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स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025 लागू

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को पशुपालन के लिए प्रेरित कर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। हमारा संकल्प है कि हम प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को निरंतर बढ़ाएंगे और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाएंगे। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में पशुपालन विभाग को अब गौपालन विभाग का नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में “स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025” लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गोवंश के आश्रय और भरण-पोषण के लिए 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनके निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। ग्वालियर स्थित आदर्श गौशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में सांची ब्रांड को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ करार किया गया है। गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में गौसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं को चारा-भूसा अनुदान के लिए 505 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। गौशालाओं में गोवंश के बेहतर आहार की व्यवस्था के लिए प्रति गोवंश दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। घायल अथवा असहाय गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पशुपालन और डेयरी विकास को गति देने के लिए “मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना” का नाम परिवर्तित कर “डॉ. भीमराव अंबेडकर विकास योजना” किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए लगभग 42 लाख रुपये तक ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। दुग्ध संकलन क्षमता को बढ़ाते हुए 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक दुग्ध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। अगले 5 वर्षों में दूध संकलन कवरेज वाले गांवों की संख्या 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार करने का लक्ष्य है। इसी अवधि में प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की जाएगी। अब तक प्रदेश में 1,181 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है और 617 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय बनाया गया है। इसमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन भी शामिल है। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम और नस्ल सुधार कार्यक्रम सहित विभिन्न योजनाओं का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन जारी है। अति पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 1500 “मैत्री” (मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया) केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिसके माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा पशु नस्ल सुधार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।  

पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए लगाएं पौधे

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका ने रविवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों और जशपुर विकासखंड के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किए एक पेड़ मां के नाम अभियान का बेहतर क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिले के संभावित टीबी मरीजों की जानकारी ली और मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को मरीजों का बेहतर इलाज करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्तन कैंसर की भी विशेष जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराए जाए मरीजों को मेडिकल कॉलेज रायपुर अम्बिकापुर और एम्स रायपुर भेजकर ईलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। राज्यपाल  रमेन डेका ने सिकल सेल बीमारी और रेड क्रॉस सोसायटी की गतिविधियों की भी जानकारी ली ‌। उन्होंने कहा कि रेड क्रॉस सोसायटी विशेष पिछड़ी जनजाति बसाहटों और गांव गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। इस अवसर पर कलेक्टर  रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ.लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, वनमंडला अधिकारी  शशि कुमार और जिला स्तरीय और विकास खंड अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और बिरहोर परिवार के लिए प्रत्येक माह मेडिकल कैंप लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए कहा है और उनके जीवन शैली में बदलाव लाने के लिए शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।  उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति बसाहटों में शाम के समय विभिन्न गतिविधियों में शामिल करके उनका बौद्धिक और कौशल विकास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिले में नावाचार को भी बढ़ावा देने के लिए कहा है और संरक्षित जनजाति परिवारों के लिए पायलेट प्रोजेक्ट चालू करने के निर्देश दिए हैं।   राज्यपाल  रमेन डेका ने बच्चों को नशापान से दूर रखने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने समीक्षा के दौरान जशपुर जिले की लखपति दीदी मती लालमणि प्रजापति को सम्मानित करने की बात कही उन्होंने कहा लखपति दीदी ने बढ़िया काम किया है उन्हें राजभवन में सम्मानित किया जाएगा। राज्यपाल  रमेन डेका ने जशपुर जिले के स्व सहायता समूह की महिलाओं का आत्मनिर्भर बनाने के लिए और हस्तकला में पारंगत बनाने के लिए समूहों की दीदियों को आसाम और उड़ीसा राज्य भेजने के निर्देश दिए है‌ ताकि समूह की महिलाएं बाजार की मांग के अनुसार नया डिजाइन के साड़ी,साल और अन्य सामग्री तैयार कर सके।  रमेन डेका ने जल संरक्षण और संवर्धन के लिए बेहतर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। छोटे और बड़े किसानों के खेतों में डबरी निर्माण और पुराने कुआं का जिर्णोद्धार करने के निर्देश दिए हैं। योग को बढ़ावा देने के लिए नियमित अभ्यास को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा के दौरान उन्होंने वरिष्ठ नागरिक और 75 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों का आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए कहा है।   किसानों का आर्थिक विकास हो इसके लिए खेती के आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए कहा है। किसानों को वरमी कम्पोस्ट खाद और आर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। समीक्षा बैठक में कलेक्टर रोहित व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि जल संरक्षण संवर्धन के तहत रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, अमृत सरोवर,सोकपिट और मैजिक पिट बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रेरित किया जा रहा है। स्वच्छता को बढ़ावा दिया जा रहा है गांव में सेग्रेशन शेड एवं डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। जिले के सभी विकास खंड में 100 दिवसीय निक्षय निरामय अभियान चलाया जा रहा है। जिला मुख्यालय में जिला ग्रंथालय संचालित किया जा रहा है प्रातः 6 बजे से रात 11 बजे तक संचालित होता है जहां बच्चों की सुविधा के लिए निःशुल्क वाई फाई की सुविधा दी गई है। जिला ग्रंथालय में 6425 पुस्तकें उपलब्ध है। कलेक्टर ने बताया कि जिले में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए आगामी 7 अप्रैल से अन्वेषण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जशपुर जिले के विघार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और इसरो की उपलब्धियों से परिचित कराने के लिए स्पेस ऑन व्हील्स अन्वेषण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।  

