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हरी खाद से बदल रही खेती की तस्वीर: कम लागत, बेहतर मुनाफा और स्वस्थ मिट्टी’

रायपुर हरी खाद से बदल रही खेती की तस्वीर: कम लागत, बेहतर मुनाफा और स्वस्थ मिट्टी’ छत्तीसगढ़ में खेती की पारंपरिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। रायगढ़ जिले में हरी खाद आधारित खेती किसानों के लिए एक प्रभावी और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रही है। यह पद्धति जहां मिट्टी की उर्वरता को दीर्घकालिक रूप से मजबूत कर रही है, वहीं किसानों को कम लागत में बेहतर मुनाफा भी दिला रही है। लैलूंगा विकासखंड के प्रगतिशील किसान जतिराम भगत इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। वे पिछले 22 वर्षों से जैविक और हरी खाद आधारित खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में उत्पादन थोड़ा कम लग सकता है, लेकिन समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होने पर उत्पादन स्थायी और बेहतर हो जाता है। उन्होंने इस वर्ष 2 एकड़ में विधि और लाइन कतार पद्धति से खेती कर प्रति एकड़ लगभग 15 क्विंटल धान और 9 क्विंटल चावल उत्पादन प्राप्त किया। उनकी लागत 15 से 20 हजार रुपये प्रति एकड़ रही, जबकि शुद्ध मुनाफा लगभग 80 हजार रुपये तक पहुंचा। कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन से पहले 15 मई के बाद हरी खाद की बुआई का उपयुक्त समय होता है। ढैंचा, सनई और मूंग जैसी फसलों को 45-50 दिन बाद खेत में मिलाने से मिट्टी में जैविक पोषक तत्वों की वृद्धि होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। लैलूंगा में हरी खाद का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। विभाग ने इस वर्ष 2000 एकड़ में हरी खाद बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया है। “यूरिया-डीएपी छोड़बो, हरी खाद बुआई करबो” जैसे संकल्प अब किसानों के बीच नई दिशा तय कर रहे हैं।  

सफर का नया अंदाज: अमृत भारत ट्रेनों ने उड़ान जैसी सुविधाओं से किया यात्रियों को मंत्रमुग्ध

चक्रधरपुर  भारतीय रेलवे अपने यात्रियों के सफर को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। शनिवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली स्टेशन पर 'नेक्स्ट जेनरेशन अमृत भारत कोच' के प्रस्तावित इंटीरियर डिजाइन और कलर स्कीम वाले सैंपल कोच का गहन निरीक्षण किया।  चक्रधरपुर रेल मंडल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन कोचों को विशेष रूप से यात्रियों की सुविधा और विजुअल अपील (सुंदरता) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  आधुनिक डिजाइन और समन्वित कलर थीम नए अमृत भारत कोच की सबसे बड़ी विशेषता इसका समन्वित (Coordinated) कलर थीम है। कोच के भीतर पीवीसी फ्लोरिंग से लेकर सीटों, बर्थ के रेक्सीन, स्नैक टेबल, पर्दे और यहां तक कि शौचालय क्षेत्र को भी एक ही कलर स्कीम में ढाला गया है। यह नया डिजाइन न केवल देखने में वैश्विक स्तर का लगता है, बल्कि यह बेहद टिकाऊ और रखरखाव में भी आसान है। सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान (HL-3 फायर सेफ्टी)  यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कोच निर्माण में इस्तेमाल की गई सभी सामग्री HL-3 फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुरूप है। इससे आग लगने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा न्यूनतम हो जाएगा।  इसके अलावा, सीटों और बर्थों पर उच्च गुणवत्ता वाले रेक्सीन का उपयोग किया गया है, जो लंबे समय तक खराब नहीं होंगे और यात्रियों को बेहतर कुशनिंग का अनुभव देंगे। चक्रधरपुर रेल मंडल ने स्पष्ट किया कि रोलिंग स्टॉक को आधुनिक बनाने की यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी ताकि भारतीय रेल वैश्विक मानचित्र पर अपनी नई पहचान बना सके।  हर वर्ग के यात्री का रखा गया ख्याल रेलवे का यह बदलाव किसी खास श्रेणी के लिए नहीं, बल्कि जनरल और स्लीपर क्लास सहित सभी वर्गों के लिए है। स्नैक टेबल को आकर्षक रंग दिए गए हैं और शौचालयों के डिजाइन में भी व्यापक सुधार किया गया है ताकि स्वच्छता बनी रहे। कोच की दीवारों और सामग्री को इस तरह तैयार किया गया है कि साफ-सफाई आसानी से की जा सके, जिससे कोच लंबे समय तक नए जैसे बने रहेंगे। वर्ल्ड क्लास यात्रा अनुभव का लक्ष्य निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे का मुख्य उद्देश्य हर श्रेणी के यात्रियों को 'वर्ल्ड क्लास' यात्रा अनुभव देना है। नेक्स्ट जेनरेशन अमृत भारत कोच इसी विजन का हिस्सा हैं। आने वाले समय में देश के विभिन्न रेल मार्गों पर इन आधुनिक कोचों को लगाने की योजना है, जिससे आम आदमी का रेल सफर सस्ता, सुरक्षित और अधिक सुखद बन सके।  

