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171 साल पुरानी सेवा का अंत! स्पीड पोस्ट में मर्ज होगी रजिस्टर्ड डाक, टैक्स भी देना होगा

भोपाल  आपका जन्म यदि सन 70, 80 या 90 के दशक में हुआ है तो आपने डाकघरों में रजिस्ट्री चिट्ठी ( Registered Post ) या रजिस्टर्ड पार्सल (Registered Parcel) का रुतबा देखा होगा। रजिस्ट्री वाली चिट्ठी भेजने के लिए अलग से काउंटर होता था। डाकघर वाले उसके लिए आपको एक रसीद काट कर देते थे। उस चिट्ठी के डिलीवर होने पर आपको पावती या एकनॉलेजमेंट (Acknowledgement) भी मिलता था। कुल मिला कर यह डाकघर की प्रीमियम सर्विस थी। इस सर्विस को डाक विभाग ने बंद करने का फैसला किया है। कब से बंद होगी सेवा भारतीय डाक विभाग के एक परिपत्र के मुताबकि 1 सितंबर, 2025 से रजिस्टर्ड पोस्ट (Registered Post) सेवा बंद हो जाएगी। डाक विभाग स्पीड पोस्ट (Speed Post) के साथ रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा को इंटीग्रेट करने क राह पर है। सरकार का दावा है कि ऐसा करने से काम करने का तरीका और भी आधुनिक हो जाएगा। दशकों से बड़ी इज्जत थी रजिस्ट्री चिट्ठी की रजिस्ट्री चिट्ठी या रजिस्टर्ड पोस्ट की अभी तक बड़ी इज्जत रही है। कोई महत्वपूर्ण कागजात भेजना हो, बाहर पढ़ने वाले बच्चों को बैंक ड्राफ्ट बना कर भेजना हो या रक्षा बंधन पर राखी, सबके लिए रजिस्टर्ड पोस्ट का इस्तेमाल होता है। आजादी के बाद से ही रजिस्टर्ड पोस्ट बेहद भरोसेमंद माना जाता था। सरकार भी अपाइन्टमेंट लेटर भेजने में इसका इस्तेमाल करती रही है। साथ ही अदालत भी कानूनी नोटिस इसके जरिए भेजा करती थी। एक सितंबर से बदल जाएगा सिस्टम डाक विभाग के सचिव और डायरेक्टर जनरल ने सभी विभागों, अदालतों, संस्थानों और लोगों को 1 सितंबर तक नई व्यवस्था में बदलने के लिए कहा है। 31 अगस्त तक दोनों सेवाएं पहले की तरह चलती रहेंगी। लेकिन 1 सितंबर से लोगों को अपनी चीजें स्पीड पोस्ट से भेजनी होंगी। इस तरह रजिस्टर्ड पोस्ट का एक युग खत्म हो जाएगा। क्यों हुआ है यह बदलाव बताया जा रहा है कि यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है क्योंकि रजिस्टर्ड पोस्ट का इस्तेमाल बहुत कम हो गया है। लोग अब ऑनलाइन चीजें इस्तेमाल करने लगे हैं। व्हाट्सऐप और ईमेल के चलते अब पत्र लिखना या भेजना भी कम हो गया है। इसके अलावा प्राइवेट कूरियर (Private Courier) और ई-कॉमर्स (E-commerce) लॉजिस्टिक्स से भी रजिस्टर्ड पोस्ट का मुकाबला बढ़ गया है। सरकार चाहती है स्पीड पोस्ट चलता रहे डाक विभाग की ही एक और सेवा स्पीड पोस्ट है। इसे 1986 में शुरू किया गया था। रजिस्ट्री चिट्ठी की तरह ही इसमें भी बुकिंग के वक्त रसीद दी जाती है। इसे आप ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं। हालांकि, स्पीड पोस्ट की सेवा रजिस्टर्ड पोस्ट से महंगी है। अब डाक विभाग का रेट देखिए। रजिस्टर्ड पोस्ट की शुरुआत 25.96 रुपये से होती थी। इसके बाद हर 20 ग्राम के लिए 5 रुपये ज्यादा लगते थे। वहीं स्पीड पोस्ट 50 ग्राम तक के पार्सल के लिए 41 रुपये से शुरू होता है। यह