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बाघ अभ्यारण्यों से ही जंगल बचे रहे हैं, बाघों के साथ जल, जंगल और ज़मीन बचाने के हों प्रयास- राज्यपाल

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि बप्पा रावल के नाम पर ही रावल पिंडी बना हुआ है। वह मेवाड़ के ऐसे पराक्रमी योद्धा थे जिन्होंने अरब से आए मीर कासिम को ईरान तक खदेड़ा। उन्होंने राजस्थान को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यहां सर्वाधिक बाघ अभ्यारण्य होने के साथ ही, प्रकृति संरक्षण परंपराएं भी जीवंत हैं। उन्होंने बाघों के साथ जल, जंगल और ज़मीन बचाने के लिए भी सबको मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। श्री बागडे गुरुवार को जवाहर कला केंद्र में जयपुर टाइगर फेस्टिवल के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बाघ उत्सव में आयोजित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और वन, वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित किया। राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि बाघों के होने से ही पारिस्थितिकी संतुलन बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती मनुष्य आबादी के साथ ही बाघों के प्राकृतिक आवास तेजी से संकुचित हो रहे हैं। उन्होंने बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता का प्रसार किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने  कहा कि बाघ अंब्रेला स्पेसिस है। वह रहेगा तभी जंगल और जंगली जीव सुरक्षित रह सकते हैं। इसी से पर्यावरण संरक्षण बना रहेगा। उन्होंने कहा कि देश में बाघ अभ्यारण्य बनने से ही जंगल बचे रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान भक्ति और शक्ति का ही प्रदेश नहीं है, गौ पालन का भी सबसे बड़ा स्थान है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में राजस्थान देशभर में दूसरे स्थान पर है। गौ पूजा, गौशाला स्थापना में राजस्थान अग्रणी है। उन्होंने बाघ को विश्व का बहुत सुंदर और शक्तिशाली जीव बताते हुए कहा कि विश्व के 75 प्रतिशत बाघों की संख्या अकेले हमारे देश में हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के रणथम्भौर नेशनल पार्क, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व व सरिस्का टाइगर रिजर्व को अच्छी श्रेणी का टाइगर रिजर्व माना गया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में कुल 160 बाघ हैं, जिनमें 144 जंगली और 16 कैप्टिविटी में हैं। रणथंभौर में सबसे ज़्यादा 71 बाघ हैं। राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छ जल, भूमि उर्वरता में सुधार आदि के साथ ही जैव विविधता का संरक्षण बाघों की आबादी पर ही निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण के साथ पर्यटन का विकास भी इस तरह से हो कि वन्य जीवों को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचे। उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए जन चेतना का प्रसार करने का आह्वान किया।

हरियाणा HKRN स्टाफ ध्यान दें! तय समय में नहीं किया ये काम तो बढ़ सकती है परेशानी

हरियाणा  हरियाणा में HKRN कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर आई है। बताया जा रहा है कि HKRN कर्मचारी अपनी फैमिली ID अपडेट नहीं करवा रहे हैं। जिस कारण उन्हें दूसरे लाभ भी मिल रहे हैं जिनके वह पात्र नहीं है, जिसको लेकर अब चीफ सेक्रेटरी ने सभी विभागों को पत्र लिखकर डेटा अपडेट करवाने के बारे में निर्देश दिए हैं। हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी ने सभी विभागाध्यक्ष को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि HKRN के तहत नौकरी कर रहे कर्मचारी अपनी इनकम को अपडेट नहीं कर रहे हैं। खासकर 17 अगस्त 2019 से 31 दिसंबर 2021 के बीच विभिन्न विभागों में शामिल हुए लोगों ने ऐसा किया है। जिन्होंने HKRN के माध्यम से मजदूरी प्राप्त करने के बावजूद अपनी पारिवारिक आय की स्थिति को परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) पोर्टल पर बदलाव नहीं करवाया है। कर्मचारियों को 20 दिनों के अंदर पीपीपी पोर्टल पर अपडेट किए जाने के निर्देश दिए हैं।