शिव महापुराण कथा: जीवन को दिशा देने वाली -पंडित दुर्गेश महाराज

शिव महापुराण कथा: जीवन को दिशा देने वाली -पंडित दुर्गेश महाराज बिलासपुर राष्ट्रीय धर्माचार्य पंडित दुर्गेश शर्मा जी ने शिव महापुराण के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिव महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नही बल्कि जीवन को सही दिशा देना वाली प्रेरणादायक मार्गदर्शिका है।इसमें आध्यात्मिक गहराई और जीवनउपयोगी संदेशों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।भगवान शिव की महिमा,उनके स्वरूप, भक्ति, धर्म एवं मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है।शिव महापुराण का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में सुख, शांति,समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। शिव महापुराण में मनुष्य को सत्य, धर्म, दया, करुणा, सेवा एवं परोपकार जैसे गुणों को अपनाने की शिक्षा दी गई है। यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि भगवान शिव अत्यंत दयालु एवं कृपालु है और सच्चे मन से की गई भक्ति से वे शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। पंडित दुर्गेश जी ने कथा प्रसंग में यह बताया कि जो व्यक्ति अपने जीवन में माता – पिता, गुरु एवं समाज के प्रति सम्मान रखता है, उनके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है। शिव महापुराण का श्रवण करने से मनुष्य के मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते है, पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ग्राम हांफा में शिव महापुराण की कथा श्रीमती कृष्णा पाण्डेय द्वारा पंडित छेदीलाल पाण्डेय की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया है। मुख्य यजमान के रूप में श्रीमती मीना कृष्ण कुमार दुबे कथा श्रवण कर रहे है।आज के कथा में श्रोतागण डॉ महेंद्र दुबे, चंद्रकांत उपाध्याय, मनीराम यादव, शत्रुघ्न उपाध्याय, रामखिलावन कौशिक, कौशल पाण्डेय, गोविंद यादव, मुकेश दुबे, श्यामसुंदर तिवारी,दिनेश उपाध्याय, बृजभूषण श्रीवास, संतोष पाण्डेय, शिव श्रीवास, कविता दुबे, गौरी दुबे, आशा श्रीवास , चित्रा तिवारी, बंटी कौशिक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।निकली आकर्षक झांकी- कथा प्रसंग के दौरान भगवान शिव की आकर्षक झाकी निकाली गई। नैनाभिराम झाकी की भक्तजनों ने आरती उतार कर पूजा अर्चना किया।

बुंडू नवरात्रि मेला कमिटी का हुआ गठन, बबलू प्रजापति बने अध्यक्ष और विधायक विकास मुंडा मुख्य संरक्षक

बुंडू  झारखंड के रांची के बुंडू में हर साल की तरह इस वर्ष भी बुंडू में नवरात्रि मेला पूरे धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इसको लेकर श्री श्री राधा रानी मंदिर परिसर में राधा रानी कमिटी, मौसी बाड़ी कमिटी और आम जनता की संयुक्त बैठक संपन्न हुई. तय हुई मेला की तिथि इस बैठक में मेला की तिथि को लेकर निर्णय लिया गया.तय किया गया कि मेले का आयोजन 19 अप्रैल से 28 अप्रैल तक किया जाएगा. परंपराओं का रखा जाएगा विशेष ध्यान मेला अवधि के दौरान पारंपरिक मान्यताओं का पालन करते हुए मांस, मछली और अंडा का सेवन वर्जित रहेगा. नई कमिटी का गठन स्थायी कमिटी के अध्यक्ष गणेश कुम्हार जी के स्वर्गवास के बाद अध्यक्ष का चुनाव किया गया है. नई कमिटी में अरुण जैन, मुख्यसंरक्षक विधायक विकास कुमार मुंडा, मेला संचालन के अध्यक्ष बबलू प्रजापति, उपाध्यक्ष बबलू कुंडू, राजकिशोर कुशवाहा सचिव रोशन महतो, उपसचिव जीतू महतो, कोषाध्यक्ष धनंजय प्रमाणिक, उपकोषाध्यक्ष सौरभ नायक, सदस्य आकाश लायक, राकेश मछुवा, रोहित नायक,बाली उरांव,संजय महतो, पवन राणा,ललित साहू, पिंटू दत्ता, संरक्षक नगर अध्यक्ष जितेंद्र उरांव, नगर उपाध्यक्ष रविन्द्र उरांव, बुंडू प्रमुख राजकुमार बिंझिया, प्रमोद सिंह, ढोलु शर्मा, सूरज प्रकाश भगत, रंजीत लाहेरी, रंजीत मोदक, मुख्य भंडारपाल मनोज कुंडू, सलाहाकर भंडारपाल मोहित नायक, तुलसी भगत चुने गए. शांति और भाईचारे का संदेश इस मौके पर सभी ने निर्णय लिया की नवरात्रि मेला पूरे शांति, सौदर्य और भाईचारा के साथ मनाने की अपील किया.

