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रैगिंग रोकने के लिए सख्ती, आरजीपीवी में स्थापित होगी स्थायी पुलिस चौकी

भोपाल  अक्सर अपराध पर नियंत्रण के लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पुलिस चौकी बनाई जाती है, लेकिन अब राजधानी के एक विश्वविद्यालय में रैगिंग पर रोकथाम के लिए पुलिस की चौकसी बढ़ाई जाएगी। भोपाल का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में रैगिंग व मारपीट जैसे विवादों का गढ़ बनते जा रहा है। पिछले साल सात मामले यूजी की रैगिंग हेल्पलाइन में दर्ज हुए हैं। वहीं इस साल अब तक आठ माह में आठ से अधिक मामले दर्ज हो गए। इस पर अंकुश लगाने के लिए आरजीपीवी के कुलगुरु ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर विवि में पुलिस चौकी बनाने के लिए कहा है।साथ ही विवि ने यूजीसी से रैगिंग के रोकथाम के लिए जारी की गई गाइडलाइन को हर जगह चस्पा किया जा रहा है।साथ ही कनिष्ठ व वरिष्ठ विद्यार्थियों को रैगिंग में शामिल होने पर उसके दुष्परिणाम को समझाया जा रहा है। इस साल राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय(एनएलआइयू) में दो अौर बरकतउल्लाह विवि में चार मामले सामने आए हैं। राजधानी के शैक्षणिक संस्थानों में बीते आठ माह में करीब 15 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। विद्यार्थियों को अलग-अलग छात्रावास में रखा जाए यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को छात्रावास में इस सत्र से जूनियर और सीनियर विद्यार्थियों को अलग-अलग रखने के लिए निर्देश दिए हैं। विश्वविद्यालयों ने इसका पालन भी इस सत्र से करना शुरू कर दिया है। आरजीपीवी, बीयू, एनएलआइयू व मैनिट सभी संस्थानों में जूनियर को अलग छात्रावास में रखा जा रहा है। आरजीपीवी विद्यार्थियों को दंडित भी कर रहा है। इसके अलावा सभी विद्यार्थियों से एंटी-रैगिंग की अंडरटेकिंग लेकर जमा कराया जा रहा है। इन संस्थानों में हाल में हुई रैगिंग की घटनाएं     आरजीपीवी में 24 जुलाई को जूनियर छात्र के साथ मारपीट हुई। आरोपित विद्यार्थियों पर कार्रवाई की गई।     दो अगस्त को आरजीपीवी के यूआइटी और छात्रावास के विद्यार्थियों के बीच विवाद हिंसक हुआ।छह विद्यार्थियों को छात्रावास से निष्कासित किया गया।     आठ सितंबर को जूनियर छात्राओं प्रथम वर्ष की छात्राओं के साथ रैगिंग किया।मामले में दो छात्राओं को छात्रावास से निष्कासित और तीन छात्राओं पर अर्थ दंड लगाया गया।     बीयू के छात्रावास में 20 जुलाई को जूनियर को शराब पिलाकर कैबरे डांस कराया गया।आरोपिताें को छात्रावास से निष्कासित किया गया।     एनएलआइयू में बीते 15 दिन के अंदर दूसरी बार मारपीट और रैगिंग की घटनाएं हुई हैं।दोनों मामलों में संस्थान की एंटी रैगिंग कमेटी ने कोई कार्यवाही नहीं की है। यह भी है रैगिंग     विद्यार्थी को रंग-रूप या पहनावे पर टिप्पणी कर प्रताड़ित करना     नस्ल, पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति, क्षेत्रीयता, भाषा या जाति को लेकर अपमानित करना     मौखिक रूप से अपमान करना, सामाजिक बहिष्कार का डर पैदा करना भी रैगिंग     वॉट्सएप ग्रुप बनाना भी रैगिंग मानी जाएगी     जूनियर को धमकाने पर भी कार्यवाही की जाएगी।     किसी भी तरह का शारीरिक या मानसिक तनाव भी रैगिंग है। रैगिंग करने पर यह मिलेगी सजा     कक्षा में उपस्थित होने और शैक्षिक अधिकारियों से निलंबन।     छात्रवृत्ति सहित अन्य लाभों से वंचित किया जाएगा।     किसी टेस्ट या परीक्षा सहित अन्य मूल्यांकन प्रक्रिया से अनुपस्थित किया जाएगा।     रिजल्ट रोका जाएगा।     छात्रावास से निष्कासित कर प्रवेश भी रद किया जाएगा।     संस्था से चार सत्रों तक के लिए निष्कासन करना। यहां करें शिकायत     यूजीसी का टोल फ्री नंबर 1800-180-5522     कुलगुरु का फोन नंबर- 0755-2742001     कुलसचिव का फोन नंबर- 0755-2734913,2734913     फैक्स नंबर-0755-2742006, ईमेल आईडी-registrar@rgtu.net     अधिष्ठाता छात्र कल्याण फोन नंबर-2678870, ईमेल आईडी-dsw@rgtu.net रात में हॉस्टल में किसी को नहीं मिलेगा प्रवेश     रैगिंग की घटनाओं पर रोकने के लिए रात में छात्रावाओं व परिसर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। फ्लाइंग स्क्वायड छात्रावासों की गतिविधियों पर नजर रखने और निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। छात्रावास में रात में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। – सुधीर भदौरिया, डायरेक्टर, यूआईटी आरजीपीवी दो-दो घंटे की शिफ्ट में निरीक्षण करेगें     एंटी रैगिंग कमेटी की ओर से वरिष्ठ विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणाम समझाए जा रहे हैं। छात्रावास में रात को दो-दो घंटे की शिफ्ट में टीम निरीक्षण करेगी। – डॉ. शैलेंद्र जैन, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, मैनिट  