लगभग 20-25% महंगा है। रजिस्टर्ड पोस्ट में लगातार आ रही थी गिरावट आधिकारिक डाक डेटा 2011-12 के अनुसार हर साल रजिस्टर्ड पोस्ट की संख्या में गिरावट आ रही है. साल 2011-12 में रजिस्टर्ड डाक से भेजने वाले आर्टिकल 24 करोड़ से घटकर 2019-20 में 18 करोड़ के रह गए. 25 फीसदी की कमी साफ देखी जा सकती है. कोरोना के बाद से तो स्थिति और खराब हो गई है. कितना आएगा खर्चा     50 ग्राम के पार्सल के लिए 200 किमी से ऊपर 35 रुपये,     200 ग्राम के पार्सल के लिए 200 से 1000 किमी के लिए 40 रुपये, 1000 से 2000 हजार किमी के लिए 60 रुपये और 2000 किमी से ऊपर के लिए 70 रुपये चार्ज लगेगा.     201-500 ग्राम के लिए 200 किमी तक 50 रुपये, 1000 किमी तक 60 रुपये, 2000 किमी तक 80 रुपये और 2000 किमी से ऊपर के लिए 90 रुपये का चार्ज लगेगा     हर 500 ग्राम बढ़ाने पर 200 किमी तक 15 रुपये, 1000 किमी तक 30 रुपये, 2000 किमी तक 40 रुपये और 2000 किमी से ऊपर के लिए 50 रुपये डाक विभाग लेगा. एक युग का अंत रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा का बंद होना एक युग का अंत होना है। रजिस्टर्ड पोस् काफी लोगों के लिए भरोसे का प्रतीक रहा है, खासकर गांवों में रहने वाले लोगों के लिए। बैंक, विश्विद्यालय और सरकारी विभाग कानूनी रूप से मान्य कागजात भेजने के लिए रजिस्टर्ड पोस्ट का इस्तेमाल करते थे। ब्रिटिश शासनकाल में 1854 में शुरू हुई रजिस्टर्ड डाक (Registered Postal Service) स्पीड पोस्ट (Speed Post) में मर्ज की जा रही है। यह एक सितंबर से लागू होगी। इसके बाद जरूरी कागजात या सामान भेजने के लिए स्पीड पोस्ट विकल्प बचेगा। हालांकि विभाग ने कहा है कि नाम में बदलाव होगा, लेकिन पुरानी सेवा भी ली जा सकती है। शुल्क कम-ज्यादा हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि रजिस्टर्ड डाक का कम से कम शुल्क 26 रुपए है। स्पीड पोस्ट का कम से कम शुल्क 41 है। सरकार टैक्स भी वसूलेगी। रजिस्टर्ड डाक प्राप्तकर्ता के सत्यापन के साथ सुरक्षित डिलीवरी। स्पीड पोस्ट की तुलना में धीमी। तुलनात्मक रूप से कम शुल्क। ट्रैकिंग उपलब्ध। स्पीड पोस्ट तेज और समयबद्ध डिलीवरी। दिए गए पते पर कोई भी व्यक्ति ले सकता है। शुल्क थोड़ा ज्यादा। ट्रैकिंग रियल टाइम के साथ। यहां ज्यादा उपयोग रजिस्टर्ड डाक का कोर्ट, सेना की यूनिटें, रेलवे जोन, पुलिस विभाग, बिजली कंपनियों के मुख्यालय, संभागायुक्त कार्यालय, नगर निगम सहित अन्य जगह। ऐसे समझें फर्क रजिस्टर्ड डाक: प्राप्तकर्ता के सत्यापन के साथ सुरक्षित डिलीवरी। स्पीड पोस्ट की तुलना में धीमी। तुलनात्मक रूप से कम शुल्क। ट्रैकिंग की सुविधा। स्पीड पोस्ट: तेज और समयबद्ध डिलीवरी। दिए गए पते पर कोई भी व्यक्ति कर सकता है। शुल्क थोड़ा ज्यादा। ट्रैकिंग रियल टाइम के साथ। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था होगी तेज रजिस्टर्ड डाक सेवा स्पीड पोस्ट में मर्ज की जा रही है। इससे ट्रांसपोर्ट व्यवस्था तेज होगी। विनीत माथुर, मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल मध्यप्रदेश परिमंडल, भोपाल

