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25 सितंबर से एमपी में शुरू हो जाएगी “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” अंतर्गत इंटरसिटी व इंट्रासिटी बसें

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत सावर्जनिक यात्री बसों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत शुरू होने वाली इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके अंतर्गत सड़कों पर दौड़ने वाली बसों का स्टेयरिंग एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित ड्राइवरों के हाथों में होगा। इसके लिए बस चालकों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों से परिचित कराने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नई तकनीक वाली बसों का सुरक्षित और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पैनिक बटन और जीपीएस से बढ़ेगी सुरक्षा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस की सुविधा रहेगी। जीपीएस के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी। पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करेगा। इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रदेश में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे शहरों के बीच आवागमन के साथ ही शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बढ़ेंगी। सेवा का उद्देश्य प्रदेशवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ सुगम, सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इंटरसिटी बसें दो या दो से अधिक शहरों को जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर चलेंगी।  साल-दर-साल बढ़ेगी बसों की संख्या, वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में सार्वजनिक परिवहन सेवा का विस्तार करते हुए बसों की संख्या 15 हजार तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा चरणबद्ध कार्य योजना भी तैयार की गई है। इसके अनुसार प्रतिवर्ष 2500 से तीन हजार नई बसें जोड़ी जाएंगी। सार्वजनिक परिवहन के दायरे का विस्तार होने के साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में यात्रियों के लिए आवागमन के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। चालकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण, नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर जल्द होंगे तैयार प्रदेश में वाहन चालकों को आधुनिक बसों की सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए इंदौर और छिंदवाड़ा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में 5 रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार हो जाएंगे। ये सेंटर भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से वाहन चालकों को आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों तथा इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यूपीआईटीएस-2026 में दिखेगा योगी सरकार के ‘बिजनेस-रेडी’ यूपी का दम

लखनऊ योगी सरकार उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख निवेश और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के अपने प्रयासों को अब वैश्विक मंच पर और मजबूती देने जा रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 में प्रदेश के ‘बिजनेस-रेडी’ इकोसिस्टम, निवेश-अनुकूल नीतियों और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हुए सुधारों को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। पांच दिवसीय आयोजन में इन्वेस्ट यूपी की ओर से हॉल-1 और हॉल-4 में दो समर्पित पवेलियन स्थापित किए जा रहे हैं। ये पवेलियन देश-विदेश से आने वाले निवेशकों, उद्यमियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के लिए प्रदेश में निवेश और व्यापार के अवसरों को समझने तथा सीधे संपर्क का प्रमुख केंद्र होंगे। यहां उत्तर प्रदेश की 36 से अधिक क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों, नीतिगत प्रोत्साहनों और एकीकृत निवेश सुविधा प्रणाली की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। वैश्विक निवेशकों के लिए खुलेगा यूपी का बाजार यूपीआईटीएस-2026 में वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस साझेदार देशों के रूप में शामिल होंगे। इन देशों की कंपनियां अपने उत्पादों, तकनीकों और कारोबारी अवसरों का प्रदर्शन करेंगी। करीब 100 अंतरराष्ट्रीय खरीदार जहां उत्तर प्रदेश के उत्पादों के लिए सोर्सिंग और खरीद के अवसर तलाशेंगे, वहीं 36 विदेशी प्रदर्शक अपने उत्पादों और औद्योगिक तकनीकों को प्रदर्शित करेंगे। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी बातचीत प्रस्तावित है। योगी सरकार की ओर से प्रदेश में तैयार किए गए निवेश-अनुकूल वातावरण को निवेशकों तक पहुंचाने के लिए आयोजन के दौरान बी2बी बैठकें, कंट्री सेशन, एग्जीक्यूटिव राउंडटेबल और सेक्टरल राउंडटेबल आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से निवेशकों को प्रदेश में कारोबार विस्तार, तकनीकी साझेदारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नए निवेश की संभावनाओं से सीधे जोड़ा जाएगा। सेक्टरल राउंडटेबल में निवेश और औद्योगिक अवसरों पर मंथन उद्घाटन सत्र के बाद इन्वेस्ट यूपी विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित राउंडटेबल और नॉलेज सेशन का समन्वय करेगा। इनमें ‘रीइमैजिनिंग ग्लोबल सप्लाई चेन्स : व्हाई उत्तर प्रदेश मैटर्स नाउ’, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर एवं ईएसडीएम इन्वेस्टर्स राउंडटेबल तथा फार्मा एवं मेडटेक स्ट्रैटेजिक सेशन प्रमुख हैं। इसके अलावा टेक्सटाइल एवं अपैरल, फूड प्रोसेसिंग तथा सीपीएसयू के माध्यम से निवेश और औद्योगिक विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। इन सत्रों में नीति-निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ संबंधित क्षेत्रों की नीतियों, उभरते अवसरों और विकास की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन को मिलेगी नई गति यूपीआईटीएस-2026 उत्तर प्रदेश के ओडीओपी उत्पादों, एमएसएमई, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और विदेशी प्रदर्शकों की भागीदारी से प्रदेश के उद्यमियों को नए कारोबारी संपर्क और बाजार उपलब्ध होने की संभावनाएं बढ़ेंगी। योगी सरकार के ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन के अनुरूप यह आयोजन प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने, निर्यात विस्तार को गति देने, तकनीकी साझेदारी बढ़ाने और नए निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को मजबूत करेगा। यूपीआईटीएस-2026 के जरिए उत्तर प्रदेश अपने मजबूत औद्योगिक आधार, निवेश-अनुकूल नीतियों और कारोबारी सुविधाओं को वैश्विक निवेश समुदाय के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा।

