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हवामहल के सामने गुलाबी हाथी के फोटोशूट पर भड़के लोग पशु क्रूरता के आरोप में जांच शुरू

 जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर (Pink City) से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने अपनी आर्ट सीरीज के चक्कर में एक हाथी को पूरे शरीर पर चमकदार गुलाबी रंग से पेंट कर दिया। हवामहल के सामने हुए इस फोटोशूट का वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, जयपुर की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक हंगामा खड़ा हो गया है। AI नहीं, सब कुछ असली होने का दावा दरअसल, जूलिया बुरुलेवा ने इस विवाद के बीच एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह खुद भी गुलाबी रंग में रंगी नजर आ रही हैं। गौरतलब है कि पहली नजर में यह वीडियो AI (Artificial Intelligence) से बना लग रहा है। लेकिन जूलिया का दावा है कि उन्होंने 6 हफ्तों तक जयपुर की गलियों में रहकर यह रियल लोकेशन पर शूट किया है। इसमें किसी भी तरह की डिजिटल एडिटिंग का इस्तेमाल नहीं किया गया है। पशु क्रूरता का लगा आरोप सूत्रों ने बताया कि विवाद उस समय शुरू हुआ जब हाथी को सिर से पैर तक गुलाबी रंग में पुता हुआ देखा गया। लोगों का कहना है कि एक बेजुबान जानवर के शरीर पर केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल करना सरासर पशु क्रूरता है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे आर्ट नहीं, बल्कि ‘घिनौना स्टंट’ करार दिया है। वन विभाग की रडार पर विदेशी फोटोग्राफर मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान वन विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया है। विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या हाथी के साथ शूट की परमिशन ली गई थी? क्या फोटोशूट के दौरान जानवर की सुरक्षा के मानकों का पालन हुआ? अगर ऐसा नहीं है तो बिना अनुमति हाथी को रंगने और कमर्शियल शूट करने पर भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

लुधियाना के पास हलवारा एयरपोर्ट के लिए अप्रैल से शुरू हो जाएगी टिकटों की बुकिंग

पंजाब(हलवारा) पंजाब में हवाई संपर्क को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने रविवार को बताया कि हलवारा हवाई अड्डे के लिए उड़ान बुकिंग अप्रैल से शुरू हो जाएगी, जबकि पहली कमर्शियल उड़ान 10 से 15 मई के बीच शुरू होने की संभावना है. उन्होंने इसे पंजाब के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि शुरुआत में 160 सीटों वाले एयरबस ए320 विमान से संचालन किया जाएगा. शुरुआती चरण में दिल्ली और हलवारा के बीच रोजाना दो उड़ानें होंगी, एक सुबह और एक दोपहर में. इससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा. रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह लंबे समय से प्रतीक्षित परियोजना है, जो यात्रा, व्यापार और राज्य की आर्थिक वृद्धि को गति देगी.  हवाई अड्डे की बुकिंग अगले सप्ताह से शुरू होगी वहीं, पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने 26 मार्च को लुधियाना में एक प्रेस वार्ता के दौरान पहले ही घोषणा कर दी थी कि हलवारा हवाई अड्डे की बुकिंग अगले सप्ताह से शुरू होगी. उन्होंने इशारों में केंद्रीय मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग उनकी कही बातों को तीन दिन बाद दोहरा रहे हैं. इस बीच रवनीत सिंह बिट्टू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनकी दूरदृष्टि और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता से पंजाब को फायदा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि वह मंत्री के रूप में पंजाब के विकास के लिए लगातार काम करते रहेंगे. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जालंधर दौरे के दौरान लुधियाना के हलवारा हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का वर्चुअल उद्घाटन किया था. यह टर्मिनल भारतीय वायुसेना के हलवारा अड्डे पर रायकोट उपखंड में विकसित किया गया है. हलवारा हवाई अड्डे के चालू होने से क्षेत्र में हवाई संपर्क में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है. इससे उद्योग, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा और पंजाब के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी. लुधियाना के उद्योगपतियों की लंबे समय से मांग रही है कि शहर को सीधी हवाई सेवा मिले, क्योंकि उन्हें अभी दिल्ली, चंडीगढ़ या अमृतसर से उड़ान लेनी पड़ती है. पंजाब सरकार के अनुसार, इस परियोजना को पूरा करने में संजीव अरोड़ा की लगातार कोशिशों और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय की अहम भूमिका रही है.

