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महू में वंदे भारत मेंटेनेंस के लिए बनेगी 94.50 करोड़ से दो नई पिट लाइन और आधुनिक शेड

महू. भविष्य में इंदौर से संचालित होने वाली वंदे भारत ट्रेन के रखरखाव के लिए महू रेलवे स्टेशन को बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रेलवे बोर्ड ने यहां दो नई पिट लाइन और अत्याधुनिक तकनीक से लैस शेड के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 94 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए रक्षा संपदा विभाग से 3.48 एकड़ जमीन लेने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। भूमि हस्तांतरण के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। वर्तमान में पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल अंतर्गत महू स्टेशन पर केवल एक पिट लाइन मौजूद है। नई स्वीकृति के बाद दो अतिरिक्त पिट लाइन बनने से कुल तीन पिट लाइन हो जाएंगी। इससे एक साथ कई ट्रेनों कीसर्विसिंग संभव हो सकेगी। निर्माणाधीन आधुनिक शेड में वंदे भारत ट्रेन की साफ-सफाई, नियमित मेंटेनेंस और तकनीकी जांच की जाएगी। इससे ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारु होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद महू स्टेशन वंदे भारत ट्रेन के मेंटेनेंस हब के रूप में विकसित होगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और महू को रेलवे मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।

ईरानी डेरे के सरदार कुख्यात राजू को रिमांड पर लेने नहीं आई पांच राज्यों की पुलिस

भोपाल. अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे के सरदार जिस कुख्यात बदमाश राजू ईरानी को पकड़ने के लिए भोपाल में पांच राज्यों की पुलिस लंबे समय तक डेरा डाले रहती थी, उसके गिरफ्त में आने के बाद कोई भी पुलिस एजेंसी उसे लेने तक नहीं पहुंची। आखिरकार सात दिन की रिमांड पूरी होने के बाद भोपाल पुलिस ने राजू को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। निशातपुरा पुलिस के अनुसार राजू पर कोलकाता, पश्चिम बंगाल, गुरुग्राम, महाराष्ट्र, जयपुर और दिल्ली में कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। उस पर लूट, संगठित अपराध, धोखाधड़ी और फरारी जैसे मामलों के आरोप हैं। सूरत क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था अलग-अलग राज्यों की पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी और इनपुट मिलने पर भोपाल में कई बार दबिश भी दी गई थी। पिछले सप्ताह सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद भोपाल की निशातपुरा पुलिस उसे भोपाल लेकर आई। इसके बाद सात दिनों तक पुलिस ने उससे पूछताछ की, लेकिन अब तक किसी अन्य राज्य की पुलिस ने उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा इधर, भोपाल पुलिस ने उससे सात दिन की पूछताछ की और फिर शनिवार को न्यायालय में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। राजू लगातार बीमारी का हवाला देकर बचता रहा। पुलिस ने उससे डोजियर भरवा लिया है, जिसमें उसके करीबी रिश्तेदारों और गुर्गों की जानकारी दर्ज की गई है। एडिशनल डीसीपी जोन-3 मलकीत सिंह ने बताया कि आरोपित से जरूरी पूछताछ हुई है। पहले राजू ने कर्नाटक के पते पर बने पासपोर्ट से विदेश जाने की बात स्वीकारी थी। हालांकि इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है। 7 से अधिक राज्यों का वांटेड राजू बीते चार सालों में सात से अधिक राज्यों में वांटेड था। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। राजू सूरत में अपने साढ़ू के घर में छुपा था।