महतारी वंदन योजना की राशि बचाकर खरीदा स्मार्टफोन, अब दूसरों की भी कर रहीं मदद

रायपुर  दंतेवाड़ा जिले के बचेली की निवासी कुमारी के पास पहले अपना स्मार्टफोन नहीं था। सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी जानकारी के लिए उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली राशि में से कुछ हिस्सा नियमित रूप से बचाकर उन्होंने अपने लिए स्मार्टफोन खरीदा। अब वे इससे नई नई जानकारियां हासिल करने के साथ आसपास के लोगों के साथ साझा करने और विभिन्न समस्याओं के निराकरण में मदद करती हैं। सीमित संसाधनों के कारण कुमारी के लिए नया फोन खरीदना कठिन था। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि मिलने पर उन्होंने थोड़ी-थोड़ी बचत शुरू की। कुछ महीनों बाद जमा रकम से स्मार्टफोन खरीदा और उसका उपयोग करना सीखा। अब वे मोबाइल पर देश-दुनिया की खबरें देखती हैं और सरकारी योजनाओं तथा डिजिटल सेवाओं के बारे में जानकारी जुटाती हैं। श्रीमती कुमारी अपने आसपास के लोगों, विशेषकर बुजुर्गों को भी जरूरत पड़ने पर जानकारी खोजने में मदद करती हैं। किसी योजना की जानकारी हो या कोई अन्य जरूरी सूचना, वे मोबाइल के माध्यम से उसे उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं। अपनी जरूरत के लिए खरीदा गया स्मार्टफोन अब उनके लिए दूसरों के काम आने का माध्यम भी बन गया है।

अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस की विगत 5 दिनों में व्यापक कार्रवाई

