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तेजस्वी की RJD को सबसे ज्यादा वोट, लेकिन NDA ने जीतीं ज्यादा सीटें

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) केवल 25 सीटें जीत सका। राजद ने कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन की अगुवाई की और 143 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। सीटों की संख्या के लिहाज से शर्मनाक प्रदर्शन के बावजूद तेजस्वी यादव के लिए एक अच्छा संकेत रहा। आरजेडी ने इन चुनाव में किसी भी दूसरी पार्टी की तुलना में सबसे अधिक वोट शेयर हासिल किए। राजद के खाते में 23 प्रतिशत वोट शेयर आए। पिछले विधानसभा चुनाव के 23.11 प्रतिशत से यह थोड़ा कम रहा, जब पार्टी ने 144 उम्मीदवार उतारे थे। भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर 19.46% से बढ़कर इस बार 20.07% हो गया। बीजेपी ने इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि पिछले चुनाव में 110 निर्वाचन क्षेत्रों पर उम्मीदवार उतारे थे। वोट शेयर कुल डाले गए वोटों से किसी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार को मिलने वाले मत का प्रतिशत होता है। वोट शेयर मतदाताओं के बीच पार्टी की लोकप्रियता या समर्थन के बारे में बहुत कुछ बताता है। तेजस्वी यादव की आरजेडी का वोट शेयर सबसे अधिक रहा तो फिर पार्टी ज्यादा सीटें क्यों नहीं जीत पाई? चलिए समझते हैं। कई सीटों पर रही टक्कर राजद का वोट शेयर दर्शाता है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी दूसरे या तीसरे स्थान पर रही होगी, जहां उसने काफी वोट तो इकट्ठे किए लेकिन जीत की रेखा पार करने के लिए काफी नहीं था। इससे उसके कुल वोट शेयर में इजाफा होता है, लेकिन सीटों की संख्या में नहीं बढ़ती। इससे यह भी पता चलता है कि भले ही कुल मिलाकर उसे बहुत वोट मिले हों, लेकिन वे वोट उन निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दिलाने के लिए काफी नहीं थे। तेजस्वी की पार्टी कई सीटों पर टक्कर देते हुए पीछे रह गई। सहयोगी दलों का खराब प्रदर्शन महागठबंधन में RJD के सहयोगियों का प्रदर्शन भी फ्लॉप रहा। कांग्रेस ने 61 सीटों में से सिर्फ 6 पर जीत दर्ज की। सीपीआई(एमएल)एल ने 2 सीटें और सीपीआई(एम) ने एक सीट पर जीत हासिल की। सीपीआई तो अपना खाता भी नहीं खोल पाई। मुकेश सहनी की वीआईपी का हाल भी ऐसा ही रहा। VIP ने 15 सीटों पर कैंडिडेट खड़े किए थे लेकिन एक पर भी विजय नहीं मिली। ऐसे में महागठबंधन को कुल 35 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं, एनडीए ने 202 सीटें हासिल कीं, जिसमें भाजपा का योगदान 89 सबसे बड़ा रहा। इसके बाद जदयू को 85, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 19, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 5 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें मिलीं।  

चुनावी सफलता के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई: भाजपा ने आरके सिंह को किया निलंबित

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की जीत के अगले दिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया है। भाजपा ने उन्हें नोटिस भेजकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर जवाब भी मांगा गया है। आरा से भाजपा के पूर्व सांसद और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके आरके सिंह बीते लंबे समय से पार्टी में सक्रिय नहीं हैं। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते यह कार्रवाई की गई। भाजपा ने शुक्रवार को MLC अशोक अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल को भी कारण बताओ नोटिस भेजा। बिहार भाजपा की ओर से भेजे गए नोटिस में आरके सिंह से कहा गया कि उनकी गतिविधियां पार्टी के विरोध में है, इसे गंभीरता से लिया गया है। इसलिए उन्हें निलंबित करते हुए कारण पूछा जा रहा है, कि उन्हें पार्टी से निष्कासित क्यों न कर दिया जाए। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आरके सिंह ने भाजपा नेताओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सम्राट चौधरी को तारापुर से वोट नहीं देने की अपील भी की थी। आरके सिंह ने एनडीए द्वारा अनंत सिंह, विभा देवी समेत दागदार नेताओं को टिकट देने पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा शाहाबाद क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा की चुनावी रैलियों में आरके सिंह नहीं नजर आए थे। हालांकि, चुनाव के दौरान अपनी ही पार्टी और गठबंधन के नेताओं को घेरने वाले आरके सिंह पर भाजपा ने चुप्पी साधे रखी थी। चुनाव के दौरान उनपर कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। जैसे ही इलेक्शन खत्म हुए और रिजल्ट आए, पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। फरवरी 2025 में आरके सिंह ने भोजपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आरोप लगाया था कि भाजपा के कुछ नेताओं ने पैसा देकर भोजपुरी स्टार पवन सिंह काराकाट लोकसभा से निर्दलीय चुनाव लड़वाया था। उस चुनाव में काराकाट से एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा की हार हुई थी। वहीं, आरा से अपनी हार की वजह भी आरके सिंह ने भाजपा के ही अंदर के नेताओं की साजिश बताई थी।  

