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सरकार का बड़ा कदम: कर्मचारियों के DA और बकाए मुद्दे पर सब-कमेटी का गठन

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े लंबित वित्तीय मुद्दों के समाधान की दिशा में अहम कदम उठाया है। सरकार ने डीए/डीआर (महंगाई भत्ता/महंगाई राहत) और वेतन आयोग के बकाए की समीक्षा के लिए एक कैबिनेट सब कमेटी के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले से लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस कैबिनेट सब कमेटी की अध्यक्षता वित्त मंत्री हरपाल चीमा करेंगे। कमेटी में कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और डा बलजीत कौर को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। सरकार ने इस कमेटी को व्यापक अधिकार दिए हैं ताकि कर्मचारियों से जुड़े वेतन और भत्तों के जटिल मामलों का गहन अध्ययन किया जा सके। कमेटी का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2011 के वेतन संशोधनों, सातवें केंद्रीय वेतन आयोग के आधार पर लागू वेतनमान और हाल ही में न्यायालय द्वारा दिए गए डा सौरभ शर्मा केस के फैसलों के मद्देनजर स्थिति की समीक्षा करना है। इसके तहत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाले भत्तों, वेतन संरचना और बकाया भुगतान से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसके साथ ही कमेटी राज्य पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का भी विस्तृत आकलन करेगी। विशेष रूप से 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 तक की अवधि के दौरान संशोधित वेतन और पेंशन के बकाए के भुगतान से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जाएगा। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राज्य पहले से ही वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों के हितों और राज्य की आर्थिक स्थिति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से कमेटी सभी तथ्यों, आंकड़ों और कानूनी पहलुओं का विश्लेषण करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगी। अधिसूचना के अनुसार, कैबिनेट सब कमेटी अपनी रिपोर्ट मंत्रिपरिषद के समक्ष पेश करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि कमेटी की सिफारिशें आने के बाद ही डीए/डीआर और वेतन बकाए को लेकर कोई ठोस फैसला लिया जाएगा। कुल मिलाकर, पंजाब सरकार का यह कदम कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, हालांकि अंतिम राहत मिलने में अभी समय लग सकता है।

किसानों के नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर शीघ्र सहायता दें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

असमय वर्षा-ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर सरकार संवेदनशील, तत्काल सर्वे व भुगतान के निर्देश आपदा की घड़ी में अन्नदाताओं के साथ सरकार, 24 घंटे में राहत पहुंचाने के निर्देश राहत कार्यों में लापरवाही अक्षम्य, हर किसान तक सहायता पहुंचाना प्राथमिकता: मुख्यमंत्री जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ असमय वर्षा, ओलावृष्टि तथा कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाओं से रबी फसलों को हुए नुकसान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बुधवार प्रातः इस संबंध में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विपरीत परिस्थिति में अन्नदाता का चिंतित होना स्वाभाविक है और राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रभावित किसान एवं बटाईदार के नुकसान का सटीक, निष्पक्ष एवं समयबद्ध आकलन कर तत्काल क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर राजस्व, कृषि एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए शीघ्र सर्वेक्षण कर रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाए, ताकि राहत वितरण में किसी प्रकार का विलंब न हो। मुख्यमंत्री ने बीमा कंपनियों के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित कर फसल बीमा दावों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्वयं किसानों से संपर्क कर उन्हें बीमा योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें, जिससे अधिकतम राहत उपलब्ध हो सके। राजस्व विभाग को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आपदा राहत कोष से प्रत्येक जनपद को पर्याप्त धनराशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित किसानों को त्वरित एवं पारदर्शी ढंग से सहायता प्रदान की जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां राहत शिविर स्थापित किए जाएं तथा मंडी समितियों के माध्यम से भी किसानों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए। अग्निकांड की घटनाओं पर विशेष संवेदनशीलता बरतते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जनहानि एवं पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे के भीतर राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, पात्र लाभार्थियों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत शीघ्र लाभान्वित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य होगी और इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस आपदा की घड़ी में प्रत्येक किसान, कृषक परिवार एवं बटाईदार के साथ पूरी संवेदनशीलता, तत्परता एवं प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

