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घग्गर-मारकंडा के उफान से हरियाणा के गांव जलमग्न, ट्रेनों का संचालन रद्द

हिसार  हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और चरखी दादरी जिलों में लगातार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। ड्रेन और नहरों के टूटने से कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, फसलें डूब गई हैं और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। हिसार में ड्रेन टूटने से भारी नुकसान हिसार जिले में घिराय, पातन और भिवानी रोहिल्ला के पास घग्गर ड्रेन के टूटने से करीब 300 एकड़ क्षेत्र में जलभराव हो गया। जिले में अब तक 61 हजार एकड़ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। 28 गांवों की बाहरी बस्तियों और ढाणियों में पानी भरा हुआ है, जबकि 34 स्कूलों के परिसर में जलभराव की स्थिति है। रामगढ़ में जलभराव से नाराज ग्रामीणों ने हिसार-सिवानी रोड पर जाम लगाकर विरोध जताया। फतेहाबाद में मजदूर की मौत फतेहाबाद के भट्टूकलां में गांव रामसरा के पास हिसार मल्टीपर्पज चैनल ड्रेन टूटने से 700 एकड़ फसलें डूब गईं। करीब 15 ढाणियों में भी पानी भर गया। बचाव कार्य के दौरान ढिंगसरा गांव के मजदूर निगेह सिंह (42) की हार्टअटैक से मौत हो गई। भूना में बाढ़ जैसे हालात हैं, जहां दहमान गांव के 300 घरों में पानी घुस गया और 15 परिवारों को दूसरी जगह शरण लेनी पड़ी। खंचाजी मोहल्ला में एक मकान की छत और पुरानी तहसील चौक व गांव गाजूवाला में दीवारें गिर गईं। सिरसा में घग्गर नदी खतरे के निशान से ऊपर सिरसा के गांव चामल के पास ढाणी सुखचैन और मल्लेवाला में घग्गर नदी के तटबंध में दरारें आ गईं। चोपटा क्षेत्र में पांच घंटे की बारिश से कई गांवों में जलभराव हो गया। घग्गर नदी का जलस्तर 18,600 क्यूसेक से बढ़कर 21,000 क्यूसेक हो गया, जो खतरे के निशान को पार कर चुका है। शक्करमंदोरी और दड़बा कलां के स्कूलों में पानी भर गया, जबकि लुदेसर का शहीद स्मारक भी जलमग्न हो गया। चरखी दादरी में 7600 एकड़ फसल प्रभावित चरखी दादरी के 15 गांवों में जलभराव से 7600 एकड़ फसलें प्रभावित हुई हैं। गांव चांग और सागवान में आबादी क्षेत्र में पानी भरने से लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। बुधवार को गांव अचीना के पास बास माइनर टूटने से छह एकड़ फसल जलमग्न हो गई। गांव कलिंगा में तीन नाबालिग लड़कियों की मौत के बाद प्रशासन ने ग्राम पंचायतों के जरिए मुनादी कराकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।फतेहाबाद में भी घग्गर का जलस्तर बढ़ा फतेहाबाद में घग्गर नदी का जलस्तर 14,700 क्यूसेक तक पहुंच गया है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्कूलों में अवकाश हिसार और सिरसा में 6 सितंबर तक स्कूल बंद रहेंगे। फतेहाबाद के रतिया, भूना, टोहाना और जाखल खंडों में भी स्कूल 6 सितंबर तक बंद रहेंगे। प्रशासन और स्थानीय टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन बारिश और जलभराव ने किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अंबाला के 144 गांव जलमग्न, करंट लगने से एक शख्स की मौत, चार घरों की छत गिरी बारिश और नदियों के उफान ने अंबाला के अधिकांश क्षेत्रों को प्रभावित किया है। बुधवार