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दो दिन की हड़ताल का अलर्ट! 17-18 नवंबर को पंजाब में ठप रह सकती हैं सेवाएं

जालंधर पनबस-पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन की मांगों को लेकर सरकार के चल रहे मतभेद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे, जिसके चलते बार-बार बसों का चक्का जाम हो रहा है और यात्रियों को परेशानियां उठानी पड़ रही है। इसी क्रम में यूनियन ने घोषणा की है कि 17 नवम्बर को किलोमीटर स्कीम की बसों संबंधी टैंडर खुलते ही पंजाब में सरकारी बसों का चक्का जाम किया जाएगा। आज यूनियन के प्रतिनिधिमंडल की एक मीटिंग वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई जिसमें वक्ताओं द्वारा अपना विरोध जताया गया। मीटिंग के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान यूनियन के प्रदेश प्रधान रेशम सिंह गिल व महासचिव शमशेर सिंह ढिल्ली ने कहा कि आज की मीटिंग में हमेशा की तरह मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन कोई पक्का हल नहीं निकाला गया, जिसके चलते वह संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछली बार एक अहम मीटिंग में 1 माह के दौरान मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब कई माह बीत जाने के बावजूद मांगों का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि निजी बस कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किलोमीटर स्कीम के तहत नए टैंडर निकाले गए हैं, इसके विरोध में यूनियन द्वारा बार-बार विरोध किया जा रहा है। पिछली बार विभाग द्वारा टैंडरों को रद्द कर दिया गया और अब 17 नवम्बर को टैंडर खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में 17 नवम्बर को टैंडर खुलते ही पंजाब भर में यूनियन से संबंधित कर्मचारी बसों का चक्का जाम कर देंगे। इसी क्रम में 17 नवम्बर को बाद दोपहर 2 बजे वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तरों व सरकारी आवासों के बाहर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि 18 नवम्बर को पक्का मोर्चा लगाते हुए चंडीगढ़ में धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा जोकि मांगों का हल होने तक लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इसी के अन्तर्गत वह अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को मजबूर होंगे। इस मौके वरिष्ठ उप-प्रधान हरकेश कुमार विक्की ने कहा कि ठेकेदारी प्रणाली को तुरंत बंद किया जाए और कर्मचारियों को पक्का किया जाए। इस मौके ज्वाइंट सचिव जगतार सिंह ने कहा कि विभाग में पहले से ही कर्मचारियों की 

