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रियल एस्टेट को राहत! हरियाणा में हाईराइज बिल्डिंग के नियम बदले, डेवलपर्स को बड़ी सहूलियत

चंडीगढ़ हरियाणा में मकान बनाने से लेकर ऊंची कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी करने तक की प्रक्रिया अब पहले जैसी थकाऊ नहीं रहेगी। हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में किए गए बड़े बदलावों के बाद अब घर, दुकान, होटल, मॉल और फैक्टरी बनाने वालों को न तो महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और न ही निरीक्षण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सरकार ने अब पूरे सिस्टम को आसान करते हुए दो श्रेणियों में बांटा है – कम जोखिम और उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग। कम जोखिम वाले घरों और दुकानों का आक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) अब आर्किटेक्ट खुद जारी कर सकेगा, जबकि बड़े प्रोजेक्ट का प्रमाणन थर्ड पार्टी तकनीकी विशेषज्ञ देंगे। इसके साथ ही, एफएआर बढ़ाया गया है। सुरक्षा नियम अपडेट हुए हैं और पहली बार गरीब वर्ग के मकानों में बाथरूम और टॉयलेट का न्यूनतम आकार तय कर दिया गया है।   यहां बता देंकि लंबे समय से आम नागरिक, डेवलपर्स और उद्योगपति शिकायत कर रहे थे कि कि बिल्डिंग परमिशन और ओसी लेने में महीनों लग जाते हैं। निरीक्षण प्रक्रिया धीमी और अपारदर्शी है। नियम अस्पष्ट हैं और हर अधिकारी अलग व्याख्या करता है। छोटे उद्योग और मकान निर्माण के मामले में सिस्टम जरूरत से ज्यादा जटिल है। सरकार ने माना कि इस प्रक्रिया में सुधार जरूरी है और अब संशोधन लागू कर दिए गए हैं। अब कौन सी बिल्डिंग कैसे मंजूर होगी नई प्रणाली में अब बिल्डिंग्स को दो श्रेणियों में रखा गया है ताकि अनुमोदन प्रक्रिया सरल और तेज हो। पहली श्रेणी मंे कम जोखिम वाली बिल्डिंग्स में छोटे और बड़े प्लॉटों पर बने आम मकान (16.5 मीटर तक ऊंचाई), दुकानें – एचसीएफ, एससीओ व डीएसएस शामिल होंगे। वहीं वे उद्योग भी इसी कैटेगरी में रहेंगे, जिनकी बिल्डिंग की ऊंचाई 30 मीटर तक होगी। इन पर सरकार ने भरोसा दिखाया है। अब इनका प्रमाणन आर्किटेक्ट द्वारा सेल्फ सर्टिफिकेटेशन मोड में किया जाएगा। वहीं दूसरी दूसरी श्रेणी में उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग शामिल रहेंगी। इनमें मल्टीप्लेक्स, ऊंची आवासीय इमारतें, डेटा सेंटर, बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तथा होटल और रिसॉर्ट शामिल हैं। इनका प्रमाणन अब सरकारी अधिकारी नहीं बल्कि थर्ड पार्टी एम्पेनल्ड इंजीनियर/आर्किटेक्ट करेंगे। सरकार केवल मॉनिटर करेगी।   बाथरूम और टॉयलेट की जगह तय नायब सरकार ने पहली बार राज्य ने ईडब्ल्यूएस यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के घरों के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं। अब इन घरों में अलग टॉयलेट 0.90 वर्गमीटर से छोटा नहीं होगा। बाथरूम कम से कम 1.20 वर्गमीटर का होगा। यदि दोनों एक साथ हैं तो वह 1.80 वर्गमीटर से छोटा नहीं बनाया जा सकेगा अब और ऊंची और चौड़ी बिल्डिंगें संभव एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेसो में भी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। इसी से तय होता है कि किसी जमीन के प्लॉट पर कितनी मंजिलें या कितना निर्माण किया जा सकता है। पहले एफएआर सीमित था और बढ़ाने की गुंजाइश कम रहती थी। अब संशोधनों के बाद उद्योगों को 150 प्रतिशत से अधिक एफएआर खरीदने की सुविधा मिलेगी। डेटा सेंटरों के लिए एफएआर 500 प्रतिशत तक उपलब्ध होगा। वहीं कमर्शियल और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर के लिए एफएआर की सीमा बढ़ाई गई है। इससे उद्योगों, मॉल, होटल और डेटासेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण और निवेश की संभावना बढ़ेगी। होटल, रिसॉर्ट और बैंक्वेट हॉल्स को राहत हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। पहले निर्माण सीमित था और एफएआर कम मिलता था। अब नये नियम लागू होने से रिसॉर्ट, होटल और मोटल अधिक एफएआर खरीद सकेंगे। ऊंचाई और कवरेज सीमा में ढील दी गई है। यह बदलाव केवल प्रक्रिया आसान करने का नहीं बल्कि सुरक्षा को मजबूत करने का भी है। अब बड़ी इमारतों में फायर एनओसी अनिवार्य होगी। सोलर पैनल इंस्टॉल करने का प्रमाण-पत्र लेना जरूरी होगा। एनर्जी इफिशिएंसी स्टैंडर्ड अपनाने होंगे। गलत जानकारी छिपाने पर एक्शन सरकार ने साफ किया है अगर कोई गलत रिपोर्ट जमा करता है, नियम तोड़कर निर्माण करता है या जानबूझकर जानकारी छुपाता है तो ओसी को रद्द किया जाएगा। संबंधित इंजीनियर या आर्किटेक्ट पर कार्यवाही होगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरा सिस्टम अब ऑनलाइन होगा। कुछ भी-दबाकर नहीं रखा जा सकेगा। पहले कई लोगों की फाइलें महीनों दबाई जाती थीं। अब ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि अब हर बिल्डिंग आवेदन, स्वीकृति, ओसी और निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन ई-रजिस्टर में सार्वजनिक रूप से दिखेगी।  

