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भोपाल में 2.5 साल से चल रहा था कच्ची शराब का खेल, ड्रोन ने खोली 12 भट्टियों की पोल

 भोपाल सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद राजधानी भोपाल में अवैध शराब के ठिकानों पर आबकारी टीम ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। बैरसिया के ग्राम तरावली कलां में लगभग ढाई साल से अवैध रूप से हाथ भट्टियों के माध्यम से कच्ची शराब बनाई जा रही थी। सूचना मिलने पर आबकारी और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापामार कार्रवाई की। पहली बार ड्रोन की मदद से शराब के अवैध ठिकानों की तलाशी ली गई, जिसमें 12 भट्टियां बरामद की गईं, लेकिन आरोपित तस्कर मौके से फरार हो गए। इस कार्रवाई में कुल 127 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे।  

जमुई नाबालिग छात्रा मामले में सियासत तेज, BJP ने कहा- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

पटना जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना को लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है। विपक्ष के सरकार पर हमले के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा है कि बेटियों के सम्मान और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में सरकार की नीति स्पष्ट है, न ढिलाई होगी और न समझौता। जमुई मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है और तीन आरोपितों की गिरफ्तारी की सूचना सामने आई है। ‘अपराधी कोई भी हो, कानून से ऊपर नहीं’ सरावगी ने कहा कि जमुई की घटना दुखद और पीड़ादायक है। उनके अनुसार, पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने कहा कि बिहार में कानून का राज कायम है और अपराधी कोई भी हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष जांच और कानून के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पीड़िता को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई की बात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना और उसके परिवार के साथ खड़ा होना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कानून के तहत कड़ी सजा की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की बात कही। पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी भी गठित की है और अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। मंत्री बोले- पुलिस अपना काम कर रही बिहार के मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने भी जमुई घटना पर सरकार की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, किन धाराओं में कार्रवाई होगी और किसके खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाया जाएगा, यह पुलिस का काम है और पुलिस अपना काम कर रही है। ‘सरकार को जानकारी मिलते ही एक्शन’ मंत्री ने कहा कि जैसे ही सरकार को घटना की जानकारी मिली, कार्रवाई शुरू कर दी गई और पुलिस ने भी कदम उठाया। उन्होंने पुराने पटना के शिल्पी-गौतम मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन करना पड़ा था, जबकि अब सरकार की ओर से तत्काल कार्रवाई की गई। यह बयान सरकार की ओर से जमुई मामले में त्वरित कार्रवाई को रेखांकित करने के रूप में आया है। कांग्रेस के प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक दबाव उधर, जमुई मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरने की तैयारी की है। पार्टी ने 22 सितंबर को राज्य के जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा है। कांग्रेस ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़िता को न्याय की मांग उठाई है। पुलिस कार्रवाई के साथ बयानबाजी भी तेज जमुई मामले में पुलिस कार्रवाई के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा जहां सरकार की त्वरित कार्रवाई और महिला सुरक्षा को लेकर अपना पक्ष रख रही है, वहीं विपक्ष घटना को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।  

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। पारंपरिक उल्लास और आत्मीय वातावरण में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों से भेंट कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है। माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि तीज का पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना का अवसर है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी माताओं-बहनों और उनके परिवारों के सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों के बीच तीज मिलन का अवसर अत्यंत सुखद और आत्मीय है। मुख्यमंत्री निवास में भी तीज के अवसर पर प्रदेशभर से आई बहनों के साथ पर्व का उल्लास साझा करने का अवसर मिला था। हमारी परंपराओं की यही खूबसूरती है कि वे हमें परिवार और समाज से जोड़ती हैं तथा आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती हैं।  सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को मिला है सर्वोच्च सम्मान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। हमारे वेदों, पुराणों और सामाजिक परंपराओं में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा का संदेश निहित है। हमारी संस्कृति कहती है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”, अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां परिवार की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम, त्याग और आशीर्वाद से ही परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार से सशक्त समाज तथा समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस योजना से माताओं-बहनों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव उन्हें विशेष संतोष देता है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के साथ बच्चों की पढ़ाई, बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं। कोई बहन सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर बेटी का भविष्य संवार रही है तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर अपने हुनर को आजीविका में बदल रही है। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के लिए अवसर, संसाधन और आवश्यक सहयोग मिले। जब हमारी माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो परिवार मजबूत होगा और पूरे प्रदेश की प्रगति को नई गति मिलेगी। 13.85 लाख लखपति दीदियां बनीं महिला सशक्तिकरण की नई पहचान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि माताओं-बहनों को स्थायी आजीविका, कौशल और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुखद तस्वीर है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से मिले आर्थिक संबल और बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी न केवल परिवारों को समृद्ध बना रही है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को देश-दुनिया में मिलेगी नई पहचान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट लोककला, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यहां की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी ताकत है। इसे सहेजने के साथ नई पीढ़ी और देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 650 करोड़ रुपए की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण और शूटिंग की संभावनाओं का विस्तार होगा। स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार तथा प्रतिभा प्रदर्शन के नए अवसर तैयार होंगे और प्रदेश के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों का अमूल्य योगदान है। हमारे कलाकार अपनी प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सुगंध और यहां की परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहेगी। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर मुख्यमंत्री  साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके 15 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण और विकास … Read more

