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स्ट्राइक रेट के नाम पर सीटों की डिमांड, लोजपा ने चिराग को 2:17 वाला उदाहरण दिखाया

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग पर अभी सहमति नहीं बनी है।इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने लोकसभा के स्ट्राइक रेट के आधार पर विधानसभा चुनाव में सीटों की मांग कर दी है। एलजेपी-आर ने अपनी सहयोगी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को 2019 में 2 सांसदों के बावजूद एनडीए में 17 सीटों की याद दिलाकर सियासी पारे को गर्मा दिया है। एलजेपी-आर के बिहार प्रभारी अरुण भारती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज बिहार विधानसभा में उनकी पार्टी का एक भी विधायक नहीं है। चर्चा हो रही है कि आने वाले चुनाव में लोजपा को सम्मानजनक सीटें नहीं मिलेंगी। उन्होंने दावा किया कि यह धारणा अधूरी है। असलियत यह है कि कुछ लोग LJP-R को केवल सीमित सीटों तक बांधकर देखना चाहते हैं। मानो उसकी असली ताकत और जनता में पकड़ को नजर अंदाज किया जा सकता हो। चिराग पासवान के जीजा एवं जमुई से लोजपा (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने आगे कहा,"बिहार की राजनीति और NDA का इतिहास बार-बार इसके बिल्कुल उलट गवाही देता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सिर्फ 2 सांसद की पार्टी (जेडीयू) को लोकसभा चुनाव में 17 सीटें मिल सकती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब केवल 1 सांसद वाली पार्टी को 5 सीटें दी जा सकती हैं और वह पांचों सीटों पर जीत दर्ज करके गठबंधन के भरोसे को और मजबूत कर सकती है, तब यह तर्क ही बेमानी हो जाता है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को विधानसभा चुनाव में सीमित हिस्सेदारी दी जानी चाहिए।" अरुण भारती ने साफ कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की जमीनी पकड़, संगठन की मजबूती इस बात को साबित करती है कि पार्टी को सीमित सीटों तक बांधकर देखना गलत है। उन्होंने दावा किया किआने वाले विधानसभा चुनाव में LJP-R निर्णायक भूमिका निभाएगी और गठबंधन के भीतर उसे उसका योग्य और सम्मानजनक स्थान अवश्य मिलेगा। दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने एनडीए से अलग रहकर 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था और दो पर ही जीत मिल पाई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश एनडीए में वापस आ गए थे। उस चुनाव में दो सांसदों वाली जेडीयू को एनडीए में 17 सीटें लड़ने के लिए मिली थीं। उस समय लोजपा भी गठबंधन में थी और 7 में से 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद लोजपा में टूट हो गई और चिराग पासवान एवं चाचा पशुपति पारस के दो अलग-अलग गुट बन गए। पारस गुट एनडीए में बना रहा और चिराग 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले अलग होकर अकेले बिहार के चुनावी मैदान में उतरे थे। हालांकि, वे कुछ खास कमाल नहीं कर पाए थे। 2024 लोकसभा चुनाव में चिराग का 100 फीसदी स्ट्राइक रेट 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चिराग की एनडीए में वापसी हो गई और चाचा पशुपति पारस आउट हो गए। चिराग की पार्टी को एनडीए में रहकर 5 सीटें लड़ने कों मिली थीं, जिसमें सभी पर एलजेपी-आर की जीत हुई थी। अब पार्टी उसी 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के हिसाब से बिहार विधानसभा चुनाव में जिताऊ सीटें मांग रही है।  

