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राज्यपाल पटेल का सुझाव: विवाह से पहले आनुवांशिक कार्ड का मिलान जरूरी

विवाह के पहले आनुवांशिक कार्ड का करें मिलान : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल का सुझाव: विवाह से पहले आनुवांशिक कार्ड का मिलान जरूरी विवाह से पूर्व करें आनुवांशिक जाँच, स्वास्थ्य के लिए अहम: राज्यपाल पटेल “परंपरागत चिकित्सा का स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान एवं सिकल सैल एनीमिया प्रबंधन” पर मण्डला में हुई कार्यशाला भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि विवाह के पहले आनुवांशिक कार्ड का मिलान अवश्य कराना चाहिए। सिकल सैल एनीमिया की बीमारी आनुवांशिक है। इसके उन्मूलन के लिए व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है। राज्यपाल पटेल बुधवार को मण्डला के ग्राम सेमरखापाके एकलव्य आदर्श विद्यालय ऑडीटोरियम में “परंपरागत चिकित्सा का स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान एवं सिकल सैल एनीमिया प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सैल से पीड़ित व्यक्ति का चिन्हांकन एवं त्वरित रोग उपचार ही इस बीमारी से बचाव का कारगर उपाय है। जितनी जल्दी इस रोग का पता चलेगा, इसे नियंत्रित करने की संभावना उतनी अधिक होगी। उन्होंने कहा कि आमजन स्वास्थ्य केन्द्रों में जाकर सिकल सैल एनीमिया की जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि मां के गर्भ में और बच्चे के जन्म के 72 घंटे में इसकी जांच की सुविधा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शहडोल जिले से वर्ष 2023 से सिकल सैल उन्मूलन का अभियान शुरू हुआ है। तब से लेकर अब तक देश में 7 करोड़ लोगों की जाँच की जा चुकी है, जिसमें मध्यप्रदेश में एक करोड़ 14 हजार व्यक्तियों की जांच की गई। जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि प्रदेश में प्राचीन औषधियों को अस्तित्व में बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। मंडला में डी-मार्ट की तर्ज पर ट्रायबल मार्ट बनाया जायेगा। जनजातीय बंधु इसका संचालन करेंगे। यहां मिलने वाले उत्पाद की कीमत बाजार की तुलना में 25-30 प्रतिशत कम होगी। स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजातीय जीवन को बेहतर बनाया जा रहा है। प्रदेश में सिकल सैल एनीमिया उन्मूलन के लिए युद्ध स्तर पर कार्य हो रहे हैं। केन्द्र व राज्य की डबल इंजन सरकार के प्रयासों की बदौलत स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य सिकल सैल एनीमिया उन्मूलन के संबंध में चिकित्सकों एवं परंपरागत वैद्यों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करना और उसे वृहद स्तर पर लोगों तक पहुंचाना है। बालाघाट में आयुर्वेद रिसर्च सेंटर खोलने की स्वीकृति भारत सरकार ने दी है। रिसर्च के क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों के साथ एम.ओ.यू. भी किए जा रहे हैं। परंपरागत वैद्यों के ज्ञान को सहेजने और शोध के दस्तावेजीकरण की तरफ बढ़ रहे हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी परंपरागत रूप से काम कर रहे पारंपरिक वैद्यों को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है। जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि राज्यपाल पटेल अति संवेदनशील हैं, जो जनजातीय जिलों के सुदूर अंचलों तक जाकर इस बीमारी की रोकथाम के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं। नर सेवा ही नारायण सेवा है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि पूजा अर्चना से परमेश्वर दर्शन देंगे या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन जब दीन-हीन बीमार व्यक्ति की सेवा होगी तो उसकी आंखों में परमेश्वर के दर्शन स्वतः हो जाएंगे। राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम में सिकल सैल एनीमिया से ग्रसित बच्चों ने भी अपने अनुभव साझा किए। राज्यपाल पटेल एवं अन्य अतिथियों ने मिशन नेत्रज्योति अंतर्गत चश्मा, सिकल सैल दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, पोषण किट, विधवा पेंशन कार्ड एवं स्व-सहायता समूह को राशि वितरित की। भगवान धनवंतरी एवं जननायक बिरसामुण्डा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। राज्यपाल पटेल का स्वागत अंगवस्त्र, तुलसी पौधा एवं गोंडी पेंटिंग भेंट कर किया गया। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने स्मृति चिन्ह स्वरूप गोंडी पेंटिंग भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यशाला में प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा, आयुक्त आयुष श्रीमती उमा महेश्वरी, राष्ट्रीय आयुर्वेद महासम्मेलन के प्रो. रविनारायण आचार्य एवं परंपरागत वैद्य शामिल हुए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सम्पूर्णता अभियान से जिलों और विकासखंडों में जीवन में सकारात्मक बदलाव

सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आकांक्षी कृषि जिलों की अवधारणा कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण सम्पूर्णता कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी मूलभूत सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है सम्पूर्णता अभियान का उद्देश्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह में जिला और विकासखंड अधिकारियों को किया सम्मानित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और प्रतिबद्धता के परिणाम स्वरूप देश ने विकास की नई गति प्राप्त की है। पिछड़े जिलों‍ और विकासखंडों को आकांक्षी रूप में चिन्हित कर विकास के लिए समन्वित प्रयास करना, इस दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम है। आज आयोजित सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह, जिला और विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आधारभूत संरचना और सुशासन में आए सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। इन जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन और जीवन जीने की परिस्थितियों में आया बदलाव अभियान की सफलता को अभिव्यक्त करता है। सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण और उन्हें पोषक भोजन की उपलब्धता, बच्चों के टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, स्कूलों में बिजली की उपलब्धता और समय पर पाठ्य पुस्तक वितरण जैसी गतिविधियों में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को राज्य स्तरीय सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह के अंतर्गत कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पूर्णता अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदेश के आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के अधिकारियों को उनकी टीम सहित सम्मानित किया। राज्य नीति आयोग की कॉफी टेबल बुक का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य नीति आयोग द्वारा प्रदेश में संचालित विकास गतिविधियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर विकसित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर उपस्थित रही। मुख्य सचिव अनुराग जैन, नीति आयोग भारत सरकार के अपर सचिव रोहित कुमार और सदस्य प्रोफेसर रमेशचंद्र ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।   राज्य सरकार प्रत्येक पात्र हितग्राही को सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही को दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। प्रदेश में शिक्षा, कृषि, उद्योग, रोजगार, ऊर्जा सहित सभी क्षेत्रों में लक्ष्य निर्धारित कर कार्य किये जा रहे है। प्रदेश में अब 30 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं, इनमें से 10 पिछले सवा साल में शुरू किए गए। सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। सवा साल में साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है। प्रदेश में खेती के साथ मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में किसानों के लिए कृषि मेले, निवेश और उद्योग बढ़ाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और विभिन्न सेक्टर्स की रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव आयोजित की गई हैं। उन्होंने कहा कि जो कलेक्टर और अन्य अधिकारी बेहतर कार्य करेंगे उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्य में लापरवाही को राज्य सरकार किसी भी स्थिति में अनदेखा नहीं करेगी। सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को दी नई दिशा : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को नई दिशा दी है। डेटा आधारित मूल्यांकन और स्कोरिंग प्रणाली तथा प्राथमिकताओं की स्पष्टता व पारदर्शिता से प्रशासनिक दक्षता और जन सेवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी प्रोत्साहन मिला है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने कहा कि प्रदेश के समुख बड़ी चुनौती थी, परंतु प्रदेश के अधिकारियों के समर्पित प्रयासों से लक्षित संकेतों में सम्पूर्णता प्राप्त करना संभव हुआ है। रमेश चंद्र ने स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े संकेतकों में मध्यप्रदेश में हुए कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम में हुए बेहतर कार्य से कृषि क्षेत्र में न केवल उत्पादकता सुधरेगी अपितु उपज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उन्होंने आकांक्षी कृषि जिलों की अवधारणा का उल्लेख करते हुए इसे कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। नीति आयोग के अपर सचिव रोहित कुमार ने कहा कि सम्पूर्णता कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। मध्यप्रदेश द्वारा इस क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए उदाहरण हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर सहित जिले की टीम को किया सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मान समारोह के अंतर्गत जिला बड़वानी और विकासखंड पाटी के लिए तत्कालीन कलेक्टर राहुल फटिंग, जिला दमोह और विकासखंड तेंदूखेड़ा के लिए कलेक्टर सुधीर कोचर, जिला धार तथा विकासखंड तिरला के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, जिला खंडवा और विकासखंड छैगांव माखन के लिए कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह, जिला निवाड़ी और विकासखंड पृथ्वीपुर के लिए कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, जिला टीकमगढ़ और विकासखंड बलदेवगढ़ के लिए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और तत्कालीन कलेक्टर अवधेश शर्मा, जिला विदिशा और विकासखंड बासौदा के लिए कलेक्टर अंशुल गुप्ता (प्रशिक्षण पर), तत्कालीन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, जिला झाबुआ और विकासखंड थांदला, मेघनगर, रामा व राणापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जितेन्द्र सिंह चौहान, जिला रतलाम और विकासखंड बाजना के लिए कलेक्टर राजेश बाथम, जिला अनूपपुर और विकासखंड पुष्पराजगढ़ के लिए कलेक्टर हर्षुल पंचोली और जिला शहडोल और विकासखंड पाली के अधिकारियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला डिण्डौरी और आकांक्षी विकासखंड करंजिया, मेहेंदवानी व बजाग के लिए संयुक्त कलेक्टर सुभारती मेरावी तथा तत्कालीन कलेक्टर हर्ष सिंह, जिला खरगोन और विकासखंड भगवानपुर तथा झिरन्या के लिए कलेक्टर श्रीमती भाव्या मित्तल और तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, जिला राजगढ़ और विकासखंड जीरापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अर्पित गुप्ता, जिला श्योपुर और विकासखंड श्योपुर, कराहल तथा विजयपुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अतेन्द्र सिंह गुर्जर तथा तत्कालीन कलेक्टर लोकेश कुमार जांगीड़, जिला अलीराजपुर और विकासखंड कट्ठीवाड़ा के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रखर सिंह, जिला छतरपुर और विकासखंड बक्सवाहा के लिए सीईओ … Read more