रात्रि को घग्गर, टांगरी और मारकंडा नदी में अत्यधिक पानी आने से अंबाला के 146 से अधिक गांव जलमग्न हो गए। हालात इतने खराब हुए कि कालपी ओवरब्रिज के पास टूटे तार के कारण करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई, वहीं जिले में चार घरों की छत गिर गईं। हालांकि घर की छत गिरने से लोग बाल-बाल बच गए, इनमें तीन घर बराड़ा में तो एक घर अंबाला छावनी के मोहड़ा में स्थित है, इसके साथ ही साहा में गंदे पानी की सप्लाई से साहा के बिहटा गांव निवासी 14 वर्षीय नैन्सी की मौत हो गई। बच्ची को दो दिन से उल्टी व दस्त हो रहे थे। दूसरी तरफ अंबाला के इंडस्ट्रियल एरिया में 9 फुट तक पानी भर गया, जिसमें 175 से अधिक लोग फंस गए। जिन्हें रेस्क्यू करने का अभियान एसडीआरएफ ने सुबह चार बजे से ही शुरू कर दिया था, इसमें से 150 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, इसके साथ ही अंबाला साहा राजमार्ग, अंबाला-यमुनानगर राजमार्ग पर टांगरी व मारकंडा नदी का पानी आ गया जिससे एक तरफ का ही मार्ग चला। चंडीगढ़ दिल्ली राजमार्ग को भी हिसार बाईपास से डायवर्ट किया गया। वोडाफोन का नेटवर्क ठप होने से बचाया छावनी के इंडस्ट्रियल एरिया में मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन का प्रदेशस्तरीय कार्यालय है। यहीं से प्रदेश में नेटवर्क तकनीक को संचालित किया जाता है। बुधवार रात्रि को टांगरी का पानी क्षेत्र में आने से यह कार्यालय भी डूब गया। यहां कर्मचारी भी फंस गए। उन्होंने प्रशासन से मदद मांगी तो वीरवार सुबह प्रशासन ने एसडीआरएफ को भेजकर कुछ कर्मचारियों को निकाला तो वहीं कुछ कर्मचारियों को खाने का सामान भी पहुंचाया, इसके साथ ही डीजल की सप्लाई भी की गई ताकि जेनरेटर चलते रहे। सबसे अधिक अंबाला छावनी का हुआ नुकसान इस आपदा में सबसे अधिक नुकसान अंबाला छावनी और साहा क्षेत्र को हुआ है, इसके बाद अंबाला सिटी के ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार उप-तहसील साहा के सभी गांवों में पानी भर गया है। इसके अलावा, कुछ आवासीय क्षेत्रों जैसे विकास विहार, अग्रसेन नगर, कीर्ति नगर, शंकर पार्क, गणेश विहार, और सत्संग विहार के साथ-साथ टांगरी बांध से सटे क्षेत्रों में भी जलभराव की समस्या रही। हलका धन्यौरा और ठरवा माजरी के गांवों में टांगरी नदी का पानी खेतों में घुस गया। खोजकीपुर, प्रधान, नगल, सरसाहेड़ी, सलरेहड़ी, माजरी, धन्यौरा, मोहड़ा, बब्याल, और बाड़ा गांवों के खेतों में भी पानी भर गया है, इसके अलावा, टैगोर गार्डन, पूजा विहार, प्रभु प्रेम आश्रम, ईस्ट सोनिया कॉलोनी, कमल कॉलोनी, करधान, और अर्जुन नगर जैसे इलाकों में भी जलभराव रहा। अंबाला शहर में ये क्षेत्र रहे प्रभावित शहर के कई रिहायशी इलाकों में पानी घरों में घुस गया, इनमें भानोखेड़ी, सोंतली, मलौर, सपेरा, केसरी, गोला, गगनेहरी, पपलोथा, महताबगढ़, अलापुर, लांडा, हलदरी, राजौली, हेमा माजरा, मुलाना, बुधियों, शेरपुर, और सुलखनी शामिल हैं। इन्को चौक अंडरपास, मनमोहन नगर, कपड़ा मार्केट, और टीवी अस्पताल रोड जैसे प्रमुख स्थानों पर भी जलभराव रहा। बराड़ा और मुलाना में ये क्षेत्र डूबे बराड़ा और मुलाना तहसील के खेतों में जलभराव की समस्या है। सैहला, सरदाहेड़ी, डुलियानी, गगनपुर, होली, मुलाना, घेलड़ी, हेमामाजरा, उगाला, … Read more

