samacharsecretary.com

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के 711 जजों का तबादला

 प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रशासन ने रविवार को 711 न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र क्षेत्र में बदलाव किया है। बड़ी संख्या में अधिकारियों के जिलों में भी परिवर्तन हुआ है। कुछ को वर्तमान जिले में ही नया दायित्व सौंपा गया है। सभी अधिकारियों से 15 अप्रैल तक नया दायित्व संभाल लेने की अपेक्षा की गई है। महानिबंधक मनजीत सिंह श्योराण की ओर से जारी की गईं तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं में क्रमशः 266 एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज 169 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) तथा 276 जून सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के नाम है।

राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल   डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।   इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल  डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी। इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी  शशि कुमार  सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

वैश्विक संकट का संकेत: ग्रहों की चाल से भारत और सीमाओं पर पड़ेगा असर!

जालंधर/चंडीगढ़. एक तरफ जहां खाड़ी में अमरीका-इजराईल की ईरान के साथ जंग जारी है तो दूसरी तरफ ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि भारत को भी 10 नवम्बर 2026 से 10 मार्च 2027 तक अपनी सीमाओं को लेकर अत्यधिक सतर्क रहना होगा। दिल्ली की प्रमुख ज्योतिषाचार्य मनीजा अहूजा के अनुसार उस समय मंगल सिंह राशि में कभी वक्री होंगे तो कभी मार्गी और यह स्थिति भारतीय सीमाओं पर व्यापक हलचल पैदा करने वाली होगी। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई 2026 तक भी अत्यधिक सतर्कता वाला समय रहेगा। उन्होंने बताया कि इसमें भी 15 दिसम्बर से 25 दिसम्बर 2026 तक का समय अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है क्योंकि उस समय मंगल गोचर में शनि को 8वीं दृष्टि से देखेगा। उन्होंने कहा कि रौद्र संवतसर 2083 चल रहा है जिसके बारे में लिखा है कि अहंकारी राजा लड़ते हैं और प्रजा परेशान होती है। उन्होंने कहा कि मंगल की मीन राशि में शनि के साथ युती हो चुकी है। उन्होंने बताया कि खाड़ी युद्ध अब अगले 45 दिनों तक और तेज होगा जिससे व्यापक तबाही दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि 2030 से 2032 तक 3 वर्ष न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए अत्यधिक खराब रहने वाले हैं। इसकी आहट 2028-29 से सुनाई पड़नी शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह रूस टूट गया था उसी तरह से जुलाई 2028 से अमरीका के कई भूखंड अलग होना शुरू हो जाएंगे। पूरे विश्व पर अमरीका का प्रभुत्व कम होगा। ईरान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस्लामिक गुटों का प्रभुत्व मार्च 2029 तक किसी न किसी तरीके से बना रहेगा। इजराईल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उसे अगले 3-4 महीनों में व्यापक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जून 2030 से 2032 तक शनि वृष राशि में रोहिणी नक्षत्र में आते-जाते रहेंगे और यह समय ही पूरे विश्व के लिए खराब सिद्ध होगा। 30 वर्ष पहले भी ऐसी परिस्थितियां बनी थी और उस समय भी काफी तबाही हुई थी परन्तु उस समय बचाव में बृहस्पति थे परन्तु इस बार जीवों के बचाव में बृहस्पति नहीं आएंगे क्योंकि वह अतिचारी अवस्था में चल रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प की चर्चा करते हुए उनहोंने कहा कि सिंह लग्र की कुंडली में विपरीत ग्रह योग चल रहे हैं और मई 2027 तक ट्रम्प के सभी फैसले अमरीका के लिए घातक सिद्ध होंगे।

भीषण सड़क हादसा बरेली में: टैंकर से भिड़ी बोलेरो और बाइक, पांच जनों की जान गई

बरेली सीबीगंज थाना क्षेत्र में बड़ा बाइपास पर खड़े टैंकर में पीछे से बोलेरो और बाइक टकराने से पांच लोगों की मृत्यु हो गई। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक, परधौली में बडा बाइपास पर सड़क किनारे एक टैंकर खड़ा था। शाम करीब साढ़े चार बजे शहर से रामपुर की ओर गोरखपुर नंबर की बोलेरो कार टैंकर में पीछे से जा टकराई। इसी दौरान पीछे से एक बाइक भी बोलेरो में टकरा गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भेजा, जहां बाइक सवार दोनों युवकों और बोलेरो में सवार तीन युवक को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं हादसे में घायल तीन अन्य का इलाज चल रहा है, जिसमें दो बच्चे हैं। बाइक सवार दो मृतकों की पहचान सीबीगंज के अटा कायस्थान निवासी मुमताज और शहजाद के रूप में हुई है। वहीं बोलेरो सवार दो लोगों की पहचान फरीदपुर निवासी मनमोहन और पीलीभीत के बीसलपुर निवासी दुर्गेश हैं। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

