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Railway charging rules back in the spotlight; charging points on trains may be switched off after 11 PMs: रात 11 बजे के बाद ट्रेन में मोबाइल चार्ज करने को लेकर क्या है नियम? जानें पूरी जानकारी

नईदिल्ली  भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक मोबाइल चार्जिंग पॉइंट बंद रखने के नियम का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश ओडिशा में मुंबई-हावड़ा मेल के एक कोच में चार्जिंग के दौरान पावर बैंक फटने की घटना के बाद आया है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को इस व्यवस्था में किसी तरह की छूट नहीं देने और औचक निरीक्षण करने को कहा है। हालांकि, यह कोई नया नियम नहीं है। रेलवे बोर्ड ने 19 जून 2014 को भी इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। रेलवे बोर्ड ने क्या निर्देश दिए? रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियरों को लेटर भेजकर रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक चार्जिंग पॉइंट की बिजली बंद रखना अनिवार्य किया है। बोर्ड ने कहा है कि निर्धारित समय के दौरान इस नियम में कोई छूट नहीं दी जानी चाहिए। संबंधित कर्मचारियों को निर्देश देने के साथ उन्हें जरूरी प्रशिक्षण देने को भी कहा गया है। रेलवे ने ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए ही रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ट्रेन के चार्जिंग सॉकेट के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगा दी है. इसका अनुपालन अच्छे तरीके से हो सके इसके लिए यह सुनिश्चित भी किया जाता है कि रात 11 बजे के बाद सॉकेट को मिलने वाली बिजली की मेन सप्लाई ही बंद कर दी जाए. यह कोई नई शुरुआत नहीं है. रेलवे ने 2021 में ही इसे लेकर निर्देश जारी कर दिए थे. पश्चिमी रेलवे ने 16 मार्च को 2021 को चार्जिंग पोर्ट्स में बिजली की सप्लाई बंद कर के इसकी शुरुआत की थी. इससे भी 2014 में रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को ऐसा ही करने का निर्देश दिया था।  धुम्रपान और ज्वलनशील वस्तुओं के खिलाफ कार्रवाई रेलवे ने ट्रेन में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए ज्वलनशील वस्तुएं ले जाने और धुम्रपान करने पर जुर्माने का प्रावधान किया है. यह रेलवे एक्ट की धारा 164 के दंडनीय अपराध है. इसके तहत अपराधी पर 1000 रुपये का जुर्माना व 3 साल की जेल या दोनों हो सकते हैं. यह निर्देश केवल यात्रियों के लिए नहीं बल्कि रेलवे कर्मचारियों के लिए भी जारी किए गए हैं. रेल मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि सुरक्षा रेलवे परिचालन का केंद्र है और इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जा सकती।  रेलवे के कुछ अन्य नियम भारतीय रेलवे ने अपने यात्रियों की सुविधा के लिए कई नियम बनाए हुए हैं. इनमें से एक नियम यह है कि रात के 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक टिकट चेक करने के लिए टीसी आपको जगा नहीं सकता है. हालांकि, अगर आपने ट्रेन रात 10 बजे के बाद ही पकड़ी है तो आपको टिकट दिखानी होगी. इसके अलावा यात्री फर्स्ट एसी में 40 किलो तक जबकि स्लीपर क्लास में 15 किलो तक वजनी सामान ले जा सकते हैं। 

ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पटाखों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान, RPF ने बढ़ाई निगरानी

ग्वालियर  दीपावली और छठ पर्व पर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने सतर्कता बढ़ा दी है। मंगलवार को ग्वालियर रेलवे स्टेशन परिसर और ट्रेनों में ज्वलनशील व विस्फोटक पदार्थों की रोकथाम के लिए विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान यात्रियों के सामान की जांच कर ऐसे पदार्थ लेकर यात्रा करने वालों पर नजर रखी गई। निरीक्षक के निर्देशन में चलाए गए अभियान में उप निरीक्षक रविन्द्र सिंह राजावत, सहायक उप निरीक्षक हीरेन्द्र मीना और आरक्षक दुजी राम मीणा शामिल रहे। टीम ने स्टेशन परिसर के साथ ट्रेनों में भी जांच की, ताकि यात्रा के दौरान आग लगने या किसी अन्य दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके। त्योहार के दौरान पटाखों और अन्य ज्वलनशील सामग्री के परिवहन से खतरा बढ़ सकता है, इसलिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वेंडरों और कुलियों को भी किया जागरूक अभियान के तहत स्टेशन के अधिकृत वेंडरों, कुलियों और सफाई कर्मचारियों के साथ बैठक भी की गई। उन्हें संदिग्ध व्यक्तियों और ज्वलनशील या विस्फोटक पदार्थ लेकर चलने वालों पर नजर रखने की समझाइश दी गई। साथ ही, ऐसी कोई भी जानकारी मिलने पर तत्काल आरपीएफ को सूचित करने के लिए कहा गया।

