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MP में प्रशासनिक फेरबदल की गूंज, दो IAS अफसरों को पद से हटाया गया – जानिए वजह

भोपाल  मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव विदेश दौरे से लौट आए हैं। उनकी अनुपस्थिति में सिया चेयरमैन और दो आईएएस अधिकारियों का विवाद तूल पकड़ा था। कथित तौर पर एक आईएएस अफसर नवनीत मोहन कोठारी ने एमपी एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन का ऑफिस लॉक करवा दिया था। बाद में मामला ऊपर तक पहुंचा तो कुछ घंटे बाद ऑफिस को खुलवाया गया। बुधवार को आईएएस नवनीत मोहन कोठारी को पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटा दिया गया है। सिया चेयरमैन का आरोप था कि गलत तरीके से प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। साथ ही आईएएस आर उमा महेश्वरी को भी एप्को के कार्यकारी निदेशक पद से हटाया गया है। कहा जा रहा है कि सिया चेयरमैन की शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई है। गलत तरीके से प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का आरोप वहीं, सिया चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने दोनों अधिकारियों पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया था। साथ ही कहा था कि दोनों ने गलत तरीके से 237 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी एमपी सरकार से जवाब मांगा है। विवाद के बाद सरकार ने उठाया है बड़ा कदम दरअसल, सिया में लंबे समय से घमासान चल रहा था। आए दिन विवाद की खबरें आते रहती थीं। सरकार ने करीब दो महीने बाद बड़ा कदम उठाया है। अब आईएएस नवनीत मोहन कोठारी राज्यपाल के प्रमुख सचिव होंगे। इसके साथ ही आर उमा महेश्वरी को भी एप्को के कार्यकारी निदेशक और सिया की मेंबर सेक्रेटरी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अशोक वर्णवाल बने पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव वहीं, नवनीत मोहन कोठारी की जगह अब अशोक वर्णवाल पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव होंगे। उन्हें एप्को के महानिदेशक पद की भी अतिरिक्त जिम्मेवारी सौंपी गई है। दीपक आर्य को एप्को का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है। सिया के मेंबर सेक्रेटरी का अतिरिक्त प्रभार मिला है। खनन माफिया से है मिलीभगत इसके साथ ही सिया चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने दोनों अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि इनकी मिली भगत खनन माफियाओं से है। यह भी कहा था कि इन लोगों ने सिया की बैठकें नहीं होने दी। 237 प्रोजेक्ट्स की मंजूरी गलत तरीके से दी है। यहां से विवाद पकड़ा तूल गौरतलब है कि कोठारी और महेश्वरी के खिलाफ केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय में भी शिकायत की गई थी। मंत्रालय ने 27 जून को इस मामले पर ध्यान दिया। डीओपीटी की विजलेंस शाखा को जांच सौंपी गई। इस शिकायत के बाद कोठारी के निर्देश पर सिया चेयरमैन के ऑफिस में ताला लगा दिया गया था। जब मुख्यमंत्री मोहन यादव स्पेन दौरे पर थे, तब यह मामला उन तक पहुंचा। इसके बाद सीएम कार्यालय के एसीएस नीरज मंडलोई के कहने पर सिया चेयरमैन का ऑफिस खोला गया।

सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम

हरेली की सुग्घर परंपरा के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडप  रायपुर  छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।  हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।  प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।  मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।  मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।  कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।  मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है। संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :  हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी  नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।  हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।