MBBS डॉक्टर को नहीं आता इंजेक्शन लगाना, गोरखपुर में 15 वर्षीय बच्ची बनी शिकार

गोरखपुर जिले के गगहा थाना क्षेत्र के महुराई सिंघला गांव में एक 15 वर्षीय बच्ची रंजना यादव को अस्पताल में लापरवाही का ऐसा खामियाजा भुगतना पड़ा, जो उसकी जान पर बन आई। परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल के एक कर्मचारी ने गलत तरीके से इंजेक्शन लगाया, जिससे इंजेक्शन की सुई (निडिल) टूटकर बच्ची की नस में फंस गई। घटना के बाद न केवल अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे, बल्कि पुलिस पर भी आरोप लगे कि उन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। फिलहाल बच्ची का ऑपरेशन कर निडिल निकाल दी गई है और अब वह खतरे से बाहर है। सीएमओ गोरखपुर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। क्या हुआ था? रंजना की तबीयत खराब होने पर परिवार वाले उसे लेकर हाटा स्थित एक अस्पताल में गए। वहां एक कर्मचारी ने बाएं हाथ में इंजेक्शन लगाया, लेकिन तुरंत ही रंजना को असहनीय दर्द शुरू हो गया। थोड़ी देर बाद दूसरे हाथ में भी इंजेक्शन लगाया गया, मगर आराम नहीं मिला। रातभर दर्द से कराहती बच्ची को परिजन दोबारा अस्पताल ले गए, लेकिन वहां से सिर्फ दवा देकर वापस भेज दिया गया। दर्द बढ़ने पर एक्स-रे करवाया गया, जिसमें खुलासा हुआ कि निडिल टूटकर नस में फंसी हुई है। अस्पताल ने किया इंतजार, फिर भगाया एक्स-रे रिपोर्ट लेकर जब परिजन दोबारा उसी अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें पूरे दिन अस्पताल में बैठाए रखा गया और आखिर में बदसलूकी कर भगा दिया गया। इससे आहत परिवार ने गगहा थाने में शिकायत की, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। डीएम से की शिकायत, सीएमओ ने दिए जांच के आदेश न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी कार्यालय में गुहार लगाई, जिसके बाद DM गोरखपुर ने सीएमओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने 2 दिन इलाज के बाद सफल ऑपरेशन कर नस में फंसी निडिल निकाल दी। परिजनों की मांग: हो सख्त कार्रवाई रंजना की मां सीमा यादव का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता, तो बच्ची को इतनी पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने मांग की कि ग़ैरजिम्मेदार अस्पताल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मरीज के साथ ऐसी लापरवाही न हो।  

नारी सशक्तिकरण गोरक्षपीठ की परंपरा, बतौर सीएम, योगी ने मिशन शक्ति के जरिए इसे दिया विस्तार