बिहार की राजनीति में नए युग की शुरुआत, 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार

पटना बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने साल 2005 से बिहार की कमान संभाली है, अब राज्य की सत्ता की बागडोर छोड़कर दिल्ली की राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पुष्टि की है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे. 2005 से लगातार सत्ता में रहे नीतीश नीतीश कुमार 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद संभालते रहे. राज्यसभा जाने के उनके फैसले ने सभी को चौंका दिया. नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति के एक युग का समापन माना जा रहा है. अप्रैल के दूसरे सप्ताह में बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है. बिहार की जनता और राजनीतिक पंडितों की निगाहें अब एनडीए के अगले कदम पर टिकी हैं, जो राज्य के भविष्य की नई दिशा तय करेगा. किन-किन नेताओं का नाम चर्चा में? इस बार राज्यसभा चुनाव के नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं. नीतीश कुमार के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी निर्वाचित हुए हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार भी ऊपरी सदन में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे. तीन-तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का एक साथ राज्यसभा जाना केंद्र में बिहार के बढ़ते सियासी वजन की ओर इशारा कर रहा है. राज्यसभा शपथ के बाद क्या होगा अगला कदम? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने उत्तराधिकारी की चर्चाओं को हवा दे दी है. राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री हो सकता है. कई पार्टी नेताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार को सत्ता सौंपने की वकालत की है, जिसके समर्थन में पटना की सड़कों पर पोस्टर भी देखे जा रहे हैं. एनडीए का केंद्रीय नेतृत्व और नीतीश कुमार मिलकर जल्द ही नए नाम पर मुहर लगा सकते हैं, ताकि शासन-प्रशासन में निरंतरता बनी रहे.

दूरस्थ गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाकर बदलाव ला रही हैं रिंगो कश्यप

रायपुर दूरस्थ गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाकर बदलाव ला रही हैं रिंगो कश्यप कोंडागांव जिले के मर्दापाल तहसील के अंतर्गत अंतिम छोर पर स्थित सुदूर ग्राम कुधुर, जो कभी माओवाद के प्रभाव के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर था, आज परिवर्तन की नई कहानी लिख रहा है। जहां कभी ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं की राशि निकालने के लिए लगभग 20 किलोमीटर दूर मर्दापाल के बैंक तक जाना पड़ता था, वहीं अब गांव में ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।     यह परिवर्तन संभव हुआ है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल और बीसी सखी के रूप में कार्यरत  रिंगो कश्यप के प्रयासों से। ग्राम पंचायत कुधुर के गुमियापाल पारा की निवासी रिंगो कश्यप न केवल कुधुर, बल्कि तुमड़ीवाल और टेकापाल के ग्रामीणों को भी घर-घर बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रही हैं।     रिंगो कश्यप ने वर्ष 2020 में “मां पार्वती स्व सहायता समूह” से जुड़कर अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद वर्ष 2024 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने बीसी सखी के रूप में कार्य प्रारंभ किया। आज उनके माध्यम से ग्रामीणों को महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि गांव में ही आसानी से प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही बिजली बिल भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन भी सरल हो गए हैं।    अब तक रिंगो कश्यप द्वारा 355 से अधिक सफल लेनदेन किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 6 लाख 75 हजार रुपये से अधिक है। इस कार्य ने न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को कम किया है, बल्कि रिंगो कश्यप के लिए भी स्व-रोजगार का सशक्त माध्यम बना है।     उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर एक छोटा किराना दुकान भी शुरू किया है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की आय हो रही है, और भविष्य में वे अपने व्यवसाय को और विस्तार देना चाहती हैं।     रिंगो कश्यप जैसी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों में विकास को नई दिशा मिल रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि समाज में अपनी एक नई पहचान भी स्थापित कर रही हैं।