72 वें सहकारी सप्ताह पर अपेक्स बैंक अधिकारियों/कर्मचारियों ने ली ईमानदारी एवं शुचिता की शपथ: मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक

भोपाल अपेक्स बैंक, मुख्यालय, भोपाल के टी.टी.नगर स्थित प्रांगण में 72 वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह के आयोजन की शुरूआत हर्षोंल्लास के साथ हुई।  बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने ’’सहकारी ध्वज’’ फहराया एवं बैंक के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ईमानदारी एवं समर्पण भाव से शुचिता के साथ अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निवर्हन करने की शपथ दिलाई एवं सहकारिता अमर रहे के नारे भी लगवाए।   इस अवसर पर बैंक के विषेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्रीमती अरूणा दुबे, श्री अरूण मिश्र, श्री संजय मोहन भटनागर, श्री अरविंद बौद्ध, उप महाप्रबंधक श्री के.टी.सज्जन के साथ अपेक्स बैंक के वरिष्ठ अधिकारी, जिला सहकारी बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित हुए ।

ओवैसी की पार्टी का बड़ा दावा: पाँच सीटों के सहारे सरकार बनाने में मदद को तैयार, नीतीश–तेजस्वी से बातचीत के संकेत

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) बेहद उत्साहित है। सीमांचल में 5 सीटों को जीतने के बाद ओवैसी की पार्टी बिहार में सरकार बनाने का सपना भी देखने लगी है। इसके लिए उसने नया समीकरण गढ़ते हुए आरजेडी और जेडीयू को अपने साथ आने का ऑफर दिया है। इतना ही नहीं पार्टी ने मुख्यमंत्री पर पर भी दावेदारी पेश की है और बदले में नीतीश कुमार को 2029 में पीएम उम्मीदवार बनाने का वादा किया गया है। एआईएमआईएम बिहार के एक्स हैंडल पर यह पेशकश की गई है। एआईएमआईएम बिहार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया कि अभी भी सरकार बनाने का मौका है। पार्टी का कहना है कि जेडीयू, राजद, कांग्रेस, आईएमआईएम, सीपीआईएमएल, सीपीआईएम मिल जाएं तो सरकार बन सकती है। गौरतलब है कि जेडीयू के पास 85 तो आरजेडी के पास 25 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस और एआईएमआईएम ने क्रमश: 6 और 5 सीटों पर कब्जा जमाया है। सीपीआई-एमएल और सीपीआई एम ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है। इनका योग 124 होता है, जोकि बिहार में बहुमत के जादुई आंकड़े 122 से दो अधिक है। एआईएमआईम ने कल्पना के घोड़े इतने तेज दौड़ाए कि कैबिनेट की तस्वीर तक बना डाली। पार्टी ने कहा कि उसका मुख्यमंत्री होगा जबकि जेडीयू के कोटे से दो डिप्टी सीएम और 20 मंत्री बनाए जा सकते हैं। राजद को 6 मंत्री दिए जा सकते हैं तो कांग्रेस के पास दो मंत्री पद होगा। सीपीआईएमएल और सीपीआईएम से एक-एक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार को 2029 में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया जाएगा ओवैसी की पार्टी ने कहा, 'हम, हमेशा जोड़ने की राजनीति करते हैं, तोड़ने की नहीं। इसीलिए अभी भी मौका है।'

