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तकनीकी शिक्षा को समयानुकूल बनाकर विद्यार्थियों को बेहतर कौशल एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना प्राथमिकता : मंत्रीपरमार

भोपाल  तकनीकी शिक्षा को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उन्नत तकनीकी सुविधाएं, बेहतर कौशल एवं रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय (JEC) को आधुनिक तकनीकी शिक्षा का सशक्त केंद्र बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों एवं अधोसंरचना का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्रीइन्दर सिंह परमार ने कही। मंत्रीपरमार ने बुधवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय की शासी निकाय की 29वीं बैठक एवं साधारण सभा की 15वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं संस्थागत उन्नयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। आधुनिक प्रयोगशालाओं और प्लेसमेंट सेल के लिए ₹12 करोड़ स्वीकृत बैठक में जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय के उन्नयन के लिए आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाओं के उपकरणों, विभिन्न विभागों के आवश्यक मरम्मत कार्यों तथा विद्यार्थियों के रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के आधुनिकीकरण हेतु कुल ₹12 करोड़ के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। मंत्रीपरमार ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रह सकती। विद्यार्थियों को उद्योग एवं रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं, व्यावहारिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और प्रभावी प्लेसमेंट व्यवस्था आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय में सुविधाओं के उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के निर्देश मंत्रीपरमार ने महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे महाविद्यालय में बिजली की खपत एवं व्यय को कम करने के साथ-साथ हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा। शैक्षणिक संस्थानों में ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम होगा। श्री परमार ने महाविद्यालय की उपलब्ध सुविधाओं के बेहतर उपयोग, शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार तथा विद्यार्थियों के लिए अनुकूल शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर मंत्रीपरमार ने कहा कि जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा और पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां महाविद्यालय की महत्वपूर्ण पूंजी हैं। महाविद्यालय को नई तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित करते हुए विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक एवं व्यावहारिक वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे वे राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। बैठक में जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक ने पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन, महाविद्यालय की प्रगति, शैक्षणिक गतिविधियों एवं प्रस्तावित कार्यों से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बैठक में पद्म भूषण डॉ. अजय चौधरी, आरजीपीवी के कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा, डॉ. संतोष गांधी, डॉ. मोहन सेन,प्रदीप मिश्रा सहित शासी निकाय एवं साधारण सभा के सदस्यगण तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर-उज्जैन संभागों के कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को वीसी से दिए दिशा-निर्देश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 17 सितंबर को इंदौर और उज्जैन में 2 बड़े आयोजन होने हैं। दोनों ही कार्यक्रमों की सभी तैयारियां बारीकी से माइक्रो प्लानिंग के साथ कर ली जाएं। व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से इंदौर और उज्जैन संभाग के जनप्रतिनिधयों, कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स से वीडियो कान्फ्रेंसिंग से संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में सेवा-संकल्प अभियान के शुभारंभ सहित अन्य कार्यक्रमों तथा इसी दिन शाम को उज्जैन में होने वाले दीपोत्सव एवं अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रमों के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वीसी में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सचिव डॉ. सुदाम खाड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। इंदौर और उज्जैन के कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स ने तैयारियों की जानकारी दी।

शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार का असर: साइकिल, स्कूटी और लैपटॉप जैसी योजनाओं से एमपी के स्कूलों में बढ़ा विद्यार्थियों का उत्साह।

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है।  स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमश्री एवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है। साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं।  ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है। व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया। वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।   

योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बिजली आपूर्ति सामान्य

लखनऊ प्रदेश में विद्युत उपलब्धता को सामान्य बनाए रखने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति की समीक्षा कर फीडबैक लिया और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जाएं और जहां से भी बिजली उपलब्ध हो, उसका उपयोग कर आपूर्ति सामान्य रखी जाए। अनपरा-डी, हरदुआगंज-ई और ओबरा-बी की यूनिट-10 का पुनः संचालन शुरू होने से प्रदेश की विद्युत उपलब्धता में औसतन करीब 1300 मेगावाट की वृद्धि हुई है। अगले एक-दो दिनों में एपीजीसी, सिंगरौली की यूनिट-2, टीआरएन एनर्जी की यूनिट-1, घाटमपुर की यूनिट-1 तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयां उपलब्ध हो जाने से लगभग 1,250 मेगावाट की अतिरिक्त वृद्धि हो जाएगी। वहीं केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के डायरेक्टर ऑपरेशन शिव एस. दास एवं उनकी टीम के साथ हुई बैठक में अगले पांच वर्षों तक गर्मी के महीनों में पावर बैंकिंग के माध्यम से 500-600 मेगावाट बिजली प्राप्त करने पर सहमति बनी है। वर्तमान में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से पावर बैंकिंग के जरिए औसतन करीब 2400 मेगावाट बिजली पीक आवर्स में प्राप्त की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि और जलभराव के कारण थर्मल पावर प्लांटों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा और बारा समेत कई परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे प्रदेश को औसतन 1500 से 2000 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद योगी सरकार उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने में जुटी है।

