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भोपाल दौड़ेगा रातभर: रवीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की पहली ‘वेलोसिटी नाइट रन 2026’ 6 जून को

 रबिन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा भोपाल में 6 जून को पहली बार होगा वेलोसिटी नाइट रन 2026 का आयोजन  टीटी नगर स्टेडियम में दौड़ेगी फिटनेस, जुनून और ऊर्जा की नई रफ्तार भोपाल  रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा भोपाल में पहली बार “वेलोसिटी नाइट रन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह अनोखा नाइट रन 6 जून 2026 को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में आयोजित होगा, जिसमें शहर सहित प्रदेशभर के रनर्स, फिटनेस प्रेमी एवं युवा प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में फिटनेस, अनुशासन, स्वास्थ्य जागरूकता एवं खेल भावना को प्रोत्साहित करना है। रात्रिकालीन वातावरण में आयोजित होने वाला यह रन प्रतिभागियों को स्टेडियम की रोशनी के बीच ऊर्जा, उत्साह और रोमांच से भरपूर अनुभव प्रदान करेगा। प्रतियोगिता में 1 घंटे, 2 घंटे एवं 3 घंटे की विभिन्न श्रेणियां रखी गई हैं, जिनमें प्रतिभागी अपनी क्षमता के अनुसार हिस्सा ले सकेंगे। सभी प्रतिभागी रन शुरू होने के समय से 30 मिनट पूर्व रिपोर्टिंग करें। लेट एंट्री मान्य नहीं होगी। रन के दौरान प्रतिभागियों के लिए विभिन्न रंगों की ट्रैक लेन निर्धारित की गई हैं, ताकि प्रतियोगिता का संचालन व्यवस्थित एवं सुरक्षित रूप से किया जा सके। स्टेडियम परिसर में विशेष फिटनेस एवं रनिंग जोन भी तैयार किए जाएंगे। इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉ अदिति चतुर्वेदी वत्स ने कहा कि वेलोसिटी नाइट रन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने की एक प्रेरणादायी पहल है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर आत्मविश्वास एवं अनुशासन विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। वहीं रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ संगीता जौहरी ने कहा कि विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों एवं युवाओं के समग्र विकास के लिए खेल, स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहा है। वेलोसिटी नाइट रन 2026 युवाओं को फिटनेस के साथ सकारात्मक ऊर्जा एवं टीम स्पिरिट का अनुभव प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अधिक से अधिक युवाओं, खिलाड़ियों एवं फिटनेस प्रेमियों से इस विशेष नाइट रन में सहभागिता करने की अपील की है।

