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उत्तर प्रदेश में पहली बार होगी पेपरलेस जनगणना, घर बैठे खुद भी दर्ज कर सकेंगे अपनी जानकारी

पटना उत्तर प्रदेश में जल्द ही जनगणना शुरू होने जा रही हैं. इस बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जाएगी. जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर गणना करेंगे. उत्तर प्रदेश में जनगणना की तारीख आई सामने उत्तर प्रदेश में साल 2027 की जनगणना शुरू होने जा रही है. इस बार ये पहली बार होगा जब जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी, जिसमें डेटा जुटाने, उनकी एंट्री, सत्यापन और निगरानी समेत सभी काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाएंगे. लोगों को स्व-गणना का भी ऑप्शन दिया जाएगा यानी वोटर स्वयं अपना डेटा जमाकर करे जनगणना में शामिल हो सकेंगे. उत्तर प्रदेश में दो चरणों में जनगणना कराई जाएगी पहले चरण में मकान का सूचीकरण एवं मकान की गणना का काम होगा जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना कराई जाएगी. पहले चरण में स्व-गणना की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई तक चलेगी, इसके बाद अधिकारी 22 मई से 20 जून घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा करेंगे. दूसरे चरण में ही जातिगत गणनी की जाएगी. जनगणना में इन सवालों के देने होंगे जवाब जनगणना के पहले चरण में मकान का सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी. इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनकी जानकारी लोगों को गणना के लिए आए अधिकारियों को देनी होगी. 1. भवन नंबर या जनगणना नंबर 2. मकान नंबर 3. मकान के फर्श में इस्तेमाल प्रमुख सामग्री. यानी कि फर्श सीमेंट का है, ग्रेनाइट है, मार्बल है. 4. मकान के दीवार में इस्तेमाल सामग्री 5. मकान की छत में इस्तेमाल सामग्री 6. मकान का इस्तेमाल 7. मकान की हालत 8. परिवार क्रमांक 9. परिवार के सदस्यों की संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11. परिवार के मुखिया का लिंग 12. जाति, सामान्य, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी. 13. मकान के स्वामित्व की स्थिति 14. मकान में कमरों की संख्या 15. विवाहित दंपतियों की संख्या 16. पेयजल का सोर्स 17. पेयजल की उपलब्धता 18. बिजली का सोर्स 19. शौचालय की उपलब्धता 20. शौचालय का प्रकार 21. गंदे पानी की निकासी 22. स्नानघर की उपलब्धता 23. गैस कनेक्शन 24. खाना पकाने का मुख्य ईंधन 25. रेडियो या ट्रांजिस्टर 26. टीवी 27. इंटरनेट की सुविधा 28. लैपटॉप या कंप्यूटर 29. टेलीफोन, मोबाइल, स्मार्ट फोन 30. साइकल, स्कूटर, मोटरसाइकल 31.कार, जीप, वैन 32. मुख्य अनाज 33. मोबाइल नंबर उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए क़रीब छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी. ये कर्मचारी लोगों के घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण करेंगे और सारा डेटा जुटाएंगे. ये डेटा इकट्ठा करने और उसे सत्यापित करने का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर पर एक नोडल कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा.    

रेत माफिया पर शिकंजा: बालाघाट में एंबुलेंस में पहुंची पुलिस, घेराबंदी कर ट्रैक्टर पकड़े

बालाघाट प्रदेश में अनुबंध समाप्त होने के बाद भी रेत घाटों पर अवैध खनन जारी है। बालाघाट में वैनगंगा नदी के भमोड़ी घाट पर मंगलवार को दो एंबुलेंस से पहुंची पुलिस टीम ने रेत से लदे चार ट्रैक्टर जब्त किए हैं। हालांकि, रेत माफिया के मुखबिर तंत्र ने गुर्गों को सूचित कर दिया, जिससे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर चालक भागने में सफल हो गए। मौके का मंजर और पुलिस बल नवेगांव थाना प्रभारी रमेश जाट के मुताबिक घाट पर करीब 25 ट्रैक्टर मौजूद थे, 50-60 लोग अवैध खनन कर रहे थे। दो एंबुलेंस से करीब 30 पुलिस कर्मी जैसे ही पहुंचे लोग ट्रैक्टर लेकर भागने लगे। बाद में 20 पुलिस कर्मियों का बल और पहुंचा और रेत लोड चार ट्रैक्टर जब्त कर छह को चिह्नित किया। फिलहाल अपराध दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। मुखबिर तंत्र को चकमा देने की कोशिश दरअसल भमोड़ी घाट का रास्ता गांव के अंदर से होकर जाता है, जिससे कोई शासकीय वाहन या पुलिस टीम पहुंचने से पहले ही मुखबिर तंत्र रेत खनन में लगे लोगों को अलर्ट कर देता है। इस बार पुलिस एंबुलेंस से पहुंची फिर भी कई लोग भागने में सफल रहे।  

