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मध्य प्रदेश पुलिस का नया आदेश: हर बड़े क्राइम में होगा सीन रिक्रिएशन, आरोपियों के बचने की राह बंद

भोपाल  मध्य प्रदेश में होने वाले अब हर बड़े अपराध की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस क्राइम सीन का रिक्रिएशन करती दिखाई देगी. अभी तक सिर्फ बड़े शहरों में और किसी बड़े मामले में ही पुलिस इस तरह के रिक्रिएशन करती थी, लेकिन अब हर गंभीर मामले में पुलिस को यह प्रक्रिया अपनानी होगी. मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए सभी जिलों में सीन ऑफ क्राइम यूनिट गठित करने के आदेश दिए हैं. एफएसएल ने इसके लिए एसओपी भी जारी की गई है. क्राइम ऑफ सीन बेहद महत्वपूर्ण एफएसएल के डायरेक्टर शशिकांत शुक्ला ने बताया कि "किसी भी अपराध में सीन ऑफ क्राइम बेहद अहम होता है. यहां अपराध से जुड़े तमाम सबूत होते हैं, इसके मदद से पुलिस को आरोपी तक पहुंचने और उसे कोर्ट से सजा दिलाने तक में काफी मदद मिलती है. खासतौर से पेचीदा मामलों में पुलिस को अपराधी तक पहुंचने में कई बार यहीं से महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगता है. जैसे किसी अपराध में घटनास्थल पर दरवाजे, अन्य किसी सामान या फिर हथियार पर मिलने वाले फिंगर प्रिंट की पहचान करनी होती है. इसी तरह डीएनए के लिए स्वैब के नमूने लेने होते हैं और अन्य सामान को पैकेजिंग करने के अलावा वहां के फोटोग्राफ और वीडियो लेने पड़ते हैं. इसके बाद एक डिटेल रिपोर्ट तैयार होती है. इसलिए करना होता है रिक्रिएशन वे बताते हैं कि कई मामलों में शुरूआती जांच में पुलिस के पास कोई सुराग नहीं होता. ऐसी स्थिति में मौजूदा साक्ष्यों और फोटोग्राफ आदि को देखने के बाद पूरी घटना का रिक्रिएशन किया जाता है. इससे घटना के तह तक पहुंचने में मदद मिलती है. यही वजह है कि अब हर जिले के पुलिस अधिकारियों और एफएसएल अधिकारियों को एसओपी भेजी गई है. इसमें भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत नए आपराधिक कानूनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए सीन ऑफ क्राइम यूनिट का गठन का निर्णय लिया गया है. इसके तहत सीन ऑफ क्राइम यूनिट को हर जिले में अलग स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा. इस यूनिट में फोटो यूनिट, फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट, डॉग स्क्वॉड की ज्वाइंट टीम होगी. विशेष तौर से 7 साल और उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में इस यूनिट को अनिवार्य रूप से घटनास्थल की जांच करनी होगी." सबूतों के अभाव में नहीं बचेंगे अपराधी रिटायर्ड डीजी अरुण गुर्टू सभी जिलों में सीन ऑफ क्राइम यूनिट गठित किए जाने के फैसले का स्वागत करते हैं. उनके मुताबिक बड़े अपराधों में यह होना ही चाहिए. इससे पुलिस जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगते हैं. खासतौर से ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों में पुलिस को घटनास्थल से मिलने वाले सबूत न सिर्फ अपराधी तक पहुंचने बल्कि कोर्ट में अपराधी से अपराध की कड़ी जोड़ने में काफी मदद मिलती है. बड़े मामलों में रिक्रिएशन होने से सजा दिलाने में मदद मिलेगी और सबूतों के अभाव में अपराधी बच नहीं पाएंगे. रिक्रिएशन से चला था पता कहां से आई थी गोली राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में अक्टूबर 2025 में गणेश उत्सव के दौरान एक झांकी में खेल रही बच्ची की गोली लगने से मौत हो गई थी. एक्स-रे रिपोर्ट से पता चला कि बच्ची की मौत गोली लगने से हुई. शुरूआती जांच में पुलिस को पता नहीं चल सका कि गोली किस दिशा से आई थी. बाद में पूरे घटनाक्रम का रिक्रिएशन किया गया और बारीकी से एनालिसिस किया गया तो पुलिस आरोपी तक पहुंच गई.