यात्री के साथ लापरवाही पड़ी भारी, सीट न देने पर रेलवे पर लगा हजारों का जुर्माना

पटना  भारतीय रेलवे में लाखों यात्री हर दिन रिजर्वेशन कर सफर करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि कंफर्म टिकट मिलने के बाद उनकी सीट सुरक्षित होगी। बिहार में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पर कंफर्म टिकट होने के बावजूद भी चार यात्रियों को रिजर्व्ड सीट नहीं मिली। उन्हें पूरा सफर खड़े होकर करना पड़ा। इस मामले के सामने आने के बाद यात्रियों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई थी और अब उपभोक्ता आयोग ने इस पर बड़ा फैसला दे दिया है। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में रेलवे की गलती मानी है और चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा है।  यह मामला उस समय सामने आया जब चार यात्री उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से बिहार के आरा के लिए LTT-पटना एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे। यात्रियों के पास पहले से कंफर्म रिजर्व टिकट था लेकिन ट्रेन में चढ़ने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी निर्धारित बर्थ पर दूसरे लोग बैठे हुए हैं। शिकायत में दावा किया गया कि सीटों पर रेलवे स्टाफ मौजूद था और कई बार अनुरोध के बावजूद सीट खाली नहीं कराई गई।  रेलवे अधिकारियों ने नहीं की मदद यात्रियों ने मौके पर अपनी समस्या हल कराने की कोशिश की। उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन, रेलवे सेवा पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें शिकायत संख्या भी जारी हुई, लेकिन यात्रा के दौरान उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। बाद में यात्रियों ने टीटीई से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें भीड़ का हवाला देकर किसी तरह यात्रा पूरी करने को कहा गया। नतीजा यह हुआ कि चारों यात्रियों को पूरा सफर खड़े होकर तय करना पड़ा।  कोर्ट ने क्या कहा? मामला भोजपुर कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन पहुंचा। सुनवाई के दौरान आयोग ने यात्रियों की ओर से पेश किए गए टिकट, शिकायत रिकॉर्ड और अन्य सबूतों पर विचार किया। आयोग ने माना कि यात्रियों ने वैध आरक्षण कराया था लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार रिजर्व्ड सीट नहीं दी गई। इसे रेलवे की सेवा में गंभीर कमी माना गया।  आयोग ने कहा कि यात्रियों को सिर्फ असुविधा नहीं हुई बल्कि उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ी। आयोग ने यह भी माना कि किसी यात्री को कंफर्म सीट के बावजूद खड़े होकर यात्रा करने के लिए मजबूर करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद रेलवे को चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा गया।  रेलवे को कितना भुगतान करना होगा? फैसले में रेलवे को निर्देश दिया गया कि यात्रियों की टिकट राशि 1,876.80 रुपये ब्याज सहित वापस की जाए। इसके अलावा यात्रियों को 20 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी दिया जाए। आयोग ने आदेश दिया कि यह भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए। तय समय में भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ सकता है।  सभी को पता होना चाहिए नियम भारत में रोजाना लाखों लोग रेल से सफर करते हैं। ज्यादातर लोगों को अपने अधिकारों के बारे में नहीं पता होता और उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। अगर आपका टिकट कंफर्म है और सीट रिजर्व है तो ट्रेन में आपको आरक्षित सीट मिलनी चाहिए। अगर आपकी सीट पर कोई और बैठा हो तो आप रेलवे कर्मचारियों से कहकर सीट खाली करवा सकते हैं। अगर रेलवे मदद नहीं करता है तो कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन या कंज्यूमर कोर्ट में अपील कर सकते हैं।   

मिलेट से बढ़ी आय, किसानों के जीवन में आई खुशहाली श्री अन्न की खेती बन रही लाभ का नया माध्यम

रायपुर  छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं और उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं । कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है। शासन की पहल से बढ़ा श्री अन्न का महत्व         केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि उन्नति योजना से मिली नई दिशा          जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है। दिलीप मरकाम ने कोदो-कुटकी से कमाए डेढ़ लाख रुपये          ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं। हलदर हेमला की मेहनत भी लाई रंग          ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है। किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही योजना         दिलीप मरकाम और हलदर हेमला का मानना है कि कृषक उन्नति योजना मोटे अनाज उत्पादक किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। योजना के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन मिलने से श्री अन्न की खेती का रकबा बढ़ रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। स्वास्थ्य और समृद्धि का संगम है श्री अन्न कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन मुक्त होने के कारण आसानी से पच जाते हैं तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। सफलता की सीख      पारंपरिक फसलों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं और मेहनत के साथ श्री अन्न की खेती ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।