एक एजेंसी के भरोसे जबलपुर संभाग के हजारों वाहनों की फिटनेस का जिम्मा

जबलपुर. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के हालिया आदेश ने संभाग भर के वाहन संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। नए निर्देशों के तहत अब व्यावसायिक व सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर नहीं, बल्कि संभागीय स्तर पर की जाएगी। इसके तहत जबलपुर संभाग के जबलपुर सहित नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों के वाहनों को फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पहुंचना होगा। परेशानी की बात ये है कि शहर में फिलहाल एक ही एटीएस कार्यशील है ऐसे में संभागीय स्तर पर हजारों वाहनों की फिटनेस जांच करने में व्यावहारिक परेशानियां आना तय है। वाहन चालकों का कहना है कि 200 से 210 किलोमीटर दूर जबलपुर तक वाहन लाना बेहद खर्चीला होगा। फिटनेस प्रमाण पत्र की निर्धारित फीस भले ही करीब एक हजार रुपये हो, लेकिन आवागमन, ईंधन, चालक-खलासी, ठहराव और अन्य खर्चों को जोड़ दिया जाए तो कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। अवैध वसूली बढ़ने का डर परिवहन से जुड़े संगठनों का आरोप है कि सीमित केंद्र और अधिक दबाव की स्थिति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। पहले भी जबलपुर एटीएस में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में नए आदेश से अवैध वसूली और बिचौलियों की भूमिका बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जिला स्तर पर प्रतिमाह औसतन 200 वाहनों की फिटनेस जांच होती थी, जिसमें प्रतिदिन 10 से 12 वाहनों को प्रमाण पत्र जारी किए जाते थे। नए आदेश के बाद जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी से मिलाकर हर माह करीब 1600 से अधिक वाहन जबलपुर पहुंच सकते हैं। जबकि निलंबित एटीएस कब चालू होगा, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वर्तमान में जो क्रियाशील एटीएस में हर दिन 35 से ज्यादा वाहन फिटनेस के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकारियों का पक्ष इस संबंध में जबलपुर आरटीओ संतोष पाल का कहना है कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से नया आदेश जारी हुआ है। संभागीय स्तर पर पर निर्देश जारी हुए है। वाहन मालिक अब फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए जबलपुर आएंगे। ये समस्या भी ऑटो से लेकर कार, ट्रक सभी निजी और कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जारी होना है। ऐसे में छिंदवाड़ा या बालाघाट जिले से ऑटो चालक को जबलपुर आना बेहद खर्चीला साबित होगा। एक पूरा दिन वह जबलपुर आने के लिए हजारों रुपये का डीजल फूंकेगा। इसके बाद एक दिन के लिए शहर से बाहर जाने के लिए परमिट बनवाएंगा। इसके बाद यदि एक दिन में जांच पूरी नहीं हुई तो यहां रूकना पड़ेगा। ऐसे में फिटनेस प्रमाणीकरण करना काफी महंगा साबित होगा। जिला परिवहन विभाग को फिटनेस से हटाया गया मोर्थ द्वारा प्रदेश के 42 जिलों के लिए जारी पत्र में जिला परिवहन कार्यालयों को व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। नए आदेश के मुताबिक अब फिटनेस जांच केवल नजदीकी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में ही होगी। इसके लिए वाहन मालिकों को ऑनलाइन बुकिंग करानी अनिवार्य होगी। जिला परिवहन विभाग अब फिटनेस से संबंधित कोई भी कार्य नहीं करेगा। शहर में फिलहाल फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए केवल कटंगी रोड़ पर स्थित एक निजी एजेंसियां कार्यशील हैं। जानकारों का कहना है कि जबलपुर संभाग के सभी जिलों के वाहन यदि एक ही केंद्र पर जांच के लिए आएंगे तो क्षमता से कहीं अधिक दबाव बनेगा। इससे जांच में देरी, लंबी प्रतीक्षा सूची और अव्यवस्था की आशंका है। पहले से बंद एटीएस फिर भी निर्भरता सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जबलपुर एटीएस पर पूरे संभाग के वाहनों की निर्भरता तय की गई है, वह स्वयं अनियमितताओं के चलते सस्पेंड है। कुछ समय पहले परिवहन विभाग ने गड़बड़ियों के आरोपों के बाद जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।

महाकाल मंदिर हुआ डिजिटल, दर्शन, भस्म आरती और दान सभी सेवाएं अब एक वेबसाइट पर उपलब्ध

