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शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के 92 विद्यार्थियों को निःशुल्क चश्मों का वितरण

​बड़वानी  जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से भविष्य की पीढ़ी की आँखों की रोशनी संवारने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेखा जमरे, सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना और डी.पी.एम. डॉ. विमलेश चोयल के मार्गदर्शन में उत्कृष्ट विद्यालय बड़वानी में नेत्र स्वास्थ्य शिविर का सफल आयोजन किया गया। ​700 छात्र-छात्राओं का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण ​उप जिला कार्यक्रम प्रबंधक (अंधत्व) अनिल राठौर के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने विद्यालय के लगभग 700 विद्यार्थियों के नेत्रों की सघन जाँच की। इस टीम में नेत्र सहायक दीपक सोनी, रविंद्र टेकाम और जयनारायण कुशवाह शामिल थे। जाँच के दौरान 102 विद्यार्थियों में दृष्टिदोष पाया गया, जिसके बाद उनके चश्मे के नंबरों का सटीक निर्धारण किया गया। ​निःशुल्क चश्मे पाकर खिले विद्यार्थियों के चेहरे ​स्वास्थ्य परीक्षण के अगले चरण में, आज दिनांक 7 अप्रैल 2026 को जिला चिकित्सालय बड़वानी की ओर से दृष्टिदोष वाले 92 विद्यार्थियों को निःशुल्क चश्मे प्रदान किए गए। चश्मा मिलने से न केवल विद्यार्थियों को पढ़ाई में सुगमता होगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी। ​सहयोग और जागरूकता ​इस पुनीत कार्य में उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य  अनिल मिश्र, खुशबू सेनानी एवं समस्त विद्यालय स्टाफ का विशेष योगदान रहा। ​प्राचार्य की पहल:  अनिल मिश्र द्वारा प्रतिवर्ष विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के शिविर आयोजित कर निःशुल्क चश्मे वितरित करवाए जाते हैं, जो सामुदायिक सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ​विशेष सलाह: कार्यक्रम के दौरान अनिल राठौर और अनिल मिश्र ने बच्चों को परामर्श दिया कि वे अपनी आँखों की नियमित जाँच करवाएं और डिजिटल स्क्रीन का उपयोग सीमित करें। ​"बच्चों की दृष्टि ही उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार है। समय पर आँखों की जाँच और सही उपचार से पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है।"  

शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 किया गया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा पर मुहर लगाते हुए योगी कैबिनेट ने मंगलवार को शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2017 में ₹10,000 निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों के मानदेय को अब बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय अप्रैल माह से लागू हो जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश सरकार पर कुल 1475.27 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। यह निर्णय उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र 2026 के प्रथम सत्र में मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में लिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय वर्ष में 11 माह के लिए देय होगा। 1.43 लाख शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा अभियान के तहत 60:40 अनुपात में प्राप्त होता था। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्रांश के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा तथा अनुमोदन प्राप्त न होने की स्थिति में बढ़े हुए मानदेय के कारण इन पर आने वाला अतिरिक्त ₹1138.12 करोड़ का व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। वहीं शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, उनके लिए ₹119.65 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार भी प्रदेश सरकार उठाएगी। करीब 25 हजार अनुदेशक होंगे लाभान्वित संदीप सिंह ने बताया कि इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों को भी बड़ी राहत दी गई है। वर्ष 2017 में निर्धारित ₹9,000 मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। इस वृद्धि से राज्य सरकार पर ₹217.50 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और मई माह में दिए जाने वाले भुगतान में यह वृद्धि शामिल होगी।