सावधान, अब चूहे मारने वाली दवा बेचना पड़ेगा महंगा, बिहार सरकार ने लगाया कड़ा प्रतिबंध

पटना बिहार में चूहे, गिलहरी समेत खेतों में फसलों को बचाने के लिए अन्य जीव-जंतुओं को मारने के लिए उपयोग की जाने वाली दवा Ratol Paste पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन ऑर्डर भी नहीं कर सकेंगे। बिहार में चूहे, गिलहरी आदि को मारने वाली दवा रेटॉल पेस्ट (Ratol Paste) पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसकी ऑफलाइन और ऑनलाइन किसी तभी तरह की बिक्री नहीं हो सकेगी। साथ ही आम लोगों को भी इसका उपयोग नहीं करने की अपील की गई है। खेतों में अक्सर चूहे, गिलहरी और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य जीव-जंतुओं को मारने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है। बिहार के कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए इसकी बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया। भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा फॉस्फोरस से संबंधित कठोर सुरक्षा संहिता के प्रकाशन के बाद बिहार के कृषि विभाग ने यह रोक लगाई है। कृषि निदेशक ने बताया कि बिहार में कार्यरत अमेजन मीशो, जोमैटो जैसे सभी ई कॉमर्स प्लेटफार्म और अन्य खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया गया है कि तत्काल प्रभाव से इस आदेश का पालन करें। आदेश में कहा गया है कि अगर किसी विक्रेता द्वारा रेटॉल पेस्ट (कृंतकनाशक) की बिक्री करते हुए पाया जाता है, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित जिला स्तरीय सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण को उपलब्ध कराई जाए। ऐसे दुकानदारों और विक्रेताओं के खिलाफ कानून की सुसंगत धाराओं एवं नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। क्या है रेटॉल पेस्ट यह एक चिपचिपा, गाढ़ा पेस्ट या पाउडर‑आधारित उत्पाद होता है। यह जहरीला होता है। चूहे, गिलहरी आदि जीव-जंतु खाना समझकर खाते हैं और बाद में जहर के असर से मर जाते हैं। रेटॉल पेस्ट में आमतौर पर येलो-व्हाइट फास्फोरस नाम का बेहद खतरनाक पदार्थ होता है। यह एक प्रोटोप्लाज्मिक पॉइजन होता है। इसे खाने के बाद जीव-जंतुओं की कुछ देर में ही मौत हो जाती है। यह सीधे जीवित कोशिकाओं पर प्रहार करता है। घरों और दुकानों में भी होता है इस्तेमाल इस दवा का इस्तेमाल सिर्फ खेतों में ही नहीं, बल्कि घर, किराना दुकानें और अनाज-दाल आदि के गोदामों में भी इस्तेमाल किया जाता है। लोग अक्सर चूहों को भगाने (मारने) के लिए अपने घर-गोदाम में यह दवा रखते हैं। इंसान के लिए भी जानलेवा है यह दवा सिर्फ जीव-जंतुओं नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा होती है। रेटॉल पेस्ट की थोड़ी मात्रा भी इंसानों के शरीर में लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। ब्लड प्रेशर बढ़ना, खून का जमना, आंतरिक रक्तस्राव जैसी समस्या हो सकती है। सेवन के 48 घंटे के भीतर इसका असर दिखने लगता है। ज्यादा मात्रा में सेवन करने या उचित उपचार न मिलने पर इंसान की जान भी जा सकती है।