पुरानी नलकूप सेवाओं को बंद कर नवीन जल प्रदाय प्रणाली से जुड़ें नगरीय निकाय : प्रबंध संचालक श्री भोंडवे

जल प्रदाय और सीवरेज परियोजनाओं की समीक्षा बैठक भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा प्रदेश के विभिन्न अंचलों में संचालित विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए आयुक्त सह प्रबंध संचालक श्री संकेत भोंडवे ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। होटल पलाश में योजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में श्री भोंडवे  ने 46 नगरों की जल प्रदाय योजनाओं और 3 नगरों की सीवरेज परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का सूक्ष्म विश्लेषण किया। श्री भोंडवे ने निर्देशित किया कि जिन नगरीय निकायों में नवीन जल प्रदाय व्यवस्था सुचारू रूप से प्रारंभ हो चुकी है, वहां पुराने नलकूपों (ट्यूबवेल) को तत्काल बंद किया जाए, जिससे भू-जल का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। प्रबंध संचालक श्री भोंडवे ने स्मार्ट मीटरिंग और पर्यावरण संरक्षण पर  आधुनिक तकनीक के समावेश पर  कहा कि जल प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए लगाए जा रहे जल मीटरों में न्यूनतम 5 प्रतिशत 'स्मार्ट मीटर' स्थापित करना अनिवार्य होगा। उन्होंने जल शोधन संयंत्रों (WTP) और मलजल शोधन संयंत्रों (STP) के परिसर को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। श्री भोंडवे ने "माय लाइफ" (My Life) पोर्टल का उल्लेख करते हुए कहा कि आगामी मानसून के दौरान इन संयंत्रों के समीप सघन वृक्षारोपण किया जाए और इसकी शत-प्रतिशत प्रविष्टि पोर्टल पर सुनिश्चित की जाए। सुरक्षा मानकों और सुदृढ़ अधोसंरचना का संकल्प निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को सर्वोपरि बताते हुए श्री भोंडवे ने पाइपलाइन बिछाने के उपरांत किए जाने वाले 'रोड रेस्टोरेशन' (सड़क बहाली) के कार्यों पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बहाली के कार्य में गुणवत्ता की कमी पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने परियोजना प्रबंधकों को निर्देशित किया कि वे मुख्य नगर पालिका अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करें। निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा, बैरिकेडिंग और यातायात डायवर्जन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य है। सामुदायिक सहभागिता और नियमित मॉनिटरिंग अतिरिक्त प्रबंध संचालक श्री दिव्यांक सिंह ने बैठक में परियोजनाओं की सफलता के लिए सामुदायिक गतिविधियों के विस्तार की आवश्यकता प्रतिपादित की। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं से जन-सामान्य को जोड़ने के लिए मुख्यालय स्तर पर एक प्रभावी पुनर्नीति तैयार की जानी चाहिए। मुख्य अभियंता श्री शैलेन्द्र शुक्ला ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता श्री आनंद सिंह, विभिन्न जिलों के परियोजना प्रबंधक, परामर्शदाता फर्मों के विशेषज्ञ और संविदाकार संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन 10 और 15 अप्रैल से