उज्जैन  देशभर में धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर भी इससे अछूता नहीं है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भीड़, लंबी कतारें, जानकारी की कमी और बुकिंग को लेकर भ्रम ये सभी समस्याएं लंबे समय से श्रद्धालुओं के सामने रही हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। मंदिर की नई आधिकारिक वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in लॉन्च कर दी गई है। इस एक प्लेटफॉर्म के जरिए अब दर्शन, पूजन, भस्म आरती, अतिथि निवास बुकिंग और ऑनलाइन दान जैसी सभी सेवाएं उपलब्ध होंगी। यह पहल न सिर्फ श्रद्धालुओं के अनुभव को आसान बनाएगी, बल्कि मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ाएगी। नई सरकारी वेबसाइट से क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी महाकाल मंदिर की इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि श्रद्धालुओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म या दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एक ही वेबसाइट पर सभी जरूरी सेवाएं एक जगह मिलेंगी। इस वेबसाइट पर होम पेज पर जाते ही श्रद्धालुओं को साफ तौर पर ये विकल्प दिखाई देंगे शीघ्र दर्शन, भस्म आरती बुकिंग, विशेष पूजन, अतिथि निवास बुकिंग, ऑनलाइन दान, सरकारी डोमेन gov.in पर बनी यह वेबसाइट साइबर सुरक्षा के लिहाज से भी मजबूत मानी जा रही है। इससे फर्जी वेबसाइट और ठगी की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी। शीघ्र दर्शन बुकिंग का आसान प्रोसेस महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन की मांग सबसे ज्यादा रहती है। नई वेबसाइट पर इसका प्रोसेस बेहद सरल रखा गया है, ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। शीघ्र दर्शन बुक करने के लिए श्रद्धालु को सबसे पहले वेबसाइट के होम पेज पर जाना होगा। वहां शीघ्र दर्शन के विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर दर्ज कर सबमिट करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी को वेरीफाई करने के बाद श्रद्धालु अपनी जरूरी जानकारी भरकर उपलब्ध स्लॉट में से अपना समय चुन सकते हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही बुकिंग कन्फर्म हो जाती है। श्रद्धालु को न तो लाइन में लगने की चिंता रहेगी और न ही किसी तरह की अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा। भस्म आरती और पूजन बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसे देखने और इसमें शामिल होने की इच्छा हर श्रद्धालु की होती है, लेकिन सीमित संख्या के कारण यह हमेशा आसान नहीं होता। नई वेबसाइट के जरिए भस्म आरती बुकिंग को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बना दिया गया है। श्रद्धालु अब पहले से उपलब्ध तारीख और स्लॉट देखकर बुकिंग कर सकते हैं। इसी तरह विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी भी वेबसाइट पर साफ शब्दों में दी गई है। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि मंदिर प्रशासन को भी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलेगी। भक्त निवास परियोजना: 672 करोड़ की बड़ी योजना महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की सुविधा हमेशा एक बड़ा सवाल रही है। इसे ध्यान में रखते हुए श्री महाकालेश्वर भक्त निवास परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, यह परियोजना लगभग 672 करोड़ रुपये की लागत से 18.65 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही है। इस विशाल परियोजना में करीब 3,000 कमरे, भोजनालय, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। नई वेबसाइट के जरिए श्रद्धालु न सिर्फ अतिथि निवास की बुकिंग कर सकेंगे, बल्कि इस परियोजना के लिए दान भी दे सकेंगे। जो लोग कमरों के निर्माण या अन्य सुविधाओं में सहयोग करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह पोर्टल एक आसान माध्यम बनेगा। दान और CSR गतिविधियों के लिए पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म महाकाल मंदिर में दान देने की परंपरा सदियों पुरानी है। अब इसे डिजिटल रूप देकर और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालु ऑनलाइन दान कर सकेंगे और यह जान सकेंगे कि उनका योगदान किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा। CSR गतिविधियों के लिए भी यह पोर्टल एक नया और भरोसेमंद डिजिटल चैनल साबित होगा। इससे विकास कार्यों को गति मिलेगी और दानदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि डिजिटल दान व्यवस्था से हर रुपये का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की नगर पंचायत भटगांव के विकास के लिए एक करोड़ रुपए की घोषणा