HC का अहम फैसला: अब ससुर से भी मेंटेनेंस ले सकती हैं बहुएं, जानिए क्या है शर्त

इलाहाबाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि हिन्दू विधवा महिलाएं अपने ससुर से भी गुजारा भत्ता की मांग कर सकती हैं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी बना रहता है। ऐसे में कोई भी विधवा अपने ससुर से भी भरण-पोषण की मांग कर सकती है। यानी हाई कोर्ट की शर्तों के अनुसार पति के गुजर जाने के बाद ही कोई विधवा अपने ससुर से भरण-पोषण भत्ता देने का दावा कर सकती है। जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की पीठ ने अपने फैसले में कहा, "यह बात पूरी तरह से स्थापित है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व होता है। यह स्थिति उन मामलों से सामने आई है, जहाँ पति-पत्नी अलग हो गए हैं और पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की है, चाहे वह आपराधिक मामलों के तहत हो या हिंदू कानून में भरण-पोषण के प्रावधानों के तहत। इतना ही नहीं, पत्नी का भरण-पोषण करने का पति का यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी कानूनन बना रहता है, जिससे विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण की मांग करने का अधिकार मिल जाता है।" लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में हालांकि किसी विशेष कानूनी प्रावधान का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन स्पष्ट किया कि 'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956' की धारा 19 और 21 एक हिंदू विधवा को कुछ शर्तों के तहत अपने ससुर/उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की मांग करने की इजाजत देती हैं। मामला क्या? दरअसल, हाई कोर्ट एक पति द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी पत्नी पर झूठी गवाही देने का मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने भरण-पोषण की मांग करते हुए अपने लिखित बयानों में झूठे बयान दिए हैं। पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी ने खुद को झूठे तौर पर एक गृहिणी के रूप में पेश किया, और यह बात छिपाई कि वह एक कामकाजी महिला है। उसने आगे आरोप लगाया कि उसके पास एक बैंक में 20 लाख रुपये से अधिक की कुल राशि वाली फिक्स्ड डिपॉज़िट रसीदें (FDRs) थीं, लेकिन उसने अपने हलफनामे में इस जानकारी को छिपा लिया। विवाह के बाद बेटी का भरण पोषण करना बाप का दायित्व नहीं याचिकाकर्ता ने पीठ को यह भी बताया गया कि वर्तमान में, FDR में लगभग 4 लाख रुपये जमा हैं और बाकी राशि उसने निकाल ली है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने शुरुआत में ही टिप्पणी की कि फैमिली कोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है कि आवेदक-अपीलकर्ता/पति ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि प्रतिवादी-पत्नी कहीं कार्यरत है। पीठ ने कहा कि यह साबित करने का पूरा दायित्व पति पर ही था कि उसकी पत्नी कहीं नौकरी कर रही है; पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि पत्नी द्वारा यह कहने पर कि वह कहीं कार्यरत नहीं है, उसे किसी नकारात्मक बात को साबित करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पत्नी की वित्तीय संपत्तियों के संबंध में, कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि FDRs उसे उसके पिता द्वारा दी गई थीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक पिता का अपनी बेटी के विवाह के बाद उसके भरण-पोषण का कोई दायित्व नहीं होता, सिवाय उस स्थिति के जब वह विधवा हो गई हो। ससुर से गुजारा मांगने की क्या शर्तें? इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा, "हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, एक विधवा बहू अपने ससुर से गुजारा भत्ता तब तक मांग सकती है, जब तक कि वह अपनी खुद की कमाई या अपनी खुद की संपत्ति से अपना गुजारा करने में असमर्थ हो। इसमें कहा गया है कि विधवा अपने ससुर से तभी संपर्क कर सकती है, जब वह अपने मृत पति की संपत्ति से, अपने माता-पिता की संपत्ति से, या अपने बच्चों और उनकी संपत्ति से गुजारा भत्ता पाने में पूरी तरह से असमर्थ हो।" कोर्ट ने ये भी कहा कि गुजारा भत्ता देने की यह जिम्मेदारी तब लागू नहीं होती, जब ससुर के पास अपनी हिस्सेदारी वाली या पुश्तैनी संपत्ति से (जो उसके कब्ज़े में हो) भुगतान करने के साधन न हों; विशेष रूप से ऐसी संपत्ति से, जिसमें से बहू को पहले ही कोई हिस्सा मिल चुका हो। कोर्ट ने ये भी कहा कि बहू के पुनर्विवाह करने पर यह जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है।  

