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योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती से चयनित 491 महिला कॉन्स्टेबल, वाराणसी पुलिस लाइन से करेंगी सेवा शुरू

वाराणसी शिव की नगरी काशी की पुलिस लाइन में 491 महिला आरक्षी प्रशिक्षण ले रही हैं। योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से चयनित इन बहादुर बेटियों के कंधों पर अब कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का दायित्व होगा। वाराणसी पुलिस लाइन में  महिला कांस्टेबलों का कठोर प्रशिक्षण पूरा होने वाला है। 20 अप्रैल को पासिंग आउट परेड के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को वाराणसी आरटीसी में प्रशिक्षित 491 महिला आरक्षी और मिल जाएंगी। मिशन शक्ति अभियान के तहत ये नारी शक्ति न केवल अपराधियों के छक्के छुड़ायेंगी,  बल्कि समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाएंगी। योगी सरकार प्रशिक्षु  महिला आरक्षियों के रहने खाने के साथ ही उन्हें इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण भी दिला रही है।  योगी सरकार की निष्पक्ष भर्ती के तहत पुरुषों के साथ ही बड़ी संख्या में महिलाओं को भी पुलिस सेवा में प्रवेश मिला है। मिशन शक्ति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर केंद्रित है। मिशन शक्ति, पिंक बूथ और हेल्पलाइन नंबर 1090 जैसी सुविधाओं के साथ अब ये प्रशिक्षु महिला कांस्टेबल ट्रेनिंग पूरा करने के बाद सुरक्षा का जिम्मा उठाएंगी। इन्हें 9 माह की ट्रेनिंग में इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण दिया गया है।  पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि प्रशिक्षु महिला आरक्षियों को फिजिकल ट्रेनिंग के साथ ही पुलिसिंग के सभी गुण सिखाए गए हैं। इसमें सोशल पुलिसिंग, आधुनिक तकनीक से किये जा रहे अपराधों के रोकथाम, हथियार संचालन, सीसीटीएनएस, साइबर क्राइम, फॉरेंसिक साइंस, फॉरेंसिक  मेडिसिन, भारतीय पुलिस का इतिहास यूपी के संदर्भ में, पुलिस संगठन, अंतर विभागीय समन्वय, पुलिस कार्यप्रणाली एवं अनुशासन, अपराध शास्त्र एवं अपराध नियंत्रण, विवेचना, पुलिस अभियोजन, पुलिस रेगुलेशन, सुरक्षा, लोक व्यवस्था एवं बंदोबस्त, आपदा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, पुलिस रेडियो दूरसंचार प्रणाली, गार्ड ड्यूटी, बंदी एस्कॉर्ट, हवालात ड्यूटी को लेकर प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा  भारतीय संविधान, आरक्षी के कर्तव्य, भारतीय संविधान, मानवाधिकारों की अवधारणा एवं महत्व, लैंगिक संवेदनशीलता का मतलब और महत्व, महिला पुलिस एवं पुलिस कार्य में उनकी भूमिका, महिला पुलिस कर्मियों से व्यवहार, पुलिस कार्य में नैतिकता और जवाबदेही आदि के विषय में बताया गया। इसके अलावा आरक्षियों को श्रमदान, योगासन, खेल, वर्दी पहनने, पदवार अधिकारियों की वर्दी पहचानना और सैल्यूट के तरीके आदि के बारे में भी सिखाया जा रहा है।   वर्जन प्रशिक्षु महिला आरक्षी पुलिस लाइन के 12 मंजिला भवन व अन्य बैरकों में रह रहीं हैं। जहां बंक बेड, आरओ वाटर कूलर, कैंटीन और कूलर आदि की व्यवस्था है। पुलिस लाइन में ही बैंक के एटीएम हैं। यहां जवानों के पौष्टिक खाने के लिए मेस भी चल रही है।  डॉ. ईशान सोनी, अपर पुलिस उपायुक्त/सहायक पुलिस आयुक्त पुलिस लाइन ट्रेनिंग के दौरान महिला कांस्टेबल को सॉफ्ट स्किल, दंगा नियंत्रण, शस्त्र चलाना और कानून की बारीकियों आदि से दक्ष किया गया है। इनकी परीक्षा चल रही है। 20 अप्रैल को पासिंग आउट परेड होगी। इसके बाद सभी प्रशिक्षु आरक्षी बन कर सेवा करेंगी। मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त, वाराणसी महिला आरक्षियों की जुबानी पुलिस की वर्दी में मिशन शक्ति की सिपाही बनकर हर महिला को सुरक्षित महसूस कराएँगे। योगी जी की सरकार ने हमें अवसर दिया, अब हम समाज की सेवा और सुरक्षा में पूरा योगदान देंगे। नीतू गौतम “हम केवल पुलिस कर्मी नहीं, समाज में बदलाव की प्रतिनिधि बनना चाहती हैं। महिला आरक्षी कानून की रक्षा के साथ-साथ महिलाओं की आवाज़ बनेंगी। महिला सशक्तीकरण के संकल्प को समाज के हर तबके तक पहुंचाएंगे।  कविता यादव योगी सरकार महिला सशक्तीकरण और नौकरी का वादा पूरा कर रही है। 81000 भर्ती की घोषणा से तैयारी कर रहे युवाओं को भी मौका मिलेगा।  रोशनी देवी प्रयागराज के फूलपुर की मुंशी बुजुर्ग गांव की पहली बेटी हूँ, जो पुलिस विभाग में भर्ती हुई है। अब गांव की अन्य बेटियां भी पुलिस भर्ती प्रक्रिया के बारे में पूछतीं हैं। पारदर्शी भर्ती ने हमें पैरों पर खड़ा होने का मौका दिया है।   सोनाली