बालाघाट में बढ़ा बाघ का आतंक, लगातार हमलों से ग्रामीण सहमे

बालाघाट/ कटंगी  वन परिक्षेत्र कटंगी के कन्हड़गांव सर्किल अंतर्गत अंबेझरी-देवरी सड़क मार्ग पर गुरुवार की शाम साढ़े चार से पांच बजे के बीच बाघ ने एक किसान पर हमला कर दिया। उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटंगी में भर्ती किया गया। जहां से हालत नाजुक देख जिला अस्पताल रेफर किया गया था। यहां रात्रि साढ़े 11 बजे इलाज के दौरान मौत हो गई। इस परिक्षेत्र में बाघ के हमले से आठ माह के भीतर यह पांचवीं मौत है। घटना के बाद ग्रामीण आक्रोशित है। जानकारी के अनुसार, ग्राम अंबेझरी निवासी किसान सेवकराम पिता रामाजी गौपाले 61 वर्ष रोजाना की तरह खेत में बैल और मवेशी चराने के लिए गया था। जिन्हें चराने के बाद उन्हें लेकर घर लौट रहा था। तभी वह अंबेझरी-देवरी सड़क पहुंचा था कि उस पर बाघ ने पीछे से हमला कर घायल कर दिया। इस हमले को देख अन्य किसानों ने शोर मचाया तो बाघ जंगल के अंदर भाग गया। किसान किसी तरह से घर पहुंचा और स्वजनों को जानकारी दी गई। घटना में सेवकराम के गर्दन, चेहरे पर गंभीर चोटें आई थी। 21 दिन पूर्व में दूसरा हमला बाघ के हमले से 21 दिन पूर्व 14 अगस्त को ग्राम अंबेझरी निवासी विठ्ठल आसटकर अपने घर की गाय व भैंस चराने जंगल के पास गया था। उस समय बाघ ने हमला कर घायल कर दिया था। ऐसे में अब बाघ और मानव के बीच बढ़ते द्वंद को लेकर लोग भयभीत नजर आ रहे है। इस क्षेत्र के लोगों की मांग है कि खेत किनारे जंगल में फेंसिंग लगाई जाए। ताकि बाघ का प्रवेश सड़क व खेतों में आने से रूक सके। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो लगातार बाघ के लोग निवाले बनते जाएंगे और घायल होते रहेंगे। आठ माह के भीतर बाघ ने पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। मृतक के परिजनों को दिलाया जाएगा मुआवजा     ग्राम अंबेझरी निवासी सेवकराम गौपाले का खेत जंगल से सौ मीटर दूरी पर है। वह अपने बैल सहित अन्य मवेशी को चराने के बाद शाम को घर लौट रहा था कि बाघ ने उस पर हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल को कटंगी से बालाघाट रेफर कर दिया गया था। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के स्वजनों को विभाग की तरफ से आठ लाख रुपए का मुआवजा दिलवाया जाएगा। जिसकी कार्यवाही डीएफओ कार्यालय से होगी।– बाबूलाल चढार, वन परिक्षेत्र अधिकारी कटंगी।  

