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राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करोड़ों की लागत से विकास परियोजनाओं का शुभारंभ

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने करोड़ों के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन पेयजल के लिए बिछेगी 120 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन, 9 ओवरहेड टैंक भी बनेंगे भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि पेयजल आपूर्ति को अधिक सुचारू और सुगम बनाने के लिए गोविंदपुरा क्षेत्र में 65 करोड़ रुपए की लागत से 9 ओवरहेड टैंक और 120 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाने के कार्य किए जाएंगे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की भविष्य में पानी की जरूरत को ध्यान में रखकर यह निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इससे जनता की बहुप्रतिक्षित मांग पूरी होगी और नर्मदा का पानी घर-घर पहुंचेगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार जनता से किये गए वादों को प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 65 करोड़ रुपए की लागत से 9 पानी की टंकियों के निर्माण का कार्य किया जाएगा, जिनकी क्षमता 20 से 25 लाख लीटर होगी और 120 किलोमीटर की पेयजल पाइप लाइन को बिछाने का कार्य किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्रवासियों को स्वच्छ एवं नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने वार्ड 55 स्थित अमराई परिसर में 1 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत के 20 लाख लीटर क्षमता वाले ओवरहेड टैंक के साथ ही वार्ड 60 में 1 करोड़ 55 लाख की लागत से प्रस्तावित पेयजल पाइप लाइन निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। उन्होंने वार्ड 56 के साकेत नगर स्थित पंचवटी मार्केट परिसर में 1 करोड़ 74 लाख की लागत की पानी की टंकी के और पेयजल पाइप लाइन के निर्माण कार्य को भी क्षेत्रवासियों को सौगात दी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने लहारपुर में 1.75 लाख रुपए की लागत से निर्मित होने वाली पेयजल टंकी एवं पेयजल पाइप लाइन कार्य के साथ साथ सोनागिरी ए सेक्टर, वार्ड 64 में 2 करोड़ 3 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित पेयजल टंकी निर्माण एवं पाइप लाइन बिछाने के कार्य का भी भूमि-पूजन किया। कार्यक्रम में श्रीमती मोनिका ठाकुर, श्रीमती शीला पाटीदार, श्रीमती छाया ठाकुर, श्रीमती अर्चना परमार, श्री संतोष ग्वाला, श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री प्रताप वारे, श्री प्रताप सिंह बैस, श्री बी शक्तीराव, श्री गणेश राम नागर, श्री प्रदीप पाठक, श्री सुरेंद्र घोटे, श्री किशन बंजारे सहित जनप्रतिनिधि और सैकड़ों की संख्या स्थानीय रहवासी मौजूद रहे। 

इंदौर में 13 नवंबर को होगी टेकग्रोथ कॉन्क्लेव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में 13 नवंबर को आयोजित होने वाला 'मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' प्रदेश को तकनीक, नवाचार और निवेश का वैश्विक केंद्र बनायेगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किये जा रहे इस आयोजन से राज्य की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति के अगले चरण की रूपरेखा तय की जायेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि मध्यप्रदेश टियर-2 भारत की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सके। कॉन्क्लेव में राज्य सरकार का टेक्नोलॉजी-फर्स्ट इकोनॉमी विजन भी प्रस्तुत किया जायेगा। इसमें दर्शाया जाएगा की मध्यप्रदेश नवाचार, कौशल और उद्यमिता के समन्वय से समावेशी आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव के प्रतिभागी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठक भी करेंगे। कॉन्क्लेव की थीम 'पॉवरिंग टियर-2, प्रोपेलिंग इंडिया' रखी गई है। कॉन्क्लेव 2.0 का उद्देश्य राज्य के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार, निवेश और सहयोग के माध्यम से नई गति लाना है। कॉनक्लेव की थीम इस तथ्य को रेखांकित करेगी कि भारत की विकास यात्रा में अब टियर-2 शहर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। मध्यप्रदेश इस परिवर्तन का केंद्र बन रहा है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जौसे शहर तेजी से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और उद्यमिता के नए हब के रूप में उभर रहे हैं।’ टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' नीति-निर्माताओं, वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख नेतृत्वकर्ता उद्यमियों का संगम होगा। कॉनक्लेव में इस बार 500 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। कॉन्क्लेव का शुभारंभ "एमपी जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट" सत्र से होगा। इस सत्र में देशभर के 30 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसीएस) के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह संवाद सत्र मध्यप्रदेश को पसंदीदा जीसीसी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर केंद्रित रहेगा। इस दौरान "एमपी जीसीसी विज़न डॉक्यूमेंट" तैयार किया जाएगा, जो राज्य की दीर्घकालिक टेक्नोलॉजी रणनीति का आधार बनेगा। मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में “ड्रोन राउंडटेबल” का आयोजन भी होगा।इसमें नीति-निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ और ड्रोन इनोवेशन कंपनियाँ भाग लेंगी। सत्र में राज्य के ड्रोन ईकोसिस्टम, विनिर्माण अवसरों, सरकारी सेवाओं और औद्योगिक उपयोगों में ड्रोन तकनीक के विस्तार पर केंद्रित रहेगा। मुख्य सत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे संबोधित करेंगे। उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि जीसीसी, ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, सेमीकंडक्टर, ईएसडीएम, स्पेसटेक, डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश और नवाचार की दिशा में अपने विचार साझा करेंगे।मुख्य सत्र में नई डिजिटल अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन, आईटी पार्कों और स्किल सेंटर्स की आधारशिला, नए निवेशकों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट का वितरण और एमओयू व साझेदारी समझौतों पर हस्ताक्षर किये जायेंगे। मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 से राज्य में तकनीकी निवेश और रोजगार सृजन को नई दिशा मिलेगी। कॉन्क्लेव के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से नई डिजिटल नीतियों और तकनीकी पहलों की घोषणाएँ की जाएँगी। इन नीतियों का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार को प्रोत्साहन, निवेश को आकर्षित करना और स्किल डेवलपमेंट को सशक्त बनाना है। कॉन्क्लेव में आईटी-आईटीईएस, सेमीकंडक्टर, ईएसडीएम, ड्रोन, स्पेसटेक, एवीजीसी-एक्सआर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से जुड़े अग्रणी उद्योग, निवेशक, शिक्षण संस्थान, और उद्योग संगठन शामिल होंगे। यह आयोजन राज्य में नवाचार-आधारित निवेश वातावरण और मजबूत सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) को बढ़ावा देगा। 'मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0' में अप्रैल 2025 में आयोजित उल्लेखनीय सफलता मिली। कॉनक्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे और 75 हजार से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ था। इस सफलता के आधार पर 'टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' को और भी व्यापक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। आयोजन में भाग लेने के इच्छुक संगठन और उद्यमी https://mpsedc.mp.gov.in/mptgc2025/Registration पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक प्रतिभागी इन्वेस्टमेंट प्रमोशन सेल की प्रभारी अधिकारी सुश्री अवंतिका वर्मा, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से दूरभाष 0755- 2518704 अथवा ईमेल ipcell-mp@mpsedc.com पर सम्पर्क कर सकते हैं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले — संस्कार ही जीवन परिवर्तन की कुंजी हैं