धार्मिक अपमान पर कड़ी सजा की तैयारी: पंजाब में उम्रकैद और भारी जुर्माने वाला कानून जल्द

चंडीगढ़. पंजाब कैबिनेट ने 'श्री जगतगुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार (संशोधन) विधेयक’ 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसे 13 अप्रैल को बुलाए जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों के सम्मान को सुनिश्चित करना और बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई को लागू करना है। नए संशोधन के तहत सजा के प्रावधानों को काफी सख्त किया गया है। अब ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की सजा और अधिकतम उम्रकैद (लाइफ इम्प्रिजनमेंट) का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही आर्थिक दंड को भी बढ़ाया गया है, जिसमें न्यूनतम 5 लाख रुपये और अधिकतम 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि इन मामलों की जांच को और मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए डीएसपी (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) स्तर के अधिकारी से कम रैंक का कोई भी अधिकारी जांच नहीं करेगा। साथ ही आरोपित द्वारा मानसिक अस्थिरता का हवाला देकर बचने की कोशिशों को भी सख्ती से परखा जाएगा। इसके अलावा, कानून में परिभाषाओं को स्पष्ट किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी अस्पष्टता न रहे। गांवों के विकास को लेकर फैसला इसके बाद कैबिनेट ने गांवों के विकास को लेकर भी बड़ा फैसला लिया। राज्य के 11,500 से अधिक गांवों में करीब 3 लाख स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत औसतन हर गांव में कम से कम 27 स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। इस प्रोजेक्ट में खर्च की हिस्सेदारी को भी बदला गया है। पहले जहां 70 प्रतिशत खर्च ग्राम पंचायतों द्वारा और 30 प्रतिशत सरकार द्वारा वहन किया जाता था, अब इसे उलट कर 70 प्रतिशत खर्च पंजाब सरकार और 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतें वहन करेंगी। इस योजना पर करीब 380 करोड़ रुपये राज्य सरकार और लगभग 170 करोड़ रुपये पंचायतों द्वारा खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोशनी बढ़ेगी, सुरक्षा बेहतर होगी और छोटे-मोटे अपराधों पर भी अंकुश लगेगा। खेलों के क्षेत्र में अहम निर्णय खेलों के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने अहम निर्णय लिया है। पंजाब को पहली बार एशियन हॉकी चैंपियनशिप की मेजबानी का मौका मिलेगा। इसके लिए हॉकी इंडिया के साथ करीब 11 करोड़ रुपये का एग्रीमेंट किया जाएगा, जबकि पूरे आयोजन के लिए लगभग 35.40 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जालंधर के प्रमुख हॉकी मैदानों में आयोजित किया जाएगा, जहां भारत सहित एशिया की शीर्ष टीमें भाग लेंगी। सरकार का मानना है कि इससे पंजाब की खेल विरासत को नई पहचान मिलेगी और युवाओं को हॉकी की ओर प्रेरणा मिलेगी। कुल मिलाकर, कैबिनेट के ये फैसले कानून व्यवस्था को मजबूत करने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुधारने और खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