रेलवे में स्टाफ की कमी दूर करने की तैयारी, ग्रुप-C कर्मचारियों के विभाग बदलने पर लग सकती है रोक

अंबाला  रेलवे में कर्मचारियों की कमी दूर करने और ट्रेनों का संचालन सुचारू रखने के लिए रेलवे बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने रेलवे के ग्रुप सी कर्मचारियों को राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और उनके अधीन आने वाले विभिन्न विभागों व संस्थानों में प्रतिनियुक्ति पर भेजने पर रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि अब रेलवे के ग्रुप सी कर्मचारी इन विभागों में दूसरे पदों पर काम करने के लिए नहीं जा सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश आदेश में सभी क्षेत्रीय रेलों के महाप्रबंधकों और रेलवे की उत्पादन इकाइयों को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे में ग्रुप सी के कर्मचारी रोजमर्रा के कामकाज की रीढ़ माने जाते हैं। ट्रेन चलाने से लेकर स्टेशन संचालन, पटरियों की देखरेख, सिग्नल व्यवस्था और कार्यालयों के कामकाज तक में इनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में जब कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभागों में चले जाते हैं तो रेलवे के अपने कामकाज के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। रेलवे बोर्ड के इस फैसले का उद्देश्य अपने कर्मचारियों का इस्तेमाल रेलवे के कामकाज में ही करना और जरूरी पदों पर कर्मचारियों की उपलब्धता बनाए रखना है। इससे ट्रेन संचालन, पटरियों और सिग्नल व्यवस्था की देखरेख जैसे जरूरी कामों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। किन विभागों में जाने पर लगी रोक नए आदेश के अनुसार ग्रुप सी के कर्मचारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभागों के अलावा उनके अधीन आने वाले सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त संस्थाओं, वैधानिक निकायों, विश्वविद्यालयों और स्थानीय निकायों में प्रतिनियुक्ति पर नहीं जा सकेंगे। इन संस्थानों में दूसरे विभाग के लिए बनाए गए पदों पर रेलवे कर्मचारियों की तैनाती का रास्ता बंद कर दिया गया है। पहले क्या होता था प्रतिनियुक्ति के तहत किसी कर्मचारी को कुछ समय के लिए उसके मूल विभाग से दूसरे विभाग या संस्थान में काम करने के लिए भेजा जाता है। संबंधित संस्थानों में नहीं जा सकेंगे कर्मचारी इस दौरान कर्मचारी का मूल विभाग रेलवे ही रहता है, लेकिन वह तय अवधि तक दूसरे संस्थान में काम करता है। रेलवे बोर्ड के नए फैसले से राज्य सरकारों और अन्य संबंधित संस्थानों में ग्रुप सी कर्मचारियों की इस तरह तैनाती पर रोक लग गई है। रेलवे बोर्ड ने यह कदम केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 24 सितंबर 2024 के कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में उठाया है। अब क्षेत्रीय रेलों को नए आदेश के अनुसार प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामलों में कार्रवाई करनी होगी। रेलवे के लिए क्यों अहम है फैसला इस फैसले से रेलवे अपने उपलब्ध कर्मचारियों को अपने ही विभाग में तैनात रखने पर जोर दे सकेगा। खासकर उन पदों पर कर्मचारियों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है, जिनका सीधा संबंध ट्रेन संचालन, सुरक्षा और रखरखाव से है। हालांकि, इस आदेश से रेलवे में कर्मचारियों की वास्तविक कमी कितनी दूर होगी, यह उपलब्ध पदों और तैनात कर्मचारियों की संख्या पर निर्भर करेगा।