श्रमिक वर्ग कल्याण के लिये बहुमंजिला एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवास निर्मित करें : मंत्री विजयवर्गीय

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की समीक्षा बैठक हुई। मंत्री  विजयवर्गीय ने प्रदेश के चहुँमुखी विकास और मध्यम एवं निर्धन वर्ग के लिए सुलभ आवास उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता न केवल आवास उपलब्ध कराना है, बल्कि आधुनिकता और पर्यावरण संरक्षण के सामंजस्य के साथ नागरिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना भी है। मंत्री  विजयवर्गीय ने विशेष रूप से श्रमिक वर्ग के हितों को रेखांकित करते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के समीप 5 हजार एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवासों का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन आवासों को तीन से चार मंजिला स्वरूप में निर्मित किया जाए जिससे सीमित भूमि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके। मंत्री  विजयवर्गीय ने निर्माण कार्यों में उच्च स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों के पास आवास होने से कर्मचारी वर्ग के समय और संसाधनों की बचत होगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और जीवन स्तर में सुधार आएगा। राजधानी भोपाल का होगा कायाकल्प : भविष्य की जरूरतों पर जोर मंत्री  विजयवर्गीय ने भोपाल में संचालित महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' सहित नवीन कलेक्ट्रेट एवं कमिश्नर भवनों के निर्माण को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सभी नवीन भवन भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए बनाए जाएं। इन भवनों में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ ग्रीन बिल्डिंग मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, जिससे ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संतुलन बना रहे।  पेंशनर्स को सौगात और नीतिगत सुधार कर्मचारी हितैषी निर्णय लेते हुए बैठक में मंडल के पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स को सातवें वेतनमान के अंतर्गत 2 प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई राहत स्वीकृत की गई। साथ ही, पारदर्शिता और व्यवस्थाओं के सरलीकरण के लिये एक बड़ा कदम उठाते हुए मंडल की आवासीय एवं व्यवसायिक संपत्तियों में मूल क्रेता के साथ अन्य नाम जोड़ने या विलोपित करने संबंधी पूर्ववर्ती परिपत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया गया। बजट एवं नवीन योजनाओं का अनुमोदन मंडल की वित्तीय सुदृढ़ता को अक्षुण्ण रखने के लिये बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट एवं आगामी वार्षिक बजट को सर्वसम्मति से अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, मंडल की 'आवासीय पुनर्विकास योजना' तथा 'सुराज योजना' के वार्षिक कार्यक्रमों को सम्मिलित करने की भी स्वीकृति दी गई, जिससे प्रदेश के शहरी अधोसंरचना को नई गति मिलेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे, मंडल आयुक्त  गौतम सिंह, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सु तृप्ति वास्तव, अपर आयुक्त  महेन्द्र सिंह सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 कर्नाटक की मनीषा जोंस सिद्दी ने जीता गोल्ड

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत आज सरगुजा जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में पिछले चार दिनों से जारी कुश्ती स्पर्धा का शानदार समापन आज हुआ। प्रथम ऐतिहासिक संस्करण में कर्नाटक की बेटी मनीषा जोंस सिद्दी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कुश्ती के 76 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। अभावों के बीच पली-बढ़ी मनीषा की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प की विजय है। पिता के निधन के बाद माँ बनीं संबल           मनीषा का खेल जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। इसके बावजूद, उनकी माँ ने हार नहीं मानी और अकेले दिन-रात मेहनत करके मनीषा के सपनों को पंख दिए। पूर्व में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सिल्वर और ब्रोंज मेडल जीत चुकीं मनीषा के करियर का यह पहला गोल्ड मेडल है। स्पोर्ट्स हॉस्टल और परिवार का मिला साथ            अपनी सफलता को साझा करते हुए मनीषा ने कर्नाटक के डिवाइस स्पोर्ट्स हॉस्टल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, हॉस्टल के कोच और साथी खिलाड़ियों ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। मेरा बड़ा भाई मेरा मार्गदर्शक रहा है, वहीं छोटा भाई, जो खुद एक राज्य स्तरीय एथलीट है, वह मेरी सबसे बड़ी हिम्मत है। ट्राइबल गेम्स- एक नई पहचान का मंच            मनीषा ने केंद्र सरकार और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच से जनजातीय समुदाय के बच्चों को अपनी विशेष पहचान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला है। उन्होंने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा मैच के दौरान सुरक्षा, भोजन और यातायात की व्यवस्था बेहतरीन थी। छत्तीसगढ़ के लोगों का व्यवहार और यहाँ का माहौल खिलाड़ियों के लिए अत्यंत सुखद है। लक्ष्य-अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना         स्वर्ण पदक की चमक के साथ मनीषा की निगाहें अब भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर हैं। छत्तीसगढ़ की धरती पर मिली इस सफलता से उत्साहित मनीषा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में जुटी हैं। उनका अंतिम लक्ष्य विश्व पटल पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाना है।