रेणु देवी की नजर बेतिया से छठवीं जीत पर, कांग्रेस झोंक रही पूरी ताकत

बेतिया बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का बेतिया विधानसभा क्षेत्र अपने दामन में समृद्ध इतिहास समेटे हुए है। बेतिया ने इतिहास और समय के साथ सियासत को बदलते हुए भी देखा है। बेंत के जंगलों की वजह से इसका नाम बेतिया पड़ा था। मुगल काल में बेतिया राज की जमींदारी मशहूर थी, जिसके अधीन करीब 15000 एकड़ भूमि थी। आजादी के बाद लगातार 11 चुनावों में यह कांग्रेस का गढ़ बना रहा, जिसे 1990 में भाजपा के मदन प्रसाद जायसवाल ने ध्वस्त कर भगवा झंडा लहराया। तब से सिर्फ दो चुनावों को छोड़कर भाजपा ही जीतती रही है। वर्तमान में यहां की विधायक पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी हैं। वह पांच बार यहां का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। रेणु देवी पहली बार वर्ष 2000 के चुनाव में जीती थीं। 2015 में जब जदयू और भाजपा का गठबंधन टूटा तो कांग्रेस के मदनमोहन तिवारी (कांग्रेस) ने रेणु देवी (भाजपा) को 2320 मतों के मामूली अंतर से हराया था। तब राजद एवं कांग्रेस के साथ जदयू भी महागठबंधन में था। लेकिन, 2020 के चुनाव में उन्होंने मदन मोहन तिवारी को पराजित कर फिर से यह सीट अपने नाम कर ली। रेणु देवी 16 नवंबर 2020 से 9 अगस्त 2022 तक राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री भी रहीं। बेतिया नगर निगम और मझौलिया प्रखंड को मिलाकर बनाए गए इस विधानसभा क्षेत्र की सियासत भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। अब तक हुए चुनाव में 12 बार कांग्रेस, एक बार जनता दल एवं पांच बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। 1995 में जनता दल के बीरबल यादव ने यहां से जीत दर्ज की। इस बार चुनाव में भाजपा की रेणु देवी जीत का छक्का लगाने को लेकर सक्रिय हैं। उधर, एक बार फिर कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की तैयारी में जोरदार तैयारी कर रही है। जन सुराज ने भी क्षेत्र में पूरा जोर लगाया है। प्रशांत किशोर ने पदयात्रा की शुरुआत चंपारण से की थी। वह जिले का कई बार दौरा कर चुके हैं। कई गांवों में जन सुराज का जनसंवाद भी हुआ है। एक बड़े व्यवसायी भी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। कभी मिनी चंबल कहलाता था बेतिया बेतिया (पश्चिम चंपारण) जिला कभी मिनी चंबल के नाम से खौफ का पर्याय था। मगर बीते दो दशक में पटना, यूपी एवं दिल्ली से रेल-सड़क संपर्कता बेहतर हुई है। अस्पताल में भी इलाज की सुविधा बढ़ी है। हालांकि शहर की जर्जर सड़कें और जल जमाव की समस्या हल होना बाकी है। बेतिया विधानसभा सीट एक नजर में- इस विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 299915 है। इनमें 158877 पुरुष, 141028 महिला और 10 थर्ड जेंडर वोटर हैं। बेतिया विधानसभा सीट के पूरब में सुगौली (पूर्वी चंपारण), पश्चिम में चनपटिया एवं योगापट्टी, उत्तर में सिकटा एवं चनपटिया और दक्षिण में नौतन पड़ता है। पांच साल में दिखे ये बदलाव- ⦁ पॉलिटेक्निक कॉलेज बना ⦁ गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का भवन बनकर तैयार हुआ ⦁ घरों में बिजली पहुंची, विस क्षेत्र में 35 से अधिक सड़कें बनीं ⦁ गांव में पशु चिकित्सा वैन पहुंच रही, मवेशियों के इलाज में सुविधा ⦁ बरवत में एक लाख लीटर क्षमता वाले दूध शीतक केंद्र की मिली मंजूरी वादे जो पूरे नहीं हुए 1. बरवत-जीएमसीएच फोरलेन व जगदीशपुर-भरपटिया बाइपास सड़क नहीं बनी 2. बेतिया शहर की मुख्य सड़कों का निर्माण नहीं हो सका 3. बेतिया नगर निगम क्षेत्र में नई शामिल पंचायतों में सड़क-नाली नहीं बनी 4. हर घर नल का जल का लाभ बेतिया शहरी क्षेत्र के अधिकतर लोगों को नहीं मिला इस बार के चुनावी मुद्दे ⦁ शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत ⦁ नगर निगम में नए शामिल मोहल्लों में सड़क-नाला निर्माण ⦁ स्ट्रीट लाइट एवं शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं ⦁ बेतिया में सरकारी महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना ⦁ चंद्रावत, कोहरा और अन्हरी-चन्हरी नदी का अतिक्रमण एवं उसमें गाद भरना बेतिया से विधायक और पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी का दावा है कि क्षेत्र में 35 से अधिक सड़कें बनी हैं। बरवत-जीएमसीएच सड़क चौड़ीकरण, जगदीशपुर-भरपटिया बाइपास, खीरी के पेड़-कमलनाथनगर से सुप्रिया रोड, चीनी मिल समेत तमाम सड़क एवं पुल के लिए टेंडर हो चुका है। महिला कॉलेज के भवन का शिलान्यास हो चुका है। पूर्व कांग्रेस विधायक मदन मोहन तिवारी का आरोप है कि बेतिया नगर निगम क्षेत्र में जलजमाव की समस्या खत्म नहीं हुई। चंद्रावत में शहर का पानी गिरता है, उस पर अतिक्रमकण है और बची नदी में गाद भर गई है। शहरी क्षेत्र की सभी सड़कें जर्जर हैं। महना-मझौलिया सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जमीन माफिया के आतंक से रैयत त्राहिमाम कर रहे हैं। आधा दर्जन से अधिक पुल-पुलिया नहीं बने। बेतिया विधानसभा सीट पर कब कौन जीता 1951 : प्रजापति मिश्र, कांग्रेस 1952 : केतकी देवी, कांग्रेस 1957 : जय नारायण प्रसाद, कांग्रेस 1957 : जगन्नाथ प्रसाद स्वतंत्र, कांग्रेस 1962 : जय नारायण प्रसाद, कांग्रेस 1967 : एचपी सहाय, कांग्रेस 1969 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1972 : कृष्ण मोहन पांडेय, कांग्रेस 1977 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1980 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1985 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1990 : मदन प्रसाद जायसवाल, भाजपा 1995 : बीरबल यादव, जनता दल 2000 : रेणु देवी, भाजपा 2005 (फरवरी) : रेणु देवी, भाजपा 2005 (अक्टूबर) : रेणु देवी, भाजपा 2010 : रेणु देवी, भाजपा 2015 : मदन मोहन तिवारी, कांग्रेस 2020 : रेणु देवी, भाजपा