संस्कार से ही जीवन में आता है बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने बीएपीएस के दो बड़े शिक्षा प्रकल्पों का किया शुभारंभ इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स आईपीडीसी का हुआ एमओयू भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कार से ही जीवन में बदलाव आता है। हमारी सनातन संस्कृति अद्भुत है। भारत को सदैव विश्व गुरू के रूप में दुनिया देखती आई है। भारत में ही अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने की समस्त संभावनाएं निहित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीएपीएस संस्था के वैश्विक प्रयासों की सराह करते हुए कहा कि अबूधाबी में बना भव्य बीएपीएस हिंदू मंदिर अद्भुत है। उनके प्रमुख महंत का जबलपुर का होना हम सभी प्रदेशवासियों के लिये गौरव की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जबलपुर में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा आयोजित जीवन उत्कर्ष महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महोत्सव में बीएपीएस के 2 पाठयक्रम 'चलो बनें आदर्श' और 'इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स' (आईपीडीसी) का शुभारंभ किया। इन पाठयक्रमों का उद्देश्य स्कूली बच्चों और युवाओं को संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा देना है। महोत्सव में मंगलायन यूनिवर्सिटी और रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर्स ने कोर्स से संबंधित एमओयू का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवालयों में दिव्य कल्पनाओं को साकार होते देखा जा सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बीएपीएस जैसी संस्थाएं हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। मुख्यामंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामीनारायण संस्था दुनिया को पहचानने और स्वयं को जानने के लिये आम व्यक्ति का प्रशंसनीय मार्गदर्शन कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीएपीएस का "परिवर्तन की यात्रा" का मध्यप्रदेश से शुभारंभ करने के लिए संस्था का अभिनंदन करते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर को ईश्वर और माँ नर्मदा ने परम सौभाग्य दिया है, जिसकी बदौलत आज संस्था के द्वारा महत्वपूर्ण कार्यों की शुरूआत यहां से की जा रही है। यहाँ आने से केवल एक दैवीय आशीर्वाद ही नहीं मिलता, बल्कि यहाँ से जाने वाले जन्म-जन्मांतर तक महंत स्वामियों से भी दुनिया भर के संतों का आशीर्वाद मिलता है। यहाँ के वातावरण में एक ऐसी ऊर्जा है जो हमें निरंतर प्रेरित करती है। साथ ही कहा कि आज़ादी के अमृत काल में हमें वही आत्मविश्वास मिला है जो आत्मबल हमारे भीतर भगवान ने रखा था, वही अब पुनः प्रकट हो रहा है। अब मध्यप्रदेश में भी हुई शुरुआत बीएपीएस संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य ज्ञानानंद स्वरूप स्वामी जी ने प्रकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि 'चलो बनें आदर्श' प्रकल्प वीडियो के माध्यम से प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों में बचपन से ही जीवन मूल्यों की सुदृढ़ आधारशिला रखता है। यह प्रोजेक्ट पहले से ही गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित पांच राज्यों की 23 हजार शालाओं में सफलतापूर्वक चल रहा है, जिसका लाभ 45 लाख से अधिक विद्यार्थी ले रहे हैं। बीएपीएस संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य ज्ञानानंद स्वरूप स्वामी जी ने कहा कि कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए 'इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स' (आईपीडीसी) का भी शुभारंभ किया है। यह कोर्स युवाओं को नकारात्मकता, मोबाइल की लत, नशीले पदार्थों और डिप्रेशन जैसे संकटों से निकालकर उन्हें भारतीय सनातन मूल्यों से जोड़ने का काम करेगा। इस अवसर पर संतगण, लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह और जबलपुर के महापौर  जगत बहादुर सिंह, संभागायुक्त  धनंजय सिंह, आईजी  प्रमोद वर्मा, कलेक्ट्र  राघवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वामी नारायण मंदिर में गुरु पूजन विधि में हुये शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव रसल चौक के समीप स्थित  स्वामी नारायण मंदिर में गुरु पूजन विधि में शामिल हुये। मुख्यमंत्री ने परब्रह्म भगवान स्वामी नारायण के छठें आध्यात्मिक अनुगामी ब्रह्मस्वरूप महंत स्वामी जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। गुरु पूजन विधि ब्रह्म बिहारी स्वामी जी ने संपन्न कराई।  

महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में बढ़े आत्मसमर्पण का असर अब MP में, सुनीता के बाद कई माओवादी होंगे सरेंडर

भोपाल  बालाघाट में 31 अक्टूबर को 22 वर्ष की महिला माओवादी सुनीता सियाम के समर्पण के बाद मध्य प्रदेश में कुछ और माओवादी जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकते हैं। दरअसल, बालाघाट और मंडला में सक्रिय कुछ माओवादी दलम छोड़ चुके हैं। वे लगभग एक माह से दिखाई नहीं दिए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ये भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं। सुनीता ने पुलिस को बताया है कि महाराष्ट्र में समर्पण करने वाले सोनू और भूपेश से प्रभावित होकर उसने यह कदम उठाया है। महाराष्ट्र में ही समर्पण करने वाले भूपति ने वीडियो जारी कर माओवादियों को समर्पण करने की अपील की है। वीडियों में उसने कहा कि अब परिस्थितियां बदल गई हैं, इसलिए हमें कानून के दायरे में रहकर अब काम करना होगा। माना जा रहा है कि इसका माओवादियों पर बड़ा असर हुआ है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि माओवादियों ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को एक जोन (एमएमएसी) में रखा है। और भी माओवादी कर सकते हैं समर्पण बता दें कि माओवादियों के संगठन में सबसे नीचे श्रेणी में गांव या एरिया कमेटी होती है। सुनीता इसकी सदस्य थी। वह सेंट्रल कमेटी सदस्य (सीसीएम) रामदेर के गार्ड के रूप में काम कर रही थी। रामदेर ने सुनीता को बताया था कि सोनू दादा, रुपेश दादा व उनके साथियों ने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पुलिस के सामने समर्पण कर दिया है। इसके बाद से ही मप्र में सक्रिय माओवादी समर्पण करने पर विचार कर रहे हैं। पुलिस से पूछताछ में सुनीता ने यह जानकारी दी है। मध्य प्रदेश में 60 महिला माओवादी सक्रिय बता दें कि पहली बार प्रदेश में किसी महिला माओवादी ने समर्पण किया है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर की रहने वाली सुनीता वर्ष 2022 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। उस पर 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस की खुफिया जानकारी के अनुसार, प्रदेश में लगभग 60 माओवादी सक्रिय हैं, जिनमें आधे से अधिक महिलाएं हैं। इस वर्ष पुलिस मुठभेड़ में नौ महिला माओवादी मारी जा चुकी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से माओवादी समस्या को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस कारण माओवादियों की चौतरफा घेराबंदी की जा रही है। अब आगे क्या सुनीता से पुलिस पूछताछ कर रही है। इसके बाद उसका प्रकरण राज्य की समर्पण नीति 2023 के अनुसार राज्य स्तरीय समिति के पास भेजा जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि उस पर दर्ज प्रकरण के अनुसार समर्पण की पात्रता है या नहीं। दरअसल, समर्पण नीति के अपराधों को माफ करने का नियम नहीं है। सरकार की तरफ से उसे सुरक्षा देने के साथ ही पुनर्वास के प्रबंध भी नीति के अनुसार किए जाएंगे।

CM मोहन यादव का निर्देश: उत्तर प्रदेश की भूमि अधिग्रहण नीति का करेंगे अध्ययन अधिकारी

