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शंभू ब्लास्ट के बाद रेलवे सुरक्षा पर हाई अलर्ट, संवेदनशील इलाकों में बढ़ी पेट्रोलिंग

 चंडीगढ़  पंजाब में रेलवे ट्रैक आतंकियों के निशाने पर है। सोमवार रात पटियाला के शंभू में डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) के ट्रैक पर हुए ब्लास्ट ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़े पैटर्न के तौर पर देख रही हैं, जिसमें रेलवे नेटवर्क को लगातार निशाना बनाने की कोशिशें सामने आ रही हैं। इससे पहले रेलवे ट्रैक के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरे कैमरे लगाए जाने के मामले सामने आए थे। पांच कैमरे पंजाब में लगे थे। एक पठानकोट व एक कपूरथला में बरामद किया था, लेकिन जालंधर मोगा व पटियाला में लगे तीन कैमरों का पता नहीं। जांच में पता चला था कि इनका इस्तेमाल जासूसी और ट्रैक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। हाल ही में लखनऊ एटीएस (एटीएस) की ओर से भी एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया गया, जो अलग-अलग इलाकों में रेलवे ट्रैक के आसपास आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बड़े हमलों की तैयारी का हिस्सा हो सकती हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान कई घटनाएं आई सामने पंजाब में पिछले दो वर्षों के दौरान भी कई घटनाएं सामने आई हैं। 23 जनवरी 2026 में सरहिंद के पास डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ था, जिसमें करीब 60 फीट पटरी क्षतिग्रस्त हुई थी। वहीं, 2024 और 2025 में कई बार रेलवे ट्रैक पर लोहे की सरिया या अन्य वस्तुएं रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिशें हुईं थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक, खासकर मालगाड़ियों के रूट, देश की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। कोयला, खाद, अनाज और औद्योगिक सामान की ढुलाई इन्हीं रास्तों से होती है। ऐसे में इनको नुकसान पहुंचाने की कोशिश सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ी फिलहाल रेलवे, आरपीएफ और राज्य पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। निगरानी के लिए तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। फिर भी ऐसे षड्यंत्रों को समय रहते नाकाम करना बड़ी चुनौती है। पंजाब में रेलवे ट्रैक को उड़ाने की लगातार धमकियां मिल रही थीं। गत 24 अप्रैल को भी पटियाला, बठिंडा, लुधियाना व अमृतसर में ईमेल पर बम से रेलवे ट्रैक उड़ाने की धमकी मिली थी। तीन दिन बाद शंभू में ब्लास्ट की घटना हो गई।  

होशियारपुर में सरपंच का अनोखा कदम, रेलवे ने नहीं दिया गेटमैन तो खुद दिखाते हैं ट्रेन को हरी झंडी