राज्यपाल पटेल: समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए सरकार की योजनाएँ सक्रिय

राज्यपाल ने सिवनी जिले के ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद प्रधानमंत्री आवास के गृह प्रवेश में राज्यपाल शामिल हुए   भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएँ बनाकर उनका मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत है। अब पाँच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध होने से हर गरीब परिवार सुरक्षित हुआ है। सरकार के प्रयासों से महिलाएं आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बन रही है। कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं को ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में प्रशिक्षित कर आधुनिक खेती में उनका योगदान प्राप्त किया जा रहा है। राज्यपाल पटेल ने बुधवार को सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम झोला में ग्रामीणजनों के साथ आत्मीय संवाद के दौरान यह बात कही। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आज ग्रामीण महिलाएँ स्व-सहायता समूहों के माध्यम से छोटे-बड़े उद्योग संचालित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाएँ अपने परिवार का बेहतर लालन-पालन के साथ ही समाज में भी सशक्त भूमिका निभा रही हैं। राज्यपाल पटेल ने जनजातीय समुदाय में पाए जाने वाले अनुवांशिक रोग सिकल सैल रोग और रोकथाम के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि जैसे विवाह से पहले लड़के-लड़की की कुंडली मिलाई जाती है, उसी तरह सिकल सैल कार्ड भी अवश्य मिलाना चाहिए। यदि दोनों ही वाहक या रोगग्रस्त हों तो विवाह कदापि न किया जाए। उन्होंने बताया कि सरकार सिकल सैल उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चला रही है। इसके अंतर्गत नि:शुल्क जांच एवं परामर्श की व्यवस्था की गई है। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जांच कराए और इस रोग की रोकथाम में सहयोग दे। प्रत्येक बच्चे की शिक्षा और समाज के उत्थान के लिए युवाओं की भूमिका पर दिया बल राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जन मन कार्यक्रम और धरती आबा अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी बच्चे स्कूल जाएं। युवा पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने और शिक्षा के प्रसार में सहयोग करें।  जनजातीय विकास सरकार की प्राथमिकता : डॉ. विजय शाह कार्यक्रम को जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. विजय शाह ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय अंचलों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री जन मन और धरती आबा अभियान जैसे विशेष कार्यक्रमों का उद्देश्य जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़कर मुख्यधारा में लाना है।  डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करें। मंत्री ने यह भी बताया कि जनजातीय युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाएँ चल रही हैं, जिनसे वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं। राज्यपाल पटेल ने श्रीमती मुलिया बाई के प्रधानमंत्री आवास का किया उद्घाटन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विकासखंड केवलारी के ग्राम झोला के प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राही श्रीमती मुलिया बाई पति सुक्कू बैगा के आवास का शुभारंभ कर गृह प्रवेश कराया। राज्यपाल ने लाभान्वित परिवार से संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी ली। राज्यपाल ने कहा कि ग्रामों की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुँचे और उसका सदुपयोग हो। उन्होंने ग्रामीणों से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। प्रवास के दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक सैला नृत्य प्रस्तुत किया। महिलाओं ने स्वागत गीत गाकर अतिथियों का अभिनंदन किया। प्राथमिक शाला झोला का निरीक्षण राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्राथमिक शाला झोला का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से आत्मीय संवाद किया। बच्चों से सामान्य प्रश्न पूछे, जिनका उत्साहपूर्वक उत्तर देकर बच्चों ने अपनी जिज्ञासा और आत्मविश्वास का परिचय दिया। राज्यपाल पटेल ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की ज्योति ही विकास की आधारशिला है। बच्चों की तरक्की के साथ ही गांव और समाज प्रगति की राह पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने बच्चों को स्वच्छता, अनुशासन और संस्कारों के महत्व से भी अवगत कराया। राज्यपाल ने शिक्षकों से शैक्षणिक गतिविधियों, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के परिणाम की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई में विशेष रुचि लेकर गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।          

