samacharsecretary.com

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में बिजली बिल भुगतान की सुविधा शुरू

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को डाकघरों और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के अधिकृत प्रतिनिधि (डाकिये) के माध्‍यम से बिना किसी अतिरिक्‍त शुल्‍क के बिजली बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराई गयी है। अब बिजली उपभोक्‍ताओं को यह सरल और सुलभ भुगतान की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नजदीकी डाकघर में मिलना शुरू हो गई है। डिजिटल और सुरक्षित तरीके से डाकघर के माध्‍यम से बिल भुगतान की सुविधा शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपलब्‍ध है। गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को प्रदत्त सेवाओं का विस्तार करते हुए बिल भुगतान की व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माध्‍यम से बिजली बिल भुगतान की विशेष सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किया गया है। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहायता प्राप्त चैनलों के माध्यम से बिजली बिल संग्रहण को सक्षम बनाते हुए बिजली उपभोक्‍ताओं को बिना अतिरिक्‍त प्‍लेटफॉर्म चार्ज के बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराना है। अब बिजली उपभोक्ता इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के विस्तृत नेटवर्क और डाकिया/ग्रामीण डाक सेवक की सहायता से भी अपने घर के पास या घर बैठे ही आसानी से बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे। 

सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार होंगी गतिविधियां

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है। हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।  

डिजिटल सुविधा से पेंशनरों को राहत: अब चंद रुपये खर्च कर, घर बैठे बनवाएं जीवन प्रमाण पत्र

दमोह भारतीय डाक विभाग ने पेंशनधारकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब वरिष्ठ नागरिकों को जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बैंक या डाकघर के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डाक विभाग की नई सेवा के तहत पोस्टमैन स्वयं पेंशनधारक के घर पहुंचकर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र तैयार करेगा। इसके लिए मात्र 70 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। यह सुविधा बुजुर्गों को सुरक्षित व आरामदायक वातावरण में घर बैठे प्रमाण पत्र उपलब्ध कराकर बड़ी राहत प्रदान कर रही है। प्रमाण पत्र बनने के बाद यह सीधे ऑनलाइन माध्यम से संबंधित पेंशन प्रदाता संस्थान को भेज दिया जाता है, जिससे अलग से जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। सेवा के सुचारू संचालन हेतु इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक दमोह शाखा के प्रबंधक लक्ष्मीनारायण पाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।   जानकारी व सहायता के लिए मोबाइल नंबर 9893115877 जारी किया गया है। इस सेवा के अंतर्गत 81 वर्षीय कुलदीप कुमार चौबे (एमपीआरडीसी से सेवानिवृत्त) का जीवन प्रमाण पत्र ब्रांच पोस्ट मास्टर ब्रजेश पटेल ने उनके घर जाकर बनाया। इसी प्रकार लीला देवी विश्वकर्मा, गोपाल और नीमा बाई नामदेव के प्रमाण पत्र भी उनके घर पर ही तैयार किए गए।

रायपुर: छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण क्षेत्र में मिली बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि

रायपुर : छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में राज्य के 12 जिलों को किया सम्मानित प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार होगा प्रेरणादायी: मुख्यमंत्री साय रायपुर जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर छत्तीसगढ़ के 12 जिलों रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, राजनांदगांव, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, बालोद, बलरामपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग और सूरजपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आज 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 अवार्ड समारोह में राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु ने इन जिलों को सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देशभर में विशेष पहचान बनाई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार के अभिनव प्रयासों और जनभागीदारी ने जल संचयन की दिशा में नए आयाम हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री ने इन जिलों के नागरिकों और जिला प्रशासन को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जल संचयन के प्रति लोगों में आई यह चेतना जल के समुचित उपयोग को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार प्रेरणादायी होगा। रायपुर जिले को जल संचय जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। देशभर के नगर निगमों में रायपुर नगर निगम प्रथम स्थान पर रहा, जबकि पूर्वी जोन कैटेगरी 01 में रायपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा। रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर सामुदायिक सहभागिता को जल संचय का व्यापक अभियान बनाया। रायपुर नगर निगम द्वारा 33,082 कार्य और जिला प्रशासन द्वारा 36,282 कार्य किए गए हैं। बालोद जिले को केटेगरी 01 में बेस्ट परफॉर्मिंग के लिए पहला स्थान प्राप्त हुआ है, साथ ही 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। यहां 92,742 नई जल संरचनाएँ निर्मित की गई। राजनांदगांव जिले को केटेगरी 01 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 2 करोड़ रूपए की राशि प्रदान की गई है। यहां 58,967 जल संचय के कार्य जनभागीदारी से पूर्ण किए गए हैं। महासमुंद जिले को कैटेगरी 2 अंतर्गत प्रथम स्थान के लिए सम्मानित किया है। यहां 35,182 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को कैटेगरी 2 के तहत दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 01 करोड़ रूपए की पुरस्कार राशि दी गई है। यहां 30,927 संरचनाओं का निर्माण किया गया है। गरियाबंद जिला को केटेगरी-2 में देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ रूपए की राशि मिली है। यहां 26,025 सतही जल के बेहतर रख-रखाव के कार्य किए गए हैं। बिलासपुर को केटेगेरी 03 में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 25 लाख रूपए की पुरस्कार राशि मिली है। यहां 21,058 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य किया गया है। दुर्ग जिले को केटेगरी-03 में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 5010 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। बलरामपुर जिले को केटेगरी-03 में 6वें स्थान के लिए सम्मानित किया गया है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 8644 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। धमतरी जिले को केटेगरी 3 में 8वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 7674 जन संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। रायगढ़ जिले को केटेगरी 3 में द्वितीय स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 19088 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। सूरजपुर जिले को केटेगरी 3 में 12वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है तथा यहां 5797 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे छतरपुर के चंद्रनगर स्थित पांच सितारा राजगढ़ पैलेस होटल का उद्घाटन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव छतरपुर के चंद्रनगर में करेंगे पांच सितारा होटल राजगढ़ पैलेस का शुभारंभ पन्ना जिले को देंगे 82.62 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात छतरपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 19 नवम्बर को छतरपुर जिले के चन्द्रनगर में द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस का उद्घाटन और पन्ना जिले के शाहनगर में विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। चंद्रनगर के पांच सितारा लग्जरी होटल से प्रदेश सहित जिले में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। देश के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक भी हमारी समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहर और वन्य प्राणी पर्यटन की ओर आकर्षित होंगे। राज्य सरकार द्वारा राजगढ़ पैलेस के नवीनीकरण और जीर्णोंद्धार कर उसे पांच सितारा होटल के रूप में संचालित करने के लिए ओबेरॉय समूह को लीज पर दिया गया है। द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस चंद्रनगर के पास मानगढ़ और मनियागढ़ की पहाड़ियों के मध्य हर-भरे वातावरण के बीच स्थित है। बुन्देला राजवंश द्वारा निर्मित 350 साल पुराना यह महल भारतीय स्थापत्य और पारंपरिक बुंदेलखंड की विशेषताओं का मिश्रण है। द ओबेरॉय समूह द्वारा विकसित राजगढ़ पैलेस होटल में महलनुमा रेस्टोरेंट, भव्य बैंक्वेट हॉल सहित 66 भव्य कक्ष उपलब्ध हैं। यह कॉर्पोरेट आयोजन, डेस्टीनेशन वेडिंग्स, सामाजिक समारोह आदि के लिए आदर्श स्थान के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पन्ना जिले के पवई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत शाहनगर के खेल परिसर आमा में आयोजित हितग्राही सम्मेलन में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यहाँ 82.62 करोड़ के 14 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे।  

बस परमिट नियमों में होगा बड़ा बदलाव, 899 बसों पर लटकी तलवार, समय सीमा के साथ जांच के आदेश

भोपाल राज्य सरकार बस परमिट नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। अब किसी भी बस को उसके रूट के लिए उतनी ही अवधि का परमिट दिया जाएगा, जितनी उसकी निर्धारित आयु है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी बस का संचालन निर्माण तिथि से 15 वर्ष तक ही संभव है, तो परमिट भी अधिकतम 15 वर्ष तक का ही होगा। वर्तमान व्यवस्था में परमिट पांच-पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी किए जाते हैं, जिसके कारण कई मामलों में बसों के परमिट 15 वर्ष से भी अधिक अवधि के लिए वैध दिखाई देते हैं। जबकि राज्य के भीतर बस संचालन की अधिकतम सीमा 15 वर्ष और अंतरराज्यीय संचालन की सीमा 10 वर्ष तय है।   हाल ही में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर उन 899 बसों की सूची भेजी है जिनके परमिट 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी किए गए हैं। सचिव ने आशंका जताई है कि ये बसें संभवतः अभी भी चल रही होंगी, इसलिए इनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पत्र के बाद परिवहन आयुक्त कार्यालय ऐसे नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत बसों के परमिट उनकी अधिकतम आयु की अवधि के भीतर ही सीमित रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, परमिट वाहन मालिक के नाम पर जारी होता है, जिसमें बस नंबर और रूट का उल्लेख रहता है। पांच वर्ष का परमिट इसलिए दिया जाता था ताकि बस की 15 वर्ष की अवधि पूरी होने पर मालिक उसी रूट पर अनुमति लेकर दूसरी बस संचालित कर सके और नया परमिट लेने की आवश्यकता न पड़े। लेकिन अब नई व्यवस्था में यह समयसीमा बस की अधिकतम आयु से आगे नहीं जाएगी।  