इंदौर एजुकेशन हब: IIT की रैंकिंग में उछाल, DAVV को फायदा, IIM यथावत

इंदौर  शिक्षा मंत्रालय द्वारा NIRF (नेशनल इंस्टीट्यूशनल फ्रेम वर्क) रैंकिंग-2025 गुरुवार को जारी की गई। सूची में IIT इंदौर की रैंकिंग में चार स्थान का सुधार हुआ है। वहीं IIM इंदौर की रैंकिंग में कोई सुधार नहीं आया है, वह पिछले दो बार से 8वें नंबर पर ही बना हुआ है।  NIRF रैंकिंग-2025 रिपोर्ट में IIM इंदौर ने देशभर के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में 8वीं रैंक हासिल की है। IIM इंदौर को पिछले साल यानी 2024 और 2023 में भी यही रैंक मिली थी। जबकि 2022 में IIM इंदौर को 7वीं रैंक हासिल हुई थी। वहीं इंजीनियरिंग कैटेगरी में IIT इंदौर की रैंकिंग पिछले साल की तुलना में इस साल सुधरी है। IIT इंदौर इस साल 12वें स्थान पर पहुंच गया है। 2024 में IIT इंदौर को 16वां स्थान मिला था। 2023 में IIT इंदौर को 14वां स्थान मिला था। 2022 में भी इसे 16वां स्थान मिला था। ओवरऑल कैटेगरी में भी हुआ सुधार यही नहीं IIT इंदौर को ओवर ऑल कैटेगरी में भी फायदा हुआ है। इस साल ओवरऑल रैंकिंग में आईआईटी इंदौर को 6 पायदान का फायदा हुआ है। ओवर ऑल रैंकिंग में IIT इंदौर इस साल 27वें स्थान पर है। पिछले साल यानी 2024 में IIT इंदौर को ओवर ऑल कैटेगरी में 33वां स्थान मिला था। इसके पहले साल यानी 2023 में IIT इंदौर को ओवर ऑल कैटेगरी में 28वां स्थान मिला था। बता दें कि 2022 में IIT इंदौर की ओवरऑल रैंकिंग 30वीं थी। अंकों में नहीं हुआ सुधार इस साल IIT को रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन अंकों में गिरावट आई है। IIT को 66.65 अंक प्राप्त हुए हैं। पिछले साल IIT को 64.72 अंक प्राप्त हुए थे। वहीं पिछले साल इंदौर को ओवरऑल कैटेगरी में जहां 57.31 अंक मिले थे। इस साल 60.13अंक मिले हैं। IIM की बात करें तो इसे 75.68 अंक मिले हैं। जबकि IIM इंदौर को NIRF रैंकिंग 2024 में 73.53 अंक मिले थे। इस साल IIT और IIM दोनों के अंक में नुकसान हुआ है। अब हो रहा रैंकिंग में सुधार NIRF रैंकिंग में IIT और IIM इंदौर की रैंक पिछले साल तक लगातार गिरती जा रही थी, लेकिन अब इस साल से इसमें सुधार होना शुरू हुआ है। IIM इंदौर की 2019 में अब तक की सबसे बेहतर 5वीं रैंक आई थी, 2020 में यह गिरकर 7 नंबर पर आ गई। इसके बाद IIM इंदौर ने 2021 में फिर 6वीं रैंक हासिल की थी। पिछले तीन साल से IIM इंदौर की रैंकिंग लगातार गिरती जा रही थी। वहीं पिछले दाे साल से IIM इंदौर की पिछली रैंक ही बरकरार है। स्टेट कैटेगरी में देअविवि को फायदा इस साल देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को स्टेट कैटेगरी में टॉप-100 यूनिवर्सिटी में इस साल 49वें नंबर पर जगह मिली है। वहीं पिछले साल यानी 2024 में देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को स्टेट कैटेगरी में 50वें स्थान पर रखा गया था। वहीं यूनिवर्सिटी को इस साल 50.41 पांइट मिले हैं। जानकारों का कहना है कि 2026 की रैंकिंग में गिरावट आ सकती है। यूनिवर्सिटी में हाल ही में रैगिंग की शिकायतों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। डेंटल कॉलेज इस साल भी सूची से बाहर डेंटल कैटेगरी में शहर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज की रैंकिंग में दो साल से लगातार नुकसान हो रहा है। देश के शीर्ष डेंटल कॉलेजों की सूची में इंदौर शासकीय डेंटल कालेज 2023 में 32वें स्थान पर था। वहीं 2024 में वह टॉप 40 की सूची से बाहर हो गया था। इस साल भी वह टॉप 40 की सूची से बाहर है। वहीं इंदौर आईआईटी को रिसर्च रैंकिंग में भी इस साल 24वां स्थान मिला है।

