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साइबर अपराध में 205 आरोपी गिरफ्तार, पंचकूला पुलिस ने 4.61 करोड़ रुपये लौटाए

 पंचकूला हरियाणा के पंचकूला जिले से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ की सीमाएं लगती हैं। अपराधी वारदात के बाद दूसरे राज्यों में भाग न पाएं, इसके लिए इंटर स्टेट बॉर्डर नाकों पर और अधिक चौकसी बरती जाएगी। इसके साथ ही पंचकूला शहर में बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह निर्देश पुलिस कमिश्नर पंकज नैन ने शुक्रवार को पुलिस लाइन स्थित जीओ मैस में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना प्रभारियों, चौकी प्रभारियों एवं विभिन्न शाखाओं के अधिकारियों की क्राइम मीटिंग ने दिए हैं। बैठक में अपराध की स्थिति, लंबित मामलों, साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, सीसीटीवी निगरानी, वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, क्राइम यूनिटों की कार्रवाई तथा फील्ड पुलिसिंग सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई। पुलिस कमिश्नर ने थाना स्तर पर विभिन्न प्रकार के मामलों की समीक्षा की और अपराध के आंकड़ों को बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबित मामलों, विशेषकर महिला विरुद्ध अपराधों पर विशेष ध्यान देने तथा मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस कमिश्नर द्वारा सभी थाना क्षेत्रों की सीसीटीवी कैमरा रिपोर्ट भी चैक की गई तथा थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। साइबर अपराध में 205 आरोपित पकड़े बैठक में साइबर क्राइम के इस वर्ष के आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। इस वर्ष अब तक साइबर अपराध के 103 मामले दर्ज हुए हैं तथा पुलिस द्वारा इस वर्ष 205 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दोगुना आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 4.61 करोड़ रुपये लोगों को के बचाए इस दौरान पुलिस द्वारा 7,94,19,086 (करीब 8 करोड) रुपये की राशि होल्ड करवाई गई है, जबकि 4,61,42,258 रुपये शिकायतकर्ताओं को वापस दिलवाए जा चुके हैं। शेष राशि भी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित शिकायतकर्ताओं को वापस दिलवाई जाएगी। पुलिस कमिश्नर ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए साइबर जागरूकता पर अधिक जोर देने के निर्देश दिए। साथ ही आर्थिक अपराध शाखा की दोनों इकाइयों के आंकड़ों की समीक्षा की गई। पुलिस ने इस वर्ष आर्थिक अपराध से जुड़े 50 मामलों में कार्रवाई करते हुए 79 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों को मामलों की प्रभावी जांच करते हुए लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के आदेश दिए। 1 करोड़ 25 लाख का सामान बरामद सितंबर में क्राइम टीमों ने इस माह अब तक चोरी, स्नैचिंग, वाहन चोरी, आर्म्स एक्ट, सेंधमारी जैसी आपराधिक वारदातों के 27 मामलों को सुलझाते हुए भारी मात्रा में नशीले पदार्थ, अवैध शराब, चोरी किए गए 18 दुपहिया वाहन, 2 कार तथा अन्य सामान बरामद किया है।बरामद सामान की कुल कीमत 1 करोड़ 25 लाख रुपये से अधिक है। इस दौरान पुलिस ने 4 देशी कट्टे, 1 पिस्टल और 8 कारतूस भी बरामद किए हैं। बुजुर्गों की मदद के लिए तैयार रहे पुलिस पुलिस कमिश्नर ने अकेले रह रहे बुजुर्गों के सत्यापन के बाद पुलिस टीमों को निर्देश दिए कि सत्यापन तक ही सीमित न रहें, बल्कि अब नियमित रूप से ऐसे बुजुर्गों से मिलें, उनसे संवाद करें और जरूरत के समय उनकी मदद करें। उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन के साथ निरंतर संपर्क और सहयोग भी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपराधिक तत्वों पर निगरानी रखने के लिए पुलिस कमिश्नर ने इंटर स्टेट बॉर्डर नाकों पर और अधिक चौकसी बरतने के आदेश दिए। बॉर्डर नाकों पर बैरिकेडिंग समेत अन्य अत्याधुनिक उपकरणों को जोड़ा गया है, जिनकी पुलिस कमिश्नर द्वारा स्वयं जांच भी की गई। उन्होंने अधिकारियों को बॉर्डर क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों और वाहनों पर प्रभावी निगरानी रखने के निर्देश दिए। बैठक में डीसीपी पंचकूला आईपीएस अदिति सिंह, डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक आईपीएस अमरिंदर सिंह, सभी एसीपी, थाना प्रभारी, चौकी इंचार्ज, क्राइम यूनिटों के प्रभारी, दोनों ट्रैफिक थाना प्रभारी तथा विभिन्न महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रभारी उपस्थित रहे।