निगम व्यवस्था में बदलाव: भोपाल में बनेंगी चार नई बिल्डिंग परमिशन सेल्स

भोपाल  भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन (metropolitan region) बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन संचालनालय ने एक कदम और आगे बढ़ाया है। संचालनालय ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र जारी कर शहर में मौजूद बीएमसी के सभी प्रकार के इंजीनियर्स की लिस्ट तैयार करने कहा है। इंजीनियर वर्ग को मेट्रोपॉलिटन रीजन में अलग-अलग जिम्मेदारी दी जानी हैं। एमपीआर में चार बिल्डिंग परमिशन सेल (metropolitan region) बनाई जानी हैं जिसके लिए सिविल केडर से चार सिटी प्लानर बनेंगे। सीवेज, पार्किंग, रोड, ट्रैफिक, लाइटिंग जैसे कामों के लिए अलग-अलग कार्यपालन यंत्री निर्धारित किए जाएंगे जिनके निर्देशन में टीम काम करेगी। अभी नगर निगम 85 वार्ड में काम चलाउ व्यवस्था पर टिका हुआ है। एक इंजीनियर के भरोसे तमाम काम एक इंजीनियर के भरोसे तमाम काम छोड़ दिए गए हैं। उसमें भी योग्यता का ध्यान नहीं रखा गया है। निगम के सभी विभागों में बरसों से काम करने वाले इंजीनियरों के विभाग आपस में बदल दिए गए हैं। आदेश में स्वच्छ भारत, सीवेज प्रबंधन, झील संरक्षण, सिविल डिपार्टमेंट, भवन अनुज्ञा शाखा, वाटर सप्लाई डिपार्टमेंट, हाउङ्क्षसग फॉर ऑल, सड़क, बिजली पानी से जुड़े अन्य विभागों के इंजीनियरों को आपस में बदला है। बिजली वालों को सीवेज का काम भोपाल नगर निगम में आरके त्रिवेदी मूलपद(उपयंत्री) विद्युत थे। इन्हें प्रभारी कार्यपालन यंत्री, सीवेज एवं एसबीएम शाखा बनाया गया। अजय मालवीय, मूलपद उपयंत्री मेकेनिकल को प्रभारी कार्यपालन यंत्री जलकार्य, सुरेश कुमार राजेश सिविल इंजीनियर हैं लेकिन इन्हें हुजूर विधानसभा में बिजली प्रभार दिया गया है। एनके डेहरिया कार्यपालन यंत्री उखार विस में सिविल इंजीनियर हैं। डेहरिया से अभी भी भवन अनुज्ञा शाखा में सहायक यंत्री का काम जी टू कंसोल के जरिए करवा रहे हैं। अनिल कुमार साहनी, सिविल इंजीनियर हैं।

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राहियों को मुफ्त बिजली का लाभ

राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी से उपभोक्ताओं को मिल रहा दोगुना फायदा, बिजली बिल में राहत और पर्यावरण संरक्षण की सौगात रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राही हो रहे लाभान्वितप्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत न केवल बिजली बिल में भारी बचत हो रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी के साथ अब राज्य सरकार द्वारा भी अतिरिक्त सब्सिडी दिए जाने से यह योजना आम उपभोक्ताओं के लिए और भी लाभप्रद सिद्ध हो रही है। योजना के अंतर्गत 5 किलोवाट तक के सोलर रूफटॉप सिस्टम पर केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस पहल से आमजन के बिजली बिल लगभग शून्य हो रहे हैं और अतिरिक्त बिजली उत्पादन से आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। सक्ती जिले के ग्राम पोरथा निवासी श्री कुलदीप कुमार राठौर ने अपने घर की छत पर 2 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित कराया। इसकी कुल लागत लगभग 1 लाख 40 हजार रुपए रही, जिसमें उन्हें केंद्र सरकार से 60 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। श्री राठौर का कहना है कि राज्य सरकार की सब्सिडी मिलना उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभप्रद है। अब उनके घर का बिजली बिल पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, जिससे आर्थिक बोझ घटा है और वे बचत की राशि अन्य जरूरी कार्यों में उपयोग कर पा रहे हैं। इसी तरह महासमुंद जिले के पीटियाझर निवासी श्री महेश पाल, जो राज्य पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सौर पैनल सिस्टम स्थापित कराया। पिछले दो माह से उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और उन्हें क्रेडिट यूनिट का भी लाभ मिल रहा है। श्री पाल का कहना है कि यह योजना न केवल आर्थिक रूप से राहत दे रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान करने का अवसर प्रदान कर रही है। प्रदेश में अब तक हजारों उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। केवल महासमुंद जिले में ही 583 उपभोक्ता योजना का लाभ ले रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ रहे हैं।

14 सितंबर से MP में मॉनसून फिर होगा सक्रिय, मौसम विभाग ने दिया भारी बारिश का चेतावनी संदेश

भोपाल मध्यप्रदेश में मॉनसून एक बार फिर से जोर पकड़ने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में बारिश का दौर थम सा गया है। आज से मध्यप्रदेश फिर से बारिश में भीगने वाला है। मौसम विभाग का कहना है कि कल से 17 सितंबर तक मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा।। मौसम विभाग की भविष्यवाणी मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 14-15 सितंबर से मध्यप्रदेश में मॉनसून फिर से रफ्तार पकड़ेगा। इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम संभागों में तेज बारिश की संभावना है, जिसके लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रीवा, सागर और शहडोल संभागों में भी भारी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव क्षेत्र के कारण यह बारिश का दौर 17 सितंबर तक जारी रह सकता है। इस साल जमकर बरस रहा मॉनसून आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में इस साल मॉनसून ने उम्मीद से ज्यादा मेहरबानी दिखाई है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 36.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 33.4 इंच से 9% अधिक है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 6% और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12% ज्यादा बारिश हुई है। मंडला जिला 47.56 इंच बारिश के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जबकि भोपाल में 43 इंच से अधिक बारिश हो चुकी है।

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट 2023: मध्य प्रदेश में 0-9 वर्ष के बच्चों का अनुपात घटकर 42.2% से 24.2% हुआ

