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राज्यसभा चुनाव में 4 सीटों पर हो सकता है चुनाव, 4 मई को होगी सियासी ताकतों की परीक्षा

भोपाल   मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। फिलहाल राज्य से तीन सीटें खाली होना तय है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि यह संख्या चार तक पहुंच सकती है। इसका पूरा दारोमदार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों पर टिका है। तीन सीटें तय, चौथी पर सस्पेंस मध्य प्रदेश से वर्तमान में दिग्विजय सिंह, सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन की राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनका कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो चुका है। लेकिन अब नजरें एल मुरुगन पर टिकी हैं, जो फिलहाल मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र में राज्य मंत्री भी हैं। यदि वे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो उनकी राज्यसभा सीट भी खाली हो जाएगी जिससे कुल सीटों की संख्या चार हो सकती है। तमिलनाडु चुनाव से जुड़ा गणित एल मुरुगन इस बार तमिलनाडु की अविनाशी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। 4 मई की तारीख इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि उसी दिन यह तय होगा कि मध्य प्रदेश में तीन सीटों पर चुनाव होगा या चार पर। यदि मुरुगन जीतते हैं, तो उन्हें विधायक पद के कारण राज्यसभा सीट छोड़नी पड़ेगी।  मुरुगन का राजनीतिक सफर एल मुरुगन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।     साल 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया और उसी दौरान वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे।     वे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।     इससे पहले वे मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में भी राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उनका रिकॉर्ड मिश्रित रहा है। वे पहले भी कई चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। अब एक बार फिर वे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा की रणनीति और संभावनाएं अगर एल मुरुगन चुनाव जीतते हैं, तो संभावना है कि भाजपा उन्हें दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में संगठन मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश से राज्यसभा की चौथी सीट खाली होगी, जिसका कार्यकाल 2030 तक है। यह भाजपा के लिए एक अतिरिक्त अवसर भी बन सकता है। राजनीतिक समीकरणों पर असर इस पूरे घटनाक्रम का असर न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्यसभा सीटों की संख्या बढ़ने या घटने से दलों के बीच संतुलन बदल सकता है। अब सबकी नजर 4 मई पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित क्या रूप लेता है।

नारी शक्ति वंदन: हौसलों की उड़ान, गांव की पहली बहू मीनाक्षी ने भरी हवाई जहाज़ की उड़ान

भोपाल  गुना जिले के बमोरी ब्लॉक की श्रीमती मीनाक्षी फराक्टे आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। राजमाता स्व-सहायता समूह की सदस्य और शिवाजी राज सीएलएफ से जुड़ी श्रीमती मीनाक्षी उन्नत आजीविका प्रोसेसिंग केंद्र की सेंटर इंचार्ज हैं। उनका यह सफर केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संघर्ष और संकल्प की जीवंत मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने हवाई जहाज़ में बैठने का अवसर मिला। यह अवसर प्राप्त करने वाली वह गांव की पहली बहू हैं। श्रीमती मीनाक्षी बताती हैं कि उनके प्रोसेसिंग केंद्र में किसान दीदियों से कच्चा माल खरीदा जाता है, फिर उसे प्रोसेस कर बाजार तक पहुंचाया जाता है। उनके साथ जुड़ी समूह की महिलाएं अलग-अलग माध्यमों से कभी घर-घर जाकर, कभी दुकानों पर, तो कभी आंगनवाड़ी और स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन कार्यक्रमों के जरिए बिक्री करती हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं थी। जब मीनाक्षी और उनकी साथी महिलाएं पहली बार दुकानों पर अपने उत्पाद बेचने गईं, तो लोगों को विश्वास ही नहीं होता था कि महिलाएं भी सफल मार्केटिंग कर सकती हैं। दुकानदार अक्सर सवाल करते—“क्या आप लोग समय पर सामान पहुंचा पाएंगी? क्या इतनी जिम्मेदारी निभा पाएंगी? एक महिला होने से उन पर संदेह भी किया जाता था। कई बार एक ही दुकान पर दो से चार बार जाना पड़ता, बार-बार समझाना पड़ता, भरोसा दिलाना पड़ता कि वे भी गुणवत्तापूर्ण सामान समय पर दे सकती हैं। हर दिन नई चुनौतियां सामने आती थीं, लेकिन मीनाक्षी और उनकी समूह की दीदियों ने कभी हार नहीं मानी। वे लगातार हर दुकान, हर घर तक पहुंचीं और अपने काम से लोगों का भरोसा जीता। आज वही मेहनत रंग लाई है। पिछले दो वर्षों में उनकी यूनिट 70 लाख रुपये की बिक्री कर चुकी है, जिसमें अकेले मीनाक्षी ने 25 से 30 लाख रुपये तक की बिक्री की है। जो आय पहले केवल 5 हजार रुपये थी, वह आज बढ़कर 25 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है। श्रीमती मीनाक्षी कहती हैं कि मार्केटिंग उतनी कठिन नहीं है, जितनी हम सोचते हैं। बस पहला कदम बढ़ाना पड़ता है। जब तक हम खुद अनुभव नहीं करेंगे, तब तक डर बना रहेगा। लेकिन एक बार शुरुआत कर दी, तो हम सब कुछ कर सकते हैं। उनकी उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने के लिए श्रीमती मीनाक्षी पहली बार फ्लाइट से यात्रा कर चुकी हैं। वे गर्व से कहती हैं कि वे अपने गांव की पहली बहू हैं, जिसने हवाई जहाज में सफर किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीमती मीनाक्षी कहती हैं कि आज उन्हें जो मंच मिला है, वह इसी समर्थन का परिणाम है। उनकी कहानी बताती है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो गांव की महिलाएं भी आसमान छू सकती हैं।  