MP News: रक्षा उत्पाद में निवेश से लेकर निर्यात तक में मदद करेगी सरकार

भोपाल/जबलपुर. मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पाद बनाए जाने के प्रयास फिर तेज हो गए हैं। निवेशकों को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। निवेश पर प्रोत्साहन से लेकर रक्षा उत्पादों के निर्यात में भी राज्य सरकार सहायता करेगी। स्टार्टअप और रक्षा उत्पाद की कोई बेहतर तकनीक है तो उसे प्रोत्साहित किया जाएगा। निर्यात के लिए उत्पाद के परीक्षण को सरल किया गया है और इसकी फीस भी घटाई गई है। किसी व्यक्ति के पास किसी नए रक्षा उत्पाद का आइडिया है तो चयन होने पर 25 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रोत्साहन बतौर दी जाएगी। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी रक्षा उत्पाद तैयार किए जाने से विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी। भारत में इस वर्ष डेढ़ लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हुआ और 23 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। आगामी तीन वर्ष में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। भारत सरकार की योजना के तहत रक्षा उत्पाद बनाने के लिए तीन से पांच साल अनुभव की अनिवार्यता नहीं होगी। नवाचार या तकनीक अच्छी है तो उसे विशेष मामला मानकर प्रोत्साहित किया जाएगा। मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पादन के लिए अदाणी डिफेंस, हिंदुस्तान शिपयार्ड, बीईएल और जेबीएम जैसे समूहों ने रुचि दिखाई है। रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक सागर, कटनी, रतलाम, सतना और मुरैना सहित आठ जिलों में रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक उपलब्ध है। भौगोलिक स्थिति और सहयोगी इको सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश रक्षा उत्पादन के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है। धार के पीएम मित्रा पार्क में रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रस्ताव बुलाए गए हैं। सरकार की निवेश नीतियों के तहत डीपीआर बनाकर निवेश करने वालों को इकाई लगाने तुरंत जमीन दी जाएगी। इको सिस्टम पहले से मौजूद जबलपुर में पहले से रक्षा इको सिस्टम मौजूद है, जैसे व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री। व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के टैंकों की रिपेयरिंग की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जबलपुर में भारतीय सेना के टी-90 और टी-72 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों का ओवरहालिंग शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश में जबलपुर, इटारसी में आर्डनेंस फैक्टरी है। ग्वालियर के पास और इंदौर के नजदीक महू में फायरिंग रेंज है। राज्य के चारों ओर रक्षा क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। कटनी-जबलपुर में डिफेंस कॉरिडोर की संभावनाएं कटनी, जबलपुर, इटारसी और सागर के बीच भी डिफेंस कारिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर रक्षा क्षेत्र में हर साल 400 करोड़ रुपये तक की स्थानीय आपूर्ति कर सकता है। महाकोशल क्षेत्र में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) हब इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया तेज़: टेट की तारीख जारी, सेट नोटिफिकेशन का इंतज़ार खत्म होने वाला

