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दरभंगा एयरपोर्ट पर अकासा एयर की एंट्री, बेंगलुरु जाने वाले यात्रियों का इंतज़ार खत्म, जानें फ्लाइट का पूरा शेड्यूल

  दरभंगा दरभंगा और आसपास के जिलों के लोगों का लंबा इंतजार आज खत्म हो गया. रविवार से दरभंगा एयरपोर्ट से बेंगलुरु के लिए सीधी फ्लाइट शुरू हो गई है. अब मिथिलांचल के लोगों को बेंगलुरु जाने के लिए पटना या कोलकाता जाने की जद्दोजहद नहीं करनी होगी. अकासा एयर ने इस रूट पर अपनी रेगुलर सेवा शुरू कर दी है. संजय सरावगी ने जताई खुशी इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक संजय सरावगी ने क्षेत्र के लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह पूरे बिहार के लिए गर्व का पल है. सरावगी ने इस सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उड़ान योजना ने छोटे शहरों को बड़े सपनों से जोड़ दिया है. इस सीधी सेवा से बेंगलुरु में पढ़ने वाले छात्रों और वहां की बड़ी कंपनियों में काम करने वाले बिहार के युवाओं को घर आना-जाना बहुत सुलभ हो जाएगा. क्या है फ्लाइट का समय? अकासा एयर की यह फ्लाइट सप्ताह के सातों दिन उड़ान भरेगी. शेड्यूल के मुताबिक, विमान सुबह 9:40 बजे बेंगलुरु से उड़ेगा और दोपहर 12:15 बजे दरभंगा पहुंचेगा. इसके बाद, यही फ्लाइट दोपहर 12:50 बजे दरभंगा से टेक-ऑफ करेगी और दोपहर 3:30 बजे वापस बेंगलुरु लैंड करेगी. बुकिंग और कनेक्टिविटी लंबे समय से इस रूट पर विमान सेवा ठप रहने के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही थी. अब विभिन्न ट्रेवल साइट्स पर टिकटों की बुकिंग तेजी से शुरू हो गई है. पहले स्पाइसजेट इस रूट पर सेवा देती थी, लेकिन बीच-बीच में सर्विस बंद होने से यात्री परेशान रहते थे. अब अकासा एयर की एंट्री से उत्तर बिहार के कारोबारियों को नया बाजार मिलेगा और इलाके में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

NH-48 पर सुगम होगा सफर, खेरवाड़ा में एलिवेटेड स्ट्रक्चर के लिए केंद्र की मंजूरी, सीएम भजनलाल ने जताया आभार

जयपुर एलिवेटेड स्ट्रक्चर (ऊंची संरचना) बनाने की स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। इस में स्थानीय ट्रैफिक को प्रभावी ढंग से अलग किया जाएगा। खेरवाड़ा को बड़ी सौगात: 363.89 करोड़ की लागत से बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर, जाम से मिलेगी मुक्ति राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-48 के उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी खंड पर खेरवाड़ा शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। शर्मा ने शनिवार रात सोशल मीडिया के माध्यम से आभार जताते हुए कहा कि 363.89 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना यातायात सुगमता एवं सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करेगी और प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को और अधिक मजबूत बनाएगी। उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन पर निर्माण उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन पर खेरवाड़ा शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए 363.89 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी है। लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी यह परियोजना खेरवाड़ा कस्बे में एक एलिवेटेड स्ट्रक्चर (ऊंची संरचना) बनाने की स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। इस में स्थानीय ट्रैफिक को प्रभावी ढंग से अलग किया जाएगा और पहचाने गए 'ब्लैक-स्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्रों) को ठीक किया जाएगा, जिससे सड़क सुरक्षा में समग्र सुधार होगा। ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलेगी यह एलिवेटेड स्ट्रक्चर बाहर से आने वाले ट्रैफिक को स्थानीय ट्रैफिक से अलग कर गुजरने देगा, जिससे खेरवाड़ा शहर में ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलेगी और यात्रा का समय भी बचेगा। इससे आवागमन और भी सुगम और तेज हो जाएगा।

