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मध्य प्रदेश में PNG कनेक्शन का विस्तार, 55 जिलों में बिछ रहा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क

मध्यप्रदेश के 55 जिलों में तेजी से बिछ रहा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क अब तक 3.88 लाख पीएनजी कनेक्शन स्थापित सुरक्षित, सुगम और किफायती रसोई ईंधन के रूप में पीएनजी को अपनाएं नागरिक : खाद्य मंत्री राजपूत पाइपलाइन उपलब्ध होने पर 90 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य; दोहरे कनेक्शन रखने पर एलपीजी तत्काल सरेंडर करने के निर्देश भोपाल मध्यप्रदेश सरकार नागरिकों को सुरक्षित, पर्यावरण हितैषी और किफायती रसोई ईंधन उपलब्ध कराने के लिए राज्यभर में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क का तीव्र विस्तार कर रही है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि जहां पर पीएनजी नेटवर्क है वहां पर नागरिक पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर आधुनिक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन लें। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की विकासोन्मुख नीतियों के चलते प्रदेश में अब तक 3.88 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन स्थापित किए जा चुके हैं। साथ ही वाहनों के लिए 433 सीएनजी स्टेशन भी क्रियाशील किए जा चुके हैं। सुरक्षा, बचत और सुविधा का सटीक विकल्प है पीएनजी मंत्री राजपूत ने पीएनजी के फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह प्रणाली घरेलू उपभोक्ताओं के जीवन को सुगम बनाने के साथ-साथ अत्यंत सुरक्षित और किफायती है।     सर्वोच्च सुरक्षा: भूमिगत पाइपलाइनों से कम दबाव पर निरंतर गैस आपूर्ति के कारण भारी सिलेंडर रखने या बदलने का झंझट खत्म होता है। प्राकृतिक गैस हवा से हल्की होने के कारण किसी भी लीकेज की स्थिति में वातावरण में तेजी से फैल जाती है, जिससे आगजनी का खतरा न्यूनतम रहता है।      24×7 निर्बाध आपूर्ति व सटीक बिलिंग: 'नो-बुक-नो-वेट' सुविधा के तहत उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे सीधी आपूर्ति मिलती है। बिजली बिल की तर्ज पर केवल वास्तविक उपभोग (मीटरिंग) का ही भुगतान करना पड़ता है।      आर्थिक बचत: प्रति यूनिट ऊर्जा के आधार पर पीएनजी पारंपरिक एलपीजी से सस्ती है।      पर्यावरण व स्वास्थ्य सुरक्षा: स्वच्छ ईंधन होने से घरों के भीतर धुआं या प्रदूषण नहीं फैलता, जिससे इनडोर एयर क्वालिटी बेहतर बनी रहती है।  मध्यप्रदेश शहरी गैस वितरण नीति 2025 से मिली गति खाद्य मंत्री ने बताया कि 14 फरवरी 2025 को लागू की गई ‘मध्यप्रदेश शहरी गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क विकास एवं विस्तार नीति 2025’ के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश के 55 जिलों को कवर करने वाले 25 भौगोलिक क्षेत्रों में 10 सीजीडी संस्थाएं तीव्र गति से कार्य कर रही हैं। कार्य में पारदर्शिता और त्वरित निष्पादन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से समयबद्ध अनुमतियां (DM NOC/ROU Permission) जारी की जा रही हैं। भारत सरकार के निर्देश मंत्री राजपूत ने भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी अधोसंरचना (पाइपलाइन) उपलब्ध करा दी गई है, वहां संबंधित नागरिकों को नोटिस प्राप्ति के 90 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य है। निर्धारित समय में कनेक्शन न लेने पर संबंधित उपभोक्ता की एलपीजी आपूर्ति बंद करने का वैधानिक प्रावधान है। पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की अनुमति नहीं है। पीएनजी कनेक्शन स्थापित होने के 30 दिनों के भीतर उपभोक्ता को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। गैर-पीएनजी क्षेत्र में भविष्य में उपयोग हेतु उपभोक्ता ट्रांसफर वाउचर (TV) प्राप्त कर सकते हैं।  