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, बिक्री एवं अवैध खेती के विरुद्ध विगत 5 दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार प्रभावी कार्रवाई की गई। पुलिस टीमों ने मुखबिर सूचनाओं के आधार पर दबिश, घेराबंदी एवं चेकिंग की कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में गांजा, डोडाचूरा, अफीम, एमडी ड्रग्स एवं स्मैक सहित मादक पदार्थ जब्त किए। इन कार्रवाइयों में आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किए गए। विभिन्न प्रकरणों में मादक पदार्थों के साथ वाहन, मोबाइल फोन एवं अन्य सामग्री भी जब्त की गई। विगत पांच दिनों की इन कार्यवाहियों में कुल 1 करोड़ 39 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्‍त की। मंदसौर थाना अफजलपुर पुलिस ने अवैध डोडाचूरा तस्करी की कार्रवाई करते हुए 60 किलो 100 ग्राम डोडाचूरा, जिसकी कीमत लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये तथा तस्करी में प्रयुक्त ब्रेजा कार, कीमत लगभग 6 लाख रुपये जब्त की। मामले में राजस्थान निवासी सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कुल 7 लाख 20 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की। थाना गरोठ पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 2 किलोग्राम अफीम, जिसकी कीमत 3 लाख रुपये, एक मोबाइल फोन तथा मोटरसाइकिल जब्त की। कुल 3 लाख 70 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की। थाना नारायणगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 45.4 किलोग्राम डोडाचूरा, दो मोबाइल फोन सहित कुल 97 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की। मंदसौर पुलिस ने एमडी ड्रग्स एवं डोडाचूरा तस्करी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 526 ग्राम एमडी ड्रग्स, 5.640 किलोग्राम डोडाचूरा एवं मोटरसाइकिल जब्त की। जब्त संपत्ति की कुल कीमत लगभग 5 लाख 60 हजार रुपये है। थाना सुवासरा पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 30 ग्राम स्मैक, 7 किलोग्राम डोडाचूरा एवं मोबाइल फोन जब्त किया। कुल 1 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की।  थाना दलौदा पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर कंटेनर वाहन में परिवहन किया जा रहा 71 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त किया। डोडाचूरा एवं वाहन सहित कुल 50 लाख 65 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की। रीवा थाना चोरहटा पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार 2.0 के तहत परिवहन किया जा रहा 79.190 किलोग्राम गांजा, एक बोलेरो वाहन एवं तीन मोबाइल फोन जब्त किए। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कुल 20 लाख 17 हजार रुपये  की संपत्ति जब्त की गई। नरसिंहपुर नरसिंहपुर पुलिस ने ऑपरेशन ईगल क्लॉ के तहत कार्रवाई करते हुए 53 किलोग्राम गांजा एवं तस्करी में प्रयुक्त फ्रॉन्क्स कार जब्त की। गांजा एवं वाहन सहित कुल 18 लाख रुपये की संपत्ति जब्त कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।  रतलाम थाना जावरा शहर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 67.58 ग्राम एमडी ड्रग्स, जिसकी कीमत लगभग 6 लाख 70 हजार रुपये तथा घटना में प्रयुक्त रेनाल्ट काइगर कार जब्त की। इंदौर क्राइम ब्रांच इंदौर ने चेकिंग के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 12.58 ग्राम एमडी ड्रग्स, जिसकी अनुमानित कीमत 1 लाख 20 हजार रुपये जब्त की। आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर मादक पदार्थ के स्रोत एवं नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है। इसके अतिरिक्त क्राइम ब्रांच इंदौर की एक अन्य कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 14.9 ग्राम एमडी ड्रग्स एवं ऑटो सहित कुल 2 लाख 90 हजार रुपये का की संपत्ति जब्त की गई। शिवपुरी थाना करैरा पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 11.15 ग्राम स्मैक, जिसकी कीमत लगभग 2 लाख 20 हजार रुपये है, जब्त की। राजगढ़ थाना भोजपुर पुलिस ने ऑपरेशन शुद्धि के तहत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 14.52 ग्राम स्मैक एवं घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित कुल 1 लाख 90 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की गई। जबलपुर क्राइम ब्रांच एवं थाना तिलवारा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गांजा कारोबार में लिप्त दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 3 किलो 978 ग्राम गांजा एवं मोबाइल फोन जब्त किया गया। जब्त गांजे की कीमत लगभग 1 लाख 98 हजार रुपये से अधिक है। अशोकनगर थाना ईसागढ़ पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 45 गांजे के पौधे एवं 30 किलो 560 ग्राम मादक पदार्थ जब्त किया। कार्रवाई में आरोपी को गिरफ्तार किया गया तथा जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत लगभग 2 लाख रुपये है। खरगोन थाना बेड़िया पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत कपास की फसल के बीच अवैध रूप से उगाए गए 176 गांजे के हरे पौधे, कुल वजन 35 किलो 900 ग्राम, जब्त किए। जब्त पौधों की अनुमानित कीमत 2 लाख 88 हजार रुपये है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। भोपाल जीआरपी थाना जीआरपी बीना पुलिस ने दो आरोपियों से 8 किलोग्राम गांजा, जिसकी कीमत लगभग 4 लाख रुपये है, जब्त किया। बैतूल थाना शाहपुर पुलिस ने ग्राम सेमरपुरा में मक्के की फसल के बीच छिपाकर उगाए गए 1,270 गांजे के पौधे, कुल वजन 54.20 किलोग्राम, जब्त किए। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत 2 लाख 16 हजार से अधिक है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। थाना बीजादेही पुलिस ने ग्राम ढोढरामउ में मक्का एवं तुअर की फसल के बीच उगाए गए 175 गांजे के पौधे, कुल वजन 39 किलो 800 ग्राम, जब्त किए। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत 1 लाख 56 हजार रुपये है। भूमि स्वामी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। सीधी थाना अमिलिया पुलिस ने ग्राम बल्हया में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 2 किलो 94 ग्राम गांजा एवं बिना नंबर की होंडा एक्टिवा जब्त की। कुल 1 लाख 03 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की गई। विदिशा थाना सिरोंज पुलिस ने गांजा बिक्री की तैयारी कर रहे आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 2 किलो 113 ग्राम गांजा, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रिक तोल कांटा एवं नकदी सहित कुल 1 लाख 56 हजार 900 रुपये की संपत्ति जब्त की। आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल वारंट प्राप्त होने पर उसे जेल दाखिल कराया गया। भोपाल थाना टीटी नगर पुलिस ने नशा मुक्त भारत अभियान के दौरान कार्रवाई करते … Read more