अम्बिकापुर से भारत गौरव ट्रेन ने शुरू की काशी-अयोध्या की यात्रा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने दिखाई हरी झंडी

रायपुर रामलला तीर्थ दर्शन (अयोध्या धाम) योजना के अंतर्गत आज सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालु भारत गौरव ट्रेन सेकाशी एवंअयोध्या धाम के लिए रवाना हुए। अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से दोपहर 2ः30 बजे रवाना हुई स्पेशल ट्रेन को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, सभापति नगर पालिक निगमहरमिंदर सिंह टिन्नी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला प्रशासन, आईआरसीटीसी तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को काशी में बाबा विश्वनाथ और अयोध्या धाम मेंरामलला के दर्शन का अवसर मिलेगा। दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ देश की समृद्ध धार्मिक एवं    सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के सेवा एवं समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं काकाशी औरअयोध्या धाम के लिए रवाना होना प्रसन्नता का विषय है। श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ औररामलला के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करेंगे। अयोध्या मेंराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया में प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी की सार्वजनिक सहभागिता के कारण श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या धाम की यह यात्रा विशेष भावनात्मक महत्व रखती है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को अपनी धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के अधिक से अधिक अवसर मिलें। अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन पर दिखा भक्ति और उत्साह ट्रेन की रवानगी के अवसर पर अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। परिजन और परिचित भी श्रद्धालुओं को विदाई देने स्टेशन पहुंचे। काशी और अयोध्या धाम के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में उमंग और प्रसन्नता दिखाई दी। हरी झंडी दिखाकर ट्रेन रवाना किए जाने के साथ ही स्टेशन परिसर में आस्था और उल्लास का वातावरण बन गया। आईआरसीटीसी के माध्यम से भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधा श्रद्धालुओं की सुविधाजनक एवं व्यवस्थित यात्रा के लिए आईआरसीटीसी के माध्यम से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को भोजन, आवास एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यात्रा प्रबंधन में आईआरसीटीसी तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की टीम समन्वय के साथ कार्य कर रही है, ताकि तीर्थयात्रियों को यात्रा के दौरान आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से मिल सकें। अयोध्या मेंरामलला के दर्शन का विशेष भाव सरगुजा संभाग के श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या धाम की यह यात्रा विशेष धार्मिक एवं भावनात्मक महत्व रखती है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या मेंराम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन किया था।रामलला के भव्य मंदिर में दर्शन का अवसर श्रद्धालुओं के लिए आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभव के रूप में सामने आ रहा है। काशी में बाबा विश्वनाथ और अयोध्या मेंरामलला के दर्शन के साथ श्रद्धालु देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ेंगे। 62 ट्रेनों से 52 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को तीर्थ दर्शन   रामलला तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को अयोध्या धाम की यात्रा का अवसर लगातार मिल रहा है। अब तक 62 ट्रेनों के माध्यम से 52 हजार से अधिक तीर्थयात्री इस योजना का लाभ लेकररामलला के दर्शन कर चुके हैं। अम्बिकापुर से रवाना हुई यह यात्रा इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं कोकाशी औरअयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्रदान कर रही है। तीर्थयात्रियों ने प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के प्रति जताया आभार  यात्रा पर रवाना एक श्रद्धालु ने कहा कि आज हमें बाबा विश्वनाथ औररामलला के दर्शन का सौभाग्य मिल रहा है, यह हमारे लिए अत्यंत खुशी और भावुकता का क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के प्रयासों से अयोध्या मेंरामलला का भव्य मंदिर साकार हुआ और आज हम उस पवित्र धाम में जाकर रामलला के दर्शन कर पा रहे हैं। इसके लिए हम प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय और राज्य सरकार का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने प्रदेश के श्रद्धालुओं को तीर्थ दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया। भारत गौरव ट्रेन के माध्यम से भोजन, आवास और चिकित्सा जैसी सुविधाओं के साथ यात्रा की व्यवस्था होने से हमारी खुशी और बढ़ गई है।  एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि काशी और अयोध्या हमारे लिए केवल तीर्थस्थल नहीं, बल्कि हमारी गहरी आस्था और श्रद्धा के केंद्र हैं।रामलला के भव्य मंदिर में दर्शन करने की हमारी वर्षों पुरानी इच्छा आज पूरी होने जा रही है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के प्रयासों से आज अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का दर्शन संभव हो सका है, इसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के प्रति भी हम आभार व्यक्त करते हैं, जिनके नेतृत्व में प्रदेश के श्रद्धालुओं कोरामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर मिल रहा है। परिवार और अन्य श्रद्धालुओं के साथ यह यात्रा हमारे जीवन की अविस्मरणीय यात्राओं में शामिल होगी।  सरगुजा से रवाना हुई यह तीर्थयात्रा धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक अनुभव और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर लेकर आगे बढ़ी है। भारत गौरव ट्रेन 19 सितंबर को वापस आएगी।