अवैध खनन पर प्रशासन का शिकंजा: खारंग नदी हादसे के बाद वाहन मालिक पर केस दर्ज

रायपुर. बिलासपुर जिले के खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की जांच के बाद खनिज विभाग और जिला प्रशासन ने अवैध रेत उत्खनन पर सख्त रुख अपनाया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं छत्तीसगढ राज्य में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बिलासपुर जिले के खनिज अमले द्वारा खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान ग्राम गढ़वट में सरपंच, पंचगण एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि 8-9 अप्रैल की मध्य रात्रि में दो युवक नदी क्षेत्र में गए थे, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की घटना हुई। इस घटना में एक युवक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा घायल हुआ। मौके पर प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिले, बल्कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर घटना की पुष्टि हुई। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉली ग्राम गढ़वट निवासी तोषण कुमार कश्यप के नाम से जुड़ी है। इस आधार पर पुलिस थाना रतनपुर में वाहन मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 105 एवं 238(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों युवक नदी क्षेत्र में रेत उत्खनन के उद्देश्य से गए थे। हालांकि घटना स्थल पर अवैध उत्खनन के प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले, लेकिन क्षेत्र में बनाए गए कच्चे मार्ग और ट्रैक्टर के आवागमन के संकेत पाए गए। पिछले साल 47 मामले दर्ज हुए, 6.95 लाख की हुई वसूली खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2024-25 में गढ़वट और आसपास के इलाके में कुल 47 प्रकरण दर्ज कर लगभग 6.95 लाख रुपये की वसूली की गई, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक 22 प्रकरण दर्ज कर 3.19 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की जा चुकी है। पूर्व में भी गढ़वट क्षेत्र में अवैध परिवहन के मामलों में ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर प्रकरण दर्ज किए गए थे। विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर भी अवैध उत्खनन रोकने के लिए समय-समय पर निर्णय और जागरूकता प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

CM Dashboard Ranking: हमीरपुर अव्वल, बरेली दूसरे और रामपुर तीसरे स्थान पर, यूपी में विकास को मिली रफ्तार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएम योगी के सपनों को साकार करने में सीएम डैशबोर्ड अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। सीएम डैशबोर्ड से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में सीएम डैशबोर्ड की मार्च की रिपोर्ट में प्रदेशभर में हमीरपुर ने बेहरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि बरेली ने दूसरा और रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की हर माह सीएम डैशबोर्ड से की जाती है समीक्षा सीएम डैशबोर्ड द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट जारी की जाती है। डैशबोर्ड द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। सीएम डैशबोर्ड की मार्च माह की रिपोर्ट के अनुसार हमीरपुर ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं बरेली जिले ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है जबकि रामपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। टॉप फाइव जिलों में मैनपुरी और हरदोई ने बनाई जगह डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि रामपुर पिछले कई माह से मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की रिपोर्ट में टॉप टेन जिलों में अपने जगह बनाए हुए है। वहीं, हमीरपुर ने विकास एवं राजस्व कार्यों की संयुक्त रैंकिंग में 10 में से 9.55 अंक प्राप्त किए हैं। इसी तरह बरेली ने 9.54 अंक हासिल किये हैं। सीएम डैशबोर्ड रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने 10 में से 9.51 अंक प्राप्त किये हैं। इसी तरह मैनपुरी चौथे और हरदोई पांचवे पायदान पर है। वहीं टॉप टेन जिलों में शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, सोनभद्र और कौशांबी ने जगह बनाई है।