Railway Bonus 2026: रेलवे कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा, 78 दिन के बोनस से लाखों कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार की मोदी कैबिनेट ने रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के बोनस का ऐलान कर दिया है. यह रेलवे कर्मचारियों के लिए दिवाली पर एक बड़ा बोनस तोहफा है. सरकार इस बोनस के तहत रेलवे कर्मचारियों को कुल  2009 करोड़ रुपये बांटेगी।  अश्विनी वैष्णव कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि इससे रेलवे के 11 लाख 40 हज़ार कर्मचारियों को फायदा होगा. वैष्‍णव ने कहा कि PM Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेलवे कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए 11,40,770 रेलवे कर्मचारियों को 2009.61 करोड़ रुपये के 78 दिनों के बोनस के भुगतान को मंजूरी दे दी है।  पात्र रेलवे कर्मचारियों को प्रोडक्‍ट लिंक बोनस (PLB) का भुगतान हर साल दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टियों से पहले किया जाता है. इस साल भी लगभग 11.40 लाख रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर PLB राशि का भुगतान किया जा रहा है।  रेलवे के किन कर्मचारियों को मिलेगा कितना अमाउंट PLB का भुगतान रेलवे कर्मचारियों को रेलवे के प्रदर्शन में सुधार की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करने के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है. हर पात्र रेलवे कर्मचारियों को देने जाने वाली राशि 78 दिनों के लिए 17,951 रुपये है।  यह राशि रेलवे कर्मचारियों की अलग-अलग कैटेगरी जैसे ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), स्टेशन मास्टर, पर्यवेक्षक, तकनीशियन, तकनीशियन हेल्पर, पॉइंट्समैन, मिनिस्ट्रियल स्टाफ और अन्य ग्रुप 'सी स्टाफ को भुगतान की जाएगी. यह बोनस वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे कर्मचारियों को दिया जा रहा है. उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है।  ग्रामीण योजनाओं पर भी बड़ा फैसला कैबिनेट ने ग्रामीण विकास विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसके तहत 'नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम' (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये के बजट के साथ जारी रखा जाएगा. इसके तहत योजना और उसकी उप-योजनाओं का नाम बदलना, दिव्यांगजन पेंशन के लिए पात्रता के नियमों, कवरेज और सहायता की दर में बदलाव और बुजुर्गों और विधवाओं के लिए पेंशन योजनाओं और परिवार लाभ योजना को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखना शामिल हैं। 

मां शारदा के भक्तों के लिए खुशखबरी, मैहर मेले के दौरान बलिया रूट की 8 ट्रेनों का होगा ठहराव

बलिया /मैहर  मध्य प्रदेश के मैहर स्थित मां शारदा मंदिर में दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए रेलवे ने आठ ट्रेनों के ठहराव को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. दी गई जानकारी के अनुसार, बलिया रूट से गुजरने वाली आठ प्रमुख ट्रेनों का मैहर स्टेशन पर पांच मिनट का अस्थायी ठहराव निर्धारित किया गया है. इससे बलिया, गाजीपुर, मऊ, छपरा और आसपास के क्षेत्रों से मैहर जाने वाले यात्रियों को सहूलियत मिलने की उम्मीद है।  नवरात्रि और मेले में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़ मैहर स्थित मां शारदा मंदिर में नवरात्रि और विशेष धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है. मैहर स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव मिलने से यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने के लिए अधिक समय मिल सकता है. इस फैसले से खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है।  आठ ट्रेनों के नाम और समय की आधिकारिक पुष्टि जरूरी उपलब्ध जानकारी में आठ ट्रेनों के नाम, गाड़ी संख्या, ठहराव लागू होने की तारीख और आगमन-प्रस्थान का समय स्पष्ट नहीं है. इसलिए यात्रियों को यात्रा से पहले रेलवे की आधिकारिक सूचना, एनटीईएस या रेलवे हेल्पलाइन 139 के माध्यम से संबंधित ट्रेन का ठहराव और समय जरूर जांच लेना चाहिए।  सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर रहेगा जोर मेले के दौरान स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन और यात्रियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण रहती है. हालांकि, अतिरिक्त आरपीएफ-जीआरपी बल की तैनाती और विशेष हेल्प डेस्क बनाए जाने के संबंध में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। 