बस्तर के दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का जाल बिछने से आवाजाही हुई सुगम

रायपुर : बस्तर में बदलाव की नई बयार, माओवाद के साये से निकलकर कोलेंग वनांचल में बदली तस्वीर बस्तर के दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का जाल बिछने से आवाजाही हुई सुगम रायपुर बस्तर का वह सुदूर वनांचल, जहाँ कभी सन्नाटा और दहशत का पहरा था, आज वहां खुशहाली की नई इबारत लिखी जा रही है। बस्तर जिले के दरभा विकासखंड का कोलेंग क्षेत्र, जो दशकों तक माओवादी गतिविधियों के कारण विकास की दौड़ में पिछड़ गया था, अब अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है। मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसता यह इलाका अब सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं से लैस होकर विकास की मुख्यधारा में मजबूती से कदम रख चुका है। कभी जो गाँव के लोग बुनियादी सुविधाओं और शासकीय योजनाओं से महरूम थे, वे अब सीधे शासन-प्रशासन के संपर्क में हैं, साथ ही लाभान्वित होकर विकास में सहभागिता निभा रहे हैं।         एक समय था जब बारिश के दिनों में कोलेंग और उसके आसपास के गाँव टापू बन जाते थे और ग्रामीणों को आवागमन के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जगदलपुर से लेकर कोलेंग, चांदामेटा, छिंदगुर, काचीरास, सरगीपाल और कान्दानार जैसे दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का जाल बिछ जाने से न केवल आवाजाही सुगम हुई है, बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आपातकालीन सेवाएं भी अब ग्रामीणों की पहुंच में हैं। कोलेंग के सरपंच श्री लालूराम नाग इस बदलाव को ऐतिहासिक मानते हुए कहते हैं कि पहले यह क्षेत्र पूरी तरह कटा हुआ था, लेकिन माओवाद की समस्या कम होने और शासन की सक्रियता से ग्रामीणों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी सुधार आया है।         सड़क और संचार सुविधाओं के इस विस्तार ने छिंदगुर जैसे गांवों को सीधे जिला मुख्यालय से जोड़ दिया है, जिसे सरपंच श्री सुकमन नाग सरकार की अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने की प्रतिबद्धता का परिणाम बताते हैं। कनेक्टिविटी बेहतर होने का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है, क्योंकि अब वे अपनी वनोपज और कृषि उत्पादों को सीधे मंडियों तक ले जा पा रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। कभी उपेक्षा का शिकार रहा यह वनांचल क्षेत्र आज अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़ते हुए विकास की रौशनी से जगमगा रहा है और खुशहाली की एक नई उम्मीद जगा रहा है।

भोपाल से मुंबई के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई उड़ान, 1 जुलाई से होगी शुरुआत