वैश्विक हालातों के बीच कैबिनेट समिति ने की तैयारियों की समीक्षा भोपाल मध्यप्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीदी को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस संबंध में सोमवार को कैबिनेट समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से आयोजित की गई, जिसमें राज्य में गेहूँ उपार्जन व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि कैबिनेट समिति ने निर्णय लिया है कि इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में गेहूँ की खरीदी का कार्य 10 अप्रैल 2026 से प्रारंभ किया जाएगा। प्रदेश के शेष संभागों में उपार्जन कार्य 15 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। सरकार ने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें खरीदी केंद्रों की स्थापना, भंडारण क्षमता, परिवहन व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना शामिल है। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि बैठक में वैश्विक परिदृश्य, विशेष रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खाद्यान्न आपूर्ति एवं भंडारण व्यवस्था पर विशेष चर्चा की गई। समिति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों से गेहूँ खरीदी की प्रक्रिया को सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संचालित किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो और भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। इसके लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, परिवहन एवं स्‍कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री लखन पटेल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि समय पर और व्यवस्थित गेहूँ खरीदी से न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि प्रदेश में खाद्यान्न प्रबंधन भी सुदृढ़ होगा। इसके साथ ही, बदलते वैश्विक हालातों के बीच यह कदम राज्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरुण शमी, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा और नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा भी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश को देश में दूसरा स्थान मिलने पर दी बधाई

सुशासन और जनहितैषी नीतियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मिली राष्ट्रीय मान्यता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश के देश में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे सद्प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह उपलब्धि सुशासन, पारदर्शिता, जनहितैषी और नागरिक-केंद्रित नीतियों के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन के मानकों के अनुसार यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने 1,752 ई-सेवाओं के साथ डिजिटल सेवाएं प्रदान करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल होकर पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद गर्व का विषय है कि प्रदेश में 59 अनिवार्य सेवाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।  

