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अब आसमान से देखिए बिहार: हेली टूरिज्म प्लान तैयार, 8 बड़े स्थलों को जोड़ा जाएगा

पटना. बिहार में पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार अब ऐसी सुविधा शुरू करने जा रही है, जिससे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान ही नहीं, बल्कि बेहद तेज भी हो जाएगा। हेली टूरिज्म से बदलेगा यात्रा का अनुभव नागरिक उड्डयन विभाग की पहल पर बिहार में हेली टूरिज्म सेवा शुरू करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत राज्य के आठ प्रमुख पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे लंबी और थकाऊ यात्राओं से राहत मिलेगी। इन प्रमुख स्थलों को जोड़ा जाएगा इस सेवा में बोधगया, नालंदा, वैशाली, राजगीर, पटना साहिब, पावापुरी, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और विक्रमशिला जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल शामिल होंगे। सीनियर सिटिजन और विदेशी पर्यटकों को खास फायदा हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से इन जगहों तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। यह सुविधा खासतौर पर सीनियर सिटिजन, विदेशी पर्यटकों और वीआईपी यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। 5 साल का होगा अनुबंध, बनेंगे नए हेलीपैड नागरिक उड्डयन विभाग ने इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित कर चुकी है। हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी के साथ पांच वर्षों का अनुबंध किया जाएगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसके तहत हेलीपैड समेत अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। प्रत्येक हेलीकॉप्टर में 5-6 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। एयर कनेक्टिविटी भी होगी मजबूत राज्य सरकार हवाई बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। माना जा रहा है कि विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बिहार की पहचान अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगी। यह रोजगार के अवसर बढ़ाने और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

कोर्ट की अहम टिप्पणी: AI आधारित जानकारी पर फैसले नहीं, पंजाब हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने न्यायिक अधिकारियों से कहा है कि वे फैसले लिखने और कानूनी शोध करने के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी और कोपायलट जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का उपयोग न करें । पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को सोमवार (6 अप्रैल, 2026) को उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार-जनरल द्वारा जारी एक पत्र में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश ने उनसे कहा है कि वे अपने अधीन कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दें कि वे निर्णय लिखने और कानूनी शोध के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी, कोपायलट, मेटा इत्यादि सहित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का उपयोग न करें। इन निर्देशों का उल्लंघन गंभीर रूप से देखा जाएगा। इससे पहले, गुजरात उच्च न्यायालय ने किसी भी प्रकार के निर्णय लेने, न्यायिक तर्क, आदेश तैयार करने, निर्णय तैयार करने, जमानत संबंधी सजा पर विचार करने या किसी भी महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर रोक लगा दी थी । शनिवार (4 अप्रैल, 2026) को जिला न्यायिक न्यायाधीशों के एक सम्मेलन में अनावरण की गई गुजरात उच्च न्यायालय की एआई नीति के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग न्यायिक तर्क के प्रतिस्थापन के रूप में नहीं, बल्कि न्याय वितरण की गति और गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि चीफ जस्टिस ने विनती की है कि अपने अधीन काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों को यह आदेश दिया जाए कि वह फैसले लिखने और कानूनी खोज के लिए Chat GPT, Gemini, Copilot, Meta आदि सहित किसी भी AI टूल्स का इस्तेमाल न करें। इन आदेशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा।  

BSP में टर्बाइन ब्लास्ट: 8 मजदूर जख्मी, पीछे के रास्ते से सुरक्षित निकाले गए कर्मचारी