रेलवे की लापरवाही पड़ी भारी! यात्री का बैग चोरी होने पर ₹1.45 लाख भरने का आदेश

 नई दिल्‍ली दिल्‍ली राज्‍य उपभोक्‍ता आयोग ने भारतीय रेलवे को एक पैसेंजर को 1.45 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. जिसका बैग रिजर्व डिब्‍बे से चोरी हो गया था. आयोग का मानना है कि रेलवे यह कहकर बच नहीं सकता है कि सामान यात्री के निजी हिरासत में था।  आयोग ने कहा कि असली मुद्दा रेलवे कर्मचारियों की अनरिजर्व एंट्री को रोकने में विफलता थी. पैसेंजर का बैग दो अनरिजर्व व्‍यक्तिओं के रिजर्व बोगी में घुसने के बाद ही गायब हुआ था. इस बैग में 1.20 लाख रुपये का कीमती सामान था।   रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले की सुनवाई दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी ने की. दिल्‍ली आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा है।  दिल्‍ली आयोग के सामने उत्तर रेलवे ने 16 अप्रैल, 2024 को जिला आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 7 सितंबर, 2017 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 1.20 लाख रुपये और 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।  कैसे गायब हुआ था बैग?  7 जून 2014 को अजय कुमार महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे. ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दो अज्ञात घुसपैठिए उनके अनरिजर्व डिब्बे में घुस गए और उनका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए. कुमार ने बताया कि बैग में साड़ियां, गहने और कपड़े थे, जिनकी कीमत 12 लाख रुपये थी।  चोरी के बाद शिकायत अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने तुरंत कोच के टीटीई से FIR दर्ज कराने के लिए संपर्क किया. रेलवे पुलिस बल (RPF) ने 7 सितंबर, 2014 को चोरी की पुष्टि की, लेकिन FIR के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. 22 जनवरी, 2015 के एक पत्र में कहा गया कि कुमार को मोबाइल फोन के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उल्लिखित नंबर उनका नहीं था।  अंततः 23 अप्रैल, 2015 को एफआईआर दर्ज की गई. 15 मई, 2017 को मामले को 'अनसुलझा' घोषित कर दिया गया. उत्तर रेलवे ने तर्क दिया कि सामान कुमार की निजी हिरासत में था और न तो रेलवे के पास दर्ज कराया गया था और न ही इसकी जानकारी दी गई थी।  राज्य आयोग ने रेलवे के इस तर्क को खारिज कर दिया कि सामान की व्यक्तिगत अभिरक्षा से उसकी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है. आयोग ने कहा कि मुख्य प्रश्न यह है कि क्या रेलवे ने अनरिजर्व डिब्बे में अनरिजर्व व्यक्तियों के प्रवेश को रोककर यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरती थी. आयोग ने आगे कहा कि अपीलकर्ता की जवाबदेही केवल चोरी होने से नहीं बनती, बल्कि यह बिना परमिशन घुसपैठ को रोकने में विफलता से पैदा होती है, जिस कारण चोरी हो पाई। 

अश्विनी वैष्णव के दौरे से पहले रायपुर में सख्ती, ठेले-गुमठियां बंद; ओवरब्रिज का बदला नजारा

रायपुर. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के रायपुर दौरे में बदलाव किया गया है। अब वे 12 अक्टूबर को रायपुर पहुंचेंगे। पहले रेल मंत्री के 9 अक्टूबर को रायपुर आने का कार्यक्रम था। अपने दौरे के दौरान वे रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के 42वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। रेल मंत्री के दौरे को लेकर रेलवे प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। हर दिन परेड की रिहर्सल कराई जा रही है। वहीं रायपुर रेलवे स्टेशन से लेकर आयोजन स्थल तक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अधिकारियों की टीम लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रही है, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की कमी न रहे। स्टेशन पर भी चल रहा निर्माण कार्य रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर नए फुटओवर ब्रिज के लिए लिफ्ट लगाने का काम तेजी से चल रहा है। प्लेटफॉर्म की तरफ क्रेन के जरिए काम किए जाने के कारण यात्रियों के आने-जाने की जगह प्रभावित हुई है। ट्रेन आने के समय यात्रियों की भीड़ पर थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गुमटियों-ठेलों को भी कराया गया बंद वहीं खमतराई ब्रिज के दोनों तरफ पर्दादारी की गई है। गुमटियों और ठेलों को भी बंद करवाया गया है। DRM कार्यालय से लेकर आयोजन स्थल तक साज-सज्जा का काम चल रहा है। खमतराई ओवरब्रिज के दोनों ओर रंगीन पर्दे लगाने के लिए बांस-बल्लियां लगाई गई हैं। रेलवे इंस्टीट्यूट के बाजू से रेल मंत्री के मंच तक मैदान में सीसी रोड का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा ग्राउंड के चारों ओर मुरम की सड़कें बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है। RPF स्थापना दिवस को यादगार बनाने की तैयारी रेल मंत्री के दौरे के दौरान उन्हें RPF जवानों की परेड और रिहर्सल का निरीक्षण करना है। ऐसे में रेलवे सुरक्षा बल के 42वें स्थापना दिवस समारोह को यादगार बनाने तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शहर में RPF की बैंड पार्टी दे रही प्रस्तुतियां शहर के अलग-अलग स्थानों पर RPF की बैंड पार्टी भी प्रस्तुतियां दे रही है। मंगलवार को भाठागांव बस स्टैंड में RPF बैंड ने लोकप्रिय और देशभक्ति गीतों की मधुर धुनें प्रस्तुत कीं। बैंड की प्रस्तुति सुनकर बड़ी संख्या में लोग रुक गए और जवानों की प्रस्तुति को देखते नजर आए।