एम्स की नई खोज से कैंसर पर वार: रोशनी से एक्टिव होकर ट्यूमर नष्ट करेगी दवा

भोपाल. एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने कैंसर के इलाज के लिए नैनो-तकनीक विकसित की है, जो शरीर के बाकी हिस्सों को नुकसान पहुंचाए बिना सीधे ट्यूमर पर हमला करेगी। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दवा शरीर के अंदर तब तक शांत रहती है, जब तक उस पर विशेष लाल रोशनी न डाली जाए। रोशनी पड़ते ही यह सक्रिय होकर कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देती है। एम्स भोपाल के बायोकैमिस्ट्री विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डा. सुखेस मुखर्जी के सहयोग से हुए इस शोध में एक खास नैनोकण (बेहद सूक्ष्म कण) तैयार किया गया है। यह कण खून के जरिए ट्यूमर तक पहुंच जाता है।जब डाक्टर ट्यूमर वाले हिस्से पर लाल रोशनी डालते हैं, तो यह कण सक्रिय होकर दो तरह के घातक प्रहार करता है। यह एक साथ सिंगलेट आक्सीजन और कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ता है, जो मिलकर कैंसर कोशिकाओं को खत्म करते हैं। लाल रोशनी का उपयोग इसलिए किया गया है क्योंकि यह शरीर में गहराई तक प्रवेश कर सकती है। यह नैनोकण शरीर में धीरे-धीरे खुद ही घुलकर खत्म हो जाता है, इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित भी है। कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों से मिलेगी राहत पारंपरिक कीमोथेरेपी में अक्सर शरीर के स्वस्थ सेल भी मर जाते हैं, जिससे मरीज को बाल झड़ने या अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। लेकिन इस नई तकनीक में दवा केवल वहीं असर करेगी जहां रोशनी डाली जाएगी। इससे शरीर के दूसरे अंगों पर बुरा असर पड़ने की आशंका बहुत कम हो जाएगी। परीक्षण में पाया गया है कि यह तकनीक स्तन और यकृत (लीवर) कैंसर के इलाज में बेहद असरदार है। यह शोध दुनिया के प्रतिष्ठित जर्नल डाल्टन ट्रांजैक्शंस में प्रकाशित हुआ है। इनका कहना है यह शोध कैंसर के सटीक और नियंत्रित उपचार की दिशा में एक बड़ा कदम है। आम लोगों को प्रभावी इलाज – एम्स भोपाल चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है ताकि आम लोगों को सुरक्षित और प्रभावी इलाज मिल सके। – डा. सुखेस मुखर्जी, एडिशनल प्रोफेसर, एम्स भोपाल।

संस्कृति बचाने की पहल: पांडुलिपि संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने की अपील, CM साय का संदेश

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है. उन्होंने कहा, हमारी पांडुलिपियां हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है. केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है. यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है. उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा, यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें. मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंच सकेगी. उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएं. 7 जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति जल्द छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 7 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है. जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है. प्रशिक्षकों को नोडल विभाग द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. 4191 पांडुलिपी का सर्वे ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी. वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 6 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरंभ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है.

CM अभ्युदय योजना का असर: RO/ARO परीक्षा में 10 होनहारों ने पाई सफलता, बढ़ा युवाओं का आत्मविश्वास

लखनऊ उत्तर प्रदेश में युवाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना एक बार फिर सफलता की नई कहानी लिखते हुए चर्चा में है। हाल ही में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग  द्वारा घोषित आरओ/एआरओ परीक्षा परिणाम में इस योजना से जुड़े 10 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल कर नाम रोशन किया है। इन सफल अभ्यर्थियों में 9 पुरुष और 1 महिला हैं। यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है।  उच्च गुणवत्ता की निःशुल्क कोचिंग, शांत वातावरण के साथ बेहतर खानपान की सुविधा चयनित अभ्यर्थियों में चित्रकूट के दिवाकर सिंह, महोबा के दीपेश कुमार खरे, सहारनपुर के विशेष प्रजापति और मोहित कनौजिया, महोबा के प्रदीप राजपूत, बाराबंकी के संजीत कुमार वर्मा, लखनऊ के मृत्युंजय सिंह, पीलीभीत के अविनाश कुमार, खुशबू पटेल और औरैया के धर्मेंद्र शामिल हैं। सहारनपुर निवासी विशेष प्रजापति की सफलता खास तौर पर प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 37वीं रैंक हासिल की। विशेष प्रजापति ने बताया कि उन्होंने करीब 25 महीनों तक अभ्युदय योजना के तहत तैयारी की, जहां उन्हें उच्च गुणवत्ता की निःशुल्क कोचिंग, अनुशासित और शांत वातावरण के साथ-साथ बेहतर खानपान की सुविधा भी मिली।  योगी सरकार की अभ्युदय योजना ने बढ़ाया आत्मविश्वास विशेष ने कहा कि योगी सरकार की अभ्युदय योजना ने उन्हें न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत किया, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया, जिससे वे पूरी एकाग्रता के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सके। वहीं महोबा के दीपेश कुमार खरे ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी एक नोटिफिकेशन के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास और अपनी गलतियों से सीखना बेहद जरूरी होता है। दीपेश ने बताया कि उनका चयन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप विभाग कर रहा कामः उपनिदेशक समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप विभाग पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। हर वर्ष इस योजना से जुड़ने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जो इसकी लोकप्रियता और सफलता का प्रमाण है। उनका लक्ष्य है कि प्रदेश के हर जरूरतमंद और प्रतिभाशाली छात्र तक इस योजना का लाभ पहुंचे। दरअसल, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराई जाती है। अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और नियमित कक्षाएं इस योजना को खास बनाती हैं।

