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आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पुंगनूर गाय बनी आकर्षण का केंद्र

जम्बूरी मैदान, भोपाल में आयोजित कृषक कल्याण वर्ष–2026 के शुभारंभ अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा लगाई गई है विशेष प्रदर्शनी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को जम्बूरी मैदान, भोपाल में आयोजित “कृषक कल्याण वर्ष–2026” के शुभारंभ अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में गिर, साहीवाल, थारपारकर तथा आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पुंगनूर गाय की प्रदर्शनी लगाई गई। पुंगनूर गाय विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित किसानों एवं पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार के संबंध में जागरूक किया गया। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा जम्बूरी मैदान में 5 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जिनके माध्यम से किसानों और पशुपालकों को भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम स्थल पर गोबर से निर्मित उत्पादों जैसे राम दरबार, महाकाल प्रतिमा, पंचगव्य उत्पाद, पूजा-पाठ सामग्री एवं सौंदर्य प्रसाधनों की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसके साथ ही विभाग द्वारा मुर्गीपालन एवं पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रसिद्ध कड़कनाथ मुर्गा एवं बकरी की विभिन्न प्रजातियों का सजीव प्रदर्शन किया गया। वहीं, सांची दुग्ध संघ द्वारा उत्पादित दुग्ध उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर गोशालाओं पर विशेष जोर पशुपालन एवं डेयरी विभाग की महत्वपूर्ण स्वावलंबी गोशाला नीति–2025 तथा आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल का भी विशेष प्रदर्शन किया गया, जिससे पशुपालकों को गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रेरित किया गया।  

लुधियाना में युवक को नंगा कर पीटने का आरोपी नाबालिग हिरासत में

चंडीगढ़. लुधियाना। जीवन नगर इलाके में एक लड़के को पकड़कर कपड़े उतारकर मारपीट के मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई उस घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई। बताया जाता है कि जीवन नगर इलाके में एक 16 वर्षीय नाबालिग बाइक पर तेज रफ्तार से घूमकर लोगों को डराने-धमकाने और लूटपाट की वारदातें करता था। समाज सेवक करण का आरोप है कि उक्त नाबालिग से इलाके के लोग काफी परेशान थे। बुजुर्गों और राहगीरों के लिए सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया था। आरोप है कि वीरवार को इसी नाबालिग व उसके साथियों ने एक अन्य लड़के को पकड़ लिया और उसे जीवन नगर स्थित एक पार्क में ले गए। वहां ठंड के मौसम में उसके कपड़े उतरवाकर डंडों से बेरहमी से पिटाई की। इस दौरान उन्होंने पीटते हुए अपने मोबाइल पर वीडियो भी बनाई। आरोप यह भी है कि पीड़ित नाबालिग से पैसे भी छीने ले गए। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में रोष फैल गया। लड़के के पिता ने इलाका पार्षद को इस बारे में बताया। लोगों ने वीडियो के आधार पर मारपीट करने वाले नाबालिग की पहचान की और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने उस मारपीट करने वाले नाबालिग को हिरासत में लिया। घटना से नाराज जीवन नगर के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर चौकी जीवन नगर के बाहर एकत्र होकर पकड़े गए नाबालिग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस अवसर पर सोनू लाला, गणपति, नवीन, बबलू, अमित, विक्की, बंटी लाला, सुरेंद्र गर्ग, अंकुश कुमार, इंद्र, उपेंद्र लाला, संजय कुमार, आवेश कुमार और भारी संख्या में दुकानदार उपस्थित रहे। पूछताछ की जा रही है सूचना मिलने पर एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -कुलबीर सिंह, एसएचओ, थाना फोकल प्वाइंट