बाढ़ में डूबा ऐतिहासिक घाट, जहां कंस वध के बाद भगवान कृष्ण ने किया था विश्राम

मथुरा  मथुरा में यमुना नदी में आई बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है. विश्राम घाट भी इस बाढ़ की चपेट में है. यमुना के पानी ने पूरे घाट को अपनी आगोश में ले लिया. घाट के गुम्बद और पिलर पानी में डूब गए हैं. ये वही घाट है जहां भगवान कृष्ण ने कंस का वध करने के बाद विश्राम किया था. तब इसे विश्राम घाट के नाम से जाना जाता है. लोगों ने बताया कि बाढ़ के कारण हालत खराब है. हालांकि, श्रद्धालु अभी भी पूजा करने के लिए इस घाट पर आ रहे हैं.  विश्राम घाट की स्थिति स्थानीय लोगों के अनुसार, यमुना का जलस्तर बढ़ने से मथुरा के हालात बिगड़ गए हैं. ऐतिहासिक विश्राम घाट पानी में समा गया है. घाट पर बने मंदिर और उनके पिलर भी पानी में डूबे हुए हैं. पानी घाट के गुम्बद के करीब पहुंच गया है. घाट के बीच से बहता पानी लोगों को बाढ़ की भयावहता दिखा रहा है.  आस्था और हिम्मत का संगम बाढ़ की इस स्थिति के बावजूद, लोगों की आस्था और हिम्मत बरकरार है. श्रद्धालु घुटनों तक पानी में खड़े होकर भी पूजा-पाठ कर रहे हैं. इस दृश्य से पता चलता है कि बाढ़ भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं पाई है. घाट पर मौजूद लोग इस गंभीर स्थिति में भी अपनी धार्मिक परंपराओं को निभा रहे हैं. बाढ़ से ब्रज बेहाल आपको बता दें कि ब्रज में कालिंदी रौद्र रूप दिखा रही हैं. ताजेवाला और ओखला से पाने छोड़े जाने के बाद मथुरा में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. नदी खतरे से 50 सेमी ऊपर बह रही है. दर्जनों गांव टापू बन गए हैं. प्रशासन लगातार राहत बचाव कार्य में लगा हुआ है. यमुना में डूबे हुए घर और मंदिर दूर से ही नजर आ रहे हैं.  गौरतलब है कि लगातार बढ़ रहे जलस्तर से कई कॉलोनियों और सैकड़ों घरों में यमुना के पानी प्रवेश कर जाने से स्थिति भयावह होती जा रही है. जयसिंहपुरा इलाके में एक नहीं सैकड़ों घरों में यमुना का पानी प्रवेश कर गया है और पूरा इलाका जलमग्न हो गया है. जिसके कारण लोग पलायन को मजबूर हैं. कई घरों में ताले पड़े हुए हैं. जिला प्रशासन बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए पूरी तरह सजग और सतर्क है. बाढ़ ग्रस्त इलाकों से लोगों को रेस्क्यू कर स्टीमर और नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है. मथुरा में यमुना के बढ़ते जलस्तर ने वृंदावन से लेकर गोकुल तक कोहराम मचा दिया है. प्रशासन 5 बाढ़ राहत केंद्रों की स्थापना करके लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है. 