शादी सीजन में ग्वालियर में विंटेज कारों का किराया बढ़ा, 11 हजार से 35 हजार तक पहुंचा

ग्वालियर शहर में शादी सीजन शुरू होते ही बारात के अंदाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले दूल्हे पारंपरिक घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर निकलते थे। अब उनकी जगह ओपन रूफ, कन्वर्टिबल और रॉयल लुक वाली विंटेज कारों ने ले ली है। आधुनिक दौर में शादी को खास और यादगार बनाने की चाहत ने इस ट्रेंड को तेजी से बढ़ावा दिया है। खासकर युवा दूल्हे अब शाही अंदाज में एंट्री करना पसंद कर रहे हैं, जिससे उनकी बारात मेहमानों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रही है। सोशल मीडिया ट्रेंड से बढ़ी मांग वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया का इस ट्रेंड को बढ़ाने में बड़ा योगदान है। आजकल प्री-वेडिंग शूट, सिनेमैटिक वीडियोग्राफी और रील्स का चलन बढ़ गया है। ऐसे में ओपन रूफ और कन्वर्टिबल कारें फोटो और वीडियो में रॉयल फील देती हैं। यही कारण है कि दूल्हे अब स्टाइलिश और क्लासिक एंट्री के लिए विंटेज कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सजावट से बनती है खास पहचान विंटेज कारों को फूलों, एलईडी लाइट्स, रिबन और थीम डेकोरेशन से सजाया जाता है, जिससे उनका लुक और भी आकर्षक हो जाता है। कई परिवार दूल्हा-दुल्हन की ग्रैंड एंट्री, जयमाला स्टेज और फोटोशूट के लिए अलग से पैकेज भी बुक कर रहे हैं। इससे शादी का पूरा माहौल शाही और भव्य नजर आता है। 11 हजार से 35 हजार तक किराया शहर के वेडिंग कारोबारियों के अनुसार, विंटेज कारों का किराया 11 हजार रुपये से शुरू होकर 35 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। किराया कार के मॉडल, ब्रांड, समय, सजावट और उपयोग के आधार पर तय होता है। ओपन रूफ और कन्वर्टिबल कारों का चार्ज सामान्य कारों की तुलना में अधिक होता है। वहीं पीक सीजन में एडवांस बुकिंग के चलते कीमतों में और बढ़ोतरी हो जाती है। शहर से बाहर अलग पैकेज अगर बारात शहर से बाहर या रिसॉर्ट वेडिंग में जानी हो, तो किराया अलग से तय किया जाता है। दूरी, समय और लोकेशन के आधार पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। ड्राइवर चार्ज, फ्यूल, नाइट स्टे और टाइम एक्सटेंशन जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल होती हैं। डेस्टिनेशन वेडिंग में भी बढ़ी मांग इस बार शादी सीजन में विंटेज कारें सिर्फ शहर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेस्टिनेशन वेडिंग और आउटडोर रिसेप्शन में भी पहली पसंद बन रही हैं। शाही एंट्री के इस ट्रेंड ने बारात के पारंपरिक अंदाज को पूरी तरह बदल दिया है।

यूपी में 1098 हेल्पलाइन बनी बच्चों की रक्षक: 2025-26 में 26 हजार मामलों का निस्तारण, हजारों बच्चे घर लौटे