गीतांजलि कन्या कॉलेज की छात्राओं ने ज्ञान पर्यटन में जाना ग्रामीण जीवन का अनुभव

ज्ञान पर्यटन में छात्राओं ने जाना ग्रामीण जीवन का सार गीतांजलि सरकारी कन्या महाविद्यालय की केकड़िया (भोपाल) में शैक्षणिक यात्रा भोपाल अपर मुख्य सचिव पर्यटन संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड  शिव शेखर शुक्ला मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित “ज्ञान पर्यटन” श्रृंखला के अंतर्गत गीतांजलि सरकारी कन्या महाविद्यालय, भोपाल की छात्राओं ने केकड़िया (भोपाल) में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। अपर मुख्य सचिव पर्यटन संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड  शिव शेखर शुक्ला के मार्गदर्शन में कराए जा रहे इस भ्रमण का उद्देश्य छात्राओं में सांस्कृतिक जागरूकता, ग्रामीण परंपराओं से जुड़ाव, तथा सतत कृषि पद्धतियों (Sustainable Agricultural Practices) की समझ विकसित करना था। यह भ्रमण “ज्ञान पर्यटन” श्रृंखला का चौथा कार्यक्रम था।  जनजातीय संस्कृति से आत्मीय परिचय भ्रमण की शुरुआत पारंपरिक विधि से हुई, जहां छात्राओं का स्वागत स्थानीय जनजातीय समुदाय की महिलाओं ने गीत और नृत्य के साथ किया। इसके बाद छात्राओं ने स्थानीय हाट बाजार का भ्रमण किया, जहां उन्होंने जनजातीय जीवनशैली की गहराइयों को नजदीक से समझा। उन्होंने पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों (चोमड़ी), जनजातीय चिकित्सा पद्धतियों, स्थानीय कृषि उत्पादों, जैविक वस्तुओं, अनाज, गृह उपयोगी सामग्री और पारंपरिक हथियारों जैसे धनुष-बाणों का भी अवलोकन किया। इस अनुभव ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परंपरागत कौशल और हस्तकला किस प्रकार आज भी जीवंत हैं। इस यात्रा में कुल 49 छात्राएं सम्मिलित हुईं, उनके साथ डॉ. अनीता देभरतार और डॉ. मधु त्रिवेदी मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित रहीं। सीख और सहभागिता से भरी सक्रिय दिनचर्या यह भ्रमण सेफ टूरिज्म डेस्टिनेशन वुमन (STDW) परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षित सु वाणी राजपूत के निर्देशन में हुआ। छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने ट्रैकिंग, कुंभारकला (पॉटरी), बैलगाड़ी सवारी और स्थानीय खेलों व तीरंदाजी जैसी पारंपरिक गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण जीवन की सरलता और आत्मनिर्भरता का अनुभव किया। साथ ही उन्होंने फार्म टू प्लेट की अवधारणा को समझते हुए यह देखा कि किस प्रकार खेत से लेकर थाली तक भोजन की यात्रा होती है। छात्राओं ने सतत कृषि संबंधी प्रक्रियाओं जैसे फसल चक्र (Crop Rotation), ड्रिप सिंचाई तकनीक और पोषण खेती (Nutritional Farming) का व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त किया। दोपहर के भोजन में उन्हें ग्रामीण स्वाद का अनुभव कराते हुए मक्के की रोटी, कढ़ी, भाजी, टमाटर की चटनी, दाल और चावल जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे गए, जिन्हें स्थानीय महिलाओं ने तैयार किया था। संस्कृति और आस्था का संगम भ्रमण के अंतिम चरण में छात्राओं ने सामासगढ़ जैन मंदिर का दर्शन दिये, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों से इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ, छात्राओं ने लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से जनजातीय कलाकारों के साथ सहभागिता की और चाय-नाश्ते के दौरान अपने अनुभव साझा किए। साझे प्रयासों से सफल हुआ “ज्ञान पर्यटन” यात्रा के सफल आयोजन में विलेज वॉयस के राजेश साहू, केकड़िया के स्थानीय समन्वयक  फतेह सिंह, तथा टूरिज्म बोर्ड की कौशल शाखा टीम का विशेष योगदान रहा। इस शैक्षणिक भ्रमण ने छात्राओं में स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक कृषि ज्ञान और जनजातीय जीवनशैली के प्रति गहरी समझ और संवेदनशीलता विकसित की, जिससे वे न केवल पर्यटन की दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना के स्तर पर भी अधिक सशक्त बनीं। संचालन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की कौशल शाखा के अंतर्गत संचालक (कौशल) डॉ. डी.पी. सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। इससे पूर्व इसी श्रृंखला में बीएसएस कॉलेज का खारी (सीहोर) भ्रमण, बीएसएस कॉलेज का कोटरा (राजगढ़) भ्रमण, और नर्मदा पी.एम.सी.ओ.ई. कॉलेज का छेड़का (नर्मदापुरम) भ्रमण सफलतापूर्वक हो चुके हैं।  