मंत्रालय में कार्यभार ग्रहण करते ही सक्रिय हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल

रायपुर पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित कार्यालय मे विधिवत पूजा अर्चना कर कामकाज की शुरूआत की। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, विधायक अनुज शर्मा, संपत अग्रवाल, प्रबोध मिंज, श्रीमती उद्धेश्वरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा एवं पवन साय और वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय में कामकाज संभाला संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव के मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में काफी तेजी से कार्य करना है। राज्य में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में काफी संभावनाऐं है। पर्यटन क्षेत्रों के विकसित होंने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेगें। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की मदद से राज्य में सड़क कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है, इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य में नई सड़कों की स्वीकृति के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय भू-तल परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी के प्रति आभार जताया।   पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय में कामकाज संभाला     इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग सुब्रत साहू, संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के जनरल मैनेजर वेदव्रत सिरमौर, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव श्रीमती पुष्पा साहू सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

रायपुर : विद्यार्थी करेंगे, विश्वविद्यालय का नाम रोशन- उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा

रायपुर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करें, ताकि वे देश और दुनिया में अपनी पहचान बना सकें और विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित कर सकें।         मंत्री वर्मा आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।         बैठक में मंत्री वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में विद्यार्थियों का ड्रॉपआउट नहीं होना चाहिए, इसके लिए विश्वविद्यालयों को कड़ी निगरानी रखनी होगी और विद्यार्थियों को हर संभव सहायता उपलब्ध करानी होगी। उन्होंने कुलपतियों से कहा कि परीक्षा का टाइम-टेबल पहले से तय करें ताकि परीक्षाएं समय पर आयोजित हो सकें।        बैठक में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों पर चर्चा की गई। वर्मा ने विश्वविद्यालयों से अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं के कोर्स और नई शैक्षणिक योजनाओं को आगे बढ़ाने का भी आह्वान किया। विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं नॉन-शैक्षणिक पदों की स्थिति, स्वीकृत पद, कार्यरत प्राध्यापकों की संख्या तथा पाठ्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की गई।      बैठक में उच्च शिक्षा सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने अवगत कराया कि सभी पाठ्यक्रम यूजीसी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप निर्धारित होंगे। कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों एवं संबद्ध कॉलेजों की स्थिति का प्रस्तुतीकरण भी दिया। इस अवसर पर प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति और उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में हुए गड़बड़ी की होगी पुलिस से जांच- शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

रायपुर : शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने मंत्रालय में ली समग्र शिक्षा विभाग की अधिकारियों की समीक्षा बैठक व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में हुए गड़बड़ी की होगी पुलिस से जांच- शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव  भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव शिक्षा की गुणवत्ता सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता: शिक्षा मंत्री यादव रायपुर   स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में राज्य में संचालित शैक्षणिक योजनाओं, कार्यक्रमों और गतिविधियों की समीक्षा की गई। मंत्री यादव ने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी अधिकारियों को गंभीरता और जिम्मेदारी से कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों में वृद्धि तथा आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।मंत्री यादव ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना प्रदेश सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसमें ढिलाई, भ्रष्टाचार और गैर-जिम्मेदारी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे। व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी पर नाराजगी व्यक्त की व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में सबसे अधिक शिकायतें आने पर मंत्री ने नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में किसी भी प्रकार का लेन-देन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर कठोर कार्यवाही होगी। गड़बड़ी की पुलिस से जांच कराने के निर्देश दिए।  भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त रुख मंत्री यादव ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। विद्यार्थियों को वितरित की जाने वाली सामग्रियों की गुणवत्ता सर्वाेच्च स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि घटिया या निकृष्ट सामग्री देने वाले आपूर्तिकर्ताओं को काली सूची में डाला जाए। उन्होंने वित्तीय अनुशासन पर बल देते हुए कहा कि बजट का समुचित एवं समय पर उपयोग किया जाए और उपयोगिता प्रमाण पत्र भारत सरकार को समय पर भेजा जाए, ताकि अनुदान की आगामी किश्त समय पर राज्य को प्राप्त हो सके। बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी एवं समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक संजय झा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजनाओं व गतिविधियों की जानकारी दी। मंत्री यादव ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नवाचार और तकनीकी उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कक्षाएँ, डिजिटल अधिगम, विज्ञान प्रयोगशालाएँ और पुस्तकालय जैसी सुविधाओं का अधिकतम उपयोग किया जाए ताकि विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा पद्धति से लाभान्वित हो सकें। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन पाठ्यक्रम, डिजिटल अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक अनुप्रयोगों के उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि करने के निर्देश दिए। बैठक में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ व्यावसायिक कौशलों के विकास, उन्हें रोजगार उन्मुख बनाने, समावेशी शिक्षा, बलवाड़ी, खेल एवं शारीरिक शिक्षा, वार्षिक शाला अनुदान, निपुण भारत मिशन, शाला त्यागी बच्चों की पुनर्वापसी, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान, प्रधानमंत्री विद्यालय, विद्या समीक्षा केंद्र, मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान और रजत जयंती समारोह से जुड़ी गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री यादव ने छात्रावासों, कन्या छात्रावासों और पोटा केबिनों में सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। हाल ही में पाकेला (छिंदगढ़ विकासखण्ड) के पोटा केबिन में भोजन में ज़हरीला पदार्थ मिलाने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ शासन की छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाती हैं। अतः जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता– मुख्यमंत्री साय

