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मुड़ापार हेलीपेड पर सामुदायिक भवन का लोकार्पण, कैबिनेट मंत्री व महापौर रहे मौजूद

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने मथुरा माली मरार पटेल समाज को दी 10 लाख के सामुदायिक भवन की सौगात कोरबा नगर विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन ने रविवार को मुड़ापार, हेलीपेड में मथुरा माली मरार पटेल समाज को 10 लाख की लागत से बने सर्व सुविधायुक्त सामुदायिक भवन की सौगात दी। कार्यक्रम में मंत्री  लखन लाल देवांगन और महापौर मती संजू देवी राजपूत ने समाज के पदाधिकारियों के साथ मां शाकम्भरी देवी की पूजा अर्चना कर प्रदेश और शहर की खुशहाली की कामना की।नवनिर्मित सामुदायिक भवन का फीता काटकर लोकार्पण किया।  इस अवसर पर मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि सभी समाज की आर्थिक उत्थान और प्रगति के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार सभी समाज के साथ खड़ी है और उनके उत्थान और विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। कोरबा विधानसभा में भी सभी समाज की मांग अनुरूप विकास कार्यों को तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। मंत्री  देवांगन ने कहा कि मथुरा माली मरार पटेल समाज का आशीर्वाद मुझे सदैव मिलता रहा है, समाज की सेवा करने का मुझे यह सौभाग्य मिला है। समाज की मांग पर प्रभारी मंत्री मद से 10 लाख की लागत से भवन का निर्माण कराया गया है, आज भवन समाज को समर्पित किया जा रहा है। इसी के साथ-साथ वार्ड क्रमांक 55 सुमेधा नागिन भाटा में समाज के लिए सामुदायिक भवन हेतु 10 लाख की स्वीकृति दी गई है, जल्द ही भवन पूर्ण हो जाएगा। मथुरा माली मरार पटेल समाज  के समाज के सभी प्रमुख जनों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि पटेल समाज एक संगठित और सशक्त समाज है।  समाज  एक सशक्त और संगठित समाज की अवधारणा को पूरा करते हुए आगे बढ़ रहा है। पटेल समाज एक मेहनतकश समाज है। कड़ी मेहनत कर धरती को हरा भरा बनाने का कार्य मरार समाज करता है। उन्होंने कहा कि समाज आज खेती किसानी, सब्जी-भाजी के उत्पादन के साथ- साथ हर क्षेत्र में काफी आगे है।  इस अवसर पर सभापति नूतन सिंह ठाकुर, एमआइसी सदस्य मती धन कुमारी गर्ग, पार्षद ईश्वर पटेल, पार्षद  नरेंद्र देवांगन, पार्षद  मुकुंद कंवर, कोरबा मंडल अध्यक्ष  योगेश मिश्रा,  रामकृष्ण साहू, मती स्मिता सिंह, मती पूर्णिमा पासवान,  नवनीत शुक्ला,  सुकेश दलाल, मती संगीता साहू,  अनुज यादव व समाज के प्रमुख, वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर महापौर मती संजू देवी राजपूत ने कहा कि माननीय कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन की नेतृत्व में कोरबा शहर विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। शहर के वार्ड, बस्तियों के मूलभूत विकास कार्य की बात हो, या फिर बड़े निर्माण कार्यों की बात हो, और सबसे महत्वपूर्ण सभी समाज को उनके मांग अनुरूप विकास कार्यों की सौगात देने की बात हो। सभी कार्यों के लिए   शासन से राशि की स्वीकृति भी ला रहे हैं, विकास कार्यों को शुरू कर पूर्ण कर सौगात भी दे रहे हैं। समाज ने किया मंत्री और महापौर का अभिनंदन     इस सौगात पर समाज के अध्यक्ष श्  आर डी पटेल,  महादेव पटेल,  लक्ष्मण पटेल, उपाध्यक्ष मती राजकुमारी पटेल, मती संध्या पटेल, मती संगीता पटेल,  राम अवतार पटेल,  चंद्र लाल पटेल,  गोविंद पटेल,  संतोषी पटेल,  राजाराम पटेल के साथ-साथ अधिक संख्या में समाज के पदाधिकारियों ने मंत्री  लखन लाल देवांगन और महापौर मती संजू देवी राजपूत का आभार जताते हुए उनका अभिनंदन किया।