पॉक्सो अधिनियम पर बोलीं मंत्री भूरिया – इससे बच्चों को मिलता है कानूनी सुरक्षा घेरा

भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया ने कहा है कि लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 "पॉक्सो एक्ट" बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। इस कानून की जानकारी जन-जन तक पहुँचना अत्यंत आवश्यक है, जिससे बच्चे शोषण का शिकार न हों। मंत्री सुभूरिया गुरूवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेशन सेंटर में मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि बाल आयोग के अध्यक्ष द्रविन्द्र मोरे के नेतृत्व में बाल संरक्षण के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य हो रहे हैं। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के विरुद्ध किसी भी प्रकार का यौन अपराध गंभीर और संज्ञेय है, इसके लिए पॉक्सो एक्ट में कठोर सजा का प्रावधान है। मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर दोषियों को मृत्युदंड तक दिलवाया है, जो राज्य की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आमजन को इस कानून के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। जब तक समाज सजग नहीं होगा, तब तक बच्चों की सुरक्षा अधूरी रहेगी। हमें परिवार, मोहल्ला, विद्यालय सभी स्तरों पर निगरानी रखनी होगी। बच्चों की देखरेख और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था मंत्री सुभूरिया ने बताया कि सरकार ने 137 बाल देखरेख संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को आश्रय और पुनर्वास की सुविधा दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 435 अनाथ बच्चों को आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति और भविष्य निधि का लाभ दिया गया है। वर्तमान में मिशन वात्सल्य के अंतर्गत 13 हजार 146 बच्चों को प्रायोजन और फोस्टर केयर के अंतर्गत सहायता दी जा रही है। सुभूरिया ने यह भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2021 में “मध्यप्रदेश बाल संरक्षण नीति 2020” को अधिसूचित किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में हर 15 दिन में एक बार पॉक्सो अधिनियम पर जागरूकता सत्र अनिवार्य किया जाए, जिससे बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी मिल सके। उन्होंने CWC सदस्यों से आग्रह किया कि वे बच्चों से मानवीय और संवेदनशीलता से मिलें, जिससे बच्चे विश्वास के साथ अपनी बात रख सकें और सही कदम समय पर उठाए जा सकें। उन्होंने बाल आयोग के अध्यक्ष मोरे और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि आयोग के सदस्य लगातार दौरे कर रहे हैं और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। मंत्री सुभूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे बच्चों के हित का विशेष ध्यान रखते हैं, यह उनकी संवेदनशीलता और प्रदेश के भविष्य के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। बच्चों का संरक्षण देश की सामूहिक जिम्मेदारी : श्रीमती धर्मिष्ठाबेन गुजरात बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती धर्मिष्ठाबेन वी. गज्जर ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों के संरक्षण को देश की सामूहिक ज़िम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में बाल अधिकार आयोग अपनी-अपनी संरचनाओं और कार्यपद्धतियों के माध्यम से बच्चों के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। संकट की घड़ी में अनेक विभाग—चाहे वह बाल कल्याण समिति हो, पुलिस इकाई हो या महिला एवं बाल विकास विभाग हो, सभी आपसी समन्वय से बच्चों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बच्चों से जुड़ी सभी संस्थाओं और तंत्रों को एक-दूसरे के कार्यों में समन्वय स्थापित करना चाहिए और इस भावना से जुड़ते हुए संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए, जिससे हर बच्चे को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्रविन्द्र मोरे ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम से संबंधित मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए। प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध एवं न्यायोचित निराकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिये यह अनिवार्य है कि शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास के क्षेत्रों में अपने वाली चुनौतियों का सजग रहकर समाधान किया जाये। मोरे ने कहा कि समाज के वंचित एवं संवेदनशील वर्गों से आने वाले वलनरेवल बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस दिशा में प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा एक गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि प्रवासी परिवारों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा हिन्दी माध्यम की प्रारंभिक कक्षाओं की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं, जो अत्यंत प्रशंसनीय है। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, जनजातीय कार्य, विशेष किशोर पुलिस इकाई, सीडब्ल्यूसी (CWC) और जेजेबी (JJB) के सदस्यों को पॉक्सो एक्ट के कानूनी और व्यावहारिक प्रावधानों का प्रशिक्षण भी दिया गया।  