दिव्यांग कल्याण परिषद ने विधायक को सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र, पेंशन बढ़ाने की मांग

दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य,10 सूत्रीय मांगों का सौपा मांग पत्र,दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन 600 से बढ़ा कर 5 हजार कराये,सरकार तक भेजे हमारी मांगे,आज जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याए आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा में दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य आज विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में पहुचे । दिव्यांग जनों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र विधायक को सौपा एवं उनकी मांगों को शासन तक पहुचने एवं उन मांगो को पूर्ण कराने की मांग की । सौपे गये मांग पत्र में मांग की गई कि अभी दिव्यांजनो को 600₹ पेंशन मिलती है सरकार उसे बढ़ा कर 5 हजार करे । दिव्यांग जनों को एवं आये अन्य  ग्रामीणोंजनों को विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने भरोसा दिया कि उनकी समस्या को जल्द हल कर जो मांग शासन स्तर की है उसे वे शासन तक पहुचायेंगे । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । आज जनसुनवाई में कई विभागों के 44 आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा,जो मांग शासन स्तर की है उनेह वे शासन तक पहुचायेंगे। मीडिया प्रभारी सुशील संचेती ने जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में दिव्यांजनो की दस सूत्रीय मांगों के साथ घाटे वाले बाबा स्थल पर चबूतरा एवं टीन शेड निर्माण कराने,किसान सम्मन निधि अप्राप्त होने की शिकायत,मकान का पट्टा दिलाने,ग्राम टिंगम टेकरी मांडा गुराडिया तहसील जावर में मकान का पट्टा दिलाने,करंट लगने पर आर्थिक सहायता प्रदाय हेतु,स्पेशल मोबाइल एवं दिव्यांगों के लिए छड़ी प्रदाय हेतु मांग पत्र,दुपाड़िया से मुंदीखेड़ी तक रोड एवं डीपी हेतु आवेदन,अज्ञात वाहन से टक्कर मारने पर सहायता राशि दिलाने,काजीपुरा वार्ड क्रमांक 9 आष्टा में बाउंड्री वॉल एवं तीन पहिया वाहन दिलाने,ग्राम पंचायत अरनिया जोहरी में वाधयन्त्र हेतु राशि स्वीकृत करने, इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन हेतु आवेदन,आर्थिक सहायता की मांग,प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय हेतु मांग सहित अन्य 44 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

यात्रियों पर नई पाबंदी: अब रेलवे स्टेशन पर भी लागू होंगे एयरपोर्ट रूल्स, भारी सामान ले जाना पड़ेगा महंगा