मध्यप्रदेश स्टार्ट अप समिट 2026 पहला दिन

इन्क्यूबेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने, कृषि-नवाचार को बढ़ावा देने और स्टार्टअप्स की निवेश-तैयारी पर केंद्रित भोपाल एमएसएमई विभाग द्वारा प्रदेश में स्‍टार्टअप इकोसिस्‍टम को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत रविवार को मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 के पहले दिन का फोकस इन्क्यूबेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने, कृषि-नवाचार को बढ़ावा देने तथा स्टार्टअप्स की निवेश-तैयारी को सशक्त करने पर रहा। समिट में देशभर से स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स, निवेशक एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े 500 से अधिक हितधारक द्वारा सहभागिता की गई। समिट के पहले सत्र के रूप में “इन्क्यूबेटर सस्टेनेबिलिटी” विषय पर एक विशेष इन्क्यूबेटर मास्टर क्लास आयोजित की गई, जिसमें वैकुंठ प्रसाद एवीपी, आईआईएम बैंगलोर, प्रसाद मेनन, अध्यक्ष, इंडियन स्टार्टअप एंड इन्क्यूबेटर एसोसिएशन , प्रशांत सलवान प्रोफेसर रणनीति एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आईआईएम इंदौर तथा शगुन वाघ, सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ने आइडियाबैज़, इन्क्यूबेशन मॉडल, उद्योग सहभागिता, फंडिंग एवं दीर्घकालिक स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए गए। समिट में “एग्री एफपीओ को स्टार्टअप के रूप में विकसित करना – वैल्यू चेन ट्रांसफॉर्मेशन” विषय पर एक पैनल चर्चा हुई।विशेषज्ञों में किसान उत्पादक संगठनों को नवाचार-आधारित और स्केलेबल उद्यम के रूप में विकसित करने पर विमर्श हुआ। इस सत्र में द्वारिका सिंह, संस्थापक,आई एस ई डी इंडिया,एमानुएल मुर्रे, इन्वेस्टमेंट डायरेक्टर, कैस्पियन, स्टेट हेड डेवलपमेंट सर्विसेज, तथा अनिल जोशी, संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर, यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स द्वारा सहभागिता की गई। सत्र का संचालन मनीषा पांडे, प्रोफेसर, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। समिट में स्टार्टअप पिचिंग सेशन में क्वालिफायर राउंड आयोजित हुआ, जिसमें उभरते स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार और बिज़नेस मॉडल को विशेषज्ञ जूरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पहले दिन का समापन स्पीकर्स एवं निवेशकों के साथ विचार विमर्श के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप्स एवं निवेशकों के मध्य सहयोग और संभावित निवेश अवसरों को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री ने ई-विकास, वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान प्रणाली ऐप का किया शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के किसानों के लिए वर्ष 2026 नई उम्मीदों और नए अवसरों का वर्ष होगा। किसान हमारे अन्नदाता हैं, जो अपने परिश्रम से देश और समाज का उदर-पोषण करते हैं। किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी समृद्धि सुनिश्चित करना ही सरकार का एकमात्र ध्येय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने की अधिकृत घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का एक साधन ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन के दौरान ई-विकास, वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति सामधान प्रणाली (विकास पोर्टल) का शुभारंभ किया। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की आमदनी बढ़ाने सहित इनकी बेहतरी और खुशहाली के लिए किए जाने वाले प्रयासों के संबंध में एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। किसान सम्मेलन में सरकार की विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और भावी कार्ययोजना की जानकारी भी किसानों को दी गई। पूरा साल किसानों के कल्याण के लिए समर्पित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने पूरा साल किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। हमारी सरकार खेतों से निकलने वाली पराली से भी किसानों आय बढ़ाने का प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त्करते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां बीते सालों के प्रयासों से खेती का रकबा