दुगली का वन धन विकास केंद्र: एलोवेरा उत्पादों से मिली नई पहचान

रायपुर एलोवेरा आधारित पर्सनल केयर उत्पादों से पहचान बना रहा दुगली का वन धन विकास केंद्र प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के अंतर्गत जिला धमतरी के ग्राम दुगली में स्थापित वन- धन विकास केंद्र (VDVK) आज महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का सफल उदाहरण बन गया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र वनोपज के मूल्य संवर्धन के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को रोजगार और सम्मानजनक आय प्रदान कर रहा है। 25 विभिन्न प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार दुगली वन धन विकास केंद्र के स्व-सहायता समूहों के संघ के रूप में कार्य कर रहा है। एक प्रमुख समूह संचालन की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि अन्य समूह आवश्यकता और ऑर्डर के अनुसार उत्पादन कार्य में सहयोग करते हैं। केंद्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है। केंद्र में वर्तमान में लगभग 25 विभिन्न प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें हर्बल पाउडर, स्वास्थ्य पेय और अन्य हर्बल उत्पाद शामिल हैं। सभी उत्पाद गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बनाए जाते हैं तथा आयुष और खाद्य सुरक्षा विभाग से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुँच विशेष रूप से एलोवेरा से तैयार साबुन, क्रीम, बॉडी वॉश और हैंडवॉश जैसे पर्सनल केयर उत्पादों ने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे महिलाओं की आय में भी वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनरी सहायता, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके परिणामस्वरूप उत्पाद राज्य स्तरीय मेलों, विभागीय नेटवर्क और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुँच रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र का वार्षिक कारोबार 74 लाख 62 हजार 156 रुपए दर्ज किया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। 'छत्तीसगढ़ हर्बल' ब्रांड के अंतर्गत तैयार उत्पाद अब विभिन्न मार्ट, चयनित आउटलेट्स और ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हैं तथा आयुष विभाग और पर्यटन मंडल को नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना किया साकार दुगली वन धन विकास केंद्र आज केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी बन चुका है, जो यह दर्शाता है कि शासकीय योजनाओं और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया सुदृढ़ कानून व्यवस्था का खाका

आर्थिक सर्वे 2025-26 प्रदेश में संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई से अपराध दर में आई गिरावट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया सुदृढ़ कानून व्यवस्था का खाका   बोले, आधुनिक तकनीक से सशक्त हुई पुलिसिंग,सीसीटीवी, डिजिटल केस मैनेजमेंट और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था से बढ़ा जनविश्वास महिला पुलिस बीट, एंटी-रोमियो स्क्वॉड और सेफ सिटी परियोजना से सुरक्षित हुई सार्वजनिक स्थल लखनऊ  वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी, जिसमें कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया गया। इस दौरान उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है। इसका सकारात्मक असर यह रहा कि प्रदेश में अपराध दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता के साथ-साथ निवेशकों का भी विश्वास बढ़ा है। महिला पुलिस बीट, सीसीटीवी और एंटी रोमियो स्क्वायड ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देकर पुलिस सुधारों को नई दिशा दी गई है। सीसीटीवी, डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से पुलिस की कार्यक्षमता और जवाबदेही में वृद्धि हुई है। इससे जनता में निर्भीक होकर शिकायत दर्ज कराने का वातावरण तैयार हुआ है और अपराध नियंत्रण को मजबूती मिली है। महिला सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया है। सेफ सिटी परियोजना के तहत महिला पुलिस बीट, सीसीटीवी नेटवर्क और एंटी-रोमियो स्क्वॉड्स की तैनाती से सार्वजनिक स्थलों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही उत्तर प्रदेश फैक्ट्री अधिनियम (संशोधित) 2025 के माध्यम से महिलाओं को औद्योगिक कार्यों, विशेषकर नाइट शिफ्ट में, समान अवसर प्रदान किए गए हैं। मिशन शक्ति से सामाजिक सहभागिता को नई गति मिली मिशन शक्ति के तहत सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सेवाओं के एकीकरण से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को नई गति मिली है। वहीं न्यायिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और ई-कोर्ट्स की स्थापना की गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आई है। आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख है कि जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से छोटे प्रक्रियात्मक अपराधों का अपराधीकरण समाप्त कर पारदर्शिता आधारित शासन मॉडल को मजबूती दी गई है। कुल मिलाकर, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और न्यायिक सुधारों के क्षेत्र में सरकार के इन कदमों ने उत्तर प्रदेश को सुरक्षित और निवेश के अनुकूल राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बस्तर पंडुम में दिखी आदिवासी जीवन की झलक, प्रदर्शनी देखकर मंत्रमुग्ध हुए केंद्रीय गृहमंत्री