पीडीएस के तहत सितंबर माह के खाद्यान्न का भंडारण पूर्ण, वितरण जारी

पीडीएस के तहत सितंबर माह के खाद्यान्न का भंडारण पूर्ण, वितरण जारी 24 सितंबर तक लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों ने लगभग 19.58 लाख  क्विंटल चावल का किया उठाव रायपुर,  सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य में सितंबर एवं अक्टूबर 2026 माह के लिए खाद्यान्न का आबंटन 14,186 उचित मूल्य दुकानों को जारी किया गया है। सितंबर माह के लिए आबंटित खाद्यान्न का सभी उचित मूल्य दुकानों में भंडारण पूर्ण हो चुका है तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न वितरण की कार्यवाही निरंतर जारी है। 24 सितंबर 2026 तक राज्य में लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों द्वारा सितंबर माह के खाद्यान्न का उठाव किया जा चुका है। इस दौरान कुल 19 लाख 57 हजार 880 क्विंटल चावल का उठाव हुआ है। शेष राशनकार्डधारियों को भी निर्धारित पात्रता के अनुसार खाद्यान्न का वितरण उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से किया जा रहा है। राज्य के सभी जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न वितरण का कार्य प्रचलित है। राज्य शासन द्वारा खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की नियमित निगरानी और मानिटरिंग की जा रही है, ताकि पात्र राशनकार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न समय पर उपलब्ध कराया जा सके। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू संचालन तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

नर्सिंग विद्यार्थियों ने परीक्षा परिणाम जारी होने पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल का जताया आभार

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल का कटनी ज़िले के अल्प प्रवास में जिले के विभिन्न नर्सिंग कॉलेजों के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भेंट कर आत्मीय स्वागत किया तथा नर्सिंग विद्यार्थियों के लंबित परीक्षा परिणाम जारी कराने की पहल के लिए उनका आभार व्यक्त किया। जिले के एमजीएम कॉलेज/स्कूल नर्सिंग कॉलेज,  साईनाथ कॉलेज एवं विजडम नर्सिंग कॉलेज, कटनी के पदाधिकारियों सहित नर्सिंग कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने उप मुख्यमंत्री  शुक्ल का स्वागत किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि राज्य शासन के लिए छात्र हित सर्वोपरि है। इसी भावना के साथ शासन ने नर्सिंग विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए माननीय उच्च न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य की राह में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए राज्य शासन संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा बी.एससी. नर्सिंग के 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। साथ ही लगभग 28 हजार विद्यार्थियों की आगामी परीक्षा भी शीघ्र आयोजित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छात्र हितों की रक्षा और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शासन सदैव प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा बी.एससी. नर्सिंग द्वितीय वर्ष परीक्षा – मार्च 2026, बी.एससी. नर्सिंग तृतीय वर्ष परीक्षा – जनवरी 2026 के परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं। विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा परिणाम घोषित होने से उनकी आगे की पढ़ाई एवं अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा मिलेगी। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर, शहर के उद्योगपति  मनीष गेई एवं पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।  

