।  इसके जरिए कम उत्सर्जन होता है और ये स्वच्छ परिवहन को दिशा मिलती हैं।  रेल मंत्रालय ने अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) से तकनीकी मंजूरी और रेल सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) द्वारा किए गए सुरक्षा परीक्षण के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी।  

हरियाणा को मिली बड़ी सौगात, जींद से सोनीपत के बीच चलेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

जींद. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को देश की पहली हाइड्रोजन डेमू (DEMU) ट्रेन की सौगात मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। यह देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन डेमू ट्रेन होगी, जिसे हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाया जाएगा। इसमें कुल 10 कोच होंगे। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली इस परियोजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विकास और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए 'मील का पत्थर': नायब सैनी मुख्यमंत्री ने इस ट्रेन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, "यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन न केवल प्रदूषण मुक्त सफर का एक आधुनिक विकल्प बनेगी, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा (Green Energy) परियोजनाओं को देखते हुए एक मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी।" हरित और आधुनिक हरियाणा का संकल्प इस ट्रेन के शुरू होने से हरियाणा देश में अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली रेल कनेक्टिविटी वाला पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और उद्योगों व रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें यह ट्रेन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करेगी। ट्रेन कुल 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेगी। नई ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से बिजली एक ही लोकोमोटिव पर निर्भर रहने के बजाय सभी डिब्बों में वितरित की जाती है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों को डीजल इंजनों का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। इसके जरिए कम उत्सर्जन होता है और ये स्वच्छ परिवहन को दिशा मिलती हैं। रेल मंत्रालय ने अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) से तकनीकी मंजूरी और रेल सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) द्वारा किए गए सुरक्षा परीक्षण के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी।

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: इस्तीफे के बाद भी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता

 चंडीगढ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पारिवारिक मजबूरियों के चलते नौकरी से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी को केवल तकनीकी आधार पर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने हरियाणा में कार्यरत एक स्टेनो टाइपिस्ट को 13 वर्ष की सेवा के अनुपात में पेंशन, डीसीआरजी (डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी) तथा अन्य रिटायरल लाभ देने के आदेश जारी किए हैं। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता पंकज मेहता ने 13 वर्षों तक बेदाग सेवा दी और उसके खिलाफ कभी कोई विभागीय कार्रवाई शुरू नहीं हुई। ऐसे में अदालत “हाइपर-टेक्निकल” यानी अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाने की बजाय व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए बाध्य है। मामले के अनुसार पंकज मेहता को सितंबर 1999 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा नियमित पद पर स्टेनो टाइपिस्ट नियुक्त किया गया था। वर्ष 2012 में गंभीर पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने एक माह का वेतन जमा करवाते हुए इस्तीफा दे दिया, जिसे तीन अक्टूबर 2012 को स्वीकार कर लिया गया। हाई कोर्ट ने खारिज किया दावा लगभग छह वर्ष बाद अगस्त 2018 में उन्होंने अनुपातिक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों की मांग करते हुए आवेदन दिया, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने पंजाब सिविल सेवा नियमों तथा हरियाणा सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2016 का हवाला देते हुए उनका दावा खारिज कर दिया। इसके बाद पंकज मेहता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि संबंधित नियम उन कर्मचारियों पर लागू होते हैं जो बर्खास्तगी या अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफा देते हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल पारिवारिक मजबूरियों के चलते नौकरी छोड़ी थी और उनका पूरा सेवा रिकार्ड निष्कलंक रहा है। ऐसे में 13 वर्ष की सेवा के बाद उन्हें ग्रेच्युटी और अनुपातिक पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। वहीं, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि संबंधित नियम केवल सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर लागू होते हैं, इस्तीफा देने वालों पर नहीं। उन्होंने कहा कि तकनीकी इस्तीफा न होने के कारण सेवा स्वतः समाप्त मानी जाएगी और पेंशन का अधिकार नहीं बनता। अदालत ने दोनों पक्षों को सुना दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने जुलाई 2021 के उस आदेश को अस्थिर और कानूनन टिकाऊ नहीं माना, जिसके तहत पंकज मेहता का दावा खारिज किया गया था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर याचिकाकर्ता को सेवा अवधि के अनुपात में पेंशन, डीसीआरजी और अन्य लाभ जारी करने के निर्देश दिए। हालांकि अदालत ने यह कहते हुए ब्याज देने से इनकार कर दिया कि याचिकाकर्ता ने इस्तीफे के लगभग छह वर्ष बाद अपने लाभों के लिए दावा किया था।  

हरियाणा गेस्ट टीचर्स को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने नियमितीकरण का दिया आदेश