MP बोर्ड अपडेट: 1.29 लाख छात्रों ने नहीं पास की 5वीं-8वीं, मई में होगी रीटेस्ट

भोपाल प्रदेश में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में इस बार बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए हैं। दोनों कक्षाओं के करीब 1.29 लाख विद्यार्थी 33 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर सके। अब इन विद्यार्थियों को एक और मौका देते हुए मई के दूसरे सप्ताह में पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थी भी शामिल हो सकेंगे। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों और स्कूलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जहाँ पांचवीं में करीब 62 हजार और आठवीं में करीब 67 हजार विद्यार्थी फेल हुए हैं, ऐसे विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से पुनः परीक्षा में शामिल होना होगा। कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक व्यवस्था विभाग का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को एक और अवसर देकर उन्हें अगली कक्षा में आगे बढ़ने का मौका दिया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र ने स्कूलों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे फेल हुए विद्यार्थियों के लिए विशेष तैयारी कराएं। इसके तहत अतिरिक्त कक्षाएं, अभ्यास सत्र और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विद्यार्थी पुनः परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि कमजोर छात्रों की पहचान समय रहते की जाए और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग दिया जाए। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले नहीं होंगे प्रोन्नत दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विद्यार्थी पुनः परीक्षा में भी न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उसी कक्षा में दोबारा अध्ययन करना होगा। यानी ऐसे छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे नियमित रूप से अतिरिक्त समय देकर विद्यार्थियों को पढ़ाएं और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से उनकी समझ मजबूत करें। विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाते हुए बार-बार पुनरावृत्ति कराई जाए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकें। अतिरिक्त कक्षाएं और अभिभावकों की भूमिका स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि 5वीं और 8वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की तैयारी के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएं। इन कक्षाओं में विषयवार कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर विशेष जोर दिया जाए। इसके साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने और नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जाए। शिक्षकों को कहा गया है कि वे विद्यार्थियों के मन से परीक्षा का डर निकालें और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करें ताकि अगली परीक्षा में सफलता सुनिश्चित हो सके।  

रेल प्रशासन की ‘दमनकारी’ नीति के खिलाफ उतरे रनिंग कर्मचारी, वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने से किया साफ इनकार

 रामगढ़ धनबाद रेल मंडल के सीआईसी सेक्शन अंतर्गत रामगढ़ के पतरातू में, लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने कॉशन पेपर की अव्यवहारिक व्यवस्था के विरोध में रविवार को जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया है. लोको रनिंग कर्मियों का तर्क है कि ऑन-ड्यूटी तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा से संबंधित ‘कॉशन पेपर’ या तो क्रू लॉबी में ही दिया जाना चाहिए या सीधे इंजन में उपलब्ध कराना चाहिए. वर्तमान में प्रचलित प्रक्रिया के कारण रेल परिचालन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है. वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने पर जताई कड़ी आपत्ति आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत उन्हें सबसे पहले क्रू लॉबी में अपनी उपस्थिति दर्ज (रिपोर्ट) करानी पड़ती है, जिसके बाद उन्हें ‘कॉशन पेपर’ लेने के लिए वाईएम (Yard Master) कार्यालय जाना पड़ता है. इस दोहरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो जाता है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर इंजन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कर्मियों का आरोप है कि यदि इस प्रशासनिक देरी के कारण ट्रेन लेट होती है, तो रेल प्रशासन सारा दोष लोको पायलट के मत्थे मढ़ देता है. इसी दमनकारी नीति के विरोध में अब रनिंग कर्मियों ने वाईएम कार्यालय जाकर कॉशन पेपर लेने से साफ इनकार कर दिया है. सुरक्षित परिचालन के लिए ‘कॉशन पेपर’ का महत्व रेलवे की शब्दावली में ‘कॉशन पेपर’ एक अत्यंत संवेदनशील और अनिवार्य दस्तावेज होता है, जो ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए लोको पायलट को सौंपा जाता है. इसमें ट्रैक की वर्तमान स्थिति, विभिन्न खंडों (Sections) में गति सीमा (Speed Limit) और सिग्नल से संबंधित महत्वपूर्ण चेतावनियां दर्ज होती हैं. लोको पायलट इसी अधिकार पत्र के आधार पर ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. कर्मियों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज की प्राप्ति प्रक्रिया को जटिल बनाने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि चालक के मानसिक एकाग्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. रेलवे प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी पतरातू के लोको पायलटों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर अविलंब संज्ञान नहीं लिया गया और व्यवस्था को सरल नहीं बनाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे. उन्होंने रेलवे के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि डिजिटल युग में भी ऐसी पुरानी और थकाऊ प्रक्रियाओं को ढोना अनुचित है. फिलहाल, इस आंदोलन के कारण पतरातू क्षेत्र में रेल परिचालन की सुगमता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिस पर रेल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है.