चावल के दाने और दूर्वा पर विराजमान होंगे भगवान गणेश: मात्र 6 मिलीमीटर आकार में उकेरे गए अष्टविनायक स्वरूप।

नीमच इन दिनों भारत सहित दुनिया भर में लोग गणेश उत्सव की आस्था में सराबोर हैं. इसी बीच नीमच के जावद कस्बे से कला और अध्यात्म का एक अनोखा संगम सामने आया है. स्थानीय माइक्रो आर्टिस्ट राजेश सोनी ने चांदी धातु से भगवान गणेश के अष्टविनायक स्वरूपों की बेहद सूक्ष्म और बारीक कलाकृति तैयार की है. पूरी कलाकृति का आकार मात्र 6 मिलीमीटर है और इसका कुल वजन केवल 70 मिलीग्राम दर्ज किया गया है. यह अष्टविनायक इतने सूक्ष्म हैं कि इन्हें चावल के एक दाने या भगवान गणेश को प्रिय दूर्वा घास के पत्ते पर आसानी से रखा जा सकता है. आठों स्वरूपों को शामिल किया गया आर्टिस्ट राजेश सोनी द्वारा बनाई गई इस सूक्ष्म कलाकृति में भगवान गणेश के प्रसिद्ध आठों स्वरूपों को शामिल किया गया है. इनमें श्री मयूरेश्वर, श्री सिद्धिविनायक, श्री बल्लालेश्वर, श्री वरदविनायक, श्री चिंतामणि, श्री गिरजात्मज, श्री विघ्नेश्वर और श्री महागणपति के रूप प्रदर्शित किए गए हैं. इन नन्हीं मूर्तियों की सुंदरता बढ़ाने के लिए शुद्ध हल्दी, कुंकुम और अक्षत का प्रयोग किया गया है. हरी-भरी दूर्वा पर रखी गई यह कलाकृति देखने में काफी आकर्षक लगती है. इस तरह जोड़े गए 2 से 3 मिलीमीटर के हिस्से ऐसी सूक्ष्म कलाकृति का निर्माण बेहद जटिल और धैर्य मांगने वाला काम होता है. आर्टिस्ट राजेश ने बताया, "अष्टविनायक के प्रत्येक स्वरूप को तैयार करने के लिए 2 से 3 मिलीमीटर के अलग-अलग हिस्से बनाए गए. इसमें भगवान गणेश का सिर, सूंड, उदर, हाथ, पैर और सूप जैसे कान अलग से तैयार किए गए हैं. इसके बाद गैस की बेहद हल्की आंच पर इन सभी बारीक हिस्सों को आपस में जोड़ा गया. इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती आंच के तापमान को संतुलित रखना था, क्योंकि थोड़ी सी भी तेज आंच चांदी के बेहद पतले तार को तुरंत पिघला सकती थी." सूक्ष्म कला के क्षेत्र  सूक्ष्म कला के क्षेत्र में राजेश सोनी का यह पहला प्रयोग नहीं है. इससे पहले भी वे अपनी बारीक कारीगरी का प्रदर्शन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं. वे दुनिया का सबसे छोटा सोने का अफीम डोडा, क्रिकेट वर्ल्ड कप की ट्रॉफी और सूक्ष्म ताजमहल जैसी कलाकृतियां बना चुके हैं. इन अद्भुत रचनाओं के लिए उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है. नीमच जिले में बनी यह नई कलाकृति इन दिनों लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बनी हुई है.  

पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में था मकसूद अली, ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया

लखनऊ  योगी सरकार की अपराध और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यूपी एटीएस ने अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) से जुड़े मॉड्यूल पर कार्रवाई करते हुए एक और आतंकी को गिरफ्तार किया है। यूपी एटीएस ने तमिलनाडु एटीएस के सहयोग से कोयंबटूर से मकसूद अली को गिरफ्तार किया। इससे पहले इसी मामले में मुख्य आतंकी मोहम्मद नबील को 12 सितंबर को आजमगढ़ से पकड़ा गया था।  लखनऊ लेकर आई यूपी एटीएस मकसूद अली (19) मूल रूप से सिद्धार्थनगर जिले के बांसी थाना क्षेत्र के मधवापुर गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह तमिलनाडु के कोयंबटूर में रह रहा था। यूपी एटीएस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ आई है, जहां संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बहकाने की कोशिश एटीएस के मुताबिक मूल रूप से यूपी के सिद्धार्थनगर का रहने वाला मकसूद अली सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर समूह बनाकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए युवाओं को जोड़ रहा था। उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर मुजाहिद बनने और इसके लिए धन व आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण लेने की योजना से जोड़ा जा रहा था। जांच में इस मॉड्यूल के तार देश के अन्य राज्यों के साथ विदेशी लोगों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है। पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के संपर्क में आने का दावा जांच के दौरान सामने आया कि मकसूद अली देश विरोधी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के हैंडलरों के संपर्क में आया था। एटीएस के मुताबिक, वह पाकिस्तान के हैंडलरों से संपर्क कर ‘हैकिंग टूल’ तैयार कर रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि पायथन, जावा, कोडिंग और हैकिंग की जानकारी उसने ऑनलाइन संसाधनों, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टेलीग्राम और विभिन्न व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए हासिल की। ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ के जरिए गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश मकसूद ने अपने मकसद को पूरा करने के लिए ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ नाम का एक सेक्योर एप्लीकेशन भी तैयार किया था। इसका मोटो था, ‘एक प्लेटफॉर्म, एक मकसद: यूनिटी, प्लान एंड एक्शन’। जांच में सामने आया कि इसी माध्यम से नबील, मकसूद और अन्य लोग आपस में जुड़े थे। मकसूद के व्हाट्सऐप ग्रुप्स की भी जानकारी सामने आई है। इनमें यूयू एंट्री गेट, यूनाइटेड उम्माह, गजवा-ए-हिंद, टीम ब्लैक हैट और लश्कर-ए-महंदी जैसे समूह शामिल मिले। इन ग्रुप्स में पाकिस्तानी नंबरों वाले संदिग्ध समेत अन्य पाकिस्तानी हैकर भी जुड़े थे। इन ग्रुप्स के जरिए कट्टरपंथी और जिहादी विचारधारा का प्रचार किया जा रहा था। एक्यूआईएस से जुड़े होने के सबूत मिले मकसूद, मोहम्मद नबील द्वारा बनाए गए ‘ला गालिब-इल्लल्लाह’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप से भी जुड़ा था। इस समूह में प्रतिबंधित आतंकी संगठन एक्यूआईएस से संबंधित साहित्य और बम बनाने से जुड़े वीडियो साझा किए जा रहे थे।

MP में बड़ा निवेश, सीमेंस एनर्जी इंडिया लगाएगी पॉवर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई

मध्यप्रदेश में स्थापित होगी सीमेंस एनर्जी इंडिया की बड़ी पॉवर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी को सौंपा 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र कंपनी ने दिया 2053 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव, 1500 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार भोपाल मध्यप्रदेश को ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड को उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) प्रदान किया। सीमेंस कंपनी द्वारा यहां एक बड़ी क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर के निर्माण के लिए लगभग 2,053 करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया है। कंपनी की यूनिट स्थापना से 1500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुइल्हर्मे मेंडोंका, मुख्य वित्तीय अधिकारी हरीश शेखर तथा हेड-रियल एस्टेट पुनीत बंसल को भूमि का आशय पत्र सौंपा। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी मौजूद थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि बैंक, विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना और निवेशक अनुकूल वातावरण के कारण देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार औद्योगिक निवेशों के त्वरित क्रियान्वयन तथा रोजगार सृजन के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्रस्तावित परियोजना मध्यप्रदेश को देश के उभरते ऊर्जा उपकरण एवं विद्युत अवसंरचना विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निवेश राज्य में उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक विकास तथा कुशल रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा। कंपनी के बारे में सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा संचरण, औद्योगिक विद्युतीकरण, ऊर्जा भंडारण तथा डीकार्बोनाइजेशन समाधानों से जुड़ी अग्रणी कंपनी है। कंपनी का दक्षिण एशिया क्षेत्र में व्यापक परिचालन है और यह वैश्विक स्तर की इंजीनियरिंग एवं अनुसंधान क्षमताओं के लिए जानी जाती है। कंपनी की इस प्रस्तावित इकाई में बड़ी क्षमता के पावर ट्रांसफार्मरों का निर्माण किया जाएगा, जो देश की बढ़ती विद्युत अवसंरचना आवश्यकताओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार तथा ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण में योगदान देंगे। परियोजना से क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स तथा सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। परियोजना के क्रियान्वयन के साथ विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा उज्जैन और आसपास के क्षेत्र ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होंगे। कंपनी का यह निवेश मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और ऊर्जा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को मिल रही नई दिशा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है। साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं। ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है। व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया। वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुआ पाठ्यपुस्तक वितरण शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार एक अप्रैल से निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध हो सके। वर्ष 2026-27 में पुस्तकों की प्रिंटिंग, बाइंडिंग एवं पेपर की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एसओपी निर्धारित की गई है। बोर्ड परीक्षा परिणामों में हुआ उल्लेखनीय सुधार विगत वर्षों में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हाई स्कूल स्तर पर वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार हायर सेकंडरी में वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा। स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां अब ऑनलाइन स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों को स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त करने में सुविधा के साथ ही प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिला है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का बढ़ा रूझान पीएमएवं सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय अधोसंरचना के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। विद्यालयों में उपलब्ध बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधुनिक अधोसंरचना के कारण विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ा है। बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन की वजह से इन विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष और कई मामलों में बेहतर विकल्प के … Read more