तकनीक, परामर्श व बाजार तक सीधी पहुंच हुई सुनिश्चित, गांव-गांव मजबूत हो रहा कृषि इकोसिस्टम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े आठ वर्षों में कृषि क्षेत्र में बुनियादी बदलाव आया है। प्रदेश सरकार ने खेती को उन्नत बनाने के साथ ही ज्ञान, तकनीक, परामर्श व मार्केट एक्सेस से जोड़कर गांव-गांव तक इसका लाभ पहुंचाया है। फसल प्रबंधन, बीज चयन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती, ड्रोन स्प्रे और आधुनिक सिंचाई जैसे क्षेत्रों में डिजिटल व वैज्ञानिक नवाचारों ने खेती को न केवल सुरक्षित बनाया बल्कि किसानों की लागत घटाकर उत्पादन व आय को भी बढ़ाया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के इस उत्तम मॉडल को विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा भी सराह चुके हैं। उन्होंने प्रदेश के योगी आदित्यनाथ की सरकार की इस कृषि-परिवर्तन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने कृषि को आधुनिकता से जोड़ते हुए विश्व स्तर का मॉडल प्रस्तुत किया है। तकनीक, नवाचार व फसलों तक सरकार की पहुंच प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने किसानों को वैज्ञानिक व स्मार्ट खेती की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान चलाया है, जिसमें युवा किसान और महिला किसान उत्पादक समूह विशेष रूप से शामिल रहे। हर गांव में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय विशेषज्ञों के साथ परामर्श प्रणाली स्थापित की गई, जिससे फसलों की बीमारी, पानी, उर्वरक व बाजार से जुड़े प्रश्नों का समाधान इम्पैक्ट आधारित तरीके से सीधे खेत पर ही उपलब्ध हो रहा है। ड्रोन-स्प्रे, स्वचालित सिंचाई प्रणाली, मिट्टी के पोषक तत्वों की डिजिटल निगरानी तथा खेतों की डिजिटल सर्वेक्षण प्रणाली ने कृषि सेक्टर को आधुनिक उद्योग जैसी दक्षता प्रदान की है। फसल बीमा के दावों का त्वरित निपटारा, ऑनलाइन मंडियों और ई-नाम जैसी पहल ने किसानों को सही दाम और व्यापक बाजार उपलब्ध कराया है। रिकॉर्ड भुगतान, एथेनॉल क्रांति का आधार बनी मजबूत कृषि अवसंरचना गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, नई चीनी मिलों की स्थापना, क्षमता बढ़ोतरी और एथेनॉल उत्पादन में यूपी का देश में शीर्ष स्थान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किसान-केंद्रित सोच को दर्शाता है। सिंचाई परियोजनाओं, “हर खेत तक पानी” मिशन, बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक और हर घर नल से जल जैसे अभियानों ने खरीफ और रबी दोनों सीजनों में फसलों की सिंचाई व पेयजल आपूर्ति को मजबूती दी है। इसी कड़ी में ग्रामीण सड़कों, स्टोरेज, मंडियों व कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार ने कृषि को उद्योग की शक्ति प्रदान की है। वहीं एफपीओ, एग्री-ड्रोन ऑपरेटरों और जैविक खेती को प्रोत्साहन देकर किसानों को “उत्पादक से उद्यमी” बनाने की दिशा में भी सरकार ने निर्णायक कदम उठाए हैं जो धरातल पर अपना असर दिखा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में विश्व बैंक और प्रदेश सरकार ने मिलकर ‘यूपी एग्रीज’ परियोजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य में कृषि प्रणाली को तकनीकी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। इस परियोजना से लगभग 10 लाख छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विश्व बैंक के अजय बंगा, अध्यक्ष ने बताया उत्तर प्रदेश का कृषि मॉडल छोटे किसानों समेत सभी के लिए बहुत अच्छा है। यह केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है जिसे मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है।  