होशियारपुर  गढ़शंकर के गांव बसियाला के सरपंच गुरदेव सिंह बिना गार्ड वाले रेलवे क्रॉसिंग पर एक अनौपचारिक गेटमैन की भूमिका निभा रहे हैं। सरपंच गुरदेव सिंह खुद मोर्चा संभालते हुए फाटक खोलते और बंद करते हैं। रेलवे विभाग ने अब तक फाटक पर कोई कर्मचारी तैनात नहीं किया है, जिसके कारण सरपंच को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। इस स्थिति के चलते गांववासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सरपंच गुरदेव सिंह ने कहा कि मुझे डर है कि कभी भी किसी बड़े हादसे का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण मुझे खुद फाटक खोलने और बंद करने का काम करना पड़ता है। हमने कई बार अधिकारियों से इस मामले में मदद मांगी है, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला। हमें एक रास्ता यहां से रेलवे ने दिया है जो नवांशहर के गांव मुबारिकपुर में निकलता है। जबकि हमारे गांव बसियाला व रसूलपुर गढ़शंकर में पड़ते है। इसके अलावा यह रास्ता दोपहर और शाम के समय महिलाओं के अकेले आने जाने के लिए तो खतरनाक है। गन्ने की ट्रॉलियां भी इस रास्ते से नहीं निकल सकती। गांव वासियों के फाटक पर पहले एक व्यक्ति दस हजार सैलरी पर रखा था। वह भी काम छोड़ गया। उसके बाद से मैं खुद ही फाटक खोलने बंद करने का काम करता हूं।  ग्रामीणों ने चंदा इकठ्ठा कर लगवाया फाटक फाटक नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर फाटक लगवाया, ताकि आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसके बावजूद कई बार रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से यहां कर्मचारी तैनात करने की मांग की गई और इसके लिए ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. कुछ समय के लिए ग्रामीणों ने एक व्यक्ति को मासिक वेतन पर रखा भी, लेकिन कुछ ही समय बाद वह काम छोड़कर चला गया।  सरपंच में खुद संभाली जिम्मेदारी इसके बाद सरपंच गुरदेव सिंह ने खुद यह जिम्मेदारी संभाल ली. वह दिन में दो बार, जब ट्रेन आने का समय होता है. अपनी दुकान छोड़कर फाटक पर पहुंचते हैं. पहले वह मुबारकपुर के रेलवे स्टाफ से फोन पर ट्रेन की जानकारी लेते हैं, फिर समय पर फाटक बंद कर देते हैं और हाथ में हरी झंडी लेकर ट्रेन को सुरक्षित गुजरने का संकेत देते हैं।  न हो कोई हादसा इसलिए खुद ली जिम्मेदारी गुरदेव सिंह का कहना है कि उन्हें हमेशा इस बात का डर रहता है कि कहीं लापरवाही के कारण कोई बड़ा हादसा न हो जाए, इसलिए उन्होंने इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मान लिया है. गांव के लोग भी उनके इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं।  गांववासियों का कहना है कि यह रास्ता महिलाओं और बच्चों के लिए भी खतरनाक हो सकता है, खासकर जब वे अकेले इस रास्ते से गुजरती हैं। गांववासियों ने बार-बार विभिन्न नेताओं और अधिकारियों को ज्ञापन देकर रेलवे से इस फाटक पर कर्मचारी तैनात करने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पहले रेलवे ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, लेकिन गांववासियों के संघर्ष के बाद इसे फिर से खोला गया। हालांकि, फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती अभी तक नहीं की गई है। पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने हाल ही में केंद्रीय राज्य रेलवे मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मिलकर इस समस्या का समाधान करने की अपील की थी। बिट्टू ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी और एक टीम भेजकर कर्मचारी तैनात किया जाएगा। गांववासियों की मांग है कि रेलवे विभाग शीघ्र इस समस्या का समाधान करें और फाटक पर सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात करें, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

रेलवे ने मंजूरी दी 15 समर स्पेशल ट्रेनों को, भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन में बढ़ेगा यात्री लाभ

भोपाल  गर्मियों के मौसम में बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे ने इस बार पहले से व्यापक तैयारी की है। 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक चलने वाले समर स्पेशल ट्रेनों के प्लान के तहत यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। रेलवे का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और लंबी दूरी की यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। रेलवे द्वारा तैयार योजना के अनुसार कुल 15 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिनके जरिए 288 ट्रिप्स संचालित होंगे। इनमें से पांच ट्रेनों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। भोपाल, जबलपुर और कोटा को बड़ा फायदा इस योजना का सबसे अधिक लाभ भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन के यात्रियों को मिलेगा। इन शहरों से देश के प्रमुख महानगरों और पर्यटन स्थलों के लिए सीधी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। दक्षिण भारत के मैसूर और कोयंबटूर जैसे शहरों के लिए सीधी ट्रेन सुविधा मिलने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। हर दिन हजारों यात्रियों को राहत रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से प्रतिदिन करीब पांच से सात हजार यात्रियों को लाभ मिलेगा। गर्मियों में उत्तर भारत से महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाई गई है। 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव तैयार रेलवे ने 10 नई समर स्पेशल ट्रेनों का प्रस्ताव भी तैयार किया है, जिनके जरिए 158 अतिरिक्त ट्रिप्स संचालित करने की योजना है। इनमें रानी कमलापति से मैसूर, जबलपुर से येलहंका और कोटा से मथुरा व धनबाद के लिए ट्रेनें शामिल हैं। कुछ ट्रेनें साप्ताहिक होंगी, जबकि कुछ सप्ताह में दो बार चलाई जाएंगी। यात्रा होगी आसान और सुविधाजनक रेलवे का मानना है कि इन अतिरिक्त ट्रेनों से यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी और वेटिंग की समस्या कम होगी। इससे सफर अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बन सकेगा।

