samacharsecretary.com

मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंदिरों में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-शांति की प्रार्थना

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कवर्धा में सिद्धेश्वर महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए की प्रार्थना रायपुर, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज कवर्धा के ऐतिहासिक रानी सागर तालाब परिसर स्थित आस्था के पावन केंद्र और कवर्धा राज परिवार न्यास द्वारा निर्मित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर एवं संकट मोचन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक किया। उन्होंने भगवान सिद्धेश्वर महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगल कामना की। इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल यहां की प्राकृतिक सुंदरता से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी है। भोरमदेव और कवर्धा क्षेत्र आस्था, इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का संरक्षण करते हुए इन्हें आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित हों। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती आस्था और संस्कृति की विविध परंपराओं से समृद्ध है। इन परंपराओं को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। भोरमदेव कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा के लिए कवर्धा पहुंचे मंत्री पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए कवर्धा प्रवास पर हैं। इस दौरान परियोजना से जुड़े कार्यों की वर्तमान स्थिति, निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति तथा आगामी चरण की कार्ययोजना को लेकर समीक्षा की जाएगी।  केंद्र की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना से भोरमदेव को मिल रहा नया आयाम केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145.99 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत है। भोरमदेव क्षेत्र छत्तीसगढ़ की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। कॉरिडोर के विकास से क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक समग्र पर्यटन अनुभव से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भोरमदेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाला पर्यटक मंदिरों की स्थापत्य कला, क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति को एक साथ अनुभव कर सकता है। भोरमदेव कॉरिडोर का विकास इस समृद्ध विरासत को बेहतर ढंग से सामने लाने का अवसर है। स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे अवसर भोरमदेव कॉरिडोर के विकास से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। होटल, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों को पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का लाभ मिलेगा। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ना भी है। स्थानीय संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जाएगें। आस्था और विकास का बनेगा सुंदर संगम रानी सागर तालाब परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। भोरमदेव जैसे स्थलों का विकास आस्था, संस्कृति, इतिहास और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें, पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और स्थानीय लोगों को पर्यटन के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों।

केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की त्वरित पहचान पर जोर

केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की त्वरित पहचान पर जोर   ICAR-CIFRI और मत्स्य विभाग की संयुक्त कार्यशाला में किसानों को मिला वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन  रायपुर  छत्तीसगढ़ के जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के माध्यम से मछली उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ एवं ICAR-CIFRI, बैरकपुर (कोलकाता) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। 8 एवं 9 सितंबर को रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान, रोकथाम और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों पर किसानों एवं अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में ICAR-CIFRI के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने केज कल्चर एवं तालाबों में मछलियों में होने वाले रोगों के लक्षण, बचाव तथा वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50-60 केज कल्चर किसानों, 50-60 पारंपरिक तालाब मत्स्य पालकों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यशाला में फील्ड स्तर पर रोगों की त्वरित जांच, डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार, मैदानी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जलाशयों एवं मछलियों के स्वास्थ्य संबंधी डेटाबेस तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया। एकीकृत प्रबंधन व्यवस्था को राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। कार्यक्रम में संचालक मत्स्य पालन श्री एन.एस. नाग, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा श्री आनंद निषाद, उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा डॉ. लखन लाल धीवर, उप-संचालक मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान सुश्री बीना गड़पाले तथा सहायक मत्स्य अधिकारी श्री विकास कुमार साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जलाशयों में पहुंचकर वैज्ञानिकों ने किया केज कल्चर का निरीक्षण कार्यशाला के उपरांत 10 सितंबर को ICAR-CIFRI के वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने राज्य के जलाशयों का मैदानी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थापित केज कल्चर की स्थिति का जायजा लिया तथा मौके पर ही मत्स्य पालक किसानों को मछलियों के स्वास्थ्य, रोग प्रबंधन एवं बेहतर उत्पादन के संबंध में व्यावहारिक सुझाव दिए। राज्य में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह मेहनत, हौसले और अवसर ने बदली तस्वीर, खेत से व्यवसाय तक महिलाओं ने लिखी ‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी स्व-सहायता समूहों से मिला साथ, बचत और ऋण से आजीविका को मिला विस्तार रायपुर,  कभी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बन रही हैं। किसी ने खेत में नई फसल उगाकर आय का रास्ता बनाया, किसी ने सब्जी उत्पादन को व्यवसाय का रूप दिया तो किसी ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया। यह बदलाव केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता बढ़ने की कहानी भी है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं इन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से उपलब्धि में बदल रही हैं। यही प्रयास उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं और अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान बना रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही ‘सेवा की कहानियां’ में इन महिलाओं का सफर इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं जरूरतमंद तक पहुंचती हैं और उसके प्रयासों को सही दिशा मिलती है, तो बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि परिवारों और जीवन में दिखाई देता है। छोटी बचत से बड़े सपनों तक ग्रामीण परिवारों में सीमित आय के बीच महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक मुख्य रूप से घर संभालने तक सीमित रही। छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार को दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था। बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को संगठित होने, नियमित बचत करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया। नियमित बचत ने आर्थिक अनुशासन बढ़ाया तो समूह की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं के लिए ऋण और आजीविका गतिविधियों के रास्ते खोले। किसी ने खेती को चुना, किसी ने सब्जी उत्पादन शुरू किया, किसी ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया तो किसी ने अपनी रुचि और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप आय का साधन अपनाया। छोटी शुरुआत धीरे-धीरे बड़े बदलाव में बदलती गई। घर की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब अपनी आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। खेत से बाजार तक पहुंची कल्पना सिंह की आत्मनिर्भरता अम्बिकापुर विकासखंड की कल्पना सिंह की कहानी इस बदलाव की सशक्त मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और खीरे की खेती से शुरुआत की। इसके साथ ही वे बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित मौसम के अनुरूप विभिन्न सब्जियों और फसलों की खेती करती हैं। कल्पना के लिए यह बदलाव केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं रहा। पहले घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने में संकोच महसूस करने वाली कल्पना आज बैंकिंग, बाजार और कृषि से जुड़े कार्य स्वयं आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। खेती से मिली आय ने उनके भीतर यह विश्वास मजबूत किया है कि यदि मेहनत के साथ सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिला अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खेत से बाजार तक का उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक आत्मविश्वास की भी कहानी है। मजदूरी से अपने व्यवसाय तक पहुंचीं मति बाई उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की मति बाई की कहानी भी संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। कभी उनके परिवार की आजीविका मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने राधा स्व-सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना। समूह के माध्यम से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत, निरंतरता और परिवार के सहयोग से शुरू हुआ यह काम आज उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। मति बाई के अनुसार मुर्गी पालन से उन्हें सालाना लगभग दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। आज वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। उनके बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीद भी मजबूत हुई है। मति बाई की कहानी बताती है कि आजीविका का एक छोटा अवसर भी यदि महिला की मेहनत और निरंतर प्रयास से जुड़ जाए तो वह परिवार की आर्थिक दिशा बदल सकता है। ‘लखपति दीदी’—आय के साथ बढ़ा आत्मसम्मान ‘लखपति दीदी’ की पहचान इन महिलाओं के लिए केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है। यह उस यात्रा का प्रतीक है जिसमें उन्होंने निर्भरता से आत्मनिर्भरता, संकोच से आत्मविश्वास और अभाव से अवसर की ओर कदम बढ़ाए हैं। आज ये महिलाएं परिवार के खर्च में योगदान दे रही हैं, बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं तथा भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आय अर्जित करने के साथ उनके निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे बैंक जा सकती हैं, ऋण संबंधी प्रक्रिया समझ सकती हैं, बाजार में अपने उत्पाद बेच सकती हैं और अपनी मेहनत से अर्जित आय के उपयोग का निर्णय स्वयं ले सकती हैं। यह परिवर्तन महिला सशक्तिकरण का वह स्वरूप है, जिसका असर घर से लेकर समाज तक दिखाई देता है। बिहान ने खोले आजीविका के अनेक रास्ते बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपनी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। कृषि एवं सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, दुग्ध व्यवसाय, सिलाई और अन्य आयमूलक गतिविधियां उनके लिए आमदनी बढ़ाने के अवसर बन रही हैं। स्व-सहायता समूह महिलाओं को केवल आर्थिक सहयोग नहीं देते, बल्कि साथ चलने का भरोसा भी देते हैं। समूह की बैठकों में महिलाएं अपने अनुभव साझा करती हैं और एक-दूसरे से सीखती हैं। प्रशिक्षण से उन्हें नई जानकारी मिलती है, जबकि बैंक और बाजार से जुड़ाव उनके निर्णय लेने की क्षमता … Read more