राज्यपाल ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन को जन-आंदोलन बनाने का आहवान किया

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन प्रयासों को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने  आहवान करते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र को अपनाकर ही इस अनुवांशिक बीमारी से समाज को मुक्त किया जा सकता है। राज्यपाल  पटेल रविवार को बदनावर के सिविल अस्पताल के नवीन भवन के आभासी माध्यम से लोकार्पण के बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल  पटेल ने कहा है कि सिकल सेल उपचार के विषय मे भ्रामक जानकारियों से भ्रमित नहीं हो। सिकल सेल उपचार के प्रति किसी भी प्रकार की भ्रांति नही पालें। केवल पंजीकृत चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार ही दवाइयों का नियमित सेवन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बीमारी को निरंतर उपचार और सही जानकारी के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 31 लाख से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से जागरूकता बढ़ाने के लिए “सिकल सेल मित्र” तैयार किए जा रहे हैं, जो इस मिशन में सेतु का कार्य करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाते हुए मरीजों के लिए डिजिटल कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उपचार अधिक सुगम और प्रभावी होगा।  राज्यपाल  पटेल ने बदनावर प्रवास के दौरान 'संकल्प से समाधान अभियान' के समापन कार्यक्रम मे शासन कि विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान किए। स्थल पर शासकीय विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल के समक्ष जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जिला रेडक्रॉस सोसायटी धार एवं अरविंदो आयुर्विज्ञान संस्थान, इन्दौर के मध्य अनुबंध (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। अनुबंध के तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में प्रति तीन माह में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वृहद स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा।  “संकल्प से समाधान अभियान” के तहत 80 शिविरों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किए गए है। राज्यपाल को वर्ष 2025-26 में रेडक्रॉस की गतिविधियों से परिचित कराया गया। बताया गया कि  जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, सिकल सेल जागरूकता रैली, रक्तदान शिविर, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, पोषण कार्यशालाएं एवं CPR प्रशिक्षण जैसे नवाचार किए गए है। साथ ही स्वच्छता अभियान एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से जन-जागरूकता को भी बढ़ावा दिया गया है। वृहद स्वास्थ्य शिविर में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 688 मरीजों का निःशुल्क उपचार किया गया, जिसमें 384 महिलाएं एवं 304 पुरुष शामिल हुये।         इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  सावित्री ठाकुर, विधायक  नीना विक्रम वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, नगर पालिका अध्यक्ष  मीना शेखर यादव,  पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और शहीद नरेंद्रसिंह राठौर के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।    

डेढ़ साल से फरार नकल गिरोह का मुख्य आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे, हाई कोर्ट एलडीसी और ईओ-आरओ भर्ती में की थी धांधली