भोपाल मध्य प्रदेश उद्योग विभाग के अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक विकास से जुड़े कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण नीति का अध्ययन करने उत्तर प्रदेश जाएंगे। उन नीतियों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश में भी उसका अनुपालन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री से समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास, निर्यात संवर्धन, एनआरआई और निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री ने मंत्री गुप्ता सहित मध्य प्रदेश के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की है। बैठक में मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री गुप्ता को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तैयार की गई 18 प्रकार की नई औद्योगिक नीतियों की प्रतियां भी भेंट की। बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत हाड़ौता में गुरुवार को होगी ‘नारी चौपाल’

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार सक्षम जयपुर अभियान एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत जयपुर जिले के प्रत्येक उपखंड पर नारी चौपाल आयोजित की जा रही है। इसी कड़ी में 6 नवंबर को चौमूं के हाड़ौता स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में चौपाल होगी। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने नारी चौपाल के सफल आयोजन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं एवं आयोजन में अधिक से अधिक महिलाओं एवं बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किये हैं। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं  प्रशिक्षु आईएएस श्री मृणाल ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त एवं जागरूक बनाना है। नारी चौपाल में महिलाओं को सरकार की योजनाओं, अधिकारों और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी, साथ ही उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना जाएगा। महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश डोगीवाल ने बताया कि मंगलवार को प्रातः 10 बजे से 2 बजे तक चलने वाली चौपाल में नुक्कड़ नाटक, मारवाड़ी गीत, आत्मरक्षा प्रशिक्षण सहित अन्य गतिविधियां आकर्षण का केन्द्र रहेंगी।   नारी चौपाल के माध्यम से समाज में लिंगानुपात सुधार, महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने, तथा महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया जाएगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं, नियमों और अधिनियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि समतामूलक समाज का निर्माण हो सके। नारी चौपाल कार्यक्रमों में महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा, शिक्षा, पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे। ये अधिकारी महिलाओं के साथ सीधा संवाद कर उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, पोषण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर जागरूक करेंगे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को प्रेरित करने के लिए सफलता की कहानियाँ और अनुभव भी साझा किए जाएंगे। साथ ही चौपाल स्थल पर योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सहायता काउंटर भी लगाए जाएंगे, ताकि महिलाओं को मौके पर ही आवश्यक जानकारी और सहयोग मिल सके। नारी चौपाल महिलाओं के लिए केवल संवाद का मंच नहीं होगा, बल्कि यह उन्हें आत्मविश्वास, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने का अवसर भी प्रदान करेगा। इससे महिलाओं तक सरकार की योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचेंगी और समाज में उनकी भागीदारी और अधिक मजबूत होगी। नारी चौपाल श्रृंखला से जिले की हजारों महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगी।

नगरीय प्रशासन विभाग ने टोल-फ्री नम्बरों 1033 व निदान-1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा

रायपुर : घुमंतू पशुओं के कारण होने वाले दुर्घटनाओं को रोकने एक माह तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश नगरीय प्रशासन विभाग ने टोल-फ्री नम्बरों 1033 व निदान-1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा  कलेक्टरों, निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी किया परिपत्र परिवहन विभाग के एसओपी के अनुसार कार्यवाही करने और खुले में पशुओं को नहीं छोड़ने हेतु पशु मालिकों को जागरूक करने कहा विभाग ने सभी निकायों को की गई कार्यवाही की जानकारी हर सप्ताह भेजने के दिए निर्देश  रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सड़कों पर घुमंतू व आवारा पशुओं के कारण होने वाले दुर्घटनाओं को रोकने सभी नगरीय निकायों को एक माह तक विशेष अभियान चलाने तथा टोल-फ्री नम्बरों 1033 व निदान-1100 के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। विभाग ने मंत्रालय से सभी जिलों के कलेक्टरों, नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर परिवहन विभाग के एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) के अनुसार कार्यवाही करने और खुले में पशुओं को नहीं छोड़ने के लिए पशु मालिकों को जागरूक करने को कहा है।  परिवहन विभाग द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर विचरण करने वाले आवारा और घुमंतू पशुओं के कारण होने वाले सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है। इसमें सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने, निगरानी दलों के गठन, घुमंतू पशुओं के प्रबंधन, पुनर्वास, दुर्घटना प्रबंधन, आपात सेवाओं, पशु मालिकों को जागरूक करने इत्यादि के संबंध में विभिन्न विभागों के दायित्व निर्धारित किए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिवहन विभाग के एसओपी के अनुसार सभी नगरीय निकायों को उच्च जोखिम क्षेत्र (High Risk Area) एवं सामान्य जोखिम क्षेत्र (Moderate Risk Zone) की मैपिंग कर आवारा पशुओं को काउ-कैचर के माध्यम से गौ-शालाओं, गौ-अभ्यारण्यों, कांजी हाउसों और गौठानों में विस्थापित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने आवारा/घुमंतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने के बाद पशु मालिकों को सूचित कर मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है। इनके साथ ही विभाग ने आवारा पशुओं को पशु पालन विभाग के माध्यम से रेडियम स्ट्रिप लगाने, रात्रि में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने चिन्हित मुख्य मार्गों एवं स्थलों में स्ट्रीट लाइट के द्वारा प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सुरक्षा की दृष्टि से चिन्हांकित सड़कों में संकेतक बोर्ड लगाने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण करने से होने वाले खतरों और पशु सुरक्षा के उपायों पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने के भी निर्देश दिए हैं।  नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को पशु मालिकों को खुले में पशुओं को नहीं छोडने हेतु जन-जागरूकता शिविर व विभागीय शिविरों के माध्यम से प्रेरित करने को कहा है। आवारा/घुमंतू पशुओं से होने वाले दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक माह का विशेष अभियान (दिन और रात) चलाने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा है। यह विशेष अभियान नगरीय निकाय क्षेत्रों के अतिरिक्त आस-पास के 10-15 कि.मी. की परिधि में ग्रामीण क्षेत्रों में भी ग्राम पंचायतों की सहमति एवं समन्वय से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।  विभाग ने आवारा/घुमंतू पशुओ से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल-फ्री नम्बर 1033 एवं नगरीय निकायों के निदान-1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा है। इन नम्बरों पर प्राप्त होने वाले शिकायतों से निगरानी दलों को अवगत कराने एवं इनके निराकरण की नियमित समीक्षा के भी निर्देश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगरीय निकायों को परिवहन विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया तथा विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार कार्यवाही कर क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों के माध्यम से हर सप्ताह जानकारी संचालनालय को उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया है। 