भोपाल  मध्य प्रदेश में 14 वर्ष तक के बच्चों की संख्या में तेजी से गिरावट हो रही है. बीते 52 सालों में प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि बच्चों की संख्या में यह गिरावट अचानक से नहीं है. मध्य प्रदेश में 0-9 साल तक के बच्चों की संख्या में गिरावट का दौर 1971 से चल रहा है. इसका खुलासा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम स्टेटिकल रिपोर्ट 2023 में हुआ है. साल 1991 के बाद तेजी से कम हो रही संख्या एसआरएस की रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में 0 से 14 साल के बच्चों की जनसंख्या में क्रमिक रूप से गिरावट आ रही है. साल 1971 में इस उम्र वर्ग के बच्चों की संख्या कुल जनसंख्या की 42.2 प्रतिशत थी. वहीं साल 1981 में कुल जनसंख्या की 38.1 प्रतिशत पर पहुंच गई. 1991 में 0 से 14 साल तक के बच्चों की जनसंख्या 36.3 प्रतिश थी, लेकिन साल 2023 में ऐसे बच्चों की संख्या 24.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यानि कि 1971 से 2023 के बीच में 0 से 9 साल तक के बच्चों की जनसंख्या में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. युवाओं और बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोत्तरी एसआरएस 2023 की रिपोर्ट में भले ही मध्य प्रदेश में बच्चों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. लेकिन युवाओं और बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. 15 से 59 वर्ष के आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या का अनुपात साल 1971 में 53.4 प्रतिशत था, जो साल 1981 में बढ़कर 56.3 प्रतिशत हो गया. वहीं साल 1991 से 2023 के दौरान ऐसे आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या का प्रतिशत 57.7 से बढ़कर 66.1 हो गया है. वहीं 60 प्लस और 65 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. महिला-पुरुष दोनों की जनसंख्या में सुधार यदि 15 से 59 साल तक के महिला और पुरुष की बात करें तो दोनों की जनसंख्या में सुधार देखा गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों का प्रतिशत साल 2022 में 7.7 की तुलना में साल 2023 में बढ़कर 7.8 हो गया है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिशत साल 2022 में 8.2 था, जो साल 2023 में 9.0 प्रतिशत हो गया है. इसी तरह शहरी क्षेत्रों में 15 से 59 साल तक के पुरुषों की संख्या साल 2022 में 8 प्रतिशत की तुलना में साल 2023 में 8.5 प्रतिशत बढ़ गई है. जबकि इसी आयु वर्ग की महिलाओं की संख्या में साल 2022 की तुलना में 2023 में 8.6 की तुलना में 9.5 प्रतिशत हो गई है. बच्चों के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश में भले ही क्रमिक रूप से 0 से 14 वर्ष के बच्चों की संख्या में गिरावट हो रही है. इसके बावजूद मध्य प्रदेश बच्चों की संख्या के मामले में देश में उत्तर प्रदेश के साथ सयुंक्त रूप से तीसरे स्थान पर है. देश में सबसे अधिक बच्चों की संख्या बिहार में 11.3 प्रतिशत, दूसरे नंबर पर राजस्थान में 9.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या का प्रतिशत 9.2 है. वहीं मध्य प्रदेश के बाद तमिलनाडु में 5.7 प्रतिशत, पंजाब में 6 प्रतिशत और केरल में 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों की संख्या का प्रतिशत 6.2 है.  

अक्टूबर से शुरू हो सकती है नई इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन, मुंबई से आए 16 नए कोच