कांग्रेस का बड़ा आरोप: जनहित की अनदेखी पर राज्यपाल को सौंपा विस्तृत ज्ञापन

चंडीगढ़  हरियाणा में लगातार बिगड़ते हालातों को लेकर बृहस्पतिवर को कांग्रेस ने राज्यपाल का दरवाज़ा खटखटाते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता के कारण किसानों, गरीबों और आम नागरिकों का जीवन संकट में पड़ गया है। ज्ञापन में भारी बारिश से हुए कृषि नुकसान, धान खरीद में अनियमितताओं, बढ़ते अपराध, और राशन कार्ड घोटाले सहित कई मुद्दों को उठाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह तथा पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कांग्रेस ने राज्यपाल से मांग की कि वे राज्य सरकार को अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करने के निर्देश दें। किसानों को मुआवज़ा दिया जाए, राशन कार्ड घोटाले की जांच कराई जाए, खरीद-फरोख्त की अनियमितताओं पर कार्रवाई हो और अपराधों को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं। कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश की जनता को सुरक्षित, पारदर्शी और न्यायपूर्ण शासन मिलना उनका अधिकार है और यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। ज्ञापन पर कांग्रेस विधायक दल, प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कई विधायकों ने हस्ताक्षर कर अपनी एकजुटता प्रकट की। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि बीते दिनों प्रदेश में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की खरीफ फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। धान, कपास और कई अन्य फसलें जलभराव में सड़ गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। राज्यपाल को बताया कि सरकार अभी तक न तो सही सर्वे करवा पाई है और न ही मुआवज़ा देने की कोई ठोस घोषणा की है। कई क्षेत्रों में खेत अब भी पानी में डूबे हुए हैं, जिससे अगली फसल बोने का समय निकलता जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत विशेष राहत पैकेज की घोषणा कर प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ पचास से साठ हज़ार रुपये का मुआवज़ा दे। धान और कपास औने-पौने दाम पर बिके पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बड़े-बड़े दावों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही 24 फसलों पर एमएसपी देने की बात करती है, लेकिन जमीन पर किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। धान, बाजरा, मूंगऔर कपास जैसी फसलों को किसान एमएसपी से सैकड़ों रुपये कम में बेचने को मजबूर रहे। कई मंडियों में अनियमित खरीद, फर्जी लेन-देन और किसानों को सही कीमत न मिलने की शिकायतें सामने आईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। कांग्रेस ने कहा कि सरकार की नीतियां किसान हितैषी होने का सिर्फ दिखावा कर रही हैं, जबकि हकीकत में किसानों के साथ निरंतर अन्याय हो रहा है।

तेजस्वी–अखिलेश की फोटो से गरमाई सियासत, बिहार में ‘अलविदा चाचा’ पोस्टर ने बढ़ाया तनाव

पटना  बिहार चुनाव की काउंटिंग 14 नवम्बर(शुक्रवार) को होने वाली है। कई एग्जिट पोल में में नीतीश कुमार की सरकार की वापसी दिखाई गई है तो एक पोल में तेजस्वी की नेतृत्व वाली महागठबंधन को आगे दिखाया गया है। काउंटिंग के नतीजों से पहले पटना में पोस्टर वॉर छिड़ गया है। जदयू ने नीतीश कुमार के पक्ष में टाइगर अभी जिंदा है का पोस्टर लगाया है तो आरजेडी ने तेजस्वी सरकार का दावा करते हुए अलविदा चाचा का। इस बीच बीजेपी की ऑफिस पर नरेंद्र, नीतीश भाई भाई के पोस्टर लगे हैं।   आरजेडी के कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों में नीतीश कुमार के साथ साथ अमित शाह को भी टारगेट किया गया है। तेजस्वी यादव के साथ यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी खड़े दिख रहे हैं। ऊपर लालू यादव के साथ मुलायम सिंह यादव की तस्वीर है। पोस्टर समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश युवा सपा अध्यक्ष धर्मवीर यादव ने लगवाया है। इसमें एसआईआर का भी जिक्र किया गया है। पोस्टर में लिखा गया है कि जनता हुंकार भरती है तो महलों की नींव उखड़ती है।सांसों के बल ताज हवा में उड़ती है, सिंहासन खाली करो कि तजस्वी सरकार आती है। नीतीश कुमार और अमिति शाह के कार्टून चित्र भी बनाए गए हैं। इसके पहले एग्जिट पोल के आंकड़ों से उत्साहित जदयू ने नीतीश कुमार को प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया है। पोस्टर में लिखा है- टाइगर अभी जिंदा है। उसमें नीतीश कुमार की आत्मविश्वास से भरी तस्वीर लगाई गई है। बताया गया है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से बिहार में एनडीए की सरकार बनने वाली है। उधर बीजेपी कार्यालय पर भी पोस्टर लगे हैं जिनमें नरेंद्र, नीतीश भाई भाई दर्शाया गया है। दिखाया गया है कि एडीए में सभी दलों के बीच मजबूती से एकजुटता कायम है। पोस्टरों में लालू यादव के जंगलराज का भी जिक्र है। पिछले दिनों पीएम मोदी ने महिलाओं से कहा था कि नरेंद्र और नीतीश कुमार आपके दो भाई हैं। लेकिन तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल के आंकड़ों को खारिज कर दिया है। कहा है कि पीएओ के प्रेशर में ये आंकडे़ तैयार किए गए हैं। महागठबंध के नेता तेजस्वी सरकार का दावा कर रहा है।