दरभंगा एयरपोर्ट पर अकासा एयर की एंट्री, बेंगलुरु जाने वाले यात्रियों का इंतज़ार खत्म, जानें फ्लाइट का पूरा शेड्यूल

  दरभंगा दरभंगा और आसपास के जिलों के लोगों का लंबा इंतजार आज खत्म हो गया. रविवार से दरभंगा एयरपोर्ट से बेंगलुरु के लिए सीधी फ्लाइट शुरू हो गई है. अब मिथिलांचल के लोगों को बेंगलुरु जाने के लिए पटना या कोलकाता जाने की जद्दोजहद नहीं करनी होगी. अकासा एयर ने इस रूट पर अपनी रेगुलर सेवा शुरू कर दी है. संजय सरावगी ने जताई खुशी इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक संजय सरावगी ने क्षेत्र के लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह पूरे बिहार के लिए गर्व का पल है. सरावगी ने इस सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उड़ान योजना ने छोटे शहरों को बड़े सपनों से जोड़ दिया है. इस सीधी सेवा से बेंगलुरु में पढ़ने वाले छात्रों और वहां की बड़ी कंपनियों में काम करने वाले बिहार के युवाओं को घर आना-जाना बहुत सुलभ हो जाएगा. क्या है फ्लाइट का समय? अकासा एयर की यह फ्लाइट सप्ताह के सातों दिन उड़ान भरेगी. शेड्यूल के मुताबिक, विमान सुबह 9:40 बजे बेंगलुरु से उड़ेगा और दोपहर 12:15 बजे दरभंगा पहुंचेगा. इसके बाद, यही फ्लाइट दोपहर 12:50 बजे दरभंगा से टेक-ऑफ करेगी और दोपहर 3:30 बजे वापस बेंगलुरु लैंड करेगी. बुकिंग और कनेक्टिविटी लंबे समय से इस रूट पर विमान सेवा ठप रहने के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही थी. अब विभिन्न ट्रेवल साइट्स पर टिकटों की बुकिंग तेजी से शुरू हो गई है. पहले स्पाइसजेट इस रूट पर सेवा देती थी, लेकिन बीच-बीच में सर्विस बंद होने से यात्री परेशान रहते थे. अब अकासा एयर की एंट्री से उत्तर बिहार के कारोबारियों को नया बाजार मिलेगा और इलाके में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

NH-48 पर सुगम होगा सफर, खेरवाड़ा में एलिवेटेड स्ट्रक्चर के लिए केंद्र की मंजूरी, सीएम भजनलाल ने जताया आभार

जयपुर एलिवेटेड स्ट्रक्चर (ऊंची संरचना) बनाने की स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। इस में स्थानीय ट्रैफिक को प्रभावी ढंग से अलग किया जाएगा। खेरवाड़ा को बड़ी सौगात: 363.89 करोड़ की लागत से बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर, जाम से मिलेगी मुक्ति राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-48 के उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी खंड पर खेरवाड़ा शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। शर्मा ने शनिवार रात सोशल मीडिया के माध्यम से आभार जताते हुए कहा कि 363.89 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना यातायात सुगमता एवं सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करेगी और प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को और अधिक मजबूत बनाएगी। उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन पर निर्माण उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन पर खेरवाड़ा शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए 363.89 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी है। लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी यह परियोजना खेरवाड़ा कस्बे में एक एलिवेटेड स्ट्रक्चर (ऊंची संरचना) बनाने की स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। इस में स्थानीय ट्रैफिक को प्रभावी ढंग से अलग किया जाएगा और पहचाने गए 'ब्लैक-स्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्रों) को ठीक किया जाएगा, जिससे सड़क सुरक्षा में समग्र सुधार होगा। ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलेगी यह एलिवेटेड स्ट्रक्चर बाहर से आने वाले ट्रैफिक को स्थानीय ट्रैफिक से अलग कर गुजरने देगा, जिससे खेरवाड़ा शहर में ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलेगी और यात्रा का समय भी बचेगा। इससे आवागमन और भी सुगम और तेज हो जाएगा।