रायपुर कर्मा महोत्सव को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। ऐसे आयोजन लोक पर्वों को सहेजने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कर्मा पर्व प्रकृति से जुड़ाव, आपसी भाईचारा और सामूहिक आनंद का उत्सव है। उक्त आशय के विचार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सूरजपुर जिले के चुनगुड़ी में आयोजित कर्मा महोत्सव में व्यक्त किए।  मुख्यमंत्री ने इस मौके पर 172.51 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने चुनगुड़ी के स्कूल मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित करने तथा नगर पंचायत भटगांव के विकास हेतु एक करोड़ रुपये की घोषणा की। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और सांसद चिंतामणि महाराज ने भी सम्बोधित किया। परंपरा, संस्कृति और उल्लास से परिपूर्ण कर्मा महोत्सव में मांदर की थाप और घुंघरुओं की झंकार के बीच पूरा क्षेत्र कर्मा नृत्य की लय में थिरक उठा। सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, कोरिया एवं मनेंद्रगढ़ जिलों से आए 33 कर्मा दलों के लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में कर्मा नृत्य प्रस्तुत कर सबको लोक संस्कृति के रंगों से भर दिया।  मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगायी गई प्रदर्शनी के स्टॉलों का निरीक्षण कर नाव-जाल एवं आइस बॉक्स, आयुष्मान कार्ड, छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण वितरण और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित छह रेडी-टू-ईट ईकाइयों का शुभारंभ किया और पोषण वितरण कार्य से जुड़ी महिलाओं को शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। इसके अलावा महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मुद्रा लोन, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत बीमा क्लेम तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खुशियों की चाबी प्रदान की। कार्यक्रम में विधायक भूलन सिंह मरावी, वन विकास निगम के अध्यक्ष राम सेवक पैकरा, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा, उपाध्यक्ष रेखा राजलाल रजवाड़े सहित अनेक जनप्रतिनिधि सहित समस्त जिलास्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

यूपी में न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कार्य पूरा होने में देर नहीं लगतीः मुख्यमंत्री