पीएनजी समन्वय समिति के सत्यापन उपरांत ही एलपीजी सप्लाई बंद की जाए

पीएनजी समन्वय समिति के सत्यापन उपरांत ही एलपीजी सप्लाई बंद की जाए भोपाल  पीएनजी कनेक्शन के संबंध में आयुक्त खाद्य दिनेश जैन द्वारा सीजीडी(सिटी गैस डिस्ट्रीव्यूशन) संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि कॉलोनियों में पीएनजी की सप्लाई सुचारू रूप से चालू होने के बाद पीएनजी समन्वय समिति द्वारा सत्यापन उपरांत ही संबंधित उपभोक्ता की एलपीजी सप्लाई बंद की जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो। वर्तमान में भोपाल जिले में 4 सोसायटी जिसमें सागर लेक व्यू होम्स अयोध्या बायपास, सौम्या पार्क लैण्ड अवधपुरी, आकृति ग्रीन्स सलैया एवं कैनाल किंनशिप सलैया एलपीजी फ्री घोषित की गई है। इन कॉलोनियों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। थिंक गैस कंपनी के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन पूर्व से उपलब्ध हैं, उन्हें भी एलपीजी फ्री श्रेणी में रखा गया है। यह जानकारी भी दी गई है कि भारत सरकार के राजपत्र अनुसार जिन क्षेत्रों में पीएनजी की उपलब्धता है, वहां उपभोक्ताओं को नोटिस देने के 90 दिवस बाद एलपीजी सप्लाई बंद करने के प्रावधान हैं। भोपाल जिले के 88 प्रतिशत एलपीजी उपभोक्ताओं द्वारा ई-केवायसी की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा विगत 06 माह में 06 बार ई-केवायसी की अनिवार्यता के लिये समय-सीमा बढ़ाई गई है। एक अक्टूबर 2026 तक जिन उपभोक्ताओं के द्वारा ई-केवायसी नहीं कराई गई है, उन्हें गैस रिफिल बुकिंग की सुविधा गैस कंपनियों द्वारा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार अस्थाई रूप से बंद की गई है, जो संबंधित उपभोकता द्वारा ई-केवायसी कराये जाने पर तत्काल पुनः प्रारंभ हो सकेगी। उपभोक्ता गैस एजेंसी अथवा ऑयल कंपनी के ऐप के माध्यम से भी घर बैठे ई-केवायसी कर सकते है। पीएनजी सप्लाई आयुक्त खाद्य जैन ने अपील की है कि जिन उपभोक्ताओं के एलपीजी रिफिल सुविधा ई-केवायसी न कराये जाने के कारण अस्थाई रूप से बंद है, वे तत्काल ई-केवायसी करवाना सुनिश्चित करें। साथ ही एलपीजी या पीएनजी संबंधी समस्या होने पर संबंधित ऑयल कंपनी सीजीडी कंपनी की हेल्पलाईन पर संपर्क कर सकते है। हेल्पलाईन नम्बर र्थिंक गैस – इंडियन ऑयल कंपनी – 1800-3000-0046, भारत पेट्रोलियम कंपनी – 1800-2243-44/0755-2601651, हिन्दुस्थान पेट्रोलियम कंपनी – 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते है।  

PNG कनेक्शन को बढ़ावा देने चलेगा विशेष अभियान, अधिकारियों को दिए निर्देश

भोपाल भारत सरकार शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन में वृद्धि किए जाने के लिये देश भर में एक अभियान चला रही है। इसमें उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संबंधी अधोसंरचना उपलब्ध है। इस संबंध में जरूरी कार्यवाही के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार एक ही समय पर एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन रखने पर रोक लगाई गई है तथा ऐसे घरों में जहां पीएनजी सप्लाई उपलब्ध है, यदि उनके द्वारा पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया जाता है तो उन घरों को एलपीजी सप्लाई बंद करने का प्रावधान किया गया है। इस फ्रेमवर्क को समय-सीमा में लागू करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा सभी अधिकृत सीजीडी संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र (GA) में एक पीएनजी समन्वय समिति (PCC) गठित करने के निर्देश दिये गये हैं। जिला स्तर पर जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी को समिति का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। समिति नगरीय निकाय, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित कंपनियों से समन्वय कर शहर का एक्शन प्लान तैयार करेगी। पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने दी गई सुविधा सभी सीजीडी संस्थाओं द्वारा जिन कॉलोनियों में सीजीडी अधोसंरचना उपलब्ध है, उन कॉलोनी के घरों में पीएनजी कनेक्शन के लिये आवेदन करने तथा पीएनजी कनेक्शन स्थापित करने के लिए जिलावार सीजीडी संस्थाएं कार्यरत है। घरेलू एवं कमर्शियल कनेक्शन की मांग/शिकायत दर्ज करने तथा निराकरण करने के लिए आम जनता निम्नानुसार दूरभाष क्रमांक पर संपर्क कर सकते हैं – 1. अवंतिका गैस लिमिटेड- पीथमपुर (9753905737), इंदौर (9810750088), इंदौर (8085682649), उज्जैन (7091688388), ग्वालियर (8949647203) 2. गैल गैस लिमिटेड- देवास (9424098887,07272250879), रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) 3. नवेरिया गैस लिमिटेड- धार (07292-223311) 4. थिंक गैस- भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-3000-0046) 5. इण्डियन आयल कंपनी – गुना (9425991090), मऊगंज, रीवा (9424836488), अशोकनगर (9425119522), मुरैना (7223982333) 6. भारत पेट्रोलियम कंपनी- मैहर, सतना, शहडोल (9424738607), सीधी, सिंगरौली (9424341954) 7. गुजरात गैस लि. – उज्जैन, देवास, इंदौर (7342990916), रतलाम, झाबुआ (7412230292) प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।