दुर्ग. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई स्टील प्लांट में आज आग लगने से मौके पर हड़कंप मच गया। इस घटना में 8 मजदूरों को चोटें आई है। घटना की सूचना पर आधा दर्जन से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची है। उच्च अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुंचे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टर्बाइन में ब्लास्ट हुआ, फिर आग फैलती गई। इसकी चपेट में कुछ कर्मचारी आए हैं। पीछे के रास्ते से बीएसपी कर्मचारी किसी तरह बाहर निकल सके। दो बीएसपी कर्मचारी और तीन ठेका श्रमिक को हल्की चोट आई है। एक बीएसपी कर्मचारी का पैर फ्रैक्चर हुआ है। घालयों का प्राथमिक उपचार मेन मेडिकल पोस्ट में करने के बाद सेक्टर 9 हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। यहां एक्सरे, ईसीजी आदि किया जा रहा है। केबल के सहारे उतकर मजदूरों ने बचाई जान पीबीएस 2 में आग लगने का कारण अब तक पता नहीं चल सका है। आग की चपेट में 2 नियमित कर्मचारी और 8 ठेका मजदूर आए थे। चारों तरफ से आग ने घेर लिया था। किसी तरह जान बचाने के लिए ऊपर-नीचे भागते रहे, लेकिन रास्ता नहीं मिला। छत पर भी गए, लेकिन वहां धुआं से कुछ समझ में नहीं आया। इसके बाद केबल को खोलकर विंडो में बांधा गया। इसके सहारे सबको बारी-बारी से नीचे टीन शेड पर उतारा गया। इस तरह सबकी जान बच सकी। सेक्टर 9 हॉस्पिटल में चल रहा घायलों का इलाज केबल से हथेली रगड़ खाने से छिल गई है, जिससे कर्मचारी जख्मी हुए हैं। एक कर्मचारी का पैर फ्रैक्चर हो गया है। घायलों का प्राथमिक उपचार मेन मेडिकल पोस्ट में करने के बाद सेक्टर 9 हॉस्पिटल लाया गया है। घायलों में कीर्ति कुमार भगत, महेंद्र कुशवाहा, महेंद्र जायसवाल, वैभव, ओमेंद्र कुमार तिस्दा, सुशांत, मनीष, अवधेश और शिव मोहन त्रिपाठी शामिल हैं।

भाजपा विधायक संजय पाठक के लिए माफी नहीं, कोर्ट में होगी हाजिरी

जबलपुर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व जज विनय सराफ की युगलपीठ ने आपराधिक अवमानना केस की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश के कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक को तलब किया है। कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की ओर से हलफनामा पेश किया गया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी। कोर्ट ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को गंभीरता से लिया और आगे की सुनवाई के लिए व्यक्तिगत पेशी जरूरी बताई। फोन करने से शुरू हुआ विवाद कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर याचिका में उल्लेख किया गया था कि विधायक से संबंधित कंपनी के खिलाफ अवैध उत्खनन के मामले में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने एक सितम्बर, 2025 को सुनवाई से इंकार कर दिया था। उन्होंने अपने आदेश में कहा था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। निष्पक्षता के लिए जज हुए अलग न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। साथ ही उन्होंने पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने के निर्देश भी दिए थे। आपराधिक अवमानना का केस दर्ज याचिका में कहा गया कि विधायक का यह कृत्य न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने दो अप्रैल को मामले का संज्ञान लेते हुए विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मुकुल रोहतगी ने की पैरवी सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की ओर से देश के पूर्व अटार्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्त मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उन्होंने तर्क दिया कि आपराधिक अवमानना में दंड तभी लागू होता है, जब गलती अक्षम्य हो या व्यक्ति उसे स्वीकार न करे।  

बस्तर में शांति के बाद विकास का नया चरण: ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ पर पीएम मोदी से चर्चा