दूध के दामों ने बिगाड़ा राखी का स्वाद, जबलपुर में जनता ने जताया विरोध

जबलपुर  जबलपुर जिले में एक बार फिर दूध के दाम बढ़ा दिए गए हैं। यह बढ़ोतरी बिना किसी पूर्व सूचना के की गई है। डेयरी संचालकों ने 70 रुपये प्रति लीटर दूध के दाम को सीधे 73 रुपये कर दिया है। इस अचानक हुई बढ़ोतरी से आम लोग हैरान हैं। खास बात यह है कि यह निर्णय बिना प्रशासनिक मंजूरी या किसी संवाद के हुआ है। स्थानीय नागरिक उपभोक्ता मंच और मानव अधिकार संगठनों ने इस निर्णय का विरोध किया है। घंटाघर क्षेत्र में लोगों ने प्रदर्शन कर प्रशासन से मांग की कि इस मूल्य वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए। लोगों का कहना है कि त्योहारों के समय जानबूझकर दाम बढ़ाकर जनता पर बोझ डाला जा रहा है। प्रदर्शन में नागरिक मंच के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए। मंच के सदस्यों का कहना है कि डेयरियों द्वारा मिलावटी दूध बेचा जा रहा है, फिर भी वे दाम लगातार बढ़ा रहे हैं। यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। समाजसेवी डॉ. पीजी नाजपांडे ने बताया कि परियट क्षेत्र में डेयरी संचालकों की बैठक में सामूहिक रूप से रेट तय किया गया, जो मोनोपोलीज एंड रेस्ट्रिक्टेड प्रैक्टिसेज एक्ट (MRTP) के खिलाफ है। उन्होंने कलेक्टर से अपील की कि जिला दण्डाधिकारी के नाते इस तरह के निर्णय को खारिज किया जाए। मानव अधिकार संगठन के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार वाधवानी समेत कई लोगों ने जिला प्रशासन और स्थानीय विधायकों से अपील की है कि वे जनता की आवाज उठाएं और दूध के दाम कम कराएं। संगठन ने इस विषय में ज्ञापन सौंपकर केबिनेट मंत्री राकेश सिंह से भी हस्तक्षेप की मांग की है।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर लाइसेंस तक, सब काम होंगे अब फटाफट

भोपाल   सरकारी योजनाओं की गारंटी के साथ लाभ दिलाने वाले केंद्र अब घरों के पास ही होंगे। जिससे लोगों को सरकारी काम कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। जानकारी के लिए बता दें कि जिला प्रशासन जिले में केंद्रों की संख्या दस गुना तक बढ़ाने जा रहा है। इसके लिए जगह चिन्हित करने की प्रक्रिया हो रही है। करीब 40 केंद्र बनाने की कोशिश है। एक माह में इसके लिए जिले में सिस्टम तय होगा। जिले में अभी सरकारी स्तर पर चार केंद्र तय किए हैं। इनका संचालन आउटसोर्स पर दिया हुआ है। घर के पास करा सकेंगे सारे काम बता दें कि अगर आप जाति, जन्म, विवाह और निवास प्रमाण पत्र जारी करना, पेयजल कनेक्शन, राशन कार्ड, भूमि अभिलेखों की प्रतियां आदि से जुड़े काम कराना चाहते है तो घर के पास बने केंद्रों में करा सकते हैं। यदि कोई अधिकारी समय पर इन सेवाओं को प्रदान करने में विफल रहता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। आप अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र पर जाकर इन सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, आप मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी पोर्टलपर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। मिलेंगी ये सेवाएं -जन्म, मृत्यु, विवाह और निवास प्रमाण पत्र। -नामांतरण, सीमांकन और भू-राजस्व। -पेंशन और पारिवारिक पेंशन। -बिजली और पानी कनेक्शन। -ड्राइविंग लाइसेंस व वाहनों के पंजीकरण। -राशन कार्ड जारी करना।