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को देगा 400 ईव्हीएम

राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुआ एमओयू भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत किराये पर सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को 400 ईव्हीएम उपलब्ध करायेगा। इस संबंध में गुरुवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव की उपस्थिति में सचिव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह और सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री ग्लोरिया नामचू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने कहा कि ईव्हीएम शेयरिंग के मामले में मध्यप्रदेश पॉयनियर स्टेट है। उन्होंने बताया कि ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग को ईव्हीएम किराये पर दी जा चुकी हैं। इसी तरह जम्मू-कश्मीर एवं महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन को भी ईव्हीएम किराये पर देने के लिये एमओयू हो चुका है। अन्य राज्यों के साथ भी एमओयू की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी को-ऑपरेटिव फेडरेलिजम का बेहतर उदाहरण है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज के एमओयू से सिक्किम और मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के बीच संबंध और सुदृढ़ होंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2014-15 में स्थानीय निर्वाचन में ईव्हीएम का उपयोग शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि ईव्हीएम के माध्यम से चुनाव कराने में सहूलियत होने के साथ ही पारदर्शिता भी बनी रहती है। श्री सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ को 2 हजार ईव्हीएम और महाराष्ट्र को 25 हजार कंट्रोल यूनिट और एक लाख बेलेट यूनिट किराये पर दी गयी हैं। सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री नामचू ने इस एमओयू पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी सिक्किम जैसे छोटे राज्यों के लिये बहुत उपयोगी है। सुश्री नामचू ने कहा कि इससे राज्यों का आर्थिक बोझ कम होगा और सरलता से स्थानीय चुनाव कराये जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग की जा रहीं निर्वाचन की अन्य नवीनतम तकनीकों के बारे में भी जानकारी मिलेगी, जिसका उपयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। ईव्हीएम को किराये पर देने के लिये प्रति कंट्रोल यूनिट 400 एवं प्रति बीयू 200 रुपये की दर निर्धारित है। किराये की राशि अग्रिम रूप से ली जाती है। ईव्हीएम के परिवहन का पूरा व्यय राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम वहन करेगा। ईव्हीएम मशीन आवश्यक सुरक्षा के साथ ले जानी होगी एवं निर्वाचन के बाद स्वयं ही मध्यप्रदेश के संबंधित जिलों में जमा करानी होगी। इस दौरान सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री राजेन राय और उप संचालक श्री टी.टी. लेपचा, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री मनोज मालवीय, श्री सुतेश शाक्य, सुश्री संजू कुमारी, श्री मुकुल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

एम.पी. ट्रांसको चलाएगी ‘रोको-टोको‘ अभियान

इंदौर की ट्रांसमिशन लाइनों में चायनीज मांझा फँसने से दो वर्षों में 13 बार बिजली बाधित भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर शहर में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और विद्युत व्यवधानों पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सतर्क व सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कंपनी इंदौर में विशेष ‘‘रोको-टोको ‘‘ अभियान चलाएगी। एम.पी. ट्रांसको की कार्यपालन अभियंता श्रीमती नमृता जैन ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में इंदौर क्षेत्र में 13 बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब पतंग के साथ चायनीज मांझा ट्रांसमिशन लाइन के संपर्क में आया, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त भी हुईं। चलाया जायेगा जागरूकता अभियान रोको-टोको अभियान के तहत, एम.पी. ट्रांसको ने इंदौर के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ बहुतायत में पतंग उड़ाई जाती हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर, बैनर और पी.ए. सिस्टम के माध्यम से भी लोगों को सचेत और सतर्क किया जाएगा, ताकि जान-माल की हानि रोकी जा सके और उपभोक्ताओं को व्यापक क्षेत्र में बिजली के अनावश्यक लंबे व्यवधान का सामना न करना पड़े। क्यों घातक है चायनीज मांझा दरअसल, चायनीज मांझा, जो कि सामान्य सूती धागे से अलग होता है, विद्युत का सुचालक होने के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने पर यह न केवल बिजली आपूर्ति में व्यवधान डालता है, बल्कि जान-माल की हानि का कारण भी बन सकता है। जब यह मांझा बिजली के तारों से टकराता है, तो इसमें मौजूद सामग्री के कारण करंट प्रवाहित हो सकता है, जिससे पतंग उड़ाने वाले और आसपास के लोगों को गंभीर खतरा होता है। इंदौर में ये क्षेत्र है संवेदनशील इंदौर में जिन क्षेत्रों को चायनीज मांझा के साथ पतंग उड़ाने के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, उनमें मुख्य रूप से लिम्बोदी, मूसाखेड़ी, खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, गौरीनगर, बाणगंगा, तेजाजी नगर और नेमावर रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अभियान पर विशेष जोर रहेगा। 