रेलवे ने कबाड़ बेचकर ₹6,800 करोड़ की कमाई की, 168% की वृद्धि से तोड़े सभी रिकॉर्ड

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने अपनी वित्तीय सुदृढ़ता की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. वित्त वर्ष 2025-26 के समापन पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने स्क्रैप (कबाड़) की बिक्री से कुल 6,813.86 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है. यह आंकड़ा रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित 6,000 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य से लगभग 13.5 प्रतिशत अधिक है।  लगातार दूसरे वर्ष लक्ष्य से अधिक प्रदर्शन रेलवे की यह सफलता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह संसाधनों के कुशल मुद्रीकरण की दिशा में चल रहे व्यवस्थित प्रयासों का परिणाम है. पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में भी रेलवे ने 5,400 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 6,641.78 करोड़ रुपये की कमाई की थी. अधिकारियों के अनुसार, अनुपयोगी रेल पटरियों, पुराने इंजनों, कोचों और वैगनों के पारदर्शी ई-ऑक्शन के कारण राजस्व में यह निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।  गैर-किराया राजस्व (NFR) में 168% की भारी वृद्धि रेलवे के लिए स्क्रैप की बिक्री न केवल आय का स्रोत बनी है, बल्कि इसने गैर-किराया आय) को भी मजबूती दी है. रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन, स्टेशन पुनर्विकास और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय वित्त वर्ष 2021-22 के 290 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 777.76 करोड़ रुपये हो गई है. यह पांच वर्षों में लगभग 168 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है. इस वर्ष के लिए NFR का लक्ष्य 720.85 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसे रेलवे ने सफलतापूर्वक पार कर लिया है।  बिना टिकट यात्रियों से वसूले 148 करोड़ रुपये बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सख्ती बढ़ाकर 148 करोड़ रुपये वसूल किए गए हैं. माल ढुलाई में भी जोन ने 21 मिलियन टन से ज्यादा माल पहुंचाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। उत्तर मध्य रेलवे के रेलवे यार्ड, वर्कशॉप और ट्रैक के किनारे पड़ी पुरानी लोहे की चीजें, पुराने सामान और बेकार माल को नीलामी के जरिए बेचा गया, रेलवे ने इसे “कबाड़ से जुगाड़” का नाम दिया है. इस अभियान से सिर्फ पैसे ही नहीं आए, बल्कि रेलवे के स्टेशन और यार्ड साफ-सुथरे भी हो गए हैं।  इसके अलावा, रेलवे ने बिना टिकट यात्रा पर बड़ी सख्ती की. विशेष टिकट चेकिंग ड्राइव चलाकर बिना टिकट यात्रा करने वालों से 148 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया. अब रेलवे नियम तोड़ने वालों पर नजर रखने की व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है।  पर्यावरण और संचालन को लाभ स्क्रैप मुद्रीकरण की इस प्रक्रिया ने न केवल खजाने को भरा है, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार किया है. यार्डों, वर्कशॉप और डिपो में सालों से पड़े कबाड़ के हटने से बहुमूल्य जगह खाली हुई है, जिससे रेलवे परिसरों में सुरक्षा और स्वच्छता बढ़ी है. साथ ही, स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से रेलवे अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों (Waste-to-Wealth) को भी पूरा कर रहा है।  यात्रियों पर बिना बोझ डाले ढांचागत विकास सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त आय का उपयोग रेल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा. टिकट की दरों में वृद्धि किए बिना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, जैसे आधुनिक स्टेशन आउटलेट, बेहतर सुरक्षा प्रणालियां और डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर 22 प्रीमियम ब्रांडेड आउटलेट्स आवंटित किए जा चुके हैं, जो भविष्य में आय के नए द्वार खोलेंगे। 