 लखनऊ क्या आपने कभी सोचा था कि रेलवे स्टेशन पर भी एयरपोर्ट जैसी सख्ती देखने को मिलेगी? अब यह हकीकत बनने जा रही है. भारतीय रेलवे यात्रियों के लगेज को लेकर नए नियम लागू करने की तैयारी में है. पहले भी वजन और साइज को लेकर नियम मौजूद थे, लेकिन उन्हें उतनी सख्ती से लागू नहीं किया जाता था. अब हालात बदलने वाले हैं. स्टेशन पर प्रवेश से पहले यात्रियों को अपने बैग का वजन इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर कराना होगा. अगर बैग तय सीमा से ज्यादा भारी निकला या साइज बहुत बड़ा हुआ—तो सीधा अतिरिक्त चार्ज या जुर्माना देना पड़ेगा. किन स्टेशनों से होगी शुरुआत? रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के कुछ बड़े स्टेशनों को चुना है.     लखनऊ चारबाग     प्रयागराज जंक्शन     बनारस     कानपुर सेंट्रल     अलीगढ़     मिर्जापुर     गोविंदपुरी     इटावा इन जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक लगेज मशीनें लगाई जा रही हैं. नियम साफ है- प्लेटफॉर्म पर वही यात्री जाएंगे जिनके बैग सीमा के अंदर होंगे. चलिए नियमों को आसान भाषा में समझते हैं: बेसिक नियम: हर बैग पर यात्री का नाम और पता साफ लिखा होना चाहिए. बैग मजबूती से पैक होना चाहिए, वरना रेलवे जिम्मेदारी से बच सकता है. अगर चाहते हैं कि लगेज उसी ट्रेन से जाए, तो डिपार्चर से कम से कम 30 मिनट पहले बुकिंग ऑफिस में जमा करना होगा. मुफ्त अलाउंस: हर क्लास के हिसाब से सामान की मुफ्त सीमा तय है. 5–12 साल के बच्चों को आधा अलाउंस मिलता है. ज्यादा वजन पर सामान्य रेट से 1.5 गुना चार्ज लगेगा. अगर बैग बिना बुकिंग पकड़ा गया, तो 6 गुना जुर्माना देना पड़ेगा (न्यूनतम ₹50). भारी या बड़े सामान: 100 किलो से ज्यादा या तय साइज़ से बड़ा सामान “बल्की” कहलाएगा. ऐसे सामान पर डबल रेट का सरचार्ज लगेगा. इसे सिर्फ ब्रेक वैन में भेजा जा सकता है. मना किए गए सामान: विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ, गैस सिलेंडर, बदबूदार या खतरनाक चीजें बिल्कुल मना हैं. पर्सनल लगेज: ट्रंक या सूटकेस का माप 100x60x25 सेमी से ज्यादा नहीं होना चाहिए. AC 3-टियर और चेयर कार में यह सीमा और भी कम है. बिजनेस का सामान “पर्सनल लगेज” के नाम पर नहीं ले जा सकते. ऑक्सीजन सिलेंडर: मरीज मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर मुफ्त ले जा सकते हैं. चोरी या नुकसान: चोरी होने पर FIR फॉर्म भरकर तुरंत शिकायत की जा सकती है. अगर सामान पहले से डिक्लेयर नहीं किया गया, तो रेलवे की जिम्मेदारी सिर्फ ₹100/किलो तक होगी. पालतू जानवर: कुत्तों को ब्रेक वैन या तय नियमों के हिसाब से ले जाया जा सकता है. AC फर्स्ट क्लास में तभी ले जाएंगे, जब बाकी यात्री राजी हों. गलत पाए जाने पर 6 गुना पेनल्टी. अतिरिक्त वजन: सीमा से ज्यादा लेकिन बुकिंग के साथ 1.5 गुना रेट. बिना बुकिंग पकड़े जाने पर 6 गुना रेट. साइकिल और स्कूटर: इन पर फ्री अलाउंस नहीं है. इन्हें अलग से बुक कर चार्ज देना होगा. भारतीय रेलवे अब सफर को और अनुशासित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यानी अगर आप ट्रेन पकड़ने जा रहे हैं, तो सिर्फ टिकट ही नहीं, बैग का वजन और साइज भी आपके पासपोर्ट की तरह चेक होगा.