खेल प्रेमियों के लिए बड़ी खबर: रायपुर में 14 मई से राष्ट्रीय वुडबॉल चैंपियनशिप

रायपुर. वुडबॉल खेल के राष्ट्रीय परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में वुडबॉल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ वुडबॉल संघ द्वारा 20वीं सीनियर एवं 14वीं जूनियर राष्ट्रीय वुडबॉल चैंपियनशिप 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता 14 मई से 17 मई 2026 तक कृष्णा विकास ग्लोबल स्कूल ग्राउंड, रायपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पुरुष एवं महिला खिलाड़ी भाग लेंगे। जूनियर वर्ग के लिए आयु सीमा 19 वर्ष से कम निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार 1 जनवरी 2007 या उसके बाद जन्मे खिलाड़ी पात्र होंगे। वुडबॉल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त खेल है, जिसे इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स फेडरेशन (FISU), ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) तथा एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) द्वारा मान्यता प्रदान की गई है। आयोजन समिति द्वारा प्रतिभागी टीमों के लिए 14 मई से 18 मई 2026 तक आवास, भोजन एवं स्थानीय परिवहन की समुचित व्यवस्था की गई है। सभी टीमों को 14 मई 2026 की प्रातः तक रायपुर में रिपोर्ट करने का अनुरोध किया गया है, जिससे प्रतियोगिता का संचालन समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जा सके। प्रतिभागी टीमों को निर्देशित किया गया है कि वे 05 मई 2026 तक अपनी भागीदारी की पुष्टि एवं टीम विवरण आयोजकों को प्रेषित करें। प्रत्येक टीम में अधिकतम 24 खिलाड़ी (12 पुरुष और 12 महिला) तथा 3 अधिकारी सम्मिलित किए जा सकते हैं, जिनमें महिला टीम के लिए एक महिला प्रबंधक का होना अनिवार्य है। आयोजन समिति ने सभी प्रतिभागियों से अनुशासन, खेल भावना एवं निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। साथ ही, खिलाड़ियों को अपने आवश्यक खेल उपकरण (किट एवं मैलेट) साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं। यह राष्ट्रीय चैंपियनशिप न केवल वुडबॉल खेल के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय मंच भी प्रदान करेगी।

ऊर्जा मंत्री तोमर का आदेश: पाँचों बिजली कंपनियाँ शीघ्र करें स्वीकृत पदों पर भर्ती

पाँचों बिजली कम्पनी स्वीकृत पदों में भर्ती प्रक्रिया शीघ्र करें: ऊर्जा मंत्री तोमर विभागीय योजनाओं की गहन समीक्षा भोपाल पाँचों बिजली कम्पनी स्वीकृत पदों में भर्ती प्रक्रिया शीघ्र करें। हर हाल में अगले महीने तक भर्ती प्रक्रिया का विज्ञापन जारी हो जाना चाहिए। 132 केव्ही के स्वीकृत सभी सब स्टेशन का कार्य जल्द पूरा करेगा। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश बुधवार को मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा में दिए। मंत्री तोमर ने कहा कि मेंटिनेंस और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किये गए कार्यों के बाद भी ट्रिपिंग क्यों हो रही है। इसका स्थाई निदान ढूढे। उन्होंने कहा कि पायलेट प्राजेक्ट के रूप में एक फीडर लें और उसमें सभी संभावित उपाय कर यह सुनिश्चित करें कि उसमें कोई ट्रिपिंग नहीं हों। यह प्रयोग सफल होने पर अन्य फीडरों में भी इसे लागू किया जाए। बिजली का बिल समय पर नहीं पहुँचने और कार्यवाही तब करने जब बिल बढ़ जाता है, की स्थिति उचित नहीं है। बिजली बिल का भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्तों के विरूद्ध पहले या दूसरे महीनें में ही कार्यवाही करे। इससे वह बिल का भुगतान कर सकेगा। अच्छा परफार्मेंस नहीं देने वाले सीई और एसई के खिलाफ करें कार्यवाही ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि जो सीई और एसई अच्छा परफार्मेंस नहीं दे रहे है, उनके विरूद्ध कार्यवाही करें। मेंटिनेंस कार्यों के सतत् मॉनिटरिंग इनके माध्यम से करवायें। उन्होंने कहा कि आगामी गर्मी और वर्षा के सीजन देखते हुए पॉवर ट्रांसफार्मर की ओवरलोडिंग कम करने की कार्ययोजना बनाएं। सोलर रूफटॉप लगाने में आ रहीं कठिनाईयों को दूर करें। जो वेंडर ठीक से काम नहीं कर रहे है, उन्हें ब्लेकलिस्ट करें। लोकसेवा गारंटी के अंतर्गत आने वाले कार्यों को समय-सीमा में कराना सुनिश्चित करें। गलत एवं फाल्स बिलिंग को सुधारने बनायें कार्ययोजना ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि गलत एवं फाल्स बिल की गहन जांच हो। साथ ही इनका निराकरण समय-सीमा में होना चाहिए। इसके लिये जरूरी हो तो अधिकारों का विकेन्द्रीकरण भी करेा। वितरण केन्द्र एवं संभाग स्तर पर जनसुनवाई शिविर लगाएं जाएं। वसूली और उपभोक्ता संतुष्टि वर्ष के रूप में मनाएं  मंत्री तोमर ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष को वसूली और उपभोक्ता संतुष्टि वर्ष के रूप में मनाएं। इसके लिये सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर कार्य करें। अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित करें। उन्होंने कहा कि वे खुद भी ऐसे अधिकारियों को सम्मानित करेंगे। वसूली के कार्यों में स्टॉफ की कमी हो तो सेवानिवृत्त अधिकारियों/कर्मचारियो की सेवाएं भी लेने का प्रस्ताव बनाएं। बिजली कंपनियों के भवनों में विज्ञापन के लिये स्पेस देकर आय बढ़ाने के प्रयास करें। समाधान योजना में लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करें। बड़े बकायदारों से पहले वसूली करें।  सिंहस्थ: 2028 के कार्य प्राथमिकता से करें सिंहस्थ:2028 से संबंधित सभी कार्य तय समय-सीमा में करें। कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। इन कार्यों की सतत् समीक्षा करें। सिंहस्थ संबंधित ट्रांसमिशन कम्पनी के कार्यों की बिन्दुवार समीक्षा की गई। मंत्री तोमर ने मिशन कम्पनी के कार्मिकों को इनसेंटिव देने की बात भी कही। ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर बदलने के निर्देश भी दिए। ऊर्जा मंत्री ने पॉवर जनरेटिंग कम्पनी की नई इकाईयों की स्थापना की प्रगति और नई सोलर एवं पम्प स्टोरेज इकाईयों के कार्यों की समीक्षा की। बैठक में ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले, एमडी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी अजय गुप्ता, एमडी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ऋषि गर्ग, एमडी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी अनूप सिंह, एमडी पॉवर ट्रांसमिशन कम्पनी सुनील तिवारी और एमडी मध्यप्रदेश जनरेशन कम्पनी मंजीत सिंह ने कम्पनी द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी।  