 इंदौर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने अब इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन को 16 कोचों के साथ चलाने का फैसला किया है. मुंबई से सभी नए कोच इंदौर पहुंच चुके हैं और इंदौर रेलवे डिपो में इनके मेंटेनेंस का काम चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर से यह ट्रेन नए और बढ़े हुए कोचों के साथ चल सकती है. फिलहाल यह ट्रेन 8 कोचों के साथ चल रही है, जिनमें कुल 530 सीटें हैं, लेकिन 16 कोच होने के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 1150 से ज़्यादा हो जाएगी, जिससे यात्रियों को सुविधा होगी.रतलाम मंडल इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को अपग्रेड करने के साथ ही इसे अब आठ की जगह 16 कोच के साथ चलाएगा। इसके लिए पिछले सात से आठ दिन पहले मुंबई के वाड़ी बंदर डिपो से 16 रैक इंदौर आ चुके हैं, जिनका रखरखाव का कार्य इंदौर रेलवे डिपो पर जारी है। फिलहाल ये 16 रैक लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं। रतलाम मंडल के एक वरिष्ठ ने बताया कि संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलेगी। सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला इंदौर से भोपाल होकर नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड की कमेटी ने लिया है। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और सीटों की भारी मांग को देखते हुए ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ने की तैयारी चल रही है। रेलवे बोर्ड कमेटी ने पिछले दिनों वंदे भारत ट्रेन की ऑक्यूपेंसी (ट्रेन में कितनी सीटें भरी हुई हैं) और यात्रियों की मांग के संबंध में सभी जोन और मंडलों से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद देशभर में चल रही सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला लिया गया था। 52 सीटें एक्जीक्यूटिव और शेष चेयरकार कोच में रतलाम रेलवे मंडल से मिली जानकारी के अनुसार मंडल ने बढ़ती संख्या में यात्रियों और टिकट की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया था। वर्तमान में इंदौर-नागपुर वंदे भारत आठ कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास और शेष चेयरकार कोच में हैं। नए सिरे से कर रहे रखरखाव रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले सात से आठ दिन पहले सेंट्रल रेलवे के तहत आने वाले मुंबई के वाड़ी बंदर डिपो से वंदे भारत के लिए 16 रैक आ चुके हैं, जो फिलहाल लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के तीन नंबर प्लेटफार्म के पास वाले ट्रैक पर खड़े हैं। इन रैक का नए सिरे से रखरखाव कर रहे हैं। 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन इंदौर-नागपुर के पुराने आठ कोच को कहां भेजा जाएगा, इस विषय पर रेलवे बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलेगी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड कमेटी ने लिया है। कोच संख्या आठ बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। 8 कोच कहां भेजेंगे, इस पर निर्णय नहीं वर्तमान में इंदौर-नागपुर के पुराने 8 कोच को कहां भेजा जाएगा, इस विषय पर रेलवे बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलना शुरू हो जाएगी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड कमेटी ने लिया है। कोच संख्या आठ बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। 1150 से अधिक होगी सीटों की संख्या इंदौर-भोपाल वंदे भारत 8 कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास में और शेष चेयरकार कोच में हैं। सी-1 और सी-7 कोच में कुल 88 सीटें हैं। सी-2 से सी-6 तक के पांच कोच में प्रत्येक कोच में 78 सीटें हैं, कुल 390 सीटें। बी-1 कोच (एक्जीक्यूटिव क्लास) में 52 सीटें हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, कोच संख्या बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसके बाद इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। इन रूटों पर कोच का अपग्रेडेशन मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, सिकंदराबाद-तिरुपति, चेन्नई एग्मोर-तिरुनेलवेली, मदुरै-बेंगलुरु कैंट, देवघर-वाराणसी, हावड़ा-राउरकेला, इंदौर-नागपुर। पश्चिम मध्य रेल के यात्रियों को भी मिलेगा लाभ पश्चिमी मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस (20911/12) में कोच की संख्या बढ़ने से इस मार्ग पर अधिक सीटें उपलब्ध होंगी। इसका सीधा लाभ भोपाल, नर्मदापुरम और इटारसी के यात्रियों को भी मिलेगा। इस विस्तार से न केवल वेटिंग लिस्ट कम होगी, बल्कि यात्रियों का सफर भी और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। यह दिखाता है कि वंदे भारत एक्सप्रेस अब सिर्फ अपनी गति और तकनीक के लिए ही नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों के अनुसार लगातार बेहतर होती सुविधाओं के लिए भी जानी जाती है। 27 जून से हुई थी इंदौर-भोपाल ट्रेन की शुरुआत इंदौर और भोपाल के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत 27 जून को हुई थी। ट्रेन इंदौर से भोपाल तक के सफर में सिर्फ उज्जैन में 5 मिनट के लिए रुकती है। इससे पहले इंदौर-भोपाल के बीच सबसे तेज़ ट्रेन इंदौर–जबलपुर एक्सप्रेस थी, जो 3 घंटे 55 मिनट में यह दूरी तय करती थी। रेल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत के एक महीने में इस ट्रेन में औसतन रोजाना 75 फीसदी सीटें खाली रहीं। केवल 25 फीसदी यात्रियों के साथ ही ट्रेन का संचालन हुआ। रेल अधिकारियों ने यात्रियों की कम संख्या को लेकर इसका रिव्यू भी किया। ट्रेन का नियमित संचालन 28 जून से शुरू हुआ, जिसके बाद यात्रियों ने पूरी सीट क्षमता के साथ सफर किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आग्रह पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ट्रेन को नागपुर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद इंदौर–भोपाल वंदे भारत अब नागपुर तक चलने लगी है। इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में कोच बढ़ाने के मामले में 16 रैक मिल चुके हैं। इन कोच का रखरखाव इंदौर रेलवे डिपो में जारी है। इंदौर-नागपुर वंदे भारत में कुल 90 फीसदी और कुछ सेक्शन में 100 प्रतिशत आक्यूपेंसी है। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच … Read more