ढाई लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी लिंक एवं केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वाटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित हो जाएगा। किसानों के हित में हमने जा कहा, वह करके दिखाया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के हित में हमने जो कहा, वह करके दिखाया है। प्रदेश में श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिण्डोरी जिले में मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर में सरसों अनुसंधान और उज्जैन में चना अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा रहा हैं। इन केंद्रों के जरिए इन फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पावर पम्प देंगे। हर साल 10 लाख किसानों को सोलर पम्प देकर इन्हें अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र का रकबा निरंतर बढ़ रहा है। अभी 65 लाख हेक्टेयर है, इसे बढ़ाकर वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक लेकर जाएंगे। किसानों को लौटाएंगे उनका वैभव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। सालभर विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के जरिए सरकार के 16 से अधिक विभाग/मंत्रालय आपसी समन्वय से किसानों को उनका वैभव लौटाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन के बाद अब सरसों की फसल को भी हम भावांतर योजना के दायरे में लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों के विकास में किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार सब्सिडी देगी। प्रदेश में बीज परीक्षण कार्य से जुड़ी सभी प्रयोगशालाओं को और अधिक सशक्त कर सभी मंडियों का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। रिक्त पदों पर भर्ती कर कृषि तंत्र को करेंगे मजबूत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागीय अमले की तेज भर्ती के लिए भी हमारी सरकार प्रयासरत है। कृषि विभाग और राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड में सभी श्रेणी के रिक्त पदों की जल्द से जल्द पूर्ति कर प्रदेश में कृषि तंत्र को और भी मजबूत बनाया जाएगा। सरकार माइक्रो इरिगेशन सिस्टम का दायरा बढ़ाने की ओर भी अग्रसर है। किसानों को होने वाली फसल नुकसानी का अब आधुनिक तकनीक से सर्वे कराया जाएगा। इससे किसानों को मुआवजे की राशि जल्द से जल्द मिल सकेगी। किसानों की बेहतरी और खुशहाली के लिए हर सभी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए जीरो प्रतिशत ब्याज दर से ऋण प्रदाय योजना आगे भी जारी रहेगी। किसानों को मिलेगा उनकी उपज और परिश्रम का बेहतर मूल्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे, ताकि किसानों को उनकी उपज एवं परिश्रम का बेहतर मूल्य मिल सके और गांवों में ही रोजगार के नए अवसर पैदा हों। इसके साथ ही प्रदेशभर में कृषि उत्सव और किसान मेलों का आयोजन कर किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाए जाएंगे। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ खेती-किसानी में नवाचारों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेतों में पसीना बहाने वाले किसान राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च उदाहरण हैं। ऐसे में किसानों की सेवा, संबल और समृद्धि में सहयोग करना सरकार का कर्तव्य और धर्म है। उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे नई तकनीकों को अपनाएं, बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलें और खेती को आधुनिक बनाएं। किसान कल्याण वर्ष का भव्य शुभारंभ कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी अन्नदाताओं को भरोसा दिलाया कि किसानों की सुख-समृद्धि में ही सरकार का सुख है। हर कदम पर, हर जरूरत के वक्त सरकार किसानों के साथ खड़ी है। अन्नदाता मध्यप्रदेश के माथे का तिलक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्नदाता मध्यप्रदेश के माथे का तिलक हैं, जिसका तिलक खेत की मिट्टी है, वही मध्यप्रदेश का किसान है। उन्होंने कहा कि किसानों का पसीना प्रदेश की पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के शुभारम्भ के साथ हमआत्मनिर्भर और समृद्ध किसान, उन्नत कृषि और मूल्य श्रंखला आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था … Read more