जीण माता वार्षिकोत्सव: दो दिवसीय आयोजन आज से, भक्तों में खास उत्साह

 भाटापारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जीण माता मंदिर परिसर में भव्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। श्री जीण माता मंदिर अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस शुभ अवसर पर आज एवं कल दो दिवसीय श्री जीण महोत्सव 2025 का आयोजन होगा। पहले दिन यानी आज रात 8 बजे से भजन संध्या आयोजित होगी, जिसमें भजन गायिका कनिका ग्रोवर (नीमच) और सुरेश राजस्थानी (रायपुर) अपनी प्रस्तुति देंगे। साथ ही छत्तीसगढ़ के भजन गायक दुकालु यादव भी भक्तिमय भजनों से माहौल को संगीतमय बनाएंगे। 16 नवंबर, रविवार को दोपहर 12:30 बजे से महा मंगलपाठ का आयोजन होगा। इसमें आमंत्रित वाचक रवीश सोनम सोनी (जयपुर) आध्यात्मिक वाणी से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करेंगे, जबकि भजन गायक मास्टर गुरु गुलशन विशेष प्रस्तुति देंगे।

मध्यप्रदेश में बदलाव की आहट: SIR पूरा होते ही कलेक्टरों की सूची बदलेगी, 7 फरवरी को जारी होगी मतदाता सूची

भोपाल प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम चल रहा है। चुनाव आयोग ने कलेक्टर सहित मतदाता सूची के काम से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले पर रोक लगाई है। सरकार को कुछ जिलों में नए कलेक्टर पदस्थ करने हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन सात फरवरी को होगा। इसके बाद ही तबादले किए जाएंगे। वहीं, आयुक्त महिला बाल विकास सहित कुछ अन्य पद रिक्त हैं, जिन पर पदस्थापना जल्द की जाएगी। जिन जिलों में कलेक्टरों को दो वर्ष से अधिक हो चुके हैं, वहां परिवर्तन प्रस्तावित है। शिवपुरी में भी परिवर्तन किया जा सकता है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागाध्यक्षों के साथ मैदानी स्तर पर अधिकारियों के दायित्व में परिवर्तन की तैयारी की है।   दरअसल, जनवरी में आईएएस अधिकारियों की पदोन्नतियां होंगी। इसके बाद पदस्थापनाएं होंगी लेकिन कलेक्टर सहित अन्य मैदानी अधिकारियों के पदस्थापना में परिवर्तन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य के संपन्न होने के बाद होगा। इसके पहले इसी माह 10 से 12 अधिकारियों को नवीन पदस्थापना दी जाएगी। दरअसल, कुछ पद खाली हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर भरा जाना है। इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार हो चुकी है। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की इस संबंध में बैठक के बाद अंतिम निर्णय हो जाएगा। दिसंबर में होगी डीपीसी उधर, अपर मुख्य सचिव से लेकर समयमान वेतनमान में पदोन्नत होने वाले अधिकारियों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक दिसंबर में होगी। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। प्रमुख सचिव पद पर एम सेलवेंद्रन तो सचिव पद पर 2010 बैच के अधिकारी पदोन्नत होंगे।

पेंशनरों के लिए खुशखबरी: हरियाणा सरकार ने खत्म किया बैंक का झंझट, 2.41 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

