samacharsecretary.com

पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के मामले में HHRC का सख्त कदम, DGP और स्वास्थ्य प्रमुख को किया नोटिस

चंडीगढ़  हरियाणा मानव अधिकार आयोग (HHRC) ने पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के एक गंभीर मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा पुलिस महानिदेशक (DGP) और स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने निर्देश दिया है कि इस मामले की गहराई से जांच कर 17 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। यह निर्देश आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने शिकायत संख्या 1037/10/2023 के अंतर्गत जारी किए। इस दौरान शिकायतकर्ता के पिता धर्म सिंह और सब-इंस्पेक्टर कृष्ण चंद (सीआईए-।।, करनाल) आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। मामला एफआईआर संख्या 64 दिनांक 11 मार्च, 2023 से जुड़ा है। निसिंग पुलिस स्टेशन में भादंसं की धारा-379 और विद्युत अधिनियम की धारा-136 के तहत केस दर्ज किया गया था। इस प्रकरण की जांच सब-इंस्पेक्टर कृष्ण चंद द्वारा की गई थी। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता लवदीप को 14 अप्रैल, 2023 को गिरफ्तार किया गया था और उसी दिन उसका चिकित्सकीय परीक्षण भी करवाया गया था। हालांकि आयोग के समक्ष प्रस्तुत चिकित्सकीय रिपोर्ट अस्पष्ट थी और पढ़ने योग्य नहीं थी। दस्तावेज़ों से यह प्रतीत हुआ कि उस रिपोर्ट में किसी नई चोट का उल्लेख नहीं किया गया था। चोटों की रिपोर्ट में विरोधाभास पर सवाल आयोग ने पाया कि 15 अप्रैल, 2023 को किए गए एमएलआर (मेडिकल लीगल रिपोर्ट) में कई चोटों का उल्लेख किया गया है, जिनकी अवधि 4 से 7 दिन पुरानी बताई गई। आयोग ने इस विरोधाभास पर प्रश्न उठाया कि जब 14 अप्रैल की रिपोर्ट में कोई चोट नहीं थी, तो फिर 15 अप्रैल की रिपोर्ट में पुरानी चोटें कैसे दर्ज हो गईं। इस प्रश्न पर जांच अधिकारी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। ‘सतही परीक्षण’ पर आयोग की नाराज़गी आयोग के समक्ष सब-इंस्पेक्टर कृष्ण चंद और निरीक्षक दिनेश कुमार (महानिदेशक जांच, आयोग) ने बताया कि पुलिस हिरासत में आमतौर पर डॉक्टर केवल उन्हीं चोटों का उल्लेख करते हैं जिनकी शिकायत आरोपी स्वयं करता है, और शरीर का संपूर्ण परीक्षण नहीं किया जाता। इस पर आयोग सदस्य दीप भाटिया ने कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण अत्यंत चिंताजनक है। हिरासत में प्रताड़ना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और ऐसे मामलों में लापरवाही अस्वीकार्य है। वरिष्ठ अधिकारी से जांच के आदेश मानवाधिकार आयोग ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इस मामले की गहन जांच के लिए नामित करें। उन्हें यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता के साथ हुई कथित हिरासत प्रताड़ना तथा पुलिस की कार्यप्रणाली की पूरी समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा के महानिदेशक को भी आदेश दिए हैं कि 14 अप्रैल और 15 अप्रैल, 2023 के दोनों चिकित्सकीय परीक्षणों की जांच कर अपनी रिपोर्ट 17 दिसंबर से पहले आयोग में प्रस्तुत करें।

Probation पूरा होना ही नहीं, परफॉरमेंस और आचरण भी तय करेंगे नौकरी की परमानेंटिटी: Chhattisgarh HC

बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक सर्विस संबंधी मामले में महत्वपूर्व आदेश देते हुए कहा है कि सिर्फ परिवीक्षा अवधि (Probation period) पूरी होने पर स्थायीकरण और पदोन्नति का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता। प्रतिकूल कार्य एवं आचरण रिपोर्ट के आधार पर प्रमोशन दिया जाना, या नहीं देना भेदभाव नहीं माना जाएगा। प्रकरण के अनुसार हाई कोर्ट ने अनुवादक के पद को भरने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था। अपीलकर्ता शैलेन्द्र सोनी और अन्य उम्मीदवारों ने पद के लिए आवेदन किया। परीक्षा के बाद अपीलकर्ता और अन्य प्रतिवादी को 29 फरवरी 2012 को अनुवादक के पद पर नियुक्त किया गया। प्रतिवादी अपीलकर्ता से कनिष्ठ था। दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद शैलेन्द्र के साथ के अन्य परिवीक्षा कर्मी को सात मार्च 2014 से पद पर स्थायी कर दिया गया। 27 जनवरी 2015 को उसको सहायक ग्रेड-1 के पद पर पदोन्नत किया गया। हालांकि अपीलकर्ता की सर्विस की उस समय पुष्टि नहीं की गई। देर से स्थायी होने के कारण प्रमोशन से वंचित शैलेन्द्र का अनुवादक के पद पर स्थायीकरण देर से हुआ। इस कारण उसके सहकर्मी को दी गई पदोन्नति के लिए वह अयोग्य हो गया। व्यथित होकर उसने 29 अप्रैल 2015 को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, जिसमें प्रतिवादी से अपनी वरिष्ठता बनाए रखने के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से स्थायीकरण और पदोन्नति का अनुरोध किया।अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया गया। इस पर शैलेंद्र ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने 16 जुलाई 2025 को याचिका खारिज कर दी। इससे व्यथित होकर अपीलकर्ता कर्मचारी ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। कार्य और आचरण रिपोर्ट अलग-अलग, इसलिए भेदभाव नहीं डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद सिंगल बेंच के निष्कर्ष को उचित माना, जिसमें कहा गया था कि कार्य और आचरण रिपोर्ट और एसीआर अलग-अलग हैं। हाई कोर्ट प्रशासन ने तर्क दिया कि मार्च 2014 में अपीलकर्ता की दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर उसके कार्य और आचरण पर रिपोर्ट अच्छी और औसत नहीं पाई गई।

मतदाता सुरक्षा बढ़ी, आयोग का बड़ा फैसला – EVM-VVPAT पर नए नियम लागू

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी मतदान दल को सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बिना ईवीएम और वीवीपैट मशीनें नहीं सौंपी जाएंगी। इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज और जिला स्कूल में बनाए गए हैं डिस्पैच सेंटर विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए MIT, RDS कॉलेज और जिला स्कूल में अलग-अलग डिस्पैच सेंटर बनाए गए हैं। आगामी 6 नवंबर को मतदान होना निर्धारित है। उससे एक दिन पहले यानी 5 नवंबर को मतदान कर्मी, पदाधिकारी और सुरक्षा बल बूथों के लिए रवाना होंगे। ये सभी दल डिस्पैच सेंटर से ईवीएम और अन्य आवश्यक मतदान सामग्री प्राप्त करेंगे। जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि चुनाव की प्रक्रिया को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने के लिए बिना सुरक्षा बलों की उपस्थिति के किसी भी दल को ईवीएम या वीवीपैट उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। काउंटर पर मौजूद पदाधिकारियों की जवाबदेही होगी कि वे केवल उन्हीं दलों को सामग्री दें जो सुरक्षा बलों के साथ पहुंचे हों। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीठासीन पदाधिकारी निभाएंगे ये जिम्मेदारी डिस्पैच सेंटरों पर मौजूद पीठासीन पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मतदान दल के साथ सुरक्षा बल हों। इसके बाद ही उन्हें मतदान सामग्री सौंपी जाएगी। सभी दलों को सामग्री प्राप्ति की पावती देनी होगी और उसे सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। साथ ही वितरण रजिस्टर को भी लगातार अपडेट किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। निर्वाचन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए प्रत्येक डिस्पैच सेंटर पर 20-20 काउंटर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जरूरत पड़ने पर काउंटरों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। मतदाता और कर्मियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन, सूचना सामग्री और पब्लिक एड्रेस सिस्टम की भी व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मजबूत बैरिकेडिंग और ड्राप गेट का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जन को एंबुलेंस, चिकित्सक, पारा मेडिकल स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कुछ दिन से लापता छात्र का शव मिला GGU तालाब में, कारण तलाश जारी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी परिसर स्थित तालाब में मिली लाश लापता हुए छात्र की ही निकली. मृतक की पहचान छात्र असलम अंसारी के भाई अयूब अंसारी ने की है. इस मामले में एसएसपी रजनेश सिंह ने जांच के लिए 6 सदस्यीय जांच दल का गठन किया है. जानकारी के मुताबिक, जीजीयू परिसर स्थित एक तालाब में गुरुवार की शाम एक युवक की लाश मिली थी. शव को तालाब से बाहर निकालकर पुलिस ने मरच्यूरी में रखवाया था. इस बीच शुक्रवार को विवि परिसर में एक छात्र के दो दिनों से लापता होने की जानकारी सामने आने से सनसनी फैल गई. लापता छात्र के छोटे भाई को शिनाख्ती के लिए बुलाया गया. उसने टी शर्ट से अपने बड़े भाई के रूप में पहचान की. घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं सेंट्रल यूनिवर्सिटी की सुरक्षा भी संदेह के दायरे में है. अब पुलिस की  6 सदस्य टीम छात्र की मौत मामले में की जांच करेगी.