समाजवाद के नाम पर ‘परिवारवादी’ खा जाते थे गरीबों का हकः मुख्यमंत्री

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों के हित में दो बड़े कार्य किए। सुबह आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विकास योजनाओं व तकनीक से जोड़ा तो शाम को वंचित व कमजोर वर्ग के कक्षा 9-10 तथा दशमोत्तर के 27,99,982 विद्यार्थियों के बैंक खाते में 3350 करोड़ की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति का अंतरण किया। सीएम ने गरीब परिवारों के मुख्य अर्जक की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत 33,334 आश्रित परिवारों को भी 100 करोड़ रुपये की सहायता राशि का अंतरण किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने अपने विचार भी प्रकट किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया और कहा कि समाजवाद के नाम पर परिवारवादी गरीबों का हक खा जाते थे। लेकिन, गरीबों के हक पर डकैती डालने वालों को मालूम है कि अब ऐसा किया तो जेल जाना पड़ेगा। सरकार उनके बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी। सीएम ने बच्चों को दिया परिश्रम का मूलमंत्र  सीएम ने बच्चों से कहा कि यह छात्रवृत्ति इसलिए है कि आप और मेहनत कर सकें। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता। छात्रवृत्ति संबल का काम कर रही है, यह आपकी मंजिल नहीं है, आपकी मंजिल परिश्रम है। परिश्रम से प्राप्त अंक ही मंजिल पर ले जाएंगे। यदि मेहनत में कोताही बरती, छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग किया और परिणाम खराब आया तो यह स्वतः ही बाधित हो जाती है। ऐसी नौबत न आने पाए।  जब संवेदना का हिस्सा बनती है सेवा तो ‘सबका साथ-सबका विकास’ होता है सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 67 लाख बच्चों को 4800 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई। जब सेवा संवेदना का हिस्सा बनती है तो सरकार का लक्ष्य व्यक्ति, जाति-संप्रदाय नहीं, बल्कि सबका साथ-सबका विकास होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेरणादायी मंत्र सबका साथ-सबका विकास बिना भेदभाव सभी समुदायों को छात्रवृत्ति योजना से जोड़ता है। अनुसूचित जाति-जनजाति के शत-प्रतिशत, पिछड़ी जाति के विद्यार्थियों, सामान्य वर्ग के अतिगरीब व अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की पढ़ाई के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो और उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिले, सरकार की पहले ही दिन से यह मंशा थी।  सपा ने प्रदेश को इतना लूटा कि हमारी सरकार को 2017-18 के साथ 2016-17 के बच्चों की भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी थी मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में समाजवादी पार्टी ने अनुसचित जाति-जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति ही नहीं दी, क्योंकि उन्होंने तब तक प्रदेश को इतना लूट डाला था कि खाते में पैसा ही नहीं था। जो राशि केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति के लिए आई थी, उसे भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यों के लिए डायवर्ट कर दिया था। 2017 में जब हमारी सरकार आई तो 2017-18 के साथ ही हमें 2016-17 के बच्चों को भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी।  पहले तकनीक का उपयोग नहीं होता था, छात्रवृत्ति के पैसे में मनमानी करते थे अधिकारी  सीएम योगी ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति की राशि कम होती थी और उसमें भी तकनीक का उपयोग नहीं होता था। पैसा जिले में जाता था, वहां समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी मनमानापन करते थे। छात्रों को 500 की बजाय 200-250 रुपये ही छात्रवृत्ति मिल पाती थी। पीएम ने तकनीक पर ध्यान देने को कहा, जिससे आज एक क्लिक पर 28 लाख छात्रों के खाते में 3350 करोड़ रुपये पहुंच गए। यह दर्शाता है कि तकनीक जीवन को आसान बनाने के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देती है।  2017 के पहले हर क्षेत्र में था भ्रष्टाचार, आधी राशि खा जाते थे सपा के गुंडे सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार था। कुपोषित बच्चों व नवजात शिशुओं के पोषण आहार, कुपोषित माताओं के पोषाहार, छात्रों की छात्रवृत्ति, विकास योजनाओं, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ समेत सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार था। सीएम योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उनका बयान था कि सरकार एक हजार रुपये पेंशन राशि क्यों देती है। उनके समय में दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये मिलते थे, वह भी समय से नहीं। छह महीने में एक साथ 1800 रुपये जाते थे, लेकिन इसमें से दिव्यांग को केवल 900 रुपये मिलते थे और 900 रुपये इनके लोग चट कर जाते थे। विधवा-वृद्धजन पेंशन के रूप में 500 रुपये मिलते थे, छह महीने में एक साथ 3000 रुपये जाते थे। इसमें से 1500 रुपये सपा के गुंडे और बाबू हड़प कर जाते थे। सपा शासन में आधी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। यूपी में आज 1.06 करोड़ निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों व दिव्यांगजनों को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन राशि सीधे अकाउंट में मिलती है। कटौती करने वालों को मालूम है कि गरीबों के हिस्से में डकैती डालेगा तो उसकी जगह जेल होगी और सरकार बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी।  समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे सहायता राशि  सीएम योगी ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का जिक्र किया, कहा कि इसके लाभार्थियों को पेंशन व 30 हजार रुपये की राशि भी दी जा रही है। इसके तहत आज 100 करोड़ रुपये जारी हुए हैं। 2025-26 में 1.36 लाख से अधिक परिवारों को 412 करोड़ रुपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। 2017 से अब तक 10 लाख से अधिक परिवारों को 3039 करोड़ रुपये से अधिक राशि दी जा चुकी है। पहले यह राशि गरीबों को नहीं मिलती थी। बच्चों की सहायता, माताओं का राशन, गरीबों व वंचितों को मिलने वाली सरकार की सहायता समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे। गरीब लाचार-हताश होकर भटकते थे।  सपा के काले कारनामों के कारण ‘बीमारू’ बना था यूपी सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पलने वाले गुंडे समानांतर सरकार चलाते थे। वंचित, दलितों की सुनवाई नहीं होती थी। सपा प्रदेश में चार बार सत्ता में आई, लेकिन एक भी दलित महापुरुष-संत व सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुष के प्रति सम्मान का भाव नही रखा। कन्नौज में बाबा साहेब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम सपा सरकार ने बदल दिया, हमारी सरकार ने फिर से उसका नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर … Read more