PNG Drive 3.0 का आगाज, अब हर दिन मिलेंगे 20,000 नए गैस कनेक्शन

 नई दिल्ली अक्टूबर महीने की शुरुआत देश में कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st October) के साथ हो गई है. इनमें एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफे समेत तमाम चेंज लोगों की जेब पर असर डालने वाले हैं. इस बीच एक और योजना की शुरुआत हो रही है. जी हां, आज PNG Drive 3.0 लॉन्च हो रही है. इस योजना से जरिए सरकार का लक्ष्य हर रोज 20,000 पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन यानी PNG Connection जोड़ने का है।  LPG से PNG शिफ्टिंग को रफ्तार पीएनजी ड्राइव 3.0 योजना के जरिए लिक्विड पेट्रोलियम गैस यानी LPG से PNG पर शिफ्टिंग को रफ्तार मिलेगी. सरकार ने इस स्कीम के तहत देश में तेजी से पीएनजी कनेक्शन देने की तैयारी कर ली है और इससे 20 हजार पाइप गैस कनेक्शन हर दिन जोड़ने का टारगेट सेट किया है. सरकार का मकसद इस योजना के जरिए घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी के इस्तेमाल को कम करना है।  आवेदन के लिए पोर्टल लॉन्च की तैयारी   PNG Drive 3.0 के तहत PNGRB ने नए 80 GA (Geographical Areas) चिन्हित किए. पाइपलाइन गैस इंफ्रा के विस्तार से PNG कनेक्शन और कन्वर्जन बढ़ाने पर सरकार का जोर है. गौरतलब है कि अमेरिकी और ईरान के बीच युद्ध (US-Iran War) के चलते बढ़े मिडिल ईस्ट संकट के बाद रोजाना 10,000+ कनेक्शन/कन्वर्जन किए जा रहे हैं और अब सरकार ने इसकी रफ्तार को बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।  पाइप्ड नेचुरल गैस से जुड़ी इस योजना में लोगों की सुविधा के लिए नया पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा, जिसे लेकर तैयारी पूरी की जा रही है. सरकार की कोशिश है कि ग्राहकों को एक ही जगह से कनेक्शन के लिए आवेदन से लेकर शिकायत दर्ज करने तक की सुविधा मिले।   PNG कनेक्शन को बढ़ावा दे रही सरकार पीएनजी कनेक्शन के चलते अब लोगों को हर महीने सिलेंडर बुक कराने का झंझट नहीं झेलना पड़ता है और पाइपलाइन के जरिए घरों तक निर्बाध गैस की सप्लाई मिलती रहती है. अब सरकार भी देश में पीएनजी गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, इसके इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए ही सरकार PNG Drive 3.0 शुरू कर रही है. बता दें कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले इस अभियान को सितंबर 2026 में लॉन्च किए जाने की उम्मीद थी।   पीएनजी कनेक्शन के ये बड़े फायदे  पीएनजी कनेक्शन के कई बड़े फायदे हैं और इस लिस्ट में सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको हर महीने सिलेंडर बुक कराने की जरूरत नहीं पड़ती है. 24 घंटे गैस उपलब्ध होती है यानी अचानक सिलेंडर खत्म होने की समस्या से भी निजात मिल जाता है. रसोई में एक छोटे से कोने में इसका मीटर और पाइप सेट हो जाता है यानी रसोई में LPG Cylinder रखने का स्पेस भी खाली होता है. इसके साथ ही जितनी गैस यूज की जाती है, उतना ही बिल आता है।  