बब्बर खालसा आतंकी की इंदौर में गिरफ्तारी, रॉकेट लॉन्चर अटैक का था मास्टरमाइंड

इंदौर दिल्ली पुलिस ने इंदौर से खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य को पकड़ा है। उस पर पंजाब के एक थाने पर रॉकेट लॉन्चर से हमला करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, पंजाब से भागकर वह पहले गुजरात पहुंचा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी अमित कौशिक ने बताया- आतंकवादी का नाम आकाशदीप सिंह उर्फ बाज है। वह अमृतसर में चनाचेन का रहने वाला है। उसने अप्रैल 2025 में पंजाब के गुरदासपुर के बटाला में किला लाल सिंह थाने पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया था। हमले की जिम्मेदारी बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े हैप्पी पासिया, मनू आगवन और गोपी नवांशहरिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ली थी। पुलिस ने दावा किया था कि ये हमला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और पंजाब में ग्रेनेड हमलों के आरोपी को मारने का बदला लेने के लिए किया गया था। आकाश सिंह इंदौर के हीरानगर थाना इलाके की निर्माणाधीन बिल्डिंग में क्रेन ऑपरेटर का काम कर रहा था। बुधवार को दिल्ली पुलिस यहां पहुंची और उसे गिरफ्तार कर साथ ले गई। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक अन्य मामला भी दिल्ली में ही दर्ज है। विदेश में बैठे आतंकी हैंडलर से संपर्क में था दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आकाशदीप बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में था। जो उसे सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए निर्देश दे रहा था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को आकाशदीप के गुजरात में होने का सुराग मिला था। वहां पतासाजी करने पर उसके इंदौर में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद इंस्पेक्टर अशोक कुमार भड़ाना के नेतृत्व में एक टीम इंदौर पहुंची थी। आकाशदीप से पूछताछ में आतंकी नेटवर्क, उनके विदेशी संपर्क और फंडिंग के खुलासे की उम्मीद है। डीसीपी कौशिक ने कहा- यह गिरफ्तारी बब्बर खालसा के भारत में फैले नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता है। हम आरोपी से पूछताछ कर अन्य लिंक और मॉड्यूल की जांच कर रहे हैं।

कुशीनगर एक्सप्रेस में बड़ा हादसा टला, धुएं के कारण रेलवे ट्रैक पर रुकीं कई गाड़ियां

बुरहानपुर बुरहानपुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्लेटफार्म के नजदीक कुशीनगर एक्सप्रेस पहुंची। बताया जा रहा है कि, मुंबई से गोरखपुर जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस के बी-3 कोच के चक्कों से धुआं निकलता दिखाई दिया था, जिसके चलते ट्रेन के साथ साथ प्लेटफार्म पर हड़कंप मच गया। बताया ये भी जा रहा है कि, रेलवे के एक कर्मचारी की तत्परता के चलते आज कुशीनगर एक्सप्रेस हादसे का शिकार होने से बची है। फिलहाल, तीन घंटे डिले होने के बाद एक्सप्रेस ट्रेन को उसके गनतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि, ट्रेन के कोच में लगे चक्के से सबसे पहले धुआं उठता स्टेशन पर तैनात रेलवे कर्मी (अपॉइंटमेंट) सीताराम पटेल ने देखा। उन्होंने न सिर्फ डिब्बे में सवार यात्रियों को सावधानी पूर्वक रिस्क में आने वाले हिस्से से दूर किया। साथ ही तत्काल प्रभाव से रेलवे प्रबंधन को सूचित किया। आनन-फानन में मौके पर पहुंचे रेलवे के सुरक्षा प्रबंधन के अधिकारियों ने आग बुझाने के प्रबंध शुरु किये। इसके बाद काफी देर आग बुझाने का प्रयास किया गया। आग बुझने के बाद पहले उससे हुई क्षति में सुधार करने का प्रयास किया, लेकिन करीब 3 घंटे बाद कोच को ही ट्रेन से अलग कर रवाना उसके गनतव्य क लिए रवाना किया गया। कर्मचारी की तत्पता से टला बड़ा हादसा रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार, कोच के हॉट एक्सल में स्पार्किंग होने से धुआं निकलने लगा था। रेलवे स्टेशन पर ही समय रहते उसे देखकर मामला ठीक कर लिया गया, वरना कोई हादसा हो सकता था। घटना के बाद मौके पर भुसावल से सीएनडब्लू की टीम समेत अन्य अफसरों का दल भी जांच के लिए बुरहानपुर पहुंच गया था। पीछे से आ रही कई गाड़ियां 3 घंटे रोकी गईं वहीं, सबसे पहले प्लेटफार्म प्रबंधन के कर्मचरियों ने अग्निशमन यंत्र से चक्के से निकल रहे धुएं को काबू किया। ट्रेन को यार्ड में खड़ा करवाया, जहां उसका ठीक से परीक्षण किया गया। जांच के बाद ट्रेन को खंडवा के लिए रवाना कर दिया गया है। बता दें कि, हादसे के चलते पीछे से आ रही गाड़ियों को भी भुसावल समेत अन्य स्टेशनों पर रोका गया था।

राजस्थान का लक्ष्य दूध उत्पादन में शीर्ष पर पहुंचना, यूपी को पीछे छोड़ने की तैयारी