धर्मांतरण से अंग तस्करी तक! आगरा गैंग की दहला देने वाली साजिश उजागर

आगरा   अवैध धर्मांतरण गिरोह का एक और चेहरा सामने आया है। मास्टरमाइंड सहित अन्य आरोपियों के तार मानव तस्करी और अंग बेचने वाले रैकेट से जुड़े होने की जानकारी पुलिस को मिली है। इस पर टीम ने गहनता से पड़ताल शुरू कर दी है। आशंका है कि खरीद-फरोख्त का यह खेल विदेशों तक फैला था। मजदूर और कमजोर वर्ग को झांसे में लेते थे। मार्च में सदर क्षेत्र से लापता हुईं कारोबारी की दो बेटियां 18 जुलाई को कोलकाता के तपसिया इलाके में पुलिस को मिली थीं। 19 जुलाई को 6 राज्यों से 10 आरोपी भी पकड़े गए थे। बाद में दिल्ली का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान पकड़ा गया। उसके दो बेटे और एक अन्य बाद में पकड़े गए। अब्दुल रहमान सहित 11 आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ हुई।  पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि पहले यह गिरोह धर्मांतरण कराने तक ही सीमित होने का लग रहा था। मगर, जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे नई जानकारी सामने आने लगी। मास्टरमाइंड सहित अन्य से पूछताछ में गिरोह के तार मानव तस्करी करने वाले और मानव अंगों को बेचने वाले रैकेट से भी होने की बात सामने आई है। कमजोर और मजदूर वर्ग के लोगों को जाल में फंसाया जाता था। खासताैर पर लड़कियों को धर्म परिवर्तन के बाद विदेश जाने के लिए तैयार करते थे। हां बोलने पर तस्करी का खेल होता था। जानकारी यह भी है कि मानव अंगों को भी बेचा जाता था। हालांकि पुलिस के पास कोई पीड़ित नहीं आया है। इसके बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है। गिरोह के सदस्यों से मिली जानकारी के आधार पर इस रैकेट में शामिल लोगों की भी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। सीबीआई की मदद लेगी पुलिस पुलिस आयुक्त ने बताया कि पूरे सिंडीकेट के पीछे मध्य प्रदेश का सैयद दाऊद भी है। वह कनाडा से गिरोह की कमान संभाल रहा था। उसके गैर जमानती वारंट जारी कराए गए थे। अब उसकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई की मदद ली जाएगी। इसके लिए पत्र लिखा जा रहा है। सीबीआई की मदद से ही देश से बाहर माैजूद अपराधियों की गिरफ्तारी की जाती है। सैकड़ों का कराया धर्मांतरण पुलिस आयुक्त ने बताया कि जानकारी यह भी लगी है कि अब्दुल रहमान सहित गिरोह ने 100-200 युवक-युवतियां नहीं, बल्कि 1000 से अधिक का धर्म परिवर्तन कराया है। जिन लोगों ने अपनी स्वेच्छा से धर्म बदला वो सामने नहीं आ रहे हैं। जिन लोगों के माता-पिता और खुद पीड़ित हैं, वो सामने आ रहे हैं। उनको पुलिस गवाह बनाएगी जिससे आरोपियों को सजा दिलाई जा सके। अब्दुल रहमान की काॅल डिटेल में 6 पाकिस्तानी नंबर मिले थे। यह किसके हैं, इसके लिए खुफिया एजेंसियों की मदद ली जा रही थी। जिन लोगों से बात होती थी, वह गिरोह को किस तरह से मदद पहुंचा रहा था, यह सब पता किया जा रहा है। जमानत प्रार्थनापत्र पर हुई सुनवाई पुलिस ने रहमान कुरैशी, अब्बू तालिब, आयशा उर्फ एसबी कृष्णा, अली हसन उर्फ शेखर, ओसामा, अबुर रहमान, मोहम्मद रहमान, मोहम्मद अली, जुनैद कुरैशी, मुस्तफा, मोहम्मद इब्राहिम, अब्दुल रहमान, उसके दो बेटे और साथी को गिरफ्तार किया था। आयशा उर्फ एसबी कृष्णा, रहमान कुरैशी, अब्दुल रहमान, जुनैद कुरैशी, ओसामा, रित बनिक, अब्बू तालिब, अली हसन, मोहम्मद अली उर्फ पियूष पंवार, मनोज उर्फ मुस्तफा की जमानत के लिए सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया गया था। इस पर बुधवार को सुनवाई हुई। अभियोजन अधिकारी ने प्रार्थना पत्र के सत्यापन की मांग की। 

पीएम आगमन से पहले धार में तैयारियों का जायजा, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने किया निरीक्षण