गुरुग्राम में सबसे ज्यादा बदलाव, 56 हजार लोगों ने अपनाया पाइप्ड गैस कनेक्शन

चंडीगढ़ पश्चिम एशिया में हुए युद्ध संकट के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देश के बाद हरियाणा के शहरों से करीब सवा लाख उपभोक्ताओं ने एलपीजी रसोई गैस सिलिंडर की जगह पीएनजी कनेक्शन ले लिया है। करीब 34 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके आवेदन अभी गैस पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए लंबित हैं। कनेक्शन में बदलाव करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या गुरुगाम में सबसे अधिक (56 हजार) है। गुरुग्राम के अलावा पिछले तीन माह में फरीदाबाद, रेवाड़ी, सोनीपत में भी घर के पास गैस लाइन की उपलब्धता को देखते हुए लोगों ने एलपीजी रसोई गैस सिलिंडर को सरेंडर कर पीएनजी कनेक्शन लिया है। ऐसे उपभाक्ताओं को एजेंसी की ओर से सिलिंडर जमा करने के बाद एक फार्म बाउचर के साथ दिया है। इसका उपयोग लोग तब कर सकेंगे जब उन्हें वर्तमान पते को छोड़ दूसरे जिला में नया ठिकाना बनाना होगा और वहां पर पीएनजी की पाइप लाइन घर के पास उपलब्ध नहीं होगी। तब उन्हें इसी बाउचर पर वहां की गैस एजेंसी एलपीजी सिलिंडर के साथ नया कनेक्शन जारी कर देगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने ही युद्ध संकट के चलते गैस आपूर्ति में आ रही बाधा के चलते अप्रैल माह में निर्देश जारी किए थे कि पीएनजी की उपलब्धता वाले शहर या क्षेत्र में एलपीजी सिलिंडर का उपयोग करने वाले लोग अपना पीएनजी कनेक्शन लेकर एलपीजी कनेक्शन बंद करा दें। इसके लिए उन्हें समय भी दिया गया था। लोगों को परेशानी नहीं हो इसके लिए पीएनजी कनेक्शन मिलने के बाद एलपीजी सिलिंडर एजेंसी में जमा कराने का एक माह का समय दिया था। हालांकि, होर्मुज समुद्री मार्ग खुलने कर वजह से गैस लेकर आने वाले जहाज निर्वाध रूप से आने लगे हैं लेकिन अभी भी लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए कहा जा रहा है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार पीएनजी पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनियों को एनओसी देने की प्रक्रिया भी सरल कर रखी है।  