MP में कुदरत और इंजीनियरिंग का अनोखा संगम, बागदेव के जंगलों में X आकार में मिलते हैं हाईवे और रेलमार्ग

इटारसी  इटारसी के पास बागदेव के घने जंगलों में एक ऐसा नजारा है, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. यहां ग्वालियर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग एक-दूसरे को X आकार में पार करते हैं. ऊंचाई से देखने पर रोड और रेलवे ट्रैक का यह संगम बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. चारों ओर हरियाली और पहाड़ियों के बीच बना यह स्थान पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।  पहाड़ी कटेगी,बनेगा नया कलवर्ट ब्रिजइटारसी के बागदेव की तस्वीर बदलने की तैयारी लेकिन इस खूबसूरत जगह पर सफर करना फिलहाल आसान नहीं है. रेलवे पुल के नीचे सड़क का रास्ता संकरा होने के कारण यहां अक्सर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है. खासकर छुट्टियों और धार्मिक अवसरों पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।  अब इस समस्या को दूर करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और रेलवे मिलकर बड़ा विकास कार्य करने की तैयारी में हैं. इसके तहत सड़क और रेलवे दोनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी।  वर्तमान में इस रेल पुल के नीचे एकल मार्ग होने के कारण यहां वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारी असुविधा होती है। अब एनएचएआई और रेलवे मिलकर यहां एक मेगा डबल एक्शन प्लान पर काम कर रहे हैं। इस विस्तृत योजना के तहत, हाईवे को टू-लेन करने के लिए पास की पहाड़ी को काटकर रास्ता निकाला जाएगा। नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनेगा : मुख्य रेल ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुल के नीचे एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा, इस महत्वपूर्ण गलियारे की क्षमता बढ़ाने के लिए यहां तीसरी और चौथी रेल पटरी के लिए भी नए पुल तैयार किए जाएंगे। इस बड़े विकास कार्य के पूरा होने पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारह मुखी हनुमान मंदिर जाने वाले यात्रियों व श्रद्धालुओं का सफर पूरी तरह से सुगम और बाधा रहित हो जाएगा। पहाड़ी काटकर चौड़ा होगा हाईवे योजना के अनुसार नेशनल हाईवे को टू-लेन किया जाएगा. इसके लिए पास की पहाड़ी के एक हिस्से को काटकर सड़क के लिए एक्सट्रा जगह बनाई जाएगी. इससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही आसान होगी और जाम की समस्या काफी कम होने की उम्मीद है।  रेलवे पुल के नीचे बनेगा नया कलवर्ट मुख्य रेलवे ढांचे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल के नीचे एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा. इससे सड़क को पर्याप्त चौड़ाई मिलेगी और वाहनों के निकलने के लिए बेहतर रास्ता तैयार होगा. इसके साथ ही भविष्य में रेल यातायात बढ़ाने के लिए तीसरी और चौथी रेल पटरी के लिए भी नए पुल बनाए जाने की योजना है. इससे इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के संचालन में भी सुविधा होगी।  यह परियोजना पूरी होने के बाद सड़क और रेलवे दोनों का आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है. तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले यात्रियों और श्रद्धालुओं को जाम से राहत मिलेगी. इसके साथ ही बागदेव का यह अनोखा X आकार का संगम आने वाले समय में और सुगम और  आकर्षक पर्यटन की जगह बन सकता है।  मध्य प्रदेश के इटारसी के पास बागदेव के जंगलों में ग्वालियर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेलवे लाइन एक 'एक्स' (X) आकार में एक दूसरे को पार करती हैं, जो ऊपर से देखने पर बहुत सुंदर दिखाई देता है। रेलवे ब्रिज के नीचे सड़क संकरी होने के कारण यहाँ अक्सर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। विशेष रूप से छुट्टियों और धार्मिक अवसरों पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यातायात की समस्या को हल करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को दो-लेन बनाया जाएगा जिसके लिए पहाड़ी को काटा जाएगा, और रेलवे ब्रिज के नीचे पर्याप्त चौड़ाई के साथ एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा।