ध्यान दें यात्रीगण! घने कोहरे की चेतावनी के बीच 32 ट्रेनें 1 दिसंबर से रद्द

अंबाला  सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई क्षेत्रों में सुबह के समय घना कोहरा छाने लगा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंबाला रेल मंडल तथा उत्तरी रेलवे ने अपनी तैयारियां समय से पहले ही पूरी कर ली हैं। अंबाला रेल मंडल ने 1 दिसंबर से लगभग 32 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही 20 ट्रेनों के संचालन की अवधि में भी कटौती की गई है। जानकारी देते हुए अंबाला रेल मंडल के सीनियर डीसीएम नवीन कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुविधा को देखते हुए स्टेशन लेवल पर इंतजाम किए गए हैं। वहीं, हर बार लास्ट मोमेंट पर ट्रेन कैंसिल होती थी, लेकिन इस बार पहले से ही शेड्यूल जारी कर दिया है कौन सी ट्रेन रद्द रहेंगे। इस बारे में जानकारी देते हुए अंबाला रेल मंडल के सीनियर डीसीएम नवीन ने बताया कि बदलते मौसम को देखते हुए लगभग 32 ट्रेनों को रद्द किया गया है और 20 ट्रेनों के संचालन में भी कटौती की गई है। पहले अक्सर ये होता था की लास्ट मोमेंट पर ट्रेन कैंसिल होती थी, जिसकी वजह से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था लेकिन अब पहले से ही कई ट्रेनों को रद्द किया गया है। वहीं, यात्रियों की सुविधा को देखते हुए स्टेशन लेवल पर भी पूरे इंतजाम किया जाते हैं।  

बिहार विधानसभा का अध्यक्ष के लिए प्रेम कुमार और तारकिशोर आगे

पटना बिहार विधानसभा का अध्यक्ष बनने के लिए एनडीए के घटक दलों में लंबी कतार है। जदयू भी अध्यक्ष पद पर दावा कर रहा है, लेकिन भाजपा निश्चिंत है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद का नाम आगे चल रहा है। कुमार नौंवी बार गया शहर से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। निवर्तमान मंत्रिमंडल में सहकारिता मंत्री हैं। वे अति पिछड़ी जाति से आते हैं। तारकिशोर प्रसाद पांचवीx बार कटिहार से भाजपा उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव जीते हैं। वे 2020-22 के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे हैं। सामाजिक समीकरण के हिसाब से वे वैश्य बिरादरी के हैं, जिन्हें भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। इनके अलावा दानापुर के भाजपा विधायक रामकृपाल यादव को भी इस पद के योग्य माना जा रहा है।रामकृपाल केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं।वे उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें लोकसभा, राज्यसभा, विधान परिषद और विधानसभा सदस्य बनने का अवसर मिला है। वे पटना नगर निगम के डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं। अगर यह पद जदयू के हिस्से में जाता है तो 17वीं विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव को अध्यक्ष पद पर बिठाया जा सकता है। सहज और मृदुभाषी नरेंद्र नारायण यादव मधेपुरा जिला के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। नेतृत्व का हरेक निर्णय स्वीकार्य: प्रेम कुमार भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार ने कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व का हरेक निर्णय उन्हें स्वीकार्य है। विधानसभा अध्यक्ष बनने के प्रश्न पर मंगलवार को उन्होंने कहा-नेतृत्व अगर निर्देश देता है तो वे इस भूमिका को सहर्ष स्वीकार करेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा उनसे मिलने पहुंचे थे। सिन्हा ने कहा कि प्रेम कुमार ने पार्टी की ओर से दी गई हरेक भूमिका का निर्वहन गंभीरता से किया किया है। कृषि और सहकारिता मंत्री के रूप में उनकी सेवा यादगार है।