परिवहन विभाग के एसओपी के अनुसार कार्यवाही करने और खुले में पशुओं को नहीं छोड़ने हेतु पशु मालिकों को जागरूक करने कहा

रायपुर : घुमंतू पशुओं के कारण होने वाले दुर्घटनाओं को रोकने एक माह तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश नगरीय प्रशासन विभाग ने टोल-फ्री नम्बरों 1033 व निदान-1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा  कलेक्टरों, निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी किया परिपत्र परिवहन विभाग के एसओपी के अनुसार कार्यवाही करने और खुले में पशुओं को नहीं छोड़ने हेतु पशु मालिकों को जागरूक करने कहा विभाग ने सभी निकायों को की गई कार्यवाही की जानकारी हर सप्ताह भेजने के दिए निर्देश  रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सड़कों पर घुमंतू व आवारा पशुओं के कारण होने वाले दुर्घटनाओं को रोकने सभी नगरीय निकायों को एक माह तक विशेष अभियान चलाने तथा टोल-फ्री नम्बरों 1033 व निदान-1100 के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। विभाग ने मंत्रालय से सभी जिलों के कलेक्टरों, नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर परिवहन विभाग के एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) के अनुसार कार्यवाही करने और खुले में पशुओं को नहीं छोड़ने के लिए पशु मालिकों को जागरूक करने को कहा है।  परिवहन विभाग द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर विचरण करने वाले आवारा और घुमंतू पशुओं के कारण होने वाले सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है। इसमें सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने, निगरानी दलों के गठन, घुमंतू पशुओं के प्रबंधन, पुनर्वास, दुर्घटना प्रबंधन, आपात सेवाओं, पशु मालिकों को जागरूक करने इत्यादि के संबंध में विभिन्न विभागों के दायित्व निर्धारित किए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिवहन विभाग के एसओपी के अनुसार सभी नगरीय निकायों को उच्च जोखिम क्षेत्र (High Risk Area) एवं सामान्य जोखिम क्षेत्र (Moderate Risk Zone) की मैपिंग कर आवारा पशुओं को काउ-कैचर के माध्यम से गौ-शालाओं, गौ-अभ्यारण्यों, कांजी हाउसों और गौठानों में विस्थापित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने आवारा/घुमंतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने के बाद पशु मालिकों को सूचित कर मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है। इनके साथ ही विभाग ने आवारा पशुओं को पशु पालन विभाग के माध्यम से रेडियम स्ट्रिप लगाने, रात्रि में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने चिन्हित मुख्य मार्गों एवं स्थलों में स्ट्रीट लाइट के द्वारा प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सुरक्षा की दृष्टि से चिन्हांकित सड़कों में संकेतक बोर्ड लगाने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण करने से होने वाले खतरों और पशु सुरक्षा के उपायों पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने के भी निर्देश दिए हैं।  नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को पशु मालिकों को खुले में पशुओं को नहीं छोडने हेतु जन-जागरूकता शिविर व विभागीय शिविरों के माध्यम से प्रेरित करने को कहा है। आवारा/घुमंतू पशुओं से होने वाले दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक माह का विशेष अभियान (दिन और रात) चलाने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा है। यह विशेष अभियान नगरीय निकाय क्षेत्रों के अतिरिक्त आस-पास के 10-15 कि.मी. की परिधि में ग्रामीण क्षेत्रों में भी ग्राम पंचायतों की सहमति एवं समन्वय से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।  विभाग ने आवारा/घुमंतू पशुओ से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल-फ्री नम्बर 1033 एवं नगरीय निकायों के निदान-1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा है। इन नम्बरों पर प्राप्त होने वाले शिकायतों से निगरानी दलों को अवगत कराने एवं इनके निराकरण की नियमित समीक्षा के भी निर्देश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगरीय निकायों को परिवहन विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया तथा विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार कार्यवाही कर क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों के माध्यम से हर सप्ताह जानकारी संचालनालय को उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – देश का पहला हाई-टेक वन्य जीव कैप्चर अभियान सेवा भाव और संरक्षण का प्रतीक