गोल्फ कार्ट सेवा, किराया तय इस महीने से वन विहार में निजी वाहनों की एंट्री बंद, गोल्फ कार्ट सेवा से होगी सुविधा

भोपाल  राजधानी भोपाल स्थित नेशनल पार्क वन विहार में अब आप अपना निजी वाहन लेकर प्रवेश नहीं कर पाएंगे। वन विभाग इसी महीने निजी वाहनों पर रोक लगा देगा। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। दरअसल वन विहार नेशनल पार्क को पॉल्यूशन फ्री करने की तैयारी की जा रही है। वन विहार के अधिकारियों के अनुसार यहां पर अब 40 गोल्फ कार्ट चलाया जाए। जिनका पर्यटकों से 50 से 60 रुपए तक किराया वसूला जाएगा। जानकारी के लिए बतादें कि वन विहार नेशनल पार्क नेट जीरो पॉल्यूशन वाला प्रदेश का पहला नेशनल पार्क बनने जा रहा है।    जानवरों के प्रजनन क्षमता पर पड़ता है असर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निजी वाहनों की तेज रफ्तार और हॉर्न की आवाज से जानवरों के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। जिससे उनके प्राकृतिक रहवास में भी व्यवधान होता है। वाहनों के शोर की वजह से वन जीवों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे वो तनाव ग्रस्त होते हैं और इसका असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। इसीलिए अब वन विहार में पेट्रोल-डीजल वाले निजी वाहनों में प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि वन विहार में सिंगल यूज पालीथिन और प्लास्टिक बोतलें पहले से प्रतिबंधित है। पर्यटक यहां खाने-पीने का सामान नहीं ले जा सकते हैं। अब वन विहार में वन्य प्राणियों और परिसर में निकलने वाले कचरे का 100 प्रतिशत निष्पादन किया जाएगा।  मुख्यमंत्री करेंगे गोल्फ कार्ट का शुभारंभ  वन विहार के 40 ई गोल्फ कार्ट का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक बाइक और साइकिल भी वन विहार की सफारी के लिए पर्यटकों को दी जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गोल्फ कार्ट वन विहार में चलने को तैयार है। इसके शुभारंभ के लिए सीएम डॉ.मोहन यादव से समय मांगा गया है। संभवतः सितंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में ई गोल्फ कार्ट को सीएम डॉ. यादव हरी झंडी दिखा सकते हैं। वन विहार की असिस्टेंट डायरेक्टर डायरेक्टर डॉ.रुही हक ने बताया कि विभाग वन विहार में पेट्रोल-वाहनों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहा है। लेकिन इससे नेशनल पार्क में पर्यटकों की संख्या प्रभावित न हो और उन्हें मामूली शुल्क में सफारी कराई जा सके। इसके लिए गोल्फ कार्ट मंगवाए गए हैं। पर्यटकों के लिए ऐसी रहेगी व्यवस्था डॉ.रुही हक ने बताया कि पर्यटकों को एक ही स्थान पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए गोल्फ कार्ट का संचालन ऐसे किया जाएगा, जिससे हर 10 मिनट में वन विहार के सभी बाड़े के सामने गोल्फ कार्ट पहुंच सके। वन विहार में 4 पहिया वाहनों से आने वाले पर्यटकों के लिए गेट नंबर दो पर पार्किंग बनाई जा रही है। जबकि दो पहिया वाहन चालकों के लिए एक और दो दोनों गेट पर पार्किंग स्थल बनाया जा रहा है। पर्यटकों को पार्किंग स्थल के सामने से ही नेशनल पार्क की सफारी के लिए गोल्फ कोर्ट मिलेंगे। 