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने चंदौली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास व भूमि पूजन छह जिलों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) के एकीकृत न्यायालय परिसर का किया गया शिलान्यास मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्तः सरकार के पास पैसे की कमी नहीं, पूरा सहयोग भी मिलेगा अब टूटे चैंबर नहीं, अधिवक्ताओं के लिए हाईराइज बिल्डिंग में होगी चैंबर की व्यवस्थाः मुख्यमंत्री चंदौली देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शनिवार को चंदौली में छह जिलों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) के एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। सीएम योगी ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिह्न प्रदान किया और सभी न्यायमूर्तियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है कि न्यायपालिका भी उतनी ही सशक्त हो। आम आदमी को जितनी सहजता-सरलता से न्याय प्राप्त हो, उतना ही अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर होना भी आवश्यक है। यूपी सरकार के पास न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कोई भी कार्य आते हैं तो उसे पूरा होने में देर नहीं लगती। हमारा मानना है कि सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करना है तो न्यायिक सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए और यूपी इसे लेकर बेहतरीन दिशा में आगे बढ़ चुका है।  न्यायपालिका के इतिहास के नए पृष्ठ का हो रहा सृजन मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी की दृष्टि से आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज यहां न्यायपालिका के इतिहास के नए पृष्ठ का सृजन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पुरानी बातों का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने अपनी एक यात्रा के दौरान उल्लेख किया था कि न्याय सहजता के साथ प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध हो सके, इसके लिए आवश्यक है कि कुछ ऐसे मॉडल बनने चाहिए, जो इंटीग्रेटेड (एक छत के नीचे) हों। मुख्य न्यायाधीश की प्रेरणा से यूपी के छह जनपदों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) में यह सुविधा उपलब्ध हो रही है। अगले कुछ महीने में चार अन्य जनपदों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। भारत के न्यायिक इतिहास में यह पृष्ठ नए स्वर्ण अक्षर के रूप में जुड़ेगा। यूपी में इसकी शुरुआत मुख्य न्यायमूर्ति के करकमलों से हो रही है।  2014 के बाद से इंफ्रास्ट्रक्चर को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में बढ़ाए गए कदम  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में आने के बाद 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' व 'ईज ऑफ लिविंग' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तमाम सुधार किए। इंफ्रास्ट्रक्चर को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। पीएम से हमें भी प्रेरणा मिली। प्रयागराज के एक कार्यक्रम में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि कोर्ट कॉम्प्लेक्स भी इंटीग्रेटेड होना चाहिए, इस पर हम लोगों ने यूपी के अंदर कार्य प्रारंभ किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में बिंदल जी ने सकारात्मक सहयोग किया और यूपी सरकार ने एक साथ 10 जनपदों में (जहां स्वयं के जनपद न्यायालय नहीं थे) इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए स्वीकृति दी।  अब टूटे चैंबर नहीं, अधिवक्ताओं के लिए हाईराइज बिल्डिंग में होगी चैंबर की व्यवस्था सीएम ने कहा कि पहले चरण में चंदौली समेत छह जनपदों के लिए धनराशि अवमुक्त हो गई है। डिजाइन अप्रूव होने के साथ ही सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। एलएंडटी जैसी विश्व विख्यात संस्थाओं के द्वारा अब निर्माण कार्य होगा। यहां एक ही छत के नीचे कोर्ट कॉम्प्लेक्स, अधिवक्ताओं के लिए अच्छे चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास, कैंटीन, पार्किंग, खेल आदि की सुविधाएं रहेंगी। सीएम ने कहा कि न्याय के लिए जूझने वाले अधिवक्ता के चैंबर में जब वादकारी जाता था तो उसे सूर्य के दर्शन होते थे, लेकिन अब टूटे चैंबर्स नहीं, बल्कि हाईराइज बिल्डिंग में चैंबर की व्यवस्था होगी।   