मरकंटक “चचाई” थर्मल पॉवर स्टेशन ने 609 दिनों तक बिजली उत्पादन का बनाया रिकार्ड

भोपाल  राज्य क्षेत्र के थर्मल पॉवर स्टेशनों में एक नया इतिहास रचते हुए, मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS) की 210 मेगावॉट (MW) क्षमता वाली यूनिट नंबर 5 ने लगातार 609 दिनों तक निर्बाध रूप से क्रियाशील रहकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह शानदार सफर 1 अक्टूबर 2024 से शुरू होकर 2 जून 2026 तक करीब पौने दो साल तक बिना रुके जारी रहा, जो राज्य क्षेत्र (State Sector) की किसी भी थर्मल यूनिट के लिए अब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। दो जून को अचानक आई एक तकनीकी विद्युत खराबी (Electric Fault) के कारण इस यूनिट को रोकना पड़ा, जिससे यह अद्भुत सफर थम गया। इस ऐतिहासिक परिचालन अवधि के दौरान प्लांट के कार्यकुशलता सूचकांक (Performance Indices) भी बेहद उत्कृष्ट रहे, जो यूनिट की बेहतरीन तकनीकी देखरेख और परिचालन क्षमता को दर्शाते हैं। मजबूत परफॉर्मेंस: आंकड़ों में देखें यूनिट का दमदार प्रदर्शन इस मैराथन रन के दौरान प्लांट के कार्यकुशलता सूचकांक (Performance Indices) बेहद बेमिसाल रहे। PAF (प्लांट उपलब्धता) 98.82%, PLF (प्लांट लोड फैक्टर) 95.61% और APC (सहायक बिजली खपत) 9.29% रही। "यह टीम वर्क की ऐतिहासिक जीत" : ऊर्जा मंत्री  तोमर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने पॉवर स्टेशन के सभी अभियंताओं, तकनीकी स्टाफ और कर्मचारियों को इस ऐतिहासिक सफलता की बधाई दी है। प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि लगातार 609 दिनों तक बिना किसी ट्रिपिंग के यूनिट का चलना हमारे उत्कृष्ट रखरखाव, कुशल प्रबंधन और ग्राउंड स्टाफ की दिन-रात की मेहनत का परिणाम है। चचाई थर्मल पॉवर स्टेशन ने राज्य क्षेत्र में जो बेंचमार्क सेट किया है, उस पर पूरे प्रदेश को गर्व है।  

सुकमा के किसान पुत्र ने रचा इतिहास JEE एडवांस में 634वीं रैंक हासिल कर बारसे रोशन ने बढ़ाया जिले का गौरव

रायपुर  सुदूर वनांचल और नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा के एक किसान परिवार के बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल कर पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। झापरा क्षेत्र के निवासी बारसे रोशन ने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE एडवांस 2026 में कैटेगरी रैंक 634 प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने      बारसे रोशन एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रोशन ने पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया और कठिन परिश्रम के बल पर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। जिला प्रशासन बना मजबूत सहारा      रोशन की उपलब्धि पर जिला प्रशासन ने उनका सम्मान किया। तुंगल डेम में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर  अमित कुमार ने शाल एवं फल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने घोषणा की कि रोशन की उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक संसाधनों की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। जिला प्रशासन उनकी आगे की पढ़ाई की पूरी फीस का वहन करेगा, जिससे वे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में बिना किसी आर्थिक चिंता के अध्ययन कर सकें। ‘क्षितिज कोचिंग इंस्टीट्यूट’ से मिला सफलता का मार्ग          सुकमा जिले में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा ‘क्षितिज कोचिंग इंस्टीट्यूट’ का संचालन किया जा रहा है। कलेक्टर  अमित कुमार और मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल ग्रामीण और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए नई उम्मीद बन रही है। जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन तथा नोडल अधिकारी के सतत पर्यवेक्षण में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। शिक्षकों और टीम के समर्पण का परिणाम          बारसे रोशन की सफलता के पीछे संस्थान के शिक्षकों और प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्थान के प्रबंधक  सूरज सिंह ने विद्यार्थियों के लिए अनुशासित और प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार किया। वहीं, शिक्षकों ने विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ परीक्षा रणनीति और निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके प्रयासों ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाया और सफलता की राह आसान बनाई। शासन की शिक्षा उन्मुख पहल का सकारात्मक परिणाम           यह सफलता दर्शाती है कि शासन और जिला प्रशासन की शिक्षा केंद्रित योजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग जैसी सुविधाएं ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद कर रही हैं। सुकमा के युवाओं के लिए प्रेरणा बने बारसे रोशन  बारसे रोशन की उपलब्धि आज सुकमा के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वन एवं प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप ने भी रोशन को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। जिला प्रशासन ने विश्वास जताया है कि आने वाले वर्षों में सुकमा से ऐसे अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी निकलेंगे, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