भोपाल  भोपाल के राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फिलहाल इंटरनेशनल कनेक्टविटी मिलने की दूर तक कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। समर सीजन के बाद मानसून एवं विंटर सीजन में भी एयर इंडिया एवं इंडिगो एयरलाइंस ने डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन से किसी प्रकार की स्लॉट बुकिंग नहीं की है। इससे पहले उम्मीद की जा रही थी कि इंडिगो एयरलाइंस इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट से दुबई के लिए डायरेक्ट जाने वाली उड़ान को भोपाल से कनेक्टविटी दे सकती है। इस बीच एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भोपाल के हवाई यात्रियों को राहत की खबर दी है। 1 जुलाई से एयर इंडिया एक्सप्रेस मुंबई के लिए नई उड़ान शुरू करने जा रहा है। एअर इंडिया एक्सप्रेस भोपाल से तीसरे ऑपरेटर के रूप में अपनी उड़ानें शुरू करने जा रही है। कंपनी ने पहली उड़ान के साथ अपना फ़्लाइट ऑपरेशन शुरू करने का निर्णय लिया है। पिछले सीजन में बेंगलुरु का स्लॉट भी लिया था भोपाल एयरपोर्ट पर पिछले समर शेड्यूल में भी कंपनी ने दो उड़ानों के साथ बेस स्टेशन की सहमति दी थी। स्लॉट भी ले लिए लेकिन उड़ानें प्रारंभ नहीं कीं। इस बार उड़ानों के शेड्यूल जारी कर दिए हैं। पिछले सीजन में बेंगलुरु का स्लॉट भी लिया था लेकिन उड़ान प्रारंभ नहीं की। अब कंपनी ने अपनी पहली मुंबई उड़ान एक जुलाई से शुरू करने की सहमति एयरपोर्ट अथॉरिटी को दी। कंपनी ने इसका शेड्यूल भी जारी कर दिया है। कंपनी इस रूट पर बोइंग विमान का संचालन करेगी। उड़ान सप्ताह के सभी सात दिन संचालित होगी। कंपनी ने पिछले समर शेड्यूल में दो उड़ानों के साथ भोपाल में अपना बेस स्टेशन शुरू करने की सहमति दी थी, लेकिन स्लॉट लेने के बावजूद उड़ानें प्रारंभ नहीं कीं एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार एक जुलाई से कंपनी इस रूट पर उड़ान शुरू करेगी। कंपनी ने पिछले समर शेड्यूल में दो उड़ानों के साथ भोपाल में अपना बेस स्टेशन शुरू करने की सहमति दी थी, लेकिन स्लॉट लेने के बावजूद कंपनी ने उड़ानें प्रारंभ नहीं कीं। मुंबई से भोपाल शाम 07.10 बजे पहुंचेगी, भोपाल से शाम 07.50 बजे मुंबई के लिए टेकऑफ प्रस्तावित उड़ान मुंबई से भोपाल शाम 07.10 बजे पहुंचेगी। भोपाल से शाम 07.50 बजे मुंबई के लिए टेकऑफ करेगी। एअर इंडिया एक्सप्रेस समर सीजन के बीच में ही भोपाल से बेंगलुरु तक भी उड़ान शुरू कर सकता है। पिछले सीजन में कंपनी ने बेंगलुरु का स्लॉट लिया था लेकिन उड़ान प्रारंभ नहीं की।

कोर्ट का आदेश: लिव-इन में यौन शोषण, 10 साल की सजा, शारीरिक संबंध बनाना है गंभीर अपराध

इंदौर  मध्य प्रदेश की इंदौर जिला अदालत ने लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह के झूठे वादे से जुड़े एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने वाले दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। फैसले के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि विवाह का प्रलोभन देकर संबंध बनाना एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जिसमें अपराधियों को कड़ा सबक मिलना अनिवार्य है। विवाह का झांसा देकर बनाया संबंध आरोपी ने विवाह का आश्वासन देकर पीड़िता के साथ करीब तीन माह तक शारीरिक संबंध बनाए। 25 जून 2022 तक दोनों साथ रहे। इसके बाद आरोपी जबलपुर चला गया। जब पीड़िता ने उससे संपर्क किया तो उसने बताया कि उसकी सगाई पहले से तय है और वह विवाह नहीं कर सकता। परिजनों से संपर्क करने पर भी विवाह से इंकार कर दिया गया। एफआईआर के बाद कार्रवाई धोखा मिलने के बाद पीड़िता ने आजाद नगर थाना में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। 10 अप्रैल को उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में शासन की ओर से पैरवी एजीपी जयंत दुबे ने की। क्या था पूरा मामला? यह मामला साल 2021 से शुरू हुआ था। मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली पीड़िता इंदौर में एक पार्टी के दौरान आरोपी के संपर्क में आई थी।     संपर्क और सहायता: सितंबर 2021 में पीड़िता इंदौर शिफ्ट हुई। जब आरोपी ने नौकरी की तलाश की बात कही, तो पीड़िता ने उसे अपनी जान-पहचान से एक फैक्ट्री में काम दिलवाया।     लिव-इन और वादा: मार्च 2022 में जब पीड़िता इंदौर छोड़ने वाली थी, तब आरोपी ने उसे रुकने के लिए मनाया और साथ में रहने लगा। आरोप है कि उसने शादी का वादा कर करीब तीन महीने तक पीड़िता का यौन शोषण किया।     धोखाधड़ी का खुलासा: जून 2022 में आरोपी अचानक जबलपुर चला गया। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो उसने खुलासा किया कि उसकी सगाई कहीं और हो चुकी है। कानूनी कार्रवाई और सजा पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए आजाद नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से एजीपी जयंत दुबे ने ठोस पैरवी की। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी। 10 अप्रैल को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए दोषी को जेल भेज दिया।

लाड़ली बहनों को मिलेगा 1500 रुपये का तोहफा, सीएम मोहन आज ट्रांसफर करेंगे 35वीं किस्त