ग्वालियर-भिंड रेलखंड पर चलाया गया टिकट जांच अभियान

ग्वालियर-भिंड रेलखंड पर चलाया गया टिकट जांच अभियान बिना टिकट /अनियमित टिकट एवं अनाधिकृत सामान लेकर यात्रा करने वालों में मचा हड़कंप ग्वालियर            मंडल रेल प्रबंधक झाँसी श्री अनिरुद्ध कुमार के मार्गदर्शन व वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अमन वर्मा के निर्देशन में बिना टिकट यात्रियों की रोकथाम ग्वालियर-भिंड रेलखंड पर ट्रेनों में बिना टिकट/अनियमित यात्रा / गंदगी फ़ैलाने वालों के खिलाफ सघन टिकट जांच बहियाँ चलाया गया I जांच अभियान के अंतर्गत 17 यात्रियों से 9735 रूपए जुर्माना स्वरुप  रेल राजस्व वसूल किया गया I सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्री आर के वर्मा  के नेतृत्व में चलाए गए उक्त जांच अभियान में मुख्य वाणिज्य निरीक्षक दिग्विजय सिकरवार, टिकट निरीक्षक कृष्ण कुमार, दौलत राम, ब्रिजेन्द्र कुमार तथा रेल सुरक्षा बल से के एल मीना द्वारा अहम् योगदान प्रदान किया गया तथा  । इस प्रकार के जांच अभियान निरंतर जारी रहेंगे । अतः यात्रियों से अनुरोध है कि वह उचित यात्रा टिकट लेकर एवं निर्धारित सीमा से अधिक सामान को बुक कराकर ही यात्रा करे तथा रेल परिसर में धुम्रपान एवं गंदगी न फैलाए ।

लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

​"लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम ‘सक्षम योजना’ से धमतरी की सफीना बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल रायपुर,         ​हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो तंगहाली की बेड़ियों को तोड़कर सफलता का नया इतिहास रचा जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है धमतरी जिले के मगरलोड विकासखण्ड स्थित सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती सफीना बानो ने। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामने आई सफीना की कहानी केवल संघर्ष की दास्तान नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को हराकर आत्मनिर्भर बनने की एक जीवंत मिसाल है। ​जब थम सी गई थी जिंदगी        ​पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद सफीना के सामने जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। बुजुर्ग माँ की देखभाल, मासूम बच्ची का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्च—सब कुछ अकेले उनके कंधों पर आ गया। न रोजगार का कोई जरिया था और न ही कोई पैतृक संपत्ति। आर्थिक तंगी से घिरीं सफीना को एक समय लगा कि उनकी जिंदगी अब यहीं ठहर गई है।         ​दिशा बदलने वाला 'सक्षम' सहारा ​घने अंधेरे के बीच उम्मीद की किरण बनकर आईं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक। सफीना ने उनसे अपना दर्द साझा किया। पर्यवेक्षक ने सफीना को ढांढस बंधाया और विभाग की ‘सक्षम योजना’ की जानकारी दी। सफीना के भीतर आगे बढ़ने का जज्बा देखकर उन्होंने खुद घर पहुँचकर 2 लाख रुपये के स्वरोजगार ऋण के लिए आवेदन करवाया।        ​दिसंबर 2025 में ऋण स्वीकृत हुआ और यह राशि सफीना के लिए सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के सपनों की पहली उड़ान साबित हुई। छोटे कदम से बड़ा मुकाम: मुर्गी पालन से ईंट-भट्ठा तक        ​ऋण राशि मिलते ही सफीना ने मुर्गी और खरगोश पालन से अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया। उनकी दिन-रात की मेहनत और लगन रंग लाई। देखते ही देखते फार्म में सैकड़ों मुर्गियाँ हो गईं और बिक्री से अच्छी आय होने लगी।       ​सफीना यहीं नहीं रुकीं; अपनी व्यावसायिक समझ को बढ़ाते हुए उन्होंने ईंट-भट्ठा निर्माण का काम भी शुरू किया। आज वे अपनी माँ की दवाइयों, घर के खर्च और बच्ची की पढ़ाई को बिना किसी परेशानी के पूरा कर रही हैं। ​"पहले बेचारी कहते थे, आज काम माँगने आते हैं"        ​आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ-साथ सफीना के आत्मविश्वास में जो बदलाव आया, वह सबसे बड़ा परिवर्तन है। अपनी इस यात्रा पर भावुक होते हुए सफीना कहती हैं कि दीदी, पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम माँगने आते हैं। ​समाज के लिए नई मिसाल       ​सफीना की यह सफलता दर्शाती है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति को सरकारी योजनाओं का सही संबल और मार्गदर्शन मिलता है, तो कोई भी राह असंभव नहीं रहती। कभी परिस्थितियों के आगे बेबस दिखने वाली महिला आज दूसरों को रोजगार दे रही है। उनकी यह प्रेरक यात्रा प्रदेश की हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही है।

आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक  सोनिबाई की संघर्ष और सफलता की कहानी ​रायपुर      प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में विकास की बयार हर जरूरतमंद के द्वार तक पहुँच रही है। राज्य सरकार की सुशासन नीति से दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के ऐसे हज़ारों परिवारों के सपने साकार हो रहे हैं, जो वर्षों से एक पक्की छत की आस में संघर्षरत थे। ऐसी ही एक सुखद और जीवन बदलने वाली कहानी नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत भरंडा की रहने वाली श्रीमती सोनिबाई पति श्री संनु राम की है।       ​सोनिबाई और उनका परिवार सालों से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के दिनों में टपकती छत, कड़कड़ाती ठंड में ठिठुरती रातें और तेज आंधियों का डर—हर मौसम उनके लिए एक नया इंतहान लेकर आता था। कच्चे घरौंदे में असुरक्षा और परेशानियों के बीच बीतते हर दिन के साथ एक सुरक्षित और पक्के मकान की आस धुंधली पड़ती जा रही थी। ​लेकिन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सोनिबाई के परिवार के लिए एक नया सवेरा और वरदान बनकर आई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन की सहज प्रक्रिया से उनका पक्के घर का सपना हकीकत में बदल गया। जब घर की पक्की नींव पड़ी और छत ढली, तो केवल एक मकान ही नहीं खड़ा हुआ, बल्कि उस परिवार का आत्मसम्मान और नए कल का भरोसा भी सुदृढ़ हुआ।       ​अपनी खुशी और अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सोनिबाई कहती हैं कि पुराने दिनों की तकलीफें याद कर आज भी मन सिहर उठता है। टपकती छत और कड़कड़ाती ठंड में नींद उड़ जाती थी। अब पक्का मकान मिलने से जिंदगी से असुरक्षा का साया हमेशा के लिए हट गया है। यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।         ​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे। ग्राम भरंडा की सोनिबाई की यह सफलता की कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उस अटूट संकल्प की प्रतीक है, जो हर नागरिक को सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल जीवन देने के लिए कटिबद्ध है।

बाढ़ से बिहार की 2000 KM ग्रामीण सड़कें प्रभावित, 3800 चापाकल-नल योजनाएं भी डूबीं