सेवा भाव और वन्य जीव संरक्षण का प्रतीक है देश का पहला हाई-टेक वन्य जीव कैप्चर अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक से पकड़े गए 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय किसानों की फसल बचाने दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों की मदद से हुआ अभिनव प्रयोग मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाया गया सफलतापूर्वक अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने के लिये शाजापुर, उज्जैन और आस-पास के इलाकों हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का सफल प्रयोग वन्य जीवों को सुरक्षित पकड़ कर स्थानांतरित करने के लिए किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक बार फिर संवेदनशीलता दर्शाते हुए लंबे समय से कृष्णमृगों और नीलगायों द्वारा फसलों को पहुंचाये जा रहे भारी नुकसान से बचाने के लिये जारी किये थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में किसानों की इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए देश में अपनी तरह का पहला प्रयास किया गया। अभियान के अंतर्गत वन्य जीवों को बिना हानि पहुँचाए अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पकड़ कर सुरक्षित क्षेत्रों में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “यह अभियान वन्य जीव संरक्षण और किसानों की सुरक्षा, दोनों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। मध्यप्रदेश में हम ऐसा संतुलन स्थापित करना चाहते हैं जहाँ प्रकृति, वन्य जीव और किसान, तीनों सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें।” उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा टीम ने दीपावली के दौरान भी इस अभियान में हिस्सा लिया, जो उनके सेवा और वन्य जीव संरक्षण के प्रति समर्पण भाव का प्रतीक है। हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का अभिनव प्रयोग अभियान में दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजरवेशन सॉल्यूशंस’ कंपनी के 15 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने प्रदेश में वन विभाग की टीम को प्रशिक्षित किया और उनके सहयोग से 10 दिन तक लगातार अभियान चलाया गया। अभियान में रॉबिन्सन-44 हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया। इसे इस तरह के अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है। हेलीकॉप्टर से पहले खेतों और खुले क्षेत्रों में वन्य जीवों की लोकेशन का सर्वे किया गया। इसके बाद रणनीतिक रूप से ‘बोमा’ बनाया गया। हेलीकॉप्टर की सहायता से फिर धीरे-धीरे हांका लगाकर जानवरों को सुरक्षित रूप से एक फनल (शंकु) आकार की बाड़ में प्रवेश कराया गया, जो जानवरों को भयभीत होने से बचाने के लिए घास और हरे जाल से ढंकी होती है। बोमा में आये वन्य जीवों को वाहनों से सुरक्षित रूप से अभयारण्य तक पहुँचाया गया। अभियान में अनुभवी दक्षिण अफ्रीकी पायलट के साथ भारतीय पायलट को शामिल किये गये। अभियान में सफलता पूर्वक 913 वन्य जीवों का किया गया सुरक्षित पुनर्वास लगभग दस दिनों तक चले इस अभियान में कुल 913 वन्य जीवों को सफलतापूर्वक पकड़कर पुनर्वास कराया गया। इनमें 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय शामिल हैं। सभी नीलगायों को गांधीसागर अभयारण्य के 64 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में छोड़ा गया। कृष्णमृगों को गांधीसागर, कूनो और नौंरादेही अभयारण्यों के उपयुक्त स्थानों पर पुनर्स्थापित किया गया। अभियान में वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। सभी वन्य जीव अब अपने नए आवासों में स्वच्छंद होकर विचरण कर रहे हैं। अभियान के अंतिम दिन भी 142 कृष्णमृग पकड़े गए। प्रशासनिक और विशेषज्ञों की निगरानी में चला अभियान अभियान की हर गतिविधि की सतत् निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक शुभरंजन सेन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक (चीता प्रोजेक्ट) उत्तम शर्मा और मुख्य वन संरक्षक उज्जैन एम.आर. बघेल स्वयं अभियान स्थल पर उपस्थित रहे। इस अभियान में वाइल्ड लाइफ एवं फॉरेस्ट्री सर्विस के डॉ. कार्तिकेय ने तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे इससे पहले गौर (बाइसन) ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। शाजापुर विधायक अरुण भीमावद ने भी अभियान स्थल पर पहुंचकर इस अभिनव पहल की सराहना की। अभियान की सफलता पर एसीएस फॉरेस्ट अशोक बर्णवाल और वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्हीएन अम्बाडे भी टीम को बधाई दी गई। प्रशिक्षण और भविष्य की रणनीति वन विभाग ने वन्य जीवों के पुनर्वास के चलाये गये अभियान में एक विशेष प्रशिक्षित दल तैयार किया है, जो दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है। यह दल भविष्य में राज्य के अन्य जिलों में भी इस प्रकार के कैप्चर ऑपरेशन्स संचालित करेगा। जिला प्रशासन और ग्रामीण समुदाय ने इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की। अभियान के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि इस तकनीक से किसी भी वन्य जीव को बेहोश (ट्रैंक्युलाइज) करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वन्य जीवों को पकड़ने की यह जिससे पूरी प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित और प्राकृतिक बनी रही। अभियान से किसानों को मिली राहत नील गायों और कृष्णमृग के पुनर्वास अभियान के परिणामस्वरूप शाजापुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने राहत की सांस ली है। कृष्णमृग और नीलगायों द्वारा फसलों को रौंदने और खाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे किसानों की आर्थिक हानि में कमी आयेगी और वन्य जीव-मानव के बीच सह-अस्तित्व की भावना भी सशक्त होगी। अभियान न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए एक नवीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह सिद्ध करता है कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और जनसहयोग से मानव-वन्य जीव संघर्ष को मानवीय और वैज्ञानिक तरीकों से हल किया जा सकता है। भविष्य में वन विभाग ऐसे और अभियानों को अन्य जिलों में भी चलाने की योजना बना रहा है, जिससे किसानों को राहत मिले, वन्य जीव सुरक्षित रहें और पर्यावरणीय संतुलन कायम रहे। अभियान को सफल बनाने में वन विभाग, दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजरवेशन सॉल्यूशंस’ टीम, स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग, और ग्रामीणों का अभूतपूर्व सहयोग रहा।  