जयपुर राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) ने दो सार्वजनिक परीक्षाओं में ब्लूटूथ् डिवाइस से नकल करने का आरोपी राजेश कुमार रेवाड़ को गिरफ्तार कर लिया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसओजी) विशाल बंसल ने शनिवार को बताया कि इस मामले में आरोपी राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। बंसल ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा लिपिक ग्रेड द्वितीय के पदों पर सीधी भर्ती के लिए संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2022, 12 मार्च एवं 19 मार्च 2023 को आयोजित की गई थी और संगठित नकल गिरोह के मुख्य अभियुक्त राजेश कुमार निवासी रुखासर रतनगढ चुरु का परीक्षा 19 मार्च को परीक्षा केंद्र नेहरु ज्योति सीनीयर सेकेंडरी स्कूल जयपुर था। प्रश्न पत्र के उत्तरों की नकल करवाई गिरोह के मुख्य अभियुक्त पौरव कालेर द्वारा सालासर से मोबाइल फोन से राजेश कुमार को परीक्षा केंद्र में ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से प्रश्न पत्र के उत्तरों की नकल करवाई थी। राजस्व अधिकारी ग्रेड द्वितीय एवं अधिशाषी अधिकारी (ईओ एवं आरओ) वर्ग चतुर्थ (स्वायत शासन विभाग ) प्रतियोगी परीक्षा वर्ष 2022 में भी राजेश कुमार वांछित है। ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से नकल यह परीक्षा 14 मई को आयोजित की गई थी और इसमें भी ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से नकल की थी। इन दोनों मामलों में राजेश कमार डेढ़ वर्ष से फरार चल रहा था और इसकी गिरफ्तारी के लिए एसओजी जयपुर द्वार 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित किया हुआ था।

फेमस होने का खतरनाक जुनून, पेट्रोल पंप पर डीजल से नहलाई कार, राजस्थान के दो युवक गिरफ्तार

सिरोही लिस का कहना है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर मशहूर होने के इरादे से इस हरकत को अंजाम दिया था। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी खतरनाक हरकतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही की हद! डीजल से धोई स्कॉर्पियो, फेमस होने की चाहत में बनाई रील; गिरफ्तार राजस्थान के सिरोही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक युवक पेट्रोल पंप पर अपनी स्कॉर्पियो कार को डीजल से धोता नजर आ रहा है। इस घटना के बाद लोगों ने ईंधन की बर्बादी और पब्लिक सेफ्टी को लेकर काफी नाराजगी जताई है। हालांकि ऐसी हरकत करने वालों को इसका कतई अंदाजा नहीं था कि उनकी यह हरकत उनके लिए ही मुसीबत बन जाएगी। पुलिस ने इस मामले में महिपाल सिंह समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और उनकी गाड़ी भी जब्त कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्टंट शायद सोशल मीडिया पर 'रील' बनाने के लिए किया गया था। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर मशहूर होने के इरादे से इस हरकत को अंजाम दिया था। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी खतरनाक हरकतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तुरंत जांच और कार्रवाई आपको बता दें कि वीडियो वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा, जिसके बाद आरोपियों की पहचान के लिए जांच शुरू की गई। वायरल वीडियो पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सिरोही के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पुष्पेंद्र सिंह ने तुरंत जांच और कार्रवाई के निर्देश दे दिए थे। छीबा गांव के रहने वाले हैं आरोपी सिरोही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। आरोपी छीबा गांव के रहने वाले हैं। उन पर सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। रील में देखा जा सकता है कि एक शख्स पेट्रोल पंप पर बैखोफ खड़ा है और अपने हाथ से ही डीजल को कार पर कुछ ऐसे डाल रहा है जैसे पानी हो। गनीमत रही की कोई गड़बड़ नहीं हुई डीजल बेहद ही ज्वलनशील पदार्थ होता है अगर गलती से भी एक चिंगारी उसपर पड़ जाती तो कितना भयावह नजारा देखने को मिल सकता था। हालांकि कि गनीमत रही की ऐसा कुछ नहीं हुआ। पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की।