BPSC ASO Exam 2025: 10 सितंबर को प्रीलिम्स, देखें पूरा शेड्यूल

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सहायक अनुभाग अधिकारी के पद हेतु प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025 की तारीख घोषित कर दी है। आयोग के अनुसार, यह परीक्षा राज्य के 11 जिलों में स्थित विभिन्न परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों की विस्तृत सूची उम्मीदवारों को उनके एडमिट कार्ड में उपलब्ध कराई जाएगी। 10 सितंबर को होगी प्रारंभिक परीक्षा बीपीएससी सहायक अनुभाग पदाधिकारी (ASO) प्रारंभिक परीक्षा 2025 का आयोजन 10 सितंबर 2025 (बुधवार) को किया जाएगा। यह परीक्षा सामान्य ज्ञान (वस्तुनिष्ठ प्रकार) विषय पर आधारित होगी, जो दोपहर 12:00 बजे से अपराह्न 2:15 बजे तक चलेगी। यानी कुल परीक्षा अवधि 2 घंटे 15 मिनट की होगी। जल्द जारी होंगे एडमिट कार्ड परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जल्द ही बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा केंद्र पर परीक्षा समय से कम से कम एक घंटा पहले पहुंचें, ताकि समय पर आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके। उम्मीदवारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे परीक्षा में शामिल होते समय अपने साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि) अवश्य लाएं। इसके साथ ही, परीक्षा केंद्र में किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर आदि ले जाने की कड़ाई से मनाही है। कुल 41 रिक्त पदों के लिए भर्ती इस भर्ती अभियान का उद्देश्य बिहार लोक सेवा आयोग में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के कुल 41 रिक्त पदों को भरना है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 29 मई से 23 जून 2025 तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर आयोजित की गई थी। इतना मिलेगा वेतन चयन प्रक्रिया के अंतर्गत सफल उम्मीदवारों को वेतन स्तर-7 के अंतर्गत रखा जाएगा, जिसमें उन्हें प्रतिमाह ₹44,900 से ₹1,42,400 तक का वेतन प्रदान किया जाएगा। बीपीएससी एएसओ एडमिट कार्ड 2025: डाउनलोड करने के चरण     सबसे पहले बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर दिए गए "ASO Admit Card 2025" लिंक पर क्लिक करें।     अब अपनी लॉगिन डिटेल्स (यूजरनेम और पासवर्ड) दर्ज करें और सबमिट करें।     स्क्रीन पर आपका एडमिट कार्ड दिखाई देगा, उसे ध्यानपूर्वक जांचें और डाउनलोड करें।     भविष्य में उपयोग के लिए उसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रखें।

फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह

एक बगिया मां के नाम परियोजना, MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह 34 हजार से अधिक महिलाओं ने कराया ऐप पर रजिस्ट्रेशन, निजी भूमि पर विकसित की जाएगी बगिया भोपाल स्व सहायता समूह की महिलाओं को समृद्ध बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नवाचारों के माध्यम से महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में "एक बगिया मां के नाम" परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाई जाएगी। फलोद्यान की बगिया लगाने को लेकर समूह की महिलाओं ने विशेष उत्साह का दिखाया है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक 34 हजार 84 महिलाओं ने एक बगिया मां के नाम ऐप पर पंजीयन कराया है। परियोजना के अंतर्गत सरकार हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि प्रदान कर रही है। योजनान्तर्गत प्रदेश में फलदार पौधे लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जा रहा है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से कराया गया है। अन्य किसी माध्यम से हितग्राही का चयन नहीं किया जाएगा। चयनित महिला हितग्राही के नाम पर भूमि नहीं होने की दशा में उस महिला के पति-पिता-ससुर-पुत्र की भूमि पर उनकी सहमति के आधार पर पौधरोपण किया जा सकेगा। पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से किया जा रहा पौधरोपण प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से किया गया है। जमीन चिन्हित होने के बाद सॉफ्टवेयर की मदद से ही भूमि का परीक्षण किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। पौधरोपण का कार्य बेहतर ढंग से हो इसके लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रदेश में 31 हजार 300 महिलाओं को मिलेगा परियोजना का लाभ “एक बगिया माँ के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लाभ मिलेगा। इनकी निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। हर एक ब्लॉक में 100 हितग्राहियों का किया जा रहा चयन एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया जा रहा है। चयनित हुई समूह की पात्र महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण महिलाओं को वर्ष में दो बार दिया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि की सीमा भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। प्रति 25 एकड़ पर 1 'कृषि सखी' की होगी तैनाती फलोद्यान की बगिया लगाने के लिए चयनित हितग्राहियों की सहायता के लिए कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ये कृषि सखी हितग्राहियों को खाद, पानी, कीटों की रोकथाम, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक तैयार करने और अंतरवर्तीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी। प्रत्येक 25 एकड़ पर एक कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ड्रोन-सैटेलाइट इमेज और डैशबोर्ड से निगरानी पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, पौधे कहाँ लगे हैं, कहाँ नहीं लगे, इसकी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड भी बनाया गया है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। हितग्राहियों के चयन में टॉप 5 जिले एक बगिया मां के नाम परियोजना के लिए हितग्राहियों के चयन में प्रदेश के 5 जिले सिंगरौली, देवास, खंडवा, निवाड़ी और टीकमगढ़ अग्रणी हैं।  