गैस सिलेंडर डिलीवरी बना कमाई का जरिया, पंजाब में उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली

बरनाला. जिले में गैस सिलेंडर की कमी के कारण जहां आम जनता पहले से ही गंभीर मानसिक और आर्थिक परेशानी से गुजर रही है, वहीं अब गैस एजेंसियों द्वारा कस्टमर्स की जेब पर सीधी लूट के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। होम डिलीवरी और एजेंसी से ही सिलेंडर उठाने के दाम में अंतर का फायदा उठाकर भोले-भाले लोगों को लूटा जा रहा है, जिसके कारण शहरवासियों में भारी विरोध है। दामों में अंतर और एजेंसी की चालाकी आज अनाज मंडी बरनाला में हरजीत सिंह मान (टेंट हाउस), सोहन लाल, महा सिंह और बलविंदर सिंह समेत इकट्ठा हुए कस्टमर्स ने मीडिया से बात की और एजेंसियों की कथित मनमानी का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि उनकी गैस की कॉपी 'पनसप गैस सर्विस' ने बनाई थी। जब वे सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचे और रसीद कटवाई, तो उन्हें एक सिलेंडर की रसीद दी गई जिसमें 934 रुपये की कटौती की गई थी। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि 934 रुपये वह रेट है जिसमें होम डिलीवरी भी शामिल है। नियमों के मुताबिक, अगर कोई कंज्यूमर खुद एजेंसी के गोदाम या ऑफिस में आकर सिलेंडर लेता है, तो उसे होम डिलीवरी चार्ज नहीं देना पड़ता और सिलेंडर का रेट 901 रुपये हो जाता है। विरोध करने पर रसीद बदली गई पीड़ित कंज्यूमर्स ने कहा कि जब उन्हें इस कीमत के अंतर के बारे में पता चला और उन्होंने एजेंसी स्टाफ से बात की, तो एजेंसी स्टाफ ने अपनी गलती छिपाने के लिए तुरंत 934 रुपये की रसीदें वापस ले लीं और उन्हें 901 रुपये की नई रसीदें दे दीं। कंज्यूमर्स ने सवाल उठाया कि अगर उन्हें पता नहीं होता, तो उनके साथ लूट हो जाती। उन्होंने डर जताया कि पता नहीं पहले कितने अनजान लोगों को 33 रुपये अतिरिक्त लेकर सिलेंडर बेचे गए होंगे। यह हजारों रुपये का घोटाला लगता है। मैसेज आए पर सिलेंडर नहीं मिला – लूट के अलावा, कंज्यूमर्स ने डिलीवरी सिस्टम पर भी बड़े सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने कहा कि उनके मोबाइल फोन पर 'सिलेंडर डिलीवर होने' के मैसेज आए हैं, लेकिन असल में सिलेंडर उनके घर नहीं पहुंचा। यह डिजिटल फ्रॉड का बड़ा मामला है, जिससे कंज्यूमर्स सिलेंडर न मिलने से परेशान हैं और एजेंसी कागजों में अपना कोटा पूरा दिखा रही है। कंज्यूमर्स ने अपना विरोध जताते हुए कहा कि एक तरफ महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है और दूसरी तरफ ये गैस एजेंसियां ​​खुलेआम लूट कर रही हैं।  ये मांगे – फूड सप्लाई डिपार्टमेंट तुरंत इन एजेंसियों के रिकॉर्ड चेक करे।  एजेंसी के बाहर होम डिलीवरी और एजेंसी रेट में अंतर दिखाने वाला बोर्ड लगाया जाए। जिन लोगों को सिलेंडर नहीं मिले हैं लेकिन मैसेज आ गए हैं, उनकी तुरंत सुनवाई हो। अगर एडमिनिस्ट्रेशन ने जल्द ही इन एजेंसियों पर शिकंजा नहीं कसा तो शहरवासी बड़े लेवल पर संघर्ष करने को मजबूर होंगे। सिस्टम और एडमिनिस्ट्रेशन से सीधे सवाल: इसकी जिम्मेदारी किसकी है?: क्या फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट को इस लूट की जानकारी नहीं है? अगर कस्टमर्स ने विरोध नहीं किया होता, तो क्या 33 रुपये प्रति सिलेंडर की यह लूट जारी नहीं रहती? डिजिटल फ्रॉड: कस्टमर्स को सिलेंडर मिलने से पहले ही 'डिलीवर हो गया' का मैसेज कैसे आ रहा है? क्या एजेंसियां ​​कागजों में कोटा पूरा दिखाकर सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग कर रही हैं? ट्रांसपेरेंसी की कमी: एजेंसियों के बाहर होम डिलीवरी और वेयरहाउस रेट के बड़े बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए? क्या यह जानबूझकर लोगों को अंधेरे में रखने की कोशिश है? एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन कब लिया जाएगा?: क्या डिप्टी कमिश्नर बरनाला इन एजेंसियों के रिकॉर्ड की सरप्राइज चेक करेंगे ताकि गरीब जनता की लूट रुक सके?