रायपुर. अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव, विजेता दलों से मिलकर बढ़ाया उत्साह संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाओं की जानकारी ली। अमित शाह ने देखा बस्तर की जनजातीय विरासत का वैभव, विजेता दलों से मिलकर बढ़ाया उत्साह केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस व लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है। प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं, वैद्यराज द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।” इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं की प्रतियोगिता में विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। “बस्तर पंडुम 2026” संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता 1.     जनजातीय नृत्य – गौर माड़िया नृत्य (बुधराम सोढ़ी, दंतेवाड़ा) 2.     जनजातीय गीत – पालनार दल (मंगली एवं साथी, दंतेवाड़ा) 3.     जनजातीय नाट्य – लेखम लखा (सुकमा) 4.     जनजातीय वाद्ययंत्र – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव) 5.     जनजातीय वेशभूषा – गुंजन नाग (सुकमा) 6.     जनजातीय आभूषण – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर) 7.     जनजातीय शिल्प – ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स, कांकेर) 8.     जनजातीय चित्रकला – दीपक जुर्री (कांकेर) 9.     जनजातीय पेय पदार्थ – भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान, बीजापुर) 10.     जनजातीय व्यंजन – श्रीमती ताराबती (दंतेवाड़ा) 11.     आंचलिक साहित्य – उत्तम नाईक (कोण्डागांव) 12.     बस्तर वन औषधि – राजदेव बघेल (बस्तर)

बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मान

रायपुर. बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मान संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 के समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुति देखकर  अमित शाह भी भावविभोर हो उठे और उन्होंने बच्चों को ताली बजाकर प्रोत्साहित किया। बस्तर पण्डुम समापन समारोह में बच्चों की कला को मिला केंद्रीय गृहमंत्री का सम्मान कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा *मलखंभ प्रदर्शन* भी किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। केंद्रीय गृहमंत्री  शाह ने बच्चों की कला, अनुशासन एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भी बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उल्लेखनीय है कि “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत को हिंदी एवं हल्बी बोली में रचा गया है। इसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों ने अपनी आवाज और संगीत का योगदान दिया है। दायरा बैंड द्वारा इस गीत को आधुनिक संगीत के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है।

कर्ज का बढ़ता बोझ: पांच साल में दोगुना, बजट में 8 लाख करोड़ संभव

जयपुर राजस्थान का बजट 11 फरवरी को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। इसमें राजस्थान के आय-व्यय अनुमान भी पेश किए जाएंगे। सरकार अपने खर्च का लेखा-जोखा रखने के साथ ही यह भी बताएगी कि प्रदेश पर कर्ज कितना बढ़ चुका है और आने वाले वित्त वर्ष में यह और कितना बढ़ जाएगा।  बीते 5 वर्षों में राजस्थान में कर्ज की रफ्तार दोगुनी तेजी से बढ़ी है। मार्च  2022 तक राजस्थान पर कुल कर्ज 3,53,556.08 करोड़ रुपए था। यानी प्रति व्यक्ति लगभग 45 हजार रुपए का औसत कर्ज था, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में यह 7 लाख 23 हजार करोड़ रुपए प्रोजेक्टेड है और यदि इसी रफ्तार से यह आगे बढ़ा तो आने वाले नए बजट में कर्ज की यह सीमा बढ़कर 8 लाख करोड़ रुपए पार कर जाएगी। बजट अनुमान के मुताबिक 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन पर 83,775 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। इसमें अगले साल भी औसतन 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं आने वाले वित्त वर्ष में पेंशन व्यय 34,146 करोड़ रुपए से 40 हजार करोड़ रुपए  तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन व्यय में यह तेज बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में गंभीर वित्तीय चुनौती बन सकती है। ब्याज भुगतान बना हुआ है दबाव राज्य पर बढ़ते कर्ज का असर ब्याज भुगतान पर भी दिखाई देता है। 2025-26 में ब्याज भुगतान 40,058 करोड़ रुपए बताया गया है, जो भले ही केवल 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता हो लेकिन कुल राजस्व व्यय का बड़ा हिस्सा अब भी ब्याज चुकाने में जा रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 में कुल ऋण की स्थिति 3,53,556 करोड़ रुपये थी। अगले वर्ष, 2022-23 में कुल ऋण बढ़कर 3,88,383 करोड़ रुपये हो गया। 2023-24 में कुल ऋण लगभग 571638 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में यह 641740 करोड़ और मौजूदा वित्त वर्ष में यह लगभग 726384 करोड़ रुपए हो गया।