SIM किसी और को देना पड़ सकता है भारी, जेल के साथ 50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान

रायपुर. अगर अपने पहचान दस्तावेज से सिम लेकर दूसरे व्यक्ति को बेचना या किराये पर दिया है, तो सावधान हो जाएं. दूरसंचार विभाग की ओर से सख्त एडवाइजरी जारी कर मोबाइल यूजर्स को सतर्क किया है. टेलिकॉम पहचान और सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी के गलत इस्तेमाल को गंभीर अपराध बताया है. फर्जी आईडी से सिम खरीदने-बेचने या मोबाइल के आईएमईआई (आईएमईआई) नंबर से छेड़छाड़ करने पर 3 साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. दूरसंचार विभाग के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों के जरिए SIM कार्ड लेना, किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन हासिल करना या अपने नाम पर जारी SIM को धोखाधड़ी के लिए किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराना कानूनी अपराध है. ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. यह सख्त एडवाइजरी छत्तीसगढ़ में सामने आए बड़े साइबर फ्रॉड के बाद जारी किया गया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों में 410 से ज्यादा लोगों के दस्तावेज का इस्तेमाल कर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम निकाला जाना सामने आया है. इन सिम का इस्तेमाल बाद में साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा. एमपी के मैहर निवासी रामकृष्ण कुशवाहा को पुलिस ने दबोचा था. वह 4 साल पहले रायपुर आकर गुढ़ियारी में रह रहा था. उसने एक युवती से शादी की और उसके नाम से 3 कंपनियों की सिम बेचने लगे. वह सिम लेने के लिए आने वाले ग्राहकों का बायोमैट्रिक मशीन पर दो बार अंगूठा लगावाकर दो सिम जारी करता था. इसमें से एक ग्राहक और दूसरा अपने पास रखता था. आरोप है कि ऐसे 410 से अधिक सिम को  गोवा में साइबर ठगों को बेच दिया गया. एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ 9 सिम भारत में आमतौर पर किसी एक व्यक्ति अपने नाम पर सिर्फ 9 मोबाइल कनेक्शन रह सकता है. कुछ राज्यों में नियम अलग हैं, जैसे जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा 6 है. सरकार ने 23 अगस्त से डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म में एक नया फीचर भी जोड़ा है, जिसके जरिए तय सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन वाले मामलों की पहचान के लिए फोटो समेत अन्य विवरणों का मिलान किया जा सकेगा. इस व्यवस्था को लागू करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को अपने सिस्टम को सरकारी प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है.

मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स योजना के तहत 140 विधानसभा क्षेत्रों में होगा खेल परिसरों का निर्माण- 962 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति

बुनियादी ढांचे, कृषि विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से लगभग 13 हजार 790 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स योजना के तहत 140 विधानसभा क्षेत्रों में होगा खेल परिसरों का निर्माण- 962 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर के लिए 13 पदों के सृजन को स्वीकृति राजगढ़ की सुठालिया सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ की स्वीकृति राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति ग्राम न्यायालय योजना के संचालन के लिए 554 करोड़ 61 लाख रूपये की स्वीकृति 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी म.प्र. विधिक सहायता तथा विधिक सलाह बोर्ड की स्थापना की निरंतरता के लिए 524 करोड़ की स्वीकृति परिवार न्यायालयों की स्थापना के संचालन के लिए 1 हजार करोड़ की स्वीकृति उच्च न्यायालय (भारित) की निरंतरता के लिए 2,015.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति वाणिज्यिक कर विभाग की 6 योजनाओं के लिए की निरंतरता के लिए 969 करोड़ 87 लाख रुपए की स्वीकृति मैहर, पांदुर्णा और सिंगरौली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के कार्यालय स्थापित करने के लिए 18 पदों की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिये गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश में बुनियादी ढांचे, कृषि विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से लगभग 13 हजार 790 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में खिलाड़ियों और खेलों के विकास, किसानों, युवाओं, न्यायिक व्यवस्था और आम नागरिकों से जुड़े कई दूरगामी व जनहितैषी निर्णय लिए गए। प्रदेश की खेल और युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसरों के निर्माण व संचालन के लिए 962 करोड़ 50 लाख रूपये की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। इन खेल परिसरों का नाम मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स होगा। 16वें वित्त आयोग के तहत उच्च न्यायालय (भारित), परिवार न्यायालयों, ग्राम न्यायालयों और विधिक सहायता बोर्ड के सुचारू संचालन के लिए 4,000 करोड़ रूपये से अधिक की वित्तीय निरंतरता मंजूर की गई। इसके अलावा वाणिज्यिक कर विभाग की 6 प्रमुख योजनाओं, शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में 13 निरंतरता के साथ ही नवीन पदों तथा नवगठित जिलों मैहर, पांढुर्णा एवं सिंगरौली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के नए कार्यालयों व पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई। सिंचाई क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी पांच वर्षों 2026-2031 के लिए नीमच की महत्वाकांक्षी जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 4,197 करोड़ 58 लाख रूपये तथा राजगढ़ की सुठालिया एवं पार्वती रिन्सी परियोजनाओं के लिए क्रमशः 262 करोड़ 63 लाख रूपये और 507 करोड़ 23 लाख रूपये की निरंतरता की स्वीकृत दी गई, जिससे 88 हजार हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी। इसके साथ ही प्रदेश की भविष्य की बिजली जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए 2800 मेगावॉट ताप विद्युत क्रय करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। राजगढ़ की सुठालिया सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने राजगढ़ जिले की सुठालिया सिंचाई परियोजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उ‌द्देश्य राजगढ़ जिले के 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति द्वारा सिंचाई क्षमता विकसित करना है। नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की आगामी 5 वर्षो 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरन्तरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ 58 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। जावद नीमच परियोजना एक दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई योजना है, जिससे सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत सिंचाई तकनीक (दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई) के माध्यम से पानी की बचत और सिंचाई क्षमता में वृद्धि करते हुये क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना हैl राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की आगामी 05 वर्षो यानि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर राजगढ़ जिले की 48,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है। 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मंत्रि-परिषद् ने ऊर्जा विभाग की एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावाट ताप विद्युत जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में मौजूदा निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। उल्लेखनीय है कि मंत्रि-परिषद् द्वारा 24 जनवरी 2025 को लिए निर्णय के अंतर्गत 900 मेगावाट ताप विद्युत क्रय से संबंधित अनुमोदन उक्त निविदा के निरस्त हो जाने के फलस्वरूप वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय में समाहित माना जाएगा। एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावाट ताप विद्युत जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में मौजूदा/निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने की स्वीकृति दी है। प्रकरण में नियामक आयोग के अनुमोदन एवं आदेश के अनुसार समस्त आगामी कार्यवाही के लिए प्रबंध संचालक एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी को अधिकृत किया गया है। 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसर निर्माण और संचालन के लिए मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स योजना के अंतर्गत 962 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग … Read more

अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता: मुख्यमंत्री

नियुक्ति पाने वालों से पैसे मांगने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा: सीएम योगी अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता: मुख्यमंत्री पिछले एक सप्ताह में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले, हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, सैफई सिंडिकेट गिनती रहे: सीएम योगी जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था और दुनिया शक की निगाहों से देखती थी, वे आज उपदेश देते फिर रहे: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित 3567 अभ्यर्थियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र चयनितों में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पीजीटी) और सहायक अध्यापक (टीजीटी) के पद शामिल 2015-16 में जिस अभ्यर्थी से मांगे गए थे आठ लाख रुपये, उसी अभ्यर्थी का सपना हुआ साकार: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा- शिक्षक केवल नौकरी नहीं, नए भारत के निर्माण की आधारशिला तैयार करने का दायित्व संभालें लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता। इसीलिए उत्तर प्रदेश पुलिस में अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को आयोग और बोर्डों की दिशा-दशा सुधारने का दायित्व दिया गया है। पहले युवाओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया जाता था। लेकिन, अब नियुक्ति पाने वाले किसी भी अभ्यर्थी से पैसे की मांग करने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा। आज का कार्यक्रम केवल नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा से जुड़े चारों स्तंभ, सहायक अध्यापक, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य को एक साथ जोड़ने वाला विशेष अवसर है। यहां 3,567 लोगों का चयन कर उनके हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने का महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है।  हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं और पिछले एक सप्ताह में वह 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित कर चुके हैं। पिछले नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। हमने सैफई सिंडिकेट से कहा है कि हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं। सीएम ने तंज कसा कि यदि गिनती नहीं आती हो तो शिवपाल जी के सानिध्य में बैठ जाएं, बहुत अच्छी गिनती सीख जाएंगे।  2015-16 में घूसखोरी का शिकार बने युवा का सपना साकार मुख्यमंत्री ने हाल में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले एक नौजवान के इंटरव्यू का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस युवक की आंखों में आंसू भरे थे और उसने बताया कि 2015-16 में भी उसने इस पद के लिए आवेदन किया था। उससे आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। वह खेत बेचकर पैसा लेकर आया, लेकिन तब तक उससे अधिक पैसा देने वाला दूसरा व्यक्ति आ गया और वह नौकरी से वंचित रह गया। आज उसका सपना साकार हुआ है और जिस पद के लिए उसने आवेदन किया था, उसी पद पर उसे नियुक्ति मिल गई है। पूरी प्रक्रिया निरस्त की गई और उस युवा को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ।  किसी ने लेनदेन की बात की तो जेल में सड़ेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा सभी शिक्षकों को दी है। यह सुविधा शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी दी गई है। बेसिक शिक्षा में रसोइयों, शिक्षामित्रों और अन्य संबंधित कर्मियों को भी इसका लाभ दिया गया है, जिससे वे निश्चिंत होकर कार्य कर सकें। किसी भी शिक्षक को ज्वाइनिंग में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यदि किसी प्रबंधक की कोई जिज्ञासा है तो वह शासन के समक्ष उपलब्ध कराए, लेकिन नियुक्ति पत्र प्राप्त होने के बाद यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से किसी ने लेनदेन की बात की तो उसे जेल में सड़ना पड़ेगा। हमें सख्त सख्त कार्रवाई पर मजबूर होना पड़ेगा। अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ साल में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले छह महीने के अंदर एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। जब लोग परिणाम पूछते हैं तो मैं कहता हूं कि परिणाम यह है कि जो उत्तर प्रदेश नौ वर्ष पहले बीमारू राज्य कहा जाता था, आज भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बना हुआ है। बॉटम फाइव से टॉप-थ्री में आया है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता मिली है। यही युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा है। यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा किया गया था सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी के नौजवानों के लिए पूरी दुनिया खुली है। जिन लोगों ने उनके सामने पहचान का संकट खड़ा किया था, वे यहां नौकरी देते नहीं थे और दुनिया ‘यूपी वाला’ कहकर हमारे युवाओं को शक की निगाहों से देखती थी। जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था, वही लोग आज उपदेश देते फिर रहे हैं। आज नियुक्ति पाने वालों में बहुत से ऐसे होंगे जिन्होंने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी होगी। कई ऐसे भी होंगे जिन्हें पहले अवसर नहीं मिला होगा। यदि किसी ने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी है तो स्वाभाविक रूप से दस वर्ष पहले उसकी उम्र 13 से 16-17 वर्ष के बीच रही होगी। उस उम्र में बच्चा मां-बाप पर ज्यादा आश्रित रहता है और माता-पिता उसकी हर जरूरत पूरी करने में योगदान देते हैं। ऐसे बच्चों को यह बताने की आवश्यकता है कि 2017 के पहले क्या होता था। परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र उसे दिया जाता था, जिसने फॉर्म तक नहीं भरा होता था। यह अराजकता, बेईमानी और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा थी। एक शिक्षक 100 छात्रों से संवाद करे तो 3,567 शिक्षक 3.5 लाख से अधिक बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एक शिक्षक प्रतिवर्ष 100 छात्रों के साथ इंटरेक्शन करता है तो 3,567 शिक्षक एक वर्ष में 3.5 लाख से अधिक बच्चों के साथ संवाद और उनका मार्गदर्शन करेंगे। बच्चों को गाइड करना, उनका मार्गदर्शन करना ही नए भारत की आधारशिला है। भारत … Read more

योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को वैज्ञानिक जांच की धार, मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर 75 जिलों की पुलिस होगी अपग्रेड

यूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा, ‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन मैनेजमेंट योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को वैज्ञानिक जांच की धार, मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर 75 जिलों की पुलिस होगी अपग्रेड छह बैच में प्रशिक्षित 600 अफसरों में से चुने गए 32 विशेषज्ञों को फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग लखनऊ उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ अब और सख्ती की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को अब वैज्ञानिक जांच की धार देने की कवायद शुरू की गई है। अपराध के बाद घटनास्थल पर छूटे साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस के ‘स्पेशल 32 अफसर’ तैयार किए जा रहे हैं। छह बैच में 100-100 अफसरों को 40 दिन का प्रशिक्षण दिए जाने के बाद चयनित इन 32 अधिकारियों को अब फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट में मास्टर ट्रेनिंग दी जा रही है। आगे इनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सभी 75 जिलों में पुलिस की क्राइम सीन मैनेजमेंट क्षमता को मजबूत करने में किया जाएगा। अब वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल को सुरक्षित कर छोटे से छोटे साक्ष्य की पहचान के जरिए जांच को मजबूत आधार मिलेगा। इसके साथ ही अपराधियों के खिलाफ तेजी से सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट आफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में 32 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनिंग के जरिए विशेष रूप से तैयार कर रहा है। प्रशिक्षण में कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता भी परखी जाएगी। 600 की ट्रेनिंग से चुने गए ‘स्पेशल अफसर’ छह बैच में 100-100 पुलिस अधिकारियों को पहले ही 40 दिन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया। अब इन्हीं प्रशिक्षित अधिकारियों में से चयनित टॉप 32 अफसरों को फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में विशेषज्ञता के अगले स्तर तक ले जाया जा रहा है। यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि यह स्पेशल ट्रेनिंग उन पुलिस अधिकारियों को दी जा रही है, जो प्रशिक्षण के दौरान टॉप पर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार पुलिस अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता को और बेहतर किया जाएगा। इसके लिए कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर उनकी क्षमता का परीक्षण भी किया जाएगा। क्राइम सीन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत : डॉ. जीके गोस्वामी  डॉ. गोस्वामी ने कहा कि आपराधिक जांच में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए क्राइम सीन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से यूपीएसआईएफएस ने हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग की पहल की है। फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग में व्यावहारिक अनुभव यानी एक्सपीरिएंशियल लर्निंग पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के लेक्चर के साथ हैंड्स-ऑन सेशन के जरिए अधिकारियों को विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। हर सुराग की होगी वैज्ञानिक पड़ताल प्रशिक्षण में घटनास्थल से तलाशी और जब्ती के नियम, क्राइम सीन नोट्स, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, पहचान और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर फोकस किया जा रहा है। फिंगरप्रिंट और खून के नमूने जैसे साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से पहचानने और सुरक्षित रूप से एकत्र करने की बारीकियां भी सिखाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य यह है कि घटनास्थल पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्य अनदेखे न रह जाएं और उन्हें सही तरीके से संरक्षित कर आगे की विवेचना में इस्तेमाल किया जा सके। इससे जांच को साक्ष्य आधारित मजबूत आधार मिलने की संभावना बढ़ेगी। दिन हो या रात, हर क्राइम सीन की तैयारी प्रशिक्षण में दिन और रात के अलग-अलग समय तथा विभिन्न स्थानों पर क्राइम सीन समेत व्यावहारिक जानकारी भी दी जा रही है। इसके अलावा वास्तविक घटनास्थल पर आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को फील्ड वर्क का महत्व समझाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार किया जा रहा है, जहां अपराध के साक्ष्य नष्ट करने, साक्ष्य छिपाने या गलत जानकारी देने का प्रयास किया जा सकता है। इसके जरिए घटनास्थल को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर है। ‘स्पेशल 32’ बनेंगे विशेषज्ञ कड़ी छह बैच में प्रशिक्षित 600 अफसरों के बाद अब 32 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनिंग देने से प्रशिक्षण व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी है। इनकी विशेषज्ञता का लाभ आगे जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट से जुड़े अन्य पुलिस अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने में लिया जा सकेगा। इस पूरी कवायद का बड़ा उद्देश्य अपराध की जांच में घटनास्थल, सुराग, वैज्ञानिक साक्ष्य और विवेचना के बीच की कड़ी को मजबूत करना है। साक्ष्यों का बेहतर संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से संग्रह जांच को बेहतर आधार देगा और न्यायिक प्रक्रिया में तथ्य प्रस्तुत करने की गुणवत्ता को भी मजबूत करेगा। जीरो टॉलरेंस को मिलेगी वैज्ञानिक जांच की धार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ पुलिस की जांच व्यवस्था को भी लगातार मजबूत करने पर जोर है। प्रदेशवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था में गंभीर अपराधों के घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और उनकी वैज्ञानिक जांच की क्षमता महत्वपूर्ण है। ‘स्पेशल 32’ इसी व्यवस्था की विशेषज्ञ कड़ी होंगे। इनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इनके अनुभव और विशेषज्ञता का इस्तेमाल व्यापक पुलिस प्रशिक्षण में किया जाएगा, जिससे 75 जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट और वैज्ञानिक विवेचना की क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।