प्राइमरी टीचर भर्ती में नया नियम: B.Ed. उम्मीदवारों को करना होगा 6 महीने का ट्रेनिंग कोर्स

लुधियाना स्टेट कॉसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.), पंजाब ने बी. एड. डिग्री के आधार पर नियुक्त प्राइमरी शिक्षकों की पेशेवर योग्यता पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। एस.सी.ई. आर. टी., पंजाब ने समूह जिला शिक्षा अफसरों (ए.शि.) को नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एन. आई. ओ.एस.) द्वारा करवाए जा रहे 6 महीने के' ब्रिज कोर्स' के लिए संबंधित शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा है। यह कोर्स' प्राइमरी टीचर एजुकेशन' में 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स है, जिसे ओपन और डिस्टेंस लर्निंग (ओ.डी.एल.) मोड के माध्यम से पूरा करवाया जाएगा। एस. सी.ई.आर.टी. द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन निर्देशों की हू-ब-हू पालना सुनिश्चित की जाए। उन्होने शिक्षकोंको हिदायत दी है कि वे अपने अन.आई.एस. के पोर्टल पर अपना पंजीकण समय रहते जरूर करवाए। एन.आई.ओ.एस. ने भी उम्मीदवारों को सलाहदी है कि वे आवेदन करने से पहले योग्यता मानदंडों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उनकी पालना करें। विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि य समय सीमा के भीतर सभी योग्य शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करवाया जाए। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 25 दिसंबर है।  कौन है इस कोर्स का पात्र? यह ब्रिज कोर्स विशेष रूप से उन प्राइमरी शिक्षकों के लिए अनिवार्य है जो बी.एड. डिग्री के साथ नियुक्त हुए थे। जिनकी नियुक्ति एनसीटीई की दिनांक 28 जून 2018 की नोटिफिकेशन के अनुसार हुई थी।  जो माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 अगस्त 2023 को दिए गए फैसले से पहले सेवा में आ चुके थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल मिलने से रोकने की बनायें कार्य-योजना एकल नल-जल योजना में 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण योजनाओं के संचालन एवं संधारण की करें समुचित व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में दिये निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है। वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं। विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है। ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा। बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके। महत्वपूर्ण बिन्दु     जल स्रोतों में सीवरेज का प्रदूषित जल मिलने से रोकने के लिये समुचित कार्य योजना बनाये।     जल जीवन मिशन के कार्य पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2028 तक का लक्ष्य दिया गया है।     प्रदेश में तय समय सीमा से पहले मार्च 2027 में ही जल जीवन मिशन के कार्यों को पूर्ण कर लिया जाएगा।     जल जीवन मिशन में किए गए कार्यों की अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा इंपैक्ट एनालिसिस कराएं।     प्रत्येक नागरिक को गुणवत्ता युक्त जल उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है ।     जल जीवन मिशन के तहत सरपंच, महिला समूह द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें राज्य स्तर, संभाग, जिला एवं ग्राम स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।     जल जीवन मिशन के कार्यों के संचालन एवं संधारण की समुचित योजनाएं बनाएं ताकि किसी भी स्थिति में जल की नियमित आपूर्ति हो सके।     विगत 10 सालों में जिन गांवों में जल संकट रहा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उनमें … Read more