आष्टा मध्यप्रदेश की बहनों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 12 अप्रैल को सीहोर जिले के आष्टा में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहना योजना की 35वीं किस्त जारी करेंगे। इस बार प्रदेश की 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के खाते में सीधे 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया जाएगा। इसमें 115 करोड़ रुपए के लोकार्पण के काम शामिल हैं। इसमें सांदीपनि विद्यालय भवन निर्माण (आष्टा), पार्वती नदी पर घाट निर्माण, जावर में नेवज नदी का पुनरुद्धार, मेहतवाड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सिद्दीगंज में उपतहसील भवन, आष्टा में राजस्व कार्यालय और आष्टा-शुजालपुर रोड पर पुल का लोकार्पण किया जाएगा।  वहीं, मुख्यमंत्री 69 करोड़ रुपए के कार्यों का भूमिपूजन भी करेंगे। इसमें स्कूल भवन निर्माण, पुलिस आवास निर्माण, इछावर में छात्रावास निर्माण, सड़कें और सामुदायिक भवन, अमृत 2.0 योजना के तहत पेयजल परियोजना शामिल हैं। आष्टा शहर में भी विकास कार्य किए जाएंगे, जिनमें आरसीसी नाला निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण, सब्जी मंडी का विकास और पांडू शिला क्षेत्र का सुंदरीकरण शामिल है।  बता दें कि लाड़ली बहना योजना में पहले महिलाओं को 1250 रुपए की राशि दी जा रही थी, जिसे बढ़ाकर अब 1500 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। इस योजना से प्रदेश की 1.25 करोड़ महिलाएं लाभ ले रही हैं। यह योजना महिलाओं के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। हर महीने मिलने वाली राशि से महिलाएं घर खर्च के साथ-साथ छोटी बचत और रोजगार के अवसर भी तलाश पा रही हैं। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में महिलाओं को रोजगार और कौशल विकास से भी जोड़ा जाएगा।  आष्टा में सुंदरीकरण भी आष्टा में पपनाश नदी से भोपाल नाका तक आरसीसी नाला निर्माण होगा। सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम भी शुरू होगा। वार्ड 14 में सब्जी मंडी विकास और वार्ड 3 में पांडू शिला के पास सौंदर्यीकरण कार्य भी शुरू होगा। 1.25 करोड़ महिलाओं को मिलेंगे 1500 रुपए इस किस्त में प्रत्येक पात्र महिला के खाते में 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपए की बढ़ोतरी के बाद यह राशि 1250 से बढ़कर 1500 रुपए हो गई थी। प्रदेश में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बताया कि लाड़ली बहना योजना के तहत अब तक महिलाओं के खातों में 52 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ट्रांसफर हो चुकी है। केवल 34वीं किस्त में करीब 1836 करोड़ रुपए दिए गए थे। 60 साल से ऊपर की महिलाओं को हटाया जाएगा इस बार एक अहम बदलाव भी होगा। अप्रैल में होने वाले नए सत्यापन के बाद जिन महिलाओं की उम्र 60 साल से अधिक हो चुकी होगी, उन्हें लाड़ली बहना योजना की सूची से हटाया जा सकता है। ऐसी महिलाओं को वृद्धावस्था पेंशन योजना (सरकारी योजना) में शामिल किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव पात्रता नियमों के अनुरूप है। आधार लिंक और ई-केवाईसी जरूरी 35वीं किस्त का लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं। बैंक खाते का आधार से लिंक होना अनिवार्य है। साथ ही डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सक्रिय होनी चाहिए और ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। जिन महिलाओं ने ये काम अभी तक नहीं किए हैं, वे जल्द से जल्द अपनी नजदीकी बैंक शाखा या सीएससी (CSC) केंद्र पर जाकर इसे पूरा करें। ऐसे चेक करें भुगतान की स्थिति किस्त आई या नहीं, यह जानना अब बेहद आसान है। लाभार्थी महिलाएं योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाएं। वहां "आवेदन एवं भुगतान की स्थिति" का विकल्प चुनें। अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें। ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन के बाद भुगतान की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। महिलाएं मजबूर नहीं, मजबूत बनी हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस योजना से प्रदेश की बहनें अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खोज रही हैं। सरकार आने वाले समय में इन महिलाओं को कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम करेगी। यह खबर क्यों जरूरी है लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश की 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं की आर्थिक जीवन रेखा बन चुकी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है। यह योजना उसी भावना का व्यावहारिक रूप है। हर महीने 1500 रुपए मिलने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिलती है। 60 साल के बाद वृद्धावस्था पेंशन में स्थानांतरण की जानकारी भी जरूरी है ताकि कोई महिला लाभ से वंचित न रहे।