रायपुर एससीईआरटी द्वारा छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट-26) के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 13 नवंबर गुरुवार से शुरू हो चुकी है। आठ दिसंबर तक आनलाइन आवेदन मंगाए गए हैं। स्कूल शिक्षकों के लिए टेट की परीक्षा फरवरी 2026 में होगी। साथ ही कॉलेज में शिक्षकों के लिए सेट की परीक्षा भी मार्च-अप्रैल में आयोजित की जाएगी। इसके लिए दिसंबर 2025 में अधिसूचना जारी हो सकती है। सरकार ने स्कूलों में 5,000 और कालेजों में 700 पदों पर सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की घोषणा की थी। इसके बाद कालेजों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। अब स्कूलों के लिए टेट परीक्षा के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। एक बार पास करने पर आजीवन वैधता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने भर्ती परीक्षा कराने से पहले स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक लाभ मिले, इसके लिए पात्रता परीक्षा कराने के लिए विभागों को कहा है। टेट के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के प्रस्ताव पर व्यावसायिक परीक्षा मंडल (सीजी व्यापमं) ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश में अभी तक 2011, 2014, 2016, 2017, 2019, 2022 और 2024 में टेट परीक्षा हो चुकी है। एक बार परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद इसकी वैधता आजीवन रहेगी। वहीं कालेजों के लिए सेट परीक्षा सातवीं बार होगी। यह है टेट-सेट टेट राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा 2010 में अनिवार्य किया गया था। यह परीक्षा तय करती है कि कोई उम्मीदवार कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने के योग्य है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से हजारों शिक्षक प्रभावित होंगे, खासकर वे जिन्हें पदोन्नति की उम्मीद थी। इसी तरह कॉलेजों में सेट एक राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा है, जो विश्वविद्यालयों और कालेजों में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए अनिवार्य है। इसे यूजीसी की अनुमति से प्रत्येक राज्य आयोजित करता है। विभाग से मिल चुकी है मंजूरी स्कूलों में पांच हजार और कॉलेजों में 700 शिक्षक समेत अन्य पदों पर भर्ती होनी है। इसके लिए वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। भर्ती के लिए स्वीकृत पदों में सहायक प्राध्यापक के 625 पद शामिल किए गए हैं। इसी क्रम में क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद हैं। इनकी नियुक्ति से महाविद्यालयों में खेलकूद और शारीरिक शिक्षा की गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा। राज्य के स्कूलों में कुल एक लाख 88 हजार 721 शिक्षक कार्यरत हैं, जिसमें से सरकारी स्कूलों में एक लाख 86 हजार 657 शिक्षक हैं। जबकि शिक्षकों के करीब 40 हजार पद खाली हैं। इसी तरह कालेजों में लगभग 2,600 सहायक प्राध्यापक के पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद टेट के लिए बढ़ी सक्रियता एक सितंबर 2025 को उच्चतम न्याय ने शिक्षा जगत से जुड़े हजारों शिक्षकों पर असर डालने वाला आदेश सुनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब नौकरी और पदोन्नति चाहने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास करनी अनिवार्य होगी। यह आदेश पूरे देश के सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा। लेकिन अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों को इसमें छूट दी गई है। जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच साल से ज्यादा का समय शेष है, उन्हें हर हाल में टीईटी पास करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या फिर कंपल्सरी रिटायरमेंट लेनी पड़ेगी। वहीं जिनकी सेवा अवधि पांच साल से कम है, उन्हें अपने पद पर बने रहने के लिए टीईटी देना अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन अगर वे पदोन्नति चाहते हैं तो परीक्षा पास करनी होगी।

MP News: इंदौर में अवैध मकानों को हटाने के दौरान लोगों ने किया हंगामा

इंदौर. शुक्रवार सुबह अन्नपूर्णा मंदिर से लगी ट्रस्ट की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने की कार्रवाई के दौरान एक परिवार के सदस्यों ने हंगामा किया। जिला प्रशासन निगम के रिमूवल अमले के माध्यम से सुबह 9.30 बजे इस क्षेत्र में बने अवैध मकान तोड़ने पहुंचा और खाली पड़े चार मकानों को तोड़ा गया। इस दौरान नेहा नाम की युवती ने घर में लगा विद्युत मीटर दीवार से उखाड़ा और सामान इधर-उधर फेंकने लगी। खुद पर केरोसिन भी छिड़का। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने युवती पर पानी डाला। युवती घर के टीनशेड पर गई फिर पेड़ पर चढ़कर और हंगामा करने लगी। युवती के हाथ में ब्लेड थी और वह उससे हाथ की नस काटकर आत्महत्या की धमकी दे रही थी। पुलिस को उसे वहां से उतारने के लिए काफी मशक्क्त करनी पड़ी। बिजली सप्लाई बंद करवाई और युवक को थाने ले गए इसी दौरान राजू नाम का युवक भी विरोध कर रहा था। पहले पुलिस ने उसे अपने वाहन में बैठाया लेकिन वह भागकर अतिक्रमण हटाए जाने वाली जगह पर पहुंचा। युवक वहां पर एक दीवार पर चढ़ा और बिजली सप्लाई के तार को पकड़ लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तत्काल उस क्षेत्र की विद्युत सप्लाई बंद करवाई और युवक को पकड़कर थाने ले गए। युवती को पेड़ से उतारने के प्रयास में एक पुलिसकर्मी भी गिर गया और उसे चोट आई। चार परिवारों के 13 लोगों के खिलाफ छह नवंबर को जारी हुआ था बेदखली आदेश राऊ की तहसीलदार याचना दीक्षित के मुताबिक अन्नपूर्णा मंदिर से लगी ट्रस्ट की जमीन पर आठ मकानों का पिछले आठ-दस वर्ष से कब्जा था। यहां पर चार परिवारों के 13 लोगों के लिए छह नवंबर को बेदखली का आदेश जारी हुआ था। चार परिवारों में से दो परिवार तो सुदामा नगर में रह रहे थे और उन्होंने अपने कच्चे मकान किराए पर अन्य लोगों को दे रखे थे और उसमें ठेले वालों का सामान रखा था। इसके अलावा शेष दो परिवारों को नगर निगम के माध्यम से सिंदौड़ा के ताप्ती परिसर में प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट भी दिलवा रहे थे। ट्रस्ट की जमीन पर अतिक्रमण कर रहने वाला एक परिवार शिफ्ट होने के लिए तैयार भी हो गया था और उसने सामान भी घर से बाहर निकाल लिया था। दूसरे परिवार के सदस्य हंगामा करने लगे तो उन्होंने भी शिफ्ट होने से मना किया। 10 दिन में करनी होगी अपील: तहसीलदार दीक्षित के मुताबिक कार्रवाई और हंगामे के बीच दोपहर 1.30 बजे हाई कोर्ट का स्टे आया तो रिमूवल कार्रवाई बीच में रोकी गई। हाई कोर्ट ने कहा 10 दिन के भीतर तहसीलदार के आदेश के विरोध में संबंधित परिवार एसडीएम कोर्ट में अपील करें।