युवा संसद का आयोजन: डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में बच्चों ने निभाई सांसदों की भूमिका

रायपुर,  नेशनल रोवर – रेंजर जंबूरी का आयोजन पूरे उत्साह, अनुशासन और जीवंत सहभागिता के साथ बालोद जिले के ग्राम दुधली में सम्पन्न किया रहा है। आयोजन के तीसरे दिन जंबूरी परिसर लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र बन गया, जब रोवर–रेंजरों एवं उपस्थित नागरिकों को लोकसभा की वास्तविक कार्यवाही का प्रत्यक्ष और व्यावहारिक अनुभव कराया गया। यूथ पार्लियामेंट के मंच पर रोवर–रेंजरों ने सांसदों की भूमिका निभाई वहीं विधानसभा के अध्यक्ष संसद के अध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन किया। युवाओं ने जिस आत्मविश्वास, विषयगत समझ और मर्यादित संवाद शैली का प्रदर्शन किया, वह दर्शनीय था। यह मंच भावी जनप्रतिनिधियों को गढ़ने का सशक्त माध्यम गया था। अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल बने रोवर–रेंजर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की आयोजित युवा संसद की सराहना करते हुए कहा कि यूथ पार्लियामेंट के दौरान रोवर–रेंजरों जिस प्रकार आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ अपनी भूमिका को निभाया है, उससे देश के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना साकार नजर आती है। आज के युवा कल के हमारे समाज के प्रतिनिधि हैं। इनके कंधों पर हमारी विरासतों को आगे ले जाने का जिम्मा है, जिसे वे बखूबी निभाएंगे इसका हम सभी को भरोसा है। उन्होंने सभी की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और जिम्मेदार नागरिकता की मजबूत नींव पड़ती है। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज के रोवर – रेंजर देश का आने वाला भविष्य है।भारतीय स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. के. के. खंडेलवाल, राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंद्रजीत सिंह खालसा, जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, रोवर–रेंजर, स्काउट–गाइड्स एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे। सीख, सेवा और साहस से भरा रहा तीसरा दिन जंबूरी का तृतीय दिवस प्रतिभागियों के लिए विविध और प्रेरक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जागरण और शारीरिक जांच के साथ फ्लैग सेरेमनी के साथ अनुशासन और एकता का संदेश दिया जाएगा। डॉग शो में कुत्तों की बेहतरीन कलात्मक प्रदर्शन के साथ मार्च पास्ट प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी प्रतियोगिताओं में भी युवाओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लेते हुए सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया।              आज जम्बूरी में आदिवासी संस्कृति परंपरा के साथ आधुनिकता की अनूठी प्रस्तुति दी गयी। आदिवासी वेशभूषा में पारंपरिक व्यंजनों के निर्माण के साथ लोकवाद्यों की भी प्रस्तुति की गई। आदिवासी नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पारंपरिक भोजन के साथ ही हॉर्स राइडिंग, बाइक रेस और वाटर एक्टिविटी जैसी साहसिक गतिविधियां का भी प्रदर्शन किया गया।       युवाओं को आपदा प्रबंधन और ग्लोबल डेवलपमेंट विलेज से जुड़ी प्रतियोगिताओं के साथ वृक्षारोपण भी किया गया। कंटीजेंट लीडर मीटिंग, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, एच डब्लू बी रीयूनियन, नाइट हाईक तथा पायोनियरिंग प्रोजेक्ट प्रतियोगिताओं के भी आयोजित की जाएगी। एरिना में आयोजित इंटरनेशनल नाइट कार्यक्रम में विभिन्न संस्कृतियों की रंगारंग प्रस्तुतियां जंबूरी को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया जाएगा।

राज्य कर्मचारी संघ के अधिवेशन में मुख्यमंत्री साय शामिल

रायपुर. कर्मचारी शासन-प्रशासन की रीढ़ होते हैं और उनकी ईमानदारी, कर्मठता तथा संवेदनशीलता से ही सरकार की योजनाएं, नीतियां और निर्णय वास्तविक रूप में धरातल पर उतरते हैं। छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक ढांचा आप सभी की मेहनत, निष्ठा और अनुशासन के कारण ही प्रभावी ढंग से कार्य कर पा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिक्षा संस्थान परिसर में राज्य कर्मचारी संघ, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित त्रैवार्षिक अष्टम प्रदेश अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत से बढ़ाकर केंद्र सरकार के समान 58 प्रतिशत किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच यह निर्णय कर्मचारियों को वास्तविक राहत प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार की कर्मचारी-हितैषी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री साय ने अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि यह अधिवेशन संगठनात्मक विचार-विमर्श के साथ ही सुशासन के संकल्प को सुदृढ़ करने का एक सशक्त अवसर है। जब सरकार और कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं, तभी विकास का मार्ग प्रशस्त होता है और शासन व्यवस्था अधिक सशक्त बनती है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने कर्मचारियों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। स्थानांतरण नीति, पदोन्नति प्रक्रिया और कार्यस्थल संबंधी व्यवस्थाओं में सुधार कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सुचारु और कर्मचारी-अनुकूल बनाया गया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन से जन-विश्वास आधारित शासन तंत्र को और मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के समयबद्ध भुगतान पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। छत्तीसगढ़ पेंशन फंड की स्थापना कर तथा पेंशन फंड विधेयक को विधानसभा से पारित कर राज्य ने इस दिशा में एक मजबूत विधायी आधार भी प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस, ऑनलाइन सेवाओं और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से कर्मचारियों की कार्यक्षमता को सशक्त बनाया गया है, वहीं प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों के जरिए उन्हें बदलते समय के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। एक समय नक्सलवाद प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती था, लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने अद्वितीय साहस और पराक्रम से इसका डटकर मुकाबला किया है। उन्होंने मंच से सुरक्षा बलों की वीरता को नमन करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए बेहतर और मानवीय पुनर्वास नीति लागू की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बस्तर क्षेत्र में शांति व्यवस्था तेजी से स्थापित हो रही है और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से सुदूर वनांचलों तक बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप राज्य सरकार ने भी ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ तैयार कर प्रदेश के विकास को नई दिशा और गति दी है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष गौरव कुमार सोनी, महामंत्री राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अरूण तिवारी, प्रदेश महामंत्री अश्वनी चेलक तथा बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी उपस्थित थे।