नक्शा पास कराने में नहीं चलेगी अफसरों की मनमानी, एआई तकनीक से गुरुग्राम में आएगी पारदर्शिता

गुरुग्राम गुरुग्राम में मकान का नक्शा पास करने के लिए नगर निगम अब अपना खुद का पोर्टल बनाएगा। यह पोर्टल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस होगा। नए पोर्टल की खासियत होगी कि इसमें नक्शे और दस्तावेजों की जांच के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सभी नक्शे सख्ती के साथ हरियाणा बिल्डिंग कोड के निर्धारित नियमों के तहत ही पास किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि एआई आधारित पोर्टल के शुरू होने से पूरी प्रक्रिया आसान, तेज और पारदर्शी हो जाएगी। बिल्डिंग कोड की अनदेखी पड़ेगी भारी आवेदन आते ही एआई अपने आप सिस्टम में अपलोड किए गए सभी कागजातों की छंटनी करेगा और सबमिट किए गए नक्शे की बारीकी से जांच करेगा। यदि नक्शे में हरियाणा बिल्डिंग कोड के नियमों की कोई अनदेखी की गई होगी या कोई खामी होगी, तो एआई तुरंत उसकी पहचान कर लेगा और एक रिपोर्ट बनाकर संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दे देगा। फिर अधिकारी इस पर ऐक्शन लेंगे। नहीं रहेगी अधिकारियों की दखलंदाजी इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों का मानवीय हस्तक्षेप न के बराबर रहेगा। एआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अधिकारी अंतिम रूप से नक्शा पास करने या उसे रद्द करने का फैसला लेंगे। गुरुग्राम के निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि निगम की तरफ से भवनों के नक्शे पास करने के लिए खुद का पोर्टल तैयार कर रहा है, जो एआई आधारित होगा। इसको लेकर टीम काम कर रही है। भारी परेशानी का करना पड़ रहा सामना गौरतलब है कि अभी तक प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के होब पास पोर्टल के माध्यम से ही भवनों के नक्शे पास किए जाते थे। पिछले करीब छह महीने से यह पोर्टल तकनीकी खामियों के चलते पूरी तरह से ठप पड़ा है। इस कारण अपना घर या भवन बनाने की चाह रखने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि फिलहाल मजबूरी में नगर निगम को अस्थायी तौर पर सरल पोर्टल के जरिए लोगों से नक्शा पास करने के आवेदन लेने पड़ रहे हैं। धड़ल्ले से बन रहे अवैध भवन नगर निगम के पास पूरे एक साल में नक्शा पास कराने के लिए बमुश्किल 500 के करीब ही आवेदन आते हैं। इसके विपरीत, नियमों की खुलेआम अनदेखी करके शहर में हर साल पांच हजार से ज्यादा अवैध भवनों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। लंबी और जटिल प्रक्रिया से बचने के लिए लोग बिना नक्शा पास कराए ही अवैध निर्माण का रास्ता चुन लेते हैं। निगम को उम्मीद है कि नए एआई आधारित पोर्टल के शुरू होने से यह पूरी प्रक्रिया इतनी आसान, तेज और पारदर्शी हो जाएगी कि लोग खुद आगे नक्शा पास करवाएंगे।

बिहार में खरमास खत्म होने से पहले गैस की किल्लत ने बढ़ाई टेंशन, कालाबाजारी करने वालों पर एस्मा के तहत होगी कार्रवाई