Bihar News: तेजस्वी यादव के सामने करारी हार ने खड़ी की बड़ी चुनौती

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की भारी हार ने पार्टी नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राघोपुर से तेजस्वी यादव खुद भी कई राउंड की कड़ी टक्कर के बाद जीत दर्ज कर सके, जबकि पार्टी की सीटें घटकर केवल 25 पर सिमट गईं। इस लड़ाई ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दूं कि विधानसभा चुनाव से पहले तेजस्वी यादव को अपने परिवार में भी आपसी लड़ाई का सामना करना पड़ा था। 2020 में तेजस्वी ‘परिवर्तन का चेहरा’ बनकर उभरे थे। 10 लाख सरकारी नौकरियों का उनका वादा चुनावी माहौल पर पूरी तरह हावी था और इसका परिणाम यह हुआ कि आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन इस बार 'हर परिवार को एक सरकारी नौकरी' का उनका वादा युवाओं ने खोखला माना, खासकर तब जब नौकरी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सड़क पर उतरे युवाओं के बीच तेजस्वी कई मौकों पर नदारद रहे। परिवार में दरार और शुरुआती झटका लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को परिवार और पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। चुनाव अभियान की शुरुआत में ही परिवार के भीतर विवाद उभर आया और बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने अलग पार्टी बना ली। इससे आरजेडी को शुरुआती चरण में ही नुकसान झेलना पड़ा। नीतीश कुमार की एनडीए रणनीति का मुख्य आधार महिलाएं थीं, वहीं आरजेडी इस वर्ग को आकर्षित करने में असफल रही। तेजस्वी की रैलियों में महिलाओं की उपस्थिति लगभग नगण्य रही। इसके विपरीत, नीतीश कुमार की रैलियों में करीब 60% भीड़ महिलाओं की थी। एनडीए ने महिलाओं को चुनाव पूर्व 10,000 नकद सहायता की घोषणा का प्रभावी प्रचार किया। तेजस्वी ने इसका जवाब 30,000 देने की घोषणा से देने की कोशिश की, पर यह देर से और अप्रभावी साबित हुई। अंतिम समय में सामाजिक समीकरण बनाने का प्रयास भी असफल रहा। सीट बंटवारे को लेकर स्थिति आखिरी दिन तक स्पष्ट नहीं हो सकी और 10 सीटों पर INDIA गठबंधन के दल ही एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते दिखे। आरजेडी ने वीआईपी (मुकेश सहनी) और आईआईपी (आईपी गुप्ता) को शामिल किया। सहनी को डिप्टी सीएम चेहरा घोषित करने के बावजूद निषाद समुदाय उनसे दूर रहा। वीआईपी एक भी सीट नहीं जीत सकी। कांग्रेस 61 में से केवल 6 सीटों पर जीती। मुस्लिम-यादव (MY) वोटों में भी सेंध दिखी। सीमांचल में AIMIM ने बेहतर प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण सीटें हाथ से निकल गईं। 6 अक्टूबर को चुनाव की घोषणा के बाद तेजस्वी ने 7 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन 22 अक्टूबर तक प्रचार से दूर रहे। 22 अक्टूबर तक बनी यह ‘गायब रहने’ की छवि उनके खिलाफ गई। 23 अक्टूबर को INDIA गठबंधन द्वारा उन्हें सीएम फेस घोषित करने के बाद उन्होंने एक दिन में 15 से अधिक रैलियों के जरिए गति पकड़ने की कोशिश की, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार तब तक बहुमूल्य समय हाथ से निकल चुका था। ‘जंगल राज’ नैरेटिव का जवाब देने में असफलता एनडीए ने आरजेडी के खिलाफ 21 साल से चले आ रहे ‘जंगल राज’ के नैरेटिव को और मजबूत किया। तेजस्वी इसे प्रभावी ढंग से काट नहीं सके।