कल आएगा 12वीं का परिणाम: राजस्थान बोर्ड तैयार, उदयपुर से होगी लाइव घोषणा

उदयपुर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) अजमेर की 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम कल यानी 31 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे जारी किया जाएगा। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर उदयपुर जिला कलक्टर कार्यालय से ऑनलाइन माध्यम से बोर्ड कार्यालय से जुड़कर परिणाम घोषित करेंगे। परीक्षा परिणाम जारी होते ही छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट देख सकेंगे। बोर्ड की ओर से कॉपियों का मूल्यांकन लगभग पूरा हो चुका था और तकनीकी परीक्षण के बाद परिणाम जारी करने की तैयारी अंतिम चरण में थी। अब बोर्ड ने आधिकारिक रूप से 31 मार्च को परिणाम जारी करने की घोषणा कर दी है। 9 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने दी थी परीक्षा इस वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षाएं 12 फरवरी से 11 मार्च के बीच आयोजित की गई थीं। इसमें कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के करीब 9.10 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। परिणाम जारी होने के बाद छात्र अपने रोल नंबर के माध्यम से ऑनलाइन रिजल्ट देख सकेंगे। रिकॉर्ड समय में जारी हो रहा परिणाम आमतौर पर राजस्थान बोर्ड 12वीं का परिणाम मई के अंत तक जारी करता है, लेकिन इस बार मार्च में ही परिणाम घोषित किया जा रहा है। ऐसे में यह बोर्ड के इतिहास में सबसे जल्दी आने वाले 12वीं के परिणामों में शामिल हो सकता है। इससे पहले बोर्ड ने 24 मार्च 2026 को 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित कर देशभर में सबसे पहले रिजल्ट जारी करने का रिकॉर्ड भी बनाया था। ऐसे डाउनलोड कर सकते हैं RBSE 12वीं का रिजल्ट – सबसे पहले ऑफिसियल वेबसाइट ओपन करें। होमपेज पर 'RBSE 12th Result 2026' के लिंक पर क्लिक करें। अपनी स्ट्रीम चुनें और रोल नंबर ऐड करें। सबमिट पर क्लिक करते ही स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा।

सरकारी स्कूलों के लिए पंजाब सरकार का नया नियम शिक्षक और छात्र की गैरहाजिरी पर सीधा एक्शन

 चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। 1 अप्रैल से पंजाब के सरकारी स्कूलों में अनुपस्थिति को लेकर नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब यदि कोई छात्र या शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर रहता है, तो इसकी तुरंत जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी। छात्रों की अनुपस्थिति पर सीधा संपर्क नए नियमों के अनुसार, यदि कोई बच्चा स्कूल नहीं आता है, तो उसकी डिटेल माता-पिता को भेजी जाएगी। यदि कोई छात्र लगातार 2 से 3 दिन तक स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो स्कूल प्रशासन सीधे अभिभावकों से फोन पर संपर्क करेगा और अनुपस्थिति का कारण पूछेगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना और ड्रॉप-आउट रेट को कम करना है। शिक्षकों पर भी रहेगी नज़र मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगी यदि कोई शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर होता है, तो इसकी सूचना उनके वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के माता-पिता को भी दी जाएगी। शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति की स्थिति में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को सूचित किया जाएगा और उनकी जगह तुरंत दूसरे शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि बच्चों का सिलेबस पीछे न रहे। भारत की पढ़ाई बनाम इंडिया की पढ़ाई चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मान ने शिक्षा के दोहरे स्तर पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में दो तरह की शिक्षा है-एक ‘इंडिया’ की शिक्षा (महंगे प्राइवेट स्कूल) और दूसरी भारत की शिक्षा (सरकारी स्कूल)। सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि पहले सरकारी स्कूलों को केवल दलिया खाने वाले स्कूल बना दिया गया था, जहाँ शिक्षा से ज्यादा अन्य चीजों पर ध्यान था। मान सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के बराबर लाकर खड़ा करना है, ताकि गरीब का बच्चा भी वही क्वालिटी एजुकेशन पा सके जो अमीर के बच्चों को मिलती है।