मध्यप्रदेश पुलिस की मासूमों की सकुशल बरामदगी में त्वरित कार्रवाई

“विदिशा, सागर और ग्वालियर पुलिस ने अपहृत बच्चों को सुरक्षित दस्‍तयाब कर परिवार से मिलाया भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस ने एक बार फिर त्वरित, प्रभावी और संवेदनशील कार्रवाई का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रदेश के तीन जिलों—विदिशा, ग्वालियर और सागर में अपहरण एवं गुमशुदगी से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मामलों में पुलिस ने अद्भुत दक्षता और मानवीय संवेदना का परिचय दिया। दो अपहरण मामलों में मासूम बच्चों को रिकॉर्ड समय में सुरक्षित बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वहीं सागर में पुलिस की संवेदनशील पहल से 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका अपने परिवार से पुनः मिल सकी। विदिशा पुलिस की बड़ी सफलता — 235 से अधिक सीसीटीवी फुटेज से 48 घंटे में 3 वर्षीय मासूम बरामद थाना कोतवाली क्षेत्र से तीन वर्षीय बालिका के अपहरण की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में “ऑपरेशन मुस्कान” के अंतर्गत 8 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने 235 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण, 135 से अधिक लोगों से पूछताछ तथा कई इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया। जिसके परिणामस्‍वरूप ऑटो चालक बृजेश कुशवाहा की पहचान हुई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुँची। अभियुक्त अर्जुन सिंह पाल, हरिबाई, रवि पाल और जितेंद्र पाल ने बच्ची को सौदे के उद्देश्य से अपहरण करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर परिवार को सौंपा। ग्वालियर पुलिस की त्वरित कार्यवाही — डेढ़ वर्षीय बच्चा सुरक्षित बरामद थाना बहोड़ापुर क्षेत्र से डेढ़ वर्षीय रोहित के गुम होने की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह के निर्देशन में त्वरित खोजबीन प्रारंभ की गई। पुलिस टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और सतत सर्च अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने नागदेवता मंदिर, ट्रांसपोर्ट नगर से एक महिला को पकड़ा जो बच्चा लेकर घूम रही थी। महिला ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने बच्चा न होने के कारण उसे उठा लिया था। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया। सागर जिला — 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका को परिवार से मिलाया, परिवार ने कहा – ‘’यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल’’ 11 फरवरी 2008 को चौकी मंडीबामोरा क्षेत्र से 10 वर्षीय बालिका लापता हुई थी। वर्षों तक खोजबीन जारी रहने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। हाल ही में इंस्टाग्राम रील देखते समय उस बालिका, जो अब बालिग है, ने मंडीबामोरा रेलवे स्टेशन का नाम देखा और उसे अपना गृहक्षेत्र याद आ गया। उसने तत्काल अपने पति संग पुलिस चौकी से संपर्क किया। पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसके परिवार को बुलाया। बेटी अपने माता-पिता को तुरंत नहीं पहचान पाई, लेकिन पिता ने उसके माथे पर पुराने घाव के निशान से पहचान लिया। परिवार ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल है। ये सभी उदाहरण न केवल प्रदेश पुलिस की दक्षता दर्शाते हैं, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करते हैं।

राज्य में 21000 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इनमे से लगभग 22-25% ग्रामीण या छोटे कस्बों से