शारदीय नवरात्र के पहले दिन शुरू होगा मिशन शक्ति का पांचवा चरण लखनऊ नारी सशक्तिकरण गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ की परंपरा रही है। पीठ के शैक्षिक प्रकल्प, "महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद" से जुड़े महिलाओं के स्कूल, कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और हॉस्टल इसके प्रमाण हैं। इन संस्थाओं में शिक्षा के साथ इनमें पढ़ने वाली लड़कियों को उनके हुनर निखारने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद पीठ की परंपरा को अपने पद एवं जवाबदेही के अनुसार योगी ने नियोजित तरीके से मिशनरी भाव से नारी सशक्तिकरण, स्वावलंबन और सुरक्षा पर फोकस किया। मिशन शक्ति शुरू करने का मकसद भी यही था।  पांच साल पूर्व शक्तिपीठ देवीपाटन से शारदीय नवरात्र में शुरुआत कर योगी ने दिया था बड़ा संदेश पांच साल पहले शारदीय नवरात्र में ही बलराम जिले में स्थित शक्तिपीठ देवीपाटन से इसकी (मिशन शक्ति) शुरुआत कर योगी ने अपनी प्रतिबद्धता के बारे में बड़ा संदेश दिया था। तबसे नारी सशक्तिकरण, स्वावलंबन एवं सुरक्षा का ये संकल्प लगातार जारी है। इसी क्रम में नवरात्र के पहले दिन 22 सितंबर 2025 को इसके पांचवे चरण की शुरुआत होने जा रही है। पीठ की प्रतिबद्धता के मुताबिक योगी-1.0 के शुरुआत में ही महिलाओं में सुरक्षा का भाव जगाने के लिए मुख्यमंत्री की पहल पर एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन हुआ था। बाद में क्रमशः कई योजनाओं में इसे शामिल किया गया। और, अंततः सबका समन्वय कर मिशन शक्ति के जरिए इसे नियोजित एवं विस्तृत रूप दिया गया। नतीजतन शुरुआत में पिछली सरकारों की अराजकता के कारण सर्वाधिक फोकस महिलाओं की सुरक्षा पर था। पर बाद में इसमें सुरक्षा के साथ, सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन भी शामिल हो गया। इन सारी योजनाओं के नतीजे भी जमीन पर दिख रहे हैं। दरअसल मुख्यमंत्री का यह काम अपनी परंपरा, संस्कृति, संस्कार एवं इतिहास का सम्मान है। महिलाओं का सम्मान भारत की परंपरा उल्लेखनीय है कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति जितनी ही प्राचीन है अपने देश में नारियों को सम्मान देने की परंपरा। डबल इंजन (मोदी और योगी) की सरकार इसी परंपरा को लगातार आगे बढ़ा रही है। मिशन शक्ति के अलावा महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का सशक्तिकरण, निराश्रित महिला पेंशन की पात्रता के लिए उम्र की सीमा खत्म करने के साथ धनराशि में वृद्धि, कन्या सुमंगला योजना, किसान सखी, बैंक सखी जैसी योजनाएं इसका प्रमाण हैं।  गोरक्षपीठ और नारी सशक्तिकरण  मालूम हो कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के साथ गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। उस पीठ के लिए नारी सदैव से शक्ति स्वरूपा और पूजनीय रही है। साल के दोनों नवरात्र के दौरान पीठ में इसका जीवंत स्वरूप भी दिखता है। रोज की खास पूजा के बाद नवरात्र के अंतिम दिन कन्या पूजन से इसका समापन होता है। खुद पीठाधीश्वर के रूप में मुख्यमंत्री कन्यायों का पांव पखारते हैं। उनको भोजन कराते हैं और दक्षिणा देकर विदा करते हैं। यह खुद में नारियों के प्रति सम्मान का एक बहुत बड़ा संदेश है। शिक्षा और स्वावलंबन पर जोर इसके अलावा महिलाओं की शिक्षा और स्वालंबन पर भी पीठ का खासा फोकस रहा है। पीठ  की ओर से संचालित शैक्षिक प्रकल्प महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद कई दशकों से आधी आबादी के शैक्षिक पुनर्जागरण और आर्थिक स्वावलंबन का अलग-अलग तरीकों से पूरे पूर्वांचल में अलख जगा रहा है। शिक्षा परिषद के शिक्षण संस्थाओं में से कई में बालिकाओं के लिए सह शिक्षा (को-एजुकेशन) की व्यवस्था है। आठ ऐसे शिक्षण संस्थान हैं जो विशेष तौर पर बालिकाओं की शिक्षा और उनके स्वावलंबन के लिए ही समर्पित हैं।  महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज, महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज, महाराणा प्रताप टेलरिंग कॉलेज, दिग्विजयनाथ बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय, महाराणा प्रताप मीराबाई महिला छात्रावास, दिग्विजयनाथ महिला छात्रावास, गुरु श्रीगोरक्षनाथ स्कूल ऑफ नर्सिंग, योगिराज बाबा गम्भीरनाथ निशुल्क सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र जैसे संस्थानों से प्रतिवर्ष हजारों बालिकाएं अपने जीवन पथ पर ससम्मान आगे बढ़ रही हैं।