जयपुर  देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में राजस्थान सिरमौर बनने में एक कदम पीछे हैं। वर्तमान में पहले नम्बर पर उत्तरप्रदेश है। मध्यप्रदेश व गुजरात तीसरे व चौथे नम्बर पर है। उत्पादन की दौड़ में शीर्ष पर पहुंचने के लिए राजस्थान में ग्राम स्तर पर प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2022-23 में राजस्थान बना था सिरमौर राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन के अनुसार देश में दूध उत्पादन में राजस्थान वर्ष 2022-23 में पहले स्थान पर आ गया था। तब राज्य ने 900 लाख लीटर उत्पादन में ही उत्तरप्रदेश को पीछे छोड़ दिया। उसके बाद उत्तरप्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़ गया। वर्तमान में राजस्थान में दूध का प्रतिदिन औसत उत्पादन उत्तरप्रदेश से 151 लाख लीटर कम है। राजस्थान में दूध उत्पादन व कारोबार राज्य में कुल उत्पादन- 912 लाख लीटर पशुपालकों के घरों में खपत (दूध-दही, छाछ-घी)- 500 लाख लीटर दूध बिक्री का कुल बाजार- 412 लाख लीटर दूध की खुले में बिक्री (हलवाई इत्यादि)- 312 लाख लीटर डेयरियों में बिक्री के लिए जा रहा- 100 लाख लीटर सरस डेयरी का दूध संकलन- 35 लाख लीटर अन्य डेयरियां खरीद रही दूध (अमूल, मदर, कोटा फ्रेश, पतजंलि इत्यादि)- 65 लाख लीटर। (प्रतिदिन औसत लाख लीटर) राज्य में 55 प्रतिशत घरों में हो रही खपत राज्य में कुल उत्पादन 912 लाख लीटर है, उसका 55 प्रतिशत यानी 500 लाख लीटर दूध पशुपालकों के घरों में ही खप रहा है। घरों में दूध पीने के अलावा दही, छाछ व घी बनाकर भी खपत हो रही है।

कांवड़ियों को ‘गुंडा’ कहने पर भड़के हिंदू संगठन, स्वामी प्रसाद मौर्य के घर के बाहर हंगामा

लखनऊ राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के कांवड़ियों पर दिए बयान पर बवाल मच गया है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने उनके बयान पर आपत्ति दर्ज कराई और उनके लखनऊ स्थित घर का "जलाभिषेक" करने की बात कही है। इसे देखते हुए बृहस्पतिवार को स्वामी प्रसाद के घर के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं। वहीं, सुबह विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कई नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के घर के बाहर हंगामा करने पहुंच गए। हालांकि, यहां पर पहले से ही पुलिसकर्मी तैनात हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने बयान दिया था कि भगवान शिव को इतने भोले हैं कि उन्हें भोलेबाबा कहा जाता है और ये कांवड़िये उनके नाम पर तोड़फोड़ और उपद्रव कर रहे हैं। ये कांवड़िये नहीं बल्कि सत्ता संरक्षित गुंडे हैं। सरकार को इनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे लोगों के पोस्टर लगाए जाएंगे। स्वामी ने कहा कि कांवड़ियों के कारनामों की सारी रिकॉर्डिंग है। उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन नहीं की जा रही है क्योंकि ये कांवड़िये नहीं सत्ता संरक्षित गुंडे हैं। उनके इस बयान पर बवाल मच गया है।   बता दें कि इसके पहले सीएम योगी बयान दिया था कि कांवड़ यात्रा को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। जो लोग भी उपद्रव कर रहे हैं उनके पोस्टर लगाए जाएंगे और यात्रा समाप्त होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

24 घंटे में 4.5 इंच बारिश का अनुमान, जबलपुर सहित 20 जिलों में रेड अलर्ट, मड़ीखेड़ा डैम से छोड़ा जा रहा पानी