चंडीगढ़ केंद्र सरकार ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (डीएलसी) अभियान 4.0 की शुरुआत की है, ताकि देशभर के पेंशनर्स आसानी से घर बैठे ही अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा करा सकें। यह सुविधा खासतौर पर बुजुर्गों और दिव्यांग पेंशनर्स के लिए राहत लेकर आई है। अब पेंशनर्स को बैंक या दफ्तरों में लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी। इस अभियान का लक्ष्य है कि दो करोड़ से ज्यादा पेंशनर्स तक यह डिजिटल सुविधा पहुंचे। सरकार का कहना है कि यह अभियान देश के दो हजार से ज्यादा शहरों और कस्बों में चलाया जा रहा है, ताकि हर पेंशनभोगी तक डिजिटल सशक्तीकरण पहुंच सके।   हरियाणा के 2.41 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को इस सुविधा का लाभ मिलने की संभावना है। उन्हें डिजिटल तरीके से अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा कराने में मदद मिलेगी। हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा 30 नवंबर तक पूरे देश में चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान 4.0 में अपनी भागीदारी की घोषणा की है। पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में आसानी और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान पूरे हरियाणा में चलाया जाएगा। हरियाणा के कोषागार एवं लेखा विभाग के महानिदेशक सीजी रजनीकांथन ने बताया कि अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन और समन्वय के लिए पंचकूला स्थित पेंशन वितरण प्रकोष्ठ (पीडीसी) के संयुक्त निदेशक राकेश राठी को राज्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि हरियाणा (चंडीगढ़ सहित) के सभी कोषागार अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के लिए उप नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। कोषागार अधिकारियों को अभियान के सुचारू और सफल क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक ने बताया कि इस पहल से लगभग 2.41 लाख हरियाणा सरकार के पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशन भोगी लाभान्वित होंगे, जो ई-पेंशन के माध्यम से कोषागारों/उप-कोषागारों और पेंशन वितरण बैंकों (एसबीआई, पीएनबी, बीओआइ, यूबीआइ, सीबीआई और केनरा बैंक) के माध्यम से पेंशन प्राप्त करते हैं। उन्होंने सभी पेंशनभोगियों से आह्वान किया कि वे इस अभियान का पूरा लाभ उठाएं और अपने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र या तो निकटतम कोषागार कार्यालय में या फिर अपने घर बैठे स्मार्टफोन का उपयोग कर “जीवन प्रमाण” पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से जमा करें।

सर्द हवाओं से कांपा राजस्थान; रातें ठंडी, दिन में मिल रही सुहानी धूप

जयपुर राजस्थान में सर्दी का दौर लगातार बना हुआ है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज हो रहा है, जिससे सुबह और शाम ठिठुरन बढ़ गई है। हालांकि दिन में खिली धूप से लोगों को राहत मिल रही है और मौसम सुहावना बना हुआ है।गुरुवार को प्रदेश में सबसे ठंडा दिन सिरोही में रिकॉर्ड किया गया, जहां अधिकतम तापमान 24°C से भी नीचे रहा। शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान लगातार 10°C से नीचे दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले एक सप्ताह तक आसमान साफ रहेगा और न्यूनतम तापमान में करीब 2°C की और गिरावट होने की संभावना है। गुरुवार को सबसे ठंडी रात सीकर के फतेहपुर में रही, जहां न्यूनतम तापमान 7°C रिकॉर्ड हुआ। बारां में 9.8°C, चूरू 9.7°C, सीकर 9.4°C, पिलानी 9.8°C और नागौर 8.1°C दर्ज हुआ। वहीं वनस्थली, अलवर, करौली, झुंझुनूं सहित कई शहरों में तापमान 10–15°C के बीच रहा। दोपहर के तापमान में भी उतार-चढ़ाव दिखा, लेकिन ज्यादातर शहरों में अधिकतम तापमान 27°C से 31°C के बीच दर्ज किया गया। सबसे अधिक तापमान 33.3°C रहा, जबकि जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू और जयपुर में भी 28–31°C के आसपास तापमान रहा। राज्य में सुबह-शाम की ठिठुरन और दिन की धूप के बीच ठंड का यह मिश्रित मिज़ाज अगले कुछ दिन और देखने को मिलेगा। बीते 24 घंटों में प्रदेश का तापमान इस प्रकार रहा: अजमेर 28.6 / 11.8, भीलवाड़ा 29.8 / 12.4, वनस्थली (टोंक) 29.8 / 10.5, अलवर 27 / 10.8, जयपुर 29 / 14.4, पिलानी 28.5 / 9.8, सीकर 27 / 9.4, कोटा 29 / 14.6, उदयपुर 28 / 12.2, बाड़मेर 33.3 / 17.7, जैसलमेर 30.3 / 14.6, जोधपुर 30.8 / 12.7, बीकानेर 29.8 / 14.2, चूरू 29.3 / 9.7, गंगानगर 28.9 / 11.5 ,नागौर 30 / 8.1, बारां 28.8 / 9.8, जालौर 30.5 / 11.5 ,सिरोही 23.4 / 8.4,  फतेहपुर 28.1 / 7, करौली 27.9 / 10, दौसा 29.8 / 15.9, प्रतापगढ़ 28.1 / 13.6 व  झुंझुनूं में 27.9 / 10.4 रहा।