मोहन सरकार ने श्रमिक सुरक्षा को बनाया प्राथमिकता, विशेष ध्यान दिया गया

भोपाल  श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। श्रमिकों की सुरक्षा कर्तव्य के साथ-साथ सामाजिक सरोकार भी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये कारखाना अधिनियम,1948 तथा भवन एवं अन्य संनिर्माण अधिनियम,1996 और इनके अंतर्गत बनाए गए नियमों का पालन करना प्रत्येक नियोजक, कारखाना अधिभोगी और प्रबंधक का कानूनी दायित्व है। सभी कारखानों के प्रबंधन व निर्माण कार्य नियोजकों से अपेक्षा की जाती है कि वे स्वेच्छा से पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें तथा श्रमिकों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण प्रदान करें। संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मती नमिता तिवारी ने बताया है कि श्रमिकों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। कारखानों या निर्माण स्थलों के निरीक्षणों में पाए गए गंभीर उल्लंघनों पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। ज्ञात्व्य है कि सुरक्षा प्रावधानों का उल्लंघन करने पर नियमों में जुर्माना या कारावास या दोनों तरह की कार्रवाई का प्रावधान है। औधोगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के सभी अधिकारियों को समस्त लम्बित वैधानिक प्रकरणों में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए है। इनके त्वरित निराकरण से उत्पन्न निरोधक प्रभाव निर्माण स्थल और कारखानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा। श्रम विभाग ने उद्योग जगत व नियोजकों से सहयोग की अपेक्षा की है ताकि उत्पादन और प्रगति के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा एवं कल्याण भी सुनिश्चित हो सके।  

ढाई लाख से ज्यादा फीडबैक के साथ आगे बढ़ा ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ अभियान

आमजन के लिए शिक्षा सबसे बड़ा मुद्दा, आमजन ने दिया विकसित यूपी का विजन गांव से लेकर शहर तक जनता ने बढ़-चढ़कर दिए अपने सुझाव  एटा, मेरठ, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मैनपुरी, कानपुर देहात, हरदोई जनपदों से आया सर्वाधिक फीडबैक लखनऊ योगी सरकार द्वारा संचालित 'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान निरंतर जनभागीदारी और सुझावों के साथ आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यावसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया और आम जनमानस से संवाद किया। इस संवाद में न केवल विगत आठ-साढ़े 8 वर्षों की विकास यात्रा साझा की गई, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने के लिए रोडमैप पर चर्चा और फीडबैक भी प्राप्त किया गया। ढाई लाख से अधिक फीडबैक दर्ज सरकार द्वारा विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक ढाई लाख से ज्यादा फीडबैक दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1.85 लाख से ज्यादा और नगरीय क्षेत्रों में करीब 70 हजार फीडबैक प्राप्त हुए।  आयु वर्ग के अनुसार 90 हजार से अधिक सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, 1.36 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से करीब 30 हजार से अधिक सुझाव आए हैं। शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक फीडबैक जनता के बीच शिक्षा अब भी सबसे बड़ा मुद्दा है। शिक्षा से जुड़े 90 हजार से अधिक सुझाव मिले। इसके अलावा नगरीय एवं ग्रामीण विकास से जुड़े 50 हजार, स्वास्थ्य और समाज कल्याण पर 20-20 हजार तथा कृषि क्षेत्र से संबंधित 45 हजार से अधिक सुझाव दर्ज किए गए। टूरिज्म में 5 हजार से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।  इन जिलों से मिल रही भागीदारी एटा, मेरठ, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मैनपुरी, कानपुर देहात, हरदोई आदि जनपदों से सबसे अधिक भागीदारी रही। इन जिलों से 90 हजार से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए। यह दर्शाता है कि जनता इस अभियान को गंभीरता से ले रही है। लड़कियों की शिक्षा से लेकर युवाओं के प्रशिक्षण तक मिल रहे सुझाव लखनऊ से पुष्पा शुक्ला ने सुझाव दिया है कि लड़कियों की शिक्षा से लेकर रोजगार तक एक सतत कार्यक्रम बनाया जाए, जिसमें स्कूल स्तर पर साप्ताहिक एसटीईएम एवं वित्तीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, मुफ्त सैनिटरी किट, आईटीआई/पॉलीटेक्निक आधारित लघु कौशल-पाठ्यक्रम (ईवी, उद्यमिता, प्रशिक्षण आदि) और बिज़नेस पास के जरिए उपस्थिति सुनिश्चित कर 2-3 वर्षों में ड्रॉप-आउट दर को 5% से कम करने जैसे कदम शामिल हों। बांदा के योगेश मिश्रा का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीकों के रोजगार अवसरों को नोएडा की तरह लखनऊ, आगरा, मेरठ, कानपुर और वाराणसी जैसे टियर-2 शहरों में भी विस्तार दिया जाए, क्योंकि ये शहर हाई स्पीड ट्रेन नेटवर्क से जुड़े होने के कारण प्रतिभा और संसाधनों को आकर्षित कर सकते हैं। वहीं, जालौन के यश तिवारी ने मांग की है कि जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या एवं गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र बाहर गए बिना अपने गृह जिले में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सके। विकसित उत्तर प्रदेश@2047 विजन के लिए नागरिकों से सुझाव आमंत्रित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प विकसित उत्तर प्रदेश@2047 को साकार करने के लिए प्रदेशभर में 5 सितम्बर से 5 अक्टूबर 2025 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने बताया कि नागरिक अपने सुझाव https://samarthuttarpradesh.up.gov.in पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। 19 सितम्बर को अर्थ एवं संख्या प्रभाग के 300 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया। सचिव नियोजन/महानिदेशक अर्थ एवं संख्या सेल्वा कुमारी जे. ने सभी को स्वयं, परिवार व मित्रजनों से सुझाव दर्ज कराने का आह्वान किया। निदेशक अलका बहुगुणा ढौंडियाल ने अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। प्राप्त सुझावों में से उत्कृष्ट व सार्थक विचारों का चयन कर प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। नियोजन विभाग इस विजन डॉक्युमेंट का नोडल विभाग है।