पटना  बिहार में 14 अप्रैल को खरमास खत्म होते ही शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी, लेकिन इस बार दूल्हे और उनके परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं. पटना सहित कई जिलों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत जारी है. शादियों के घरों में इस बात का डर सता रहा है कि अगर समय पर सिलेंडर नहीं मिला, तो बारातियों के स्वागत और खाने-पीने का इंतजाम कैसे होगा. प्रशासन ने अभी तक शादी-ब्याह जैसे आयोजनों के लिए किसी अतिरिक्त कोटे की व्यवस्था नहीं की है. शादी वाले घरों में बढ़ी टेंशन शादी समारोहों के लिए बुकिंग तो महीनों पहले हो चुकी है, लेकिन अब गैस की कमी ने संचालकों के हाथ-पांव फुला दिए हैं. पटना के बेली रोड और दीघा आशियाना रोड के बैंक्वेट हॉल प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें जरूरत का आधा कमर्शियल सिलेंडर भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मेहमानों के सामने परोसे जाने वाले व्यंजनों की लिस्ट छोटी करनी पड़ सकती है. वहीं, जिन घरों में श्राद्ध या अन्य आकस्मिक आयोजन हैं, वहां के लोग एक-एक सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. कालाबाजारी करने वालों पर एस्मा के तहत कार्रवाई गैस संकट की गंभीरता को देखते हुए डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने अधिकारियों और गैस एजेंसियों के साथ आपात बैठक की है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो भी एजेंसी या व्यक्ति कालाबाजारी, ओवर-प्राइसिंग या गैस के अवैध उपयोग में शामिल पाया जाएगा, उस पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए.     जिलाधिकारी, पटना द्वारा लोक शिकायत के अपीलीय मामलों की सुनवाई की गई तथा परिवादों का निवारण किया गया। पदाधिकारियों को पूर्ण पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं संवेदनशीलता के साथ जन-शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण समाधान तथा जनहित के कार्यों का संवर्द्धन करने का निदेश दिया गया। प्रशासन ने लापरवाही बरतने वालों पर एस्मा (ESMA) के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है. उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जिला कंट्रोल रूम का नंबर (0612-2219810) जारी किया गया है, जहां 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. 1.71 लाख तक पहुंचा बैकलॉग स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एलपीजी सिलेंडर का बैकलॉग 1.71 लाख तक पहुंच गया है. लोग बुकिंग के बावजूद समय पर गैस नहीं पा रहे हैं. कई उपभोक्ताओं को फर्जी डिलीवरी मैसेज मिलने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे नाराजगी बढ़ रही है. प्रशासन ने कालाबाजारी और ओवरप्राइसिंग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. गैस एजेंसियों को रिस्पॉन्सिव तरीके से काम करने को कहा गया है, वहीं गड़बड़ी मिलने पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो रही है.

सरायपाली सीएचसी में सुरक्षित मातृत्व की ओर महत्वपूर्ण उपलब्धि तीसरा सफल सिजेरियन

रायपुर महासमुंद जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायपाली में सुरक्षित मातृत्व सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। यहां चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक तीसरा सिजेरियन (सी-सेक्शन) ऑपरेशन करते हुए 26 वर्षीय महिला नरगिस का सुरक्षित प्रसव कराया, जिसमें उन्होंने 3.2 किलोग्राम वजनी स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने इस सफलता पर चिकित्सा दल को बधाई देते हुए कहा कि राज्य शासन की प्राथमिकता सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना एवं आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। सरायपाली सीएचसी इस दिशा में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। इस जटिल ऑपरेशन को डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. के. वी. किरण कुमार, डॉ. कुणाल नायक, स्टाफ नर्स प्रगति शर्मा एवं समीर पटेल की टीम ने कुशलतापूर्वक संपन्न किया। यह सफलता स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग और विशेषज्ञता को दर्शाती है। प्रसव के पश्चात जच्चा एवं शिशु दोनों स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में सुरक्षित हैं। सरायपाली सीएचसी में मिल रही सुलभ एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से क्षेत्रीय नागरिकों में संतोष और विश्वास बढ़ा है।