काशी के आसमान में वायु सेना का पराक्रम, गंगा तट पर दिखेगा भव्य त्रिशूल फॉर्मेशन

वाराणसी  भारतीय वायु सेना (IAF) इस साल अपना 94वां स्थापना दिवस बड़े ही भव्य अंदाज में मनाने जा रही है. इस बार की सबसे खास बात यह है कि एयर फोर्स डे का फ्लाईपास्ट पहली बार पवित्र नदी गंगा के ऊपर वाराणसी में आयोजित किया जाएगा. काशी विश्वनाथ मंदिर के आसमान में वायु सेना के जेट विमानों की उड़ान देश के लिए एक यादगार क्षण होने वाला है।  वाराणसी भारत की आध्यात्मिक राजधानी मानी जाती है. गंगा नदी और काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर वायु सेना का फ्लाईपास्ट पहली बार होने जा रहा है. अक्टूबर में होने वाले इस कार्यक्रम की तारीख जल्द ही अंतिम रूप से तय की जाएगी. यह आयोजन IAF की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में होगा।  इससे पहले एयर फोर्स डे के मुख्य समारोह में औपचारिक परेड गाजियाबाद के हिंडन एयर फोर्स स्टेशन में 8 अक्टूबर को होगी. वहीं दूसरा चरण वाराणसी में फ्लाईपास्ट के रूप में मनाया जाएगा. इस बार वायु सेना का प्रयास है कि उत्सव को देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर से बाहर ले जाकर आम जनता तक पहुंचाया जाए।  फ्लाईपास्ट में क्या-क्या शामिल होगा? वाराणसी के आसमान में वायु सेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों के विभिन्न फॉर्मेशन्स दिखाई देंगे. फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स के साथ-साथ भारी परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर भी शामिल होंगे।  एयरबोर्न पैराट्रूपर्स द्वारा प्रेसिजन पैराशूट जंप का प्रदर्शन भी हो सकता है. वायु सेना अपनी पूरी परिचालन क्षमता को प्रदर्शित करेगी. इस प्रदर्शनी का मकसद सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि आम नागरिकों को वायु सेना से जोड़ना और उनमें देशभक्ति की भावना जगाना भी है।  पिछले वर्षों की परंपरा और बदलाव पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायु सेना ने अपनी वर्षगांठ के फ्लाईपास्ट को देश के विभिन्न शहरों में आयोजित किया है. चंडीगढ़, प्रयागराज, भोपाल और गुवाहाटी जैसे शहरों में यह कार्यक्रम हो चुका है. इसका उद्देश्य है कि देश के कोने-कोने के लोग वायु सेना की ताकत और प्रोफेशनरिज्म को करीब से देख सकें।  वाराणसी का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शहर सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद खास है. गंगा के ऊपर विमानों का उड़ना आध्यात्मिकता और आधुनिकता के सुंदर संगम का प्रतीक बन जाएगा।  एयर फोर्स डे का महत्व भारतीय वायु सेना का स्थापना दिवस हर साल 8 अक्टूबर को मनाया जाता है. यह दिन 1932 में IAF की स्थापना की याद दिलाता है. शुरू में रॉयल इंडियन एयर फोर्स के नाम से शुरू हुई यह सेना आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है।  इस साल 94वें स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाला फ्लाईपास्ट न सिर्फ वायु सेना की बढ़ती ताकत को दिखाएगा बल्कि हाल के वर्षों में की गई आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण की उपलब्धियों को भी उजागर करेगा।  वाराणसी में होने वाला यह फ्लाईपास्ट आम जनता के लिए एक दुर्लभ अवसर होगा. हजारों लोग गंगा घाटों और आसपास के इलाकों में जमा होकर आसमान में वायु सेना की शानदार उड़ान देख सकेंगे. वायु सेना का प्रयास है कि इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं में रक्षा बलों के प्रति आकर्षण बढ़े और वे करियर के रूप में वायु सेना को चुनें।  अभी अंतिम मंजूरी, तारीख और पूरा कार्यक्रम जल्द ही घोषित किया जाएगा. लेकिन यह तय है कि इस साल का एयर फोर्स डे वाराणसी के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।  गंगा के पावन किनारे पर पहली बार होने वाला IAF का फ्लाईपास्ट भारतीय वायु सेना की आधुनिक क्षमताओं और देश की सांस्कृतिक विरासत के बीच एक सुंदर सेतु बनेगा. यह कार्यक्रम न सिर्फ वायुयोद्धाओं की निष्ठा और कौशल को सलाम करेगा बल्कि पूरे देश को एकजुट भी करेगा। 