लखनऊ योगी सरकार में महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। खासतौर पर गुमशुदा बच्चों की तलाश और उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर योगी सरकार का अभियान लगातार असर दिखा रहा है। शुक्रवार को महिला कल्याण निदेशालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 26 हजार से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण किया गया है। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस दिशा में लगातार गंभीरता से प्रयत्नशील है। गुमशुदा बच्चों के लिए 1098 हेल्पलाइन काफी कारगर प्रदेश में महिला कल्याण निदेशालय के मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का संचालन किया जा रहा है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एक इमरजेंसी सेवा है, जो 24×7 काम करती है। इसके माध्यम से संकट में फंसे बच्चों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यहां 18 साल से कम उम्र के गुमशुदा बच्चों-किशोरों की शिकायतें दर्ज की जाती हैं। इस संबंध में यूपी चाइल्ड हेल्पलाइन कंट्रोल रूम की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुमशुदा या खोए हुए बच्चों की कुल 28,945 शिकायतें दर्ज की गई थी। 26 हजार से ज्यादा शिकायतों का हो चुका निस्तारण कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक, जिसमें से करीब 26,239 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। जबकि 2,706 मामलों में अभी भी कार्रवाई जारी है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है। वहीं सरकार के प्रयासों का असर जमीनी स्तर पर भी दिख रहा है। बांदा जिले की रहने वाली एक महिला का 6 वर्षीय बेटा 2015 में चित्रकूट परिक्रमा के दौरान लापता हो गया था। तमाम प्रयास के बावजूद बेटे की तलाश नहीं हो पाई थी। लेकिन चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस के समन्वय से करीब 10 साल बाद उसको खोज निकाला गया और उसे उसकी मां को सौंप दिया गया था। बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता योगी सरकार में सिर्फ गुमशुदगी ही नहीं, बल्कि बाल शोषण के मामलों में भी हेल्पलाइन 1098 सक्रिय भूमिका निभा रही है। इसी तरह एटा जिले में एक बच्चे को बाल श्रम और शारीरिक उत्पीड़न से मुक्त कराकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। काउंसिलिंग और इलाज के बाद उसे उसके माता-पिता को सौप दिया गया था। इस तरह प्रदेश की योगी सरकार में बच्चों की सुरक्षा भी प्राथमिकता में शामिल है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जरिए न सिर्फ शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो रहा है, बल्कि बच्चों को नया जीवन भी मिल रहा है।

रायपुर : मधुमक्खी पालन – कम लागत में ज्यादा मुनाफे का एक बेहतरीन विकल्प

रायपुर : मधुमक्खी पालन: कम लागत में ज्यादा मुनाफे का बेहतर विकल्प राष्ट्रीय बागवानी मिशन से किसानों को मिल रहा प्रोत्साहन, बढ़ रही आय और रोजगार के अवसर रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राज्य योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जशपुर जिले में इस योजना के तहत 20 किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक संसाधनों पर अनुदान दिया जा रहा है, जिसमें मधुमक्खी पेटी (बी बॉक्स) सहित कॉलोनी के लिए 1600 रुपये, मधुमक्खी छत्ता हेतु 800 रुपये तथा मधु निष्कासन यंत्र के लिए 8000 रुपये की सहायता शामिल है। इस पहल से किसान कम लागत में अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फसल उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परागण के माध्यम से फसलों की पैदावार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरसों, आम, लीची, अमरूद, सूरजमुखी, धनिया एवं विभिन्न सब्जी फसलों में मधुमक्खियों द्वारा परागण से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इससे कृषि अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनती है। स्वरोजगार का सशक्त माध्यम मधुमक्खी पालन ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक प्रभावी साधन बनकर उभर रहा है। प्रशिक्षण लेकर कोई भी व्यक्ति इस व्यवसाय को आसानी से शुरू कर सकता है। शहद, मोम और रॉयल जेली जैसे उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग होने से आय के स्थायी स्रोत विकसित हो रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मधुमक्खियां जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मधुमक्खियों की संख्या में कमी आ रही है, जो पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में मधुमक्खी-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। कम निवेश, अधिक लाभ मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। एक मधुमक्खी बॉक्स से वर्ष में कई बार शहद उत्पादन किया जा सकता है। वैज्ञानिक तकनीकों, उचित प्रबंधन और मौसम के अनुसार देखभाल करने से किसान बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।