75 जिलों में ओडीओपी और स्टार्टअप मॉडल ने लोकल प्रोडक्ट्स को बाजार, ब्रांडिंग और डिजिटल पहुंच दिया लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढे आठ सालों में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण नवाचार को प्रोत्साहित करने को लेकर कई विशेष कदम उठाए हैं। जिनका सकारात्मक प्रभाव अब धरातल पर दिखने लगा है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 21,000 स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें से 22 से 25 प्रतिशत स्टार्टअप ग्रामीण और छोटे कस्बों से उभर रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि अब ग्रामीण युवा भी तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसर को प्राप्त कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण समाज में उद्यमशीलता की नई भावना पैदा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप क्रांति अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही रही। अब यह छोटे गांवों और कस्बों में भी इनका प्रभाव देखने को मिल रहा है।  प्रदेश सरकार की ओर से जिस प्रकार से कदम उठाए जा रहे हैं, उससे यह स्पष्ट हो चुका है कि वर्ष 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश का स्वप्न ग्रामीण नवाचार और उद्यमिता से ही साकार होगा। गांवों से निकलते ये स्टार्टअप न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को दिशा दे रहे हैं बल्कि एक नए आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत का आधार भी तैयार कर रहे हैं। सीड फंडिंग और मेंटरशिप से मिली नई दिशा… ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने सीड फंडिंग, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन और मार्केट लिंकेज जैसे सभी महत्वपूर्ण तत्वों को एक साथ जोड़कर एक प्रभावी प्रणाली तैयार की है। इससे युवा केवल स्टार्टअप की शुरुआत ही नहीं कर रहे बल्कि उसे टिकाऊ और बाज़ार योग्य बनाने में भी सफल हो रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न इन्क्यूबेशन सेंटरों में ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीण उत्पादकों के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित हो रहे हैं, जिनमें स्मार्ट खेती, डिजिटल मार्केटिंग और उत्पाद गुणवत्ता सुधार जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण नवाचार को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जाए जिससे गांवों में आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखी जा सके। ओडीओपी प्लस स्टार्टअप मॉडल ने बढ़ाया ग्रामीण उत्पादों का मूल्य… प्रदेश के 75 जिलों में लागू किया गया ओडीओपी प्लस स्टार्टअप मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई पहचान दे रहा है। यह मॉडल स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार, ब्रांडिंग और डिजिटल पहुंच प्रदान कर रहा है। पहले जहां छोटे गांवों के उत्पाद सीमित बाजारों तक ही पहुंच पाते थे वहीं अब ईकॉमर्स और लॉजिस्टिक्स आधारित समाधान ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा दिया है। इससे न केवल बिक्री बढ़ी है बल्कि ग्रामीण उत्पादों की पहचान और मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह मॉडल राज्य में आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है। एग्रो टेक और ग्रामीण ई-कॉमर्स में युवाओं की बढ़ती भूमिका… उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में एफपीओ, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, मिट्टी के स्वास्थ्य और डिजिटल खेती जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में तकनीक आधारित स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं। ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स एड टेक और एग्रो टेक जैसे सेक्टर ग्रामीण युवाओं को नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। खासतौर पर कृषि आधारित स्टार्टअप ने किसानों को सीधे बाजार से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि उत्तर प्रदेश का विकास तभी संभव है जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे। ग्रामीण स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के साधन विकसित होने से ग्रामीण स्तर पर पलायन भी कम हुआ है।

PSPCL में बड़ा फर्जीवाड़ा: हजारों उपभोक्ताओं के ‘जीरो बिल’ पर उठा सवाल, जांच से खुलेंगे राज

लुधियाना पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन सैंट्रल जोन के चीफ इंजीनियर जगदेव सिंह हांस द्वारा मीटरों की रीडिंग करने के दौरान सरकारी सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ करने वाले 40 के करीब कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए मीटर रीडरों की आई.डी. को ब्लॉक कर दिया गया है। हालांकि इस दौरान कई मीटर रीडर पावरकॉम विभाग के उच्च अधिकारियों को सियासी नेताओं की सिफारिशें लगाकर मामले को रफा-दफा करने के जुगाड़ करने में जुट गए हैं। चीफ इंजीनियर स.हांस द्वारा पावरकॉम विभाग के उच्च अधिकारियों सहित सभी डिवीजनों सुंदर नगर, सी.एम.सी. डिवीजन, सिटी सैंटर, फोकल प्वाइंट, अग्र नगर, स्टेट डिवीजन, मॉडल टाऊन, जनता नगर, सिटी वैस्ट, सहित खन्ना, दोराहा, सरहिंद, अमलोह, मंडी अहमदगढ़, ललतों, जगराओं, रायकोट, मुल्लांपुर दाखा आदि इलाकों के एक्सियन साहिबानों को मीटर रीडरों की सरकारी आई. डी. को बंद कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। ताकि पावरकॉम विभाग के सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले प्रत्येक कर्मचारी के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई कर बिजली निगम को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। यहां बताना अनिवार्य होगा कि बिजली मीटर द्वारा किए गए घोटाले का पर्दाफाश सबसे पहले पंजाब केसरी द्वारा किया गया है। समाचार प्रकाशित होने के तुरंत बाद पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में विभागीय अधिकारियों द्वारा मामले की जांच के निर्देश जारी किए गए। जांच में सामने आया है कि बिजली मीटर रीडरों ने एक सोची समझी साजिश के तहत पावरकॉम विभाग की अत्यधिक ओ.आर.सी. स्कैनिंग ऐप तकनीक की बजाए मैन्युअल अथवा सॉफ़्टवेयर के साथ छेड़छाड़ कर उपभोक्ताओं को फर्जीवाड़े के तहत 0 राशि के बिल जारी किए गए हैं। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन के चीफ इंजीनियर जगदेव सिंह हांस ने बताया कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और मीटर रीडरों द्वारा सरकारी खजाने को पहुंचाए गए नुकसान की पाई-पाई का हिसाब उनसे लिया जाएगा।