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने की वजह से तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। आज जबलपुर समेत 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को विदिशा, सीहोर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, छतरपुर, दमोह, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, पन्ना, कटनी, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और उमरिया में भारी बारिश का दौर बना रहेगा। अगले 24 घंटे में इन जिलों में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। इससे पहले बुधवार को नर्मदापुरम के इटारसी में बाढ़ जैसे हालात रहे। भोपाल, इंदौर समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। अगले चार दिन तक भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग कि सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश में फिलहाल मानसून ट्रफ और दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव हैं। इस वजह से प्रदेश में बारिश का दौर शुरू हुआ है। अगले चार दिन तक कहीं भारी तो कहीं अति भारी बारिश का अलर्ट है। छिंदवाड़ा में 9 घंटे में 2.1 इंच बारिश बुधवार को छिंदवाड़ा में 9 घंटे में 2.1 इंच पानी गिर गया। वहीं, गुना में 1.8 इंच, नर्मदापुरम-ग्वालियर में 1.5 इंच, शाजापुर में 1.2 इंच और शिवपुरी में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। भोपाल, दतिया, इंदौर, शिवपुरी, उज्जैन, जबलपुर, छतरपुर के नौगांव, टीकमगढ़, बालाघाट के मलाजखंड, श्योपुर, भिंड, राजगढ़, आगर-मालवा समेत कई जिलों में बारिश का दौर चला। सीजन में अब तक औसतन 21.1 इंच बारिश हुई मध्यप्रदेश में इस सीजन में औसत 21.1 इंच बारिश हो चुकी है जबकि अब तक 14.1 इंच बारिश होनी थी। इस हिसाब से 7.3 इंच बारिश ज्यादा हो चुकी है, जो 53% अधिक है। 3 जिले- निवाड़ी, टीकमगढ़ और श्योपुर में तो कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 25% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। ग्वालियर समेत 5 जिले भी बेहतर स्थिति में हैं। यहां 80 से 95% तक बारिश हो चुकी है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे पीछे है। इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर और आगर-मालवा में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है।  मौसम विभाग ने आज जबलपुर समेत 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, विदिशा, सीहोर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, छतरपुर, दमोह, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, पन्ना, कटनी, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और उमरिया में भारी बारिश का दौर बना रहेगा। अगले 24 घंटे में इन जिलों में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में अभी मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव हैं। अगले चार दिन तक कहीं अति भारी तो कहीं भारी बारिश हो सकती है। पचमढ़ी में 3.4 इंच बारिश पिछले 24 घंटे के दौरान पचमढ़ी में 3.4 इंच पानी गिर गया। छिंदवाड़ा में 2.6 इंच, गुना में 2.3 इंच, बालाघाट के मलाजखंड में 2.1 इंच, नर्मदापुरम में 1.8 इंच, ग्वालियर में 1.5 इंच, श्योपुर में 1.1 इंच, मंडला में 1 इंच बारिश हुई। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, उमरिया, सिवनी, खजुराहो, जबलपुर, नौगांव, सागर, बैतूल, सीधी, रायसेन, दमोह, शिवपुरी में भी बारिश का दौर रहा। इस बार 7 इंच बारिश ज्यादा मध्यप्रदेश में इस मानसूनी सीजन में औसत 21.1 इंच बारिश हो चुकी है जबकि अब तक 14.1 इंच बारिश होनी थी। इस हिसाब से 7.3 इंच बारिश ज्यादा हो चुकी है, जो 53% अधिक है। 3 जिले- निवाड़ी, टीकमगढ़ और श्योपुर में तो कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 25% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। ग्वालियर समेत 5 जिले भी बेहतर स्थिति में हैं। यहां 80 से 95% तक बारिश हो चुकी है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे पीछे है। इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर और आगर-मालवा में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है। 10 साल में बारिश का ट्रेंड, पहले भोपाल के बारे में जानिए भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 में हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। साल 2024 में पूरे जुलाई महीने में 15.70 इंच बारिश हुई थी। भोपाल में जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है यानी हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है। अगले चार दिन ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, मध्यप्रदेश में मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव है। इसलिए बारिश हो रही है। अगले चार दिन तक मौसम ऐसा ही रहेगा। कहीं अति भारी तो कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार को भी 20 से ज्यादा जिलों में भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में गिरा पानी रायसेन, उज्जैन, डिंडौरी , नर्मदापुरम, सिवनी मालवा सहित कई जिलों में बुधवार को अच्छी बारिश हुई। उज्जैन में तेज पानी गिर। भोपाल में बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। इटारसी में बाजार और सरकारी रेस्ट हाउस में पानी भर गया। जमानी गांव का बिजली सब स्टेशन डूब गया। सिवनी मालवा तहसील के ग्रामीण इलाकों में खेत और रास्ते डूबे रहे। छिंदवाड़ा में 9 घंटे में 2.1 इंच पानी गिर गया। गुना में 1.8 इंच, नर्मदापुरम-ग्वालियर में 1.5 इंच, शाजापुर में 1.2 इंच और शिवपुरी में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। इन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश भारत में मानसून (Monsoon) की एंट्री 24 मई को हुई। मानसून ने सबसे पहले केरल पहुंचा। फिर कर्नाटक में दस्तक दी। तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, आंध्र प्रदेश होते हुए 16 जून को मानसून एमपी आया। 20 जून तक मानसून ने सभी जिलों को करव कर लिया। तब से सूबे में झमाझम बारिश हो रही है। अब तक 537 मिमी पानी बरस चुका है। यह सामान्य वर्षा 359 मिमी से 49 फीसदी ज्यादा है। निवाड़ी में सबसे ज्यादा 225 फीसदी पानी बरसा। छतरपुर में 177, मंडला 102, टीकमगढ़ 165, अशोकनगर 116, ग्वालियर 142, मुरैना 131, श्योपुर 191 और शिवपुरी में 141 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। 