लॉरेंस गैंग का खौफ: जोधपुर के दो व्यापारी निशाने पर

जोधपुर जोधपुर शहर में दो कारोबारियों को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर जान से मारने की धमकी देने और दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। इस संबंध में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है, जिसके बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। डिब्बा कॉल के जरिए दी गई धमकी पुलिस के अनुसार हाउसिंग बोर्ड के दो लोगों को एक डिब्बा कॉल के जरिए धमकी दी गई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को लॉरेंस गैंग से जुड़ा बताते हुए लॉरेंस का भाई 'आरजू' होने का दावा किया। आरोपी ने दोनों कारोबारियों से 48 घंटे के भीतर एक-एक करोड़ रुपये, कुल दो करोड़ रुपये की रंगदारी देने की मांग की और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। भारत से ही आया था धमकी जानकारी के मुताबिक धमकी देने वाला और कॉल रिसीव करने वाला व्यक्ति दोनों ही भारत से बाहर थे। आरोपी ने पहले एक व्यक्ति को कॉल किया और फिर उसी के माध्यम से व्हाट्सएप कॉल से बात करवाई गई। बिचौलिए ने अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर धमकी देने वाले की आवाज दोनों को सुनाई। इस तरह की तकनीक को डिब्बा कॉल कहा जाता है, जिसमें कॉल को तीसरे व्यक्ति के माध्यम से जोड़कर बातचीत करवाई जाती है, जिससे कॉल का स्रोत ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। क्रिकेट सट्टे के व्यवसाय से जुड़े हैं कारोबारी सूत्रों के अनुसार दोनों कारोबारी क्रिकेट सट्टे के व्यवसाय से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें से एक हाल ही में दुबई से भारत लौटा है। धमकी मिलने के बाद उनके परिवार में डर और दहशत का माहौल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पहले भी कई बार लॉरेंस गैंग के नाम पर फर्जी लोगों द्वारा धमकी देने के मामले सामने आ चुके हैं। फिलहाल कॉल डिटेल, तकनीकी साक्ष्य और बिचौलिए की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धमकी वास्तविक गैंग से जुड़ी है या किसी ने फर्जी तरीके से डराने की कोशिश की है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नक्सली मुठभेड़ में अदम्य साहस दिखाने वाले 60 जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति देने के लिए कार्यक्रम में पहुंचे।

बालाघाट  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नक्सली मुठभेड़ में अदम्य साहस दिखाने वाले 60 जवानों को क्रम  से पूर्व पदोन्नति देने के लिए बालाघाट पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सलामी लेने के बाद अमर जवान ज्योति पर पुष्प चक्र अर्पित कर प्रदेश की शांति और सुरक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ यादव को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिवादन किया गया। इस अवसर पर पुलिस जवानों ने "वो बांके अलबेले- जो वापस न लौटे- इस मिट्टी के बेटे" गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने "नक्सल संस्मरण" पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह सांसद श्रीमती भारती पारधी ,पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन, एडीजी नक्सल विरोधी अभियान वेंकटेश्वर राव, पुलिस अधीक्षक बालाघाट आदित्य मिश्रा सहित विधायक गण जनप्रतिनिधि , पुलिस जवान तथा शहीद जवानों के परिजन उपस्थित रहे।