बस्तर में शांति के बाद विकास का नया चरण : ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से चर्चा प्रधानमंत्री से मुलाकात में नक्सलवाद समाप्ति पर आभार, बस्तर के समग्र विकास की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  से भेंट कर बस्तर के समग्र, समावेशी एवं सतत विकास के लिए तैयार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश की तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके संकल्प और मार्गदर्शन में 31 मार्च तक माओवाद के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि अब बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद राज्य सरकार का फोकस तेजी से विकास, रोजगार सृजन और जनजीवन को सशक्त बनाने पर है। इसके तहत बस्तर रोडमैप 2.0 में एग्रो एवं एग्रो-फॉरेस्ट सेक्टर, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, और पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना की सफलता पर प्रधानमंत्री ने जताई प्रसन्नता मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बस्तर में अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज की रणनीति पर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की और कहा कि इससे गंभीर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किए गए कार्यों का नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक स्कूल उपलब्ध हैं, जहाँ 97 प्रतिशत बच्चों को मध्याह्न भोजन, गणवेश एवं पुस्तकें मिल रही हैं। 97 प्रतिशत गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जबकि अधिकांश गांव आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जुड़े हैं और 89 प्रतिशत ग्रामीणों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। मार्च 2026 तक राशन कार्ड एवं आधार कार्ड का संतृप्तिकरण 95 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। कनेक्टिविटी, आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर रोडमैप 2.0 के तहत ‘नियद नेल्ला नार योजना’ का विस्तार करते हुए अब इसमें 10 जिलों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें बस्तर के 7 जिलों के साथ गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना प्रारंभ की गई है, जो वर्तमान में बस्तर के 38 मार्गों पर संचालित है। साथ ही, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों से क्षेत्र में आत्मगौरव और नई ऊर्जा का संचार हुआ है। नक्सल-मुक्त पंचायतों में एल्वद योजना के तहत एक करोड़ रुपए तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं, वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई के क्षेत्र में तेजी से विस्तार मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि दंतेवाड़ा एजुकेशन सिटी की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में भी एजुकेशन सिटी बनाई जा रही है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी अब सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं।दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देउरगांव बैराज सहित 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिससे कृषि और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। आजीविका उन्नयन और आय वृद्धि पर केंद्रित रणनीति मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है, जिसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रति माह तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आत्मनिर्भर आजीविका क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और हितग्राहियों को एनआरएलएम, सहकारी समितियों, एफपीओ एवं वनधन केंद्रों से जोड़ा जाएगा। साथ ही, ‘बस्तर मुन्ने’ नामक संतृप्तता शिविर कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ और समस्याओं का त्वरित समाधान उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री को बस्तर आने का दिया न्यौता मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी  से विशेष स्नेह रखती है और प्रधानमंत्री का भी इस क्षेत्र के प्रति गहरा लगाव है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए रेल एवं सिंचाई परियोजनाओं के भूमिपूजन के लिए समय देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से हुई यह भेंट अत्यंत उपयोगी रही और उनके मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भविष्य की संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

आरजीपीवी में छिपकली कांड के बाद कैंटीन बंद, छात्रों ने गेट पर किया विरोध प्रदर्शन

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में छिपकली कांड के बाद कैंटीन बंद होने के बाद छात्रों के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बाहर से आने वाले टिफिन पर भी रोक लगा दी, जिससे छात्रों को रात में भोजन नहीं मिल पाया। इसी के विरोध में सोमवार-मंगलवार रात 12 बजे तक मुख्य गेट पर छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। भूखे छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और व्यवस्था सुधारने की मांग की। छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद से उन्हें नियमित भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं।  समाज में अमानवीय प्रताड़नाओं का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। राजधानी स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कुछ स्टूडेंट्स ने खाने में छिपकली को लेकर हंगामा किया। इसके कारण मैनेजमेंट ने कैंटीन बंद करवा दी और बाहर से भी टिफिन नहीं आने दे रहे हैं। हॉस्टल में स्टूडेंट्स भूख से तड़प रहे हैं। सोमवार की रात उन्होंने हंगामा किया लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।  राजधानी भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पिछले दिनों कुछ स्टूडेंट्स ने खाने में छिपकली होने का दावा किया था। हालांकि कैंटीन के कर्मचारियों ने उस संदिग्ध चीज को छिपकली नहीं शिमला मिर्च बताया था और विश्वास दिलाने के लिए उसको खुद खा भी लिया था, लेकिन फिर भी हंगामा किया गया और सोशल मीडिया पर वीडियो को वायरल किया गया। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए थे, लेकिन बात इतनी पर खत्म नहीं हुई। मैनेजमेंट ने स्टूडेंट्स के साथ बदले की कार्रवाई शुरू की है। स्टूडेंट्स ने बिना वजह यूनिवर्सिटी की कैंटीन को बदनाम करने के लिए शिमला मिर्च को छिपकली बढ़कर वीडियो वायरल किया था। अब मैनेजमेंट ने कैंटीन को बंद करवा दिया है और यूनिवर्सिटी कैंपस में बाहर से खाना नहीं आने दे रहे हैं। RGPV BHOPAL के भूखे छात्रों ने रात 12:00 बजे प्रदर्शन किया इसी के विरोध में सोमवार-मंगलवार रात 12 बजे तक मुख्य गेट पर छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। भूखे छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और व्यवस्था सुधारने की मांग की। छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद से उन्हें नियमित भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर टिफिन लेकर आने वाले व्यक्ति को गार्ड्स ने रोक दिया। छात्रों का कहना है कि जब कैंटीन बंद है, तो बाहर से खाना आने देना चाहिए, लेकिन प्रशासन ने इस पर भी पाबंदी लगा दी है। इससे छात्र रात में भूखे रहने को मजबूर हो गए। बदले की कार्रवाई की जा रही है सीवी रमन बॉयज हॉस्टल के 40 से 50 छात्र करीब 2 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य गेट तक पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और पूर्व वार्डन व वरिष्ठ फैकल्टी के खिलाफ भी विरोध जताया। बाहरी गुंडो को कोई नहीं रोकता, टिफिन वाले को रोक रहे हैं छात्रों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी में बाहरी लोग आकर विवाद करते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, लेकिन छात्रों के खाने के टिफिन को रोक दिया जाता है। इस दोहरे रवैये को लेकर छात्रों में भारी नाराजगी देखी गई।एक छात्र आर्यन देशमुख ने बताया कि मंगलवार से मिड टर्म परीक्षा शुरू हो रही है। छात्र दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन रात में खाने की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी बढ़ गई। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के समय इस तरह की अव्यवस्था उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। रात तक चलता रहा विरोध सोमवार रात करीब 12 बजे तक यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर प्रदर्शन जारी रहा। छात्रों ने मांग की कि जल्द से जल्द कैंटीन शुरू की जाए या बाहर से खाना लाने की अनुमति दी जाए, ताकि उन्हें भोजन की समस्या का सामना न करना पड़े। प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे छात्रों की नाराजगी और बढ़ सकती है।