इंदौर में डेढ़ महीने में 150 E बसे, रफ्तार का नया दौर शुरू होगा

इंदौर  एमपी में बस यात्रियों को जल्द ही बड़ी सुविधा उपलब्ध होगी। इंदौर में नई ई बसों का संचालन डेढ़ महीने में शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री ई सेवा योजना के तहत शहर को 150 ई-बसें मिलना है। इसमें से 40 बसें इंदौर आ भी चुकी हैं। खास बात यह है कि नई ई बसें आसपास के जिलों में भी जाएंगी। इन बसों का इंदौर के चारों ओर के बड़े शहरों के लिए रूट तैयार किया गया है। इस प्रकार प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों के बस यात्रियों की सुविधा बढ़ जाएगी। लोक परिवहन व्यवस्था चलाने वाली कंपनी एआइसीटीएसएल ई बस के संचालन के लिए दो डिपो तैयार कर रहा है, जिसे पूरा होने में समय लगेगा। इन बसों के टिकट कलेक्शन के लिए नई एजेंसी नियुक्त की जा रही है। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) की बोर्ड बैठक में इंदौर संभाग के परिवहन ढांचे का कायाकल्प करने वाले कई दूरगामी निर्णय लिए गए। बोर्ड के अध्यक्ष और मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवायपीआईएल) के एमडी मनीष सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि एआईसीटीएसएल का कार्यक्षेत्र अब केवल इंदौर शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संभाग के सभी जिलों में बस सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की मुख्य धुरी बनेगी। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के अंतर्गत इंदौर को प्रथम चरण में 150 इलेक्ट्रिक बसें प्राप्त होने जा रही हैं। इन बसों के वैज्ञानिक रख-रखाव और सुचारू संचालन के लिए अन्तरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) नायता मुंडला एवं देवास नाका पर दो हाईटेक इलेक्ट्रिक बस डिपो के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। बैठक में जानकारी दी गई कि द्वितीय चरण के लिए भी एक अतिरिक्त स्थल चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही, इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, खंडवा और मांडव जैसे प्रमुख पर्यटन व व्यावसायिक केंद्रों के लिए 26 लग्जरी इंटरसिटी ई-बसें भी शीघ्र सड़क पर उतरेंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करते हुए शहर में 500 इलेक्ट्रिक साइकिलों के संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया को स्वीकृति दी गई है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए 64 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे। यात्रियों के अनुभव को सुखद बनाने के लिए सरवटे बस स्टैंड, एआईसीटीएसएल परिसर और नायता मुंडला में स्मार्ट टॉयलेट की सुविधा भी जल्द शुरू होगी। :: सीएनजी स्टेशन से सुदृढ़ होगी आर्थिक स्थिति :: संस्था को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिटी बस डिपो में सीएनजी ईंधन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अवंतिका गैस लिमिटेड के साथ अनुबंध को मंजूरी दी गई। इससे कंपनी को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और संभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए। एमडी मनीष सिंह ने निर्देश दिए कि सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कर आमजन को त्वरित राहत पहुँचाई जाए। मौजूदा सिस्टम में जितनी बसें अनुबंधित हैं उनके टिकट कलेक्शन का काम ऑपरटेर की टीम ही करती है और कंपनी की टीम निगरानी करती है एआइसीटीएसएल के मौजूदा सिस्टम में जितनी बसें अनुबंधित हैं उनके टिकट कलेक्शन का काम ऑपरटेर की टीम ही करती है और कंपनी की टीम निगरानी करती है। नई बसों के लिए नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया भोपाल से चल रही है। भोपाल से ही ऑपरेटर नियुक्त हुए हैं। कंंपनी के कार्यकारी निदेशक अर्थ जैन के मुताबिक, ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन की एजेंसी को 1 महीने में तय करेंगे। एजेंसी तय होने के बाद ही शुभारंभ होगा। बसों का संचालन दूसरे शहरों के लिए भी होगा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए मिल रही बसों के संचालन के लिए 32 रूट तय किए हैं। इंदौर से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, भोपाल, धार, मांडव, महेश्वर के बीच भी चलाया जाएगा अधिकारियों के मुताबिक, नई ई-बसों का संचालन इंदौर के साथ दूसरे शहरों के लिए भी किया जाएगा। सर्वे के बाद रूट तय किए गए हैं। जिस रूट पर बसों की कमी है, लोगों को लोक परिवहन की जरूरत है वहां बसें चलेंगी। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इन बसों को इंदौर से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, भोपाल, धार, मांडव, महेश्वर के बीच भी चलाया जाएगा।