पंचायत प्रोत्साहन योजना में 14 जिलों ने किया बेहतर प्रदर्शन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश की पंचायतों को केन्द्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। वे निरंतर सशक्त बन रही हैं। केन्द्र सरकार कीयोजनाओं का लाभ उठाते हुए प्रदेश की पंयायतों विकास की गतविधियों को बेहतर क्रियान्वित कर रही हैं। मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और पंचायतों का प्रोत्साहन देने की योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है। पंचायतों को प्रोत्साहन देने की योजना का उद्देश्य पंचायतों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को उनके अच्छे विकासात्मक कार्यों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन सहित पुरस्कार दिए जा रहे हैं। भोपाल, नरसिंहपुर, सागर, छतरपुर, सीधी, पूर्वी निमाड़, हरदा, उज्जैन, जबलपुर, इंदौर, नीमच, गुना, ग्वालियर और झाबुआ पंयायतों ने प्रोत्साहन योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है। ग्राम पंचायत विकास योजना और परियोजना क्रियान्वयन एक सतत प्रक्रिया है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग करते हुए कुल 16,773 परियोजना कार्य पूरे किए गए हैं। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान का प्राथमिक उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों की क्षमता निर्माण कर पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाना, ग्राम पंचायत भवन और कम्प्यूटरीकरण जैसी अधोसंरचनात्मक सहायता प्रदान करना है। ई-पंचायतों पर मिशन मोड परियोजना (एमएमपी-ईपंचायत) में पंचायतों के डिजिटलीकरण की दिशा में ई-गवर्नेंस परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाता है। इससे पीआरआई के कामकाज में कार्यदक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता आई है। वर्तमान में पंद्रहवें वित्त आयोग (एफएफसी) के तहत, राज्यों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को केन्द्रीय वित्त आयोग की हस्तांतरित निधि आवंटित की जाती है। आयोग के अनुदान के दो घटक हैं—टाइड और अनटाइड। अनटाईड अनुदान कुल अनुदान का 40% है। इसका उपयोग वेतन या अन्य स्थापना व्यय को छोड़कर संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित 29 विषयों में स्थान-विशिष्ट की जरूरतों के लिए किया जा सकता है। टाइड अनुदान कुल अनुदान का 60% है। इसका उपयोग बुनियादी सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है जैसे स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति, घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मल और गाद प्रबंधन, पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन जैसे कार्य शामिल है। यदि किसी स्थानीय निकाय ने एक श्रेणी की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा कर दिया है, तो वह अन्य श्रेणी की धनराशि का उपयोग कर सकता है। उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदेश में पीआरआई के निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों को मिलाकर 9 लाख पदाधारियों को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद जैसे उत्कृष्टता संस्थानों के सहयोग से नेतृत्व/प्रबंधन विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्य उद्देश्य संचार, निर्णय लेने, वित्तीय प्रबंधन और टकराव समाधान सहित आवश्यक नेतृत्व कौशल को निखारना है। वर्तमान में पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि वे स्वयं के राजस्व स्रोतों को जुटा सकें। अब तक प्रदेश के 3,275 प्रतिभागियों को ओएसआर मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ई-गवर्नेंस पंचायतों में ई-गवर्नेंस को मजबूत बनाने और बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के तहत, स्थानीय ग्रामीण शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यदक्षता लाने के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप विकसित किए हैं। सिंगल साइन ऑन डिजिटल प्लेटफॉर्म, ईग्रामस्वराज ऐप पंचायत स्तर पर योजना, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इस ऐप को सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और ऑडिट ऑनलाइन ऐप के साथ एकीकृत किया गया है ताकि भुगतान में कोई परेशानी न हो, खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो और पंचायतों के खातों की लेखापरीक्षा की जा सके। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मध्यप्रदेश में 23,011 ग्राम पंचायतों में से 22,978 ग्राम पंचायतों (99.85%) ने अपने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को ईग्रामस्वराज पर अपलोड किया है और 21,950 ग्राम पंचायतों (95.5%) ने ईग्रामस्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस के माध्यम से विक्रेताओं को 2156.10 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं।  

अप्राकृतिक कृत्य के प्रयास में मासूम की हत्या, कोरबा में दिल दहला देने वाला मामला