लखपति दीदी पहल से निधि की बदली जिंदगी, पशुपालन-सब्जी उत्पादन से बनी आत्मनिर्भर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी पहल से निधि को मिली नई उड़ान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में निधि बनी आत्मनिर्भर बिहान से जुड़कर पशुपालन और सब्जी उत्पादन को बनाया आय का जरिया, सालाना आय ढाई लाख रुपये तक पहुंची रायपुर   लगन, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम अमरपुर की श्रीमती निधि तिवारी की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। पशुपालन और सब्जी बाड़ी के जरिए उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत विकसित किए और अब उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई है। श्रीमती निधि तिवारी जून 2023 से दीप महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की अध्यक्ष हैं। स्व सहायता समूह से जुड़ने के महज तीन महीने बाद उन्होंने चक्रिय निधि (आरएफ) से प्राप्त 10 हजार रुपये की सहायता से जर्सी नस्ल की गाय खरीदी। उनकी गाय से प्रतिदिन लगभग 15 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला। इसके छह महीने बाद निधि को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि में अपनी बचत और अन्य संसाधन जोड़कर सब्जी- बाड़ी का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनाया। टमाटर की खेती से बढ़ी आमदनी निधि तिवारी ने मार्च माह में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने टमाटर की बिक्री शुरू की। उन्हें लगभग 40 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बिक्री करने से अच्छी आमदनी हो रही है। पशुपालन के साथ सब्जी उत्पादन ने उनकी आय को विविध बनाया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद की। निधि बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता, समूह का सहयोग और नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि आज वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने सपनों को भी आगे बढ़ा पा रही हैं। महिला स्व सहायता समूहों से आजीविका को मिल रहा आधार निधि तिवारी का अनुभव उस व्यापक ग्रामीण आजीविका ढांचे से जुड़ा है, जिसमें स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन, कौशल, आजीविका और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। केंद्र सरकार का दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन इसी उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से संगठित करता है। ‘लखपति दीदी’ पहल इसी मिशन का परिणाम है, जिसमें महिलाओं की टिकाऊ वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाने पर जोर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूह आधारित आजीविका मॉडल, वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता पर विशेष जोर दिया है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बिहान से महिलाओं को मिल रहा मंच छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका गतिविधियों के लिए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला स्व सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया है। 2026 में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वावलंबन, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से महिलाओं के आगे बढ़ाने की बात कही थी।  परिवार के सपनों को पूरा करने की राह पर निधि निधि तिवारी कहती हैं कि मेहनत के साथ यदि सही अवसर और सहयोग मिले तो गांव में रहकर भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। स्व सहायता समूह से मिली सहायता ने उन्हें पशुपालन और सब्जी- बाड़ी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। आज दूध उत्पादन और टमाटर सहित मौसमी सब्जियों की खेती से होने वाली आय उनके परिवार के सपनों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निधि तिवारी की कहानी बताती है कि स्व सहायता समूह, वित्तीय सहायता, स्थानीय संसाधनों और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। पशुपालन से शुरू हुआ उनका सफर सब्जी बाड़ी तक पहुंचा और अब वे लखपति दीदी की पहचान के साथ अपने परिवार के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह तैयार कर रही हैं।

लोकतंत्र में कोई आखिरी चुनाव नहीं होता’, अखिलेश के बयान पर मनोज पांडेय का पलटवार

लखनऊ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के 2027 के चुनाव को लेकर दिए बयान और सरकार व संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बाद भाजपा नेताओं ने सपा पर तीखा हमला बोला। कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव के 2027 के चुनाव को आखिरी चुनाव बताए जाने पर कहा कि लोकतंत्र में कोई आखिरी या नया चुनाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना चाहिए और जो लोग जनादेश हासिल नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें जनादेश का अपमान करने का अधिकार नहीं है। अखिलेश पर जमकर बरसे मनोज पांडेय मनोज पांडेय ने सपा शासनकाल के दौरान नौकरियों, छात्रों पर कार्रवाई, दंगों और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब देख चुकी है। उन्होंने कहा कि आज किसान, गरीब, नौजवान, पिछड़ा और अगड़ा वर्ग ऐसा प्रदेश चाहता है, जहां शांति और सुरक्षा के साथ खेती, कारोबार और जीवनयापन किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बदले की राजनीति का कोई स्थान नहीं है। अखिलेश को संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहींः कपिल देव अग्रवाल योगी सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अखिलेश के चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर कहा कि सपा का संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव दर चुनाव हार के बाद सपा निर्वाचन आयोग, पुलिस व्यवस्था और संविधान पर सवाल उठाती है। PDA के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अधिकारियों का चयन जाति के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और क्षमता के आधार पर होता है। उन्होंने राम मंदिर और कारसेवकों का जिक्र करते हुए सपा पर निशाना साधा। दानिश आजाद बोले- ‘सपा एसी में बैठकर भ्रम फैलाती है’ मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा नेताओं को एसी में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, भ्रम फैलाने और गलत आंकड़े जनता के सामने रखने की आदत हो गई है। यही उनका एजेंडा बन गया है। उन्होंने सपा से 2012 से 2017 तक के दंगों, अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराध और सरकारी नौकरियों से जुड़े आंकड़े जारी करने को कहा। PDA के आरोपों पर दानिश ने कहा कि सपा नेता एसी कमरों से बाहर निकलेंगे तो उन्हें धरातल की हकीकत पता चलेगी। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कॉलरशिप का जिक्र करते हुए कहा कि पिछड़े, दलित और पसमांदा समाज को इनका लाभ मिल रहा है। SIR पर सपा के सवालों को लेकर दानिश ने कहा कि सिर्फ सवाल खड़े करना और भ्रम फैलाना सपा का 'मूल कैरेक्टर' बन गया है।

एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित बस चालकों के हाथों में होगा स्टेयरिंग

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत सावर्जनिक यात्री बसों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत शुरू होने वाली इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके अंतर्गत सड़कों पर दौड़ने वाली बसों का स्टेयरिंग एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित ड्राइवरों के हाथों में होगा। इसके लिए बस चालकों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों से परिचित कराने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नई तकनीक वाली बसों का सुरक्षित और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पैनिक बटन और जीपीएस से बढ़ेगी सुरक्षा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस की सुविधा रहेगी। जीपीएस के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी। पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करेगा। इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रदेश में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे शहरों के बीच आवागमन के साथ ही शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बढ़ेंगी। सेवा का उद्देश्य प्रदेशवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ सुगम, सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इंटरसिटी बसें दो या दो से अधिक शहरों को जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर चलेंगी।  साल-दर-साल बढ़ेगी बसों की संख्या, वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में सार्वजनिक परिवहन सेवा का विस्तार करते हुए बसों की संख्या 15 हजार तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा चरणबद्ध कार्य योजना भी तैयार की गई है। इसके अनुसार प्रतिवर्ष 2500 से तीन हजार नई बसें जोड़ी जाएंगी। सार्वजनिक परिवहन के दायरे का विस्तार होने के साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में यात्रियों के लिए आवागमन के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। चालकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण, नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर जल्द होंगे तैयार प्रदेश में वाहन चालकों को आधुनिक बसों की सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए इंदौर और छिंदवाड़ा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में 5 रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार हो जाएंगे। ये सेंटर भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से वाहन चालकों को आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों तथा इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा।  

यूपीएसआरटीसी की बसों में दिव्यांगजनों को क्यूआर कोड स्कैन कर निशुल्क टिकट मिलना शुरू

लखनऊ दिव्यांगजनों को बस यात्रा में और अधिक सहूलियत देने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने ईटीआईएम मशीन के अपडेटेड वर्जन में नि:शुल्क टिकट जारी करने की सुविधा शुरू की है। बुधवार से शुरू हुई इस व्यवस्था में परिचालक दिव्यांगजन पहचान पत्र पर दर्ज क्यूआर कोड को ईटीआईएम मशीन से स्कैन कर सीधे शून्य मूल्य का टिकट जारी कर सकेंगे। इससे टिकट जारी करने की प्रक्रिया आसान और अधिक पारदर्शी होगी। इसी के साथ योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए एक और सुविधा को जोड़ दिया। यूपीएसआरटीसी के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत परिचालक को सबसे पहले यात्रा का बोर्डिंग और अलाइटिंग स्थान चुनना होगा। इसके बाद ईटीआईएम मशीन में दिए गए ‘दिव्यांगजन’ विकल्प पर क्लिक कर दिव्यांगजन के पहचानपत्र पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा। क्यूआर कोड स्कैन होते ही मशीन की स्क्रीन पर संबंधित दिव्यांगजन की जानकारी प्रदर्शित होगी। इसमें यूआईडी संख्या, नाम, जन्मतिथि, दिव्यांगता का प्रकार, दिव्यांगता प्रतिशत और आधार संख्या जैसी जानकारी शामिल होगी। दिव्यांगता प्रतिशत के हिसाब से टिकटों की संख्या दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर ईटीआईएम मशीन स्वयं टिकटों की संख्या निर्धारित करेगी। 80 प्रतिशत से कम दिव्यांगता होने पर एक नि:शुल्क टिकट जारी होगा, जबकि 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता होने पर दो नि:शुल्क टिकट जारी किए जाएंगे। इससे दिव्यांग व्यक्ति के साथ सहयात्री को भी नियमानुसार शून्य मूल्य का टिकट जारी होगा। परिचालक की प्रोत्साहन राशि में भी बढ़ोतरी होगी खास बात यह है कि ईटीआईएम से जारी दिव्यांगजन नि:शुल्क टिकट अब परिचालक के लोड फैक्टर में भी शामिल होंगे। इससे परिचालक की प्रोत्साहन राशि में भी बढ़ोतरी होगी। वहीं टिकट का विवरण निगम की रिपोर्टों में भी प्रदर्शित होगा। दिव्यांगजन टिकट के लिए अलग रिपोर्ट की सुविधा भी एएफसी प्रणाली में उपलब्ध कराई गई है। इससे नि:शुल्क यात्रा का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होगा। इसके अतिरिक्त यदि किसी दिव्यांगजन पहचान पत्र पर बना क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो पाता है, तो परिचालक पूर्व की व्यवस्था के अनुसार दिव्यांगजन को यात्रा करा सकेंगे। इस तरह नई डिजिटल व्यवस्था के साथ मौजूदा सुविधा को भी जारी रखा गया है। पहला टिकट आलमबाग डिपो से जारी हुआ आलमबाग बस डिपो से गौरी बाजार के लिए दिव्यांगजन निशुल्क यात्रा के तहत बुधवार को पहला शून्य टिकट जारी किया गया। यह सुविधा नॉन एसी साधारण बस सेवा में लागू की गई है।

सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक से होगा धान के रकबे का वैज्ञानिक आकलन

रायपुर छत्तीसगढ़ में धान की खेती के क्षेत्रफल के सटीक, वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित आकलन की दिशा में राज्य शासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CGCOST) के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत प्रदेश में सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर धान की खेती के क्षेत्रफल की मैपिंग और सत्यापन किया जाएगा।इस अवसर पर प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री सोनमणि बोरा, सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, संचालक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग डॉ. फरिहा आलम तथा संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CGCOST) श्री कवीश्वर उपस्थित थे। इस समझौते का उद्देश्य प्रदेश में धान की खेती के वास्तविक क्षेत्रफल के आकलन को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। तकनीक आधारित इस व्यवस्था से भू-अभिलेखों, डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट आधारित फसल सत्यापन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे धान उपार्जन से संबंधित प्रक्रियाओं में डेटा की शुद्धता बढ़ाने के साथ ही पारदर्शिता को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी। FRA एवं डुबान क्षेत्रों की तैयार होगी GIS आधारित डिजिटल मैपिंग समझौते के अंतर्गत विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम (FRA) तथा डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि भू-भागों की पहचान एवं मैपिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनका विवरण वर्तमान में जियो-रेफरेंस्ड स्वरूप में उपलब्ध नहीं है। ऐसे कृषि क्षेत्रों की GIS आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जिससे संबंधित भू-भाग की डिजिटल भौगोलिक पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। इन क्षेत्रों में सैटेलाइट इमेजरी एवं रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से धान की खेती वाले क्षेत्रफल का आकलन किया जाएगा। इससे ऐसे क्षेत्रों में भी फसल की वास्तविक स्थिति और कृषि रकबे के संबंध में अधिक सटीक भू-स्थानिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, जहां पारंपरिक भू-अभिलेखों के आधार पर डिजिटल सत्यापन में व्यावहारिक कठिनाइयां आती रही हैं। Latitude-Longitude का सैटेलाइट इमेजरी से होगा मिलान प्रदेश के अन्य जियो-रेफरेंस्ड कृषि क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि खंडों के Latitude-Longitude का सैटेलाइट इमेजरी के साथ मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर संबंधित भू-खंड पर धान की फसल की उपस्थिति का तकनीकी सत्यापन किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया से डिजिटल रिकॉर्ड और खेत की वास्तविक स्थिति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायता मिलेगी। सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों और GIS आधारित मैपिंग के उपयोग से धान के रकबे के आकलन में मानवीय निर्भरता कम होगी तथा बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फसल की स्थिति का अधिक व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक विश्लेषण संभव हो सकेगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए मजबूत होगा भू-स्थानिक आधार खाद्य संचालनालय और CGCOST के इस तकनीकी सहयोग से प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए आवश्यक भू-स्थानिक आधार को भी मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से FRA एवं डुबान क्षेत्रों की डिजिटल पहचान और मैपिंग होने से इन क्षेत्रों से संबंधित कृषि डेटा को अधिक व्यवस्थित तरीके से डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। इसके माध्यम से भूमि संबंधी डिजिटल जानकारी, फसल सर्वेक्षण तथा सैटेलाइट आधारित सत्यापन को एक-दूसरे के पूरक के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। इससे भविष्य में फसल क्षेत्रफल के आकलन और कृषि संबंधी डेटा के विश्लेषण के लिए अधिक विश्वसनीय आधार उपलब्ध होगा। तकनीक और डेटा आधारित होगी धान उपार्जन व्यवस्था छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन एक व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था है। ऐसे में धान की खेती के वास्तविक क्षेत्रफल की सटीक जानकारी उपार्जन व्यवस्था को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई तकनीकी व्यवस्था से धान के रकबे के सत्यापन में सैटेलाइट एवं भू-स्थानिक डेटा का उपयोग बढ़ेगा और उपार्जन से संबंधित निर्णयों के लिए अधिक प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो सकेगा। यह पहल राज्य में धान उपार्जन व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित प्रणाली से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भू-अभिलेख, डिजिटल क्रॉप सर्वे, GIS मैपिंग और सैटेलाइट आधारित फसल सत्यापन के बेहतर समन्वय से धान के रकबे के आकलन में सटीकता बढ़ेगी तथा पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।

धान की खेती का होगा सटीक तकनीकी सत्यापन, छत्तीसगढ़ में समझौता

छत्तीसगढ़ में धान की खेती के सटीक एवं तकनीकी सत्यापन के लिए हुआ एमओयू रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश में धान की खेती के क्षेत्रफल का सटीक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज यहाँ मंत्रालय महानदी भवन में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सेटेलाइट-आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा के बेहतर समन्वय से राज्य की धान उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया गया है। गैर-जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों की मैपिंग  विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान कर उनकी जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जो वर्तमान में डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं।  खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए आकलन तैयार पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की फसल के वास्तविक रकबे का सटीक आकलन किया जाएगा। सेटेलाइट इमेजरी से सत्यापन अन्य जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों में भूमि खंडों (खसरों) के अक्षांश-देशांतर का सेटेलाइट इमेजरी से मिलान कर धान की फसल की डिजिटल उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। इस तकनीकी पहल से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों एफआरए एवं डुबान क्षेत्र की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होगी तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए एक मजबूत आधार ढाँचा तैयार होगा।  इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम एवं संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद कवीश्वर उपस्थित रहे।