samacharsecretary.com

डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस

16 सितम्बर से शुरू होगा विशेष अभियान, किसानों की 100% रजिस्ट्री का लक्ष्य डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक जनपद बिजनौर सबसे आगे  लखनऊ उत्तर प्रदेश में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री को लेकर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 16 सितम्बर, 2025 से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जिलाधिकारियों को फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि राजस्व अधिकारियों को मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिकार अभिलेख में “मालिकों के नाम” को आधार के अनुसार सही किया जा सके।  फार्मर रजिस्ट्री में बिजनौर सबसे आगे  प्रदेश में कुल 2.88 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक 50 प्रतिशत से अधिक लगभग 1.45 करोड़ किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक बिजनौर जिला सबसे आगे है, जहां 58% से अधिक रजिस्ट्री पूर्ण हो चुकी है। इसके बाद हरदोई (57.84%), श्रावस्ती (57.47%), पीलीभीत (56.89%) और रामपुर (56.72%) टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। जो किसान अभी तक रजिस्ट्री का हिस्सा नहीं हैं, उनके डाटा का फील्ड ऑफिसर्स द्वारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसमें अमरोहा, आजमगढ़, बलरामपुर, एटा और जौनपुर जैसे जिलों में 100 प्रतिशत वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। पीएम किसान योजना में 100% पंजीकरण पर जोर योगी सरकार ने जिलाधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किसानों का 100% पंजीकरण अगली किस्त जारी होने से पहले पूरा हो। इसके साथ ही सभी जिलाधिकारियों को व्यापक आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियां चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से चेताया गया है कि पिछड़ रहे जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं।

साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर

चीन, पाकिस्तान जैसे देशों की 'ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी' का डटकर मुकाबला करना बेहद जरूरी  -सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपीएसआईएफएस में जारी तीन दिनी सेमिनार के अंतिम दिन एक्सपर्ट्स ने कई प्रमुख विषयों पर पैनल डिस्कशन में लिया हिस्सा -साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर -अपराधियों को सजा दिलाने तथा न्यायिक प्रक्रिया को सही तरीके से लागू कराने के लिए पारंपरिक तौर-तरीकों से साथ भविष्य आधारित तकनीक के प्रयोग पर हुआ मंथन -फॉरेंसिक साइंस में उन्नति, जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे विषयों और बदलते परिदश्यों को लेकर हुई सकारात्मक चर्चा लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए प्रदेश के समक्ष उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस (यूपीएसआईएफएस) में जारी तीन दिवसीय सेमिनार के तीसरे व अंतिम दिन बुधवार को कई अहम विषयों पर लेकर चर्चा हुई। इसमें साइबर सुरक्षा से लेकर फॉरेंसिक साइंस की उन्नति से लेकर कई विषयों पर पैनल डिस्कशन का आयोजन हुआ जिसमें जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण, एआई व आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।              इसी कड़ी में साइबर क्राइम को लेकर एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की ओर से भारत की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की बढ़ती कोशिशों पर लगाम लगाने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान की ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी का सामना करने के लिए भारत को तेजी से सिक्योर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करनेकी जरूरत है। साइबर क्राइम की सबसे अहम कड़ी साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। वहीं, फॉरेंसिक की फील्ड में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए पीड़ितों को न्याय व सहायता दिलाने के साथ दोषियों को दंड दिलाने पर जोर दिया गया। इस दौरान भारत समेत विश्व के कई मामलों का न केवल उल्लेख किया गया बल्कि, उससे मिलने वाली सीख पर भी चर्चा की गई।         छोटा सा परिवर्तन ला सकता है बहुत बड़ा इंपैक्ट बुधवार को पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेते हुए महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव ब्रजेश सिंह ने साइबर खतरे व पुलिसिंग के वैश्विक परिदृश्य को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज छोटा सा परिवर्तन बहुत बड़ा इंपैक्ट ला सकता है। हिज्बुल्ला पेजर अटैक इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि साइबर किल चेन रक्तबीज की तरह है। भारत का सबसे बड़े पोर्ट यानी 3 महीने के लिए जीएनपीटी का पोर्ट ऑपरेट नहीं हो पाया एक मालवेयर के कारण। यह साइबर किल चेन का उदाहरण था। साइबर क्राइम इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि लॉकबिट को तोड़ने के लिए 11 देशों की सुरक्षा एजेंसियों को साथ आकर काम करना पड़ा। यानी, साइबर क्राइम पर आकर ट्रेडिशनल पुलिसिंग के मेथड फेल हो जाते हैं। साइबर किल चेन मॉड्यूलर होता है। रेकॉन, वेपनाइजेशन, डिलीवरी व उत्पीड़न समेत 7 स्टेज इसका हिस्सा हैं।  संकट को रियल टाइम में मैप करना जरूरी ब्रजेश सिंह ने कहा कि संकट को रीयल टाइम में मैप करना जरूरी है। एक बार खतरा भांपने के बाद सबूतों को चिह्नित कर उन्हें सुरक्षित करने की जरूरत है। साइबर केसेस की भी चेन ऑफ कस्टडी भी फॉरेंसिक्स की तरह ही काम करती है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में मनी कटऑफ जरूरी हो जाता है। इसमें वॉलेट, ब्लॉकचेन, डिजिटल मनी समेत जैसी सभी तथ्यों पर कार्य करने की जरूरत है। इसके अगले चरण में क्रिमिनल इंफ्रास्ट्रक्चर को सीज करने की जरूरत है। इसके अतिरिक्त, पोटेंशियल विक्टिम को अलर्ट करने व रिस्पॉन्स मैकेनिज्म पर कार्य करने की जरूरत है और उनकी मदद की जानी चाहिए। साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए मदद, परामर्श और न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया त्वरित होनी चाहिए। डिजिटल अरेस्ट समेत जितने भी साइबर फ्रॉड हैं उसे न केवल रोकना है बल्कि हर केस से सीख लेकर एक विस्तृत मैकेनिज्म तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने आरबीआई का साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की तारीफ करते हुए जोर देकर कहा कि भारत में डिजिटल सॉवरेनिटी में फोकस करना होगा, इससे केस सॉल्विंग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी कहा कि हेल्थ डेटा कितना जरूरी है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अगर हमें पता होता कि जिन्ना को तपेदिक है तो शायद स्थिति अलग होती। साइबर सिक्योरिटी भी कृषि की तरह है, इसे बाहर से इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है, इसे भारत में ही विकसित करना होगा।  तेजी से बदल रही है हैकिंग की प्रक्रिया ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट रॉबी अब्राहम ने वर्चुअल माध्यम से पैनल डिस्कशन में जुड़कर हैकिंग की बदलती प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले प्रोग्रामिंग, स्क्रिप्टिंग, ओएस, नेटवर्किंग प्रोटेकॉल,शेलकोड राइटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता था। उन्होंने विभिन्न मालवेयर की जानकारी देते हुए बताया कि फिलीपींस के एक स्टूडेंट ने आई लव यू वॉर्म बनाया था जिसे ईमेल से सर्कुलेट किया गया जिससे 8.7 बिलियन यूएस डॉलर का विश्व को नुकसान हुआ। इसी प्रकार, कन्फिगर वॉर्म के जरिए एक रूसी साइबर क्राइम ग्रुप ने 9 बिलियन यूएस डॉलर का नुकसान कुल 190 देशों में किया। क्रिप्टोलॉकर के पीछे रूसी साइबर क्राइम ग्रुप का हाथ होने की आशंका है जिसके जरिए 27 मिलियन बिटक्वॉइन की ग्लोबली कमाई की गई और इसको फिरौती के रूप में इस्तेमाल किया गया। पर आज के परिदृष्य में चीजें बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, अब ई-मेल व सोशल मीडिया पर रैनसमवेयर और फिशिंगवेयर के जरिए साइबर हमले हो रहे हैं। इसके जरिए ब्राउजिंग डाटा, क्रिप्टो वॉलेट समेत कॉन्फिडेंशियल जानकारियों तक हैकर्स का एक्सेस बढ़ जाता है। अब हैकिंग के बजाए हैकर्स लॉगिंग पर फोकस करते हैं। इससे वह सिस्टम एक्सेस कर ऐसे क्रिडेंशियल्स को हासिल कर लेते हैं जो या तो सीधे तौर पर फायदा पहुंचाता है या उसे डार्क वेब पर बेच देते हैं। इसे रोकने के लिए रेगुलर सिक्योरिटी ट्रेनिंग, सभी अकाउंट को एमएफए इनेबल करना, एंटीवायरस का इस्तेमाल, ई-मेल और मैसेज के प्रति … Read more