भू-अर्जन मुआवजे का ऑनलाइन भुगतान बना किसानों के लिए बड़ी सहूलियत

भू-अर्जन मुआवजे का ऑनलाइन भुगतान बना किसानों के लिए बड़ी सहूलियत एक साल में 901 किसानों के खातों में डीबीटी से पहुंचे 30.34 करोड़ रुपये चेक और बैंक के चक्कर से मिली राहत, मुआवजा, पुनर्वास और बोनस की राशि सीधे खाते में रायपुर,  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य शासन द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए शासकीय सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लगातार सरल बनाया जा रहा है। इसी दिशा में रायगढ़ जिले में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन अंतरित करने की व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी सहूलियत साबित हो रही है। बीते एक वर्ष में रायगढ़ अनुविभाग के 901 किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये अंतरित किए जा चुके हैं।  रायगढ़ अनुविभाग में 26 सितम्बर 2025 से भू-अर्जन से संबंधित भुगतान ऑनलाइन करने की व्यवस्था लागू की गई। इसके बाद किसानों को चेक जारी करने के स्थान पर स्वीकृत राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। 21 सितम्बर 2026 तक इस व्यवस्था के माध्यम से 901 किसानों को 30 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भू-अर्जन मुआवजे के रूप में 391 किसानों के खातों में 20 करोड़ 67 लाख 53 हजार 163 रुपये अंतरित किए गए हैं। इसी तरह पुनर्वास एवं बोनस के तहत 510 किसानों को 9 करोड़ 67 लाख 24 हजार 739 रुपये का भुगतान किया गया है। इस प्रकार दोनों मदों में कुल 901 किसानों को 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हुए हैं। चेक से सीधे खाते तक, आसान हुई भुगतान प्रक्रिया पूर्व में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाता था। चेक प्राप्त करने के बाद किसानों को उसे बैंक में जमा कराने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ता था। कई बार इसके लिए कार्यालय और बैंक के चक्कर भी लगाने पड़ते थे। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को इस प्रक्रिया से राहत मिली है। अब स्वीकृत मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंच रही है। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ भुगतान प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हुई है। किसानों ने कहा—बिना परेशानी सीधे खाते में मिल रही राशि ग्राम कोतासुरा के किसान श्री टंकधर मालाकार ने बताया कि भू-अर्जन मुआवजा वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था किसानों के लिए काफी सुविधाजनक है। पहले की तुलना में अब मुआवजा राशि आसानी से प्राप्त हो रही है। ग्राम दनौट की श्रीमती चम्पाबाई अगरिया ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से किसानों को काफी लाभ मिला है। अब बिना किसी परेशानी के मुआवजे की राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त हो रही है। ग्राम मुरालीपाली के श्री हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि पहले भू-अर्जन की राशि प्राप्त करने के लिए चेक मिलने के बाद बैंक जाना पड़ता था। अब मुआवजा एवं पुनर्वास की राशि सीधे बैंक खाते में जमा हो रही है, जिससे किसानों को काफी सुविधा मिली है। भू-अर्जन मुआवजे की ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था ने किसानों के लिए पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया है। डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से एक ओर किसानों को कार्यालय और बैंक के अनावश्यक चक्कर से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और सुविधा भी बढ़ी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर 2023 में हुई थी शुरुआत, चौथे संस्करण में 2,400 से अधिक प्रदर्शक

ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर वर्ष 2023 में शुरू हुआ यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो चार साल में 60 से 90 देशों तक पहुंच गया है। पहले संस्करण में 1,914 प्रदर्शक आए थे, इस बार संख्या 2,400 के पार है। 90 देशों के 600 से अधिक विदेशी खरीदार भी इसमें शामिल हो रहे हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा बी2बी विजिटर्स के पहुंचने की उम्मीद है।   चार साल के आंकड़े ट्रेड शो के बढ़ते दायरे की तस्वीर भी साफ करते हैं। वर्ष 2024 के दूसरे संस्करण में प्रदर्शकों, बी2बी विजिटर्स और विदेशी खरीदारों की संख्या बढ़ी। वर्ष 2025 में 2,228 प्रदर्शकों के साथ 85 देशों के खरीदार आए। कुल 5.07 लाख से अधिक लोगों ने ट्रेड शो देखा, इनमें 1.40 लाख से ज्यादा बी2बी विजिटर्स थे। इस बार 4.5 लाख से अधिक सामान्य विजिटर्स के आने का अनुमान है।   छह देशों के विशेष पवेलियन इस बार ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम को पार्टनर देशों के रूप में जोड़ा गया है। इनके विशेष पवेलियन भी बनाए गए हैं। यहां प्रदेश के कारोबारी विदेशी कंपनियों और खरीदारों से सीधे बात कर सकेंगे। कारोबार के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उद्यम पर भी बातचीत होगी।   1,882 करोड़ के एमओयू, 11,200 करोड़ की इन्क्वायरी पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि ट्रेड शो अब सिर्फ उत्पाद दिखाने तक सीमित नहीं है। वर्ष 2025 में यहां 1,882 करोड़ रुपये के 2,400 से अधिक एमओयू हुए थे। 11,200 करोड़ रुपये से अधिक की बिजनेस इन्क्वायरी भी मिली थी। ओडीओपी पवेलियन में लगे 466 स्टॉल से 20.77 करोड़ रुपये की बिजनेस लीड और डील सामने आई थीं।   एक करोड़ से अधिक एमएसएमई को मिल रहा बाजार उत्तर प्रदेश में एक करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं। प्रदेश के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। ट्रेड शो में इन छोटे और मध्यम उद्यमों को देश-विदेश के खरीदारों के सामने अपने उत्पाद रखने का मौका मिल रहा है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के ब्रासवेयर समेत अलग-अलग जिलों के ओडीओपी उत्पाद भी यहां पहुंचे हैं।   80 हजार करोड़ से करीब दो लाख करोड़ पहुंचा निर्यात प्रदेश का निर्यात वर्ष 2017 में करीब 80 हजार करोड़ रुपये था, जो मार्च 2025 तक करीब दो लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। अब एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2025-30 में वस्तु एवं सेवा निर्यात को वित्त वर्ष 2024 के 21 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है। इसमें एमएसएमई, स्टार्टअप, ओडीओपी और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों पर खास जोर है। सभी जिलों को निर्यात से जोड़ने की भी तैयारी है।   निर्यात बढ़ाने की यह कवायद प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का भी हिस्सा है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ यूपी में बने उत्पादों के लिए देश और विदेश में नए बाजार तैयार करने पर जोर है।   हस्तशिल्प के साथ एआई और ईवी भी ट्रेड शो में यूपी के उद्योगों का बदलता चेहरा भी नजर आ रहा है। हस्तशिल्प, हैंडलूम और परंपरागत उत्पादों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्रेड और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उत्पाद भी यहां हैं। एक तरफ भदोही का कालीन और मुरादाबाद का ब्रासवेयर है तो दूसरी तरफ एआई, ईवी और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग। चार साल में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का दायरा इसी तरह परंपरागत हुनर से नई तकनीक तक फैल गया है।

नई दिल्ली के 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह में मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत की संधारणीय जल प्रबंधन की अनुकरणीय रूपरेखा

भोपाल  अपर मुख्य सचिवनगरीय विकास एवं आवास  संजय दुबे ने कहा है कि जल केवल एक साधारण प्राकृतिक संसाधन नहीं, अपितु एक रणनीतिक परिसंपत्ति है, जो राज्य की आर्थिक संवृद्धि, नगरीय सहनशीलता, पर्यावरण संधारणीयता और दीर्घकालिक विकास आयोजना की मूल धुरी है। अपर मुख्य सचिव  दुबे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 9वें 'भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह' में "जल को राष्ट्रीय परिसंपत्ति के रूप में पुनर्परिभाषित करना" विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय परिचर्चा में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भावी जल सुरक्षा और समर्थ शहरों के निर्माण के लिए नवोन्मेषी वित्तीय तंत्रों, टिकाऊ अधोसंरचना विकास तथा एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन को अंगीकार करना समय की मांग है। नगरीय विकास और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संतुलन अपर मुख्य सचिव  दुबे ने राज्य की दूरदर्शी जल प्रबंधन नीतियों को रेखांकित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश शासन संधारणीय अधोसंरचना, नवीन वित्तीय प्रबंधन और उत्तरदायी जल संरक्षण को एक साथ एकीकृत कर रहा है। उन्होंने इंदौर में नर्मदा नदी प्रणाली से संबद्ध जल अधोसंरचना के लिए जारी किए गए देश के सफल 'ग्रीन बॉन्ड' का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इंदौर का यह नवाचार यह सिद्ध करता है कि किस प्रकार नगरीय विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ गति दी जा सकती है। 'नमामि नर्मदे' मिशन और दीर्घकालिक जल सुरक्षा अपर मुख्य सचिव  दुबे ने कहा कि 'नमामि नर्मदे' मिशन नदियों के पुनरुद्धार, पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के प्रति मध्यप्रदेश की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह मिशन राज्य के उस व्यापक दृष्टिकोण के अनुकूल है, जिसके तहत आर्थिक प्रगति को प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण प्रबंधन और संरक्षण का संबल प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बल दिया कि 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि के लिए मध्यप्रदेश समावेशी विकास, सुदृढ़ नगरीकरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिये जल सुरक्षा को निरंतर सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। 'इंडिया वाटर डाइजेस्ट' पॉलिसी ब्रीफ का विमोचन सत्र में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) तथा एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई नीतिगत रिपोर्ट "इंडिया वाटर डाइजेस्ट: स्केलिंग इन्वेस्टमेंट फॉर ए वाटर-सिक्योर इंडिया" का विमोचन किया गया। यह रिपोर्ट जल क्षेत्र में पूंजीगत निवेश को बढ़ाने तथा भारत की विकास यात्रा में जल सुरक्षा को एक अनिवार्य आर्थिक स्तंभ के रूप में स्थापित करने पर बल देती है। इस अवसर पर देश-विदेश के नीति निर्माता, विकास संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं जल क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान, बाढ़ में फंसे दर्जनों लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू

रायपुर  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। बुधवार से जारी भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है, जहां उनके भोजन, ठहरने, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। बस्तर कलेक्टर  आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ के पानी में फंसे लगभग 40 लोगों को बचाव दल ने नावों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकालकर ग्राम पंचायत भवन में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर में पहुंचाया। इसी तरह तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया है। ग्राम पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले रिहायशी इलाकों में पानी भरने के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया है। 9 राहत शिविरों में 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय बाढ़ प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिले में कुल 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ का सर्वाधिक असर जगदलपुर शहर में देखने को मिला है, जहां स्थापित चार राहत शिविरों में 175 लोगों को ठहराया गया है। अकेले शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक प्रभावितों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है।  इसी प्रकार जगदलपुर तहसील के नगरनार क्षेत्र अंतर्गत नदी बोड़ना राहत शिविर में लगभग 40 लोग ठहरे हुए हैं। बस्तर तहसील के भैंसगांव शिविर में 77, बकावंड विकासखंड के बेलगांव राहत केंद्र में 35 तथा लोहंडीगुड़ा के ग्राम पंचायत भेजा में बनाए गए राहत शिविर में 26 प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। प्रशासन द्वारा सभी राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने प्रभावित क्षेत्रों का किया सघन निरीक्षण बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर  आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा ने सुबह स्वयं प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने जगदलपुर शहर के गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल डिमरापाल के नजदीकी क्षेत्र तथा नगरनार-भेजापदर मार्ग पर नदी बोड़ना सहित विभिन्न जलभराव वाले स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।      इस दौरान अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावितों के लिए भोजन, पेयजल, सुरक्षित ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही मैदानी अमले को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, बांधों के गेट खुलने से निचले इलाकों में सतर्कता        लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सुरक्षा मानकों के तहत ओडिशा में इंद्रावती नदी पर बने खातीगुड़ा बांध के तीन तथा मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास बसे गांवों और निचले इलाकों में सतर्कता एवं निगरानी बढ़ा दी है।      मन्धोता और बकावंड के बेलगांव सहित चारों ओर से पानी से घिरे क्षेत्रों में बचाव दल नावों एवं आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं। प्रशासनिक अधिकारी कंट्रोल रूम, फोन नेटवर्क और मैदानी अमले के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत शिविर स्थापित करने और राहत सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी भी रखी गई है। प्रशासन की अपील, उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करें जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पूरी सतर्कता बरतें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा न करें तथा उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं। आपात स्थिति में बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल सूचना दें।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल आपसी समन्वय के साथ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की है।

JSSC-CGL केस में CID की कार्रवाई तेज, कुंदन और समीर दो दिन की रिमांड पर

रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में राज्य सरकार की ओर से रद की गई झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय देने का आग्रह किया। अदालत ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर निर्धारित की। यह मामला एपीपी नियुक्ति, फाॅरेस्ट आफिसर सहित अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद किए जाने से संबंधित है। सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिकाओं में संबंधित परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद करने के सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने 18 अगस्त को नियुक्ति का विज्ञापन रद किया था। JSSc-CGL केस के दो आरोपित कुंदन व समीर दो दिनों की रिमांड पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में कथित लेन-देन, पेपर लीक व अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के क्रम में पूर्व में गिरफ्तार दो आरोपित कुंदन कुमार व समीर कुमार को सीआइडी ने गुरुवार को दो दिनों की रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह खंगालने में जुटी है कि अभ्यर्थियों की सेटिंग किस स्तर तक और किन-किन माध्यमों से की गई थी तथा इस पूरे खेल में परीक्षा संचालन व दलालों के तंत्र से कौन-कौन लोग शामिल थे। सीआइडी जांच में मिले तथ्यों का सत्यापन भी कर रही है। कुंदन कुमार ने न केवल खुद मोटी रकम देकर परीक्षा पास की थी, बल्कि उसने गिरोह के साथ मिलकर अन्य अभ्यर्थियों की भी सेटिंग कराई और बिचौलिए की भूमिका निभाई। वहीं, समीर कुमार का नाम भी पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिले सुराग के बाद इस पूरे प्रकरण में सामने आया था।