किसानों के लिए अब खुशी का माध्यम बनी कृषि

कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन किसानों के लिए अब खुशी का माध्यम बनी कृषि  विधान मंडल के बजट सत्र में योगी सरकार ने प्रस्तुत किया आर्थिक सर्वेक्षण   विकसित उत्तर प्रदेश 2047- कृषि को आधुनिक व किसानों को समृद्ध बनाने के लिए लक्ष्य निर्धारित  लखनऊ,  योगी सरकार ने विधान मंडल के बजट सत्र में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया। योगी सरकार ने प्रदेश के विकास में कृषि व किसान को प्राथमिकता में रखा। लागत कम और उत्पादन अधिक पर जोर देकर योगी सरकार ने अन्नदाता किसानों को समृद्ध किया। योगी सरकार ने कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन में आर्थिक सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश की सफलतम कहानी का जिक्र किया।  कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़कर हुआ 24.9 प्रतिशत  आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2017-18 के सापेक्ष 2024-25 में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का अर्थव्यवस्था में योगदान 24 प्रतिशत से बढ़कर 24.9 प्रतिशत हो गया। 2024-25 में 737.4 लाख मीट्रिक टन के साथ खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। 2017-18 से 2024-25 की अवधि में कुल खाद्यान्न उत्पादन में 28.5 प्रतिशत तथा उत्पादकता में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ प्रदेश में कुल खाद्यान्न उत्पादन का देश में योगदान 18.1 प्रतिशत से बढ़कर 20.6 प्रतिशत हो गया। फसलों का प्रति हेक्टेयर सकल मूल्यवर्धन वर्ष 2017-18 में 0.98 लाख प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 1.73 लाख प्रति हेक्टेयर हो गया है। 2023-24 व 2024-25 में खरीफ, रबी फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में काफी परिवर्तन हुआ। राज्य के कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीओ) में धान की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत है। धान के क्षेत्रफल में 19.4 प्रतिशत, उत्पादन में 23.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादकता भी 3.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2024-25 में 29.4 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गई है। रबी फसलों की बात करें तो 2023-24 व 2024-25 में प्रदेश की क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। रबी फसल गेहूं की कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीओ) में 18.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके क्षेत्रफल में 2.6 प्रतिशत, उत्पादन में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादकता भी 3.5 प्रतिशत बढ़कर 41.2 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गई है। राज्य सरकार की नीतियों (दलहन-तिलहन मिशन, बागवानी विकास कार्यक्रम, एमएसपी और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं ने फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दिया है। 2017-18 से 2024-25 के बीच दलहन का क्षेत्रफल 22.64 से बढ़कर 25.66 लाख हेक्टेयर हो गया है। तिलहन का क्षेत्रफल 10.87 से बढ़कर 28.8 लाख हेक्टेयर (लगभग 165 प्रतिशत वृद्धि) हो गया।  कृषि विकास के लिए संचालित की जा रहीं महत्वपूर्ण योजनाएं व कार्यक्रम  उर्वरक वितरण: 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 806.