 पटना  बिहार में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने के साथ ही तबाही की तस्वीर सामने आने लगी है। बाढ़ से सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण कार्य विभाग को 17 बाढ़ प्रभावित जिलों से मिली प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 1050 से अधिक ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 2000 किलोमीटर है। इन सड़कों की मरम्मत में शुरुआती आकलन के मुताबिक करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। ग्रामीण कार्य विभाग के निर्देश पर जिलों से ग्रामीण सड़कों की स्थिति की दैनिक रिपोर्ट मंगाई जा रही है। फिलहाल बड़ी संख्या में सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। पानी उतरने के बाद ही पूरी तरह हालात स्‍पष्‍ट होंगे। ग्रामीण सड़कों की स्थिति सीधे गांवों के प्रखंड, बाजार और अन्य प्रमुख इलाकों से संपर्क पर असर डालती है, इसलिए क्षतिग्रस्त सड़कों को जल्द दुरुस्त करना चुनौती होगी। भागलपुर में सबसे अधिक सड़कें प्रभावित प्रारंभिक रिपोर्ट में भागलपुर और पटना में ग्रामीण सड़कों पर बाढ़ का सबसे अधिक असर बताया गया है। भागलपुर में 151 और पटना में 140 ग्रामीण सड़कें पानी में डूबी पटना जिले में अकेले दानापुर क्षेत्र में 44 सड़कें प्रभावित बताई गई हैं। अन्य जिलों में भोजपुर की 134, सारण की 101, समस्तीपुर की 86, वैशाली की 82, कटिहार की 60, लखीसराय की 54, बेगूसराय की 49, मुंगेर की 48 और खगड़िया की 36 ग्रामीण सड़कें पानी की चपेट में हैं। इसी तरह अरवल की 21, सहरसा की 20, मधेपुरा की 18, पूर्णिया की 18, पश्चिम चंपारण की 16 और अररिया की 10 ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं। पानी उतरने के बाद सामने आएगा वास्तविक नुकसान विभाग के अनुसार अभी अधिकांश आंकड़े प्रारंभिक हैं। कई सड़कें लगातार पानी में डूबी हुई हैं, इसलिए उनके वास्तविक नुकसान का आकलन फिलहाल संभव नहीं है। पानी पूरी तरह उतरने के बाद सड़क की सतह, पुल-पुलिया, संपर्क मार्ग और अन्य संरचनाओं को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसके बाद मरम्मत के लिए आवश्यक राशि और काम की प्राथमिकता तय की जाएगी। 3800 चापाकल और नल-जल योजनाएं भी प्रभावित बाढ़ ने ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। पिछले महीने आई बाढ़ के बाद 75 प्रखंडों की 307 पंचायतों में करीब 3800 चापाकल और नल-जल योजनाएं प्रभावित होने की जानकारी मिली है। आपदा प्रबंधन विभाग को पीएचईडी से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई चापाकल कई दिनों तक पानी में डूबे रहने के कारण खराब हो गए हैं। ऐसे स्थानों पर नए चापाकल लगाने की जरूरत पड़ सकती है। पेयजल योजनाओं को दुरुस्त करने और नए चापाकल लगाने में करीब 24.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पानी कम होते ही प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति योजनाओं की मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा। भागलपुर में 760 चापाकल प्रभावित पेयजल व्यवस्था में सबसे अधिक नुकसान भागलपुर पीएचईडी प्रमंडल  में बताया गया है। यहां 760 चापाकल प्रभावित हुए हैं। इसके बाद खगड़िया में 450, पटना पूर्वी और पश्चिमी प्रमंडल में 294, किशनगंज में 206, हाजीपुर में 136 और बेगूसराय में 134 चापाकल खराब होने की जानकारी है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब विभागों के सामने सड़क संपर्क बहाल करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को जल्द सामान्य करने की चुनौती है।  

नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

​सेवा का संकल्प, विकास की धार नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली ​रायपुर        जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।         ​पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।         ​यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।       ​घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।

राजस्थान में ‘नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क’ की पहल, CS ने परिवादियों से किया सीधा संवाद