नया रेलवे ट्रैक 100 किमी की दूरी घटाएगा, भोपाल के करीब पहुंचेगा यह महानगर

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के कोचिंग महानगर कोटा के बीच की दूरी जल्द ही सिमट जाएगी। भोपाल रामगंज मंडी रेलवे ट्रैक के चालू होने से यह सुविधा मिलेगी। नए ट्रैक से भोपाल एवं कोटा के बीच लगभग 100 किमी की दूरी कम हो जाएगी। नई रेलवे लाइन जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगी। पिछले 3 साल से चल रहा यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने की तैयारी है। भोपाल रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना के लिए हाल ही में कोटा मंडल के अंतर्गत खिलचीपुर राजगढ़ सिटी स्टेशन के बीच 17.8 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर रेलवे सुरक्षा कमिश्नर ने सुरक्षा का जायजा लिया। इस क्षेत्र में यात्री ट्रेन को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ाकर स्पीड ट्रायल लिया गया। ये स्टेशन आएंगे रेल नेटवर्क में मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन इस परियोजना के तहत पहली बार रेल नक्शे पर आएंगे। इनमें पिपलहेड़ा, सोनकच्छ, नरङ्क्षसहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, झारखेड़ा, मुगलियाहाट शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग अब तक सड़क मार्ग पर निर्भर थे, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद भोपाल और राजस्थान के शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी। दूरी 100 किमी घटेगी, समय में 2-3 घंटे की बचत नई रेल लाइन शुरू होने के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के महानगर कोटा के बीच करीब 100 किलोमीटर दूरी कम होगी और यात्रियों का 2 से 3 घंटे समय बचेगा। राजगढ़ और सीहोर के कई इलाके पहाड़ी और ग्रामीण हैं, जहां रेल सुविधा नहीं थी। नई लाइन इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, जिससे रोजगार, व्यापार और शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। 276 किमी का लंबा ट्रेक: करीब 276 किमी लंबी रेल परियोजना में अब तक 187 किमी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें शेष 89 किलोमीटर का कार्य मार्च 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल रामगंजमंडी प्रोजेक्ट का काम तेजी से खत्म किया जा रहा है। इसके शुरू होते ही कई नए स्टेशन बनेंगे। कोटा से भोपाल की दूरी कम हो जाएगी। ट्रेनें निरस्त होने से बढ़ी समस्या, पहले था कन्फर्म, अब हर ट्रेन में वेटिंग इधर गर्मी के मौसम और छुट्टियों के सीजन में लंबी दूरी की ट्रेनें निरस्त होने से लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। कंफर्म टिकट निरस्त करवाने के बाद अब जब दोबारा अन्य तारीख पर टिकट लेने का प्रयास कर रहे हैं तो लंबी वेटिंग मिल रही है। कई तारीख पर रिग्रेट की स्थिति बन रही है। रेलवे मेंटेनेंस के चलते पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा रूट पर भोपाल से गुजरने वाली आधा दर्जन गाडिय़ों को निरस्त किया गया है एवं अलग-अलग तारीख पर रीशेड्यूल कर दिया गया है। रेलवे ने दावा किया, सभी प्रभावित यात्रियों को रिफंड कर दिया जाएगा। भोपाल रेल मंडल पर इस प्रकार अनावश्यक कैंसिलेशन के चलते लगभग 50 लाख का आर्थिक बोझ भी रिफंड के रूप में आ गया है। ये ट्रेनें निरस्त: कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस- 25 अप्रैल अमृतसर- बिलासपुर एक्सप्रेस 27 अप्रैल तक रद्द। 12410- 8, 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल। 12409- 8, 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल। 12807- 8, 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल 12808 – 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल तक रद्द।