शासकीय स्कूलों की ई-अटेंडेंस नीति पर विवाद थमा, शिक्षकों ने याचिका क्यों लौटाई?

जबलपुर प्रदेश के शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को लेकर दायर की गई याचिका बुधवार को वापस ले ली गई। याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से कोर्ट में निवेदन किया गया कि वे नए तथ्यों के साथ नई याचिका दायर करना चाहते हैं। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में जिस नियम को हवाला दिया जा रहा है, वह नई याचिका में ही दिया जा सकता है। पुरानी याचिका में जो आधार दिए गए थे, उन आधारों पर दूसरे मुकदमों के फैसले हो चुके है। दरअसल, प्रदेश सरकार के हमारे शिक्षक ई ऐप को चुनौती देते हुए प्रदेश के 27 शिक्षकों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि हमारे शिक्षक ई-एप सुरक्षित नहीं है, इससे डेटा लीक होने और साइबर फ्राड की घटनाएं सामने आई हैं।   जबलपुर निवासी शिक्षक मुकेश सिंह बरकड़े सहित विभिन्न जिलों के 27 शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हमारे शिक्षक ऐप से प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कराने में गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि सरकार यह ऐप एक निजी संस्था से चलवा रही है और वही संस्था शिक्षकों का डेटा कलेक्ट कर रही है। केंद्र सरकार के निजी डेटा कलेक्शन नियम इस पर लागू होते हैं, पर ऐप में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। शिक्षकों ने कोर्ट को यह भी बताया था कि प्रदेश में पांच-छह शिक्षकों के खातों से रुपए निकाल लिए गए और उनकी निजी जानकारी लीक हुई। कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने इसकी शिकायत करते हुए पत्र भी लिखे। डीपीआई ने इन शिकायतों को स्वीकार करते हुए माना कि कुछ शिक्षकों के साथ फ्रॉड की घटनाएं हुई हैं और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि ई-अटेंडेंस सिस्टम पहले भी सही साबित किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐप के लिए डेटा सेफ्टी सर्टिफिकेट लिया गया है और न तो सर्वर की समस्या है, न नेटवर्क की।

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों एवं शराब पर प्रभावी कार्रवाही