सुदेश महतो की सुरक्षा पर सवाल, आजसू प्रतिनिधिमंडल ने जांच की रखी मांग, मुख्य सचिव और DGP को सौंपा ज्ञापन

रांची झारखंड में आजसू पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव तथा डीजीपी से मिला और ज्ञापन सौंपकर पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख सुदेश महतो की हत्या की साजिश उग्रवादियों द्वारा बार- बार रचे जाने और उनका नाम हिटलिस्ट में रखने की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन आई ए) से करवाने और उनकी सुरक्षा की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की। मुख्य सचिव अलका तिवारी तथा डीजीपी अनुराग गुप्ता ने आजसू प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उग्रवादियों की हिटलिस्ट में सुदेश कुमार महतो का नाम बार- बार आने के संबंध में जांच करवाई जाएगी। आजसू पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कहा कि इस बात का खुलासा होना चाहिए कि सुदेश महतो लगातार उग्रवादियों के निशाने पर क्यों हैं? प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो, मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत, केंद्रीय उपाध्यक्ष द्वय प्रवीण प्रभाकर एवं हसन अंसारी शामिल थे। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने बताया कि बार बार उग्रवादियों द्वारा सुदेश महतो की हत्या की साजिश की जानकारी सामने आती रहती है, लेकिन इसके कारणों का अभी तक पुलिस द्वारा खुलासा नहीं किया गया है। इस संबंध में पार्टी नेताओं ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से मिलकर स्मारपत्र सौंपा। डॉ भगत ने कहा कि विगत 5 अगस्त को गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए पीएलएफआई उग्रवादी माटिर्न केरकेट्टा ने भी सुदेश महतो को अपनी हिटलिस्ट में रखा था और हमले की फिराक में था। उसने 2023 में अनगड़ा थाना क्षेत्र में बैठक कर सुदेश महतो की हत्या की योजना बनाई थी, जिसका खुलासा पुलिस ने किया था। उग्रवादियों ने अपने सदस्य देव सिंह मुंडा को योजना के तहत आजसू में शामिल भी करवाया था। हसन अंसारी ने कहा कि इससे पूर्व किसी राजनेता द्वारा सुदेश महतो की हत्या के लिए उग्रवादियों को 5 करोड़ रुपयों की सुपारी देने की बात सामने आ चुकी है। इस बात का खुलासा होना चाहिए कि बार -बार किस कारण से हत्या की साजिश रची जा रही है और इस साजिश के पीछे कौन है? आजसू नेताओं ने कहा कि 2005 में सिल्ली से पोगड़ा जाने के रास्ते में केन बम लगाने की साजिश सामने आई थी। 2013 में पीएलएफआई कमांडर जीदन गुड़यिा द्वारा किसी राजनेता से 5 करोड़ की सुपारी ली गई थी, जिसके बाद 27 एवं 28यू जनवरी 2014 को सिल्ली प्रतिभा महोत्सव में टाइम बम लगाकर हमले का प्रयास किया गया। इसमें विफल होने पर 26 फरवरी 2014 को जोन्हा में एक विवाह समारोह में हमले की योजना बनाई गई, जिसे पुलिस और ग्रामीणों की तत्परता से विफल किया गया। बाद में खुलासा हुआ कि एक उग्रवादी देव सिंह मुंडा को साजिश के तहत आजसू में शामिल भी करवाया गया था। आजसू नेताओं ने बताया कि पीएलएफआई द्वारा 2014 में पार्टी के केंद्रीय महासचिव स्व तिलेश्वर साहु की भी हत्या हजारीबाग जिले के बरही में कर दी गई थी। आजसू नेताओं ने डीजीपी से मांग की कि पूर्व मंत्री एवं पार्टी के प्रधान महासचिव रामचंद्र सहिस की भी सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिसे तुरंत वापस किया जाए।  

निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान

फुटवियर-लेदर नीति 2025 : निजी औद्योगिक पार्कों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान 25 से 100 एकड़ तक के पार्कों को 45 करोड़ तक मिलेगी आर्थिक सहायता  100 एकड़ से बड़े औद्योगिक पार्कों को 80 करोड़ रुपए तक मिलेगा प्रोत्साहन  औद्योगिक पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को मिलेंगे रोज़गार के अवसर  फुटवियर और लेदर सेक्टर को मिलेगी वैश्विक पहचान, यूपी बनेगा निवेश का नया केंद्र लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फुटवियर, लेदर और नॉन लेदर क्षेत्र विकास नीति-2025 के तहत सबसे ज़्यादा फोकस निजी औद्योगिक पार्कों पर किया है। इन पार्कों को निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट दी जाएगी। सरकार ने नीति में स्पष्ट किया है कि ऐसे पार्कों को विकसित करने वाले डेवलपर्स को 25 प्रतिशत पात्र पूंजी निवेश या अधिकतम राशि के रूप में वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह मदद पार्क के आकार के अनुसार होगी।  सरकार की मंशा, रोजगार के साथ मिले वैश्विक पहचान इस नीति के जरिये सरकार चाहती है कि राज्य में बड़े पैमाने पर निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना हो। ऐसे पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा। फुटवियर और लेदर सेक्टर को वैश्विक पहचान मिलेगी। यूपी निवेश का नया केंद्र बनेगा। यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से 5 साल तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत सभी नए प्रोजेक्ट, विस्तार या विविधीकरण करने वाले औद्योगिक उपक्रम वित्तीय प्रोत्साहनों के पात्र होंगे। पात्र औद्योगिक इकाइयों में कंपनी, साझेदारी, सोसाइटी, ट्रस्ट और निजी उपक्रम शामिल होंगे। कैसा होना चाहिए निजी औद्योगिक पार्क? ▪️न्यूनतम 25 एकड़ भूमि पर विकसित होना अनिवार्य। ▪️प्रत्येक पार्क में कम से कम 5 औद्योगिक इकाइयां होंगी। ▪️कोई भी इकाई 80% से अधिक भूमि का उपयोग नहीं कर सकेगी। ▪️कुल क्षेत्रफल का 25% हिस्सा हरियाली और सामान्य अवसंरचना के लिए सुरक्षित रखना होगा। ▪️25 एकड़ से 100 एकड़ तक के पार्कों का निर्माण 5 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  ▪️100 एकड़ एवं इससे अधिक के पार्कों का निर्माण 6 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी? ▪️25 से 100 एकड़ तक के पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹45 करोड़। ▪️100 एकड़ से बड़े पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹80 करोड़। ▪️सभी पार्क विकासकर्ताओं को 100% स्टाम्प शुल्क में छूट। किन मदों पर खर्च मान्य वित्तीय सहायता केवल बुनियादी ढांचा विकास पर खर्च की जा सकेगी। इसमें सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, ड्रेनेज, बाउंड्री वॉल, पावर सप्लाई, जल आपूर्ति, बैंकिंग सुविधाएं, वेयरहाउस, होटल, हॉस्पिटल, ट्रेड फेयर/डिस्प्ले सेंटर, ट्रांसपोर्ट सुविधा और स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट जैसे कार्य शामिल होंगे। किस पर नहीं मिलेगा लाभ? ▪️भूमि की खरीद लागत। ▪️ईंधन, वाहन, फर्नीचर, पुरानी मशीनरी। ▪️अन्य सेवा शुल्क।    

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग

पटना  राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय भोजपुर में Blockchain Technology विषय पर 5 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ,बिहार सरकार के अंतर्गत संचालित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज भोजपुर ,आरा  में  Blockchain Technology के विषय पर NIELIT Patna के सहयोग से निशुल्क 5 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम 20 Aug- 26 Aug  तक आयोजित की जा रही है । यह कार्यक्रम ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के द्वारा 4th सेमेस्टर के सीएसई एवं ईसीई के छात्रों के लिए आयोजित की जा रही है । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के स्किल डेवलपमेंट को बढ़ाना है ताकि प्लेसमेंट के लिए अपने को बेहतर बना सके.

खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन

बिहार राज्य फसल सहायता योजना: 31 अक्टूबर तक करें आवेदन  खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगा  20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगी सहायता राशि  नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इस योजना के लिए हैं पात्र   पटना राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत खरीफ 2025 के मौसम के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन 31 अक्टूबर, 2025 तक निःशुल्क किए जा सकते हैं। इस योजना के तहत फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए ही सहायता राशि दी जाएगी। रैयत, गैर-रैयत तथा आंशिक रूप से रैयत एवं गैर-रैयत श्रेणी के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इसके लिए पात्र हैं। योजना के तहत अधिसूचित फसलों से संबंधित जिलों के नाम विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इस योजना के बारे में बताते हुए सहकारिता विभाग के मंत्री डॉ॰ प्रेम कुमार ने कहा है कि बिहार राज्य फसल सहायता योजना बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी, पूर्णतः निःशुल्क पहल है, जिसकी मदद से प्राकृतिक आपदाओं में क्षतिग्रस्त फसलों के लिए बिना किसी प्रीमियम के किसानों को वित्तीय सहारा प्रदान किया जाता है। सहकारिता विभाग इसे और अधिक पारदर्शी एवं सरल बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है।  यह है आवेदन की प्रक्रिया कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसान सीधे योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा सत्यापित रैयत श्रेणी के किसान केवल रैयत श्रेणी अथवा आंशिक रूप से रैयत तथा गैर-रैयत श्रेणी में ही आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय किसानों को फसल और बुआई के रकबे की जानकारी देनी होगी। फसल कटाई के समय प्रयोग आधारित उपज दर के आंकड़ों के आधार पर योग्य ग्राम पंचायतों या अधिसूचित क्षेत्र इकाई का चयन किया जाएगा। इसके बाद चयनित पंचायतों के आवेदक किसानों को नियमानुसार दस्तावेज अपलोड करने होंगे। योजना के निर्देशों के अनुसार, चयनित ग्राम पंचायतों के आवेदक किसानों का सत्यापन होने के बाद उनके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। गलत या भ्रामक जानकारी देने पर आवेदन अस्वीकार कर दिए जाएंगे। इस संबंध में अधिक जानकारी सहकारिता विभाग की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मुलाकात, ग्रीन एनर्जी कोरिडोर पर मंथन

 जयपुर,  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय बिजली, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर भेंट कर राजस्थान में ऊर्जा और आवासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। शर्मा ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि राजस्थान ने नवीकरणीय ऊर्जा निकासी की योजना बनाई है। इस योजना में शामिल परियोजनाओं को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर- थर्ड में शामिल कर केंद्र की तरफ से अधिकतम अनुदान शीघ्र स्वीकृत किया जाए। श्री शर्मा ने कहा कि राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन हेतु नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं से ऊर्जा की निकासी हेतु सुदृढ़ पारेषण तंत्र की आवश्यकता है जिसके लिए अधिकतम केंद्रीय सहयोग आवश्यक है। जयपुर मेट्रो फेज- 2 की स्वीकृति का किया आग्रह मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान आग्रह किया कि जयपुर मेट्रो रेल फेज- 2 का संयुक्त उपक्रम (50ः50) के तहत निर्माण की विस्तृत कार्य योजना को जल्द स्वीकृति प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण प्रस्तावित परियोजना के लिए केंद्रीय अंशदान की स्वीकृति से जयपुर वासियों के लिए एक सुदृढ़, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा प्रदान करने के लक्ष्य को जल्द हासिल किया जा सकेगा। नॉन मिलियन प्लस शहरों के लिए केंद्रीय सहयोग पर चर्चा शर्मा ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत राजस्थान के नॉन मिलियन प्लस शहरों के नगरीय निकायों को दिए जाने वाले केंद्रीय सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन नगरीय निकायों को प्रदान किए जाने वाले वित्तीय सहयोग से गतिमान विकास  कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जा सकेगा।  मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक एवं वल्ड बैंक के संयुक्त वित्त पोषण के माध्यम से संचालित आर. यू. आई. डी. पी. पांचवें चरण की परियोजना तैयार कर भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत की है जिस पर केंद्रीय मंत्रालय का सकारात्मक सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस योजना के माध्यम से जलापूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी यातायात सुधार, बाढ़ प्रबंधन और विरासत संरक्षण सहित प्रदेश के शहरों के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को जल्द से जल्द पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि इस परियोजना की शीघ्र स्वीकृति से राज्य के चहुंमुखी विकास में गति आएगी तथा प्रदेश की जनता लाभान्वित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं जिनके सकारात्मक दोहन और प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए केंद्रीय सहयोग आवश्यक है। इस पर केंद्रीय मंत्री द्वारा राजस्थान को हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