बिल्डिंग-17 की गुत्थी: आखिर क्यों सुर्खियों में आया अल फलाह यूनिवर्सिटी का रूम-13?

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (10 नवंबर) की शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार धमाका मामले की जाँच कर रही एजेंसियों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी स्थित डॉ. उमर नबी और डॉ. मुजम्मिल के कमरों से उनकी डायरियाँ बरामद की हैं। फरीदाबाद में करीब 70 एकड़ में फैला यह यूनिवर्सिटी अब आतंकी धमाके का केंद्र बनकर उभरा है, जहां आतंकियों ने न केवल प्लानिंग की बल्कि आतंक को अंजाम देने के लिए कई गुप्त बैठकें की औंर फंड की व्यवस्था की। एक पुलिस सूत्र ने बताया, "ये डायरियाँ मंगलवार और बुधवार को अल फलाह यूनिवर्सिटी कैम्पस के अंदर से बरामद की गईं। इनमें से एक डॉ. उमर के कमरा नंबर चार से और दूसरी डॉ. मुजम्मिल के कमरा नंबर 13 से बरामद की गईं हैं। डॉ. मुज़म्मिल का कमरा नंबर 13 अब सील कर दिया गया है, जहाँ से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और पेन ड्राइव भी बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल द्वारा इस्तेमाल किए गए एक अन्य कमरे से भी एक डायरी ज़ब्त की हैं। यह वही जगह है जहाँ से पहले 360 किलोग्राम विस्फोटक ज़ब्त किया गया था। यह कमरा यूनिवर्सिटी से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। रूम नंबर 13 का रहस्य पुलिस सूत्रों ने बताया, "बरामद डायरियों और नोटबुक्स में कोड शब्द हैं, जिनमें 8 नवंबर से 12 नवंबर के बीच की तारीखों का ज़िक्र है। डायरियों में 'ऑपरेशन' शब्द कई बार लिखा गया है।" पुलिस सूत्रों ने बताया कि डॉ. उमर और उनके साथी अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 में गुप्त रूप से मिलते थे। इसी बिल्डिंग का कमरा नंबर 13 डॉ. मुज़म्मिल का था, जहाँ आतंकवादी अक्सर मिलते थे। पुलिस को शक है कि इसी कमरे में उन्होंने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में विस्फोट करने की योजना बनाई थी। यूनिवर्सिटी की लैब से जुटाए केमिकल सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों ने सबसे पहले यूनिवर्सिटी की लैबोरेटरी से बम बनाने के लिए रसायनों की तस्करी करने की योजना बनाई थी। यह लैब मुज़म्मिल के कमरे से कुछ ही मीटर की दूरी पर है। विश्वविद्यालय के दोनों फैकल्टी मेंबर डॉ. उमर और डॉ. शाहीन, रसायनों का प्रबंध करने में कामयाब रहे। फिर उन्हें फरीदाबाद के धौज और तागा गाँवों में किराए के मकानों में रखा गया। 26 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई सूत्रों ने यह भी बताया है कि ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों ने लाल किले के पास विस्फोट में इस्तेमाल की गई सामग्री खरीदने के लिए 26 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि चार संदिग्धों – डॉ मुजम्मिल गनई, डॉ अदील अहमद राथर, डॉ शाहीन सईद और डॉ उमर नबी ने मिलकर नकद राशि जमा की थी, जिसे सुरक्षित रखने और आगे इस्तेमाल के लिए डॉ उमर को सौंप दिया गया था। डॉ. उमर चला रहा था आई20 कार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी और और अल फलाह में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत डॉ. उमर सोमवार की शाम को लाल किले के व्यस्त इलाके में हुए विस्फोट में इस्तेमाल हुंडई आई20 कार चला रहा था। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि यह धनराशि एक बड़ी आतंकी साजिश के लिए थी। जमा की गई इस राशि से आतंकियों ने कथित तौर पर गुरुग्राम, नूंह और आसपास के शहरों से लगभग 3 लाख रुपये मूल्य का लगभग 26 क्विंटल एनपीके खाद खरीदा था। आतंकियों के बीच धन के लेन-देन को लेकर थे मतभेद अधिकारियों ने बताया कि अन्य रसायनों के साथ मिश्रित इस उर्वरक का इस्तेमाल आमतौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने में किया जाता है। सूत्रों ने पहले बताया था कि दिल्ली विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट और ईंधन तेल युक्त विस्फोटक यौगिक एएनएफओ की एक अनिर्दिष्ट मात्रा का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि समूह द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में खाद की खरीद, जांच में एक अहम सुराग बन गई है। उन्होंने बताया कि वित्तीय लेन-देन और आपूर्ति रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि विस्फोट से पहले के दिनों में उमर और मुजम्मिल के बीच धन के लेन-देन को लेकर मतभेद था। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस विवाद की वजह से इस समूह की योजनाओं या हमले के समय पर असर पड़ा?  

उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: कर्मचारी नगर विद्युत उपकेंद्र की क्षमता बढ़ी

दुर्ग छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड दुर्ग क्षेत्र ने मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के तहत जवाहर नगर जोन के अंतर्गत 33/11 के.व्ही. विद्युत उपकेंद्र(सबस्टेशन) कर्मचारी नगर की क्षमता मंे महत्वपूर्ण वृद्धि की है। उपकेंद्र में 65.99 लाख रुपये की लागत से 3.15 एमवीए का एक अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है, जिसे 12 नवंबर 2025 को सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया। इस अतिरिक्त ट्रांसफार्मर के लगने से उपकेंद्र की कुल क्षमता 10 एमवीए से बढ़कर 13.15 एमवीए हो गई है। उक्त कार्य उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले लगभग 4000 उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रब्यूशन कंपनी लिमिटेड, दुर्ग क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री संजय खंडेलवाल ने बताया कि पूर्व में सबस्टेशन में स्थापित 05 एमवीए के दोनों ट्रांसफार्मर अक्सर ओवरलोड हो जाते थे, जिसके कारण लो वोल्टेज और लोड षेडिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर लगने से अब इन समस्याओं से बड़ी राहत मिलेगी और विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ होगी। क्षमता वृद्धि से आईएचएसडीपी कॉलोनी, जयंती नगर, साईं नगर, सिकोला भाटा, सिकोला बस्ती, मुखर्जी नगर, प्रेम नगर, विजय नगर, मोहन नगर, करहीडीह एवं रांका के लगभग 4000 उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। श्री खंडेलवाल ने इस महत्वपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए अधीक्षण अभियंता षहर वृत्त श्री जे.जगन्नाथ प्रसाद, कार्यपालन अभियंता एस.के.रॉय एवं श्री आर.के.दानी सहित सहायक अभियंताओं श्रीमती मोनिका नायर, श्रीमती रुचि सैलेट, श्री राजेन्द्र गिरी गोस्वामी, श्री ढालेश्वर साहू एवं श्री महेन्द्र कुमार साहू तथा उनकी पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि पॉवर कंपनी के अधिकारी एवं कर्मचारी उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाने के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहें हैं।