मेवाड़ राजपरिवार का शाही श्मशान ‘महासतिया’, जानें महाराणा अमर सिंह से जुड़ा इतिहास

उदयपुर मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की मां और अरविंद सिंह मेवाड़ की पत्नी विजयराज कुमारी के देवलोकगमन के बाद एक बार फिर उदयपुर का 'महासतिया' स्थल चर्चा में है। दरअसल, यहां विजयराज कुमारी के पार्थिव शरीर को पारंपरिक रीति-रिवाजों और राजशाही सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए इसी ऐतिहासिक स्थान पर लाया गया। मेवाड़ के इतिहास और गौरवशाली परंपराओं को अपने आंचल में समेटे 'महासतिया' केवल एक मोक्ष स्थल नहीं, बल्कि स्थापत्य कला और पूर्व राजघरानों की अमर गाथाओं का एक जीवंत प्रतीक है। जानिए कहां है उदयपुर का 'महासतिया' महासतिया, उदयपुर शहर के प्राचीन आहड़ (आयड़) क्षेत्र में प्रसिद्ध गंगू कुंड के पास स्थित है। यह स्थान सदियों से मेवाड़ राजपरिवार का शाही श्मशान स्थल (शाही समाधि स्थल) रहा है। यहां राजपरिवार के सदस्यों, महाराणाओं, महारानियों और राजकुमारों के अंतिम संस्कार के बाद उनकी याद में भव्य और कलात्मक छतरियों (स्मारकों) का निर्माण कराया जाता है। सबसे पहले महाराणा अमर सिंह प्रथम का यह हुआ था अंतिम संस्कार इतिहास के पन्नों को पलटें और विद्वानों से मिली जानकारी के अनुसार तो उदयपुर की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में महाराणाओं के समाधि स्थल अलग-अलग जगहों पर थे। लेकिन महासतिया में सबसे पहले महाराणा अमर सिंह प्रथम का अंतिम संस्कार किया गया था। महाराणा अमर सिंह प्रथम, महान योद्धा महाराणा प्रताप के पुत्र थे। वर्ष 1620 में जब महाराणा अमर सिंह प्रथम का निधन हुआ, तो उनका अंतिम संस्कार इसी स्थान पर किया गया। तभी से यह परंपरा लगातार चली आ रही है और राजपरिवार के सभी महाराणाओं और सदस्यों का दाह संस्कार इसी पावन और ऐतिहासिक परिसर में किया जाता है। हेरिटेज लुक और भव्य छतरियां है पहचान बताया जाता है कि महासतिया परिसर अपनी संगमरमर और बलुआ पत्थरों से बनी खूबसूरत छतरियों के लिए जाना जाता है। यहां लगभग 19 से अधिक महाराणाओं की भव्य छतरियों सहित सैकड़ों ऐतिहासिक छतरियां बनी हुई हैं, जो मेवाड़ की स्थापत्य शैली का अद्भुत नमूना पेश करती हैं। इनमें महाराणा अमर सिंह प्रथम, महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय, महाराणा जगत सिंह प्रथम और महाराणा भीम सिंह जैसे महान शासकों की छतरियां बेहद आकर्षक और विशाल हैं। मेवाड़ की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार दी गई अंतिम विदाई लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माता विजयराज कुमारी के निधन के बाद पूरी मर्यादा और मेवाड़ की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार महासतिया में ही उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। यह स्थान आज भी मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास, परंपरा और त्याग की मूक गवाही दे रहा है।