5 नवम्बर को नवा रायपुर में रजत जयंती महोत्सव के दौरान होगा सूर्यकिरण एरोबैटिक शो

रायपुर : छत्तीसगढ़ देखेगा भारतीय वायुसेना का शौर्य 5 नवम्बर को नवा रायपुर में रजत जयंती महोत्सव के दौरान होगा सूर्यकिरण एरोबैटिक शो रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर राजधानी नवा रायपुर का आसमान 5 नवम्बर को भारतीय वायुसेना के पराक्रम और गौरव का साक्षी बनेगा। भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (Suryakiran Aerobatic Team – SKAT) इस दिन अपने अद्भुत हवाई करतबों से नवा रायपुर के आकाश को देशभक्ति, रोमांच और गर्व के रंगों से भर देगी। यह प्रदर्शन रजत जयंती समारोह का प्रमुख आकर्षण होगा। भारतीय शौर्य का आसमानी प्रदर्शन 5 नवम्बर को नवा रायपुर का आसमान गर्व, रोमांच और देशभक्ति के रंगों से सराबोर होगा। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर यह “शौर्य की उड़ान” हर नागरिक के हृदय में भारतीय वायुसेना के प्रति सम्मान और गर्व की भावना को और ऊँचा उठाएगी। राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह एरोबैटिक शो छत्तीसगढ़ की नई ऊँचाइयों और आत्मविश्वास का प्रतीक बनेगा। ‘बॉम्ब बर्स्ट’, ‘हार्ट-इन-द-स्काई’, ‘एरोहेड’ जैसी विश्वप्रसिद्ध फॉर्मेशन्स जब आकाश में आकार लेंगी, तब पूरा वातावरण भारतीय शौर्य और तकनीकी निपुणता से गूंज उठेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ के युवाओं में अनुशासन, टीमवर्क और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत करेगा। राज्य शासन और भारतीय वायुसेना के संयुक्त प्रयास से कार्यक्रम की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। छत्तीसगढ़ के आसमान पर बिखरेगी तिरंगे की झटा : नया रायपुर में सूर्य किरण का रोमांचक एयर शो 5 नवंबर को भारतीय वायुसेना की एरोबेटिक सूर्य किरण टीम का छत्तीसगढ़ के आसमान में रोमांचक प्रदर्शन 5 नवंबर को होगा। यह प्रदर्शन नवा रायपुर के सेंध जलाशय के उपर आसमान में होगा। छत्तीसगढ़ स्थापना की 25 वीं वर्षगांठ पर सूर्य किरण टीम के हैरतअंगेज हवाई करतब के लिए सूर्य किरण की टीम रायपुर पहुच चुकी है। रोमांच से भरे इस प्रदर्शन में सूर्य किरण टीम के 9 फाइटर प्लेन शामिल होंगे।   सूर्य किरण टीम के लीडर अजय दशरथी और अन्य सदस्यों ने सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन को लेकर स्थानीय न्यू सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि भारतीय वायु सेना में भर्ती के लिए युवाओं को आकर्षित करने और युवाओं में देशभक्ति का जज्बा जगाने के लिए यह प्रदर्शन किया जा रहा है। यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ वासियों के लिए एक यादगार पल होगा। इस प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ के फाइटर पायलेट श्री गौरव पटेल भी भाग लेंगे। सूर्य किरण टीम के 140 सदस्य रायपुर पहुंच चुके हैं। इस टीम में 12 फायटर पायलेट, 3 इंजीनियर और ग्राउड स्टाफ हैं। प्रदर्शन के दौरान वायु सेना द्वारा कामेंट्री भी की जाएगी।  सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन में फाइटर पाइलट के शौर्य, अनुशासन और कार्यकुशलता का अनुभव दर्शकों के लिए रोमांचक और यादगार पल होगा। सूर्य किरण टीम 4 नवंबर को रिहर्सल करेगी और 5 नंवबर को सुबह 10 बजे से 12 के बीच फाइनल शो होगा।  