बाघों की गिनती का नया दौर: मध्य प्रदेश में कैमरों का जाल बिछा, 15 नवंबर से डेटा कलेक्शन

सीधी  अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 (Tiger Census 2026) को लेकर संजय टाइगर रिजर्व प्रबंधन तैयारी में जुटा है। इस वर्ष यह गणना पूरी तरह से पेपरलेस होगी। गणना में डाटा कलेक्शन संजय टाइगर रिजर्व के साथ ही सामान्य वन मंडल पश्चिम सीधी, नॉर्थ शहडोल, रीवा, सिंगरौली और वन विकास निगम क्षेत्र से भी किया जाएगा। कर्मचारियों का प्रशिक्षण लगभग पूरा हो चुका है। अब 15 नवंबर से कैमरा ट्रैप लगाने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा, जबकि डाटा कलेक्शन का काम 15 नवंबर से होगा। कैमरे एक माह के लिए लगाए जाएंगे ताकि बाघों के साथ अन्य वन्यजीवों के मूवमेंट को कैप्चर किया जा सके। आठ वन परिक्षेत्रों में दो फेज में लगेंगे कैमरा ट्रैप विभागीय अधिकारियों के अनुसार संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुल आठ वन परिक्षेत्र हैं। पहले फेज में चार परिक्षेत्र (ब्योहारी, दुबरी, वस्तुआ और मड़वास) के 281 ग्रिड में कैमरे लगाए जाएंगे। एक ग्रिड दो वर्ग किलोमीटर का है। हर ग्रिड में दो कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे एक माह तक लगे रहेंगे। इसके बाद दूसरे फेज में बाकी बचे चार परिक्षेत्र (पौड़ी, टमसार, मोहन और भुईमाड़) के 301 ग्रिड में कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरा ट्रैप का पूरा डेटा सीधे वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून जाएगा, जहां एनॉलिसिस की जाएगी। कैमरा ट्रैप लगाने के साथ ही ट्रांजिट लाइन में पैदल चलकर भी बाघों के साथ ही अन्य वन्यजीवों की गणना की जाएगी। यह कार्य दिसंबर माह के पहले सप्ताह में होगा। पहले तीन दिन मांसाहारी वन्य प्राणियों के साक्ष्य एकत्रित होंगे। हर बीट में 15 किलोमीटर के तीन ट्रैक होंगे। वहीं अगले तीन दिन शाकाहारी वन्य प्राणियों का डाटा कलेक्शन होगा। इसके लिए कंपास, रेंज फाउंडर के साथ ही अन्य आवश्यक संसाधन जुटा लिए गए है। ट्रांजिट लाइन में पैदल गणना 1 से 7 दिसंबर के बीच होगी। बाघ की उंचाई के बराबर पेड़ों पर लगाए जाएंगे कैमरे प्रशिक्षित कर्मचारी निर्धारित क्षेत्र में चिह्नित प्वाइंट पर पेड़ों पर कैमरा लगाएंगे। ये कैमरे पेड़ों पर बाघ की ऊंचाई के बराबर लगाए जाएंगे, जिससे कि आसानी से वन्यजीवों को कैप्चर किया जा सके। कैमरा ट्रैप लगने के बाद क्षेत्र में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा, जिससे कि वन्यजीव स्वच्छंद इस क्षेत्र में विचरण कर सकें। बाघ के साथ अन्य वन्य प्राणियों की भी होगी गणना अखिल भारतीय बाघ गणन हर चार वर्ष में होती है। वर्ष 2022 के बाद होने वाली इस गणना में इस बार बाघों के साथ तेंदुआ, जंगली हाथी, भालू और बायसन सहित अन्य वन्य जीव की भी संख्या दर्ज की जाएगी। इस गणना का नाम बाघ एवं अन्य मांसाहारी वन्य प्राणियों का आकलन-2026 दिया गया है। लगभग तैयारी हुई पूरी – एसडीओ बाघ गणना को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं। पहले चरण में टाइगर रिजर्व क्षेत्र के चार वन परिक्षेत्रों में 15 नवंबर से 562 कैमरा टैप लगाने का काम किया जाएगा। इस काम में लगभग 300 कर्मचारी लगेंगे। इस बार गणना पूरी तरह से पेपरलेस है। – सुधीर मिश्रा, एसडीओ संजय दुबरी टाइगर रिजर्व सीधी