नक्सलवाद को करारा झटका: बीजापुर-दंतेवाड़ा समेत 5 जिलों में 35 माओवादी सरेंडर, भारी मात्रा में हथियार बरामद

रायपुर  बस्तर रेंज में माओवादी हिंसा विरोधी अभियान के तहत मंगलवार को सुरक्षा बल को सफलता मिली है। बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर और नारायणपुर जिलों में कुल 35 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। वहीं बड़ी मात्रा में हथियार और करोड़ों की संपत्ति बरामद की गई है। यह कार्रवाई क्षेत्र में माओवाद की कमजोर होती पकड़ का संकेत मानी जा रही है। बीजापुर और दंतेवाड़ा में भारी मात्रा में हथियार और सोना बरामद बीजापुर जिले में 25 माओवादियों ने सरेंडर किया। इनके पास से 93 हथियार बरामद हुए, जिनमें चार एके-47 और नौ एसएलआर राइफलें शामिल हैं। इसके साथ ही सुरक्षा बल ने कुल ₹14.06 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसमें ₹2.90 करोड़ रुपये और 7.2 किलोग्राम सोना (कीमत ₹11.16 करोड़) शामिल है। दंतेवाड़ा जिले में पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इनके पास से आठ एसएलआर सहित अन्य हथियार बरामद किए गए। सुकमा और नारायणपुर में सरेंडर और नगदी की जब्ती सुकमा जिले में दो माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इनके पास से एक एलएमजी, दो एके-47 और ₹10 लाख रुपये बरामद किया गया। नारायणपुर जिले में एक माओवादी ने आत्मसमर्पण किया। इसके पास से एक एलएमजी बरामद हुई। कांकेर जिले में दो और माओवादियों ने सशस्त्र संघर्ष त्यागकर शांति का मार्ग अपनाया। इनकी पहचान शंकर और हिडमा डोडी के रूप में हुई है। उन्होंने आत्मसमर्पण के दौरान एके-47 राइफल भी पुलिस के समक्ष सौंपी। 25 मार्च से अब तक यहां 11 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। मुठभेड़ में 5 लाख का इनामी कमांडर ढेर इससे पहले रविवार को सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के जंगलों में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के साथ मुठभेड़ में एक माओवादी मारा गया था। मारे गए माओवादी की पहचान पीपीसीएम मुचाकी कैलाश के रूप में हुई है, जो सुकमा जिले के चिंतलनार थाना क्षेत्र के पूलानपाड़ा का निवासी था। वह प्लाटून नंबर 31 का सेक्शन कमांडर था और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। उस पर नागरिकों की हत्या, हमलों और आइईडी विस्फोट की साजिश रचने जैसे कई मामले दर्ज थे। पुनर्वास नीति और विकास कार्यों का दिख रहा असर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे अभियान, पुनर्वास नीति और विकास कार्यों के चलते माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले कैडर मुख्यधारा में लौटने के लिए आगे आ रहे हैं, जो क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