कोयल नदी पुल की मरम्मत पूरी होने से यात्रियों को मिली बड़ी राहत

रांची रांची-लोहरदगा रेललाइन पर शनिवार से परिचालन सामान्य हो जाएगा। पहली ट्रेन रांची-लोहरदगा-टोरी पैसेंजर सुबह 5.15 बजे रवाना होगी। शुक्रवार को इस लाइन में लाइट इंजन ट्रेन चलाई गई। गौरतलब है कि रांची रेल मंडल के रांची-लोहरदगा-टोरी खंड पर नागजुआ व लोहरदगा स्टेशनों के मध्य कोयल नदी पर स्थित क्षतिग्रस्त पुल संख्या-115 की मरम्मत चल रही थी। इस कारण इरगांव से लोहरदगा के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद था। हजारों यात्रियों को हो रही थी दिक्कत इस मार्ग के बाधित रहने से कई ट्रेनों को बदले मार्ग से चलाया जा रहा था। वहीं पुलिया में दरार की सूचना के बाद कुछ ट्रेनों को आंशिक समापन के जरिए भी चलाया गया था। इससे इस रूट में सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा रहा था। रेलवे ने की थी वैकल्पिक व्यवस्था वहीं, रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस तय मार्ग टोरी-लोहरदगा-रांची के स्थान पर टोरी-बरकाकाना-मेसरा-टाटीसिलवे-रांची होकर चल रही थी। रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के अलावा रांची-चोपन-रांची एक्सप्रेस, सासाराम-रांची-सासाराम एक्सप्रेस व अजमेर-सांतरागाछी-अजमेर एक्सप्रेस भी परिवर्तित मार्ग से चल रही थी। आस-पास के इलाकों के लिए है लाइफलाइन बता दें कि रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड लोहरदगा और आसपास के इलाकों के लिए लाइफलाइन माना जाता है। पुलिया में दरार की वजह से इस मार्ग से जनवरी से परिचालन ठप था। इस रूट पर चलने वाली लोहरदगा-रांची और रांची-लोहरदगा मेमू पैसेंजर ट्रेनों से हर दिन लगभग आठ हजार यात्री सफर करते हैं। इसके अलावे सासाराम एक्सप्रेस और राजधानी का लाभ यात्रियों को मिलता है। ट्रेन परिचालन ठप होने के बाद इन यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अचानक ट्रेन रुकने की सूचना मिलते ही लोहरदगा स्टेशन और आसपास के इलाकों में यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। मजबूरी में लोग बसों और अन्य निजी वाहनों की ओर दौड़ पड़े, जिससे बस स्टैंड और सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसर गया।

बुंदेलखंड की 90 हजार ग्रामीण महिलाओं ने किया दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार

लखनऊ. एक वक्त था जब बुंदेलखंड की पहचान सूखे, पलायन और गरीबी से थी। लेकिन आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसी बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं देश के सामने आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं हैं। बुंदेलखंड की करीब 90 हजार महिलाओं ने दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का सामूहिक कारोबार खड़ा कर इतिहास रच दिया है। झांसी जिले से शुरू हुई यह यात्रा आज बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, ललितपुर और महोबा में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह 1143 गांवों में फैले इस नेटवर्क में महिलाएं प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहीं हैं। बलिनी एमपीसीएल से जुड़ी महिलाएं अब तक दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार कर चुकीं हैं। पहले जहां बिचौलियों के कारण दूध का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता था, वहीं अब सीधे बैंक खातों में भुगतान होता है। प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सेवाएं, वित्तीय सहायता और उपलब्ध बाजार ने इन महिलाओं को सच्चे अर्थों में उद्यमी बना दिया है। महिलाओं का यह समूह अब ग्रामीण डेयरी व्यवसाय का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।  परिवार और समाज में आया बदलाव घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए बुंदेलखंड की महिलाएं अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहीं हैं, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना रहीं हैं और सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रहीं हैं। जो महिला पहले घर की दहलीज तक सीमित थीं, आज वे ग्राम स्तरीय बैठकों में निर्णय ले रहीं हैं। प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचेगी योजना  योगी सरकार ने इस मॉडल को प्रदेश के 31 जिलों तक पहुंचा दिया है, जिसके तहत महिलाओं के नेतृत्व वाले दुग्ध उत्पादन का कुल कारोबार 5,000 करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच गया है। जल्द ही इसे प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाने की योजना है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। यह महज एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं का जीवंत प्रमाण है, जहां बुंदेलखंड की बेटियां अब पूरे देश को दिशा दिखा रहीं हैं।