दरभंगा से बेंगलुरु तक सीधी उड़ान शुरू, मिथिला के यात्रियों में खुशी की लहर

 दरभंगा  दरभंगा और बेंगलुरु के बीच अकासा एयर की सीधी उड़ान सेवा रविवार से शुरू हुई। पहले दिन दोनों ओर से विमान की सीटें फुल रहीं। बेंगलुरु से विमान ने 9:40 में दरभंगा के लिए उड़ान भरी। हवाई मार्ग पर दो घंटे 35 मिनट गुजारकर 12:15 में दरभंगा एयरपोर्ट पर लैंडिंग हुई। रनवे पर वाटर कैनन से फुहार छोड़कर विमान का स्वागत किया गया। विमान के अंदर बैठे यात्रियों को गुलाब और चाकलेट देकर खुशियां बांटी गई। इसके बाद सांसद सह दरभंगा एयरपोर्ट सलाहकार समिति के चेयरमैन डा. गोपालजी ठाकुर ने एयरपोर्ट पर यात्रियों को बोर्डिंग पास देकर बेंगलुरु के लिए विदा किया। कहा कि एक वर्ष में दरभंगा एयरपोर्ट से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में 57 प्रतिशत की वृद्धि देश स्तर पर एक उदाहरण है। दरभंगा-बेंगलुरु के बीच अकासा की सीधी उड़ान सेवा का शुभारंभ होना संपूर्ण मिथिला क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस क्रम में अकासा के मैनेजर रवि शुक्ला ने सांसद डा .ठाकुर का पाग, अंगवस्त्रम एवं बुके देकर सम्मानित किया। सांसद डा. ठाकुर ने इस उड़ान सेवा के शुभारंभ किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू के नेतृत्व में दरभंगा एयरपोर्ट नित नए आयाम हासिल कर रहे हैं। इसी उपलब्धि का उदाहरण है कि दरभंगा बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ान सेवा का शुभारंभ हुआ। यह नई उड़ान न केवल दरभंगा को देश और दुनिया से सीधे जोड़ेगी, बल्कि मिथिला के विकास, रोजगार और पर्यटन में भी नए आयाम खोलेगी। स्पाइसजेट के विमान में हवाई सफर में होती थी परेशानी बेंगलुरु की फ्लाइट से पहुंचे यात्री मोहमदपुर पिंडारूच निवासी अरविंद कुमार साह ने बताया कि परिवार के साथ बेंगलुरु में रहकर ठेकेदारी करते हैं। वहां से स्वजन से मिलने के लिए साल में दो से तीन बार आना जाना हो जाता है। स्पाइसजेट के विमान से आने जाने में काफी परेशानी झेलना पड़ती थी। किराया में भी मनमानी थी। उड़ान की निश्चितता को लेकर मन में संशय बना रहता था। कई बार बगैर कोई सूचना दिए सेवा को महीनों के लिए ठप कर देते थे। कनेक्टिंग फ्लाइट में अधिक पैसे खर्च करने पड़ते थे अथवा पटना एयरपोर्ट से हवाई सफर को मजबूर हो रहे थे। अब दरभंगा-बेंगलुरु के बीच अकासा के आने से उन सभी परेशानियों से राहत की उम्मीद है। अकासा में टाइम टेबल का खासा ध्यान रखा जाता है। अभी शुरुआत में ही टिकट के दाम में काफी राहत है। मधुबनी जिले के भंवरा निवासी अर्जुन कुमार ने बेंगलुरु में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। कहते हैं कि कई बार दरभंगा और बेंगलुरु के बीच स्पाइसजेट के विमान में सफर किए हैं। अकासा के विमान में यात्रा कर अच्छा लगा है। स्पाइसजेट हवाई सफर के दौरान सुविधा के नाम पर केवल खानापूरी कर रही थी। अकासा के विमान में हवाई सफर करने पर संतुष्टि हुई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बेंगलुरु की सीधी हवाई सेवा का किया स्वागत‎ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और दरभंगा विधायक संजय सरावगी ने दरभंगा से बेंगलुरु के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू होने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे मिथिलांचल के विकास, व्यापार और शिक्षा के लिए बड़ी सौगात बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। एक विज्ञप्ति में सरावगी ने कहा कि इससे लोगों के लिए बेंगलुरु की यात्रा अब आसान हो गई। दरभंगा से सीधे बेंगलुरु के लिए हवाई सेवा शुरू होना पूरे मिथिलांचल और बिहार के लिए अत्यंत हर्ष एवं गर्व का विषय है। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी तथा व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। दरभंगा जैसे महत्वपूर्ण शहर को देश के प्रमुख आईटी हब बेंगलुरु से जोड़ना बिहार की प्रगति की दिशा में एक बड़ा कदम है। पूरे मिथिला क्षेत्र में बेंगलुरु के लिए सीधी हवाई सेवा का लगातार आग्रह भी किया जा रहा था। पूर्व में सीधी सेवा थी लेकिन पिछले छह महीने से स्पाइसजेट ने यह सेवा बंद कर दी थी, जिससे लोगों को तकलीफ हो रही थी। अकासा की सेवा प्रारंभ होने पर अधिकारियों और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया है।  