चंडीगढ़  हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां “बैकडोर एंट्री” या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था। हाई कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है। कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से “स्पेयर” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं। अंततः हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरल लाभ प्रदान किए जाएं। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने बताया कि राज्य में इस समय 12,700 के करीब गेस्ट टीचर लगभग 20 साल से सेवा दे रहे है। कोर्ट के इस फैसले से उनकी वर्षों की लड़ाई सफल रही है और उनको एक टीचर के तौर पर सम्मान मिला है।  

NHM कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद आशा वर्कर यूनियन सक्रिय

 चंडीगढ़ सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए हरियाणा की हजारों आशा वर्करों ने अपनी नौकरी पक्की करने का दबाव बढ़ा दिया है। राज्य में 21 साल से आशा वर्कर कार्यरत हैं। इस समय करीब 20 हजार आशा वर्कर सेवाएं दे रही हैं, जिनमें से करीब 17 हजार की सेवाएं 10 साल से अधिक अवधि की हो चुकी हैं। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सुनीता, उप प्रधान रानी, सह सचिव सुदेश व अनीता और राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात कर अनुबंध आधार पर बरसों से काम कर रही आशा वर्करों को पक्का करने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों को दो दिन पहले ही हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती। लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कार्य अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का होता है। इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित किया जाना चाहिए और सभी सेवा लाभ दिए जाएं। एनएचएम केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य वित्तीय भार वहन करते हैं। हरियाणा सरकार ने हालांकि कोर्ट में दलील दी थी कि नियमित पद स्वीकृत नहीं हैं और अदालत नियमितीकरण का आदेश देकर नए पद सृजित नहीं कर सकती, मगर हाई कोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वर्षों तक लगातार सेवा लेना यह साबित करता है कि कार्य स्थायी प्रकृति का है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से हुई हो, कर्मचारी योग्य हों और वर्षों तक बिना किसी अदालत के संरक्षण के सेवा दे रहे हों, तो राज्य उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी नहीं रख सकता। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आशा वर्करों की इस मांग के प्रति सहमति जताई और मिशन महानिदेशक आरएस ढिल्लो को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। आशा वर्कर यूनियन की पदाधिकारी निदेशक से भी मिलीं। उन्हें अवगत कराया गया कि 31 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार 10 वर्ष की सेवाएं पूरी करने वाले सभी तरह के कर्मचारी-मजदूरों को पक्का किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री के भरोसे से संतुष्ट होकर आशा वर्कर यूनियन ने 28 मई को रेवाड़ी में होने वाले प्रदर्शन को स्थगित कर दिया। आशा वर्कर यूनियन की प्रमुख मांगें 1 .वर्ष 2023 की 73 दिवसीय हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय (Honorarium) का भुगतान किया जाए। 2 .जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के काटे हुए मानदेय को तुरंत बहाल/लागू किया जाए। 3 .वर्ष 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 रुपये की मानदेय बढ़ोतरी को एरियर (Arrears) सहित दिया जाए। 4 .आशा वर्कर्स को मानदेय सहित मेडिकल लीव (Medical Leave) और मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) की सुविधा मिले। 5 .सभी आशा वर्कर्स और उनके परिवारों को सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त/कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए। 6 .पारदर्शिता के लिए हर महीने सभी आशा वर्कर्स को उनके मानदेय भुगतान की स्लिप (Salary/Honorarium Slip) दी जाए। 7 .त्योहारों के अवसर पर सभी आशा वर्कर्स को त्योहार भत्ता (बोनस) प्रदान किया जाए।

हरियाणा की आशा वर्करों के लिए बड़ी खबर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परमानेंट होने की आस