छठ पर्व की शुरुआत पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने दी बधाई, कहा—छठी मैया सबकी मनोकामना पूर्ण करें

रांची झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लोगों को लोक आस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन खरना पूजा पर शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल गंगवार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, 'लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के द्वितीय अनुष्ठान ‘खरना' की सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं। छठी मैया और भगवान भास्कर की कृपा से हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैले, यही मंगलकामना बहै।' वहीं, मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, 'लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के दूसरे दिन खरना पूजा का अनुष्ठान, लोक-आस्था, आत्म-संयम, समर्पण और शुद्धता का अछ्वुत प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति, जल, सूर्य, परिवार और समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। छठ व्रतियों की तपस्या, श्रद्धा और संकल्प पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। मैं सभी छठ व्रतियों और परिवारजनों के इस अछ्वुत आत्मबल को नमन करता हूं। छठी मैया और भगवान भास्कर से प्रार्थना करता हूं कि वे सभी को उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें, आपकी मनोकामना पूर्ण करें। आप सभी को खरना पूजा की अनेक-अनेक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार। जय छठी मैया! जय भगवान भास्कर!'  

हरियाणा: औरंगपुर गांव में पिता-पुत्र की हत्या, आरोपी बेटा अशोक पुलिस के हत्थे चढ़ा

झज्जर  झज्जर-गुरुग्राम मार्ग के गांव औरंगपुर (Aurangpur) में करीब ढाई माह पहले हुई पिता और बेटे की हत्या (Father-Son Murder) का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपी अशोक (Ashok) को गिरफ्तार कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है। हत्या के शिकार 80 वर्षीय खजान सिंह (Khajan Singh) और उनके 30 वर्षीय बेटे संजय (Sanjay) थे। पुलिस के अनुसार, हत्या का कारण जमीनी विवाद (land dispute) था। इस दोहरे हत्याकांड को खजान सिंह के एक अन्य बेटे अशोक ने अंजाम दिया। डीसीपी क्राइम अमित दहिया (DCP Crime Amit Dahiya) ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी ने करीब ढाई माह पहले दोनों के शवों को मकान के पिछले हिस्से में खेत में जलाया और अवशेष को खुर्द-बुर्द करके जुताई कर दिया, ताकि कोई सबूत हाथ न लगे। हत्या का मुख्य कारण खजान सिंह की पुस्तैनी जमीन और खरीदी गई चार एकड़ भूमि बताया गया। अशोक को शक था कि पिता यह जमीन संजय के नाम कर सकते हैं। पुलिस ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपी से हत्या में इस्तेमाल हथियारों (weapons used in the murder) की बरामदगी और क्राइम सीन रिक्रिएट (crime scene recreation) की जाएगी। इसके अलावा जांच यह भी कर रही है कि और कौन-कौन लोग इस जघन्य अपराध में शामिल थे। उन्होंने बताया कि एक ही स्थान पर रहते हुए परिवार के अन्य लोगों ने इस मामले में ढाई माह तक चुप्पी आखिर क्यों साधे रखी यह जांच का विषय है। जैसे-जैसे जांच आगे बढे़गी तो मामले की सभी परतें भी खुलती चली जाएगी। उन्होंने आरोपी अशोक को मीडिया के सामने भी पेश किया। अशोक की गिरफ्तारी के बाद परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पुलिस की नजर । डीसीपी ने कहा कि मामले की सभी परतें उजागर करने के लिए पूरी गंभीरता से जांच जारी है।

अबकी बार अंतागढ़: 20 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष किया आत्मसमर्पण

कांकेर सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव और सरकार के बेहतर पुनर्वास नीति का असर एक बार फिर देखने को मिला है. आज अंतागढ़ क्षेत्र में सक्रिय 20 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. अंतागढ़ के बर्रेबेड़ा गांव से 20 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. यह एएसपी आशीष बंसोड और एसडीओपी शुभम तिवारी के प्रयासों का परिणाम है. कुछ दिन पहले कामतेड़ा कैंप में 50 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया था. ताड़ोकी पुलिस नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में जुटी है. नक्सलियों का समर्पण अंतागढ़ क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