जयपुर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन केन्द्र का निरीक्षण कर सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न जिलों के परिवादियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली वीडियो कॉल के माध्यम से आमजन से सीधे संवाद मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल के तहत एक अभिनव पहल की गई है। इसके माध्यम से प्रशासनिक सचिव प्रतिदिन वीडियो कॉल के जरिए आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं तथा उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस नवाचार से सरकार को आमजन की समस्याओं के स्वरूप और उनकी वास्तविक कठिनाइयों को सीधे समझने में भी मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प है कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो, जिससे उनका संतुष्टि स्तर बढ़े तथा समस्याओं का प्रभावी, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि 181 हेल्पलाइन के माध्यम से शासन और आमजन के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रशासन अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और आमजन के प्रति तत्पर बन सके। ‘नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क’ की दिशा में बढ़ रहा राजस्थान संपर्क मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार के सुशासन के संकल्प को साकार करने के लिए राजस्थान संपर्क को नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से आमजन और शासन के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाकर शिकायतों के त्वरित, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि को सुनिश्चित करें मुख्य सचिव ने सभी जिला स्तरीय एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसामान्य से जुड़े विभागों से संबंधित परिवादों के निस्तारण में परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन परिवादों के निस्तारण के बाद परिवादी की असंतुष्टि सामने आती है, उन पर जिला स्तरीय एवं विभागीय उच्चाधिकारी विशेष ध्यान दें तथा अपने स्तर से उनके संतोषजनक समाधान का प्रयास करें। साथ ही, परिवादों के निराकरण के दौरान सामने आने वाली कमियों को जानकर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि आमजन को अधिकतम राहत मिल सके। परिवादियों से किया सीधा संवाद मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परिवादियों से स्वयं संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने बीकानेर के अशोक कुमार, जयपुर के मोहनलाल तथा टोंक के आसाराम सहित अन्य परिवादियों से बातचीत की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परिवादियों की समस्याओं और उनके निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग दिनेश कुमार, आयुक्त, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग हिमांशु गुप्ता सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

नशे और शॉर्टकट से दूर रहें युवा, नितिन नवीन ने मेरठ में किया आह्वान

मेरठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यूपी के मेरठ में हैं। यहां सुभारती विश्वविद्यालय के मांगल्य कन्वेंशन सेंटर में नितिन नवीन ने जेएनजी से संवाद करते हुए नितिन नवीन ने उन्हें रील के बजाय रियल में जीने की अपील की है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि युवा नशे और शॉर्टकट से दूर रहें। करीब 11 बजे सुभारती विवि पहुंचे नितिन नवीन ने शहीद स्मारक में पहुंचकर सबसे पहले शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद शक्ति केंद्र सम्मेलन पश्चिमी क्षेत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित किया। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आजकल युवा को सबसे ज्यादा नशा और शॉर्टकट प्रभावित कर रहा है। इसलिए युवाओं को इन दोनों से बचना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नशे के खिलाफ शुरू किए गए अभियान का हवाला देते हुए दूसरों को भी नशे से बचाने की अपील की। सौ करोड़ निष्ठावान और ऊर्जावान युवा देश की तकदीर बदल सकते नितिन नवीन ने युवाओं से अपील की कि वे रील की दुनिया से बाहर निकलकर 'रियल' को जिएं और राष्ट्र प्रथम को आगे रखें। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि दुनिया में बड़े बदलाव हमेशा युवाओं के कंधों पर सवार होकर हुए हैं। भारत युवाओं का देश है और यही ताकत देश की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दे रही है। अंतरिक्ष से स्टार्टअप और खेल से तकनीक तक युवा अपनी प्रतिभा का लोहा देश-दुनिया में मनवा रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सौ करोड़ निष्ठावान और ऊर्जावान युवा देश की तकदीर बदल सकते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रत्येक कार्य में राष्ट्र प्रथम की भावना, अनुशासन एवं निरंतरता और सामाजिक समरसत को जीवन में सर्वोपरि रखने की अपील की। कार्यक्रम में मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे नितिन नवीन का भव्य स्वागत आपको बता दें कि नितिन नवीन का सोमवार को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली से मेरठ पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा से लेकर सुभारती विश्वविद्यालय तक कई स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन का स्वागत किया। मार्ग में जगह-जगह पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़, ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और भाजपा के झंडे नजर आए।स्वागत कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कई स्थानों पर कतार में खड़े किए गए बुलडोजर रहे। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर और मेरठ के महापौर हरिकांत अहलूवालिया की अगुवाई में खड़े किए गए बुलडोजरों से नितिन नवीन के काफिले पर पुष्पवर्षा की गई। एक स्थान पर क्रेन के जरिए माला लटकाकर भी उनका स्वागत किया गया।नवीन के मेरठ आगमन के दौरान एक्सप्रेसवे से लेकर शहर के प्रवेश मार्ग तक कई स्थानों पर कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। भाजपा अध्यक्ष का काफिला वहां पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और पुष्पवर्षा की।