धान चोरी कांड का पर्दाफाश: ट्रक समेत 4 आरोपी गिरफ्तार

कांकेर 305 बोरी (121 क्विंटल) धान को ट्रक सहित लेकर भागने के मामले में कांकेर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से धान की 305 बोरियां (कुल 121 क्विंटल) कीमत 2,66,200 रुपए एवं ट्रक क्रमांक CG-19 H-1050 कीमत 7,00,000 कुल जुमला 9,66,200 रुपए बरामद किया है। 16 अगस्त को प्रार्थी प्रदीप कुमार साहू (निवासी ग्राम पुसवाड़ा) ने धान खरीदी कर ट्रक (CG-19 H-1050) में 305 बोरी धान लोड कर राजिम रूद्र राइस मिल भेजा था। ड्राइवर रामप्रसाद निषाद धान सहित ट्रक लेकर फरार हो गया और फोन भी बंद कर दिया। इस मामले की शिकायत पर थाना कांकेर में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईके एलिसेला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश सिन्हा एवं एसडीओपी मोहसीन खान के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बिल्हा, अर्जुनी, धमतरी और बालोद में दबिश देकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में रामप्रसाद निषाद (बिल्हा), वेद कुमार साहू (अर्जुनी), नेमचंद साहू (श्यामतराई) एवं कामता प्रसाद (कोचवाही जिला बालोद) शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। पुलिस ने बताया कि मामला अजमानतीय है। आरोपियों को आज न्यायालय कांकेर में पेश किया गया। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक मनीष नागर सहित पुलिस टीम का अहम योगदान रहा।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की याद में रांची में तैयार होगा स्मारक स्थल

रांची झारखंड की राजधानी रांची में दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन का स्मृति स्थल बनेगा। इसके लिए भूमि चिन्हित करने का काम शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की याद में राजधानी रांची के हरमू रोड स्थित बाईपास में स्मृति स्थल का निर्माण किया जायेगा। इसके लिए नगर विकास विभाग ने झारखंड राज्य आवास बोर्ड से जमीन की मांग की है। आवास बोर्ड के तरफ से जमीन चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया गया है। बाईपास रोड में डीपीएस स्कूल के पास स्थित भुसूर मौजा में गुरुजी का स्मृति स्थल बनाने पर विचार तेज है क्योंकि इस मुख्य मार्ग पर स्थित भुसूर मौजा में कई एकड़ जमीनें खाली पड़ी हैं। बताया जा रहा है कि स्मृति स्थल परिसर में चारों तरफ पार्क और बेहतर लाइटिंग की जाएगी। यहां दिशोम गुरु की एक प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।  