नई रेल लाइन से प्रदेश में बढ़ेगी 32 एक्स्ट्रा ट्रेनों की संचालन क्षमता

उज्जैन  उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए रेलवे भी तैयारी कर रहा है। रेलवे इंदौर से उज्जैन के बीच कई सुविधाएं देगा, जिससे सिंहस्थ में ज्यादा से ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। नई लाइनों के साथ रेलवे बायपास लाइन भी बनाएगा, जिससे ट्रेनें इंजन बदले बिना मुड़ सकेंगी। इंदौर-उज्जैन के बीच ऑटोमेटिक सिग्नल भी लगेंगे, जिससे ट्रेन यात्रा सुरक्षित हो सकेगी। रेलवे रतलाम मंडल के प्रमुख स्टेशनों इंदौर, डॉ. अंबेडकर नगर (महू), लक्ष्मीबाई नगर और उज्जैन पर कोचिंग एवं टर्मिनल विकास कार्य चल रहे हैं। ये स्टेशन मालवा क्षेत्र के प्रमुख यात्री, धार्मिक और पर्यटन केंद्र है। इंदौर और उज्जैन के आसपास के स्टेशनों को भी संवारा जाएगा। इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में 7 नई पिट लाइनें और 16 नई स्टेबलिंग लाइनों की सुविधाएं जुटाई जाएंगी, जिससे प्रतिदिन 21 प्राइमरी मेंटेनेंस और 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों सहित 32 अतिरिक्त ट्रेनों की संचालन क्षमता विकसित होगी। इंदौर स्टेशन: नया बन रहा स्टेशन वर्तमान में इंदौर स्टेशन से प्रतिदिन लगभग 57 जोड़ी ट्रेनें संचालित होती है, जिसमें 41 जोड़ी ओरिजिनेट/टर्मिनेट होती है। यहां 6 प्लेटफॉर्म और 5 पिट लाइनें उपलब्ध 6 है। स्टेशन का पुनर्विकास प्रगति पर है, जो यात्री सुविधा, अतिरिक्त ट्रेनों की दृष्टि से भी उपयोगी साबित होंगे। लक्ष्मीबाई नगर: 7 स्टेबलिंग लाइनें बनेंगी लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन में वर्तमान में 4 स्टेबलिंग लाइन, 3 प्लेटफॉर्म तथा 1 शंटिंग नेक उपलब्ध हैं। यहां दो अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण का कार्य प्रगति पर हैं। यहां एक कोचिंग मेंटेनेंस डिपो बनाया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 259 करोड़ रुपए है। 5 नई पिट लाइनें, 7 स्टेबलिंग लाइनें और सिक कोच लाइनें निर्मित होंगी। इससे प्रतिदिन 15 प्राइमरी मेंटेनेंस ट्रेनों की देखरेख संभव होगी। यह सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में विकसित होगा। इसके साथ ही लक्ष्मी बाई नगर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य भी किया जा रहा, जिसके अंतर्गत अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ नया स्टेशन भवन, नए प्लेटफार्म, कवर शेड, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट/एस्केलेटर आदि लगाने के कार्य किया जाना है। जल्द ही नई लाइनें भी डाली जाएंगी उज्जैन सिंहस्थ का यात्री दबाव इंदौर पर भी रहेगा। स्टेशन निर्माण के साथ नई लाइनें डाली जाएंगी ताकि नई ट्रेनें भी चलाई जा सके। इस कार्य से आने वाले समय में यात्रियों और नई ट्रेनों के संचालन में काफी फायदा मिल सकेगा। – शंकर लालवानी, सांसद डॉ. अंबेडकर नगर (महू): 2 नई पिट लाइन बनेगी वर्तमान में यहां 4 प्लेटफार्म एवं 3 पिट लाइन उपलब्ध हैं, किंतु प्लेटफार्म की लंबाई, ओएचई एवं प्लेटफार्म कनेक्टिविटी का कार्य प्रगति पर है। इसके बाद यह स्टेशन अधिक गाड़ियों के संचालन के लिए सक्षम हो जाएगा। वर्तमान में इस स्टेशन से 15 जोड़ी नियमित एवं 2 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इस स्टेशन को समेकित कोचिंग डिपो के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके पहले चरण में 2 नई पिट लाइनों का कार्य जो लगभग 94 करोड़ की लागत से किया जाएगा। इससे 6 ट्रेनों की मेंटेनेंस क्षमता बढ़ेगी। उज्जैन जंक्शन: 9 स्टेबलिंग लाइन बनेगी उज्जैन धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, वहां आगामी सिंहस्थ 2028 को देखते हुए 9 नई स्टेबलिंग/होल्डिंग लाइनों की योजना बनाई गई है। इससे लगभग 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों को खड़ा करने और टर्मिनेट करने की क्षमता विकसित होगी।