Bihar News: बिहार में सरकार गठन करने नीतीश के आवास पर बढ़ी हलचल

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीते के बाद अब नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है। भाजपा, जेडीयू समेत अन्य घटक दलों में विमर्श का दौर शुरू हो गया है। चुनाव नतीजों की घोषणा के अगले दिन गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर हलचल तेज है। जनता दल यूनाइडेट (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह सुबह ही सीएम आवास पहुंच गए। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी नीतीश से मिलने पहुंचे। बताया जा रहा है कि नई सरकार के शपथग्रहण, कैबिनेट गठन समेत अन्य मुद्दों पर एनडीए में मंथन चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जेडीयू के वरीय नेता विजय चौधरी, श्याम रजक समेत अन्य नेताओं ने भी पटना के एक अणे मार्ग पहुंचकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में लोजपा-रामविलास के मुखिया चिराग पासवान ने कहा कि वह एनडीए की जीत को लेकर सीएम का आभार जताने आए थे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इसलिए उनसे मुलाकात करने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा। चिराग ने कहा कि नीतीश ने एनडीए के सभी घटक दलों की भूमिका को सराहा है। विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ये लोग (महागठबंधन) लोजपा और जदयू के बीच तकरार की झूठी अफवाह फैला रहे थे। इस चुनाव में दोनों ही दलों ने एकजुटता दिखाते हुए एक-दूसरे के उम्मीदवारों को जिताने में मदद की। नीतीश ही अगले मुख्यमंत्री बनेंगे- जेडीयू नेता जदयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने सीएम आवास के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा, “पूरा एनडीए एकजुट है। सभी लोग नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़े, नीतीश ही हमारे नेता हैं और वी अगले मुख्यमंत्री भी बनेंगे।” एनडीए से किसकी कितनी सीटें-     भाजपा- 89     जदयू- 85     लोजपा आर- 19     हम- 5     रोलोमो- 4

माओवादी संगठन को करारा झटका, तेलंगाना में आठ सदस्यों ने हथियार डाले

जगदलपुर तेलंगाना माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य की स्टेट कमेटी के दो शीर्ष नेताओं सहित कुल आठ माओवादियों ने वारंगल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के अनुसार ये सभी माओवादी दो दिन पहले ही गुपचुप तरीके से समर्पण कर चुके हैं। सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है। आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम कोय्यादी संबय्या उर्फ आजाद का है। आजाद बीकेएसआर डिवीजन कमेटी का सचिव रह चुका है और दशकों तक माओवादी संगठन में रणनीतिक भूमिका निभाई है। उसका संगठन में प्रभाव और पकड़ बेहद मजबूत माना जाता था। इसके अलावा, अब्बास नारायण उर्फ रमेश, जो माओवादी तकनीकी टीम का प्रभारी था, ने भी आत्मसमर्पण किया। रमेश लंबे समय से रामागुंडम क्षेत्र में सक्रिय था। सूत्रों का कहना है कि आजाद और स्टेट कमेटी के शीर्ष नेता दामोदर के बीच लंबे समय से चल रहा मतभेद और अंदरूनी टकराव इस आत्मसमर्पण का बड़ा कारण है। आजाद मुलुगु जिले के मोद्दुलागुडेम गांव का निवासी है। यदि पुलिस की ओर से पुष्टि होती है, तो यह कदम तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए गंभीर झटका माना जाएगा और संगठन की कार्यप्रणाली पर इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है।