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा: यूपी पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होंगे

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर चल रही अटकलों पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद ही संपन्न हो पाएंगे। मंत्री के इस तर्क ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं को इससे झटका लगना भी स्वाभाविक है। संजय निषाद ने क्या गिनाएं कारण संजय निषाद ने कहा कि पंचायत चुनाव एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया है। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और बिना आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हुए चुनाव कराना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अभी पिछड़ों और महिलाओं के आरक्षण की गिनती और व्यवस्था होनी बाकी है। मंत्री ने साफ कहा, "कोर्ट भी यही कहेगा कि बिना आरक्षण तय किए चुनाव कैसे कराया जा सकता है। इन सभी व्यवस्थाओं को पूरा करने में समय लगेगा, इसलिए विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होने की संभावना न के बराबर है।" अंदरूनी कलह का डर: "अपनों से ही भिड़ जाएंगे कार्यकर्ता" मंत्री ने चुनाव टलने के पीछे एक दिलचस्प राजनीतिक कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि यदि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव कराए जाते हैं, तो इससे पार्टी को भी नुकसान हो सकता है। संजय निषाद ने स्पष्ट किया, "पंचायत चुनाव में अक्सर एक ही गांव से भाजपा, सपा या निषाद पार्टी के ही चार-चार दावेदार आमने-सामने होते हैं। पार्टी किसके साथ खड़ी रहेगी? जो जीतेगा उसे पार्टी अपना लेगी, लेकिन बाकी तीन दावेदार पार्टी से नाराज हो जाएंगे। इससे पार्टी के भीतर ही गुटबाजी और कलह पैदा हो जाएगी। यह कलह विधानसभा चुनाव में नुकसान पहुंचाएगी।" ओपी राजभर के भी बदले सुर संजय निषाद के साथ ही सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर के भी सुर बदल गए हैं। अभी तक वह समय पर ही चुनाव और बैलेट पेपर छपने की बातें कहते थे। अब उन्होंने भी गेंद हाईकोर्ट के पाले में करने की बातें कहीं हैं। राजभर ने कहा कि हाईकोर्ट में मामला है। वहां से जो निर्देश होगा, उसी के अनुसार कार्य होगा। विपक्ष पर भी पड़ेगा असर संजय निषाद के इस बयान के बाद विपक्षी दलों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार की रणनीति ग्रामीण चुनावों को टालकर पूरा ध्यान विधानसभा 2027 की तैयारियों पर केंद्रित करने की है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय उम्मीदवार जो पिछले कई महीनों से तैयारी कर रहे थे, उनके लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है।

संशोधन अधिनियम के खिलाफ आवाज: अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