धार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी 25 अगस्त को धार जिले के संभावित दौरे को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। इसी क्रम में बुधवार को कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बदनावर तहसील के भैसोला गाँव में निर्माणाधीन पीएम मित्रा पार्क और अन्य तैयारियों का निरीक्षण किया। उनके साथ एमपीआईडीसी के कार्यपालन निदेशक हिमांशु प्रजापति, एसडीएम दीपक चौहान और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। हेलिपैड, सभा स्थल और यातायात प्रबंधन का लिया जायजा कलेक्टर ने प्रस्तावित हेलिपैड, जनसभा स्थल, पार्किंग क्षेत्र और पहुँच मार्गों की व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण की जाएं और सुरक्षा मानकों, ट्रैफिक नियंत्रण एवं आमजन की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। विस्थापितों के लिए बन रहे पुनर्वास स्थल का निरीक्षण पीएम मित्रा पार्क परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के पुनर्वास हेतु बन रहे मकानों का भी कलेक्टर ने निरीक्षण किया। एमपीआईडीसी के ईडी हिमांशु प्रजापति ने बताया कि भैसोला में कुल 89 मकानों का निर्माण प्रस्तावित है। कलेक्टर मिश्रा ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को "टॉप क्लास" बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि विस्थापित परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने सड़क, बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, पुनर्वास स्थल पर सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के लिए सोसाइटी मॉडल अपनाने का सुझाव भी दिया। वोटर आईडी और दस्तावेजी प्रक्रिया की समीक्षा निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पुनर्वास स्थल को विधिवत आबादी क्षेत्र घोषित किए जाने की प्रक्रिया और यहां बसाए जा रहे लोगों के वोटर आईडी से संबंधित दस्तावेजी कार्यों की जानकारी भी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजी कार्य समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए ताकि विस्थापितों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा पीएम मित्रा पार्क जैसे मेगा प्रोजेक्ट और धार जिले के औद्योगिक भविष्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनिरुद्धाचार्य पर कानूनी शिकंजा: महिला वकीलों की याचिका में क्या है मांग?

मथुरा अनिरुद्धाचार्य महराज के बयान को लेकर उनका विरोध लगातार जारी है. अब ये मामला कोर्ट पहुंच गया है. महिला अधिवक्ताओं ने इस मामले में एसीजेएम प्रथम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इससे पहले भी महिला वकीलों ने एसएसपी मथुरा को भी एक शिकायती पत्र दिया था. जिस पर एसएसपी ने अनिरुद्धाचार्य पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया था. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ता कोर्ट की शरण में पहुंच हैं. अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ दायर इस याचिका में बीएनएस की सुसंगत धाराओं में अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अदालत से प्रार्थना की है. बता दें कि बीते 26 जुलाई को अनिरुद्धाचार्य महाराज के बयान से नाराज महिला वकीलों ने कचहरी परिसर में उनका पुतला दहन किया था. बार एसोसिएशन ने महाराज के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया था. फिलहाल उनके बयान को लेकर कानूनी और सामाजिक मोर्चे पर विरोध तेज हो गया है. इसे भी पढ़ें : ‘राखी जिहाद’ या सिर्फ ‘सियासी स्टंट’! चांद-सितारे वाली राखी को लेकर साध्वी प्राची का विवादित बयान, जानिए इस्लाम से जोड़ते हुए क्या कहा? बता दें कि अनिरुद्धाचार्य महाराज ने 25 वर्षीय युवतियों पर कुछ ऐसी टिप्पणियां की थी. जिसने विवाद को जन्म दे दिया. उन्होंने कहा था कि 25 साल की उम्र तक लड़कियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती हैं, जिसके कारण देर से शादी करने पर प्री-मैरिटल रिलेशनशिप की संभावना बढ़ जाती है. इस बयान के चलते उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

विजय शर्मा का तीखा जवाब: छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की उपेक्षा का सवाल ही नहीं उठता

रायपुर PCC चीफ बैज के बयान पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, जिस राज्य के मुख्यमंत्री आदिवासी हैं उस राज्य में आदिवासियों की उपेक्षा का आरोप लगाना गलत है. हमारे मुख्यमंत्री आदिवासी हैं. उनके मार्गदर्शन में हम काम कर रहे हैं. इनके पास बोलने के लिए कुछ विषय नहीं है इसलिए कुछ भी बोलते रहते हैं. कांग्रेस ने एक को आदिवासी कहकर मुख्यमंत्री बनाए थे. आज तक कोई उनको आदिवासी नहीं मान पाए. बता दें कि दीपक बैज ने कहा है कि प्रदेश में आदिवासियों की उपेक्षा हो रही है. आदिवासी त्योहार नहीं मनाया जा रहा है. हाफ बिजली योजना में संशोधन को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, इसकी अभी मुझे पूरी जानकारी नहीं है. मध्यमार्गी परिवार के लिए इसके एवज में योजना लाई गई है. प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना विकल्प में रखा गया है. एक लाख से ज्यादा सब्सिडी दी जा रही है. सूर्य घर योजना से अब लोग अपने घर में ही मुफ्त में बिजली बना सकेंगे. राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ आना हमारे लिए फायदेमंद आगामी राहुल गांधी के दौरे को लेकर विजय शर्मा ने कहा, राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ आना हमारे लिए फायदेमंद है. हम सभी जानते हैं कि राहुल गांधी कितना तर्कहीन बात करते हैं. उनकी बातों में कोई तर्क नहीं होता है. PCC चीफ दीपक बैज के बयान पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा, देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री से सलाह लेना कोई गलत बात है क्या? सलाह लिया इसमें कोई गलत बात नहीं है.