हरियाणा के संसद की पुस्तक में बताई ‘मोदी युग में भारत का आर्थिक सशक्तिकरण’ की यात्रा

चंडीगढ़/नई दिल्ली/हमीरपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में गांवों और शहरों के बीच की दूरी काफी हद तक समाप्त हुई है। वर्ष 2015 से 2021 के बीच ग्रामीण इंटरनेट उपयोग में 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 तक देश के 95.15 प्रतिशत गांवों में इंटरनेट की पहुंच हो चुकी है और करीब 40 करोड़ ग्रामीण नागरिक इंटरनेट सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। देश में कुल 954.40 मिलियन इंटरनेट उपभोक्ताओं में से 398.35 मिलियन उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। भारतनेट परियोजना के तहत 2.13 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। पिछले तीन वर्षों में ग्रामीण इलाकों में डिजिटल लेनदेन में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह जानकारी राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार द्वारा लिखित पुस्तक “मोदी युग में भारत का आर्थिक सशक्तिकरण” में दी गई है, जिसका विमोचन दिसंबर माह में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने किया था। मोदी शासन में मेट्रो नेटवर्क वर्ष 2014 में 248 किलोमीटर से बढ़कर वर्ष 2025 में 1,013 किलोमीटर से अधिक हो गया है। 11 राज्यों के 23 शहरों में मेट्रो परियोजनाएं शुरू की गई हैं। वर्ष 2013-14 में जहां प्रतिदिन 28 लाख यात्री मेट्रो का उपयोग करते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1.12 करोड़ हो गई है। मेट्रो लाइन शुरू होने की गति नौ गुना बढ़ी है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत अब तक 53.13 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 55.6 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं, जबकि 66.6 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। ग्रामीण परिवारों को ओवरड्राफ्ट के रूप में 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। पुस्तक में बताया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वर्ष 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 2024 में 1,46,195 किलोमीटर हो गई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 60,000 किलोमीटर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित करने का है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कुल 7,948 परियोजनाओं में से जुलाई 2023 तक 74 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.7 लाख करोड़ रुपये सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। देश में कृषि निर्यात वर्ष 2013-14 के 1.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 4.12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। दूध उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014-15 में 146.3 मिलियन टन दूध उत्पादन के मुकाबले 2023-24 में यह बढ़कर 239.2 मिलियन टन हो गया है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 319 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 471 ग्राम हो गई है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण से पिछले दस वर्षों में 1,13,007 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों को प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2016 के 113 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 2.8 बिलियन डॉलर हो गया है। वर्ष 2030 तक रक्षा निर्यात को 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