टमाटर खेती से हो रहा लाभ: किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी और आत्मनिर्भरता

रायपुर : टमाटर की खेती से किसान बन रहे आत्मनिर्भर  टमाटर की खेती से हो रहा लाभ रायपुर शासन की किसान हितैषी योजनाओं एवं उद्यानिकी फसलों की असीम संभावनाओं के कारण अब राजनांदगांव जिले के किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। इसी कड़ी में विकासखण्ड राजनांदगांव के ग्राम गातापारखुर्द के प्रगतिशील किसान  सुरेश सिन्हा ने आधुनिक पद्धति से पॉलीहाउस में टमाटर की खेती कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने टमाटर की ‘माल्या वैरायटी’ की फसल लगाकर लगभग 2 लाख 35 हजार रूपए का लाभ अर्जित किया है।  सिन्हा ने बताया कि पॉलीहाउस में उपयुक्त तापमान बनाए रखते हुए मल्चिंग विधि का उपयोग किया गया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई। टमाटर की बाजार में अच्छी मांग होने से प्रति क्विंटल 700 से 800 रूपए की दर प्राप्त हुई। यहां उत्पादित टमाटर कोरबा, कोलकाता, उत्तर प्रदेश, ओडिशा सहित स्थानीय बाजारों में भी भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संरक्षित खेती के लिए पॉलीहाउस निर्माण हेतु 17 लाख रूपए का शासन द्वारा अनुदान प्राप्त हुआ। पॉलीहाउस की कुल लागत 34 लाख रूपए रही। इसके अतिरिक्त पैक हाउस निर्माण हेतु 2 लाख रूपए का अनुदान तथा दवाई छिड़काव के लिए स्ट्रिप मशीन पर 50 प्रतिशत अनुदान शासन द्वारा प्रदान किया गया।  सिन्हा के पास कुल 15 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से 8 एकड़ में धान एवं 7 एकड़ में सब्जियों की खेती की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 1.5 एकड़ में लौकी की फसल से लगभग 35 टन उत्पादन हुआ, जिससे उन्हें 50 प्रतिशत की शुद्ध आमदनी प्राप्त हुई। पॉलीहाउस में टमाटर के साथ खाली स्थान का उपयोग करते हुए उन्होंने मिश्रित खेती के रूप में फूलगोभी, नवलकोल, प्याज और मूली की फसलें भी लगाई हैं।  सिन्हा ने बताया कि धान की तुलना में सब्जियों की खेती से तीन से चार गुना अधिक आमदनी होती है। इसमें कम पानी की आवश्यकता होती है और एक वर्ष में तीन से चार फसलें ली जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी विभाग से समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन एवं परामर्श प्राप्त होता रहता है, जिससे खेती में नई तकनीकों का लाभ मिल रहा है।

MP के पन्ना हीरे को GI Tag, अब विश्व बाज़ार में और चमकेगा ‘पन्ना डायमंड’

पन्ना  सालों के इंतजार के बाद आखिरकार पन्ना को आज बड़ी खुशखबरी मिली है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की खानों से निकलने वाले हीरे को खास पहचान मिल गई है। इस पहचान का नाम है जीआई टैग। जीआई टैग मिलने से अब पन्ना के हीरे की खास पहचान स्थापित होगी। इस उपलब्धि के कारण मध्य प्रदेश के पन्ना से निकलने वाले हीरे की चमक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगेगी। हीरा व्यवसाय से जुड़े लोगों को होगा बड़ा लाभ पन्ना के हीरे को जीआई टैग मिल गया है। इसकी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अब पन्ना के हीरों की चमक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ जाएगी। खास बात ये है कि, जिले में हीरा व्यवसाय से जुड़े लोगों को इसका बड़ा लाभ मिल सकेगा। पन्ना में निकलते हैं तीन प्रकार के हीरे सूबे के पन्ना जिले की खदानों से तीन प्रकार के हीरे निकलते हैं। जेम ( व्हाइट कलर ), ऑफ कलर ( मैला रंग ) और इंडस्ट्रियल क्वालिटी (कोका कोला कलर) के हीरे निकलते हैं। उनकी गुणवत्ता की पहचान हीरा कार्यालय के पारखी करते हैं। हीरे की क्वालिटी उसकी चमक के आधार पर तय होती है। इसी आधार पर उसकी कीमत भी सुनिश्चित की जाती है।