वरिष्ठजनों के सम्मान और सुरक्षा का संदेश, 15 जून को विशेष जागरूकता दिवस का आयोजन

भोपाल वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों, गरिमा, सुरक्षा एवं कल्याण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में 15 जून को अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठजन दुर्व्यवहार रोकथाम जागरूकता दिवस मनाया जाएगा। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण संचालनालय ने इस संबंध में सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। दिवस के अवसर पर वृद्धाश्रमों, डे-केयर केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों तथा अन्य उपयुक्त स्थलों पर विविध जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें संगोष्ठी, परिचर्चा, जागरूकता रैली, प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण तथा वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह शामिल हैं। युवाओं और वरिष्ठजनों के मध्य संवाद को बढ़ावा देने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रमों के माध्यम से वृद्धजनों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता, पारिवारिक उत्तरदायित्व और सामाजिक सहभागिता का संदेश व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए। इसके लिए स्थानीय समाचार-पत्रों, सामुदायिक रेडियो, सोशल मीडिया तथा अन्य प्रचार माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण एवं कल्याण के लिए लागू अधिनियमों और नियमों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा वृद्धजनों के लिए सम्मानजनक एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाता है।  

वित्त विभाग का बड़ा फैसला: पांच विभागों की सेवा पुस्तिकाओं का होगा परीक्षण

भोपाल  प्रदेश में 38 हजार कार्यभारित तथा आकस्मिकता से वेतन पाने वाले कर्मचारियों समेत अन्य इन विभागों में काम कर रहे अन्य अधिकारी कर्मचारी के रिटायरमेंट के पहले उनके संपूर्ण सेवाकाल के सर्विस रिकार्ड और वेतन निर्धारण की जांच की जाएगी। अगर किसी को नियम विरुद्ध फायदा पहुंचाया गया है तो ऐसे मामलों में कार्रवाई होगी। ऐसे कर्मचारी प्रदेश के लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग में सर्वाधिक हैं जिनकी जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। राज्य सरकार के वित्त विभाग ने इन विभागों में लंबित वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास और स्कूल शिक्षा विभाग में वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के लंबित प्रकरणों का शीघ्र परीक्षण कर उनका निराकरण सुनिश्चित करें। इन 5 विभागों में चलेगा विशेष अभियान सरकार ने पाया है कि सबसे ज्यादा पेंडिंग मामले और गड़बड़ियां कुछ खास विभागों में हैं। इसलिए इस विशेष अभियान को मुख्य रूप से पांच बड़े विभागों में चलाया जाएगा।     लोक निर्माण विभाग      लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग     जल संसाधन विभाग     नर्मदा घाटी विकास विभाग     स्कूल शिक्षा विभाग लंबित मामलों का तुरंत निपटारा कई बार ऐसा होता है कि कर्मचारियों को समय पर उनका सही वेतन नहीं मिल पाता है। साथ ही प्रमोशन या रिटायरमेंट का लाभ नहीं मिल पाता है। वित्त विभाग ने माना कि वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसे से ज्यादा विवाद होता है। इन विवादों की वजह से कर्मचारियों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं दिक्कतों को दूर करने के लिए वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि वे कर्मचारियों के इन अटके हुए मामलों की तुरंत जांच करें और उनका जल्द से जल्द निपटारा करें। अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तय समय के अंदर कार्रवाई नहीं की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही उन पर एक्शन हो सकता है। विभागों को इस अभियान की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी वित्त विभाग को भेजनी होगी। 6 महीने में ठीक करनी होंगी सर्विस बुक वित्त विभाग ने सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें साफ कहा गया है कि वे कर्मचारियों की सर्विस बुक को अच्छे से चेक करें। उसमें कोई गलती मिलती है तो उसे तुरंत सुधारा जाए।  किसी मामले में पहले से मंजूरी लेने की जरूरत हो तो वह प्रक्रिया भी पूरी की जाए। इस पूरे काम को पूरा करने के लिए सरकार ने 6 महीने का समय तय किया है। आदेश में कई बातों का जिक्र आदेश में कहा गया है कि कई मामलों में वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित विवादों के कारण कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों का समाधान किया जाएगा। विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट भी वित्त विभाग को भेजनी होगी। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। सेवा पुस्तिका की जांच कर गलतियां सुधारें वित्त विभाग ने संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि वे सेवा पुस्तिकाओं का परीक्षण कर गलतियों का सुधार करें और आवश्यक होने पर पूर्व अनुमोदन प्राप्त कर कार्रवाई करें। साथ ही आगामी छह माह के भीतर सेवा-अभिलेखों और वेतन निर्धारण संबंधी लंबित मामलों का निराकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विशेष अभियान के अंतर्गत सेवानिवृत्त एवं सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन निर्धारण, समयमान, क्रमोन्नति वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़े मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। .

यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, इंदौर मेट्रो का दायरा बढ़ा; रेडिसन चौराहा होगा नया स्टेशन

इंदौर इंदौर में लंबे इंतजार के बाद अब मेट्रो का सफर बढ़ेगा और यात्री भी। अभी तक मेट्रो ट्रेन सात किलोमीटर तक चलती थी, लेकिन अब 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन होगा। मेट्रो को हरी झंडी केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर दिखाएंगे। दो माह पहले मेट्रो के कमर्शियल रन की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन संचालन अब शुरू होगा।  एक साल के इंतजार के बाद अब मेट्रो सुपर कॉरिडोर से आगे बढ़कर रेडिसन चौराहे पर यात्रियों के साथ पहुंचेगी। इंदौर में 18 जून से सुपर कॉरिडोर के गांधी नगर स्टेशन से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। फिलहाल मेट्रो ट्रेन के किराए की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अधिकतम 80 रुपये तक किराया होगा। बढ़ेगी यात्री संख्या अभी मेट्रो जिस हिस्से में चलती है, वह आबादी क्षेत्र नहीं है। इस कारण मेट्रो को काफी कम यात्री मिलते थे, लेकिन गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का संचालन होने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि सुपर कॉरिडोर की आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसका ज्यादा उपयोग करेंगे। इसके अलावा एयरपोर्ट तक जाने वाले यात्री भी इसका उपयोग कर सकेंगे, हालांकि उन्हें गांधी नगर से फिर ऑटो रिक्शा या अन्य विकल्प अपनाकर एयरपोर्ट तक जाना होगा।गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्पीड में मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार हो चुका है। 80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन 17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 20 मिनट का समय लगेगा। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल मेट्रो का संचालन सात किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये है। 17 किलोमीटर तक के संचालन में अधिकतम किराया 80 रुपये तक होगा। जब 30 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो ट्रैक का काम पूरा होगा, तो हर 30 मिनट के अंतराल पर मेट्रो ट्रेन चलेगी। शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।  

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम: सिंहस्थ से पहले शुरू होगी MP की पहली मेडिसिटी, मंडला-राजगढ़ मेडिकल कॉलेज भी अगले साल से