HIV संक्रमित खून चढ़ाने का मामला: सीएम हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान, सिविल सर्जन को किया निलंबित

चाईबासा चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने पर सीएम हेमंत ने पश्चिमी सिंहभूम सिविल सर्जन समेत अन्य संबंधित पदाधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया है। सीएम हेमंत ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने की सूचना पर पश्चिमी सिंहभूम सिविल सर्जन समेत अन्य संबंधित पदाधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया है। पीड़ित बच्चों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी तथा संक्रमित बच्चों का पूरा इलाज भी राज्य सरकार द्वारा कराया जाएगा।" दरअसल, आरोप है कि चाईबासा में स्थानीय ब्लड बैंक द्वारा थैलेसीमिया से पीड़ित 7 वर्षीय बच्चे को एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाया गया। जब बच्चे को HIV पॉजिटिव आया तो इस बात का खुलासा हुआ।  

DGP ने थानेदारों को बताया जनता से जुड़ने का तरीका, कानून के साथ जागरूकता भी जरूरी

चंडीगढ़  हरियाणा के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने राज्यभर के सभी थाना प्रभारियों (एसएचओ) को सख्त लेकिन प्रेरक लहजे में पत्र लिखा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि हर थाना अपने क्षेत्र में 31 अक्तूबर तक राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करे। पत्र में डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस की असली ताकत जनता का विश्वास है, और यह विश्वास सिर्फ शब्दों से नहीं, कर्मों से हासिल किया जा सकता है। डीजीपी सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि थाना केवल एक भवन नहीं, बल्कि कानून और सुरक्षा की पहली चौकी है। उन्होंने कहा – ‘आपके पास वर्दी, लाठी, बंदूक और कानून की ताकत है। यह शक्ति जनता की रक्षा के लिए है, भय पैदा करने के लिए नहीं। अगर आपके इलाके में ठग, बदमाश और अपराधी चैन की सांस ले रहे हैं, तो यह आपकी नाकामी है।’ डीजीपी ने चेतावनी दी कि किसी भी थाना प्रभारी के क्षेत्र में अपराध बढ़ा या जनता का भरोसा टूटा, तो उसकी जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा कि थाने की मेज़ पर बैठने से पुलिसिंग नहीं होती, थाने से निकलकर गलियों, स्कूलों, चौपालों में जाना ही सच्ची पुलिसिंग है। नशे और इंटरनेट के जाल में फंसा युवा पत्र में ओपी सिंह ने युवाओं के बीच फैलती नशाखोरी और ऑनलाइन ठगी पर चिंता जताई। उन्होंने थानेदारों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों और कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों से संवाद करें। उन्होंने कहा कि आज का युवा इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की आभासी दुनिया में उलझ रहा है। उन्हें समझाइए कि जीवन मोबाइल में नहीं, मैदान में है। वे खेलें, नाचें, गाएं, जिएं, लेकिन जिएं अपने सपनों के लिए, नशे के लिए नहीं। डीजीपी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसी महंगी गाड़ी के इंजन में चीनी डालने से इंजन जाम हो जाता है, वैसे ही नशे का ज़हर शरीर और दिमाग को जकड़ देता है। ड्रग्स यानी नशा, इंसान की नसों को नहीं, उसकी पीढ़ियों को खत्म करता है। जन-जागरूकता कार्यक्रम बनें पुलिस-जन सहयोग का जरिया डीजीपी ने थानेदारों से कहा कि वे शाम के समय सामुदायिक सभाएं, नुक्कड़ नाटक, गीत-संगीत, खेलकूद और संवाद कार्यक्रम आयोजित करें। इनमें विद्यार्थियों, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के चित्र और वीडियो (चित्रांकन और चलचित्र) भी बनाए जाएं और पुलिस मुख्यालय को भेजे जाएं ताकि आने वाली डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस में उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शित किया जा सके। डीजीपी ने कहा कि जो थाने जनता से जुड़ेंगे, वही पुलिस की पहचान बनाएंगे। ‘एक नन्हा शम्मा…’, बदलाव की शुरुआत थाने से ही अपने पत्र के अंत में डीजीपी सिंह ने एक प्रेरक शेर का उल्लेख किया – ‘एक नन्हा शम्मा अंधेरे में जलाया सिखाया, सुबह होने के माहौल को बनाया सिखाया।’ उन्होंने लिखा कि हर थाने में यह छोटा-सा दीपक जलना चाहिए – एक आशा, एक सुरक्षा और एक बदलाव का प्रतीक बनकर। डीजीपी ने कहा कि यदि हर थाना अपनी जिम्मेदारी निभाएगा तो हरियाणा पुलिस देश की सबसे जवाबदेह और जनहितैषी पुलिस बनकर उभरेगी।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में कहा – नगर निगम अंबिकापुर के प्लास्टिक मुक्त संकल्प से बदली शहर की तस्वीर