विगत दो दिनों में 1 करोड़ 85 लाख रुपये से अधिक की अवैध शराब एवं मादक पदार्थ जब्त, 12 तस्कर गिरफ्तार भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस ने पिछले दो दिनों में अवैध शराब परिवहन, नशे की तस्करी तथा डोडाचूरा/स्मैक/एमडी पाउडर जैसे मादक पदार्थों के विरुद्ध सघन अभियान के अंतर्गत अनेक महत्वपूर्ण कार्रवाहियां की हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस टीमों ने आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए मादक पदार्थों की बड़ी खेप, अवैध शराब और तस्करी में प्रयुक्त वाहन जब्त किए हैं। सभी कार्यवाहियों में कुल 1 करोड़ 85 लाखरुपये की संपत्ति जब्‍त की है। विभिन्न जिलों में प्रमुख कार्रवाईयाँ धार जिले में अवैध शराब तस्करी पर बड़ी कार्रवाई:धार पुलिस ने इंदौर-अहमदाबाद हाईवे पर कार्रवाई करते हुए एक ट्रक से 1499 पेटी अंग्रेजी शराब जब्त की। बरामद सामग्री और वाहन की कीमत 1 करोड़ 24 लाख 43 हजार 700 रुपएआँकी गई है। पुलिस ने ट्रक चालक बबलू पिता जियालालवरकडे और परिचालक दुर्गेश पिता शिव नरेश राजपूत, दोनों निवासी इंदौर को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। भोपाल: क्राइम ब्रांच द्वारा MD ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार:भोपाल पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नशे के विरुद्ध अपनी कार्रवाई को जारी रखते हुए ईदगाह हिल्स क्षेत्र से एक तस्कर शिफत पिता दिलशाद अहमद को गिरफ्तार किया है।उसके कब्जे से 11.05 ग्राम एमडी पाउडर (कीमत लगभग 3 लाख 45 हजार रूपए) और दो मोबाइल जब्त किए गए। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएसएक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर विवेचना जारी है। गुना पुलिस का नशा तस्करों के नेटवर्क पर लगातार प्रहार:गुना पुलिस ने 'नशा मुक्त गुना जिला' अभियान के अंतर्गत लगातार दो बड़ीकार्रवाईयाँ की हैं। कैंट थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 7.2 ग्राम स्मैक पाउडर (कीमत 72हजार रूपए) के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, मृगवास थाना पुलिस ने पहले राजस्थान के स्मैक तस्कर सोनू मीना को 104.35 ग्राम स्मैक और तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल (कीमत 11 लाख20 हजार रूपए) सहित गिरफ्तार किया। इसके मात्र 24 घंटे के भीतर ही उसके सप्लायरघीसालाल मीना निवासी मोतीपुरा, राजस्थान को भी गिरफ्तार किया। नीमच जिले में 221 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त:जिले के जावद थाना पुलिस ने नयागांव क्षेत्र में मारुति वैन से 221 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त किया। जिसकी अनुमानित कीमत 33 लाख 15 हजार रूपए है। आरोपी वैन चालक सुखदेव गुर्जर को भी गिरफ्तार किया गया है। इंदौरपुलिस की ब्राउन शुगर तस्कर पर कार्रवाई:पुलिस थाना आजाद नगर ने अवैध मादक पदार्थों की गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक ब्राउन शुगर तस्कर तनवीर उर्फ तन्नू अब्दुल गफ्फार को न्यू आरटीओ रोड क्षेत्र से गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से 13.51 ग्राम ब्राउन शुगर लगभग 1लाख 30हजार रूपए कीजब्त की गई। मुरैना और मैहर में अवैध शराब पर शिकंजा:मुरैनाके सिविल लाइन थाना पुलिस ने अवैध शराब के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करते हुए 170 पेटी अवैध देशी शराब एवं तस्करी में प्रयुक्त 01 टाटा पिकअप गाड़ी सहित कुल 10 लाख रूपएसे अधिक कीमत की सामग्री जब्त की है। वहीं मैहर पुलिस ने अवैध शराब विक्रेताओं के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए दो अलग-अलग प्रकरणों में 1लाख 12हजार रुपये मूल्य की 198 लीटर अवैध शराब जब्त की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। मध्यप्रदेश पुलिस अवैध शराब, नशे के कारोबार, तस्करी नेटवर्क और संगठित अपराध के विरुद्धजीरो टॉलेरेंसकी नीति पर निरंतर और दृढ़ता से कार्य कर रही है।इन संयुक्त कार्यवाहियों में मध्‍यप्रदेश पुलिस ने ताबड़तोड़, सटीक और साहसिक अभियानों के माध्यम से विगत दो दिनों में 1 करोड़ 85 लाख रुपये से अधिक की अवैध शराब एवं मादक पदार्थ जब्तकिए हैं। साथ ही 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 

जल आवर्धन योजना में अनियमितता बरतने पर 2 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