1101 ट्रैक्टरों की ऐतिहासिक रैली के साथ कृषक कल्याण वर्ष 2026 का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खुद ट्रैक्टर चलाकर दिया संवेदनशील नेतृत्व का संदेश ट्रेक्टर चलाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव बने किसान भोपाल कृषक कल्याण वर्ष-2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल से रविवार को कृषक कल्याण वर्ष 2026 का भव्य एवं गरिमापूर्ण शुभारंभ किया। उन्होंने शुभारंभ अवसर पर किसानों की ऐतिहासिक 1101 ट्रेक्टरों की रैली का नेतृत्व किया। विशाल संख्या में ट्रैक्टरों की अनुशासित सहभागिता ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। ट्रेक्टर रैली में किसानों के उत्साह को देखकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह ट्रैक्टर रैली केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की एकजुटता, आत्मविश्वास और प्रदेश सरकार की किसान-हितैषी सोच का सशक्त प्रतीक है। यह आयोजन इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किसानों के हित में निरंतर और ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में भावुक एवं प्रेरक क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं ट्रैक्टर की कमान संभाली। ट्रैक्टर चालक से आग्रह कर ट्रैक्टर पर बैठना और उसे चलाना मुख्यमंत्री की सहजत और किसानों के श्रम के प्रति सम्मान को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस सादगी और आत्मीयता ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविमोर कर दिया। किसानों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ किसान बने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार की नीतियों का केंद्र किसान, नारी, युवा और गरीब हैं। इन चारों वर्गों के सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार योजनाओं और कार्यक्रमों का निर्धारण कर रही है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की। डनहोंने कहा कि इस दौरान किसानों के हितों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार के 16 विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे, जिससे कृषि से जुड़े सभी आयाम—उत्पादन, लागत, विपणन, आय और कल्याण एक साथ सुदृढ़ हो सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश की कृषि विकास दर 16 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो राज्य की कृषि क्षमता और नीतिगत प्रयासों की सफलता दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी में वृद्धि और कृषि लागत में कमी लाने के लिए ठोस एवं व्यावहारिक उपायों को धरातल पर उतारना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष 2026 के संकल्प की पूर्ति का यह पहला दिन है। पूरे वर्ष विकास एवं मंगल कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जाएंगे। सरकार का प्रयास रहेगा कि किसान समृद्ध हों, कृषि टिकाऊ बने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिले।  

प्रदेश में नगरीय निकायों द्वारा बेहतर सुरक्षित एवं निर्बाध जल आपूर्ति की प्रभावी कार्रवाई

भोपाल प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित एवं निर्बाध जल एवं सीवर सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी जल अथवा सीवर संबंधी समस्या की सूचना निर्धारित माध्यमों से अवश्य दें, जिससे समय पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि रविवार 11 जनवरी तक कुल 1176 जल रिसाव (लीकेज) की मरम्मत की गई है तथा अब तक 7619 जल नमूनों की जांच पूर्ण की जा चुकी है। जल नमूना संग्रहण कार्य में 744 सफाई मित्र/अमृत मित्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और जल परीक्षण के लिये अब तक 704 व्यक्तियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि कुल 684 ओएचटी/जीएसआर/सम्प की सफाई पूर्ण की जा चुकी है, जिन पर ऑयल पेंटिंग द्वारा सफाई की तिथि एवं अगली प्रस्तावित सफाई की तिथि अंकित की गई है। इसके अतिरिक्त अब तक 1650 छोटे मरम्मत कार्य (माइनर रिपेयर) पूर्ण किए जा चुके हैं। जल से संबंधित कुल 293 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 284 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। वहीं सीवर लाइन लीकेज, मैनहोल ओवरफ्लो आदि से संबंधित कुल 285 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 134 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने सभी नगर निगमों एवं शहरी निकायों को निर्देश दिए हैं कि शेष लंबित शिकायतों का तत्काल, गुणवत्ता-पूर्ण एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल की गुणवत्ता और सीवर व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी तथा फील्ड अमला निरंतर निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई की स्थिति में रहेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा शेष शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिये संबंधित निकायों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्वच्छ जल अभियान स्वच्छ जल अभियान में जल सुरक्षा, जल संरक्षण तथा जल से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से प्रदेश में ‘जल सुनवाई’की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से नगर निगमों/शहरी निकायों द्वारा नागरिकों को बेहतर जल एवं सीवर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये निरंतर कार्य किया जा रहा है।इसी क्रम में प्रदेश की समस्त नगरीय निकायों में 11 जनवरी 2025 तक निम्नलिखित प्रगति दर्ज की गई है—         · जल रिसाव (लीकेज) से संबंधित मरम्मत कार्य : नगर निगम- 547, नगर पालिका परिषद – 315, नगर परिषद- 314         · जल नमूनों की जांच : नगर निगम – 4498, नगर पालिका परिषद – 1496, नगर परिषद – 1625         · जल नमूना संग्रहण कार्य में सफाई मित्र / अमृत मित्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं : नगर निगम- 158, नगर पालिका परिषद- 284, नगर परिषद- 302             · जल परीक्षण के लिये व्यक्तियों को प्रशिक्षण : नगर निगम- 330, नगर पालिका परिषद- 191, नगर परिषद- 183         · ओएचटी/जीएसआर/सम्प की सफाई की जा चुकी है, (ऑयल पेंटिंग द्वारा सफाई की तिथि एवं अगली सफाई की तिथि प्रस्तावित है) : नगर निगम- 212, नगर पालिका परिषद- 194, नगर परिषद- 278         · छोटे मरम्मत कार्य (माइनर रिपेयर) पूर्ण किए गए हैं : नगर निगम- 829, नगर पालिका परिषद- 440, नगर परिषद- 381         · जल संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनका का समाधान कर दिया गया है : नगर निगम कुल 293 शिकायतेंसे 213 शिकायतों का निराकरण।         · सीवर लाइन लीकेज/मैनहोल ओवरफ्लो आदि से संबंधित शिकायतों का निराकरण : नगर निगम कुल 285 शिकायतें में से 134 शिकायतों का निराकरण शेष लंबित शिकायतों के त्वरित समाधान के लिये संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि जल अथवा सीवर से संबंधित किसी भी समस्या की सूचना निर्धारित माध्यमों से उपलब्ध कराएं, जिससे समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।  