बड़ी कार्रवाई! पंजाब में बढ़ाई गई सुरक्षा, 44,000 पुलिसकर्मी मैदान में उतरे

जालंधर/चंडीगढ़ राज्य में आने वाले दिनों में होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को ध्यान में रखते हुए, पंजाब पुलिस के महानिदेशक (डी.जी.पी.) गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस राज्य में पारदर्शी, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि शांत मय ढंग से ही चुनाव करवाने के लिए 44000 पुलिस कर्मचारियों को तैनात किया गया है। गौरतलब है कि पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव 14 दिसंबर को होंगे और 17 दिसंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। राज्य में सकारात्मक माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए, डी.जी.पी. गौरव यादव ने सभी पुलिस अधिकारियों को पेशेवर पुलिसिंग और आदर्श चुनाव आचार संहिता का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। इस संबंध में विस्तृत जानकारी सांझा करते हुए, कानून एवं व्यवस्था के विशेष डी.जी.पी. अर्पित शुक्ला ने राज्य के सी.पी./एस.एस.पी. और रेंज डी.आई.जी. के साथ वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करने के बाद बताया कि पूरे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और फील्ड अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए जिलों से कम से कम 75 प्रतिशत पुलिस बल जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सभी सी.पी./एस.एस.पी. को असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने, जनता में भरोसा पैदा करने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकालने और मजबूत अंतर-राज्यीय तथा अंतर-जिला नाके लगाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों के डी.जी.पी. से पंजाब की सीमा से सटे अपने क्षेत्रों में नाके लगाने का अनुरोध भी किया गया है। उन्होंने बताया कि 13,395 मतदान केंद्रों पर 18,718 पोलिंग बूथ स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 860 को अति-संवेदनशील और 3,405 को संवेदनशील घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी सीपी और एस.एस.पी. को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार और सक्रिय गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

16 से 29 दिसंबर तक उमर खालिद को इंटरिम बेल, अदालत का बड़ा फैसला

नई दिल्ली  दिल्ली दंगा मामले में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को कड़कड़डूमा कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने गुरुवार को उनकी ओर से दायर उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने अपनी बहन के निकाह में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी। सुनवाई के बाद, अदालत ने खालिद को 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक अंतरिम जमानत प्रदान की है। खालिद की बहन का निकाह 27 दिसंबर को होना है और याचिका में 14 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की जमानत अवधि मांगी गई थी। हालांकि, अदालत ने खालिद को 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत मंजूर की है।  अदालत ने अंतरिम रिहाई के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं, जिनमें उमर खालिद सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे, किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे और केवल परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, और करीबी दोस्तों से ही मिल सकेंगे। रिहाई के दौरान खालिद अपने घर पर ही रहेंगे या केवल उन स्थानों पर जा सकेंगे जहां शादी की रस्में और कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा, उन्हें 29 दिसंबर की शाम तक सरेंडर करना होगा। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2020 में उमर खालिद को गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने फरवरी 2020 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रची थी। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। खालिद के साथ शरजील इमाम और कई अन्य लोगों पर भी इसी मामले में साजिशकर्ता होने का आरोप है। दिल्ली दंगे में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा की शुरुआत सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी, जहां कई स्थानों पर हालात बेकाबू हो गए थे। पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (जो दिल्ली पुलिस का पक्ष रख रहे हैं) ने कहा था कि 2020 की हिंसा कोई अचानक हुई सांप्रदायिक झड़प नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करने के लिए सुविचारित, सुनियोजित और योजनाबद्ध षड्यंत्र था। उन्होंने कहा था कि हमारे सामने यह कहानी रखी गई कि एक विरोध प्रदर्शन हुआ और उससे दंगे भड़क गए। मैं इस मिथक को तोड़ना चाहता हूं। यह स्वतःस्फूर्त दंगा नहीं था, बल्कि पहले से रचा गया था, जो सबूतों से सामने आएगा। मेहता ने दावा किया था कि जुटाए गए सबूत (जैसे भाषण और व्हाट्सएप चैट) दिखाते हैं कि समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की स्पष्ट कोशिश की गई थी। उन्होंने विशेष रूप से शरजील इमाम के कथित भाषण का जिक्र करते हुए कहा था कि इमाम कहते हैं कि उनकी इच्छा है कि हर उस शहर में चक्का जाम हो जहां मुसलमान रहते हैं।