जगदलपुर : दशहरा पर्व में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सम्पर्क नंबर जारी

जगदलपुर कलेक्टर श्री हरिस एस के मार्गदर्शन में प्रशासन द्वारा बस्तर दशहरा पर्व 2025 अन्तर्गत 02 से 07 अक्टूबर 2025 तक लालबाग मैदान में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। उक्त कार्यक्रम में स्थानीय कलाकार की सहभागिता भी रहेगी, स्थानीय कलाकार जो हिस्सा लेना चाहते हंै वे  जिला पंचायत कार्यालय के जिला समन्वयक पीएमएवाय श्री बी. मनिहार मोबाईल नम्बर +91-70001-30317, प्रोग्रामर श्री शशांक नाग मोबाईल नम्बर +91-94790-22370 एवं मोहम्मद अनीस खान मोबाईल नम्बर . +91-70006-13041 से सम्पर्क कर सकते हंै। स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम हेतु एपीसी शिक्षा विभाग श्री राकेश खापर्डे, मोबाईल नम्बर +91-94255-97331 से सम्पर्क कर सकते हैं। इच्छुक प्रतिभागी कार्यालयीन समय में 22 सितम्बर 2025 तक उपरोक्त दिये गए मोबाईल नम्बर पर सम्पर्क कर अपना पंजीयन करा सकते हैं।