चांदी खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! अब मिलेगी हॉलमार्किंग की गारंटी, धोखाधड़ी से बचेंगे ग्राहक

भोपाल  सोने के बाद अब चांदी खरीदने वालों को भी हॉलमार्क का लाभ मिलने वाला है। एक सितंबर से देश भर के साथ ही चांदी के गहनों और बर्तनों पर सरकार हॉलमार्क लागू करने जा रही है, हालांकि प्रारंभ में इसे स्वैच्छिक तौर पर लागू किया जा रहा है। चांदी पर 6 डिजिट वाली एचयूआईडी हॉलमार्किंग लागू होगी। यानी अब हर चांदी पर सोने की तरह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (bureau of indian standards) की मुहर (BIS Seal) होगी, जो शुद्धता और असलियत की गारंटी देगी। 900, 800, 835, 925, 970 और 990 जैसी 6 ग्रेड चांदी पर हॉलमार्किंग लागू की जाएगी। इससे ग्राहकों को सही दाम मिलेगा और ईमानदार व्यापारियों का विश्वास बढ़ेगा। गहनों की मजदूरी बढ़ेगी, तो गहने भी होंगे महंगे एमपी के सराफा कारोबारियों की मानें तो इससे गहनों की मजदूरी पर 30 फीसदी का इजाफा होगा। इससे वर्तमान में एक हजार रुपए की मिलने वाली पायल के दाम 1500 रुपए तक हो जाएंगे। ग्वालियर में सालाना चांदी का 500 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता है। जाने क्या है 'हॉलमार्क' (What is Hallmark) हॉलमार्क एक सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाण है, जो धातु की शुद्धता बताता है। जैसे, सोने में 22 कैरेट या 18 कैरेट का हॉलमार्क होता है, वैसे ही अब चांदी पर भी एक खास निशान होगा, जो बताएगा कि उसमें चांदी की शुद्धता कितनी है। बीआईएस के तहत मान्यता प्राप्त अस्सेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर में धातु की जांच के बाद यह मुहर लगाई जाती है। ग्राहकों को क्या फायदे? (Costumer Benefits) शुद्धता की गारंटी : हर हॉलमार्क चांदी पर बीआईएस का लोगो, शुद्धता का अंक और पंजीकरण नंबर। सही दाम : वजन और शुद्धता में धोखाधड़ी की संभावना कम। बेचने में आसानी : हॉलमार्क चांदी की पुनर्खरीद पर बेहतर रेट मिलेगा। व्यापारियों को क्या फायदे? साख में बढ़ोतरी – ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा। नकली बाजार पर रोक : मिलावटी चांदी बेचने वालों पर लगाम। बिक्री में वृद्धि : गुणवत्ता की गारंटी से ग्राहक वफादारी बढ़ेगी।

उपभोक्ता आयोग का काम प्रशंसनीय: 3.07 लाख से अधिक प्रकरण हुए निराकृत, 78 हजार का 90 दिन में निपटान