इस प्रदर्शन में फाइटर प्लेन मनूवर करते हुए हार्ट, डायमंड, लूप, ग्रोवर, डान आदि फार्मेशन आकाश में दिखाई देगा। इसके साथ ही फाइटर प्लेन आर्कषक तिरंगा लहराते हुए आसमान में दिखेगें। सूर्य किरण का एयर शो लगभग 30 से 35 मिनट तक चलेगा।  सूर्य किरण के फाइटर प्लेन तेजी से मनूवर करते हुए 100 फीट से 10 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं, इस शो को इस तरह से डिजाईन किया गया है कि 10 से 15 किमी के मध्य लोगों को स्पष्ट रूप से दिखाई दे और भारतीय सेना के शौर्य गाथा को महसूस कर सके।  सूर्य किरण टीम में हिदुस्तान एरोनाटिल लिमिटेड द्वारा निर्मित हाक मार्क 123 विमान शामिल है। इस फाइटर प्लेन का उपयोग फाइटर पायलेट प्रशिक्षण के दौरान भी करते हैं। रायपुर में सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन 15 वर्ष पूर्व किया गया था, जिसमें सूर्य किरण मार्क-2 फाइटर प्लेन ने हिस्सा लिया था।   सूर्य किरण टीम के सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल इंटरटेनमेंट करना ही नहीं है, बल्कि देश और प्रदेश के युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। सूर्य किरण की टीम अब तक देश-विदेश में 700 एयर शो कर चुके हैं। हाल में ही टीम ने थाइलेंड में प्रदर्शन किया था। फाइटर पायलटों ने बताया कि 8 माह के कठिन प्रशिक्षण के बाद एयर शो के लिए सक्षम हो पाते हैं। शो में जोखिम भी है, लेकिन टीम के बेहतर कॉर्डिनेशन और अटूट विश्वास के चलते एयर शो का प्रदर्शन होता है। पत्रकार वार्ता में सूर्य किरण टीम के सदस्य ग्रुप कैप्टन श्री सिद्धेश कार्तिक, स्क्वाड्रन लीडर श्री जसदीप सिंह, श्री राहुल सिंह, श्री गौरव पटेल, श्री संजेश सिंह और फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुश्री कंवल संधू शामिल थे। जनसहभागिता से सजेगा रजत जयंती का उत्सव रायपुर सहित आसपास के जिलों से हजारों नागरिक, विद्यार्थी और परिवार इस एरोबैटिक शो के साक्षी बनेंगे। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत की उड़ान” का प्रतीक बनेगा। सूर्यकिरण टीम का यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि जब कौशल, समर्पण और तकनीक एक साथ उड़ान भरते हैं, तो आसमान भी झुक जाता है। भारतीय वायुसेना की गौरवशाली परंपरा 1996 में गठित सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम भारतीय वायुसेना की सटीकता और सामूहिक समन्वय की अनूठी मिसाल है। एशिया की यह एकमात्र नौ विमान वाली एरोबैटिक डिस्प्ले टीम है, जिसके विमानों के बीच की दूरी मात्र पाँच मीटर तक होती है। यह भारत की तकनीकी दक्षता, अनुशासन और साहस का अद्भुत उदाहरण है। टीम ने अपनी यात्रा की शुरुआत HJT-16 Kiran Mk-II से की थी और वर्ष 2015 में स्वदेशी तकनीक पर आधारित HAL Hawk Mk-132 Advanced Jet Trainer के साथ नई उड़ान भरी। आज सूर्यकिरण टीम युवाओं के लिए प्रेरणा का पर्याय बन चुकी है। 700 से अधिक प्रदर्शन, विश्वभर में भारत का गौरव अब तक सूर्यकिरण टीम ने 700 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन दिए हैं — श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, ब्रिटेन और थाईलैंड सहित अनेक देशों में भारत की प्रतिष्ठा को ऊँचाई दी है।2023 में टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में क्रिकेट विश्वकप के दौरान शानदार प्रस्तुति देकर खेल और राष्ट्रगौरव का अनूठा संगम प्रस्तुत किया था। *यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है कि भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम हमारे रजत जयंती समारोह का हिस्सा … Read more