सुप्रीम कोर्ट कमेटी के समक्ष सतनाम बेहरू की भावुक अपील

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट की ओर से रिटायर्ड जस्टिस नवाब सिंह की अगुवाई में गठित कमेटी से मिलने पहुंचे किसान नेताओं ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी विस्तृत राय रखी। इस दौरान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले सतनाम सिंह बेहरू ने समिति के सदस्यों के सामने भावुक अपील की। सतनाम बेहरू ने कहा कि वह न्यायालय के समय का महत्व समझते हैं, इसलिए अपनी बात संक्षेप में ही रखेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की बातों पर संदेह हो, तो कम से कम खेती के क्षेत्र के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की राय अवश्य सुनी जानी चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि वह स्वयं पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन समिति के सदस्य तथ्य और तर्क के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम हैं। बेहरू ने बताया कि वह वर्ष 2000 से इस मुद्दे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना था कि किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, इसलिए सरकार को इस दिशा में नीति बनानी चाहिए। 2004 में केंद्र सरकार ने एम.एस. स्वामीनाथन की अगुवाई में एक राष्ट्रीय कृषि आयोग गठित किया, जिसने दो वर्ष की विस्तृत मेहनत के बाद पांच जिल्दों में अपनी रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि किसानों को उनकी फसल की लागत पर 50 प्रतिशत लाभ लेना चाहिए। लेकिन सरकारों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में भी लगी बाधाएं सतनाम ने कहा कि रिपोर्ट का सार तैयार करने के लिए वह प्रो. रंजीत सिंह घुम्मण के पास पहुंचे, लेकिन पहले उन्हें मना कर दिया गया। उनकी अनेक विनतियों के बाद सार तैयार हुआ और इसी आधार पर 2011 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट में मामला कई महीनों तक चला। इस बीच 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी भाषणों में स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की बात कही। बेहरू ने इस वादे को भी अपनी याचिका में शामिल किया, परंतु अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी वादों पर फैसला नहीं दिया जा सकता। सतनाम ने समिति को बताया कि यदि खेती नहीं बची तो देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उनकी बातों को सुनकर समिति में मौजूद कई विशेषज्ञ गंभीर होकर उन्हें सुनते दिखाई दिए।