शाजापुर में लड़की ने दूसरी जगह सगाई से दुखी होकर प्रेमी संग दी जान

शाजापुर. शाजापुर शहर के लालघाटी थाना क्षेत्र के करेड़ी नाका के पास जहरीला पदार्थ खाने वाले प्रेमी युगल की मौत के बाद दोनों परिवार में मातम पसरा हुआ है। युवती की जिला अस्पताल शाजापुर में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। वहीं युवक ने इंदौर ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ दिया। शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम के दोनों के शव स्वजन को सौंपे गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गुरुवार को जिले सुनेरा निवासी आशुतोष धाकड़ और देवास निवासी कशिश परिहार ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। जहरीला पदार्थ खाने के बाद युवक ने अपने दोस्त को फोन पर सूचना दी। इस पर दोस्त ने दोनों को जिला अस्पताल शाजापुर पहुंचाया था। यहां चिकित्सकों ने शुरुआती ऊपचार किया। हालत गंभीर होने पर दोनों को रेफर किया गया। आशुतोष को स्वजन एंबुलेंस से इंदौर ले गए। वहीं, युवती कशिश के स्वजन नहीं आ पाने के कारण उसका जिला अस्पताल में ही उपचार जारी रहा। जब तक स्वजन अस्पताल पहुंचे कशिश की भी मौत हो गई। अचानक हुए घटनाक्रम से कशिश के परिजन सकते में आए, माता, पिता और भाई का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। पिता बोले कुछ दिन पहले ही बेटी की सगाई की थी। तब उससे बात की थी उसने ऐसा कुछ नहीं बताया। खुशी-खुशी सगाई हुई थी, फिर ऐसा क्यों हुआ। मौजूद लोगों ने बमुश्किल पिता को ढांढस बंधाया। कशिश के भाई को आशुतोष ने किया था फोन गुरुवार दोपहर करीब ड़ेढ़ बजे आशुतोष ने कशिश के भाई आयुष को फोन किया था। बताया था कि वह एक-दूसरे से प्यार करते हैं और एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। आयुष ने आशुतोष को समझाया फिर बहन के बारे में पता किया तो जानकारी मिली की वह साथ ही थी। कशिश को समझाया आयुष ने कहा- मैं बहन को प्यार से बिट्टू कहता हूं। बोला कि बिट्टू क्या है, क्या करना है तुम्हें, दोनों को शादी करनी है। इस पर वह बोली की हां शादी करनी है। मैंने कहा कि यह सगाई के पहले नहीं बता सकती थी। बोली भैया मैं डर गई थी, फिर मैंने उसे समझाया कि अभी जो हुआ चलो ठीक है, मुझे थोड़ा समय लेने दो। मैं घर पर बात करूंगा, अभी घर आ जा। अपन आशुतोष से बात करेंगे। बोली मैं आधे घंटे में निकल रही हूं। उसके बाद तो मेरे पास अस्पताल से फोन आया। मैं अपना सारा काम छोड़कर मोटरसाइकिल से शाजापुर जिला अस्पताल पहुंचा। वहां पर वेंटिलेटर तक नहीं है, ऐसे अस्पताल हैं। मेरी इकलौती बहन थी। मैं क्या देख रहा हूं, जबकि एक से ड़ेढ़ घंटे पहले ही आशुतोष के फोन से मेरी बहन से बात हुई थी। कुछ दिन पहले अपने एक रिश्तेदार के साथ आशुतोष घर आया था। मैंने सामान्य बात की कहा कि खाना खाकर ही जाना। मुझे शूट पर जाना था इसलिये मैं निकल गया था। क्षणिक आवेश ने बिगाड़े दो परिवार युवक-युवती द्वारा आत्महत्या का यह प्रकरण चिंता का सबब भी है। क्षणिक आवेश में आकर दोनों ने जो कदम उठाया वह दोनों ही के परिवार के लिए कभी न मिटने वाला दुख है। सेवानिवृत पुलिस निरीक्षक अवधेश कुमार शेषा ने कहा कि ऐसी घटनाएं परिवार, समाज सभी के लिए चिंता का सबब है।