चंपारण्य बनेगा राष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, ₹73.42 करोड़ से होगा विकास

चंपारण्य में ₹73.42 करोड़ के महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम – राजेश अग्रवाल रायपुर  छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित “वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति  CSMC ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं  संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु वल्लभाचार्य जी से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा। परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

वायरल वीडियो से खुला जमुई कांड का राज, पुलिस मुठभेड़ में मुख्य आरोपी नंदन यादव घायल

  जमुई जमुई में 19 सितंबर की शाम नाबालिग छात्र और छात्रा के साथ बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान शुरू की. वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान के लिए पुलिस ने कई सुराग जुटाए. जमुई एसपी विश्वजीत दयाल के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद आरोपियों की तलाश तेज हुई. पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई. वीडियो और दूसरी जानकारी के आधार पर कई लोगों की पहचान की गई. नंदन यादव को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया गया और वह लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर था. पुलिस को कुंदर बराज में छिपे होने की सूचना मिली नंदन की तलाश में पुलिस अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही थी. इसी दौरान मंगलवार तड़के एसआईटी को सूचना मिली कि नंदन यादव कुंदर बराज इलाके में छिपा हुआ है. इसके बाद पुलिस टीम ने कुंदर बराज के आसपास पहुंचकर घेराबंदी शुरू की. घेराबंदी के बाद क्या हुआ? पुलिस के मुताबिक, टीम ने इलाके को घेरा तो नंदन ने वहां से निकलने की कोशिश की. इस दौरान उसने पुलिस टीम पर हमला किया और भागने लगा. इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की. इसी फायरिंग में नंदन यादव के पैर में गोली लगी. उसके साथ मौजूद हरेराम यादव भी घायल हुआ और उसका पैर टूट गया. दोनों को पुलिस ने पकड़ लिया और इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में दोनों का इलाज पुलिस की निगरानी में चल रहा है. नंदन तक पहुंचने में वीडियो बना बड़ा सुराग इस पूरे मामले में वायरल वीडियो जांच की शुरुआत का सबसे अहम सुराग बना. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पहले पीड़ितों को ट्रेस किया, फिर वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान शुरू हुई. इसके बाद नंदन समेत फरार आरोपियों की तलाश के लिए छापेमारी चलती रही. नंदन के कुंदर बराज में होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने वहां ऑपरेशन चलाया. पुलिस को उसकी सटीक लोकेशन किस व्यक्ति या किस तकनीकी माध्यम से मिली. इसकी पूरी जानकारी अधिकारियों की ओर से अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. अब जांच में आगे क्या होगा? मुठभेड़ के बाद पुलिस अब मामले में शामिल बाकी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि घटना में कौन-कौन शामिल था और किसकी क्या भूमिका थी. पुलिस ने वीडियो और दूसरे सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान की है. इसलिए आगे की जांच में इन सभी कड़ियों को जोड़ा जाएगा.  

केंद्रीय टास्क फोर्स व प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की समीक्षा : कैबिनेट सचिव ने राज्यों के साथ की वीडियो कॉन्फ्रेंस

रायपुर केन्द्रीय कैबिनेट सचिव  टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और केंद्रीय टास्क फोर्स से जुड़े प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से इस समीक्षा बैठक में भाग लिया और राज्य में प्रमुख केन्द्रीय परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स राजमार्ग, रेलवे लाइन्स, पावर ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी प्रमुख ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की गई।   बैठक में राज्यों के मुख्य सचिवों को केंद्रीय योजनाओं के तहत प्राप्त फंड्स का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित कर उपयोगिता प्रमाण-पत्र केंद्र सरकार को त्वरित भेजने और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की प्रगति की नियमित समीक्षा विभागीय स्तर पर करने के संबंध में चर्चा हुई। टास्क फोर्स की बैठक में केन्द्र सरकार के विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी विभागीय योजनाओं की राज्यों में हो रही प्रगति के बारे में मुख्य सचिवों से विस्तार से चर्चा की।