देशभर के राइडर्स का जगदलपुर में जमावड़ा, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल से बस्तर को मिली नई पहचान

रायपुर देशभर के राइडर्स का जगदलपुर में जमावड़ा, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल से बस्तर को मिली नई पहचान बस्तर की धरती एक बार फिर रोमांच, ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आई, जब बस्तर राइडर्स मीट 2026 का भव्य आयोजन गरुड़ा राइडर क्लब के तत्वावधान में किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए बाइकर्स और एडवेंचर प्रेमियों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। देशभर के राइडर्स का जगदलपुर में जमावड़ा, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल से बस्तर को मिली नई पहचान इस आयोजन में बाइक स्टंट्स, राइडिंग शो और एडवेंचर एक्टिविटीज ने युवाओं में जबरदस्त उत्साह भर दिया। राइडर्स ने अपनी बेहतरीन स्किल्स का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित कर दिया। जहां एक ओर एडवेंचर का जोश था, वहीं दूसरी ओर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी पूरे शबाब पर दिखी। लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। यह आयोजन आधुनिकता और परंपरा का बेहतरीन संगम बनकर उभरा। कार्यक्रम में उन प्रभावशाली व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने बस्तर की पहचान को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसमें इन्फ्लुएंसर्स, कलाकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल  द्वारा होटल एम्बिशन में विशेष स्टॉल लगाया गया, जहां बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की जानकारी दी गई। यह पहल राज्य सरकार की उस सोच को दर्शाती है, जिसके तहत स्थानीय पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार लगातार बस्तर जैसे आदिवासी अंचलों को विकास और पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है। इस प्रकार के आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और अवसर भी प्रदान करते हैं। सरकार की योजनाओं और पर्यटन मंडल की सक्रिय भागीदारी से बस्तर आज एक उभरते पर्यटन एवं एडवेंचर हब के रूप में सामने आ रहा है। बस्तर अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि एडवेंचर और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी तेजी से उभर रहा है।

स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025 लागू

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को पशुपालन के लिए प्रेरित कर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। हमारा संकल्प है कि हम प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को निरंतर बढ़ाएंगे और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाएंगे। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में पशुपालन विभाग को अब गौपालन विभाग का नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में “स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025” लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गोवंश के आश्रय और भरण-पोषण के लिए 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनके निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। ग्वालियर स्थित आदर्श गौशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में सांची ब्रांड को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ करार किया गया है। गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में गौसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं को चारा-भूसा अनुदान के लिए 505 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। गौशालाओं में गोवंश के बेहतर आहार की व्यवस्था के लिए प्रति गोवंश दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। घायल अथवा असहाय गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पशुपालन और डेयरी विकास को गति देने के लिए “मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना” का नाम परिवर्तित कर “डॉ. भीमराव अंबेडकर विकास योजना” किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए लगभग 42 लाख रुपये तक ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। दुग्ध संकलन क्षमता को बढ़ाते हुए 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक दुग्ध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। अगले 5 वर्षों में दूध संकलन कवरेज वाले गांवों की संख्या 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार करने का लक्ष्य है। इसी अवधि में प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की जाएगी। अब तक प्रदेश में 1,181 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है और 617 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय बनाया गया है। इसमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन भी शामिल है। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम और नस्ल सुधार कार्यक्रम सहित विभिन्न योजनाओं का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन जारी है। अति पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 1500 “मैत्री” (मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया) केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिसके माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा पशु नस्ल सुधार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।