नगरीय प्रशासन ने जारी किये आदेश भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरीय निकायों में जल आवर्धन योजना में पाइप लाइन बिछाने के कार्य में पाई गई अनियमितताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की है। नगरीय विकास आयुक्त ने विभागीय जाँच के आधार पर 2 पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश जारी किये हैं। जाँच अधिकारी की रिपोर्ट तथा विभाग के प्रमुख अभियंता के अभिमत के आधार पर नीमच जिले की रामपुरा नगर परिषद के तत्कालीन प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी लीलाकृष्ण सोलंकी और तत्कालीन उपयंत्री ओ.पी. परमार के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किये गये हैं। इस प्रकरण से जुड़े हुए लीलाकृष्ण सोलंकी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके विरुद्ध 2 वर्ष तक पेंशन पर महँगाई राहत की 5 प्रतिशत राशि रोके जाने का निर्णय लिया गया है। जाँच में दोषी पाये गये दूसरे अधिकारी ओ.पी. परमार जुलाई-2025 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी सेवा अवधि के दौरान आर्थिक क्षति की राशि 9 लाख 25 हजार 385 रुपये उनकी सेवानिवृत्ति लाभों से वसूल कर नगर परिषद रामपुर में जमा कराई जायेगी। इसी के साथ उनकी पेंशन पर देय महँगाई राहत की 10 प्रतिशत राशि आगामी 2 वर्ष तक स्थगित करने के आदेश जारी किये गये हैं। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि नगरीय प्रशासन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमिता और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।  

यीडा का बड़ा अभियान, 4.6 हेक्टेयर (46,000 वर्ग मीटर) भूमि पर से हटाया अवैध कब्जा

मुख्यमंत्री के निर्देश पर औद्योगिक विकास और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को गति देने के लिए जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की चल रही मुहिम नोएडा  यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप बुधवार को ग्राम दनकौर (तहसील सदर, गौतम बुद्ध नगर) में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। खसरा नंबर 211 पर फैली 4.6 हेक्टेयर यानी लगभग 46,000 वर्ग मीटर बहुमूल्य सरकारी/प्राधिकरण की भूमि को पूर्णतः अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया। इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 500 करोड़ रुपये बताया गया है। यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के विशेष कार्य अधिकारी शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई कार्रवाई के दौरान मौके पर जेसीबी मशीनों के साथ पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा।  अवैध निर्माण का पूरी तरह ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान प्राधिकरण की भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई टीनशेड, कच्ची-पक्की दीवारें, झोपड़ियां, स्थायी-अस्थायी निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। इससे यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक एवं शहरी विकास के लिए आरक्षित भूमि पूरी तरह मुक्त हो गई है। शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यीडा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्राधिकरण की किसी भी भूमि पर अवैध कब्जा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसा करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और लागत वसूली के साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज होगा। विकास परियोजनाओं को मिलेगी गति शैलेंद्र सिंह ने कहा कि दनकौर में 46,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि, जिसकी कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये है, को अतिक्रमण से मुक्त कराना यीडा के संकल्प का प्रतीक है। यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि योगी सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश, अवसंरचना विस्तार और पारदर्शी प्रशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे तथा ईस्टर्न पेरिफेरल के इंटरचेंज के किसानों के 7% आबादी भूमि एवं यीडा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सरकारी व प्राधिकरण की समस्त भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना प्राथमिकता है।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यू.के.) में अत्‍याधुनिक पुलिसिंग के गुर सीख रहे हैं प्रदेश के 30 अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक

राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में जारी है भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस का "मिड कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम" (MCTP) राज्य के भावी पुलिस नेतृत्व को नई सोच, नई दिशा और आधुनिक पुलिसिंग के व्यापक दृष्टिकोण से सशक्त बना रहा है। यह कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों को समकालीन कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के अनुरूप बेहतर, उत्तरदायी और प्रभावी पुलिस नेतृत्व के लिए तैयार कर रहा है। राज्य पुलिस सेवा के 30 अधिकारियों का मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम का शुभारंभ 27 नवंबर को मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक श्री मोहम्मद शाहिद अबसार के मुख्य आतिथ्य में किया गया, इस अवसर पर अकादमी के उपनिदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल भी उपस्थित रहे। चार हफ्ते से भी अधिक अवधि का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के चार संस्थानों में आयोजित किया गयाहै। राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का यह पांचवां मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें उन्हें पुलिस से संबंधित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य से परिचित कराया जाएगा। बारह वर्ष का सेवाकाल पूर्ण कर चुके राज्य पुलिस सेवा के कुल 30 पुलिस अधिकारी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इन अधिकारियों ने 27 नवंबर से 29 नवंबर तक मध्यिप्रदेश पुलिस अकादमी में  प्रशिक्षण प्राप्तं किया। इसके बाद 01 से 02 दिसंबरतक आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में तथा 04 से 06 दिसंबर तक नेशलन लॉ यूनिवर्सिटी नई दिल्लीढ में प्रशिक्षण प्राप्तम किया। जिसमें सोशल लेजिसलेशन, ई-गवर्नेंस, पब्लिक ऑर्डर एवं विक्टिमोलॉजी के साथ-साथ अन्य विभागों से समन्वय तथा इससे जुड़े अधिनियम आदि का प्रशिक्षण दिया गया।  दिनांक 08 दिसंबर से यह प्रशिक्षण कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यूके) में जारी है जहां प्रशिक्षण के अतिरिक्तभ ब्रिटिश पुलिस संस्थानों का भ्रमण कराया जाएगा।  इस दौरान क्राईम हार्म इंडेक्सा, प्रीडिक्टिव पुलिसिंग, महिलाओं के विरूद्ध अपराध आदि विषयों की बारीकियां सिखाईं जाएंगी। अंत में 30 दिसंबर को डी ब्रीफिंग के साथ प्रशिक्षण का समापन होगा।  

खजुराहो केबिनेट में बुंदेलखंड को हजारों करोड़ की मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगातें: मंत्री राजपूत

भोपाल खजुराहो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बुंदेलखंड के लिए केबिनेट बैठक का दिन स्वर्णिम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर को महत्वपूर्ण विकास कार्यों की सौगातें देकर सागर के विकास की नई इबारत लिखी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि केबिनेट में बुंदेलखंड एवं सागर के लिए हजारों करोड़ की सौगातें दी हैं, जिससे सागर विकास के नये आयामों को छुएगा। यहां के युवाओं को रोजगार से जोड़कर विकास की नई कहानी लिखी जायेगी, वहीं पर्यटन के क्षेत्र में नया इतिहास रचने की घोषणा भी हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में सागर में 608.93 हेक्टेयर भूमि पर 25 हजार करोड़ की लागत से नया उद्योग क्षेत्र स्थापित किया जायेगा। इससे 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं दूसरी ओर नौरादेही अभयारण्य में जुलाई माह में 4 चीतों को बसाया जायेगा। इससे क्षेत्र में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि सागर से दमोह फोरलेन सड़क, छतरपुर तथा दमोह में नये मे‍डिकल कॉलेज के लिये नये पदों का सृजन किया जायेगा। साथ ही बीना में 100 बिस्तरीय अस्पताल बनेगा। इससे सागर विकास की ऊँचाइयों तक पहुँचेगा। मंत्री श्री राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सागर तथा बुंदेलखण्ड के लिये दी गई सौगातें विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगी। 25 हजार करोड़ से विकसित होगा नया औद्यौगिक क्षेत्र मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उद्योगों के लिए भी सागर को विशेष पैकेज प्रदान किया गया है। इसके तहत रिछोड़ा के पास 25 हजार करोड़ की लागत से नया औद्यौगिक क्षेत्र विकसित किया जायेगा, जिसमें लगभग 30 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। मसवासी ग्रंट औद्योगिक क्षेत्र के लिये स्वीकृत विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज में भूमि टोकन शुल्क मात्र एक रुपये प्रति वर्गमीटर, किराया और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूर्ण छूट एवं बिजली दरों में रियायत शामिल है। जुलाई माह में आयेंगे नौरादेही में 4 चीते मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कूनो में चीता लेकर आये थे तो पूरे देश को बड़ी खुशी हुई थी और अब बुंदेलखंड में पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. यादव जुलाई माह में नौरादेही अभयारण्य में 4 चीते छोड़ेंगे, यह हमारे लिए गर्व की बात है। इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी सागर जिले को बड़ी उपलब्धि है। नौरादेही अभयारण्य को प्रदेश का तीसरा चीता आवास के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। यह क्षेत्र में पर्यावरणीय संरक्षण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की सकारात्मक पहल है। सागर-दमोह फोरलेन निर्माण को 2059 करोड़ मंजूर मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि केबिनेट बैठक में सागर-दमोह मार्ग को 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ विकसित करने के लिए 2059.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। 76.680 किमी लंबे इस मार्ग का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के अंतर्गत किया जाएगा। परियोजना में 13 अंडरपास, 3 फ्लाईओवर, 9 मिडियन, 1 आरओबी तथा 13 पुल-पुलिया निर्माण का प्रावधान है। भूमि अर्जन और अन्य कार्यों पर 323.41 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इससे सागर दमोह भोपाल जबलपुर जाने वालों के लिए आवागमन सुलभ होगा। 100 बेड का होगा बीना अस्पताल, पद सृजन को मंजूरी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए बीना सिविल अस्पताल की क्षमता 50 से 100 बिस्तर तक बढ़ाने और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी।