नगर की सड़कों से विकास को मिलेगी रफ्तार: आयुक्त भोंडवे का बयान

नगर की सड़कों से विकास को मिलेगी रफ्तार- आयुक्त भोंडवे सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विषय पर हुई कार्यशाला भोपाल आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे ने कहा है कि नगरीय क्षेत्र की सड़कों से विकास को रफ्तार मिलती है और इसके लिये जरूरी है कि सड़के गुणवत्तापूर्ण हो। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों से जुड़े हुए इंजीनियरों की जवाबदारी है कि वे सड़कों के निर्माण और संधारण पर पूरा ध्यान रखें। आयुक्त श्री भोंडवे शुक्रवार को आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विषय पर हुई कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। शहरी क्षेत्र की सड़कों पर यातायात का दबाब काफी है। इन सड़कों पर नगरीय क्षेत्र की अन्य अधोसंरचनाओं का भी प्रभाव पड़ता है इसलिये जरूरी है कि सड़कों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाया जाये। कार्यशाला में बताया गया कि नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों में 2 लाख करोड़ रूपये के काम होंगे। इसी के साथ केन्द्र सरकार की अमृत, स्वच्छ भारत मिशन एवं प्रधानमंत्री आवास योजना, जलप्रदाय, सीवरेज, हरित क्षेत्र विकास और यूज्ड वाटर मेनेजमेंट आदि कार्यों का क्रियान्वयन भी किया जा रहा है। सड़के हमारी अर्थव्यवस्था की धुरी हैं, जो नगरीय निकायों के समस्त क्षेत्रों को एक साथ जोड़ती हैं। नगरीय क्षेत्रों की सड़कों की गुणवत्ता सीधे तौर पर हमारी कार्य कुशलता को दर्शाती है। नगरीय निकायों के यंत्री अपने कार्य क्षेत्र में पूर्ण योगदान दे रहे हैं किंतु टेक्नोलॉजी में आ रहे परिवर्तन के साथ उन्हें अपनी कार्य प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। कार्यशाला का उद्देश्य भी यही है। कार्यशाला में आईआईटी इंदौर, रूड़की, MORTH, CRRI & RODIC के विषय-विशेषज्ञों द्वारा सड़क निर्माण की नवीन प्रणाली तथा सड़कों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने पर प्रस्‍तुतिकरण दिया गया। विषय विशेषज्ञों ने दी जानकारी कार्यशाला में सड़क निर्माण कार्य से जुड़े विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों को संबोधित किया। इनमें RODIC के श्री आरएस महालहा और श्री एचसी अरोरा ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, टेंडर प्रोसेस, आईआईटी इंदौर, रूडकी, MORTH, CRRI के विषय विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण की नवीन प्रणाली तथा सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर प्रस्तुतिकरण दिया। कार्यशाला में कंस्ट्रक्शन टेक्निक, क्वॉलिटी कंट्रोल, टेस्टिंग लैब की प्रक्रिया, डिजिटल प्रोजेक्ट मेनेजमेंट, रीयल टाइम मॉनिटरिंग, नगर सड़कों की सुरक्षा, सड़क निर्माण में वेस्ट मटेरियल के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रमुख अभियंता श्री प्रदीप मिश्रा ने प्रदेश की नगरीय अधोसंरचना के बारे जानकारी दी। कार्यशाला में प्रदेश के 600 यंत्रियों का क्षमतावर्धन किया गया।  