RBSE परीक्षा 2025: अब रेगुलर और प्राइवेट विद्यार्थियों को देनी होगी ज़्यादा फीस

अजमेर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की फीस में बढ़ोतरी कर दी है। अब रेगुलर और प्राइवेट, दोनों ही श्रेणी के विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क के रूप में 850 रुपये जमा कराने होंगे। इससे पहले रेगुलर विद्यार्थियों से 600 रुपये और प्राइवेट विद्यार्थियों से 650 रुपये परीक्षा शुल्क लिया जाता था। बोर्ड ने प्रायोगिक परीक्षा यानी प्रैक्टिकल एग्जाम की फीस भी दोगुनी कर दी है, जो अब प्रति विषय 200 रुपये होगी। बढ़ी हुई फीस आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। राजस्थान बोर्ड ने इस फीस वृद्धि के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा था, जिसे स्वीकृति मिल गई है। शिक्षा विभाग के शासन उप सचिव राजेश दत्त माथुर ने फीस बढ़ोतरी के आदेश जारी किए हैं। बताया गया कि 2017 के बाद यह पहली बार है जब बोर्ड परीक्षा शुल्क में संशोधन किया गया है। अब रेगुलर विद्यार्थियों को 250 रुपये और प्राइवेट विद्यार्थियों को 200 रुपये अधिक शुल्क देना होगा। हर साल बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में करीब 20 लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में इस फैसले से बोर्ड की आय में बड़ा इजाफा होगा। वर्तमान में बोर्ड को परीक्षा शुल्क के जरिए लगभग 130 करोड़ रुपये और अन्य स्रोतों जैसे संबद्धता शुल्क, संशोधन शुल्क व प्रतिलिपि प्रलेखों से करीब 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होती थी। यानी कुल आय लगभग 150 करोड़ रुपये के आसपास थी। अब बढ़ी हुई फीस से यह राशि और अधिक हो जाएगी। फीस वृद्धि के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में 16 अक्टूबर को जयपुर में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में तत्कालीन बोर्ड सचिव कैलाश चंद्र शर्मा, ओएसडी नीतू यादव, एफए रश्मि बिस्सा, निदेशक शैक्षिक दर्शना शर्मा और शासन उप सचिव राजेश दत्त माथुर मौजूद रहे। सभी सदस्यों की सहमति से परीक्षा शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि परीक्षा शुल्क की समीक्षा अब हर तीन वर्ष में एक बार की जाएगी ताकि समय-समय पर आवश्यकतानुसार संशोधन किया जा सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले आठ वर्षों में मुद्रास्फीति, परीक्षा आयोजन की लागत, पेपर प्रिंटिंग, सेंटर प्रबंधन और मूल्यांकन खर्च में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में परीक्षा शुल्क बढ़ाना जरूरी हो गया था ताकि बोर्ड की आर्थिक स्थिति संतुलित रह सके और परीक्षाओं के आयोजन की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। बोर्ड के अनुसार, बढ़े हुए शुल्क से न केवल परीक्षा संचालन की लागत की पूर्ति होगी बल्कि डिजिटलाइजेशन, उत्तर पुस्तिकाओं के बारकोडिंग सिस्टम, ऑनलाइन मूल्यांकन और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सकेगा। शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी अगले सत्र से लागू होगी और वर्तमान (2025-26) सत्र में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बोर्ड का कहना है कि यह निर्णय छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर और लंबे समय के संतुलन को देखते हुए लिया गया है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इस घोषणा से जहां स्कूल प्रशासन ने राहत की सांस ली है। वहीं कुछ विद्यार्थी संगठनों ने इसे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। हालांकि, शिक्षा विभाग का तर्क है कि 2017 के बाद पहली बार फीस बढ़ाई गई है और यह बढ़ोतरी व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए अपरिहार्य थी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया रक्तदान, मेगा ब्लड डोनेशन महाअभियान की हुई शुरुआत

रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित मेगा रक्तदान शिविर में रक्तदान कर स्वैच्छिक रक्तदान महा अभियान का शुभारंभ किया। झारखंड की 25वीं वर्षगांठ के अव सर पर रक्तदान शिविर महाअभियान पूरे राज्य में 28 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रक्तदान महादान का संदेश देते हुए कहा कि आपका दिया रक्त जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने के काम आ सकता है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से स्वैच्छिक रक्तदान महा अभियान के तहत आयोजित होने वाले शिविरों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य की 25वीं वर्षगांठ एक नए संकल्प के साथ हमारा राज्य आगे बढ़ाने को तैयार है। अब पूरा राज्य जीवनदान का केंद्र बनेगा. इस बाबत स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा 12 से 28 नवंबर तक पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक रक्तदान अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अलग-अलग स्थान पर विशेष रक्त दान शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोग स्वैच्छिक रक्तदान कर सकेंगे। इस अभियान का उद्देश्य राज्य में रक्त की कमी को पूरा करना और हर जरूरतमंद तक सुरक्षित रक्त पहुंचाना है। अस्पताल में रक्त की कमी से किसी की जिंदगी की सांसे थमे नहीं, इसे सुनिश्चित करना हम सभी का परम उत्तरदायित्व है। ऐसे में हम सभी मिलकर झारखंड को जीवनदायिनी राज्य बनाने ला संकल्प लें। स्वैच्छिक रक्तदान महा अभियान के शुभारंभ के मौके पर मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री हफीजुल हसन, मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो, मंत्री सुदिव्य कुमार, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।

जल संरक्षण में उत्कृष्ट पहल के लिए गुना नगरीय निकाय को राष्ट्रीय सम्मान, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

जल संचय के क्षेत्र में श्रेष्ठ पहल पर गुना नगरीय निकाय को मिला पुरस्कार राष्ट्रपति करेंगी 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में गुना को पुरस्कृत भोपाल गुना नगरीय निकाय को जल संचय के क्षेत्र में जन भागीदारी के साथ श्रेष्ठ कार्य करने पर देश की चयनित 50 नगरीय निकाय में स्थान मिला है। राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु 18 नवम्बर को नई दिल्ली में गुना नगरीय निकाय को पुरस्कृत करेंगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोडवें ने गुना नगर पालिका परिषद एवं उनकी टीम को श्रेष्ठ नगरीय निकायों की श्रेणी में चयन होने पर बधाई दी है। लक्ष्य से अधिक तैयार की गई पुनर्भरण जल संरचनाएँ केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने देश में जनभागीदारी से जल संचय की बेहतर पहल के लिये प्रशासन तंत्र में हर स्तर पर पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की थी। गुना नगर पालिका परिषद ने जल संचय के लिये कार्ययोजना बनाकर नगरीय क्षेत्र में 2 हजार 231 रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जिया टैग फोटो पोर्टल पर अपलोड किये। यह तय लक्ष्य से अधिक है। इसी के साथ गुना शहरी क्षेत्र में उपलब्ध कुंओं का भी जीर्णोद्वार कर उनका पुनर्जीवन का कार्य किया गया। दल का गठन गुना नगर पालिका ने जल संचय के कार्य को करने के लिये दल का गठन किया था। गठित दल ने इस वर्ष मई माह के दौरान शासकीय और निजी परिसर, स्कूल, कॉलेज, छात्रावास और मल्टी स्टोरी बिल्डिंगस, निजी कॉलोनियाँ, कुंआ और बावड़ी का सर्वे कराया। सर्वे रिपोर्ट के बाद जनभागीदारी से 2 हजार 231 रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को तैयार किये गये और पहले से उपलब्ध सिस्टम की मरम्मत सुनिश्चित की गई।  