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया। कृषि रक्षा रसायनः 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 1,52,960.11 मीट्रिक टन/किलोलीटर कृषि रक्षा रसायन वितरित किए गए। फसली ऋण वितरणः 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल रु.1,34,2978.3 करोड़ फसली ऋण वितरित किया गया। पीएम-किसान सम्मान निधि : वर्ष 2018-19 से माह नवम्बर 2025 तक कुल 21 किस्तों में 3.12 करोड़ किसानों को कुल रु० 94,668.58 करोड़ की धनराशि डी०बी०टी० के माध्यम से हस्तांतरित की गयी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाः वर्ष 2017-18 से वर्ष 2024-25 तक कुल 61.98 लाख बीमित किसानों को रु० 5110.23 करोड़ धनराशि की क्षतिपूर्ति दी गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 के माह नवम्बर तक कुल 2.03 लाख कृषकों को रु० 138.89 करोड़ की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा चुका है। खेत तालाब योजनाः वर्ष 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 32,732 खेत तालाब का निर्माण कराया गया। एम-पैक्स सदस्यता महाअभियान-2025- इसके तहत 24 लाख सदस्य बनाये गए। 43 करोड़ की राशि एकत्र एवं जिला सहकारी बैंक में 2 लाख से अधिक खाते खोले गए एवं 550 करोड़ रुपये जमा किए गए। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम) योजनाः वर्ष 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक किसानों के प्रक्षेत्रों पर कुल 86,128 सोलर पम्प की स्थापना की गई।  भारत का बीज उत्पादन केंद्र बनने की क्षमता प्राप्त करेगा उत्तर प्रदेश  सीड पार्क- उत्तर प्रदेश में बीज पार्कों की स्थापना : कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 5 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक-एक उन्नत बीज पार्क की स्थापना की जा रही है। यह निर्णय प्रदेश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। पहला पार्क लखनऊ के अटारी क्षेत्र में 130.63 एकड़ भूमि पर 266.70 करोड़ के निवेश से बनेगा, जहाँ बीज प्रसंस्करण, स्पीड ब्रीडिंग, हाइब्रिड बीज विकास की सुविधा होगी। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर भी उत्पन्न होंगे। *सीड पार्कों की स्थापना से बाहर से बीज आयात पर निर्भरता घटने के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बीजों से उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे बेहतर उत्पादन होगा और आय में वृद्धि होगी। यह कदम उत्तर प्रदेश को कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करेगा तथा आने वाले वर्षों में प्रदेश भारत का बीज उत्पादन केंद्र बनने की क्षमता प्राप्त करेगा। बागवानी फसलों के संवर्धन हेतु संचालित योजनाएं एवं कार्यक्रम प्रदेश में 2024-25 में कुल बागवानी का क्षेत्रफल 2566.4 हेक्टेयर व उत्पादन 60339.8 मीट्रिक टन है। आम, आलू, मटर, सब्जी, शहद के उत्पादन में यूपी देश का अग्रणी राज्य है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, पर ड्राप मोर क्राप योजना तथा फल पट्टियों के विकास हेतु अनेक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश में हाईटेक नर्सरी की स्थापना, टिश्यू कल्चर से केला, पपीता जैसे फलदार बागों के रोपण, मशरूम उत्पादन, पोली हाउस व शेडनेट हाउस की स्थापना, मधुमक्खी पालन, शीत गृहों की स्थापना एवं क्षमता विस्तार हेतु अनुदान भी दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-पर ड्राप मोर क्रॉप माइक्रोइरीगेशन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2022-23 से पर ड्राप मोर क्राप माइक्रोइरीगेशन उपघटक के रूप में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत समस्त जनपदों में संचालित की जा रही है। वर्ष 2023-24 के 18,257 हे० की तुलना में 2024-25 के 37,627 हे० तथा ड्रिप सिंचाई में 42,450 हे० के सापेक्ष 64,711 हे० माइक्रोइरीगेशन किया गया। आलू बीज उत्पादन एवं वितरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त आलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए आलू उत्पादकों को उच्चकोटि के रोग रहित आलू बीज उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय आलू अनुसंधान … Read more