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में उपभोक्ताओं के आवेदन पर लगातार कार्यवाही की जा रही है। जून 2025 तक कुल 3 लाख 7 हजार 536 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। कुल प्राप्त प्रकरण संख्या 3 लाख 31 हजार 789 हैं। राजपूत ने बताया है कि निराकृत प्रकरणों में से 78 हजार 20 प्रकरणों का निराकरण 90 दिन में किया गया। उपभोक्त विवाद प्रतितोषण आयोग अंतर्गत जिला अनूपपुर में 475, अशोकनगर में 2365, बड़वानी 1093, बालाघाट 3571, बैतूल 2228, भिंड 6175, भोपाल क्रं-एक 19 हजार 498, भोपाल क्रं-2 4395, बुरहानपुर 1739, छतरपुर 6579, छिंदवाड़ा 6479, दमोह 5634, दतिया 5821, देवास 3313, धार 4337, डिंडोरी 676, गुना 10 हजार 865, ग्वालियर 23 हजार 210, हरदा 3014, इंदौर क्रं-1 में 27 हजार 916, इंदौर क्रं-2 में 5863, जबलपुर क्रं-1 में 15 हजार 464, जबलपुर क्रं-2 में 3566, झाबुआ 1288, कटनी 3781, खंडवा 6081, मंडला 4785, मंडलेश्वर 4063, मंदसौर 7954, मुरैना 9162, नर्मदापुरम 5597, नरसिंहपुर 2536, नीमच 1995, पन्ना 1585, रायसेन 1193, राजगढ़ 5050, रतलाम 3999, रीवा 11 हजार 904, सागर 9297, सतना 11 हजार 65, सीहोर 6565, सिवनी 4051, शहडोल 1801, शाजापुर 3190, श्योपुर 2258, शिवपुरी 11 हजार 84, सीधी 2172, टीकमगढ़ 3428, उज्जैन 12 हजार 537, उमरिया 485 और विदिशा में 4354 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।  

शाही विरासत पर सुलगा विवाद: भोपाल में 15000 करोड़ की संपत्ति पर 20+ दावेदारों का दावा

भोपाल  शाही परिवार की संपत्ति का विवाद फिर से सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने MP हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति से जुड़ा है। नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान को 1962 में एकमात्र वारिस घोषित किया गया था। साजिदा सुल्तान, फिल्म अभिनेता सैफ अली खान की दादी हैं। अब नवाब के भाइयों और अन्य रिश्तेदारों के वंशज इस दावे का विरोध कर रहे हैं। नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशजों ने दी याचिका सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और अतुल चन्दुरकर की बेंच ने 8 अगस्त को यह फैसला सुनाया। उन्होंने उमर फारूक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया। ये दोनों नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशज हैं। उनके वकील आदिल सिंह बोपराई ने बताया कि MP हाई कोर्ट ने 30 जून को फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि नवाब की संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। यह फैसला 'तलत फातिमा (रामपुर) केस' पर आधारित था। हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले को फिर से विचार करने के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट में इसी फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने सैफ की फैमिली के पक्ष में दिया था फैसला 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने 'तलत फातिमा रामपुर केस' में फैसला दिया था कि शाही संपत्ति का बंटवारा पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। MP हाई कोर्ट ने 2000 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (दिवंगत क्रिकेटर) और उनके कानूनी वारिसों (सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और शर्मिला टैगोर) के अधिकारों को सही माना था। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला 1997 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर आधारित था, जिसे 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था। और भी हैं इस मामले में पेंच इस संपत्ति विवाद में एक और पेच है। 2015 में सरकार ने आबिदा सुल्तान की संपत्ति को जब्त कर लिया था। आबिदा सुल्तान, हमीदुल्लाह खान की सबसे बड़ी बेटी थीं। वह पाकिस्तान चली गई थीं। भारत में उनकी संपत्ति को 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दिया गया है। जबलपुर के वकील राजेश कुमार पंचोली के अनुसार, आबिदा सुल्तान 1972 के मूल मामले में शामिल थीं। इस मामले में भोपाल की शाही संपत्ति के लिए 20 से अधिक दावेदार थे। रामपुर केस की चर्चा क्यों हो रही है? 2019 का रामपुर केस इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें कहा गया था कि सभी वारिसों को, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। लेकिन पंचोली का कहना है कि यह मामला भोपाल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो सकता। 1972 से नवाब की कई संपत्तियां, जो भोपाल, सीहोर और रायसेन में फैली हुई हैं, वो या तो बेची जा चुकी हैं या दूसरों के कब्जे में हैं। फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान किसी भी नई बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी है।