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए हरियाणा की हजारों आशा वर्करों ने अपनी नौकरी पक्की करने का दबाव बढ़ा दिया है। राज्य में 21 साल से आशा वर्कर कार्यरत हैं। इस समय करीब 20 हजार आशा वर्कर सेवाएं दे रही हैं, जिनमें से करीब 17 हजार की सेवाएं 10 साल से अधिक अवधि की हो चुकी हैं। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सुनीता, उप प्रधान रानी, सह सचिव सुदेश व अनीता और राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात कर अनुबंध आधार पर बरसों से काम कर रही आशा वर्करों को पक्का करने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों को दो दिन पहले ही हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती। लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कार्य अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का होता है। इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित किया जाना चाहिए और सभी सेवा लाभ दिए जाएं। एनएचएम केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य वित्तीय भार वहन करते हैं। हरियाणा सरकार ने हालांकि कोर्ट में दलील दी थी कि नियमित पद स्वीकृत नहीं हैं और अदालत नियमितीकरण का आदेश देकर नए पद सृजित नहीं कर सकती, मगर हाई कोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वर्षों तक लगातार सेवा लेना यह साबित करता है कि कार्य स्थायी प्रकृति का है। हाई कोर्ट ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से हुई हो, कर्मचारी योग्य हों और वर्षों तक बिना किसी अदालत के संरक्षण के सेवा दे रहे हों, तो राज्य उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी नहीं रख सकता। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आशा वर्करों की इस मांग के प्रति सहमति जताई और मिशन महानिदेशक आरएस ढिल्लो को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। आशा वर्कर यूनियन की पदाधिकारी निदेशक से भी मिलीं। उन्हें अवगत कराया गया कि 31 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार 10 वर्ष की सेवाएं पूरी करने वाले सभी तरह के कर्मचारी-मजदूरों को पक्का किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री के भरोसे से संतुष्ट होकर आशा वर्कर यूनियन ने 28 मई को रेवाड़ी में होने वाले प्रदर्शन को स्थगित कर दिया। आशा वर्कर यूनियन की प्रमुख मांगें वर्ष 2023 की 73 दिवसीय हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय (Honorarium) का भुगतान किया जाए। जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के काटे हुए मानदेय को तुरंत बहाल/लागू किया जाए। वर्ष 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 रुपये की मानदेय बढ़ोतरी को एरियर (Arrears) सहित दिया जाए। आशा वर्कर्स को मानदेय सहित मेडिकल लीव (Medical Leave) और मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) की सुविधा मिले।  सभी आशा वर्कर्स और उनके परिवारों को सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त/कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए। पारदर्शिता के लिए हर महीने सभी आशा वर्कर्स को उनके मानदेय भुगतान की स्लिप (Salary/Honorarium Slip) दी जाए। त्योहारों के अवसर पर सभी आशा वर्कर्स को त्योहार भत्ता (बोनस) प्रदान किया जाए।

खाप पंचायत का बड़ा फैसला, भिवानी में अंतरजातीय विवाह को मिली हरी झंडी

भिवानी. झाझड़िया खाप पंचायत ने अंतरजातीय विवाह का निर्णय लिया है। इसके अलावा हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग करते हुए साथ ही यह भी मांग उठाई है कि कोर्ट मैरिज में माता पिता की सहमति जरूरी हो। नेहरू पार्क में हुई पंचायत की अध्यक्षता खाप के राष्ट्रीय प्रधान राय सिंह झाझड़िया की रही। पंचायत में छह अहम निर्णय लिया गए। वक्ताओं ने कहा पंचायत समाज में सार्थक बदलाव पर काम करेगी। भाईचारा मजबूत करने के लिए मुहिम चलाई जाएगी। पंचायत में हुए निर्णय के बारे में खाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष राय सिंह झाझड़िया ने कहा खाप अंतरजीतीय विवाह को मंजूरी देती है। कोर्ट मैरिज होती है तो उसमें माता पिता की सहमति जरूरी हो। हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव किया जाए। इसके अलावा विकसित भारत जीरामजी योजना का रुपया किसानों ओर मजदूरों को दिया जाए। इस योजना का रुपया गलत हाथों में जा रहा है इस पर रोक लगाई जाए। पंचायत में यह प्रस्ताव किया गया कि पेट्रोल डीजल के एक माह में चार बार रेट बढ़ाए गए हैं इनको तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। सौनाली फौगाट और शिक्षिका मनीषा मौत मामले में सीबीआई जांच की रिपोर्ट सामने लाई जाए। देरी होने से लोगों का भरोसा टूट रहा है। सीबीआई जांच जल्द लोगों के सामने नहीं लाई जाती तो लोग बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और इसके लिए प्रशाासन स्वयं जिम्मेदार होगा। पंचायत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर निर्णय लिया गया किया ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे। बरगद, नीम, पीपल, त्रिवेणी हर गांंव में लगाए जाएंगे। पंचायत में खाप के राजस्थान प्रधान रामस्वरूप तारानगर, हरियाणा प्रधान प्रीत भैरवी, उप प्रधान सतबीर बारवास, भिवानी के प्रधान बनवारीलाल, प्रताप सिंह नंबरदार, सरपंच जयवीर सिंह, ईश्वर सिंह घिकाड़ा, अमरसिंह, राजेश पहाड़ी, फौजी जयसिंह, सूबेदार रामसिंह, पटवारी रामेहर सिंह, विजय पिलानी अधिवक्ता, सरपंच सतबीर रोहिला, सुरेश कोच, सरपंच धर्मबीर, युवा प्रधान संदीप बरालू आदि मौजूद रहे।