जंगलों पर माफिया का वार नाकाम: बुरहानपुर में सलाई गोंद की बड़ी खेप पकड़ी गई

बुरहानपुर वन विभाग की टीम ने रविवार को वन परिक्षेत्र खकनार के बोरखेड़ा से करीब साढ़े आठ क्विंटल सलाई गोंद जब्त की है। यह गोंद पिकअप वाहन क्रमांक एमपी 09 जीएच 3170 के माध्यम से ले जाई जा रही थी। वन विभाग की टीम ने जब वाहन रोककर इसकी जांच की तो उसमें गोंद भरी पाई गई, जिसके बाद गोंद और वाहन को जब्त कर लिया गया। चालक के खिलाफ वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया जा रहा है। पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है ज्ञात हो कि जिले के जंगलों से सलाई व धावड़ा सहित अन्य पेड़ों से गोंद की निकासी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद गोंद माफिया लगातार सक्रिय हैं और जंगलों से अवैध रूप से गोंद निकाल रहे हैं। बीते माह प्रतिबंध के बावजूद गोंद माफिया द्वारा पेड़ों को खोखला करने संबंधी खबर प्रमुखता से सामने आई थी। इसके बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई और लगातार कार्रवाई करते हुए गोंद की बड़ी खेपें पकड़ना शुरू किया है। सीसीएफ और वन विभाग की टीम की संयुक्त कार्रवाई दो दिन पहले खंडवा सीसीएफ और बुरहानपुर वन विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए धूलकोट रेंज से 780 किलो गोंद जब्त किया था। इसके अलावा शाहपुर क्षेत्र से एक बाइक भी जब्त की गई थी। उल्लेखनीय है कि एक जनहित याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाईकोर्ट ने गोंद निकासी पर प्रतिबंध लगाया है। इसके चलते वन विभाग ने पूर्व में जारी किए गए गोंद निकासी के सभी लाइसेंस रद्द कर दिए हैं

हांसी जिला मुख्यालय में नया बस अड्डा, सुविधा और ट्रैफिक सुधार पर फोकस

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार द्वारा हांसी को नया जिला बनाए जाने के बाद अब क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और यातायात सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं। इसी कड़ी में हांसी में एक आधुनिक बस अड्डा बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। वर्तमान में हांसी में लगभग 6 एकड़ भूमि पर सब-डिपो संचालित हो रहा है, जहां से सीमित बस सेवाएं चलाई जाती हैं। लेकिन जिला बनने के बाद यात्रियों की संख्या और परिवहन की मांग में संभावित वृद्धि को देखते हुए बड़े बस अड्डे की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, नए बस अड्डे के लिए 8 से 10 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इस बस अड्डे से भविष्य में 100 से अधिक बसों का संचालन किया जाएगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों और अन्य जिलों के लिए कनेक्टिविटी में सुधार होगा। परिवहन विभाग के निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को हांसी बाईपास के आसपास उपयुक्त भूमि की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों द्वारा जमीन की तलाश का काम शुरू कर दिया गया है और जल्द ही स्थान को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। नए बस अड्डे के निर्माण से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि शहर में ट्रैफिक दबाव भी कम होगा। साथ ही, यह परियोजना हांसी के विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बिहार की महिलाओं का सफेद कपड़ों में सत्याग्रह, नीतीश की विरासत के लिए निशांत कुमार के नाम पर अड़ीं प्रदर्शनकारी