66.20 लाख की लागत से बना सर्वसुविधायुक्त भवन, राजस्व सेवाओं में आएगी तेजी और पारदर्शिता

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायपुर जिले के धरसींवा में नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण किया। यह पहल प्रशासनिक सेवाओं को आमजन के और अधिक निकट, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन का मूल उद्देश्य यही है कि नागरिकों को उनकी जरूरत की सेवाएं समय पर, सरल और पारदर्शी तरीके से मिलें। धरसींवा का यह नया तहसील कार्यालय इसी संकल्प को साकार करता है। उन्होंने कहा कि इस भवन के शुरू होने से क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में अब अधिक सुविधा और तेजी मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करते हुए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर नागरिक को बिना किसी अनावश्यक परेशानी के बेहतर प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध हो। नवनिर्मित तहसील कार्यालय में नायब नाजिर कक्ष, रिकॉर्ड रूम, माल जमार, नकल शाखा, कानूनगो कक्ष, भुइयां एवं भू-अभिलेख शाखा जैसी आवश्यक इकाइयों के साथ-साथ लोक सेवा केंद्र और आधार केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ पेयजल सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक तहसील कार्यालय का निर्माण 66.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जो क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा और सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा। इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा, संभागायुक्त  महादेव कावरे, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त  विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ  कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन एथलीटों ने दिखाया दमखम

रायपुर बस्तर जिले धरमपुरा जगदलपुर स्थित क्रीड़ा परिसर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत मंगलवार को एथलेटिक्स की स्पर्धाओं ने दर्शकों में भारी उत्साह भर दिया। जनजातीय युवाओं के कौशल और शारीरिक दक्षता को समर्पित इस आयोजन के दूसरे दिन प्रातः कालीन विभिन्न स्पर्धाओं में रोमांच का माहौल रहा। पुरुष वर्ग की बाधा दौड़ में असम के खिलाड़ी त्रैलोक्य मसरोंग ने अपनी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मात्र 15.85 सेकंड में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। स्पर्धा में तेलंगाना के सपावत दत्तू ने 16.65 सेकंड के साथ रजत और त्रिपुरा के हरि मोहन त्रिपुरा ने 16.82 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया।             इसके अलावा पुरुषों की 100 और 400 मीटर दौड़ में काँटे की टक्कर देखने को मिली। 400 मीटर दौड़ में गुजरात के एथलीट संतोषभाई उत्तमभाई गनवित ने 49.332 सेकंड में दौड़ पूरी कर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि ओडिशा के नोबल कुमार किसान महज 49.335 सेकंड के मामूली अंतर से पिछड़कर दूसरे स्थान पर रहे, तीसरे स्थान पर कर्नाटक राज्य के रामू रहे। 100 मीटर दौड़ में झारखंड के शिव कुमार सोरेन 10.58 मीटर में स्वर्ण, छत्तीसगढ़ राज्य के तिलक बर्सेल 10.87 के साथ दूसरे (रजत) और ओड़िसा के अतीश किंडो ने 10.91 के साथ तीसरा स्थान हासिल किया ।            इसी तरह पुरुषों की लंबी कूद में लक्षद्वीप के अब्दुल फतह एनएम ने 7.03 मीटर की शानदार छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, तो वहीं ओडिशा के भीमा सरदार और जीवन मुक्ति बिलुंग ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। मैदानी स्पर्धाओं में शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी रहा, जहाँ पुरुष वर्ग की तवा फेंक (डिस्कस थ्रो) स्पर्धा में गुजरात के मकवाना दानिश दिलीपभाई ने 44.83 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता। छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण तब आया जब स्थानीय खिलाड़ी सिद्धार्थ नागेश ने 35.56 के स्कोर के साथ रजत पदक जीतकर घरेलू दर्शकों का उत्साह बढ़ा दिया। तीसरे स्थान पर ओड़िसा के चंद्रय मुर्मू रहे ।           महिला वर्ग में भी देश की बेटियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। 100 मीटर दौड़ में झारखंड की पृथ्वी  ओरव ने 12.73 सेकंड और नागालैंड की रुदुओलहौनुओं बेहो ने 16.81 सेकंड का समय निकालकरदूसरे स्थान हासिल किए, जबकि झारखंड की पुतुल बास्की ने कांस्य पदक जीता।