चंडीगढ़. फरीदाबाद स्थित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी की याचिका पर जवाब देने केंद्र और हरियाणा सरकार ने कोर्ट से कुछ समय मांगा है। सरकार के अनुरोध पर हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने संशोधन के माध्यम से असीमित और मनमाने अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं, जो निजी और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं। याचिका में जोड़ी गई नई धाराएं 44 बी और 46 शामिल हैं, जो छह जनवरी 2025 से लागू होंगी। इन धाराओं के तहत राज्य सरकार को गंभीर चूक या राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित चिंताओं के आधार पर किसी भी निजी विश्वविद्यालय के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन धाराओं में प्रयुक्त शब्दावली अस्पष्ट है, जिससे सरकार को अत्यधिक विवेकाधीन शक्ति मिलती है। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली के लाल किले पर हुए बम ब्लास्ट मामले में यूनिवर्सिटी का कनेक्शन मिलने के बाद सरकार ने अल-फलाह ट्रस्ट में सीनियर आइएएस अधिकारी डॉ. अमित अग्रवाल को प्रशासक नियुक्त किया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि संशोधन के तहत सरकार सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद भी विश्वविद्यालय पर नियंत्रण बनाए रख सकती है, जिससे निजी विश्वविद्यालय सरकारी संस्थानों में बदल सकते हैं। इसे संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन बताया गया है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जिसे वर्ष 2015 में यूजीसी से मान्यता मिली थी, ने अदालत को बताया कि वह मेवात क्षेत्र की वंचित आबादी को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। याचिका में आशंका जताई गई है कि यदि सरकार प्रशासक नियुक्त करती है, तो संस्थान का अल्पसंख्यक स्वरूप समाप्त हो जाएगा और क्षेत्र में चल रही सेवाएं प्रभावित होंगी। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

CG में स्वाइन फीवर अलर्ट: 200 सूअरों की मौत के बाद हड़कंप, संक्रमित फार्म को किया गया सील

दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर से कई सूअरों की मौत की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, नारधा-मुड़पार गांव के एक सूअर फार्म में इस खतरनाक वायरस के कारण लगभग 200 से अधिक सूअरों की मौत हो गई। संक्रमण की पुष्टि होते ही पशुपालन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बचे करीब 150 सूअरों को भी इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को वैज्ञानिक तरीके से दफना दिया। दरअसल 29 मार्च को सभी सुअरों के सैंपल लिए गए थे और एक अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हो गई थी। 6 अप्रैल तक अधिकांश सूअर मर चुके थे। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद विभाग की टीम पीपीई किट पहनकर मौके पर पहुंची और पूरे फार्म को खाली कराकर सील करने की प्रक्रिया शुरू की गई। संक्रमित मांस के सेवन से बचने की सलाह अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जिसमें सूअरों की मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत होती है। इसका कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि यह इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन संक्रमित मांस के सेवन से बचने की सलाह दी गई है। आसपास इलाके में प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी यह फार्म क्षेत्र में पोर्क सप्लाई का प्रमुख केंद्र था, जहां से अन्य जिलों और राज्यों में मांस भेजा जाता था। जिला प्रशासन ने आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। अन्य जिलों में भी सतर्कता जारी कर दी गई है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

वृंदावन में संत के पैर छुए भागवत, बोले- संघ भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए डंडा लेकर खड़ा रहेगा

मथुरा  संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। संघ प्रमुख ने कहा- समाज को गो-भक्त बनाया जाए, तो गो-हत्या अपने आप रुक जाएगी। जो लोग आज सत्ता में हैं, उनके मन में भी यह बात है। वे करना चाहते हैं, लेकिन कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है। गो-जागृति को मजबूत करना होगा। जब जनभावना तैयार हो जाएगी, तो व्यवस्था को भी उसे मानना पड़ेगा। कृष्ण भक्त संत मलूक दास का जन्म कौशांबी में खत्री परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया। यहां उन्होंने यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया बनाई, जिसे मलूक पीठ के नाम से जाना जाता है। संत का गोलोक गमन (मृत्यु) वृंदावन में हुआ, जहां उनकी समाधि बनी हुई है। संत मलूक दास का अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए, सबके दाता राम दोहा सबसे मशहूर हुआ। इसका अर्थ है कि अजगर किसी की नौकरी नहीं करता, पक्षी काम नहीं करता, लेकिन भगवान पर विश्वास हो तो राम जी सबका भला करते हैं।