पटना समेत इन 5 जिलों की बदलेगी तस्वीर, बियाडा ने आवंटित की जमीन और 700 से अधिक प्रस्ताव तैयार

पटना बिहार में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई फैसले ले रही है. इसके साथ ही इंवेस्टर्स के लिए कई योजनाएं भी ला रही है. इसी का असर अब बिहार में कहीं ना कहीं दिखना शुरू होने वाला है. आने वाले दिनों में बिहार में नई-नई फैक्ट्रियां लगाई जा सकतीं हैं. इसके लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपए इंवेस्ट करने की प्लानिंग की गई है. इन 5 जिलों के लिए मेगा प्लान तैयार जानकारी के मुताबिक, बिहार के 5 जिलों पटना (बिहटा), गया, पूर्णिया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में 15 नई फैक्ट्रियां लगाई जायेंगी. इन फैक्ट्रियों को लगाने के लिए करीब 64 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा. खास बात यह है कि बियाडा की तरफ से जमीन आवंटित भी कर दिया गया है, जिससे अगले कुछ सालों में इन जिलों की तस्वीर ही बदल जाने की संभावना जताई जा रही है. कौन-कौन सी लगाई जाएगी फैक्ट्री? बताया जा रहा है कि पांच जिलों में फूड प्रोसेसिंग, रबर, कपड़े, प्लास्टिक, आईटी सेक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी समेत कई इंडस्ट्रियल यूनिट लगाए जा सकते हैं. जिन कंपनियों की ओर से बिहार में इंवेस्ट किया जाएगा, उनमें एचआर फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, निरानी शुगर्स लिमिटेड और संजीवनी मीडिया एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड है. इतने फैक्ट्रियों को लगाने का प्रस्ताव जानकारी के मुताबिक, बिहार में एक साल में लगभग 747 फैक्ट्रियां लगने का प्रस्ताव मिला है. इनमें से 317 फैक्ट्रियों के लिए 404 एकड़ जमीन आवंटित की गई है. बिहार में फैक्ट्रियों के लगने से राज्य सरकार का लक्ष्य पूरा हो सकेगा. बिहार सरकार ने राज्य में एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य तय किया था. बिहार में मिल सकेगा रोजगार ऐसे में बिहार में फैक्ट्रियों के लगने से लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध हो सकता है. इसके साथ ही बिहार से पलायन पर भी कहीं ना कहीं रोक लग सकेगी. उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने जानकारी दी कि राज्य में टेक्सटाइल, लेदर, इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई अन्य कंपनियां लगाई जा रही है. बिहार एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में डेवलप हो रहा है.