सरकार के पास पैसे की कमी नहीं, पूरा सहयोग भी मिलेगा सीएम योगी ने कहा कि हम चाहते हैं कि हर जनपद में ऐसे कोर्ट कॉम्प्लेक्स हों। अभी छह जनपदों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कर रहे हैं। सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है, आपको सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। चंदौली के जनप्रतिनिधि व अधिवक्ता लगातार आंदोलन करते थे, मैंने बार एसोसिएशन को लखनऊ बुलाकर कहा कि यह स्वीकृत हो गया है। आप न्यायिक कार्य में योगदान दीजिए। अब उच्च न्यायालय के साथ मिलकर यह कार्य शीघ्र आगे बढ़ेगा।  शिलान्यास व भूमि पूजन कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

कानपुर में खेती के साथ मोती उत्पादन, एक सीप से ₹200 तक का लाभ, 50% सब्सिडी का फायदा

कानपुर  कानपुर के किसानों के लिए नीली क्रांति अब एक नया मोड़ ले रही है। मत्स्य विभाग ने पारंपरिक मछली पालन को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए 'मोती की खेती' (Pearl Farming) को बढ़ावा देने की अनूठी पहल शुरू की है। अब किसान एक ही तालाब में मछलियों के साथ-साथ सीप पालकर लाखों की अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। एक तालाब, दोहरा मुनाफा कानपुर के शंभुआ गांव के किसान देवेंद्र वर्मा ने इस दिशा में मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने तालाब में मछली और सीप पालन का एकीकृत मॉडल अपनाया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अलग से किसी बड़े संसाधन की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत कम और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है। लागत और कमाई मत्स्य विभाग के अनुसार, मोती उत्पादन मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में होता है: हाफ ब्राउन, डिजाइनर और राउंड मोती। कानपुर में फिलहाल डिजाइनर मोतियों पर फोकस किया जा रहा है जिनकी बाजार में भारी मांग है।     उत्पादन क्षमता: एक सीप से औसतन 3 मोती तैयार होते हैं।     अनुमानित आय: एक सीप से किसान लगभग 200 रुपये तक कमा सकते हैं।     समय सीमा: सीप के भीतर मोती तैयार होने की प्रक्रिया में लगभग 18 महीने का समय लगता है। 50% सरकारी मदद किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार इस प्रोजेक्ट पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है।     उदाहरण: यदि कोई किसान 10 लाख रुपये का प्रोजेक्ट शुरू करता है, जिसमें लगभग 15 हजार सीप डाले जाएंगे, तो उसे सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।     नोडल एजेंसी: उत्तर प्रदेश में 'मणी एग्रो' को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के सीईओ डॉ. अय्यूब के मुताबिक, कानपुर से अब तक 9 किसानों ने इस अनुदान के लिए आवेदन किया है। डिजाइनर मोतियों का बढ़ता बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि राउंड मोती की तुलना में डिजाइनर मोतियों को तैयार करना थोड़ा आसान है और आभूषण उद्योग में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। एक सीप की खरीद लागत लगभग 62.14 रुपये आती है, जबकि तैयार होने के बाद इसकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है। बुंदेलखंड में मिली सफलता के बाद अब कानपुर मंडल के किसानों के लिए यह 'श्वेत क्रांति' आमदनी दोगुनी करने का सबसे ठोस जरिया साबित होने वाली है।     विभाग की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। आने वाले समय में और अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है, ताकि मोती उत्पादन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके- सुनील कुमार, मत्स्य निरीक्षक।  