जबलपुर समेत 14 जिलों में 14 लाख घरों तक पहुंचेगी पीएनजी, पाइप लाइन बिछाई गई

जबलपुर  जबलपुर समेत 14 जिलों में पाइपलाइन से नेचुरल गैस की सप्लाई देने की तैयारी हो चुकी है। गेल इंडिया ने नागपुर से जबलपुर तक पीएनजी गैस की पाइपलाइन पहुंच गई है। इसकी टेस्टिंग भी हो गई है। शहर के भीतर गैस पाइप बिछाने का काम होना बाकी है जिसके बाद घर-घर गैस पाइप के जरिए पहुंचेगी। हालांकि इस काम में अभी एक साल का वक्त लगेगा। यह काम मेघा इन्फ्रास्टक्चर को मिला हुआ है। लाइन बिछने के बाद घरों में गैस पाइप के जरिए आएगी और लोगों को सिलेंडर के लिए लाइन नहीं लगानी पड़ेगा। फिलहाल इस पाइप लाइन से नागपुर के जेएसडब्ल्यू प्लांट में गैस सप्लाई शुरू हो रही है। जबलपुर के पास कोसमघाट में गैस प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। गैस सिलिंडर की किल्लत के बीच बढ़ी मांग पश्चिम एशिया में मचे रहे महासंग्राम की वजह से रसोई गैस की सप्लाई चैन गड़बड़ा गई है। लोगों को पर्याप्त मात्रा में एलपीजी नहीं मिल पा रही है। गैस एजेंसी के बाहर गैस सिलिंडर के लिए कतारें लग रही हैं। ऐसे में पीएनजी लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक होगी। मुंबई से ओडिशा के झारसुगुड़ा तक गैस की पाइपलाइन बिछाई जा रही है। ऐसा है प्रोजेक्ट राष्ट्रीय गैस ग्रिड और पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत गैस पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस परियोजना के तीन चरण में किया गया। इसमें मुंबई से नागपुर 698 किमी, नागपुर से ओडिशा के झारसुगुड़ा खंड में 692 किमी व नागपुर-जबलपुर खंड में 317 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। 7,844 करोड़ रुपये की लागत से यह काम हुआ है। 11 सौ करोड़ की लागत से जबलपुर से नागपुर के बीच 317 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। जबलपुर के अलावा सिवनी, छिंदवाड़ा सहित 14 जिलों के उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलेगा। घर-घर गैस पहुंचाने के लिए मेघा इंन्फ्रा को काम मिला है लेकिन काम बिलंब से प्रारंभ होने की वजह से इसमें समय लगेगा। सस्ती मिलेगी गैस वितरण पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा होते हुए गैस की सप्लाई होने से प्रदूषण कम होने के साथ ही मौजूदा स्थिति में गैस के दाम में 25 प्रतिशत कम हो जाएंगे। वहीं लोगों को बिजली के बिल की तरह ही गैस का बिल देना होगा। गैस की खपत के आधार पर ही बिल भुगतान करना होगा। सिलिंडर की तुलना में सस्ती     गैल इंडिया कंपनी ने कोसमघाट में गैस प्लांट बना दिया है। जेएसडब्ल्यू प्लांट नागपुर को गैस की आपूर्ति इसी पाइपलाइन से शुरू हो चुकी है। शहरी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। घरों तक और सीएनजी पंप व उद्योगों के लिए गैस सप्लाई और पाइपलाइन डालने का काम निजी एजेंसियां करेंगी। जबलपुर में शहर के अंदर लगभग 45 किलोमीटर में पाइप लाइन बिछाई जानी है। यह सिलिंडर की तुलना में सस्ती मिलेगी। – अखिलेश जैन, स्वतंत्र निदेशक गेल इंडिया यह है स्थिति     नागपुर से जबलपुर के बीच 317 किमी का प्रोजेक्ट     एलपीजी के साथ ही सीएनजी और पीएनजी गैस की होगी सप्लाई     25 प्रतिशत तक कम दाम का दावा     जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी सहित 14 जिलों के उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा  