कोरबा ग्राम पंचायत डोंगानाला के आश्रित ग्राम गणेशपुर में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। नशे में धुत एक युवक ने सात साल के मासूम की हत्या कर दी। आरोपित ने बच्चे को बहला-फुसलाकर सुनसान इलाके में ले जाकर अप्राकृतिक कृत्य करने की कोशिश की। बच्चे के विरोध करने पर पत्थर से सिर पर वार कर उसकी जान ले ली। तालाब से घर नहीं लौटा आयान, स्वजनों की बढ़ी चिंता पाली थाना अंतर्गत ग्राम गणेशपुर निवासी शिवकुमार खुरसेंगा का सात साल का बेटा आयान दो अप्रैल की दोपहर अपने साथियों के साथ गांव के तालाब में नहाने गया था। रोज की तरह अन्य बच्चे साथ गए थे, लेकिन नहाने के बाद बाकी बच्चे घर लौट आए, जबकि आयान वापस नहीं पहुंचा। देर शाम तक उसके घर नहीं आने पर स्वजन चिंतित हो उठे। आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसी बीच स्वजन को जानकारी मिली कि आयान को गांव में ही रहने वाले रंजीत कुमार 19 वर्ष के साथ अंतिम बार देखा गया था। पुलिस की सख्ती के बाद खुला राज इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। इसके साथ ही दूसरे दिन भी लगातार खोजबीन जारी रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। स्थिति गंभीर होने पर गांव में बैठक बुलाई गई, जिसमें ग्रामीणों और स्वजन ने मिलकर जानकारी जुटाने की कोशिश की। बैठक के दौरान शक के आधार पर रंजीत से पूछताछ की गई, लेकिन वह लगातार गोलमोल जवाब देता रहा। इससे ग्रामीणों का संदेह और गहरा गया। मामले की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी नागेश तिवारी मौके पर पहुंचे और युवक से सख्ती से पूछताछ की, तब पुलिस के दबाव में आरोपित टूट गया और उसने वारदात कबूल कर ली। अप्राकृतिक कृत्य का विरोध करने पर पत्थर से सिर कुचला आरोपित रंजीत ने बताया कि वह नशे की हालत में तालाब पहुंचा था। वहीं उसकी नजर आयान पर पड़ी और वह उसे बहला-फुसलाकर सुनसान जगह पर ले गया। वहां उसने बच्चे के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने की कोशिश की। विरोध करते हुए बच्चा चिल्लाने लगा, इससे घबराकर उसने (रंजीत) पास पड़े पत्थर से उसके सिर पर कई बार वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से मौके पर ही बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद शव को पड़ोसी गांव करतली के एक खेत में बने करीब 12 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया और वापस गांव लौट आया। पुलिस ने आरोपित की निशानदेही पर कुएं से बच्चे का शव बरामद कर लिया। मामले में आरोपित के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। नशे में आ जाती है दबी हुई विकृति बाहर गणेशपुर की घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। मनोविज्ञान के जानकार मानते हैं कि नशे की हालत में व्यक्ति का नियंत्रण कम हो जाता है और दबे हुए विकृत व्यवहार सामने आ सकते हैं। इस तरह की घटनाएं अकसर अचानक नहीं होतीं, बल्कि मानसिक असंतुलन, सामाजिक नियंत्रण की कमी और नशे की आदत का संयुक्त परिणाम होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गांव और कस्बों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि वे किसी भी व्यक्ति के साथ अकेले न जाएं, चाहे वह परिचित ही क्यों न हो। वहीं अभिभावकों को भी बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और देर होने पर तुरंत सतर्क होने की सलाह दी जाती है।  