487 किलोमीटर रूट पर कवच परीक्षण पूरा, दक्षिण मध्य रेलवे ने बड़ी सफलता हासिल की

हैदराबाद  दक्षिण मध्य रेलवे ने 2025-26 के दौरान 487 किलोमीटर रूट के लिए कवच क्षेत्र परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।  कवच स्वदेशी रूप से विकसित एक सुरक्षा प्रणाली है, जिसे मानवीय त्रुटि के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह किसी खतरे के सिग्नल को पार करने वाली ट्रेन के लिए स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकता है और स्पीड एवं सिग्नल की लगातार निगरानी करके सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने में मदद करता है। दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने रविवार को कहा कि उसने सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया है और इस दिशा में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर नेटवर्क में कवच 4.0 की स्थापना के लिए कदम उठाए गए। जोन ने रेलवे बोर्ड के 402 रूट किलोमीटर के लक्ष्य को पार करते हुए 487 रूट किलोमीटर की दूरी के लिए फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। एससीआर ने एक बयान में कहा कि सावधानीपूर्वक योजना और प्रभावी कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप यह शानदार उपलब्धि हासिल हुई है। जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम भी शुरू कर दिया है, जिससे पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 357 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 479 रूट किलोमीटर (आरकेएम) की दूरी के लिए सेक्शन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। कवच 4.0 इंस्टॉलेशन का फील्ड परीक्षण काजीपेट पेद्दामपेट (101 मार्ग किमी), मल्काजगिरि कामारेड्डी (106 मार्ग किमी), चारलापल्ली रघुनाथपल्ली (79 मार्ग किमी), गुंतकल रायचूर (120 मार्ग किमी), और मुदखेड परभणी (81) के बीच खंडों में आयोजित किया गया था। इन खंडों में लोको कवच का परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर ने काजीपेट बलहरशाह, विजयवाड़ा दुव्वाडा और वाडी रेनिगुंटा के बीच 479 रकमाल की दूरी के विभिन्न खंडों में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम को चालू किया है। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग एक ऐसी रेल संचालन प्रणाली है, जिसमें ट्रेनों की आवाजाही स्वचालित स्टॉप सिग्नलों द्वारा नियंत्रित होती है। ये सिग्नल ट्रेनों के गुजरने पर स्वचालित रूप से संचालित होते हैं। एबीएस प्रणाली का उद्देश्य एक ही दिशा में चलने वाली ट्रेनों को पीछे से टक्कर के जोखिम के बिना सुरक्षित रूप से एक-दूसरे का अनुसरण करने में सक्षम बनाना है। इससे रेलवे लागत कम होती है, खंड की क्षमता में सुधार होता है और ट्रेनों की औसत गति भी बढ़ती है। इस प्रणाली को शुरू में एससीआर नेटवर्क के उच्च घनत्व वाले और प्रमुख मुख्य मार्गों पर चालू किया जा रहा है। एससीआर के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर सिग्नल और दूरसंचार विंग के अधिकारियों के असाधारण योगदान की सराहना की है, जिसकी बदौलत जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और कवच फील्ड परीक्षणों को रिकॉर्ड स्तर पर सफलतापूर्वक पूरा किया है। महाप्रबंधक ने यह भी कहा कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कवच और एबीएस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।  

पंजाब में अनोखा रेलवे स्टेशन, जहां सिर्फ 2 दिन चलती है ट्रेन और साल में दो बार रुकती है