LPG से मुक्ति की ओर भोपाल, चार इमली समेत 4 प्रमुख कॉलोनियों में PNG नेटवर्क का विस्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश में पिछले तीन महीनों से चल रही एलपीजी (घरेलू गैस सिलेंडर) की भारी किल्लत से आम जनता परेशान है। राजधानी भोपाल में भी यह संकट लगातार बना हुआ है और गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की बुकिंग को लेकर लोग चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को ही एक गैस एजेंसी पर सिलेंडर न मिलने को लेकर उपभोक्ताओं ने भारी हंगामा किया। इस बड़े संकट से निपटने के लिए अब खाद्य विभाग भोपाल को 'सिलेंडर फ्री' बनाने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत जिन इलाकों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां भविष्य में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। चार बड़ी कॉलोनियों से होगी शुरुआत फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में 'थिंक गैस' कंपनी के जरिए घरों तक सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। यह लाइन मिसरोद से शुरू होकर होशंगाबाद रोड के दोनों तरफ की कॉलोनियों को कवर कर रही है। वर्तमान में बावड़ियाकलां, सलैया, अयोध्या बायपास, अवधपुरी और साकेत नगर के अधिकांश घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब विभाग ने योजना बनाई है कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछ रही है, वहां पहले शत-प्रतिशत (100%) घरों को कनेक्शन दिया जाए और उसके बाद ही अगली कॉलोनी में काम शुरू हो। इसके लिए पहले चरण में चार बड़ी कॉलोनियों— बावड़ियाकलां की केराल केनसिप, अवधपुरी की सौम्या पार्कलैंड, अयोध्या बायपास की सागर लैक व्यू होम्स और सलैया की आकृति ग्रीन को चुना गया है। 172 कॉलोनियों के सामने से गुजर रही है लाइन अधिकारियों के मुताबिक, थिंक गैस कंपनी ने होशंगाबाद रोड के दोनों ओर समेत कुल 172 कॉलोनियों के मुख्य रास्तों पर गैस लाइन बिछा दी है। यहां रहने वाले लोग कंपनी के पास आवेदन करके अपने घरों में कनेक्शन लगवा रहे हैं और कटारा हिल्स समेत कई अन्य इलाकों से भी लोग इसके लिए तेजी से फॉर्म भर रहे हैं। विभाग अब चार-चार कॉलोनियों का समूह बनाकर फोकस कर रहा है ताकि काम जल्दी पूरा हो सके। एक तय समय सीमा के बाद इन इलाकों में एलपीजी सिलेंडरों की होम डिलीवरी हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी। मंत्री और अफसरों के बंगलों में भी बिछेगी पाइपलाइन भोपाल के दो सबसे बड़े और वीआईपी इलाके 'चार इमली' और '74 बंगला' में भी इस समय भूमिगत (अंडरग्राउंड) गैस पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आपको बता दें कि इन दोनों क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के 75 फीसदी से ज्यादा मंत्रियों, सीनियर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के सरकारी बंगले हैं। इन इलाकों के अधिकांश हिस्सों में लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है और कुछ ही दिनों में बंगलों के भीतर कनेक्शन देने की शुरुआत हो जाएगी। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराया संकट दरअसल, वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसी का असर है कि मध्य प्रदेश और भोपाल में पिछले कई महीनों से घरेलू गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। भोपाल में इस समय हर दिन 12 से 14 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कंपनियों की तरफ से सप्लाई केवल 9 से 10 हजार सिलेंडरों की ही हो पा रही है। इस किल्लत की चपेट में आम जनता के साथ-साथ कई बड़े मंत्री और अफसर भी आ गए थे, जिसके बाद वीआईपी इलाकों में भी पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाई गई है। होशंगाबाद रोड पर सबसे ज्यादा 43 हजार कनेक्शन वर्तमान में पीएनजी पाइपलाइन का सबसे बड़ा जाल होशंगाबाद रोड पर फैला हुआ है, जहां करीब 43 हजार घरों में गैस पाइपलाइन के जरिए खाना बन रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस योजना को पुराने शहर (ओल्ड सिटी) की तरफ भी ले जाया जाएगा ताकि वहां के बड़े इलाकों को कवर करके घर-घर गैस पहुंचाई जा सके। इसके अलावा घरों के साथ-साथ शहर के सभी बड़े होटलों, रेस्टोरेंटों, व्यावसायिक संस्थानों और बहुमंजिला इमारतों (मल्टीस्टोरी बिल्डिंग) को भी अनिवार्य रूप से पीएनजी लाइन से जोड़ा जाएगा। 90 दिनों में कनेक्शन लेना होगा अनिवार्य सरकार ने इस योजना को लेकर एक नई और सख्त गाइडलाइन भी जारी कर दी है। इसके नियम के मुताबिक, जिन इलाकों में गैस की अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछ जाएगी, वहां के निवासियों को 90 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई तय समय के भीतर नया कनेक्शन नहीं लेता है, तो उसका पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन सरकारी आदेश के तहत ब्लॉक या काट दिया जाएगा। PNG को लेकर केंद्र सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की गैस संकट के बीच ही भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 'अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत एक नया आदेश जारी किया था। इस नए नियम का मकसद देशभर में गैस पाइपलाइन बिछाने और उनके विस्तार के काम को रफ्तार देना है। अब पाइपलाइन के काम में जमीन मिलने या मंजूरी मिलने में होने वाली देरी खत्म हो गई है। जिससे रिहायशी इलाकों (Residential areas) तक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से पहुंच सकेगा। नए एक्ट के 4 नियम समझें 1. सोसाइटियों और RWA की मनमानी खत्म     कई बार हाउसिंग सोसाइटियों या RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के विरोध की वजह से पाइपलाइन का काम रुक जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।     अगर कोई कंपनी पाइपलाइन के लिए रास्ता मांगती है तो सोसाइटी को 3 दिन के भीतर मंजूरी देनी होगी।     अगर सोसाइटी ने मना किया या देरी की तो वहां रहने वाले सभी घरों की PNG सप्लाई पर रोक लगाई जा सकती है। 2. छोटे इलाकों को 10 दिन में मंजूरी मिलेगी     पाइपलाइन बिछाने के लिए अब सरकारी विभागों को फाइलों को लटकाने की इजाजत नहीं है।     छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन और बड़ी लाइनों के लिए 60 दिन में मंजूरी देना अनिवार्य है।     अगर विभाग तय समय में जवाब नहीं देता, तो उसे 'डीम्ड क्लियरेंस' यानी 'ऑटोमैटिक मंजूरी' मान लिया जाएगा और काम शुरू कर दिया जाएगा। 3. जमीन और मुआवजे का झंझट खत्म अगर पाइपलाइन किसी की निजी जमीन … Read more