राज्यपाल पटेल ने प्रो. मिश्र को महर्षि पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय का कुलगुरू नियुक्त किया

भोपाल राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने प्रो. शिव शंकर मिश्र को महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन का कुलगुरू नियुक्त किया है। प्रो. मिश्र वर्तमान में श्री लाल बहादुर शास्त्रीय राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं। श्री मिश्र को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 04 वर्ष की कालावधि के लिए कुलगुरू नियुक्त किया गया है। जारी आदेश के अनुसार इनकी सेवा शर्तें एवं निबंधन विश्वविद्यालय के परिनियम-1 के अनुसार शासित होंगे।  

साध्वी प्रज्ञा से मिल भावुक हुईं उमा भारती, कहा- ये मेरी मसीहा हैं

भोपाल  राजधानी भोपाल में आज बहुत सुखद दृश्य दिखाई दिया, दो साध्वी, दो भगवा वस्त्रधारी बहनों का मिलन मीडिया के कैमरों में कैद हुआ, अवसर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मिलन का था, उमा भारती प्रज्ञा सिंह ठाकुर से मिलने उनके निवास पर पहुंची थी। मालेगांव बम ब्लास्ट के आरोपी के रूप में 17 साल तक मानसिक, शारीरिक और सामाजिक यातनाएं झेलने के बाद पिछले दिनों जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को NIA अदालत ने दोषमुक्त किया तो हिन्दू समाज में ख़ुशी की लहर दौड़ गई, सनातन और भगवा में आस्था रखने वालों ने इसे भगवा और हिंदुत्व की जीत बताया। प्रज्ञा सिंह ठाकुर से मिलकर भावुक हुई उमा भारती  जिस दिन प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अदालत ने बरी किया उस दिन उमा भारती की आँखों में आंसू थे और आज जब वे उनसे मिलने पहुंची तब भी भावुक थीं, निवास पर पहुँचते ही उमा भारती ने माला पहनाकर साध्वी प्रज्ञा का सम्मान किया और गले लगाकर उनका माथा चूम लिया। मैं साध्वी नहीं, दीदी प्रज्ञा का तप बहुत बड़ा  मीडिया ने जब इस मिलन को दो बहनों, दो साध्वियों का मिलन कहा तो उमा भारती ने टोकते हुए कहा मैं बड़ी बहन जरूर हूँ लेकिन साध्वी नहीं हूँ, मैंने अपने गुरु से सिर्फ सन्यास लिया है लेकिन दीदी प्रज्ञा का तप उनकी तपस्या बहुत बड़ी है वे मेरी मसीहा हैं। साजिश रचने वालों पर चले देशद्रोह का मुकदमा  उमा भारती ने कहा जिस तरह हिंदुत्व को, भगवा को बदनाम करने की साजिश रची गई उसका पर्दाफाश हो गया, मालेगांव बम ब्लास्ट की साजिश बेनकाब हो गई, एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा जिन्होंने ये किया साध्वी प्रज्ञा सिंह को यातनाएं दी उन्हें झूठा फंसाया, उनके लिए क्या क़ानूनी प्रक्रिया है ये मैं नहीं जानती लेकिन मेरा मानना है ये साजिश रचने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। उमा दीदी ने मेरे लिए वो किया जो कोई पुरुष नहीं कर सका  साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा मुझे हमेशा एक बड़ी बहन की तरह उमा दीदी का प्यार और स्नेह मिला है , ये हमेशा से भगवा और हिंदुत्व के लिए संघर्ष करती रही है ये मुझसे मिलने एम्स आई थी, नासिक जेल, भोपाल जेल भी आई है, जो कोई पुरुष नहीं कर सका वो इन्होने किया, इनका आशीर्वाद मुझे मिला है मैं कृतज्ञ हूँ।