हर शनिवार लगेगा तहसील स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर

बिलासपुर बिलासपुर में आयोजित साप्ताहिक टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दीर्घकालिक योजना और जनसुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। निजी स्कूलों में मान्यता प्रमाण पत्र प्रदर्शित करने, साप्ताहिक जनसमस्या निवारण शिविर शुरू करने और जल संरक्षण सहित विभिन्न विकास कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया गया।       जिला कार्यालय के मंथन सभा कक्ष में आयोजित साप्ताहिक टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी निजी स्कूलों को अपने परिसर में मान्यता संबंधी प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से लिखने को कहा गया कि स्कूल सीबीएसई या छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को सही जानकारी मिल सके और किसी प्रकार की धोखाधड़ी की आशंका न रहे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई कर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हर सप्ताह शनिवार को तहसील स्तर पर जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन शिविरों में वे स्वयं उपस्थित रहेंगे। यह अभियान इसी माह से प्रारंभ होकर लगभग दो माह तक संचालित किया जाएगा। अधिकारियों को इसकी समुचित तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।           बैठक में कलेक्टर ने इस वर्ष के बजट में प्रावधानित कार्यों के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव तैयार करते समय स्थल का निरीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए और केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि आगामी 20 से 30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि किसी भी सरकारी योजना के तहत भवन या आवास निर्माण से पहले वहां तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा सुनिश्चित की जाए, अन्यथा निर्माण की उपयोगिता प्रभावित होती है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर ने सरकारी निर्माण एजेंसियों को सूखे तालाबों से मिट्टी एवं मुरूम उठाने के निर्देश दिए, ताकि तालाबों की गहराई बढ़े और जल संचयन में मदद मिले। साथ ही उन्होंने अनियमित रूप से अन्य स्थानों से मिट्टी उत्खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में सोखता गड्ढे बनाकर जल रिचार्ज करने, कच्चे नाला बांध बनाकर वर्षा जल को रोकने के उपाय अपनाने पर भी बल दिया गया। इसके अतिरिक्त कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाकर निर्धारित लक्ष्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

जनदर्शन में सुनीं गई लोगों की समस्याएं अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जनदर्शन में नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे और एडीएम शिव कुमार बनर्जी ने ग्रामीणों की  समस्याएं गंभीरता से सुनीं। अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।           जनदर्शन में तखतपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत विजयपुर के ग्रामीणों ने प्राथमिक शाला विजयपुर के प्रधान अध्यापक भरत ध्रुव को पद से हटाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान अध्यापक द्वारा शराब का सेवन कर शाला में दुर्व्यवहार एवं विद्यार्थियों को पढ़ाने में कोताही बरती जा रही है। पूर्व में भी प्रधान अध्यापक की शिकायत की गई परंतु आज दिनांक तक किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डीईओ को मामले की जांच कर शीघ्र ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। रतनपुर की अंकिता कमलसेन एवं सिंघरी की प्रतिभा कोशले ने स्वयं का रोजगार स्थापित करने शासन की योजना अंतर्गत लोन दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह एक शिक्षित महिला है और सिलाई कार्य जानती है। उन्हें सिलाई मशीन एवं अन्य सामग्री खरीदने रूपयों की आवश्यकता है। लीड बैंक मैनेजर को आवश्यक कार्यवाही करने कहा। मेण्ड्रा के सूरज सूर्यवंशी सहित ग्रामवासियों ने ग्राम मेण्ड्रा के वार्ड 4 एवं 5 में हो रही पेयजल की समस्या से अवगत कराया। पीएचई विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।        बेलतरा तहसील के बाम्हू निवासी परसराम ने जपदर्शन में आवेदन देकर बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम किश्त की राशि प्राप्त हो चुकी है, किन्तु दूसरे एवं तीसरे किश्त की राशि आज दिनांक तक नहीं मिलने के कारण उनके आवास का कार्य अधूरा है। उन्होंने शेष बची किश्त की राशि दिलाने की मांग की है। प्रकरण को बिल्हा के जनपद पंचायत सीईओ को भेजते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए है। ग्राम ऊनी की किरण वैष्णव ने बताया कि कुंआ की सफाई करने के दौरान उनके पति एवं पुत्र विद्युत तार की चपेट में आ गए जिससे उनकी मृत्यु हो गई। श्रीमती किरण ने इस संबंध में उचित मुआवजा राशि दिलाने गुहार लगाई गई।  विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता को प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने कहा है। सिंद्यरी के दिनेश कुमार ने गांव के दूजराम के द्वारा किये गये अवैध कब्जे की शिकायत कलेक्टर से की है। उन्होंने बताया कि दूजराम द्वारा पक्का मकान बनाकर रास्ता अवरूद्ध कर बंद कर दिया गया है। रास्ता बाधित होने के कारण आवाजाही में उन्हें एवं ग्रामीणों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मामले को संबंधित अधिकारी को सौंपते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए। 