रेलवे के नए पेंशन नियम लागू, डेथ-डिसएबिलिटी मामलों में अब ऐसे तय होगी पेंशन

   नई दिल्ली रेलवे में नौकरी करने वालों के लिए पेंशन से जुड़ा एक ऐसा नियम आया है, जिसे कर्मचारी और उनके परिवार को जरूर समझना चाहिए. नौकरी के दौरान अगर किसी कर्मचारी को गंभीर बीमारी, हादसे या किसी ऐसी घटना का सामना करना पड़ता है, जिसका संबंध उसकी सेवा से है, तो उसके बाद मिलने वाली पेंशन सामान्य नियमों से अलग हो सकती है. कर्मचारी की स्थिति, मौत या डिसएबिलिटी किस तरह की घटना से जुड़ी है, इसके आधार पर पेंशन का पूरा ढांचा तय होगा।  रेलवे ने अब इसके लिए नए नियम लागू कर दिए हैं. रेलवे बोर्ड ने 'रेल सर्विस एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स, 2026' को नोटिफाई कर दिया है. नए नियमों ने 1993 के एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स की जगह ली है. इनमें सेवा के दौरान मौत या डिसएबिलिटी से जुड़े मामलों के अलावा फैमिली पेंशन, मेडिकल बोर्ड की अपील, डिसएबिलिटी की गणना, सेवा से जुड़ी बीमारियां और पेंशन में देरी जैसे कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।  किन कर्मचारियों और परिवारों को मिलेगा फायदा? नए नियम उन मामलों में लागू होंगे, जहां कर्मचारी की डिसएबिलिटी या मौत का संबंध रेलवे सेवा से हो. अगर कर्मचारी डिसएबिलिटी के बाद भी रेलवे की सेवा में बना रहता है, तब भी इन नियमों के तहत प्रावधान लागू हो सकते हैं. इसके अलावा एक्स्ट्राऑर्डिनरी फैमिली पेंशन के दायरे में आने वाले परिवार भी इन नियमों से कवर होंगे. यानी कर्मचारी की सेवा से जुड़ी मौत की स्थिति में उसके परिवार को मिलने वाली पेंशन भी घटना की कैटेगरी के हिसाब से तय होगी. NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्होंने 2025 के संबंधित नियमों के तहत कौन-सा विकल्प चुना है।  नए रूल्स में मौत और डिसएबिलिटी की 4 कैटेगरी नए नियमों में सेवा से जुड़ी मौत और डिसएबिलिटी को चार कैटेगरी में बांटा गया है. इन्हीं कैटेगरी से यह तय होगा कि कर्मचारी या उसके परिवार को किस तरह का पेंशन लाभ मिलेगा।  Category A: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो प्राकृतिक कारणों से हुई हो और जिसका रेलवे सेवा से कोई संबंध नहीं हो।  Category B: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो रेलवे सेवा के कारण हुई हो या सेवा की वजह से बढ़ी हो।  Category C: दंगे, हिंसा, खराब मौसम, राहत या बचाव अभियान जैसी गंभीर परिस्थितियों में हुई मौत या डिसएबिलिटी।  Category D: आतंकवादी हमले, युद्ध जैसी परिस्थितियों या दुश्मन की कार्रवाई से जुड़े मामले।  यानी हर मामले में एक जैसा पेंशन नियम लागू नहीं होगा. घटना की प्रकृति के आधार पर कर्मचारी या परिवार का लाभ बदल सकता है।  