प्राकृतिक खेती से सजेगा नर्मदा का किनारा, MP सरकार ने बनाई नई कार्ययोजना

 भोपाल  नर्मदा नदी के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है। नदी के दोनों किनारों के पांच-पांच किमी तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे कीटनाशक व अन्य रसायनों के नर्मदा नदी में जाने से रोकने में मदद मिलेगी। नदी के दोनों ओर स्थित जनजातीय बहुल क्षेत्र में साल और सागौन का पौधारोपण और जड़ी-बूटियों की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी। समृद्ध बायोडायवर्सिटी के संरक्षण व प्रोत्साहन गतिविधियों में वनस्पति शास्त्र और प्राणी शास्त्र के विशेषज्ञों को जोड़ते हुए विविध गतिविधियां संचालित की जाएंगी। नर्मदा तट पर बसे धार्मिक नगरों और स्थलों के आसपास मांस-मदिरा का उपयोग कड़ाई से प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा अमरकंटक में उद्गम स्थल से दूर भूमि चिह्नित कर सैटेलाइट सिटी विकसित की जाएगी। ड्रोन के जरिए रखी जाएगी नजर बता दें कि बीते दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक समीक्षा बैठक में यह विषय आया था। मुख्यमंत्री ने वन एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाने के निर्देश दिए थे। यही विभाग योजना बनाएगा और क्रियान्वित करेगा। इसके तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए नर्मदा के आसपास चलने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट इमेजरी व ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी नजर रखी जाएगी। एमपी में 1079 किमी लंबी है नर्मदा नदी विभिन्न शासकीय विभागों के साथ स्वयंसेवी संगठनों, आध्यात्मिक मंचों और जनसामान्य की सक्रिय सहभागिता से कार्ययोजना को धरातल पर उतारा जाएगा। मप्र में अमरकंटक से आंरभ होकर खम्बात की खाड़ी(अरब सागर) में मिलने वाली 1312 किलोमीटर लंबी नर्मदा नदी की प्रदेश में लंबाई 1079 किलोमीटर है। नर्मदा के किनारे 21 जिले, 68 तहसीलें, 1138 ग्राम और 1126 घाट हैं। नर्मदा किनारे 430 प्राचीन शिव मंदिर और दो शक्तिपीठ विद्यमान हैं।

माँ और अफ़सर: 20 दिन की बेटी के साथ आत्मविश्वास से DSP बनी वर्षा की कहानी

सतना मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीएससी 2024) की चयन सूची ने इस बार सतना और मैहर के होनहारों की चमक बढ़ा दी है। लेकिन इनमें सबसे प्रेरणादायक कहानी है मैहर जिले की वर्षा पटेल की, जिन्होंने गोद में 20 दिन की मासूम बेटी लेकर साक्षात्कार दिया और सीधे डीएसपी पद पर चयनित होकर महिला वर्ग में प्रदेश में पहली रैंक हासिल की। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गई है। 20 दिन की बेटी को गोद में लेकर साक्षात्कार रामनगर क्षेत्र के बाबूपुर गांव की रहने वाली वर्षा पटेल की परीक्षा यात्रा आसान नहीं रही। यह उनका तीसरा प्रयास था। जब इंटरव्यू का कॉल आया, उस वक्त उनकी बेटी श्रीजा सिर्फ 20 दिन की थी। लेकिन मातृत्व की जिम्मेदारी और प्रशासनिक सेवा का सपना, दोनों को साथ लेकर वर्षा इंटरव्यू में पहुंचीं। बेटी को गोद में लेकर उन्होंने हर सवाल का आत्मविश्वास से जवाब दिया। बाहर निकलते ही उन्हें महसूस हुआ कि अब सफलता तय है और नतीजों ने भी यही साबित कर दिया।   पति ने छोड़ी नौकरी, दिया हौसला वर्षा ने अपनी पढ़ाई दमोह से की और बीएससी बायो से उच्च शिक्षा हासिल की। तैयारी के दौरान उन्होंने मात्र छह माह इंदौर से कोचिंग ली, बाकी मेहनत खुद पर भरोसा कर की। इस पूरे संघर्ष में उनके पति संजय कुमार सबसे बड़ा सहारा बने। इंजीनियर होने के बावजूद उन्होंने पत्नी के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और मैहर में रहकर व्यवसाय शुरू किया। वर्षा मानती हैं कि उनकी सफलता में पति का त्याग और सहयोग सबसे अहम है।   आशीष पाण्डेय ने भी बढ़ाया सतना का मान इसी सूची में सतना जिले के रैगांव क्षेत्र के इटौरा गांव के आशीष पाण्डेय का चयन ट्रेज़री ऑफिसर पद पर हुआ है। उनके पिता उमेश पाण्डेय गुजरात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। आशीष ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। साधारण परिवार से निकलकर यह मुकाम पाने वाले आशीष युवाओं के लिए मिसाल हैं।

2050 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट: एमपी के किसानों को मिलेगा मालामाल होने का मौका