अब आसमान से देखिए बिहार: हेली टूरिज्म प्लान तैयार, 8 बड़े स्थलों को जोड़ा जाएगा

पटना. बिहार में पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार अब ऐसी सुविधा शुरू करने जा रही है, जिससे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान ही नहीं, बल्कि बेहद तेज भी हो जाएगा। हेली टूरिज्म से बदलेगा यात्रा का अनुभव नागरिक उड्डयन विभाग की पहल पर बिहार में हेली टूरिज्म सेवा शुरू करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत राज्य के आठ प्रमुख पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे लंबी और थकाऊ यात्राओं से राहत मिलेगी। इन प्रमुख स्थलों को जोड़ा जाएगा इस सेवा में बोधगया, नालंदा, वैशाली, राजगीर, पटना साहिब, पावापुरी, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और विक्रमशिला जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल शामिल होंगे। सीनियर सिटिजन और विदेशी पर्यटकों को खास फायदा हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से इन जगहों तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। यह सुविधा खासतौर पर सीनियर सिटिजन, विदेशी पर्यटकों और वीआईपी यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। 5 साल का होगा अनुबंध, बनेंगे नए हेलीपैड नागरिक उड्डयन विभाग ने इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित कर चुकी है। हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी के साथ पांच वर्षों का अनुबंध किया जाएगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसके तहत हेलीपैड समेत अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। प्रत्येक हेलीकॉप्टर में 5-6 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। एयर कनेक्टिविटी भी होगी मजबूत राज्य सरकार हवाई बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। माना जा रहा है कि विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बिहार की पहचान अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगी। यह रोजगार के अवसर बढ़ाने और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

कोर्ट की अहम टिप्पणी: AI आधारित जानकारी पर फैसले नहीं, पंजाब हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने न्यायिक अधिकारियों से कहा है कि वे फैसले लिखने और कानूनी शोध करने के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी और कोपायलट जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का उपयोग न करें । पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को सोमवार (6 अप्रैल, 2026) को उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार-जनरल द्वारा जारी एक पत्र में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश ने उनसे कहा है कि वे अपने अधीन कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दें कि वे निर्णय लिखने और कानूनी शोध के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी, कोपायलट, मेटा इत्यादि सहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का उपयोग न करें। इन निर्देशों का उल्लंघन गंभीर रूप से देखा जाएगा। इससे पहले, गुजरात उच्च न्यायालय ने किसी भी प्रकार के निर्णय लेने, न्यायिक तर्क, आदेश तैयार करने, निर्णय तैयार करने, जमानत संबंधी सजा पर विचार करने या किसी भी महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर रोक लगा दी थी । शनिवार (4 अप्रैल, 2026) को जिला न्यायिक न्यायाधीशों के एक सम्मेलन में अनावरण की गई गुजरात उच्च न्यायालय की एआई नीति के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग न्यायिक तर्क के प्रतिस्थापन के रूप में नहीं, बल्कि न्याय वितरण की गति और गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि चीफ जस्टिस ने विनती की है कि अपने अधीन काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को यह आदेश दिया जाए कि वह फैसले लिखने और कानूनी खोज के लिए Chat GPT, Gemini, Copilot, Meta आदि सहित किसी भी AI टूल्स का इस्तेमाल न करें। इन आदेशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा।  

BSP में टर्बाइन ब्लास्ट: 8 मजदूर जख्मी, पीछे के रास्ते से सुरक्षित निकाले गए कर्मचारी

दुर्ग. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई स्टील प्लांट में आज आग लगने से मौके पर हड़कंप मच गया। इस घटना में 8 मजदूरों को चोटें आई है। घटना की सूचना पर आधा दर्जन से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची है। उच्च अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुंचे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टर्बाइन में ब्लास्ट हुआ, फिर आग फैलती गई। इसकी चपेट में कुछ कर्मचारी आए हैं। पीछे के रास्ते से बीएसपी कर्मचारी किसी तरह बाहर निकल सके। दो बीएसपी कर्मचारी और तीन ठेका श्रमिक को हल्की चोट आई है। एक बीएसपी कर्मचारी का पैर फ्रैक्चर हुआ है। घालयों का प्राथमिक उपचार मेन मेडिकल पोस्ट में करने के बाद सेक्टर 9 हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। यहां एक्सरे, ईसीजी आदि किया जा रहा है। केबल के सहारे उतकर मजदूरों ने बचाई जान पीबीएस 2 में आग लगने का कारण अब तक पता नहीं चल सका है। आग की चपेट में 2 नियमित कर्मचारी और 8 ठेका मजदूर आए थे। चारों तरफ से आग ने घेर लिया था। किसी तरह जान बचाने के लिए ऊपर-नीचे भागते रहे, लेकिन रास्ता नहीं मिला। छत पर भी गए, लेकिन वहां धुआं से कुछ समझ में नहीं आया। इसके बाद केबल को खोलकर विंडो में बांधा गया। इसके सहारे सबको बारी-बारी से नीचे टीन शेड पर उतारा गया। इस तरह सबकी जान बच सकी। सेक्टर 9 हॉस्पिटल में चल रहा घायलों का इलाज केबल से हथेली रगड़ खाने से छिल गई है, जिससे कर्मचारी जख्मी हुए हैं। एक कर्मचारी का पैर फ्रैक्चर हो गया है। घायलों का प्राथमिक उपचार मेन मेडिकल पोस्ट में करने के बाद सेक्टर 9 हॉस्पिटल लाया गया है। घायलों में कीर्ति कुमार भगत, महेंद्र कुशवाहा, महेंद्र जायसवाल, वैभव, ओमेंद्र कुमार तिस्दा, सुशांत, मनीष, अवधेश और शिव मोहन त्रिपाठी शामिल हैं।