मंदिरों को तोड़ने का सफेद झूठ फैला रही है कांग्रेस: मुख्यमंत्री योगी

काशी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेसवार्ता निशाने पर कांग्रेस, सीएम बोले: मंदिरों को तोड़ने के एआई जेनरेटेड वीडियो दिखाकर फैलाया जा रहा है झूठ कहा, कांग्रेस ने कभी नहीं किया विरासत का सम्मान, विकास में भी बन रही है बाधा पौराणिक महत्व, धार्मिक प्रक्रिया को छेड़े बिना किया जाएगा मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास काशी "जब काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण हो रहा था, तब भी कुछ लोगों ने साजिशें रची थीं। यहां तक कि जिन वर्कशॉप में मूर्तियां बनती हैं, वहां से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष लाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए और सफेद झूठ फैलाया गया कि मंदिर तोड़े जा रहे हैं।" कांग्रेस पर यह सीधा हमला बोला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। मुख्यमंत्री शनिवार को वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद पत्रकारों को सम्बोधित कर रहे थे।  दरअसल पिछले एक-दो दिनों से सोशल मीडिया पर काशी के मंदिर व मणिकर्णिका घाट को तोड़ने के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन्हीं आरोपों का जवाब देने के लिए सीएम खुद मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने इन वीडियो की सत्यता को सिरे से खारिज करते हुए कहा, यहां पर पिछले 11 वर्षों में हुए समग्र विकास की परियोजना को बाधित करने के लिए जो साजिशें रची जा रही हैं और जिस प्रकार का दुष्प्रचार किया जा रहा है, इसके बारे में सही तथ्य जनता के सामने आ सकें, इसीलिए मुझे आज यहां पर आना पड़ा। उन्होंने कहा कि काशी के प्रति हर सनातन धर्मावलम्बी व हर भारतवासी अपार श्रद्धा का भाव रखता है, लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान मिलना चाहिए था, काशी का जो विकास होना चाहिए था, वो नहीं हुआ। पिछले 11 वर्षों में काशी एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक व सांकृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उनका संवर्धन कर रही है और भौतिक विकास के माध्यम से नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त कर रही है। पीएम कहते हैं 'मेरी काशी' सीएम योगी ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि देश की संसद में काशी का प्रतिनिधित्व स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं और वह अक्सर अपने भाषणों में कहते हैं, 'मेरी काशी'। प्रारम्भ से ही उन्होंने कहा है कि काशी की पुरानी काया को संरक्षित करते हुए उसे नए कलेवर के रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए और उसी के अनुरूप काशी की परियोजनाएं तैयार हुईं।  देश की जीडीपी में काशी का योगदान 1.3 लाख करोड़ कॉरिडोर बनने के बाद काशी में आए परिवर्तन को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले यहां प्रतिदिन औसतन पांच हजार से 25 हजार श्रद्धालु आते थे। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन सवा लाख से डेढ़ लाख श्रद्धालु यहां दर्शन कर रहे हैं। विशेष अवसरों पर यह संख्या 6 से 10 लाख तक पहुंचती है। गतवर्ष 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ धाम में दर्शन किए। बाबा विश्वनाथ धाम बनने के बाद से अब तक अकेले काशी ने देश की जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ रुपए का योगदान किया है।  मंदिर तोड़े नहीं गए, पुनरुद्धार हुआ सीएम ने सीधे-सीधे कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब काशी विश्वनाथ धाम बन रहा था, तब भी कांग्रेस ने सफेद झूठ फैलाया कि मंदिर तोड़े गए, जो कि सरासर गलत है। उन मंदिरों का पुनरुद्धार हुआ है, वे आज भी वैसे ही हैं। फर्क इतना है कि पहले जीर्णशीण हालत में थे, अब उनका पुनरुद्धार हो चुका है।  कांग्रेस क्यों वापस नहीं लाई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति मुख्यमंत्री ने कहा कि सौ वर्ष पहले माता अन्नपूर्णा की मूर्ति यहां से चोरी कर यूरोप पहुंचा दी गई थी। प्रधानमंत्री के प्रयास से वह मूर्ति वापस आई और काशी विश्वनाथ में उसकी स्थापना की गई। सीएम योगी ने कांग्रेस से सवाल किया कि 1947 से लेकर 2014 तक ज्यादातर समय केंद्र में कांग्रेस की सरकारें रहीं, आखिर उन्होंने यह प्रयास क्यों नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकारों में भारत की विरासत के प्रति सम्मान का भाव ही नहीं था। तुष्टीकरण की राह पर चलकर भारत की आस्था का अपमान करने वाली कांग्रेस कभी भी भारत की विरासत का सम्मान नहीं कर सकती।  सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली सीएम योगी ने कहा कि विरासत का सम्मान कैसे होता है, यह हमें कांग्रेस से पूछने की आवश्यकता नहीं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर 500 वर्षों के बाद मंदिर निर्माण का कार्य, काशी हो या अयोध्या, मां विंध्यवासिनी धाम हो या प्रयागराज, बौद्ध तीर्थस्थल हो या फिर भारत की विरासत से जुड़े सभी तीर्थस्थल, विरासत के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के सभी कार्य प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सकुशल संपन्न हो रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस द्वारा इस प्रकार की अनर्गल टिप्पणी और उसके नेताओं के इस प्रकार के बचकाने बयान और बचकानी हरकतों को देखकर उन पर हंसी भी आती है और दया भी। इनका यह कृत्य वैसे ही है जैसे 'सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली'। जिन लोगों ने विरासत का सदैव अपमान किया, वो आज भी विकास के कार्यों में बाधा पैदा कर रहे हैं। यह स्थिति केवल मणिकर्णिका में ही नहीं है, सच्चाई तो यह है कि ये लोग विकास के हर उस कार्यक्रम में बाधा पैदा करेंगे, जो प्रदेश या देश के विकास से और लोक कल्याण से जुड़ा हो।