सूरजपुर : जनगणना 2027 : डिजिटल तकनीक से होगी देश की गिनती, स्व-गणना पोर्टल से घर बैठे दर्ज करें अपना विवरण

सूरजपुर : जनगणना 2027 : डिजिटल तकनीक से होगी देश की गिनती, स्व-गणना पोर्टल से घर बैठे दर्ज करें अपना विवरण सूरजपुर कलेक्टर श्री एस जयवर्धन  भारत में जनगणना 2027 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस बार की जनगणना पूर्णतः डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी, जो इसे पहले की तुलना में अधिक सटीक, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाएगी। दो चरणों में होगी जनगणना जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में हाउस लिस्टिंग अर्थात् मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी। पहले चरण में निर्धारित प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। स्व-गणना पोर्टल — घर बैठे भरें अपना विवरण इस बार नागरिकों को एक विशेष सुविधा दी जा रही है — स्व-गणना पोर्टल (Self Enumeration Portal)। इसके माध्यम से परिवार का मुखिया या कोई भी सदस्य पोर्टल पर जाकर अपने घर और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी स्वयं भर सकता है। यह सुविधा संबंधित राज्य में मकान सूचीकरण कार्य शुरू होने से 15 दिन पहले उपलब्ध होगी और 15 दिनों तक ही सक्रिय रहेगी। ध्यान रखें — एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही घर का लॉगिन संभव है और मुखिया का नाम एक बार दर्ज होने के बाद बदला नहीं जा सकता। स्व-गणना पोर्टल पर एंट्री की प्रक्रिया:- पोर्टल खोलकर अपना राज्य या केंद्र शासित प्रदेश एवं कैप्चा भरें। इसके बाद स्वागत स्क्रीन आगे के चरणों का मार्गदर्शन करेगी। परिवार की मुखिया अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर अपनी भाषा चुनें, फिर ओटीपी से सत्यापन होगा। मानचित्र पर अपने घर का स्थान चिह्नित करना आवश्यक है। तत्पश्चात् एचएल प्रश्नावली का प्रारूप खुल जाएगा, जिसमें अधिकांश प्रश्न विकल्प आधारित होंगे। फोनेटिक एवं वर्चुअल कीबोर्ड भी उपलब्ध रहेगा। यदि कोई जानकारी छूट जाए तो सिस्टम स्वयं संकेत देगा। सभी विवरण भरने के बाद ड्राफ्ट सहेजें, आवश्यकता हो तो संशोधन करें और अंत में अंतिम रूप से जमा करें। सबमिशन के बाद 11 अंकों का SCID नंबर प्रदर्शित होगा, जो एसएमएस के माध्यम से भी प्राप्त होगा। जब प्रगणक घर पर आएं तो यह SCID नंबर उनके साथ साझा करें। जिला प्रशासन की अपील:- कलेक्टर श्री एस जयवर्धन ने सूरजपुर जिले के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना में सक्रिय भागीदारी निभाएं और स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण समय पर दर्ज कराएं। आपकी सही और पूर्ण जानकारी से देश की वास्तविक तस्वीर सामने आती है और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचता है।

अब मछली पालन के लिए नहीं जाना होगा हैदराबाद, पटना में ही मिलेगी आधुनिक ट्रेनिंग और सब्सिडी