प्रदेश में IPS तबादला सूची तैयार, 20 जिलों के SP बदलने की हो रही है योजना

भोपाल  मध्यप्रदेश में IAS अफसरों की तबादला सूची गुरुवार देर रात जारी होने के बाद अब पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि IPS अधिकारियों की नई तबादला सूची भी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और कभी भी इसका औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। गृह विभाग की ओर से तैयार प्रस्तावित सूची में प्रदेश के करीब 20 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदले जाने की संभावना जताई जा रही है.. सूची जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, 2020 बैच के पांच आईपीएस अधिकारियों को इस तबादला सूची में बड़ा फायदा मिल सकता है। इन्हें पहली बार जिलों में एसपी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इससे पहले 2019 बैच के कई आईपीएस अधिकारियों को जिला स्तर पर पदस्थ किया जा चुका है। अब कोर्ट के आदेश से प्रमोशन पाकर आईपीएस बने अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिलों की कमान मिलने के संकेत मिल रहे हैं। भोपाल में महिला अफसर को मिल सकती है कमान राजधानी भोपाल में भी बदलाव की अटकलें तेज हैं। वर्तमान कलेक्टर विक्रम कौशलेंद्र सिंह को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है, जबकि उनकी जगह प्रियंक मिश्रा या किसी महिला आईएएस अधिकारी को कलेक्टर बनाया जा सकता है। सरकार बड़े शहरों में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के मूड में नजर आ रही है। कई कलेक्टर बुलाए जा सकते हैं भोपाल सूत्रों का कहना है कि कुछ जिलों के कलेक्टरों को मंत्रालय में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, शिवपुरी, रीवा, इंदौर, उमरिया और मैहर जैसे जिलों के कलेक्टरों को सचिवालय स्तर पर अहम दायित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं वल्लभ भवन में पदस्थ कुछ अधिकारियों को फील्ड में भेजने की तैयारी भी चल रही है। सचिव स्तर पर भी बदलाव संभव यह फेरबदल सिर्फ जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी बदलाव के संकेत हैं। वर्तमान सचिवों में से किसी एक का ट्रांसफर हो सकता है, वहीं नए सचिव की एंट्री की चर्चा है। अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर पर भी बदलाव से शासन के शीर्ष स्तर पर नई कार्यशैली देखने को मिल सकती है। पुलिस महकमे में भी हलचल, 20 SP बदलना तय आईएएस के साथ-साथ आईपीएस अधिकारियों में भी बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी है। खंडवा, बैतूल, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ समेत कई जिलों में एसपी बदले जा सकते हैं। इसके अलावा प्रमोशन के बाद भी एसपी पद पर जमे अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। परफॉर्मेंस के आधार पर होगा फैसला सूत्रों के अनुसार इस बार ट्रांसफर में परफॉर्मेंस सबसे बड़ा फैक्टर रहेगा। बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को बड़े जिलों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि कमजोर प्रदर्शन वालों को बदला जा सकता है। मजबूत प्रशासन, तेज फैसले पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्राथमिकता साफ है राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना। इसके लिए ऐसे अधिकारियों को आगे लाया जाएगा जो योजनाओं को जमीन पर तेजी से लागू कर सकें और जनता को सीधा लाभ मिले। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह बहुप्रतीक्षित ट्रांसफर लिस्ट कब जारी होती है और किन जिलों में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। इसी बीच डीआईजी पद पर प्रमोट हो चुके कई वरिष्ठ अधिकारियों की भी नई पदस्थापना तय मानी जा रही है। इनमें खंडवा, भिंड, धार, रेल और अन्य इकाइयों में तैनात अफसर शामिल हैं, जिन्हें जल्द नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं रीवा, भोपाल और इंदौर में पदस्थ कुछ अधिकारियों के भी स्थानांतरण की चर्चा है। इनके तबादलों के साथ ही संबंधित जिलों में नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि गृह विभाग स्तर पर अंतिम मंथन जारी है और सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद कभी भी इसे जारी किया जा सकता है। पूरे पुलिस महकमे की नजर अब इस संभावित तबादला सूची पर टिकी हुई है।  

योगी आदित्यनाथ का पाकिस्तान पर तीखा बयान, लखीमपुर में भूमि वितरण और विकास परियोजनाओं का लोकार्पण

लखीमपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित करते हुए कहा कि पापी पाकिस्तान और टुकड़ों में बंटने वाला है। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और टीएमसी पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे बड़ा दंश हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों ने झेला है। मुख्यमंत्री ने मियांपुर का नाम बदलकर ‘रविंद्र नगर’ करने की घोषणा की और कहा कि अब किसी क्षेत्र की पहचान गुलामी के प्रतीकों से नहीं होगी। इस अवसर पर उन्होंने तीन विधानसभा क्षेत्रों की 417 करोड़ रुपये की 213 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने बड़ी संख्या में लाभार्थियों को चेक भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लखीमपुर खीरी जनपद में लगभग 7,000 परिवारों यानी लगभग 35,000 लोगों को भौमिक अधिकार प्रदान किए गए हैं। पलिया के बाद अब मोहम्मदी में भी 1,000 परिवारों को यह अधिकार उपलब्ध कराया जा रहा है। यह योजना बांग्लादेश से 1947 और 1971 में आए परिवारों को उनका अधिकार देने की है। पापी पाकिस्तान ने अपने कर्मों से भारत का विभाजन कराया, फिर पाकिस्तान के भी टुकड़े हुए। इंतजार करिए, अभी यह और टुकड़ों में बंटने वाला है। लेकिन पाकिस्तान के पापों की सजा वहां रह रहे हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को मिली, क्योंकि उनके यहां किसी अन्य धर्म के लिए कोई जगह नहीं है। कांग्रेस ने अधिकार नहीं दिया उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने इन लोगों को ठुकराया और उनकी जमीन व पैतृक संपत्ति पर कब्जा किया। लेकिन, त्रासदी के बाद यहां आने वालों को कांग्रेस ने भी अधिकार नहीं दिया। उनके वोट तो लिए, लेकिन मालिकाना हक कभी नहीं दिया। बल्कि, उनकी पहचान छिपाने के लिए गांव का नाम मियांपुर रख दिया गया, जबकि वहां एक भी मियां नहीं है। अब मियांपुर नहीं, रविंद्र नगर होगा नाम मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आपकी पहचान मियांपुर नहीं, बल्कि राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रविंद्रनाथ ठाकुर के नाम पर ‘रविंद्र नगर’ के रूप में होगी। बंगाल की भूमि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भूमि है। भारत को राष्ट्रगान गुरुदेव ने दिया और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हैं। यह वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने का वर्ष है। इस अवसर पर आपको उस भूमि का स्वामित्व प्राप्त हुआ है, जहां आप दशकों पहले आकर बसे थे, लेकिन अब तक अधिकार नहीं मिला था। पीएम मोदी के संकल्प के तहत आपको मिला अधिकार सीएम योगी ने कहा कि दशकों पहले आपसे किए गए अधूरे वायदों को पूरा करने के लिए वह प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आए हैं। आपके पूर्वज बांग्लादेश में रह रहे थे, लेकिन आपको मालिकाना अधिकार पीएम मोदी के “सबका साथ-सबका विकास” संकल्प के कारण भारत में मिल रहा है। बांग्लादेश में प्रताड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन भारत की ओर आशा व विश्वास से देखते हैं। भारत उनके साथ खड़ा होगा। आप लोग केवल सीमा पार कर के नहीं आए थे, अपने साथ टूटे हुए सपनों की पीड़ा लेकर आए थे। भारत ने आपको गले लगाया। आपकी जाति, संप्रदाय या मत नहीं पूछा,  आपको अपनाया और आपके साथ खड़ा रहा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संघर्ष से आज आपको यह अधिकार मिल पाया है। जाति पर समाज बांटने वाले सबसे बड़े देशद्रोही सीएम योगी ने कहा कि 1947 का विभाजन समाज के बंटवारे का परिणाम था। जो लोग जाति, मत व संप्रदाय के आधार पर समाज को बांटते हैं, वे देश और आने वाली पीढ़ियों के साथ विश्वासघात करते हैं। विभाजन और 1971 के युद्ध के दौरान हिंदू, सिख, बौद्ध व जैन समुदायों ने ऐसी त्रासदियों का सामना किया। प्रारंभ में 1,031 परिवार यहां बसे थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 5,000 से अधिक परिवारों तक पहुंच गई है, लेकिन उन्हें अब तक उनका अधिकार नहीं मिल पाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कानून पारित कराया, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट का विरोध किया। ये दल हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों को अधिकार दिए जाने के पक्ष में नहीं थे, वे सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। जिन्ना का महिमामंडन करती है सपा मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाता है, तब समाजवादी पार्टी जिन्ना का महिमामंडन करती है। ये लोग एकता के बजाय जातीय विभाजन कर समाज के ताने-बाने को कमजोर करते हैं। और यह इनके सुनियोजित दृष्टिकोण का हिस्सा है। इसी के तहत सपा, कांग्रेस व टीएमसी ने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया था। दिल्ली के शाहीन बाग में महीनों तक इस एक्ट के विरोध में धरना प्रदर्शन किया गया। लेकिन, मोदी जी हटे नहीं, डिगे नहीं। आज उसी की बदौलत हम आप सबको ये अधिकार पत्र प्रदान कर रहे हैं। अब आपको कोई वंचित या विस्थापित नहीं कर सकेगा। अब आपको बांग्लादेशी नहीं, बल्कि भारत के बांग्लाभाषी नागरिकों के रूप में पहचाना जाएगा। मजहबी कट्टरता ने कुचले हिंदुओं-सिखों के सपने सीएम योगी ने कहा कि 1947 हो या 1971, मजहबी कट्टरता ने हिंदुओं और सिखों के सपनों को चकनाचूर करने का काम किया। बांग्लादेश बना, फिर हिंदुओं का नरसंहार हुआ। न कांग्रेस बोलती है, न समाजवादी पार्टी बोलती है, न टीएमसी बोलती है। इन सबके मुंह सिले हुए हैं, क्योंकि मरने वाला हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन है। उनके लिए इन पार्टियों के मुंह नहीं खुलेंगे, क्योंकि जिस तुष्टीकरण की ये लोग राजनीति करते आए हैं, वह इनके अस्तित्व के सामने संकट न खड़ा कर दे, इसलिए इनका मुंह बंद हो जाता है। विस्थापित हिंदू-सिख परिवारों के लिए प्रतिबद्ध है सरकार सीएम योगी ने कहा कि लखीमपुर खीरी, गोला गोकर्णनाथ, धौरहरा और मोहम्मदी में बसे लगभग 1,031 परिवारों को 542 हेक्टेयर भूमि का मालिक बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर सहित चार जनपदों में बांग्लादेश से आए लगभग 65 हजार विस्थापित हिंदू व सिख रह रहे हैं, जिन्हें सरकार मालिकाना अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के इतिहास में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर भौमिक अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं। यहां गरीबों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं का लाभ दिया गया है तथा शेष पात्र लोगों को भी लाभ मिलेगा। हर घर में शौचालय, … Read more