उज्जैन में युवक को आया हार्टअटैक, डॉक्टरों ने 12 शॉक और CPR से किया जीवनदान

उज्जैन अगर समय रहते कोशिश की जाए, तो किसी की जान बचाई जा सकती है. सवाल केवल अपनी सतर्कता का है. उज्जैन जिले के नागदा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला, जहां हार्ट अटैक के बाद अस्पताल के स्टाफ की तत्परता ने युवक की जान बचा ली.  उज्जैन में नागदा के एक प्राइवेट अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक को अस्पताल की ओपीडी में चेकअप के दौरान अचानक हार्ट अटैक आ गया. युवक अस्पताल की कुर्सी पर बैठे-बैठे ही नीचे गिर पड़ा और उसकी धड़कनें बंद हो गईं. लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की तत्परता से उसकी जान बचाई जा सकी. यह पूरा घटनाक्रम अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय सनी गेहलोत निवासी ग्राम रूपेटा सीने में दर्द की शिकायत के बाद नागदा के चौधरी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर में चेकअप कराने आया था. डॉक्टर उसकी ब्लड प्रेशर जांच कर ही रहे थे कि तभी वह अचानक बेहोश होकर गिर गया. डॉक्टरों ने तुरंत जांच की तो उसकी पल्स और बीपी नहीं मिल रहा था. स्थिति को भांपते हुए डॉक्टरों ने तत्काल CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) और इलेक्ट्रिक शॉक थेरेपी देना शुरू किया. सीने में दर्द होने की शिकायत लिए 30 साल का एक युवक सनी गेहलोत नागदा के चौधरी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर पहुंचा था. डॉक्टर उनका ब्लड प्रेशर जांच रहे थे, तभी वह कुर्सी पर बैठे-बैठे अचेत होकर गिर पड़ा. जांच में न तो उसकी पल्स मिली और न ही ब्लड प्रेशर. तुरंत डॉक्टरों ने सीपीआर और इलेक्ट्रिक शॉक थेरेपी देने का निर्णय लिया और उपचार शुरू किया.  मरीज को तत्काल आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां उसे लगातार सीपीआर दी गई. डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और युवक की जान बच गई. यह पूरी घटना अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, जो अब वायरल हो रही है.  डॉ. सुनील चौधरी ने बताया कि करीब 40 मिनट तक सीपीआर और इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए, जिसके बाद युवक की धड़कन शुरू हुई. प्राथमिक उपचार के बाद उसे इंदौर रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है.यह घटना मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे की है.  जानकारी के अनुसार, ग्राम रूपेटा निवासी सनी गेहलोत सीने में दर्द की शिकायत लेकर चौधरी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर पहुंचा था. ओपीडी में डॉक्टर उसे देख रहे थे, तभी अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वह कुर्सी पर बैठे-बैठे गिर गया. इस दौरान उसे लगभग 12 बार शॉक और 40 मिनट तक सीपीआर दिया गया, जिससे उसकी जान बच सकी. 40 मिनट तक चला CPR, 12 बार दिए गए इलेक्ट्रिक शॉक डॉ. सुनील चौधरी ने बताया कि सनी को ICU में शिफ्ट कर 40 मिनट तक CPR दिया गया और 12 बार इलेक्ट्रिक शॉक थेरेपी दी गई. आखिरकार डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और युवक की धड़कनें फिर से चलने लगीं. प्रारंभिक इलाज के बाद युवक को इंदौर रेफर कर दिया गया है, जहां उसका इलाज जारी है. अस्पताल के OPD में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है. फुटेज में साफ दिखता है कि कैसे युवक कुर्सी से गिरा और कैसे डॉक्टरों ने बिना देरी किए CPR शुरू किया.