 पटना बिहार के मछली पालकों को अब उन्नत तकनीक, भारी सब्सिडी और बेहतरीन मछली बीज के लिए हैदराबाद के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने पटना के नंदलाल छपरा में अपना क्षेत्रीय कार्यालय खोलने का फैसला किया है. इसके लिए 5.68 एकड़ जमीन का चयन भी कर लिया गया है. यह केंद्र न केवल बिहार, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए ‘नॉलेज और ट्रेनिंग हब’ के रूप में काम करेगा, जिससे बिहार की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने वाली है. अप्रैल के आखिरी हफ्ते से शुरू होगा कामकाज मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और केंद्रीय मंत्रालय के बीच दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय हुआ है कि फिलहाल एनएफडीबी का अस्थायी कार्यालय पटना के मत्स्य विकास भवन में अप्रैल के अंतिम सप्ताह से ही काम करना शुरू कर देगा. विभाग के सचिव कपिल अशोक के अनुसार, इस सेंटर के खुलने से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और पीएम मत्स्य किसान समृद्धि योजना जैसी बड़ी स्कीमों की मॉनिटरिंग सीधे पटना से होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी फंड और सब्सिडी का पैसा बिना किसी देरी के सीधे मछली पालकों के बैंक खातों तक पहुंच सकेगा. लैब से सीधे तालाब तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक बिहार में मछली की खपत और उत्पादन के बीच हमेशा से एक बड़ा अंतर रहा है, जिसे पाटने के लिए यह केंद्र ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ पर जोर देगा. अब बायोफ्लॉक जैसी अत्याधुनिक मछली पालन तकनीक को लैब से निकालकर सीधे गांवों के तालाबों तक पहुंचाया जाएगा. बिहार के विशाल ‘चौर’ क्षेत्रों (दलदली भूमि) को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की योजना है. किसानों को अब दूसरे राज्यों पर निर्भर रहने के बजाय यहीं से उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज और फिश फीड की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा. पड़ोसी राज्यों के लिए भी बनेगा ‘नॉलेज सेंटर’ पटना का यह रीजनल ऑफिस सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा. यह झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मत्स्य अधिकारियों और किसानों के लिए भी मुख्य प्रशिक्षण केंद्र बनेगा. इस पहल से बिहार न केवल मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के लिए समुद्री और जलीय व्यापार का एक बड़ा गेटवे भी साबित होगा.

अम्बिकापुर : ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेः पांडुलिपियों में निहित ज्ञान परंपरा को बचाने का राष्ट्रीय अभियान छत्तीसगढ में भी शुरू

अम्बिकापुर : ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेः पांडुलिपियों में निहित ज्ञान परंपरा को बचाने का राष्ट्रीय अभियान छत्तीसगढ में भी शुरू अम्बिकापुर  भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में “ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” संचालित किया जा रहा है। इस महत्त्वपूर्ण पहल का उद्देश्य देशभर में बिखरी अमूल्य पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में छत्तीसगढ में भी इस सर्वेक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है, जिसमें जन-जागरूकता पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह सर्वेक्षण उन पांडुलिपियों को खोजने और सूचीबद्ध करने का प्रयास है, जो वर्तमान में परिवारों, मंदिरों, मठों, संस्थानों या निजी संग्रहों में सुरक्षित है, लेकिन अभी तक औपचारिक रूप से सर्वेक्षित नहीं हो पाई हैं। यह पहल इन छिपी हुई ज्ञान-संपदाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सर्वेक्षण के पश्चात सरकार इनका डिजिटाइजेशन और संरक्षण करेगी। पांडुलिपियों का स्वामित्व उनको धारण करने वाले व्यक्ति, परिवार और संस्था का ही रहेगा। ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसमें पांडुलिपि धारण करने वाले परिवार, संस्था, विद्वान एवं शोधकर्ता मंदिर एवं धार्मिक संस्थान, पुस्तकालय एवं शैक्षणिक संस्थाएं, जागरूक नागरिक के अतिरिक्त, सरकार द्वारा अधिकृत सर्वेक्षक भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। ऐसे नागरिक जिन्हें अपने आसपास पांडुलिपियों की जानकारी है, वे भी इस सर्वेक्षण से जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों को ज्ञानभारतम डॉट कॉम पोर्टल और ‘ज्ञानभारतम’ मोबाइल एप के माध्यम से आवश्यक जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। भारत की पांडुलिपियां केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और दार्शनिक विरासत, ज्ञान परंपरा की जीवंत धरोहर हैं। इनमें आयुर्वेद, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र और जीवन दर्शन का अमूल्य ज्ञान संचित है। ऐसे में इनका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। राज्य के नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उनके पास ऐसी पांडुलिपियां हैं जो अब तक सर्वेक्षित नहीं हैं, या उन्हें किसी स्थान, परिवार या संस्था में पांडुलिपियों की जानकारी है, तो वे इस सर्वेक्षण से अवश्य जुडें। यह राष्ट्रीय अभियान हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ज्ञान की इस विरासत को संजोना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है, आइए मिलकर इसे सुरक्षित करें।  