जनजातीय गौरव दिवस: स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने नायक को किया नमन

• कैलाश विजयवर्गीय भोपाल 15 नवंबर को पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। मध्यप्रदेश, जहां देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है, इस दिवस को और भी गौरवपूर्ण तरीके से मना रहा है। यह सिर्फ उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत आदिवासी नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष को याद करने का अवसर है, जिन्हें स्वतंत्रता इतिहास में वह स्थान लंबे समय तक नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। बिरसा मुंडा: जिनका संघर्ष समय से आगे था बिरसा मुंडा एक ऐसे जननायक थे, जिन्होंने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और गांधी जी से भी बहुत पहले अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष का प्रारंभ किया। भारत में जब संगठित स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब झारखंड के दूरस्थ इलाकों और जंगलों में—जहां संचार के साधन नगण्य थे—उन्होंने आदिवासियों को संगठित किया और अंग्रेजी शासन को खुली चुनौती दी। आदिवासी समाज उन्हें ‘धरती आबा’ यानी धरती पिता की उपाधि से सम्मानित करता है। उन्होंने “अबुआ राज एते जाना, महारानी राज टुंडू जाना” का नारा देकर स्वराज की अवधारणा को जंगलों, घाटियों और गांवों तक पहुंचाया। वर्ष 1900 में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आंदोलन के तेज फैलाव से घबराकर, तत्कालीन जिला मैजिस्ट्रेट ने पुलिस और सेना बुलवाई और डोंबिवाड़ी हिल पर हो रही सभा पर गोलीबारी करवा दी, जिसमें लगभग 400 लोग मारे गए। यह घटना 19 साल बाद हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के समान थी, परंतु इस घटना को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया। बिरसा मुंडा को पकड़ने के बाद अंग्रेजों ने निर्णय लिया कि उन्हें बेड़ियों में जकड़कर अदालत ले जाया जाए ताकि आमजन को पता चले कि अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत करने का क्या नतीजा होता है। परंतु यह दांव उल्टा पड़ गया—बिरसा को देखने के लिए रोड के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। उन्हें तीन माह तक सोलिटरी कन्फाइनमेंट में रखा गया और यह भी कहा जाता है कि उन्हें स्लोपॉयज़न दिया गया। अंततः मात्र 25 वर्ष की आयु में वो शहीद हो गए। आदिवासी वीर: जिन्हें इतिहास ने कम याद किया अंग्रेजों ने भारत में अपनी जड़ें मजबूत करते ही यहां की प्राकृतिक संपदा, विशेषकर वन संपदा के दोहन की राह पकड़ी। जो आदिवासियों के साथ संघर्ष का कारण बना। 1857 की क्रांति से लगभग 25 साल पहले,शहीद बुधु भगतने छोटा नागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के जल, जमीन और वनों पर कब्जे की नीति के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजाया। इसे लकड़ा विद्रोह के नाम से जाना जाता है। वीर बुधु भगत का विद्रोह इतना तीव्र था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनके नाम पर उस समय 1000 रुपये का इनाम रखा था। सिदू और कान्हू मुर्मूने वर्ष 1855–56 में संथाल विद्रोह / हूल आंदोलन का नेतृत्व किया। जून 1855 में भोगनाडीह में 400 गांवों के 50,000 संथालों की सभा हुई, जिसमें संथाल विद्रोह की शुरुआत हुई। इसका नारा था—“करो या मारो… अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो।” अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों का सामना संथालों ने तीर-कमान से किया। कार्ल मार्क्स ने “ नोट्स ऑन इंडियन हिस्ट्री” में संथाल क्रांति को भारत की पहली जनक्रांति कहा। मध्यप्रदेश के निमाड़ का नाम आते ही टांट्या मामा या टांट्या भील का स्मरण होता है। उन्हें निमाड़ का शेर कहा जाता हे वे लगभग पोने 7 फीट ऊंचे, तेजस्वी व्यक्तित्व वाले योद्धा थे। वे अंग्रेजों से लूटा धन और अनाज गरीबों तक पहुंचाते थे। उन्हें ‘भारत का रॉबिन हुड’ कहा जाता था। उनका आतंक अंग्रेजों की छावनियों तक फैला रहता था, जहां अतिरिक्त सुरक्षा इसलिए रहती थी कि “कहीं टांट्या न आ जाए।” अंततः अंग्रेजों ने छल से उन्हें पकड़ा, जबलपुर में फांसी दी और उनका शव पातालपानी क्षेत्र में लाकर रख दिया, ताकि आम लोगों को पता चले कि अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने का क्या नतीजा होता है। उनके पकड़े जाने की खबर अंतर्राष्ट्रीय अखबारों में, विशेषकर अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स समाचार पत्र में नवंबर 1889, में छापी। आप सोच सकते हे कि निमाड़/मालवा के छोटे से क्षेत्र में रहने वाले इस जननायक ने भारत में अंग्रेजों की कितनी नाक में दम कर रखी होगी कि उसके बारे में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया बात कर रहा था। इसी तरह राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह भारत के पहले ऐसे रजवाड़े थे जिन्हें वर्ष 1857 की क्रांति को कुचलने की कड़ी में अंग्रेजों द्वारा तोप के मुंह से बांधकर उड़ाया गया। न्याय आयोग, जिसके सामने उन्हें पेश किया गया था, ने उनके सामने जान बचाने के लिए धर्मांतरण सहित कई विकल्प रखे, दोनों ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें जबलपुर में “ब्लोइंग फ्रॉम ए गन” की सजा दी गई। बड़वानी क्षेत्र के भीमा नायकभीलों के योद्धा थे, जिन्होंने वर्ष 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। शहीद भीमा नायक का कार्य क्षेत्र बड़वानी रियासत से महाराष्ट्र के खानदेश तक फैला था। उन्हें आदिवासियों का पहला योद्धा माना जाता है, जिसे अंडमान के ‘काला पानी’ में फांसी दी गई। वर्ष 1857 के संग्राम के समय अंबापावनी युद्ध में भीमा नायक की महत्वपूर्ण भूमिका थी। कहा जाता है कि जब तात्या टोपे निमाड़ आए थे, तो उनकी भेंट भीमा नायक से हुई थी और भीमा नायक ने उन्हें नर्मदा पार करने में सहयोग दिया था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को लोहे के चने चबवाने वाले पचमढ़ी के आदिवासी राजा भभूत सिंह नर्मदांचल के शिवाजी कहलाते थे। जंगलों में रहकर अंग्रेजों को तीन साल तक परेशान करने वाले राजा भभूत सिंह गोरिल्ला युद्ध के साथ-साथ मधुमक्खी के छत्ते से हमला करने में भी माहिर थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तात्या टोपे की मदद भी की थी। मढ़ई और पचमढ़ी के बीच घने जंगलों में आज भी भभूत सिंह के किले का द्वार और लोहारों की भट्टियां मौजूद हैं, जिससे पता चलता है कि वे न केवल किला बनाकर लड़ रहे थे, बल्कि बड़े पैमाने पर हथियार बनाने की क्षमता भी रखते थे। आदिवासी संघर्ष: स्वतंत्रता की रीढ़ भारतीय इतिहास में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। चाहे कोल क्रांति हो, उलगुलान हो, संथाल क्रांति हो, महाराणा प्रताप के साथ देने वाले वीर आदिवासी योद्धा हों या सह्याद्री के घने जंगलों में छत्रपति शिवाजी महाराज को ताकत … Read more