नौकरी का मेगा पिटारा तैयार! हरियाणा के इस शहर में बनेगा देश का बड़ा ट्रांसपोर्ट हब

चंडीगढ़  हरियाणा के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को ध्यान में रखते हुए सरकार कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. इसी कड़ी में सरकार हरियाणा के एक जिले में मॉडर्न और डायनामिक ट्रांसपोर्ट हब बना रही है, जिससे न सिर्फ शहर के आने-जाने वालों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि दिल्ली-NCR और आस-पास के राज्यों से आसान कनेक्टिविटी भी मिलेगी। इस जिलें में प्रस्तावित मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब में बस अड्डा, मैट्रो और रैपिड रेल (RRTS) की सेवाएं एक ही परिधि में मिलेंगी. इससे यात्रियों को अलग-अलग स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.   नए बस अड्डे के लिए जाट जोशी गांव में 9.43 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। यहां आधुनिक बस स्टैंड, वर्कशॉप, पार्किंग, रैन बसेरा, वेटिंग हॉल और अन्य यात्री सुविधाओं के निर्माण के लिए पैमाइश और निशानदेही का काम शुरू हो चुका है। यह बस अड्डा न सिर्फ बस संचालन का केंद्र होगा, बल्कि यात्रियों को आरामदायक माहौल और बेहतर सेवाएं  भी प्रदान करेगा।   जाट जोशी से लगभग 300 मीटर की दूरी पर सेक्टर-7 मोड़ के पास रैपिड रेल (RRTS) स्टेशन प्रस्तावित है. इसके साथ ही दिल्ली मैट्रो के फेज-5 के तहत बैलो लाइन का विस्तार नाथूपुर, कुंडली होते हुए सेक्टर-7 तक करने की योजना पर भी काम आगे बढ़ रहा है। इस विस्तार में करीब 26.5 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर और 21 नए स्टेशन शामिल होंगे। अनुमान है कि इस रूट से प्रतिदिन लगभग 50,000 यात्री सफर कर सकेंगे।   इन तीनों सेवाओं बस, मैट्रो और रैपिड रेल के एक ही क्षेत्र में उपलब्ध होने से न केवल ये जिला,बल्कि इसके आसपास के इलाकों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। दिल्ली और एनसीआर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों का समय बचेगा और कई बार परिवहन के साधन बदलने की समस्या भी समाप्त होगी। सोनीपत में कनेक्टिविटी बढ़ने से निवेश, रियल एस्टेट, रोजगार और विकास के नए अवसर खुलेंगे. केएमपी, केजीपी और यूईआर-2 जैसे प्रमुख मार्गों के साथ मैट्रो और रैपिड रेल नेटवर्क के जुड़ने से यह क्षेत्र तेजी से एक नियोजित और उभरते शहर के रूप में विकसित हो रहा है।निवेशकों और रियल एस्टेट कंपनियों की रुचि भी पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है।    नई परिवहन सुविधाएं लागू होने के बाद सोनीपत न केवल दिल्ली का उपनगर रहेगा, बल्कि एक विकसित, सुविधायुक्त और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार आधुनिक शहर के रूप में उभरेगा। ये परियोजनाएं हरियाणा के सोनीपत जिले को चीन और जापान की तरह एक आधुनिक मल्टी-मॉडल परिवहन केंद्र में बदल देंगी, जिससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।