छोटे निवेश से बड़ी कमाई: शिव राम ने पिग फार्मिंग से बदली किस्मत

संग्रामपुर. काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता बस उसे करने के लिए जज्बा होना चाहिए। यह कर दिखाया है वरवां पंचायत के शिव राम ने। महज दो सुअर से पालन से कार्य शुरू कर तीन सालो में मजबूती के साथ आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। प्रखंड के वरवा पंचायत के शिव राम ने वर्ष 2024 में महज दो सुअर के बच्चों को खरीद फार्मिग शुरू की। वर्तमान में प्रति वर्ष वह कम से कम 3 से 4 दर्जन सुअर के बच्चे बेचकर 3 लाख की आय का सृजन कर रहे हैं। 18 हजार से शुरू किया था बिजनेस  शिव बताते हैं कि शुरुआती दौर में वे 18 हजार की राशि एकत्रित करके पिपरा कोठी पिंग फार्म से एक नर और एक मादा सुअर का बच्चा खरीदा। इसके लिए दो कमरे का निर्माण कर उसको पालना शुरू किया। लगभग आठ माह के बाद मादा सुअर ने एक बार मे सात बच्चे दिए, फिर उनके द्वारा एक और कमरा निर्माण करवा कर उसमें पालने का काम शुरू किया। जब सात बच्चे एक क्विंटल से लेकर 80 किलो का वजन हुआ, तो उसको बेच कर फिर अपना काम आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि 7 सुअर के बच्चों को दाना खिलाना शुरू किया। 6 माह में सुअर के बच्चों का वजन लगभग अस्सी से नब्बे किलो हुआ। इसमें लगभग 70 हजार का दाना खिलाया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके पास 11 सुअर हैं, जिसमें तीन नर और चार मादा हैं, जो हर 6 माह पर एक मादा सुअर कम से पांच से छह बच्चे देती है। इस आय से उनका घर परिवार चलता है। सरकार से नहीं मिल रहा सपोर्ट शिव बताते हैं कि इसको बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए कई बार बैंक से ऋण के लिए संपर्क किया, लेकिन लगभग एक साल बैंक में आना जाना लगा रहा, लेकिन ऋण के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। इनका दर्द हैं कि एक तरफ सरकार सुअर पालन को लेकर योजना चल रही हैं। वहीं, जो व्यक्ति इसको धरातल पर उतारने का प्रयास करता है, उसे योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा हैं।

संकट में आशियाने, धनबाद-सिंदरी मार्ग के पास फटी जमीन और लोगों ने शुरू किया पलायन

  झरिया झारखंड की कोयलानगरी झरिया में एक बार फिर जमीन धंसने की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. चौथाई कुलहि इलाके में धनबाद–सिंदरी मुख्य मार्ग के पास स्थित धर्मनगर और आसपास के क्षेत्रों में अचानक कई घरों में दरारें पड़ गई हैं. जमीन फटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. एक दर्जन से अधिक घरों पर संकट स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक दर्जन से ज्यादा घरों में गंभीर दरारें देखी गई हैं. कई मकानों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि कुछ घरों के पूरी तरह गिरने का खतरा मंडरा रहा है. दरारों का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, जिससे लोगों की नींद उड़ गई है. स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अपने घरों में रहने से डर रहे हैं. कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने घर खाली कर दिए हैं और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है. जमीन फटने से बढ़ी दहशत इलाके में जगह-जगह जमीन फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं. लोगों का कहना है कि पहले छोटी दरारें दिखीं, लेकिन अब वे तेजी से चौड़ी होती जा रही हैं. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. स्थानीय निवासी बेहद डरे हुए हैं और प्रशासन से तत्काल राहत और सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कई परिवार बेघर हो सकते हैं. पुरानी खदान बना खतरे की वजह स्थानीय लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले कोयला खदान संचालित होती थी. करीब 50 वर्षों से लोग यहां रह रहे हैं, लेकिन अब जमीन धंसने की घटनाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि बंद पड़ी खदानों के नीचे खाली स्थान और कमजोर जमीन इसकी मुख्य वजह हो सकती है. झरिया क्षेत्र पहले भी इस तरह की घटनाओं के लिए जाना जाता रहा है, जहां भूमिगत आग और खदानों के कारण जमीन धंसने की समस्या लगातार बनी रहती है. प्रशासन और बीसीसीएल पर लापरवाही का आरोप घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है. लोगों का आरोप है कि अब तक जिला प्रशासन और बीसीसीएल के कोई भी अधिकारी मौके पर हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचे हैं. निवासियों का कहना है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासन की उदासीनता समझ से परे है. लोगों ने जल्द से जल्द राहत कार्य शुरू करने, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.