मध्य प्रदेश में फ्री राशन घोटाला: 1.41 लाख लखपति उठा रहे गरीबों का हक

बुरहानपुर  मध्य प्रदेश में मुफ्त राशन योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. मुफ्त राशन योजना के तहत मध्य प्रदेश में 12 लाख ऐसे हितग्राही हैं जो मर चुके हैं. लेकिन विभाग उनको हर महीने पीडीएस का राशन दे रहा है. और जो वाकई में गरीब हैं वह राशन योजना से वंचित हैं. वहीं मध्य प्रदेश में 5 करोड़ से अधिक हितग्राही पीडीएस का राशन ले रहे थे. अब इनकी ई-केवायसी कराई जा रही है. जो बीपीएल कार्ड के लिए पात्र नहीं हैं, उनके नाम काटे जा रहे हैं. 141,000 से ज्यादा अमीर लोग खा रहे गरीबों का हक खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारी जारी सूची के मुताबिक, पूरे मध्य प्रदेश में 1 लाख 41 हजार 249 लखपति लोग फ्री राशन का लाभ उठा रहे थे. अब नोटिस के बाद 37 हजार 484 अपात्र लोगों के नाम हटा दिए हैं. बात की जाए बुरहानपुर जिले की तो यहां केंद्र सरकार ने खाद्य आपूर्ति विभाग को 1297 अमीर हितग्राहियों की सूची भेजी है. साथ ही पोर्टल डेटा से मिली सूचना ने बुरहानपुर जिले में चल रही गरीब कल्याण योजना की असलियत उजागर कर दी है. चौंकाने वाली बात यह है कि 10 से 20 लाख रुपये की संपत्ति रखने वाले लोग भी बीपीएल राशन कार्ड पर मुफ्त अनाज उठा रहे थे. 1297 लोगों को नोटिस जारी किए खाद्य आपूर्ति विभाग ने बुरहानपुर में 1297 लोगों को नोटिस जारी किए थे, उनसे जवाब मांगा गया था, लेकिन 282 बीपीएल कार्ड धारकों ने ही अब तक जवाब पेश किया है. फिलहाल विभाग ने 1015 लोगों के नाम हटा दिए हैं. हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इनके लोगों के भी नाम हटा दिए जाएंगे. जांच में सामने आया है कि पेटेंट से बंद किए गए 1297 कार्डधारियों के पास लाखों की संपत्ति, पक्के मकान, जमीन-जायदाद और आय के बेहतर स्रोत मौजूद हैं. कंपनी के डायरेक्टर ले रहे गरीबों का राशन इनमें से कई दुकानदार, व्यापारी और कंपनी के डायरेक्टर हैं, जो अच्छी खासी संपत्ति के मालिक हैं, फिर भी ये खुद को गरीब बताकर सरकारी खजाने पर बोझ बने हुए थे. विभाग ने 1015 के बीपीएल परिवारों की सूची से बेदखल कर दिया है. शेष ने नोटिस का जवाब दिया है, लेकिन इन्हें भी बेदखल कर दिया जाएगा, क्योंकि यह भी टेक्स भुगतान करते हैं, बावजूद इसके योजनाओं का लाभ और फ्री राशन के लिए गरीब बनकर लाभ उठा रहे थे. 282 लोगों ने स्वीकार की गलती विभाग की कार्रवाई के बाद 1297 में से केवल 282 लोगों ने अपनी गलती स्वीकार की है. इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने 1015 लोगों की पात्रता पत्री सरेंडर कराई है, बाकी कार्डधारी अभी भी अपने को सही ठहराने की कोशिश में लगे हैं. सूत्रों के अनुसार, इन लोगों ने गलत जानकारी देकर बीपीएल कार्ड बनवा लिए थे, आधार डेटा और सरकारी योजनाओं की लापरवाही का फायदा उठाकर सालों से मुफ्त राशन और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे. बुरहानपुर की खाद्य आपूर्ति अधिकारी अर्चना नागपुरे ने बताया, ''केंद्र सरकार ने ऐसे लोगों की सूची दी है जिनकी आय 6 लाख से ज्यादा होने पर भी उनके द्वारा फ्री राशन का लाभ लिया जा रहा था. शासन ने ऐसे लोगों की जांच करने के निर्देश दिए थे. अधिकतर उनमें अपात्र हैं, जिन्होंने इनकम टैक्स भरा. ऐसे लोगों को 15 दिन का टाइम दिया था. इनमें से 282 लोगों ने ही गलती स्वीकार की है. अभी तक हमने 1015 लोगों को पोस्टल से हटा दिया है.'' खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब ऐसे सभी फर्जी लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. दुकानदारों और कंपनियों के डेटाबेस की भी जांच शुरू कर दी गई है, सरकारी योजनाओं का लाभ अब केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही मिलेगा.