सरगांव में खुलेगा ट्रॉमा सेंटर, मदकू द्वीप में बनेगा इको टूरिज्म सेंटर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मुंगेली जिले के ग्राम मदकू में 68 करोड़ 96 लाख 96 हजार रुपये की लागत के 21 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, बिजली, खेल और जनसुविधाओं के विस्तार से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री  साय ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा, रक्तदान एवं नि:शुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर’ में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि विकास की गति तेज हो और जनसेवा की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो। गांवों में अच्छी सड़कें हों, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, माताओं और बच्चों को पर्याप्त पोषण मिले और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों तक शासन की प्रत्येक योजना का लाभ सहजता से पहुंचे। इसी सोच के साथ हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को शासन के केंद्र में रखा है। उनके नेतृत्व में पिछले वर्षों में देश में विकास के साथ जनकल्याण का एक नया अध्याय लिखा गया है। छत्तीसगढ़ में भी हमारी सरकार प्रधानमंत्री जी की इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प को जनभागीदारी से और मजबूत करने का माध्यम है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और जनकल्याण की योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के साथ समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी विस्तार मिल रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ है कि नागरिक को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना न पड़े, उसकी समस्या का समय पर समाधान हो और शासन की योजनाओं का लाभ उसे आसानी से मिले। इसी उद्देश्य से सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बना रही है। ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों जैसी पहलों के माध्यम से शासन को नागरिकों के और करीब लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन में बदलाव लाने का काम हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हमारा स्पष्ट प्रयास है कि पात्रता रखने वाला कोई भी परिवार जानकारी या प्रक्रिया के अभाव में किसी योजना के लाभ से वंचित न रहे। स्वस्थ माता और सुपोषित बच्चा मजबूत समाज की नींव आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र हमारे बच्चों के पोषण और माताओं के स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके संपूर्ण विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए उनके पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण और प्रारंभिक देखभाल पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंगन मिलन के माध्यम से परिवार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और स्वास्थ्यकर्मी एक साथ बैठकर बच्चों के पोषण, गर्भवती माताओं की देखभाल, एनीमिया, टीकाकरण और स्वच्छता जैसे विषयों पर संवाद कर रहे हैं। यह पहल स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सराहना करते हुए कहा कि दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं को पहुंचाने में इनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनकी सेवा और समर्पण के कारण शासन की अनेक योजनाएं घर-घर तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि माताओं-बहनों का सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता सीधे पहुंच रही है। यह राशि महिलाओं को अपनी और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। समय पर जांच कराएं, अपने स्वास्थ्य को भी दें प्राथमिकता मुख्यमंत्री  साय ने मेगा स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित नागरिकों से स्वास्थ्य जांच की सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया सहित अनेक बीमारियों की समय रहते पहचान हो जाए तो उनका उपचार अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने माताओं-बहनों से विशेष रूप से आग्रह किया कि परिवार की देखभाल के साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। स्वस्थ माता ही स्वस्थ परिवार की आधारशिला है और स्वस्थ परिवारों से ही स्वस्थ एवं सशक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा। रक्तदान करने वाले सेवाभावियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। हमारे द्वारा दिया गया रक्त किसी अनजान जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। समाज के लिए आगे बढ़कर रक्तदान करने वाले युवा और सभी सेवाभावी अभिनंदन के पात्र हैं। मदकू की विरासत को विकास और पर्यटन से जोड़ेंगे मुख्यमंत्री  साय ने मदकू द्वीप के ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत हमारी पहचान और हमारा गौरव है। इसका संरक्षण करने के साथ इसे नई पीढ़ी से जोड़ना भी हमारी जिम्मेदारी है। मदकू द्वीप में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से इसकी विशिष्ट पहचान को और मजबूती मिलेगी तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। मदकू द्वीप जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को संरक्षित करते हुए यहां आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि प्रदेश और देश के अधिक से अधिक लोग छत्तीसगढ़ की इस समृद्ध धरोहर से परिचित हो सकें। स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और जनसुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण घोषणाएं मुख्यमंत्री  साय ने सरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ट्रॉमा सेंटर प्रारंभ करने तथा पिपर डोल और लमती की प्राथमिक शालाओं को मिडिल स्कूल में उन्नत करने की घोषणा की। उन्होंने ताला महोत्सव और मदकू द्वीप उत्सव के आयोजन के लिए 15-15 लाख रुपये तथा पथरिया के अवंती बाई लोधी कॉलेज में रानी अवंती बाई लोधी की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। … Read more