नवीन तालाब बना गांव की जीवनधारा

राधारमण नगर के ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान रायपुर, ग्राम पंचायत सोनवर्षा के ग्राम राधारमणनगर के ग्रामीणों के लिए नया तालाब किसी वरदान से कम नहीं है। कभी जहां गर्मियों में बूंद-बूंद पानी के लिए लोगों को मीलों पैदल चलना पड़ता था, वहीं आज यह तालाब ग्रामीणों की प्यास बुझाने के साथ-साथ खेती और आजीविका का आधार बन चुका है। यह परिवर्तन संभव हुआ है महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत कराए गए नवीन तालाब निर्माण कार्य से, जिसकी लागत 12.80 लाख रुपए रही। जल संकट से जूझते गांव में जल जीवन का नया अध्याय राधारमणनगर गांव लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या से गुजर रहा था। यहां का भूमिगत जल स्तर लगभग 450 फीट से नीचे चला गया था, जिससे हैंडपंप सूख जाते थे और गर्मियों में ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता था। ऐसे में ग्राम पंचायत सोनवर्षा द्वारा खदान के पास जल संरक्षण और संचयन के उद्देश्य से नया तालाब बनवाया गया। यह तालाब अब वर्षा जल को सुरक्षित रखता है और साल भर ग्रामीणों के उपयोग के लिए जल उपलब्ध कराता है। तकनीकी दृष्टि से मजबूत निर्माण – हर बूंद का संरक्षण तालाब निर्माण के दौरान तकनीकी पहलुओं का विशेष ध्यान रखा गया। इसके बांध की चौड़ाई और ऊंचाई को इस तरह मापा गया कि वर्षा का पानी सुरक्षित रूप से जमा रहे और बांध को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। साथ ही, तालाब की गहराई को अधिक रखा गया ताकि जल लंबे समय तक टिक सके। कार्य का क्रियान्वयन पूरी तरह महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत के मार्गदर्शन में किया गया, जिससे न केवल जल संरक्षण हुआ बल्कि निर्माण के दौरान ग्रामीणों को रोजगार भी मिला। परिवर्तन की दिशा में मील का पत्थर तालाब निर्माण के बाद गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां खेत सूख जाते थे और फसलें मुरझा जाती थीं, वहीं अब तालाब के आसपास की जमीन में नमी बनी रहती है। इससे खेतों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों के चेहरों पर अब संतोष की मुस्कान है क्योंकि उनकी मेहनत अब फसल के रूप में रंग ला रही है। आजीविका का नया साधन – मछली पालन से बढ़ी आय तालाब केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं रहा, बल्कि इसने ग्रामीणों को नई आय का स्रोत भी प्रदान किया है। ग्राम राधारमणनगर के ग्रामीण बाबू सिंह, जीत नारायण (जॉब कार्ड नं. 001/29) तथा श्री एक्का प्रसाद और रविशंकर (जॉब कार्ड नं. 001/79) ने मिलकर तालाब में 3000 मछली बीज छोड़े हैं। इन ग्रामीणों द्वारा तालाब का नियमित रूप से रखरखाव किया जा रहा है। मछली पालन से उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। साथ ही, तालाब का पानी अब सिंचाई के लिए भी उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे खेतों में सालभर हरियाली बनी रहती है। ग्रामीणों की जुबान – अब पानी की नहीं कोई कमी ग्राम के निवासी श्री बाबू सिंह कहते हैं कि पहले गर्मियों में हमें पानी के लिए बहुत परेशानी होती थी। तालाब बनने से अब न केवल पीने और निस्तार का पानी मिलता है बल्कि खेतों की सिंचाई भी आसानी से हो जाती है। मछली पालन से हमें अतिरिक्त आमदनी का साधन मिला है। यह तालाब हमारे लिए अमृत सरोवर से कम नहीं। स्थायी विकास की मिसाल बना राधारमण नगर आज सोनवर्षा-राधारमण नगर गांव का यह तालाब जल संरक्षण, संचयन और आजीविका संवर्धन का प्रेरक उदाहरण बन गया है। इस कार्य ने यह साबित कर दिया है कि यदि सामूहिक प्रयास और तकनीकी समझदारी के साथ योजनाओं को क्रियान्वित किया जाए, तो किसी भी क्षेत्र में जल संकट जैसी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। ग्राम पंचायत सोनवर्षा का यह प्रयास मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जल प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल बन चुका है, जो अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। हर बूंद में समाई उम्मीद राधारमण नगर का यह नवीन तालाब सिर्फ पानी का भंडार नहीं, बल्कि गांव की खुशहाली का प्रतीक बन चुका है। इससे न केवल जल संरक्षण सुनिश्चित हुआ है, बल्कि रोजगार, कृषि और मछली पालन के माध्यम से ग्रामीणों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह कहानी बताती है कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो हर बूंद से बदलाव संभव है, और यही तालाब उस परिवर्तन का साक्षी है जिसने गांव को आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर किया है।