विवादों में घिरे मुरैना के सबलगढ़ SDM अरविंद माहौर को CM ने सस्पेंड किया

 मुरैना विवाद में घिरे मुरैना के सबलगढ़ एसडीएम अरविंद माहौर पर बड़ा एक्शन हुआ है। एसडीएम अरविंद माहौर के विरुद्ध महिला से अभद्र व्यवहार और नियमविरुद्ध 6 पटवारियों के तबादले करने की गंभीर शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में सीएम मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने कमिश्नर चंबल को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन 6 पटवारियों के ट्रांसफर आदेश जारी करने वाले स्थानांतरित एसडीएम पर सीएम ने सख्त एक्शन लिया है। एक्स पर जानकारी देते हुए सीएम मोहन यादव ने लिखा कि, 'सबलगढ़ (मुरैना) के एसडीएम अरविन्द माहौर के विरुद्ध महिला से अभद्र व्यवहार एवं नियमविरुद्ध पटवारियों के तबादले करने की गंभीर शिकायतों के संज्ञान में आने के पश्चात् एसडीएम को तत्काल निलंबित(Morena Subalgarh SDM suspended) करने के निर्देश दिये हैं। इस प्रकरण में कमिश्नर चंबल को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए भी गए हैं। जनसेवा में आचरण की मर्यादा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।' ये है पूरा मामला विवाद में घिरे सबलगढ़ एसडीएम अरविंद माहौर का कारनामा सामने आया। कलेक्टर अंकित अस्थाना के आदेश के बाद स्थानांतरित किए गए एसडीएम रात 8 बजे अपने ऑफिस पहुंचे और उन्होंने आनन-फानन में 6 पटवारियों के ट्रांसफर कर दिए। जिनमें कुछ पटवारी ऐसे हैं, जिनके स्थानांतरण कुछ समय पहले ही कलेक्टर ने किए थे लेकिन वे अपनी मनचाही जगह पर जाना चाहते थे। उल्लेखनीय है कि हाथठेला लगाने वाले एक युवक के महिला परिजन के प्रताड़ित करने की शिकायत आने पर कलेक्टर अंकित अस्थाना ने मंगलवार की शाम 6 बजे उनका ट्रांसफर मुरैना कर दिया और उनकी जगह मेघा तिवारी को नया एसडीएम बनाने का आदेश जारी किया था। इन पटवारियों के किए स्थानांतरण एसडीएम अरविंद माहौर ने हलका नंबर-54 सबलगढ़ में पदस्थ पटवारी राधा शर्मा को हलका नंबर-5 बाबड़ीपुरा, हलका नंबर-53 सुनहरा में पदस्थ अली हसन को हलका नंबर-34 रामपहाड़ी, पटवारी हरिओम मीणा को हलका नंबर-34 रामपहाड़ी से हटाकर हलका नंबर-53 सुनहरा, पटवारी मुकेश माथुर को हलका नंबर-27 जमुनीपुरा से हटाकर हलका नंबर-54 सबलगढ़, पटवारी सोनम कुशवाह को हलका नंबर-10 जाटौली से हटाकर हलका नंबर-66 बामसौली, प्रिंस गर्ग को हलका नंबर-बामसौली से हटाकर हलका नंबर-10 जाटौली में पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं।

हॉर्टिकल्चर विभाग की योजना से सरगुजा के किसान उत्साहित, 1 रुपए में तैयार करें सीड्स नर्सरी

सरगुजा  किसानों के लिए हॉर्टिकल्चर विभाग ने एक अच्छी योजना शुरू की है. किसान अब मात्र 1 रुपये में सब्जी के बीज का प्लांट तैयार करा सकते हैं. इसके लिए विभाग ने नई सीडलिंग यूनिट लगाई है. अब किसानों को अपनी मनपसंद कंपनी का बीज विभाग को देना होगा. उन बीजों को सीडलिंग यूनिट में तकनीक की मदद से डेवलप किया जाएगा. उन्नत किस्म के तैयार किए गए प्लांट फिर किसानों को दिए जाएंगे. किसान सीधे इन प्लांटों को अपने खेतो में लगा सकता है. उन्नत किस्म के प्लांट से फसल भी अच्छी होगी. किसानों का कहना है कि इस तकनीक और मदद से उनकी आधी परेशानी कम हो गई है. पहले वो बीज तो कभी प्लांट के लिए कई जिलों के चक्कर लगाते थे लेकिन अब उनको यही सुविधा उनके अपने शहर में उपलब्ध हो गई है. सरगुजा में बीज क्रांति: दरअसल, उपचारित प्लांट बाजार में 12 से 15 रुपए में मिलता है, क्योंकि प्राइवेट कंपनी एक बड़ी महंगी सिडलिंग यूनिट लगाकर प्लांट तैयार करते हैं, जिस कारण प्लांट की कीमत अधिक हो जाती है. लेकिन अब किसान अपना बीज हॉर्टिकल्चर विभाग को देकर उनकी यूनिट में प्लांट तैयार करा सकते हैं. प्रति प्लांट का एक रूपये किसानों को देना होगा. किसान अगर प्लांट खुद तैयार करते हैं तो उनके पास कोई ऐसी यूनिट नहीं होती है. कई बार मौसम या बीमारी के कारण प्लांट खराब हो जाते हैं, और किसानों को नुकसान हो जाता है.  हॉर्टिकल्चर विभाग बना किसानों के लिए मददगार: सिडलिंग यूनिट की प्रभारी चंद्रकांती पैकरा बताती हैं कि "बीज को ट्रे में रोपने के बाद उसको जर्मनेशन चेंबर में 12 दिन रखते हैं. फिर उसको हार्डलिंग चेंबर के रखकर तैयार करते हैं. इसके बाद वो बीज का प्लांट तैयार हो जाता है. मार्केट में पौधा महंगा मिलता है यहां पर उनको एक रूपये में तैयार होकर मिल जाता है. अगर किसान खुद से तैयार करते हैं तो सुविधा के अभाव में पौधे पूरे तैयार नहीं हो पाते हैं."