छत्तीसगढ़ की नई नीति: ‘शहरी गैस वितरण नीति-2026’ से अब सीधे किचन तक पहुंचेगी गैस

रायपुर  स्वच्छ ऊर्जा और शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026 को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य की ऊर्जा संरचना को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस (PNG) को सीधे घरों तक पहुंचाना है। इसके लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, आपूर्ति में देरी या उपलब्धता को लेकर होने वाली अनिश्चितताओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।  रायपुर सहित राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से गैस पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे निर्बाध और सुरक्षित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी  राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन गैस वितरण प्रणाली पहले से संचालित है और इसे व्यापक रूप से प्रभावी माना गया है। इन महानगरों में रसोई गैस के पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी आई है और आपूर्ति अधिक नियमित व सुगम बनी है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय उसी दिशा में एक तार्किक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में लंदन, टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों में पाइपलाइन आधारित गैस वितरण लंबे समय से स्थापित व्यवस्था है। इन शहरों के अनुभव बताते हैं कि यह प्रणाली न केवल उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक है, बल्कि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प प्रदान करती है। निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी नीति के लागू होने से राज्य में गैस अवसंरचना के विकास के साथ निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे निर्माण, वितरण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही स्वच्छ ईंधन के उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, जो तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख राज्य के रूप में स्थापित कर सकती है। उपभोक्ता सुविधा, औद्योगिक जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन—तीनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह नीति राज्य के शहरी विकास को नई गति देने की क्षमता रखती है।

गैस संकट से राहत की उम्मीद, एचईसी कॉलोनी में पहुंचे गेल अधिकारी

रांची झारखंड की राजधानी रांची स्थित एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) परिसर में जारी एलपीजी संकट के बीच अब राहत की उम्मीद दिखाई देने लगी है. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे एचइसी कॉलोनी के हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं. इसी बीच पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन की तैयारी शुरू होने से लोगों में राहत की उम्मीद जगी है. खबर के असर से सक्रिय हुए अधिकारी एचईसी में गैस संकट को लेकर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं. “महज एक माह का बचा है गैस” शीर्षक खबर सामने आने के बाद हालात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए जाने लगे. इसके बाद गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के अधिकारी एचइसी परिसर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. पीएनजी कनेक्शन का प्रस्ताव गेल के अधिकारियों ने एचईसी आवासीय परिसर में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. इस योजना के तहत पूरे कॉलोनी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने की बात कही गई है. अधिकारियों ने एचइसी प्रबंधन से इसके लिए आवश्यक अनुमति और एनओसी की मांग की है, ताकि परियोजना पर काम शुरू किया जा सके. 11 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ एचईसी आवासीय परिसर में 11 हजार से अधिक क्वार्टर हैं, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार रहते हैं. वर्तमान में एलपीजी की कमी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यदि पीएनजी योजना लागू होती है, तो इन सभी परिवारों को नियमित और निर्बाध गैस आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें आसान हो जाएंगी. औद्योगिक इकाई को भी मिलेगा फायदा यह योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि एचइसी की औद्योगिक इकाइयों के लिए भी महत्वपूर्ण है. फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी) यूनिट में फर्नेस संचालन के लिए एलपीजी का उपयोग किया जाता है. यहां फोर्जिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं. पीएनजी कनेक्शन मिलने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारू और स्थिर हो सकेगी. प्रबंधन की तैयारी और अनुमति प्रक्रिया एचईसी प्रबंधन ने बताया है कि गेल के प्रस्ताव पर जल्द ही एनओसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जैसे ही अनुमति मिलती है, पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जा सकता है. प्रशासन का मानना है कि यह योजना न केवल घरेलू गैस संकट को दूर करेगी, बल्कि औद्योगिक उत्पादन को भी स्थिरता प्रदान करेगी. लोगों में राहत की उम्मीद लगातार गैस संकट से जूझ रहे एचईसी के लोगों के लिए यह प्रस्ताव बड़ी राहत लेकर आया है. कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यदि पीएनजी सुविधा शुरू हो जाती है, तो उन्हें एलपीजी सिलेंडर की कमी और महंगाई से छुटकारा मिल जाएगा. इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी. भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी कनेक्शन की यह पहल एचईसी के लिए एक स्थायी समाधान साबित हो सकती है. इससे न केवल वर्तमान गैस संकट समाप्त होगा, बल्कि भविष्य में भी ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेगी. यह कदम एचइसी के विकास और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