 पटना बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गांधी मूर्ति के नीचे रविवार को महिलाओं का एक बड़ा हुजूम उमड़ा। हाथों में तख्तियां, बैनर और माथे पर काली पट्टी बांधकर बैठी इन महिलाओं ने साफ़ संदेश दिया कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते हैं, तो उनका उत्तराधिकारी उनके पुत्र निशांत कुमार को ही होना चाहिए। 'सुधार वाहिनी' के बैनर तले आयोजित इस सत्याग्रह में बिहार के विभिन्न कोनों से आई महिलाओं ने नीतीश कुमार के शासनकाल में हुए महिला सशक्तिकरण की जमकर तारीफ की। आंदोलन का नेतृत्व कर रही प्रतिभा सिंह (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुधार वाहिनी) ने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया, शराबबंदी जैसे बड़े फैसले लिए और हमें समाज में बराबरी का हक दिलाया। हम उनके जाने से दुखी हैं, लेकिन अगर वे पद छोड़ते हैं, तो हमें उनकी जगह निशांत कुमार ही मंजूर हैं।” महिलाओं का सफेद कपड़ों में सत्याग्रह सत्याग्रह पर बैठी महिलाओं का मानना है कि निशांत कुमार सादगी के प्रतीक हैं। विभा नाम की एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "पूरा बिहार जानता है कि निशांत कुमार कितनी सादगी से रहते हैं। वे अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए महिलाओं के लिए वही काम करेंगे जो नीतीश जी ने किया है। हमें किसी और नेता पर भरोसा नहीं है।" महिलाओं ने साफ कहा कि नीतीश कुमार की विरासत को उनका पुत्र ही सही तरीके से आगे बढ़ा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा। आमतौर पर राजनीति से दूर रहने वाले निशांत कुमार के समर्थन में इस तरह का प्रदर्शन बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निशांत भी एनडीए (NDA) परिवार का हिस्सा हैं और उनके आने से गठबंधन को मजबूती मिलेगी। हालांकि, जब उनसे भाजपा के किसी मुख्यमंत्री के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें सिर्फ 'अपना रक्षक' चाहिए और फिलहाल उनकी नजरों में निशांत से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। सत्याग्रह के दौरान "बिहार की महिला करे पुकार, नीतीश नहीं तो निशांत कुमार" जैसे नारों से गांधी मैदान गूंज उठा है।

गंगा का बढ़ता जलस्तर और आंधी बनी काल, 2 करोड़ की लागत से बना प्लाटून पुल हुआ क्षतिग्रस्त

मिर्जापुर मिर्जापुर में गंगा नदी पर नेवढ़िया घाट से गेगराव घाट तक बने दूसरे प्लाटून पुल का उद्घाटन 21 मार्च को हुआ था, लेकिन महज 15 दिनों के अंदर यह पुल टूट गया. अधिकारियों के अनुसार, गंगा में अचानक पानी बढ़ने और तेज आंधी के कारण पुल क्षतिग्रस्त हुआ. मरम्मत का काम चल रहा है. मिर्जापुर में गंगा नदी पर बने दूसरे प्लाटून पुल के टूटने की खबर आई है. यह पुल नेवढ़िया घाट से गेगराव घाट को जोड़ता है, जो मझवां विधानसभा क्षेत्र में है. पुल का उद्घाटन 21 मार्च को स्थानीय बीजेपी विधायक सुचिस्मिता मौर्या ने किया था, लेकिन महज 15 दिनों के अंदर ही यह टूट गया. PWD विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पुल के टूटने की वजह गंगा में अचानक पानी का बढ़ना और तेज आंधी रही. PWD अधिकारी वीके पाण्डेय ने बताया कि गंगा में अचानक पानी बढ़ने के कारण पुल के पीपा अपनी जगह से खिसक गए थे. यह पानी बढ़ने और आंधी आने के कारण हुआ है. दो घंटे में पुल को चालू करवा दिया जाएगा. स्थानीय लोग भी पुल टूटने से परेशान हैं. इस मौके पर मौजूद मोहित ने कहा कि हम लोग यहां से जाने वाले थे, लेकिन जब आए तो पता चला कि पुल टूट चुका है. हम पुल के बनने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं अवधेश ने बताया कि यह लोग बता रहे हैं कि आंधी और पानी के कारण पुल टूट गया था. यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि पिछले तीन दिनों के अंदर मिर्जापुर में दो प्लाटून पुल टूट चुके हैं. इससे पहले विंध्याचल और हरसिंगपुर के बीच बने प्लाटून पुल 15 दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त हो गया था. स्थानीय लोग इस बार भी आवागमन में परेशानी महसूस कर रहे हैं. जल्द मरम्मत की उम्मीद कर रहे हैं. पुल का निर्माण दो करोड़ से अधिक की लागत से किया गया था. मरम्मत का चल रहा है और PWD अधिकारियों का कहना है कि यह काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा. पुल टूटने की वजह से इलाके में आवागमन प्रभावित हो रहा है. स्थानीय प्रशासन और PWD विभाग ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

साढ़े 4 करोड़ की योजना कागजों में दबी, गोपालगंज आज भी बस स्टैंड को तरसा

गोपालगंज गोपालगंज को जिला का दर्जा मिले 52 वर्ष का समय गुजर गया है। इसके बावजूद जिले को स्तरीय बस स्टैंड की सुविधा नहीं मिल सकी है। ऐसी बात नहीं कि इस दिशा में घोषणाएं नहीं हुई। शहर के राजेंद्र बस पड़ाव को स्तरीय बस स्टैंड बनाने की कई बार घोषणा हुई। बस स्टैंड के लिए नए स्थान पर जमीन ढूंढने की भी बात हुई। इस बीच ना ही बस स्टैंड के लिए जमीन मिली और ना ही इसका कायाकल्प हुआ। नगर परिषद के स्तर पर इसके लिए मास्टर प्लान बनाकर नगर विकास विभाग को सौंपा गया। नगर विकास विभाग से संचिका बाहर नहीं निकलने के कारण जिला मुख्यालय को स्तरीय बस स्टैंड तक नहीं मिल सका है। शहर का एकमात्र बस पड़ाव उपेक्षित शहर का राजेंद्र बस स्टैंड जिले का एक मात्र मुख्य बस पड़ाव है। इस स्टैंड से सूबे की राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर से लेकर, यूपी के गोरखपुर, वाराणसी, असम के सिलीगुड़ी तथा झारखंड के रांची तक के लिए बसें चलती हैं। हर साल इस स्टैंड की बंदोबस्ती से नगर परिषद को प्रति वर्ष करीब एक करोड़ से अधिक की आय होती है। इसके बाद भी इस स्टैंड में यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। यहां न तो यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था है और ना ही बसों को खड़ी करने की ठीक व्यवस्था है। वर्षा होने पर पूरा बस स्टैंड परिसर जल जमाव की चपेट में आ जाता है। इससे यहां बस पकड़ने के लिए आने वाले यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। छह वर्ष पूर्व हुई थी कायाकल्प की हुई थी पहल वर्ष 2019 में राजेंद्र बस पड़ाव के कायाकल्प की पहल की गई। इस पहल के तहत बस स्टैंड परिसर में वातानुकूलित भवन बनाए जाने की नगर परिषद ने योजना बनाई। इस भवन में यात्रियों के बैठने की बढि़या व्यवस्था से लेकर टीवी भी लगाया जाना था। डिसप्ले पर बस के बारे में सूचना देने से लेकर बस स्टैंड परिसर में मॉल का भी निर्माण कराए जाने की बात थी। जहां रेस्टोरेंट से लेकर यात्रियों की जरूरत के सभी सामान उपलब्ध हो सकें। इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए यहां वाई-फाई की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई। इस बीच बात तैयारियों तक ही सिमटकर रह गई। साढ़े चार करोड़ की योजना नगर विकास विभाग की संचिका में तब करीब साढ़े चार करोड़ की योजना तैयार कर नगर परिषद ने स्वीकृति के लिए नगर विकास विभाग को भेज दिया। इस बीच यह योजना नगर विकास विभाग की फाइलों में ही दब कर रह गई। हालांकि, इसी बीच करीब दो साल पूर्व नगर विकास विभाग ने नगर परिषद को राजेंद्र बस स्टैंड का कायाकल्प करने के लिए फिर से प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। इस निर्देश के बाद नगर परिषद ने नया प्रस्ताव विभाग को भेज दिया, लेकिन लंबी अवधि बीतने के बाद भी अब तक नगर विकास विभाग ने इस योजना को अपनी स्वीकृति नहीं दी है। लाचार दिखते हैं यात्री बस स्टैंड में सुविधा के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां आने वाले यात्री लाचार दिखते हैं। विशेष तौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री स्टैंड में संसाधन नहीं होने के कारण व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। पटना के लिए बस पकड़ने बस स्टैंड पहुंचे प्रमोद कुमार ने बताया कि सुबह आठ बजे बस स्टैंड पहुंचा। पता चला कि बस 8.40 बजे सुबह है। करीब आधे घंटे से सड़क पर बच्चों के साथ खड़ा हूं। कहीं बैठने तक की सुविधा नहीं है। राजेश कुमार की तरह बस स्टैंड में मौजूद विकास कुमार, राजेंद्र सिंह तथा राजेंद्र बस पड़ाव के कायाकल्प की योजना काफी पुरानी है। नगर विकास विभाग को काफी पहले इसके विस्तार की योजना भेजी गई थी। इस दिशा में अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नए स्थान पर बस स्टैंड को ले जाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भूमि चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है।