भाजपा विधायक संजय पाठक के लिए माफी नहीं, कोर्ट में होगी हाजिरी

जबलपुर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व जज विनय सराफ की युगलपीठ ने आपराधिक अवमानना केस की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश के कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक को तलब किया है। कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की ओर से हलफनामा पेश किया गया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी। कोर्ट ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को गंभीरता से लिया और आगे की सुनवाई के लिए व्यक्तिगत पेशी जरूरी बताई। फोन करने से शुरू हुआ विवाद कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर याचिका में उल्लेख किया गया था कि विधायक से संबंधित कंपनी के खिलाफ अवैध उत्खनन के मामले में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने एक सितम्बर, 2025 को सुनवाई से इंकार कर दिया था। उन्होंने अपने आदेश में कहा था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। निष्पक्षता के लिए जज हुए अलग न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। साथ ही उन्होंने पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने के निर्देश भी दिए थे। आपराधिक अवमानना का केस दर्ज याचिका में कहा गया कि विधायक का यह कृत्य न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने दो अप्रैल को मामले का संज्ञान लेते हुए विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मुकुल रोहतगी ने की पैरवी सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की ओर से देश के पूर्व अटार्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्त मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उन्होंने तर्क दिया कि आपराधिक अवमानना में दंड तभी लागू होता है, जब गलती अक्षम्य हो या व्यक्ति उसे स्वीकार न करे।  

बस्तर में शांति के बाद विकास का नया चरण: ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ पर पीएम मोदी से चर्चा

बस्तर में शांति के बाद विकास का नया चरण : ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से चर्चा प्रधानमंत्री से मुलाकात में नक्सलवाद समाप्ति पर आभार, बस्तर के समग्र विकास की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  से भेंट कर बस्तर के समग्र, समावेशी एवं सतत विकास के लिए तैयार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश की तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके संकल्प और मार्गदर्शन में 31 मार्च तक माओवाद के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि अब बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद राज्य सरकार का फोकस तेजी से विकास, रोजगार सृजन और जनजीवन को सशक्त बनाने पर है। इसके तहत बस्तर रोडमैप 2.0 में एग्रो एवं एग्रो-फॉरेस्ट सेक्टर, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, और पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना की सफलता पर प्रधानमंत्री ने जताई प्रसन्नता मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बस्तर में अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज की रणनीति पर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की और कहा कि इससे गंभीर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किए गए कार्यों का नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक स्कूल उपलब्ध हैं, जहाँ 97 प्रतिशत बच्चों को मध्याह्न भोजन, गणवेश एवं पुस्तकें मिल रही हैं। 97 प्रतिशत गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जबकि अधिकांश गांव आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जुड़े हैं और 89 प्रतिशत ग्रामीणों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। मार्च 2026 तक राशन कार्ड एवं आधार कार्ड का संतृप्तिकरण 95 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। कनेक्टिविटी, आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर रोडमैप 2.0 के तहत ‘नियद नेल्ला नार योजना’ का विस्तार करते हुए अब इसमें 10 जिलों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें बस्तर के 7 जिलों के साथ गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना प्रारंभ की गई है, जो वर्तमान में बस्तर के 38 मार्गों पर संचालित है। साथ ही, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों से क्षेत्र में आत्मगौरव और नई ऊर्जा का संचार हुआ है। नक्सल-मुक्त पंचायतों में एल्वद योजना के तहत एक करोड़ रुपए तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं, वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई के क्षेत्र में तेजी से विस्तार मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि दंतेवाड़ा एजुकेशन सिटी की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में भी एजुकेशन सिटी बनाई जा रही है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी अब सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं।दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देउरगांव बैराज सहित 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिससे कृषि और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। आजीविका उन्नयन और आय वृद्धि पर केंद्रित रणनीति मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है, जिसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रति माह तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आत्मनिर्भर आजीविका क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और हितग्राहियों को एनआरएलएम, सहकारी समितियों, एफपीओ एवं वनधन केंद्रों से जोड़ा जाएगा। साथ ही, ‘बस्तर मुन्ने’ नामक संतृप्तता शिविर कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ और समस्याओं का त्वरित समाधान उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री को बस्तर आने का दिया न्यौता मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी  से विशेष स्नेह रखती है और प्रधानमंत्री का भी इस क्षेत्र के प्रति गहरा लगाव है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए रेल एवं सिंचाई परियोजनाओं के भूमिपूजन के लिए समय देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से हुई यह भेंट अत्यंत उपयोगी रही और उनके मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भविष्य की संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