डैम का पानी ओवरफ्लो, सड़क जलमग्न, बोलेरो में फंसे तीन मित्र

झांसी/बबीना पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के चलते प्रदेश के कई जिले तबाह हो चुके हैं। बारिश के चलते सड़कें भी कट गई हैं। एक-दूसरे के गांवों का संपर्क भी कट गया है। लेकिन झांसी में बारिश और बाढ़ का तबाही अभी नहीं रुकी है। बारिश के चलते यहां डैम लबालब हैं। पानी सड़कों तक आ पहुंचा है। गुरुवार की देर शाम चढ़े सुकुवां-ढुकुवां बांध के पानी में बबीना से ललितपुर को जोड़ने वाली सड़क के बॉर्डर पर तीन बोलेरो सवार दोस्त फंस गए। आनन-फनन में नत्थीखेड़ा चौकी पुलिस ने रेस्क्यू शुरू किया। गोताखोरों की मदद ली। करीब सात घंटे के तगड़े ऑपरेशन व आधी रात के बाद तीनों को सुरक्षित निकाला जा सका। कार अब भी फंसी है। सुकुवां-ढुकुवां बांध से निकली सड़क झांसी के बबीना को ललितपुर जिले से जोड़ती है। गुरुवार देर शाम नत्थीखेरा के रहने वाले भगवान भगवान सिंह (32) बेटा सालिगराम अपने दोस्त कमलेश (35) बेटा हरीराम और जीतू (24) बेटा तोरन सिंह पूराकला के साथ बोलेरो से बबीना की तरफ आ रहे थे। जैसे ही चालक बांध से निकली सड़क पर बॉर्डर पर पहुंचा, तभी पानी का बहाव बढ़ गया। अचानक सड़क चढे़ पानी में डूब गई। तेज धार देख चालक की हिम्मत जवाब दे गई। जिससे कार वहीं फंस गई और तीनों दोस्तों चीख-पुकार मच गई। उन्होंने किसी तरह अपने घरों पर फोन किए। जिससे परिजन घबरा गए। आनन-फानन परिवारवालों ने नत्थीखेड़ा चौकी प्रभारी मनीष शुक्ला को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से तुरंत रेस्क्यू शुरू किया गया। लेकिन, गहराती रात और पानी का तेज बहाव मुसीबत बन गया। गोताखोरों लगातार प्रयास करते रहे। करीब सात घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद देर रात लगभग 1 बजे तीनों युवकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। तब कहीं जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। चौकी प्रभारी मनीष शुक्ला ने बताया कि पानी का बहाव कम होने पर बोलेरो को भी बाहर निकालने का प्रयास किया जाएगा। तीनों कार सवारों को सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि बारिश के मौसम में बांधों और नदियों के रास्ते से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतें। पानी की धारा जरा भी ऊपर तो जान जोखिम में कतई न डालें। इंतजार करें या फिर रास्ता बदल दें। लेकिन, उसे पानी करने की कोशिश न करें।