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित इलाके में देशी श्वान की उपलब्धि का किया जिक्र – विस्फोटक का पता लगाकर की जवानों की सुरक्षा रायपुर, ‘मन की बात’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के नवाचारों और माओवाद उन्मूलन के संकल्प का उल्लेख होना प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंबिकापुर के ‘गार्बेज कैफे’ और भारतीय नस्ल के श्वानों की उपलब्धि का विशेष उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे पूरे प्रदेश के लिए सम्मान बताया। मुख्यमंत्री ने आज राजधानी रायपुर के शांति नगर में ‘मन की बात’ के 127वें संस्करण का श्रवण किया। मुख्यमंत्री साय ने छठ पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देशभर में हो रहे नवाचारी, प्रेरणादायी और जनहितकारी कार्यों को जोड़ने वाला एक विशेष मंच है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वालों प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ का उल्लेख होना प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अंबिकापुर नगर निगम की अनूठी पहल ‘गार्बेज कैफे’ की सराहना की, जिसने प्लास्टिक मुक्त शहर की दिशा में एक मिसाल कायम की है। यहाँ प्लास्टिक कचरा देने वालों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है — यह पहल स्वच्छता, पुनर्चक्रण और सामाजिक संवेदना का अद्भुत उदाहरण बन चुकी है।अम्बिकापुर में शहर से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए एक अनोखी पहल की गई है। अम्बिकापुर में गार्बेज कैफे चलाए जा रहे हैं। ये ऐसे कैफे हैं, जहाँ प्लास्टिक कचरा लेकर जाने पर भरपेट खाना खिलाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति एक किलो प्लास्टिक लेकर जाए उसे दोपहर या रात का खाना मिलता है और कोई आधा किलो प्लास्टिक ले जाए तो नाश्ता मिल जाता है। ये कैफे अम्बिकापुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चलाता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने त्योहारों की बढ़ी रौनक, सामाजिक एकता के प्रतीक छठ पर्व और नए आत्मविश्वास से आगे बढ़ते भारत की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि माओवादी गतिविधियों के सिमटते प्रभाव पर गर्व का अनुभव होता है। डबल इंजन की सरकार के मजबूत संकल्प से देश में शांति और सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से अब मूलभूत सुविधाएं सुदूर गाँवों तक पहुँच रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया है। इस बार उन इलाकों में भी खुशियों के दीप जले हैं, जहाँ कभी माओवादी आतंक का अंधेरा छाया रहता था। उन्होंने कहा कि लोग उस माओवादी आतंक का जड़ से खात्मा चाहते हैं जिसने उनके बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया था। साय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों में भारतीय नस्ल के श्वानों को शामिल किए जाने के निर्णय की भी सराहना की। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में एक देशी श्वान ने 8 किलो विस्फोटक का पता लगाकर जवानों की जान बचाई। यह सिद्ध करता है कि भारतीय नस्ल के श्वान अधिक अनुकूल, दक्ष और विश्वसनीय हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रकृति संरक्षण पर भी विशेष जोर देते हुए सभी नागरिकों से पेड़ लगाने का आग्रह किया और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय नवाचारों को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर इसे उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया। उन्होंने इसे राष्ट्रप्रेम की अमर अभिव्यक्ति बताते हुए प्रत्येक नागरिक से इसके गौरवगान में स्वस्फूर्त रूप से सहभागिता करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा के पुण्य स्मरण के साथ जनजातीय अधिकारों और स्वतंत्रता संग्राम में उनके सर्वोच्च योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस उन महान जननायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिवस है, जिन्होंने देश की आज़ादी और सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की है कि वे अपने आसपास हो रहे नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को अवश्य साझा करें, ताकि अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा लेकर समाजहित में योगदान दे सकें। मुख्यमंत्री ने पुंगनूर नस्ल की गायों को खिलाया चारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुंगनूर नस्ल की गायों को चारा खिलाया और उनकी विशेषताओं की जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश में पाई जाने वाली यह विशेष नस्ल अपनी अनूठी शारीरिक बनावट और विशिष्ट गुणों के कारण प्रसिद्ध है। कार्यक्रम में विधायक पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित थे।