हुसैनीवाला भारत में रेलवे का नेटवर्क बहुत बड़ा है और ज्यादातर स्टेशनों पर हर दिन कई ट्रेनें आती-जाती रहती हैं। लेकिन एक ऐसा अनोखा स्टेशन भी है, जहां पूरे साल में सिर्फ दो बार ही ट्रेन पहुंचती है। यही वजह है कि यह स्टेशन इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। हाल ही में एक वायरल वीडियो में एक शख्स इस स्टेशन के बारे में बताता नजर आता है। वह स्टेशन पर खड़ी ट्रेन (Unique Railway Station India) के पास खड़े होकर कहता है कि यह वही खास ट्रेन है, जो साल में सिर्फ दो बार चलती है। वीडियो में वह रेलवे ट्रैक भी दिखाता है, जहां साफ दिखाई देता है कि पटरी आगे जाकर खत्म हो जाती है। इस स्टेशन पर ट्रेन आती है सिर्फ दो बार  यानी यह इस लाइन का आखिरी स्टेशन है और यहां से ट्रेन आगे नहीं जाती, बल्कि वापस उसी दिशा में लौट जाती है, जहां से आई होती है। इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर “northern_vlogger” नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है, जिसे लाखों लोग देख चुके हैं। यह खास स्टेशन पंजाब के फिरोजपुर जिले के पास हुसैनीवाला बॉर्डर के नजदीक स्थित है, जिसे हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन (Hussainiwala Railway Station) कहा जाता है। यह स्टेशन अपनी अनोखी व्यवस्था के कारण लोगों को हैरान कर देता है। यहां पूरे साल में केवल दो ही बार ट्रेन आती है और बाकी समय यह स्टेशन (Indian Railways Facts) लगभग सुनसान रहता है। इन दो खास दिनों में पहला दिन 23 मार्च होता है और दूसरा 13 अप्रैल, जो बैसाखी का दिन होता है। साल में सिर्फ 2 बार ही क्यों आती है ट्रेन? हुसैनीवाला स्टेशन की सबसे खास बात यही है कि यहां रोजाना ट्रेन नहीं चलती. पूरे साल में सिर्फ दो खास मौकों पर ही ट्रेन यहां तक पहुंचती है. पहली ट्रेन 23 मार्च को चलती है, जो शहीद भगत सिंह की शहादत दिवस के मौके पर चलाई जाती है. इस दिन देशभर से लोग हुसैनीवाला बॉर्डर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने आते हैं. वहीं, दूसरी ट्रेन की बात करें तो ये 13 अप्रैल को चलती है, जो बैसाखी के पर्व के अवसर पर चलाई जाती है. इन दोनों दिनों पर यहां काफी भीड़ देखने को मिलती है, जबकि बाकी समय यह स्टेशन लगभग खाली रहता है।  वायरल वीडियो से बढ़ी चर्चा हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति इस स्टेशन के बारे में जानकारी देता नजर आता है. वह बताता है कि जिस जगह वह खड़ा है, वहां साल में सिर्फ दो बार ही ट्रेन आती है. इस वीडियो में वो शख्स स्टेशन और वहां खड़ी ट्रेन की झलक भी दिखाता है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस अनोखी जानकारी ने इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देने लगे।  रेलवे लाइन का आखिरी पड़ाव हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन आखिरी रेलवे स्टेशन है और यहां पर आकर रेलवे लाइन भी खत्म हो जाती है. यह उत्तर रेलवे की आखिरी रेलवे लाइन है. यहां आई हुई ट्रेन उसी दिशा में वापस लौटती है, जहां से आई होती है. इस स्टेशन से पहले लाहौर तक की ट्रेन जाया करती थी, जिसे लोग पकड़ते थे. मगर अब वो भी बंद कर दिया गया है. इसके आगे पाकिस्तान लग जाता है।  लोगों की प्रतिक्रियाएं और भावनाएं वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रियाएं दी. कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि इस स्टेशन का नाम बदलकर शहीद भगत सिंह के नाम पर रखा देना चाहिए. वहीं, कुछ यूजर्स ने गर्व के साथ कहा कि वो फिरोजपुर से हैं और इस खास जगह से उनका काफी लगाव है।  23 मार्च का दिन देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। इस दिन को शहादत दिवस (Shaheedi Diwas Train) के रूप में मनाया जाता है। बड़ी संख्या में लोग हुसैनीवाला बॉर्डर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए इस मौके पर स्पेशल ट्रेन चलाई जाती है। दूसरी बार 13 अप्रैल को बैसाखी (Baisakhi Special Train) के अवसर पर भी यहां ट्रेन चलाई जाती है, क्योंकि उस दिन भी बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। इन दो दिनों के अलावा यह स्टेशन लगभग खाली ही रहता है। इस अनोखे स्टेशन की कहानी लोगों को काफी आकर्षित कर रही है। यही कारण है कि इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर हैरान भी हो रहे हैं और भारत के रेलवे सिस्टम की इस खासियत को जानकर उत्साहित भी हैं।

‘डायरेक्ट ड्राइव’ ऑटो सिग्नल सिस्टम से ट्रेनें दौड़ेंगी तेज, 33.86 किमी. पर बढ़ेगी गति