भोपाल मध्यप्रदेश के किसानों की किस्मत संवरनेवाली है। खासतौर पर प्रदेश के 18 जिलों के किसान जल्द ही मालामाल हो सकते हैं। ये जिले कपास उत्पादन में अग्रणी हैं। यहां के कपास किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए धार में पीएम मित्रा पार्क की स्थापना की जा रही है। 2050 करोड़ का यह प्रोजेक्ट कपास उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोल देगा। ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध‍ि पा चुका है। यही वजह है कि इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। वस्त्र उद्योग में निवेश के लिए मध्यप्रदेश सबसे उपयुक्त राज्य साबित हो रहा है। ऐसे में किसानों का कपास न केवल हाथों हाथ बिकेगा बल्कि इसकी कीमत भी अच्छी मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि कपास आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनकी फसल का दोगुना मूल्य मिलेगा। पीएम मित्रा पार्क प्रोजेक्ट गांव-गांव तक आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और स्थानीय बाजारों से लेकर निर्यात तक नई संभावनाएं पैदा करेगा। प्रदेश के मालवा अंचल के डेढ दर्जन जिलों में सबसे ज्यादा कपास होता है। इनमें प्रमुख रूप से इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खण्डवा और बुरहानपुर शामिल हैं। पिछले 3 वर्षों में यहां खासा कपास हुआ है। वर्ष 2022-23 में 8.78 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 6.30 लाख मीट्र‍िक टन और 2024-25 में 5.60 लाख मीट्र‍िक टन कपास उत्पादन हुआ।‍ सीएम डॉ. मोहन यादव बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को धार के पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। इससे मध्यप्रदेश देश की काटन कैपिटल बन जाएगा। कपास उत्पादक किसानों का अंतर्राष्ट्रीय बाजार से सीधा संपर्क हो जाएगा। किसान वैश्व‍िक बाजार से जुड़ जाएंगे। इस तरह धार का पीएम मित्रा पार्क कपास उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोलेगा। धार का पार्क 2158 एकड़ जमीन पर करीब ₹ 2050 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। फर्स्ट फेज के अधोसंरचना विकास के लिए 773 करोड़ रुपए की लागत के टेंडर 30 जून 2025 को जारी किए गए। यह पार्क विश्व स्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां 20 MLD का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 10 MVA का सौर ऊर्जा संयंत्र, पानी और बिजली की पुख्ता आपूर्ति, आधुनिक सड़कें और 81 प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। 18 जिलों की धरती कपास की फसल से लहलहाती बता दें कि मध्यप्रदेश लंबे समय से कपास उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। प्रदेश के करीब 18 जिलों की धरती कपास की फसल से लहलहाती है। करीब 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बोवनी की जाती है। हर साल करीब 24 लाख टन कपास पैदा होता है। 27 हजार 109 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव इतना ही नहीं, देश में जितना ऑर्गेनिक कॉटन पैदा होता है, उसका करीब 40 प्रतिशत अकेले मध्यप्रदेश से आता है। यही वजह है कि वस्त्र उद्योग के लिए मध्यप्रदेश सबसे उपयुक्त गंतव्य साबित हुआ है। इस प्रोजेक्ट के लिए निवेशकों का भरोसा भी साफ दिखाई देता है। अब तक कुल 27 हजार 109 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। पार्क “फार्म से फाइबर, फैक्ट्री से फैशन और विदेश” की संपूर्ण वैल्यू चेन को साकार करेगा। यहां किसानों से प्राप्त कच्चे कपास का उद्योगों में धागा बनेगा, वहीं से वस्त्र-परिधान तैयार होंगे और यही उत्पाद विदेशों तक जाएंगे। इस तरह पूरी वैल्यू चेन एक ही स्थान पर पूरी होगी। पीएम मित्रा पार्क से करीब 3 लाख रोजगार सृजित होंगे। इसमें एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। वस्त्र क्षेत्र के बड़े संगठन और उद्योग समूह यहां आकर निवेश की रुचि दिखा चुके हैं। इससे न केवल प्रदेश को औद्योगिक लाभ मिलेगा, बल्कि निर्यात को भी नई दिशा मिलेगी। धार से तैयार वस्त्र और परिधान अब सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचेंगे और मध्यप्रदेश वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी अलग पहचान बनाएगा।