भोपाल मेट्रो की लागत आसमान छू रही, भूमिगत कॉरिडोर में देरी पर अफसरों की चुप्पी

भोपाल राजधानी में मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण को लेकर मेट्रो प्रबंधन के दावों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। एक तरफ भोपाल रेलवे स्टेशन से पुल पातरा तक ट्विन टनल के निर्माण के लिए जिस टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उद्घाटन 30 मार्च को बड़ी धूमधाम से किया गया था, वह अब तक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसा इसलिए क्योंकि टीबीएम के पीछे लगाए जाने वाले बूस्टिंग के पार्ट अब तक इंस्टॉल नहीं हुए हैं। जबकि उद्घाटन के समय मेट्रो के अफसरों ने मशीन चालू कर फोटो खिंचवाए थे, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक चुप्पी ने पूरी परियोजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह देखकर कहना गलत नहीं होगा कि जब तैयारी पूरी नहीं थी, तो जल्दबाजी में उद्घाटन का दिखावा क्यों किया गया। हालांकि, इस सवाल का जवाब भी मेट्रो के अधिकारी देने से कतरा रहे हैं। मशीन से बूस्टिंग सिस्टम गायब: 6 दिन बाद भी प्रगति शून्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टीबीएम को आगे धकेलने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली यानी बूस्टिंग सिस्टम अब तक सक्रिय नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि इस प्रणाली से जुड़े कुछ अनिवार्य कलपुर्जे अभी तक मशीन में फिट ही नहीं किए गए हैं। उद्घाटन के समय प्रबंधन ने दावा किया था कि मशीन प्रतिदिन 5 से 7 मीटर की खुदाई करेगी, लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी प्रगति शून्य है। बिना बूस्टिंग सिस्टम के मशीन का आगे बढ़ना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, जिससे प्रोजेक्ट की समयसीमा पर असर पड़ना तय है। जर्जर इमारतें और सुरक्षा चिंताएं बनीं रोड़ा खुदाई शुरू न होने के पीछे तकनीकी कारणों के अलावा सुरक्षा के पहलू भी अहम हैं। हमीदिया रोड स्थित शालीमार ट्रेड सेंटर की हालत अत्यंत जर्जर है। टनल का मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरना है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदाई के दौरान होने वाले कंपन के कारण किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए काम को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटाई जा पा रही है। जर्जर इमारतों को सुरक्षित करना या उन्हें खाली कराना प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। इंदौर पर फोकस, भोपाल की रफ्तार सुस्त परियोजना से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि एमपी मेट्रो का पूरा ध्यान फिलहाल इंदौर मेट्रो पर केंद्रित है, जहां दूसरे चरण के कॉरिडोर के उद्घाटन की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। इस प्राथमिकता के चक्कर में भोपाल मेट्रो की रफ्तार प्रभावित हो रही है। संसाधनों और तकनीकी टीम का बड़ा हिस्सा इंदौर प्रोजेक्ट में व्यस्त होने के कारण भोपाल के भूमिगत कार्य में अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है। लागत में वृद्धि: सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ पुल पातरा से सिंधी कॉलोनी तक के 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के लिए ट्विन टनल का निर्माण रीढ़ की हड्डी के समान है। अगले दो महीनों में 400 मीटर खुदाई का जो लक्ष्य रखा गया था, वह अब नामुमकिन नजर आ रहा है। प्रोजेक्ट में हो रही हर दिन की देरी से निर्माण लागत लाखों रुपये बढ़ रही है, जिसका सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा। देरी से न केवल बजट प्रभावित होगा बल्कि शहरवासियों को भी लंबे समय तक निर्माण जनित असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। टीबीएम चालू है, लेकिन बूस्टिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। जल्द ही बूस्टिंग का काम शुरू होगा। जमीन के नीचे कितनी खुदाई हो चुकी है, इसकी जानकारी बाद में बताएंगे। – धीरज शुक्ला, पीआरओ, एमपी मेट्रो

उज्जैन के बाद अब बाबा विश्वनाथ के धाम में गूंजेगी भारतीय कालगणना

भोपाल कालगणना की पावन नगरी और 'महाकाल' के केंद्र उज्जैन से निकली भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भी जीवंत हो उठी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष पहल पर, भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को बाबा काशी विश्वनाथ को अर्पित यह घड़ी भेंट की थी। इसके बाद विक्रम संवत् 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वितीया (4 अप्रैल, 2026) को इसे मंदिर परिसर में पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। यह मध्यप्रदेश सरकार के उस संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है, जिसके तहत देश के सभी ज्योतिर्लिंग और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी वैदिक घड़ी की स्थापना की जानी है। परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम उज्जैन के 'महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ' द्वारा विकसित यह घड़ी केवल समय बताने वाला यंत्र नहीं, बल्कि भारत के प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान का डिजिटल पुनर्जागरण है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित होती है और एक पूर्ण दिवस को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसकी विशेषता यह है कि यह स्थान-विशिष्ट सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर सटीक समय की गणना करती है। इस घड़ी के माध्यम से श्रद्धालु और युवा पीढ़ी न केवल भारतीय मानक समय (IST) जान सकेंगे, बल्कि पंचांग, तिथि, योग, नक्षत्र, भद्रा स्थिति और ग्रहों के गोचर जैसी सूक्ष्म जानकारियों से भी रूबरू हो सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अपनी सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के साथ सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह वैदिक घड़ी हमारे गौरवशाली अतीत को वर्तमान से जोड़ते हुए युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा देगी। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम विक्रमादित्य वैदिक घड़ी उज्जैन में स्थापित की गई है। यह घड़ी भारत की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पुनर्स्थापित करने का एक अभिनव प्रयास है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण 29 फरवरी 2024 को फाल्गुन 2080, कृष्ण पक्ष, पंचमी, वरुण मुहूर्त (13वाँ मुहूर्त) में किया गया था।  