आरजीपीवी में छिपकली कांड के बाद कैंटीन बंद, छात्रों ने गेट पर किया विरोध प्रदर्शन

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में छिपकली कांड के बाद कैंटीन बंद होने के बाद छात्रों के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बाहर से आने वाले टिफिन पर भी रोक लगा दी, जिससे छात्रों को रात में भोजन नहीं मिल पाया। इसी के विरोध में सोमवार-मंगलवार रात 12 बजे तक मुख्य गेट पर छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। भूखे छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और व्यवस्था सुधारने की मांग की। छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद से उन्हें नियमित भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं।  समाज में अमानवीय प्रताड़नाओं का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। राजधानी स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कुछ स्टूडेंट्स ने खाने में छिपकली को लेकर हंगामा किया। इसके कारण मैनेजमेंट ने कैंटीन बंद करवा दी और बाहर से भी टिफिन नहीं आने दे रहे हैं। हॉस्टल में स्टूडेंट्स भूख से तड़प रहे हैं। सोमवार की रात उन्होंने हंगामा किया लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।  राजधानी भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पिछले दिनों कुछ स्टूडेंट्स ने खाने में छिपकली होने का दावा किया था। हालांकि कैंटीन के कर्मचारियों ने उस संदिग्ध चीज को छिपकली नहीं शिमला मिर्च बताया था और विश्वास दिलाने के लिए उसको खुद खा भी लिया था, लेकिन फिर भी हंगामा किया गया और सोशल मीडिया पर वीडियो को वायरल किया गया। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए थे, लेकिन बात इतनी पर खत्म नहीं हुई। मैनेजमेंट ने स्टूडेंट्स के साथ बदले की कार्रवाई शुरू की है। स्टूडेंट्स ने बिना वजह यूनिवर्सिटी की कैंटीन को बदनाम करने के लिए शिमला मिर्च को छिपकली बढ़कर वीडियो वायरल किया था। अब मैनेजमेंट ने कैंटीन को बंद करवा दिया है और यूनिवर्सिटी कैंपस में बाहर से खाना नहीं आने दे रहे हैं। RGPV BHOPAL के भूखे छात्रों ने रात 12:00 बजे प्रदर्शन किया इसी के विरोध में सोमवार-मंगलवार रात 12 बजे तक मुख्य गेट पर छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। भूखे छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और व्यवस्था सुधारने की मांग की। छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद से उन्हें नियमित भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर टिफिन लेकर आने वाले व्यक्ति को गार्ड्स ने रोक दिया। छात्रों का कहना है कि जब कैंटीन बंद है, तो बाहर से खाना आने देना चाहिए, लेकिन प्रशासन ने इस पर भी पाबंदी लगा दी है। इससे छात्र रात में भूखे रहने को मजबूर हो गए। बदले की कार्रवाई की जा रही है सीवी रमन बॉयज हॉस्टल के 40 से 50 छात्र करीब 2 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य गेट तक पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और पूर्व वार्डन व वरिष्ठ फैकल्टी के खिलाफ भी विरोध जताया। बाहरी गुंडो को कोई नहीं रोकता, टिफिन वाले को रोक रहे हैं छात्रों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी में बाहरी लोग आकर विवाद करते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, लेकिन छात्रों के खाने के टिफिन को रोक दिया जाता है। इस दोहरे रवैये को लेकर छात्रों में भारी नाराजगी देखी गई।एक छात्र आर्यन देशमुख ने बताया कि मंगलवार से मिड टर्म परीक्षा शुरू हो रही है। छात्र दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन रात में खाने की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी बढ़ गई। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के समय इस तरह की अव्यवस्था उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। रात तक चलता रहा विरोध सोमवार रात करीब 12 बजे तक यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर प्रदर्शन जारी रहा। छात्रों ने मांग की कि जल्द से जल्द कैंटीन शुरू की जाए या बाहर से खाना लाने की अनुमति दी जाए, ताकि उन्हें भोजन की समस्या का सामना न करना पड़े। प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे छात्रों की नाराजगी और बढ़ सकती है।