पति की जिद: पत्नी से रोज 3-3 घंटे वर्कआउट कराता, पूरा न करने पर रखता भूखा

गाजियाबाद गाजियाबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति खिलाफ महिला थाने में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है. महिला का आरोप है कि उसका पति उसे बॉलीवुड एक्टर नोरा फतेही जैसी दिखने और बनने के लिए मजबूर करता था. इसके लिए वह रोज़ाना तीन-तीन घंटे एक्सरसाइज करने का दबाव डालता और जिस दिन वह इतना वर्कआउट नहीं करती तो उसे भूखा रखा जाता. मुझे तो फिल्मी हिरोइन जैसी पत्नी मिल सकती थी महिला ने बताया कि उसका पति, जो कि एक सरकारी फिजिकल एजुकेशन टीचर है, अक्सर उसे ताने मारता है. पति कहता कि उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई है क्योंकि उसे तो बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही जैसी सुंदर और आकर्षक पत्नी मिल सकती थी. शिकायत में कहा गया है कि पति न केवल इस तरह की बातें करता, बल्कि पत्नी से कहता कि वह रोज़ाना तीन घंटे वर्कआउट करे ताकि उसका शरीर बॉलीवुड एक्टर जैसा दिखे. जब महिला शारीरिक कमजोरी, थकान या स्वास्थ्य कारणों से वर्कआउट पूरा नहीं कर पाती, तो पति कई-कई दिनों तक उसे खाना तक नहीं देता. मार्च में हुई थी दोनों की शादी  शिकायतकर्ता महिला की शादी मार्च 2025 में गाजियाबाद में बड़े धूमधाम से हुई थी. उसने बताया कि शादी में गहने, लगभग 24 लाख रुपये की महिंद्रा स्कॉर्पियो, 10 लाख कैश और अन्य उपहार शामिल थे. कुल मिलाकर शादी में 76 लाख रुपये से अधिक का खर्च हुआ. इसके बावजूद, विवाह के कुछ ही समय बाद ससुराल पक्ष ने और अधिक दहेज की मांग शुरू कर दी. महिला का कहना है कि पति और उसके परिजन लगातार जमीन, कैश और महंगे सामान की मांग करते थे. जब वह इन मांगों को पूरा करने से इनकार करती, तो उसे ताने दिए जाते और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना सहनी पड़ती. अश्लील सामग्री और विरोध पर मारपीट पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति अक्सर दूसरी महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो देखता रहता था. जब उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और उसे धमकाया गया कि अगर उसने चुप्पी नहीं साधी तो उसे घर से निकाल दिया जाएगा. महिला ने अपनी शिकायत में पति के अलावा सास, ससुर और ननद पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उसने कहा कि ससुराल पक्ष लगातार दहेज की मांग करता और गाली-गलौज करता था. मायके से कपड़े, ओवन और गहने लाने के लिए उस पर दबाव बनाया जाता. गर्भवती होने पर भी प्रताड़ना शिकायत के अनुसार, विवाह के कुछ समय बाद महिला गर्भवती हुई. इस दौरान भी उसे परेशान किया गया. आरोप है कि ससुराल पक्ष ने उसे ऐसा भोजन दिया, जिससे उसकी सेहत बिगड़ गई. जुलाई 2025 में उसे अचानक अत्यधिक रक्तस्राव और असहनीय दर्द की स्थिति में अस्पताल ले जाना पड़ा. डॉक्टरों ने जांच में पाया कि लगातार मानसिक तनाव, शारीरिक प्रताड़ना और गलत खान-पान की वजह से उसका गर्भपात हो गया. महिला ने पुलिस को बताया कि इस समय भी पति और ससुरालवालों ने उसे कोई भावनात्मक या शारीरिक सहयोग नहीं दिया. मायके जाने के बाद भी नहीं मिला चैन गर्भपात और प्रताड़ना से टूटी महिला अपने मायके चली गई. आरोप है कि वहां रहने के दौरान भी पति, सास और ननद ने वीडियो कॉल कर उसे और उसके परिवार को गालियां दीं. साथ ही तलाक की धमकी भी दी. 26 जुलाई को जब महिला अपने माता-पिता के साथ ससुराल लौटी और बातचीत करने की कोशिश की, तो उसे घर के भीतर तक घुसने नहीं दिया गया. शिकायत में यह भी दर्ज है कि तीज-त्योहार पर मायके से जो गहने दिए गए थे, उन्हें वापस करने से ससुरालवालों ने साफ इंकार कर दिया. पुलिस से न्याय की गुहार महिला ने अपनी तहरीर में पति, सास, ससुर और ननद के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, गर्भपात कराने, धमकी और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता ने पुलिस से मांग की है कि इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की जाए ताकि उसे न्याय मिल सके. क्या कहती है पुलिस महिला थाने में दर्ज हुई शिकायत की जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है और पीड़िता के आरोपों की जांच सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर की जाएगी. साथ ही मेडिकल रिपोर्ट और अस्पताल के दस्तावेज भी सबूत के तौर पर जुटाए जा रहे हैं.