Census 2027 में घर की हर सुविधा की गिनती: 33 सवाल होंगे हर घर से पूछे, छत से लेकर इंटरनेट तक

रायपुर देश की अगली जनगणना सिर्फ जनसंख्या गिनने का अभियान नहीं रह जाएगी, बल्कि यह लोगों के रहन-सहन, सुविधाओं और जीवन स्तर का पूरा सामाजिक एक्स-रे साबित होने जा रही है। जनगणना-2027 के मकान सूचीकरण चरण में हर घर से 33 बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी। इन सवालों से यह साफ होगा कि देश में कौन पक्के घर में रह रहा है, किसके पास शौचालय है, कौन गैस पर खाना बना रहा है और किस घर तक इंटरनेट पहुंच चुका है। सरकारी तैयारियों के मुताबिक इस बार जनगणना कर्मी टैबलेट आधारित डिजिटल सिस्टम से डाटा दर्ज करेंगे, ताकि योजनाएं कागजी नहीं, जमीनी हकीकत पर बन सकें। सबसे पहले घर की पहचान और बनावट जनगणना टीम घर पहुंचते ही भवन नंबर और जनगणना मकान नंबर दर्ज करेगी। इसके बाद मकान की बुनियादी संरचना पर सवाल होंगे। फर्श किस सामग्री की है, दीवारें कच्ची हैं या पक्की, छत टीन, कंक्रीट या अन्य किस्म की है। मकान रिहायशी है, दुकान है या किसी और उपयोग में यह भी दर्ज होगा। मकान की हालत (अच्छी, रहने लायक या जर्जर) भी लिखी जाएगी। परिवार मुख्य रूप से कौन-सा अनाज खाता है गेहूं, चावल, मक्का या अन्य, यह भी जनगणना में शामिल रहेगा। अंत में एक मोबाइल नंबर लिया जाएगा, जिसका उपयोग केवल जनगणना से जुड़ी आधिकारिक सूचना पहुंचने के लिए किया जाएगा। यही जानकारी भविष्य की आवास योजनाओं की दिशा तय करेगी। परिवार की पूरी प्रोफाइल बनेगी घर के बाद बारी परिवार की होगी। परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों की कुल संख्या, परिवार क्रमांक और परिवार के मुखिया का नाम दर्ज किया जाएगा। मुखिया का लिंग और यह भी कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग से है, यह पूछा जाएगा। घर में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या भी दर्ज होगी, जिससे पारिवारिक संरचना का सामाजिक विश्लेषण हो सके। कमरे कितने, घर किसका मकान का स्वामित्व किसके पास है खुद का, किराये का या अन्य, यह महत्वपूर्ण सवाल रहेगा। परिवार के पास रहने के लिए कुल कितने कमरे हैं, यह भी पूछा जाएगा। यह डाटा भीड़भाड़ और आवासीय घनत्व की वास्तविक स्थिति बताएगा। पानी, बिजली, शौचालय की असली तस्वीर पीने का पानी किस स्रोत से आता है, पानी घर में उपलब्ध है या बाहर से लाना पड़ता है। रोशनी का मुख्य साधन क्या है जैसे बिजली, सोलर या अन्य। शौचालय है या नहीं, है तो किस प्रकार का। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, साथ ही यह भी दर्ज होगा कि घर में स्नानगृह है या नहीं। रसोई का धुआं या गैस की लौ जनगणना कर्मी यह भी पूछेंगे कि घर में अलग रसोई घर है या नहीं। एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है या नहीं और खाना पकाने में किस ईंधन का उपयोग होता है, लकड़ी, गोबर, कोयला या गैस। यह जानकारी उज्ज्वला जैसी योजनाओं के असर का वास्तविक मूल्यांकन करेगी। इलेक्ट्रानिक और डिजिटल पहुंच भी होगी दर्ज अब जनगणना में यह भी गिना जाएगा कि घर सूचना और तकनीक से कितना जुड़ा है। घर में रेडियो या ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर या लैपटाप है या नहीं, यह पूछा जाएगा। टेलीफोन, मोबाइल या स्मार्ट फोन की उपलब्धता भी दर्ज होगी। यह डाटा बताएगा कि डिजिटल इंडिया की योजनाएं गांव और शहर तक कितनी पहुंची हैं। साइकिल से कार तक की गिनती परिवार के पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड है या नहीं। कार, जीप या वैन जैसी चार पहिया गाड़ियों की जानकारी भी दर्ज होगी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति का एक बड़ा संकेत मिलेगा। अहम हैं ये 33 सवाल विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ डाटा संग्रह नहीं, बल्कि आने वाले दशक की नीतियों की नींव है। आवास, पेयजल, स्वच्छता, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और सामाजिक कल्याण की योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होंगी। इस बार जनगणना का मकसद सिर्फ कितने लोग है यह जानना नहीं, बल्कि यह समझना है कि लोग कैसे जी रहे हैं। जानकारी अनुसार जनगणना-2027 का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। यह प्रक्रिया अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चयनित 30 दिनों में पूरी की जाएगी। पहले चरण के पूरा होने के बाद इससे संबंधित अधिसूचना राज्य राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी। सीमा स्थिरीकरण लागू सरकार की सीमा स्थिरीकरण अधिसूचना के तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी भी ग्रामीण या शहरी प्रशासनिक इकाई की सीमा या क्षेत्राधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। डिजिटल जनगणना की पूरी तैयारी जनगणना 2027 इस बार पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित होगी। पहले चरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जो मकानों की स्थिति, उनके उपयोग, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, घरेलू परिसंपत्तियों और परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से जुड़े होंगे। केंद्र सरकार ने इन प्रश्नों को 23 जनवरी 2026 को विधिवत जारी कर दिया है। इस चरण की नोडल जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को सौंपी गई है। जनगणना में इस बार शुरुआत से ही जियो-स्पैशियल डेटा और एनालिटिक्स के उपयोग को अनिवार्य किया गया है, जिससे हर मकान का डिजिटल मैपिंग आधारित रिकॉर्ड तैयार होगा। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार प्रक्रिया दो चरणों में होगी। प्रथम चरण (अप्रैल–सितंबर 2026) में मकान सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि द्वितीय चरण (फरवरी 2027) में जनसंख्या की वास्तविक गणना होगी। देशभर के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि तय की गई है।