उज्जैन  उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले मेडिकल कालेज प्रारंभ करने की तैयारी है। सरकार इसे प्रदेश की पहली मेडिसिटी के तौर पर विकसित कर रही है। विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी एक मेडिसिटी बनाने की घोषणा की थी। अगला विधानसभा चुनाव 2028 के अंत में संभावित हैं, इसके पहले सरकार मेडिसिटी प्रारंभ करने की तैयारी कर रही है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए अगले वर्ष नेशनल मेडिकल कमीशन को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) द्वारा प्रस्ताव भेजा जाएगा। यहां एमबीबीएस 150 सीटें होंगी। उज्जैन के साथ मंडला और राजगढ़ में भी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की तैयारी चल रही है। वर्ष 2026 में बुधनी, दमोह और छतरपुर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के लिए डीएमई की तरफ से एनएमसी को आवेदन किया जा चुका है। एमबीबीएस सीटें 3450 पहुंच जाएंगी दो वर्ष में छह नए कालेज खुलने से प्रदेश में 25 शासकीय कॉलेज हो जाएंगे, जिनमें एमबीबीएस की कम से कम 3450 सीटें हो जाएंगी। इसी तरह से पीपीपी माडल सहित 13 नए निजी मेडिकल कॉलेज भी खुलने की स्थिति में हैं। इनमें 1300 सीटें होंगी। इस प्रकार शासकीय और निजी मिलाकर 1900 सीटें बढ़ जाएंगी। अभी प्रदेश के 19 शासकीय कालेजों में एमबीबीएस की 2850 और 14 निजी कॉलेजों में 2700 सीटें मिलाकर कुल 5550 सीटें हैं। 2028 तक यह 7450 हो जाएंगी। सब कुछ योजना के अनुरूप चला तो वर्ष 2033 तक हर साल 7450 डाक्टर तैयार होने लगेंगे। क्या-क्या सुविधा रहेगी उज्जैन की मेडिसिटी में     एमबीबीएस की 150 सीट वाला अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज होगा। इससे संबद्ध 550 बिस्तरों का अस्पताल होगा, जिसमें सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं भी होंगी।     ऐसा डायग्नोस्टिक सेंटर बनाया जा रहा है जिसमें सभी पैथोलाजिकल, माइक्रोबायोलॉजिकल, रेडियोडायग्नोसिस की जांचें एक जगह पर हो सकेंगी।     एकीकृत स्वास्थ्य के अंतर्गत आयुष की पैथियों में उपचार की सुविधा और वेलनेस सेंटर बनेंगे। वेलनेस सेंटर बनाने का उद्देश्य बीमारी से बचाव (प्रिवेंशन) को लेकर है, जिसमें योग-ध्यान भी कराया जाएगा।     मेडिसिटी के माध्यम से स्वास्थ्य पर्यटन को आकर्षित करने की योजना है।     डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों के लिए आवास की सुविधा भी रहेगी। सीएम केयर योजना : वर्ष 2028 से मिलने लगेगा लाभ सरकार ने इसी वर्ष सीएम केयर योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, जिसे कैबिनेट से स्वीकृति मिल गई है। इसके अंतर्गत पांच वर्ष में 3628 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। योजना के अंतर्गत सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं पर फोकस है। कैंसर में मेडिकल आंकोलॉजी, सर्जिकल आंकोलॉजी, रेडिएशन आंकोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, आर्गन ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से विकसित की जानी हैं। साथ ही सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं का प्रदेशस्तरीय अस्पताल भी भोपाल या उज्जैन में बनाने पर विचार चल रहा है। बता दें, लगभग 50 प्रतिशत कॉलेजों में अभी भी यह सेवाएं मिल रही हैं, पर कुछ जगह अलग से विभाग तक नहीं हैं। संसाधनों की बहुत अधिक कमी है। सीएम केयर में आने के बाद संबंधित कॉलेजों में अलग सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक बनेगा। अलग से बजट होगा। दूसरा बड़ा लाभ यह होगा कि सुपरस्पेशियलिटी सीटें भी बढ़ जाएंगी।