MP बोर्ड अपडेट: 1.29 लाख छात्रों ने नहीं पास की 5वीं-8वीं, मई में होगी रीटेस्ट

भोपाल प्रदेश में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में इस बार बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए हैं। दोनों कक्षाओं के करीब 1.29 लाख विद्यार्थी 33 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर सके। अब इन विद्यार्थियों को एक और मौका देते हुए मई के दूसरे सप्ताह में पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थी भी शामिल हो सकेंगे। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों और स्कूलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जहाँ पांचवीं में करीब 62 हजार और आठवीं में करीब 67 हजार विद्यार्थी फेल हुए हैं, ऐसे विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से पुनः परीक्षा में शामिल होना होगा। कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक व्यवस्था विभाग का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को एक और अवसर देकर उन्हें अगली कक्षा में आगे बढ़ने का मौका दिया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र ने स्कूलों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे फेल हुए विद्यार्थियों के लिए विशेष तैयारी कराएं। इसके तहत अतिरिक्त कक्षाएं, अभ्यास सत्र और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विद्यार्थी पुनः परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि कमजोर छात्रों की पहचान समय रहते की जाए और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग दिया जाए। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले नहीं होंगे प्रोन्नत दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विद्यार्थी पुनः परीक्षा में भी न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उसी कक्षा में दोबारा अध्ययन करना होगा। यानी ऐसे छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे नियमित रूप से अतिरिक्त समय देकर विद्यार्थियों को पढ़ाएं और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से उनकी समझ मजबूत करें। विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाते हुए बार-बार पुनरावृत्ति कराई जाए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकें। अतिरिक्त कक्षाएं और अभिभावकों की भूमिका स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि 5वीं और 8वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की तैयारी के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएं। इन कक्षाओं में विषयवार कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर विशेष जोर दिया जाए। इसके साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने और नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जाए। शिक्षकों को कहा गया है कि वे विद्यार्थियों के मन से परीक्षा का डर निकालें और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करें ताकि अगली परीक्षा में सफलता सुनिश्चित हो सके।  

रेल प्रशासन की ‘दमनकारी’ नीति के खिलाफ उतरे रनिंग कर्मचारी, वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने से किया साफ इनकार

 रामगढ़ धनबाद रेल मंडल के सीआईसी सेक्शन अंतर्गत रामगढ़ के पतरातू में, लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने कॉशन पेपर की अव्यवहारिक व्यवस्था के विरोध में रविवार को जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया है. लोको रनिंग कर्मियों का तर्क है कि ऑन-ड्यूटी तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा से संबंधित ‘कॉशन पेपर’ या तो क्रू लॉबी में ही दिया जाना चाहिए या सीधे इंजन में उपलब्ध कराना चाहिए. वर्तमान में प्रचलित प्रक्रिया के कारण रेल परिचालन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है. वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने पर जताई कड़ी आपत्ति आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत उन्हें सबसे पहले क्रू लॉबी में अपनी उपस्थिति दर्ज (रिपोर्ट) करानी पड़ती है, जिसके बाद उन्हें ‘कॉशन पेपर’ लेने के लिए वाईएम (Yard Master) कार्यालय जाना पड़ता है. इस दोहरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो जाता है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर इंजन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कर्मियों का आरोप है कि यदि इस प्रशासनिक देरी के कारण ट्रेन लेट होती है, तो रेल प्रशासन सारा दोष लोको पायलट के मत्थे मढ़ देता है. इसी दमनकारी नीति के विरोध में अब रनिंग कर्मियों ने वाईएम कार्यालय जाकर कॉशन पेपर लेने से साफ इनकार कर दिया है. सुरक्षित परिचालन के लिए ‘कॉशन पेपर’ का महत्व रेलवे की शब्दावली में ‘कॉशन पेपर’ एक अत्यंत संवेदनशील और अनिवार्य दस्तावेज होता है, जो ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए लोको पायलट को सौंपा जाता है. इसमें ट्रैक की वर्तमान स्थिति, विभिन्न खंडों (Sections) में गति सीमा (Speed Limit) और सिग्नल से संबंधित महत्वपूर्ण चेतावनियां दर्ज होती हैं. लोको पायलट इसी अधिकार पत्र के आधार पर ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. कर्मियों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज की प्राप्ति प्रक्रिया को जटिल बनाने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि चालक के मानसिक एकाग्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. रेलवे प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी पतरातू के लोको पायलटों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर अविलंब संज्ञान नहीं लिया गया और व्यवस्था को सरल नहीं बनाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे. उन्होंने रेलवे के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि डिजिटल युग में भी ऐसी पुरानी और थकाऊ प्रक्रियाओं को ढोना अनुचित है. फिलहाल, इस आंदोलन के कारण पतरातू क्षेत्र में रेल परिचालन की सुगमता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिस पर रेल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है.