दिल्ली जल बोर्ड का अलर्ट,जलाशयों की सफाई के चलते कल से बाधित रहेगी सप्लाई, पहले से स्टोर कर लें पानी

नई दिल्ली दिल्ली के कई इलाकों में रहने वाले लोगों को सोमवार और मंगलवार का पानी की कमी से जूझना होगा। इस बात की जानकारी दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से दी गई है। बोर्ड ने बताया कि भूमिगत जलाशय (UGR) और बूस्टर पंपिंग स्टेशन (BPS) के हर साल होने वाले फ्लशिंग के काम (सफाई) की वजह से 6 और 7 अप्रैल को शहर के करीब 11 से ज्यादा इलाकों में पानी की आपूर्तिं प्रभावित रहेगी। जल बोर्ड के अनुसार इस काम की वजह से 6 अप्रैल (सोमवार) को शहर के 5 इलाकों सुल्तानपुरी एरिया, मंगोलपुरी, सेक्टर-2 पॉकेट-4 रोहिणी, फिलिंग प्वाइंट, कराला गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में पानी नहीं आएगा। वहीं 7 अप्रैल (मंगलवार) को सुल्तानपुरी क्षेत्र, सेक्टर-3 पॉकेट-F 23 रोहिणी, सेक्टर-3 पॉकेट-A-1 रोहिणी फिलिंग पॉइंट, कराला गांव और आसपास के क्षेत्रों, सेक्टर-3 पॉकेट-B 10 रोहिणी, सेक्टर-3 पॉकेट-C 12 रोहिणी में जल आपूर्ति बाधित रहेगी। पर्याप्त मात्रा में पानी स्टोर करके रखने की दी सलाह इस दौरान लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने खेद जताते हुए क्षमा भी मांगी है, साथ ही लोगों को इस बात की सलाह भी दी है कि वे पर्याप्त मात्रा में अपनी जरूरत का पानी पहले से ही स्टोर करके रख लें। 6 अप्रैल (सोमवार) को जिन इलाकों में नहीं आएगा पानी (1) सुल्तानपुरी एरिया (2) मंगोलपुरी (3) सेक्टर-2 पॉकेट-4 रोहिणी (4) फिलिंग प्वाइंट (5) कराला गांव व उसके आसपास के क्षेत्र। 7 अप्रैल (मंगलवार) को जिन क्षेत्रों में नहीं आएगा पानी (1) सुल्तानपुरी क्षेत्र (2) सेक्टर-3 पॉकेट-F 23 रोहिणी (3) सेक्टर-3 पॉकेट-A-1 रोहिणी फिलिंग पॉइंट (4) कराला गांव और आसपास का क्षेत्र (5) सेक्टर-3 पॉकेट-B 10 रोहिणी (6) सेक्टर-3 पॉकेट-C 12 रोहिणी पानी के टैंकर मंगवाने हेतु जारी किए नंबर हालांकि नागरिकों की दिक्कतों को थोड़ा कम करने के लिए जल बोर्ड ने पानी के टैंकर मंगवाने के लिए कुछ नंबर्स भी जारी किए हैं। जल बोर्ड के अनुसार पानी के टैंकर्स नीचे दिए गए इन नंबरों पर उपलब्ध होंगे। सेंट्रल कंट्रोल रूम DJB: 1916, 23527679, 23538495 मंगोलपुरी ओवरहेड टैंक (OHT): 27294132, 27915531