दिल्ली-एनसीआर में पाइप गैस का विस्तार, हजारों नए PNG कनेक्शन देने की तैयारी

नई दिल्ली   इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-एनसीआर में पाइप के जरिये खाना पकाने की गैस (PNG) का कनेक्शन देने का काम तेज कर दिया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी कमल किशोर चटिवाल का कहना है कि आईजीएल का उद्देश्य रसोई गैस पर दबाव कम करना और ज्यादा से ज्यादा कस्टमर को सुविधा उपलब्ध कराना है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने के बाद सरकार पीएनजी को काफी बढ़ावा दे रही है और इसे एलपीजी के एक सुविधाजनक विकल्प के रूप में पेश कर रही है। चटिवाल ने बताया कि पहले आईजीएल रोजाना 600-700 पीएनजी कनेक्शन देती थी, जिसे अब बढ़कर 2,100-2,200 प्रतिदिन कर दिया गया है। कंपनी का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 5,000 प्रतिदिन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि फास्ट-फूड श्रृंखला और पुलिस स्टेशनों को भी पीएनजी कनेक्शन देने पर ध्यान दे रही है। हाल ही में एलपीजी आपूर्ति में बाधा के कारण कई तत्काल खाने का सामान उपलब्ध कराने वाले फास्ट-फूड आउटलेट प्रभावित हुए हैं। कहां-कहां पहुंच गया कनेक्शन देश की सबसे बड़ी शहर गैस वितरक कंपनी आईजीएल अब तक दो प्रमुख फास्ट-फूड श्रृंखला की 100 से अधिक दुकानों को पीएनजी से जोड़ चुकी है और इतने ही कनेक्शन प्रक्रिया में हैं। कुल मिलाकर आईजीएल की योजना लगभग 400 आउटलेट को पीएनजी से जोड़ने की है। इसके साथ ही, दिल्ली के सभी पुलिस थानों को पीएनजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे कैंटीन में एलपीजी सिलेंडर के रिफिल की समस्या से राहत मिलेगी। कहां तक पहुंची पाइपलाइन नयी दिल्ली के कारोबारी केंद्र कनॉट प्लेस में भी अब पीएनजी नेटवर्क पर काम शुरू हो गया है। पहले अनुमति न मिलने के कारण इस क्षेत्र में पीएनजी की पहुंच नहीं थी। हालांकि, अब सरकार द्वारा नियमों में ढील दिए जाने के बाद इसपर काम शुरू हो गया है। अधिकारी ने बताया कि अब पाइपलाइन कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल में पहुंच चुकी है। 90 दिनों में 4.85 लाख कनेक्शन चटिवाल ने बताया कि कंपनी अगले 90 दिन में अपने परिचालन वाले क्षेत्र में 4.85 लाख नए कनेक्शन देने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता है, जिसे पाइप के जरिये घरों में रसोई में पहुंचाया जाता है। इसके अलावा इसकी आपूर्ति उद्योगों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों मसलन होटल और रेस्तरां को की जाती है। भारत में कितना होता है उत्पादन भारत में प्रतिदिन 9.2 करोड़ मानक घनमीटर प्राकृतिक गैस का उत्पादन होता है। शहर गैस (पीएनजी और सीएनजी मिलाकर) में इसके एक-तिहाई हिस्से की खपत की जाती है। आईजीएल के पास 28,000 किलोमीटर से अधिक लंबा पाइपलाइन नेटवर्क है। इसका शहर गैस वितरण नेटवर्क ढांचा दिल्ली के अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, रेवाड़ी, गुरुग्राम, करनाल, कैथल, फतेहपुर, अजमेर, पाली, शामली, बांदा, मुजफ्फरनगर, कानपुर और मेरठ तक फैसला हुआ है। साथ ही यह 950 से अधिक सीएनजी स्टेशन के जरिये 21 लाख से अधिक वाहनों को ईंधन उपलब्ध करा रही है।