अयोध्या में लहराया राजवंश का प्रतीक केसरिया ध्वज, ‘ऊँ’ और सूर्य चिन्ह बना आकर्षण

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर लगने वाले दिव्य केसरिया ध्वज को तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने राम राज्य की आदर्श परिकल्पना, समाज में निर्भय वातावरण के निर्माण, और 'राम सबके और सबके राम' की भावना का जीवंत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि इस ध्वजारोहण का उद्देश्य परंपरा का निर्वाह करने के साथ-साथ सनातन संस्कृति के उस विराट स्वरूप का पुनर्स्मरण है, जो राष्ट्र को एकजुट करता है। चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन में आमंत्रित अतिथियों में से लगभग तीन हजार केवल अयोध्या जनपद के हैं, जबकि शेष अतिथि पूरे उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि यह कार्यक्रम अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर और भारतीय आस्था के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बनने जा रहा है। श्रीराम मंदिर का ध्वजारोहण धार्मिक आस्था के उत्सव के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपरा, राजवंशीय गौरव और सनातन मूल्यों का अद्वितीय संगम है। यह अयोध्या की धरती से राष्ट्रभर में एक नई प्रेरणा प्रसारित करेगा। उन्होंने ध्वज पर अंकित प्रतीकों का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि केसरिया रंग ज्वाला, प्रकाश, त्याग और तप का प्रतीक है। मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर के ऊपर 30 फीट का बाहरी ध्वजदंड लगाया गया है, जिससे ध्वज कुल 191 फीट की ऊंचाई पर लहराएगा। उन्होंने बताया कि केसरिया ध्वज पर अंकित सूर्य प्रभु श्रीराम के सूर्यवंश का द्योतक है, जबकि 'ऊँ' परमात्मा का प्रथम नामाक्षर है, जो चेतना और शाश्वत सत्य का प्रतिनिधित्व करता है। ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष के संबंध में भी उन्होंने विस्तृत जानकारी दी। यह वृक्ष अयोध्या के राजवंशीय चिह्न के रूप में प्रतिष्ठित रहा है और इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण व हरिवंश पुराण दोनों में मिलता है। ज्ञानीजन इसे पारिजात और मंदार के संयोग से बना बताते हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार यह संसार का पहला हाइब्रिड पौधा था। परंपरा में वर्णित है कि इसी कोविदार वृक्ष पर चढ़कर लक्ष्मण ने भरत को सेना सहित वन की ओर आते देखा था।

पंजाब के यात्रियों की बल्ले-बल्ले! नकोदर हाईवे अब दिल्ली–कटरा एक्सप्रेसवे से होगा कनेक्ट

पंजाब  जालंधर जिले के कंग साहबू से करतारपुर तक 29 किलोमीटर का सफर करने वाले लोग अब नई हाइवे कनेक्टिविटी का बड़ा फायदा उठा सकेंगे।  दरअसल, भारत माला प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए जा रहे अमृतसर दिल्ली कटरा एक्सप्रैस वे का काम कई राज्यों व जिलों में अंतिम चरण पर है, जो नए साल पर शुरू हो जाएगा।  नकोदर हाईवे को सीधे दिल्ली–कटरा एक्सप्रेस-वे से जोड़ दिया जाएगा। इससे अमृतसर की दूरी काफी कम हो जाएगी और सफर सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा। ऐसे में अगर कोई दिल्ली, पटियाला, लुधियाना से फिल्लौर होते हुए कंग साहबू की तरफ जाएगा और अमृतसर रूट पकड़ेगा तो 75 किलोमीटर का सफर बच जाएगा। यह लाइन एयरपोर्ट रोड से कनेक्ट है ताकि लोगों को एयरपोर्ट और श्री दरबार साहिब अमृतसर में पहुंचने में आसानी हो। फिल्लौर से जालंधर नहीं आना पड़ेगा अब फिल्लौर के रास्ते जालंधर आने की ज़रूरत नहीं होगी। नया रूट कंग साहब होते हुए सीधे नकोदर हाईवे से जुड़ जाएगा। इससे ट्रैफिक की परेशानी भी कम होगी। 80% काम पूरा, 2026 तक पूरा प्रोजेक्ट तैयार नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने बताया कि हाईवे का लगभग 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट 2026 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा। 16 गांवों को बड़ा फायदा फिल्लौर के पास से निकलने वाले नए हाइवे के कारण आस-पास के 16 गांवों को अच्छी कनेक्टिविटी मिलेगी। इनमें शामिल हैं: गन्ना पिंड, अकालपुर, प्रतापबुरा, बकापुर, मोवाई, नागरा, रूपोवाल, कंदोला, खुर्द, फरवाला, सैदोवाल, रारा, गुमताली, नवां पिंड, बीर पिंड, लितड़ा, मीरपुर, इन्हें भी होगा फायदा: लुधियाना, जालंधर, नकोदर, करतारपुर के साथ ही दिल्ली और चंडीगढ़ से आने वाले लोगों को फायदा होगा।