मध्य प्रदेश में 165 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू, 324 किमी का निर्माण करेगी मुंबई की कंपनी

 छतरपुर  छतरपुर शहर के तालाबों को स्वच्छ और साफ रखने के लिए वर्ष 2022 में स्वीकृत सीवर प्रोजेक्ट बीते चार साल से अटका हुआ था। तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो पाया था लेकिन अब नगर पालिका छतरपुर और मुंबई की कंपनी आरएनबी इंफ्रा के बीच अनुबंध होने के बाद परियोजना को नई दिशा मिली है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से अंतिम सर्वे शुरू कर दिया है, जिसे 90 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 165 करोड़ रुपए है। सर्वे के बाद ठेकेदार फाइल का वेरिफिकेशन किसी इंजीनियरिंग कॉलेज से कराएगा और इसके बाद इसे अंतिम अनुमोदन के लिए भोपाल भेजा जाएगा। अनुमोदन मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा। कार्य शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट के अंतर्गत होने वाले कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।  तीन साल पहले पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं हो पाया। गुजरात की कंपनी द्वारा डीपीआर समय पर तैयार न करने और बार-बार टेंडर निरस्त होने के कारण कार्य रुक गया था। इस कारण शहर के प्रमुख तालाबों प्रताप सागर, संकट मोचन, ग्वाल मंगरा और किशोर सागर में गंदगी, जलकुंभी और जलकुमा डेमली जैसी वनस्पतियां पनप गई हैं। इससे पानी दुर्गंधपूर्ण और अनुपयोगी हो गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में होगा सर्वे का कार्य नगर पालिका के उपयंत्री अंकित अरजरिया ने बताया, निर्माण एजेंसी और नगर पालिका के बीच अनुबंध हो गया है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया है। निर्माण जल्द शुरू करने के लिए ठेकेदार को अलग-अलग क्षेत्र का सर्वे करने कहा गया है, ताकि ड्राइंग जल्दी तैयार हो और अनुमोदन मिल सके। अनुमोदन मिलने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शहर में तालाबों को स्वच्छ बनाने की योजना… प्रारंभ में नरायणपुरा और राजनगर रोड पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाएगा। इस चरण में आधुनिक तकनीक और उच्च क्षमता वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे शहर के गंदे पानी को प्रभावी ढंग से साफ किया जा सके। इसके बाद फ्लौठा और सौरा तालाब में इंटरमीडिएटर पंपिंग सिस्टम (आईपीएस) लगाया जाएगा। यह सिस्टम तालाबों में जमा गंदे पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित रूप से बाहर निकालने का काम करेगा। 3 फेज में होगा प्रोजेक्ट फेज-1- शहर में 5 पानी की टंकियों का निर्माण। फेज-2- शहर के तालाबों का सौंदर्गीकरण और सफाई। फेज-3- 324 किलोमीटर सीवर लाइन बिछेगी, 3 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 पंपिंग स्टेशन बनेंगे। ये पंपिंग स्टेशन पानी को एक से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।

ग्वालियर में स्थापित होगा नया सेटेलाइट स्टेशन, निर्माण के लिए लोगों से ली जाएगी ज़मीन

ग्वालियर   ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों की बढ़ रही भीड़ का बोझ हल्का किया जाएगा। इसके लिए बिरलानगर रेलवे स्टेशन को सेटेलाइट स्टेशन (Satellite Station) के तौर पर तैयार करने की पहल शुरू हो रही है। इसके अलावा सिथौली और बिरला नगर के रेलवे स्टेशन का विकास का प्रस्ताव भी रेल मुख्यालय को भेजा गया है। रेल अधिकारियों का कहना है बिरलानगर रेलवे स्टेशन (Birla Nagar Railway Station) को आने वाले दिनों में ग्वालियर का सहायक स्टेशन बनाया जाएगा। इसका ब्लू प्रिंट लगभग तैयार है। इसमें प्लेटफार्म की गिनती, ट्रैक को सुधारने, सिग्लन और रेलों के परिचालन की क्षमता बढ़ाने के साथ मुसाफिरों को जरुरी सुविधाओं का विस्तार का प्लान शामिल किया गया है। इस प्रस्ताव को रेल मुख्यालय में परखा जाएगा। इसमें सबसे अहम कड़ी जगह है। मुख्यालय यह तय करेगा कि भविष्य को देखते हुए कितनी भूमि की जरुरत होगी। यहां पड़ेगी भूमि अधिग्रहण की जरूरत रेल अधिकारियों की नजर में पूरे प्रोजेक्ट में बिरलानगर रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए जमीन की जरुरत होगी इसके लिए प्रदेश शासन के सहयोग लिया जाएगा। सिथौली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म की गिनती और मुसाफिरों की सुविधाओं को बढ़ाने का खाका खींचा गया है। इन दोनों रेलवे स्टेशन का दायरा बढने से ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों दवाब काफी कम होगा। मंजूरी का इंतजार बिरलानगर और सिथौली रेलवे स्टेशन का विस्तार किया जाए इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। आने वाले दिनों में इन दोनों स्टेशन को ग्वालियर स्टेशन का वैकल्पिक और मददगार बनाने की योजना है। रेल मुख्यालय से प्रस्ताव की मंजूरी का इंतजार है।- अनिरुद्ध कुमार, मंडल रेल प्रबंधक