जबलपुर समेत 14 जिलों में 14 लाख घरों तक पहुंचेगी पीएनजी, पाइप लाइन बिछाई गई

जबलपुर  जबलपुर समेत 14 जिलों में पाइपलाइन से नेचुरल गैस की सप्लाई देने की तैयारी हो चुकी है। गेल इंडिया ने नागपुर से जबलपुर तक पीएनजी गैस की पाइपलाइन पहुंच गई है। इसकी टेस्टिंग भी हो गई है। शहर के भीतर गैस पाइप बिछाने का काम होना बाकी है जिसके बाद घर-घर गैस पाइप के जरिए पहुंचेगी। हालांकि इस काम में अभी एक साल का वक्त लगेगा। यह काम मेघा इन्फ्रास्टक्चर को मिला हुआ है। लाइन बिछने के बाद घरों में गैस पाइप के जरिए आएगी और लोगों को सिलेंडर के लिए लाइन नहीं लगानी पड़ेगा। फिलहाल इस पाइप लाइन से नागपुर के जेएसडब्ल्यू प्लांट में गैस सप्लाई शुरू हो रही है। जबलपुर के पास कोसमघाट में गैस प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। गैस सिलिंडर की किल्लत के बीच बढ़ी मांग पश्चिम एशिया में मचे रहे महासंग्राम की वजह से रसोई गैस की सप्लाई चैन गड़बड़ा गई है। लोगों को पर्याप्त मात्रा में एलपीजी नहीं मिल पा रही है। गैस एजेंसी के बाहर गैस सिलिंडर के लिए कतारें लग रही हैं। ऐसे में पीएनजी लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक होगी। मुंबई से ओडिशा के झारसुगुड़ा तक गैस की पाइपलाइन बिछाई जा रही है। ऐसा है प्रोजेक्ट राष्ट्रीय गैस ग्रिड और पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत गैस पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस परियोजना के तीन चरण में किया गया। इसमें मुंबई से नागपुर 698 किमी, नागपुर से ओडिशा के झारसुगुड़ा खंड में 692 किमी व नागपुर-जबलपुर खंड में 317 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। 7,844 करोड़ रुपये की लागत से यह काम हुआ है। 11 सौ करोड़ की लागत से जबलपुर से नागपुर के बीच 317 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। जबलपुर के अलावा सिवनी, छिंदवाड़ा सहित 14 जिलों के उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलेगा। घर-घर गैस पहुंचाने के लिए मेघा इंन्फ्रा को काम मिला है लेकिन काम बिलंब से प्रारंभ होने की वजह से इसमें समय लगेगा। सस्ती मिलेगी गैस वितरण पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा होते हुए गैस की सप्लाई होने से प्रदूषण कम होने के साथ ही मौजूदा स्थिति में गैस के दाम में 25 प्रतिशत कम हो जाएंगे। वहीं लोगों को बिजली के बिल की तरह ही गैस का बिल देना होगा। गैस की खपत के आधार पर ही बिल भुगतान करना होगा। सिलिंडर की तुलना में सस्ती     गैल इंडिया कंपनी ने कोसमघाट में गैस प्लांट बना दिया है। जेएसडब्ल्यू प्लांट नागपुर को गैस की आपूर्ति इसी पाइपलाइन से शुरू हो चुकी है। शहरी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। घरों तक और सीएनजी पंप व उद्योगों के लिए गैस सप्लाई और पाइपलाइन डालने का काम निजी एजेंसियां करेंगी। जबलपुर में शहर के अंदर लगभग 45 किलोमीटर में पाइप लाइन बिछाई जानी है। यह सिलिंडर की तुलना में सस्ती मिलेगी। – अखिलेश जैन, स्वतंत्र निदेशक गेल इंडिया यह है स्थिति     नागपुर से जबलपुर के बीच 317 किमी का प्रोजेक्ट     एलपीजी के साथ ही सीएनजी और पीएनजी गैस की होगी सप्लाई     25 प्रतिशत तक कम दाम का दावा     जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी सहित 14 जिलों के उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा