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मिट्टी और मानव स्वास्थ्य का आधार है प्राकृतिक खेती: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल. उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले की ग्राम पंचायत हरिहरपुर में किसानों को दिये जा रहे प्राकृतिक खेती के नि:शुल्क प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। यहाँ पर प्राकृतिक खेती का मॉडल विकसित कर किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रशिक्षण में उपस्थित किसानों से संवाद किया तथा प्राकृतिक खेती के गुणों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि रीवा प्राकृतिक खेती का हब बनेगा। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार के साथ ही हिनौती गौधाम में भी प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि संबंधित क्षेत्र के किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर प्राकृतिक खेती कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान को अपनी भूमि के कुछ भाग में प्राकृतिक खेती अवश्य करनी चाहिए जो भूमि के स्वास्थ्य के साथ ही स्वयं व परिवार के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि हमें अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आदत में डालना होगा। रीवा जिले में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्धत है, इसलिए उन्हें सही दिशा में खेती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती उत्पादन के संबंध में गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किसानों में से ही मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे जो जिले के अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती के संबंध में प्रशिक्षण देंगे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अपने खेत में 4 एकड़ क्षेत्र में गेंहू व एक एकड़ में सब्जी की प्राकृतिक खेती आरंभ की है। उन्होंने खेत में जगपावनी का छिड़काव किया तथा प्रशिक्षण स्थल में गौकृपा अमृत निर्माण की शुरूआत की। प्राकृतिक खेती का ज्ञान जिंदगी व पीढ़ी को बदलने वाला प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे किसान  शिववरण सिंह एवं  विनोद ने बताया कि यह प्रशिक्षण जिंदगी व पीढ़ी को बदलने का प्रशिक्षण है। हम लोग इससे प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि हम प्रशिक्षण प्राप्त कर जिले के किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षण में अजगरहा, हरिहरपुर, अगडाल आदि आसपास के गांवों के किसान उपस्थित रहे। हरिरहरपुर में 25 जनवरी तक प्राकृतिक खेती का तीन दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।   रविशंकर की संस्था लिविंग ऑफ आर्ट के प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती के लिए भूमि तैयार करने, बीजों के उपचार, केमिकल रहित खाद तथा कीटनाशक बनाने एवं मल्टीलेयर फसल की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, पंचगव्य जगपावनी, अग्निहोत्र निर्माण, गौकृपा अमृत, अमृत जल/भस्म जल, भस्म खाद, धूम्र चिकित्सा, नीमास्त्र, ब्रहृमास्त्र, आग्नेयास्त्र, ताम्रदही तथा आवर खाद निर्माण की भी जानकारी दी जा रही है। इन सबका निर्माण नाममात्र के खर्च पर गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन जैसे घर में उपलब्ध पदार्थों से किया जाता है।

CM के विदेश में होने से दुमका में रिपब्लिक डे पर उपायुक्त करेंगे ध्वजारोहण

दुमका. झारखंड गठन के बाद से यह परंपरा रही है कि गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री उपराजधानी दुमका में राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, लेकिन इस साल यह परंपरा टूटने जा रही है. इसकी वजह है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विदेश दौरे पर होना. इस वजह से वे 26 जनवरी को दुमका नहीं पहुंच पाएंगे. इधर, संताल परगना प्रमंडल में आयुक्त का पद भी पिछले करीब तीन महीने से खाली है. ऐसे में इस वर्ष दुमका के पुलिस लाइन मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में उपायुक्त अभिजीत सिन्हा राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे. फुल ड्रेस रिहर्सल के साथ तैयारियां पूरी गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार को पुलिस लाइन मैदान में भव्य परेड का फुल ड्रेस रिहर्सल कराया गया. रिहर्सल के दौरान डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर अनिकेत सचान और एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने परेड का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया. परेड के 15 दस्ते होंगे परेड में शामिल इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में संताल परगना प्रमंडल के सभी छह जिलों से आए कुल 15 दस्ते हिस्सा लेंगे, जो परेड में शामिल भी होंगे. इनमें झारखंड सशस्त्र पुलिस (JAP), आईआरबी, जिला पुलिस बल, स्काउट-गाइड और एनसीसी की टुकड़ियां शामिल हैं. इसके अलावा विभिन्न विभागों की ओर से विकास योजनाओं और सरकारी उपलब्धियों को दिखाने वाली कुल 14 आकर्षक झांकियां भी निकाली जाएंगी, जो समारोह का खास आकर्षण का केंद्र होगा. सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह टाइट डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर अनिकेत सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री विदेश दौरे पर हैं और राज्य में निवेश से जुड़े कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, इसलिए इस बार उपायुक्त द्वारा झंडोत्तोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि समारोह से जुड़ी सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. वहीं, एसपी पीताम्बर सिंह खेरवार ने बताया कि सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है. पुलिस लाइन मैदान में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. कार्यक्रम स्थल पर तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जिनमें वीआईपी के लिए अलग गेट निर्धारित गया है. इसके साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अलग-अलग रूट भी फाइनल कर लिए गये हैं.

सिर्फ समारोह नहीं, बदलाव की शुरुआत है बालिका दिवस: मंत्री भूरिया

भोपाल. राष्ट्रीय बालिका दिवस पर झाबुआ में आयोजित कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने कहा कि “बेटियों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज और राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में लाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह दिवस केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सोच बदलने और संकल्प लेने का अवसर है।” मंत्री  भूरिया ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रक्रिया सतत होती है और चुनौतियाँ व्यक्ति को अधिक मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज का वातावरण बालिकाओं के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए बेटियों के लिए सुरक्षित, सकारात्मक और सहयोगी माहौल का निर्माण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि रूढ़िवादी मानसिकता को बदलना समय की आवश्यकता है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसी योजनाओं से सरकार बेटियों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर उपलब्ध करा रही है। मंत्री  भूरिया ने जनजातीय समाज में बेटियों को प्राप्त सम्मान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी सकारात्मक सोच को पूरे समाज में अपनाने की आवश्यकता है। मंत्री  भूरिया ने बताया कि लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना सहित अनेक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से बालिकाओं और महिलाओं को निरंतर सशक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज बेटियाँ शिक्षा, खेल, तकनीक और रोजगार के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं। मंत्री  भूरिया ने बालिकाओं से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने, तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने, साइबर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से यह संकल्प लेने की अपील की कि हर बेटी को सम्मान, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ।

धार्मिक स्थल के विकास को मिली रफ्तार, डिप्टी सीएम शुक्ल ने लिया सौंदर्यीकरण कार्य का जायजा

भोपाल. उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के कोठी कम्पाउण्ड रीवा मनकामेश्वर मंदिर में सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि गुणवत्ता के साथ कार्य को समय सीमा में पूर्ण कराएं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्माण कार्य के संबंध में निर्माण एजेंसी को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने भगवान आशुतोष के दर्शन किए।

रायपुर: स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं, साधारण जीवन के असाधारण दस्तावेज

रायपुर : स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन का दस्तावेज रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण 'स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां' विषय पर हुई परिचर्चा छत्तीसगढ़ ने बीते 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार नई दिशा दी, इनमें  शुक्ल भी शामिल : डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी रायपुर   नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन  देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने  उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने  शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि  शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है। नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सु आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि  शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं। जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार  सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने  शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग  शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक  अनुभव शर्मा ने कहा कि  विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि  शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं। अभिनेत्री सु टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार  विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को  शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं। परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

राज्य मंत्री पटेल ने किया सिविल अस्पताल मैहर का निरीक्षण, व्यवस्थाओं की परखी हकीकत

मैहर . लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने मैहर सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं, दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं तथा मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का जायज़ा लिया। निरीक्षण के दौरान श्री पटेल ने चिकित्सकीय स्टॉफ, उपचाररत मरीजों एवं उनके परिजनों से सीधे संवाद कर अस्पताल की कार्य प्रणाली, समस्याओं तथा आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मरीजों एवं उनके परिजनों द्वारा दिए गए सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं जनहितकारी बनाया जा सके। राज्य मंत्री श्री पटेल ने कहा कि आमजन को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए अस्पतालों में संसाधनों, स्टॉफ और व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज के साथ संवेदनाशीलता पूर्वक व्यवहार किया जाए। निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारों के लिए त्वरित कार्यवाही के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर मैहर विधायक श्री श्रीकांत चतुर्वेदी एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

हेडमास्टर को बंधक बनाने वाले पांच युवक गिरफ्तार

घाटशिला/बहरागोड़ा. बहरागोड़ा थाना अंतर्गत सियालबिंधा गांव में स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय से एक बड़ी खबर सामने आई है। जिसमें प्रधानाध्यापक के साथ मारपीट, जाति सूचक शब्द के प्रयोग और पेड़ में बांधने के आरोप में बहरागोड़ा पुलिस ने पांच युवकों को प्रधानाचार्य की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायालयभेज दिया है। उक्त मामले में बहरागोड़ा थाना में कांड संख्या 5/26 दिनांक 23/01/26 को धारा 115/2,352/351/2/3/5बी एनएस सेक्शन3/01/आर/एसटी एससी एक्ट 1989 के तहत माणिक बेरा, संजय बेरा, नंदलाल बेरा विनोद बैरा और नारायण बेरा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस द्वारा पांचों आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि उक्त विद्यालय में सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया था। आप परिहार का कारण से पूजा प्रारंभ करने में थोड़ी विलंब हुई थी। इससे नाराज पांच युवक प्रधानाचार्य से उलझ गए। पहले तो उन्हें जाति सूचक शब्द के साथ गाली गलौज किया, उनके साथ धक्का मुक्क़ी मारपीट किया और आकर्षित होकर परिसर के समीप नीम के पेड़ में बांध दिया। घटना की सूचना ग्रामीणों द्वारा बहरागोड़ा पुलिस को दी गयी। जिसमें बहरागोड़ा थाना प्राभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने अपने दल बल के साथ जाकर उन्हें मुक्त कराया। प्रधानाचार्य के लिखित शिकायत के आधार पर पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिक की दर्ज की गई। जिससे उक्त घटना को लेकर विद्यार्थी और अभिभावक भी काफी दुखी है।

किताबों से बाहर सीख: छात्रों को सिखाई गई ठप्पा प्रिंटिंग और पारंपरिक धुलाई विधि

  भोपाल . आईआईटी रुड़की में विरासत 2026 सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंग्स्ट यूथ (स्पिक मैके) द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की में आयोजित 'विरासत-2026' कार्य शाला में मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध हस्तशिल्प कला 'बाग प्रिंट' की प्रभावी उपस्थिति रही। 22 से 25 जनवरी तक चलने वाले इस सांस्कृतिक समागम में मध्यप्रदेश के बाग के प्रतिष्ठित मास्टर क्रॉफ्ट्समैन और नेशनल व इंटरनेशनल अवार्डी मोहम्मद बिलाल खत्री ने युवाओं को इस पारम्परिक कला की बारीकियों से रूबरू कराया। ठप्पों से उकेरी कला और सीखी 'भट्टी' की प्रक्रिया कार्य शाला के शुरुआती दिनों (22-23 जनवरी) में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लकड़ी के पारंपरिक ठप्पों (ब्लॉक्स) और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर सुंदर डिजाइन तैयार किए।  बिलाल खत्री ने विद्यार्थियों को सिखाया कि कैसे प्राकृतिक संपदा का उपयोग कर कपड़े पर अमिट छाप छोड़ी जाती है। शनिवार 24 जनवरी को छात्र बाग प्रिंट की सबसे जटिल प्रक्रियाओं— 'विचलिये' और 'भट्टी' के व्यावहारिक प्रयोग से रू-ब-रू हुए।   विचलिये: कपड़े को बहते पानी में धोने की विशेष प्रक्रिया।     भट्टी: कपड़े को धावड़ी (पहाड़ी और मैदानी इलाकों में पाया जाने वाला झाड़ीनुमा लाल फूलों वाला वृक्ष) के फूल और अलीज़रीन (ऑल और मैहर की जड़ों) के साथ उबालकर रंगों को पक्का करने की पारंपरिक विधि। प्राचीन कला का संरक्षण है लक्ष्य मोहम्मद बिलाल खत्री ने बताया, "स्पिक मैके का मूल उद्देश्य देश की लुप्त होती प्राचीन कलाओं का संरक्षण और विस्तार करना है। आईआईटी रुड़की के छात्रों ने जिस दिलचस्पी के साथ इस पुश्तैनी हुनर को सीखा, वह सराहनीय है।" कार्य शाला के अंतिम दिन (25 जनवरी) को विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के कपड़ों और उन पर बाग प्रिंट की विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। रूड़की में न केवल हस्तशिल्प, बल्कि योग, संगीत और अन्य सांस्कृतिक विधाओं के माध्यम से भारतीय विरासत का प्रदर्शन किया गया। मोहम्मद बिलाल खत्री के मार्गदर्शन में तैयार की गई कलाकृतियाँ कार्य शाला में आकर्षण का केंद्र रही।

मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, ट्रांसको ने चालू किया 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर

भोपाल . ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि भोपाल मेट्रो के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा 220 केवी सबस्टेशन गोविंदपुरा, भोपाल में 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया है। इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से भोपाल मेट्रो के सुभाषनगर सबस्टेशन के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। सीमित जगह में स्थापित किया ट्रांसफार्मर ऊर्जा मंत्री ने बताया कि मेट्रो परियोजना के लिए यह स्थापना एमपी ट्रांसको के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। शहर के मध्य स्थित गोविंदपुरा सब स्टेशन में सीमित उपलब्ध स्थान के कारण बड़े क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर की स्थापना एक जटिल कार्य था। एमपी ट्रांसको मुख्यालय, जबलपुर स्थित प्लानिंग एवं डिजाइन विभाग के इंजीनियरों ने अपने कौशल, नवाचार और तकनीकी दक्षता से सब स्टेशन परिसर में आवश्यक स्थान चिन्हित कर यह कार्य संभव बनाया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने लिए ऊर्जा मंत्री  तोमर ने ट्रांसमिशन कंपनी के कार्मिकों को बधाई दी है। सब स्टेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि एमपी ट्रांसको भोपाल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  राजेश शांडिल्य ने जानकारी दी कि भोपाल मेट्रो के डिपॉजिट वर्क के तहत इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से 220 केवी सबस्टेशन, गोविंदपुरा (भोपाल) की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में वृद्धि हुई है। यह इस सब स्टेशन का पाचंवा 220 केवी वोल्टेज लेवल का ट्रांसफार्मर है। अब सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 820 एमवीए हो गई है, जिससे भोपाल शहर और मेट्रो परियोजना की भविष्य की विद्युत आवश्यकताओं को सुदृढ़ता मिले

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिले सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की।  इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।