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने रेलवे सिग्नलिंग में बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। कुरवाई केथोरा-मंडी बामोरा-कालहार खंड के कुल 33.86 किमी. डबल लाइन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली को कमीशन किया है। इस सेक्शन में ट्रेन के प्रवेश करते ही सुरक्षित सिग्नल रिसीव और फॉरवर्ड होंगे। इसी के साथ जैसे-जैसे ट्रेन आगे जाएगी, वैसे सिग्नल क्लीयर होते जाएंगे। कुल मिलाकर एआइ सिस्टम जैसी इस तकनीक में मानवीय त्रुटि की आशंका काफी कम होगी। खास बात यह है कि यहां पहली बार डायरेक्ट ड्राइव मॉड्यूल आधारित तकनीक उपयोग की है। इस प्रणाली में ब्लॉक सेक्शन के ऑटो सिग्नलों को सीधे वे साइडकैबिनेट के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इससे पहले की पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी। इससे सिस्टम तेज, भरोसेमंद और रखरखाव में आसान बनेगा। दो नए ऑटो हट बनेंगे भोपाल मंडल के कुरवाई- कैथोरा मंडी बामोरा के बीच इस सिस्टम के लगने के बाद नए ऑटो हट बनाए जाएंगे। ऑटो हट में मॉनीटरिंग सिस्टम होगा, जो पूरा डेटा ट्रांसमिशन स्पीड और साइबर अटैक से सुरक्षा दिलाएगा। भोपाल-बीना-इटारसी बनेगा फ्रेट कॉरिडोर भोपाल रेल मंडल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल इटारसी-भोपाल-बीना सेक्शन पर चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। 237 किमी लंबी इस परियोजना पर 4,329 करोड़ खर्च होंगे, जिससे यात्री और मालगाडिय़ों के संचालन में सुधार होगा। यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा। यह मार्ग नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जिलों से होकर गुजरेगा। वर्तमान में यह सेक्शन अत्यधिक व्यस्त है, जहां यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी मात्रा में मालगाडिय़ों का संचालन होता है। चौथी लाइन बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और ट्रेनें 220 किमी. की स्पीड से दौड़ सकेंगी। भोपाल मंडल में डायरेक्ट ड्राइव सिस्टम को लागू किया है। बाकी सेक्शनों में भी इस तकनीक को इंस्टाल किया जाएगा। सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम

यात्रियों को राहत! ट्रेन छूटने से ठीक पहले तक बदलें बोर्डिंग स्टेशन, रेलवे ने बदले नियम

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। अब ट्रेन छूटने के चंद मिनटों पहले तक आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए इस नए प्रस्ताव से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अंतिम समय में किसी कारणवश अपना स्टेशन बदलना चाहते हैं। अब दूसरे चार्ट तक बदलें अपना बोर्डिंग स्टेशन भारतीय रेलवे अपने सिस्टम को और अधिक 'पैसेंजर फ्रेंडली' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। रेलवे बोर्ड के एक नए प्रस्ताव के अनुसार, यात्री अब ट्रेन का दूसरा आरक्षण चार्ट (Second Reservation Chart) तैयार होने तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेन प्रस्थान करने के लगभग 30 मिनट पहले तक यात्रियों के पास अपना स्टेशन बदलने का विकल्प मौजूद रहेगा।   क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? वर्तमान नियमों के तहत, बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव केवल पहला चार्ट बनने तक ही किया जा सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों के मामले में, पहला चार्ट ट्रेन छूटने से 8 से 20 घंटे पहले ही बन जाता है। ऐसे में यदि किसी यात्री को अंतिम समय में शहर के किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी हो, तो उसके पास कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं बचता था। नए नियम से यात्रियों की यह 'लास्ट मिनट' की चिंता दूर हो जाएगी। तकनीकी जांच और क्रियान्वयन रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग-द्वितीय) संजय मनोचा ने 19 फरवरी को क्रिस (CRIS) को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव की तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) पर रिपोर्ट मांगी है।     सॉफ्टवेयर अपडेट: बोर्ड यह समझना चाहता है कि इस बदलाव से रेलवे के रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।     चरणबद्ध शुरुआत: रिपोर्ट सकारात्मक आने पर इस सुविधा को पहले कुछ चुनिंदा ट्रेनों में 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू किया जाएगा, जिसके बाद इसे सभी ट्रेनों के लिए लागू कर दिया जाएगा। क्या हुआ मुख्य बदलाव     पुराना नियम : केवल प्रथम चार्ट (आठ-20 घंटे पहले) तक बदलाव संभव।     नया प्रस्ताव : द्वितीय चार्ट (ट्रेन प्रस्थान से 30 मिनट पहले) तक बदलाव की सुविधा।     उद्देश्य : यात्रियों को अंतिम समय में स्टेशन बदलने का विकल्प देना। यात्रियों को क्या मिलेगा?     अचानक योजना बदलने पर भी सीट सुरक्षित रहेगी।     बिना बोर्डिंग पॉइंट बदले दूसरे स्टेशन से चढ़ने पर होने वाले जुर्माने का डर खत्म होगा।     यात्री IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से यह बदलाव कर पाएंगे।