अब WhatsApp पर करें कचरा संग्रहण की शिकायत, हरियाणा के शहरी निकायों में बनेगी त्वरित व्यवस्था

चंडीगढ़  हरियाणा में कचरा संग्रहण से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए सभी शहरी निकायों में वार्ड समितियों का गठन कर दिया गया है। कोई भी व्यक्ति इन वार्ड समितियों के वाट्सएप नंबर पर शिकायत दर्ज करवा सकता है, जिसका तुरंत समाधान किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में शत-प्रतिशत कचरा उठान के लिए घर-घर जीपीएस आधारित वाहन पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को शहरी निकायों में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, रूट मैपिंग, मशीनरी की उपलब्धता, पोर्टल के माध्यम से भुगतान, वार्ड समितियों के गठन, स्वच्छता पखवाड़ा कलैंडर, बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान व पंजीकरण तथा एनजीओ मैपिंग एंड एमओयू सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की। 5जी नेटवर्क वाले जीपीएस प्रणाली के तहत चलाए जा रहे वाहन बैठक में बताया गया कि कचरा उठाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए 83 शहरी स्थानीय निकायों में 4जी व 5जी नेटवर्क वाली जीपीएस प्रणाली के वाहन चलाए जा रहे हैं। शेष चार शहरी स्थानीय निकायों में भी इस प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाएगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने बताया कि जून में जहां 28 शहरी स्थानीय निकायों में 100 रूट मैपिंग का कार्य पूरा हुआ था, वहीं 20 सितंबर तक ऐसे निकायों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक वार्ड की रूट मैपिंग में संबंधित कचरा संग्रहण वाहन, उसका समय और चालक का संपर्क नंबर शामिल किया जाए। यह जानकारी संबंधित वार्ड कमेटी के वाट्सएप समूह में साझा की जाए, ताकि घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी हो सके। सेवा प्रदाता एजेंसियों को भुगतान केवल सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। भुगतान में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर दंड लगाया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि सितंबर तक 87 में से 86 शहरी स्थानीय निकायों में 1646 वार्ड कमेटियां गठित की जा चुकी हैं जो पूरी तरह से सक्रिय हैं। वार्ड कमेटियों के सदस्यों को पहचान पत्र भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। हरियाणा स्वच्छ लीग के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक और रैंकिंग आधारित स्वच्छता व्यवस्था विकसित की जा रही है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली वार्ड कमेटियों को जिला स्तर पर तिमाही आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। उपायुक्तों के लिए बनी यूजर आइडी सभी जिलों में उपायुक्तों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पोर्टल पर यूजर आइडी बनाई जा चुकी है। 21 जिलों में जिला विशेष प्रकोष्ठों का गठन किया जा चुका है, जबकि चरखी दादरी और पलवल में प्रक्रिया जारी है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ कैलेंडर को हरियाणा में भी अपनाया जा रहा है। इसके तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विशेष स्वच्छता पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली वार्ड कमेटियों को सम्मानित भी किया जाएगा। बल्क वेस्ट जनरेटरों का पंजीकरण अनिवार्य सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर इनका पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन नहीं करने वाले थोक अपशिष्ट उत्पादकों पर कार्रवाई की जाएगी। 65 निकायों में मानव संसाधन की कमी दूर की जा चुकी है, जबकि 68 शहरी स्थानीय निकायों में मशीनरी की कमी दूर की जा चुकी है।