रायपुर : लुत्ती बांध के टूटने पर जताई गहरी नाराज़गी, इस तरह की गलती नहीं की जाएगी बर्दाश्त – मुख्यमंत्री साय सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता– मुख्यमंत्री साय मैदानी अधिकारी–कर्मचारी फील्ड में जाकर बांधों एवं संबंधित संरचनाओं का करें सतत निरीक्षण– मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में स्थित लुत्ती बांध के टूटने की घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साय ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि मैदानी अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतत रूप से फील्ड में जाकर बांधों सहित अन्य संरचनाओं का निरंतर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने, सभी बांधों की जलभराव क्षमता, वर्तमान सिंचाई स्थिति और आगामी परियोजनाओं की प्रगति आदि के सम्बन्ध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा–निर्देश दिए। साथ ही विशेष रूप से बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 का कड़ाई से पालन करने तथा जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्यमंत्री साय ने लक्षित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता के बीच अंतर को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग की अधूरी योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में 04 वृहद परियोजनाएँ, 357 लघु परियोजनाएँ और 300 एनीकेट, इस प्रकार कुल 661 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 1036 जीर्णोद्धार कार्य भी चल रहे हैं। इस तरह कुल 1697 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनमें लगभग ₹8966 करोड़ की राशि व्यय होगी। इस बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उईके तथा बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग मंडलों के मुख्य अभियंता सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

रायपुर को बड़ी सौगात: अब बिना जोखिम के होगी नदी पार, CM विष्णुदेव साय का ऐलान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले– अब जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की जरूरत नहीं मुख्यमंत्री ने चार उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण को दी मंजूरी रायपुर जशपुर जिले में आवागमन को सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा लगातार पहल की जा रही है। जिले में सड़क, पुल-पुलियों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में चार वृहद पुलों निर्माण के लिए कुल 13 करोड़ 46 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। जिले के गुलझरिया-बम्हनी मार्ग पर श्री नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुँच मार्ग के निर्माण की काफी अरसे से मांग की जा रही थी। बरसात के दिनों में ग्रामीणों को नदी पार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीनदी पर पुल निर्माण के लिए 3 करोड़ 66 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस पुल के निर्माण से गुलझरिया और बम्हनी के बीच बसे लगभग दर्जनभर गांवों के निवासियों का विकासखंड मुख्यालय दुलदुला तक पहुँचना सरल हो जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी हेतु एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में अन्य तीन पुल निर्माण की भी स्वीकृति दी है। इनमें किलकिला से केराकछार मार्ग पर बेनसारी नाला में पुल निर्माण के लिए 1.71 करोड़ रुपये, कांसाबेल से शब्दमुंडा मार्ग पर मैनी नदी में पुराने जर्जर पुल की जगह नए पुल के निर्माण के लिए 3.49 करोड़ रुपये जिला मुख्यालय जशपुर में बांकी नदी पर जर्जर पुल के स्थान पर उच्च स्तरीय नए पुल के निर्माण 4 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति शामिल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि किसी भी जिले के विकास का आधार बुनियादी ढांचा होता है। जशपुर जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। सड़क और पुल-पुलिया निर्माण के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है।