डिसएबिलिटी पेंशन कैसे तय होगी? नई व्यवस्था में डिसएबिलिटी पेंशन को दो हिस्सों में बांटा गया है- सर्विस एलीमेंट और डिसएबिलिटी एलीमेंट. सर्विस एलीमेंट कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी यानी इमोल्यूमेंट्स या एवरेज इमोल्यूमेंट्स के 50% के बराबर होगा, जो भी अधिक हो. कैटेगरी B, C और D में 100% डिसएबिलिटी होने पर डिसएबिलिटी एलीमेंट 30% होगा. इस तरह 100% डिसएबिलिटी की स्थिति में पेंशन का ढांचा 50% सर्विस एलीमेंट और 30% डिसएबिलिटी एलीमेंट से बनेगा. खास बात यह है कि इसके लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग सर्विस की शर्त नहीं रखी गई है. यानी 10 साल से कम सेवा वाले कर्मचारी को भी सर्विस एलीमेंट मिल सकता है. हालांकि ऐसी स्थिति में सर्विस ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलेगा।  डिसएबिलिटी का प्रतिशत कैसे तय होगा? डिसएबिलिटी का प्रतिशत भी पेंशन तय करने में अहम भूमिका निभाएगा. मेडिकल बोर्ड अगर डिसएबिलिटी 50% तक तय करता है, तो डिसएबिलिटी एलीमेंट के लिए 50% ही माना जाएगा. अगर डिसएबिलिटी 50% से ज्यादा और 75% तक है, तो गणना के लिए इसे 75% माना जाएगा. वहीं 75% से ज्यादा और 100% तक डिसएबिलिटी होने पर 100% माना जाएगा. इस व्यवस्था को डिसएबिलिटी की ब्रॉड-बैंडिंग कहा गया है. इसका मकसद यह है कि कुछ स्तर की डिसएबिलिटी होने पर पेंशन की गणना कर्मचारी के लिए ज्यादा अनुकूल तरीके से की जा सके।  मौत होने पर परिवार को कितनी पेंशन? यहीं नए नियमों का एक अहम हिस्सा सामने आता है. Extraordinary Family Pension में विधवा या विधुर (जिसकी पत्नी मर गई हो) के अलावा पात्र आश्रित बच्चे, माता-पिता और आश्रित भाई-बहन भी शामिल हो सकते हैं. कैटेगरी A के मामलों में सामान्य पेंशन नियम लागू होंगे. लेकिन सेवा से जुड़ी गंभीर घटनाओं वाली कैटेगरी B, C और D में परिवार को अलग प्रावधान के तहत पेंशन मिलेगी. कैटेगरी B में फैमिली पेंशन कर्मचारी की पे के 60% के बराबर होगी. वहीं कैटेगरी C और D में फैमिली पेंशन कर्मचारी की बेसिक पे के 100% के बराबर होगी।  रेलवे बोर्ड के नियमों के मुताबिक फैमिली पेंशन ₹18,000 से कम नहीं होगी. अगर डिसएबिलिटी पेंशन पा रहा कर्मचारी उसी चोट या बीमारी के कारण बाद में मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उसके लिए भी अलग प्रावधान दिए गए हैं. डिसएबिलिटी रिटायरमेंट की तारीख से सात साल के भीतर ऐसी मौत होने पर संबंधित कैटेगरी के तहत Extraordinary Pension का लाभ परिवार को मिल सकता है।  नौकरी जारी रही तो क्या होगा? मान लीजिए किसी कर्मचारी को डिसएबिलिटी हुई, लेकिन रेलवे ने उसे नौकरी से हटाने के बजाय सेवा में बनाए रखा. ऐसी स्थिति में उसे हर महीने डिसएबिलिटी एलीमेंट नहीं मिलेगा. इसके बजाय डिसएबिलिटी एलीमेंट की कैपिटलाइज्ड वैल्यू के आधार पर एकमुश्त मुआवजा दिया जाएगा. गजट नोटिफिकेशन में इसका उदाहरण भी दिया गया है. अगर कर्मचारी की उम्र 40 साल है, बेसिक पे ₹30,000 महीना है, वह Category B में आता है और डिसएबिलिटी 40% है, तो 30% डिसएबिलिटी एलीमेंट और 9.075 के कम्यूटेशन फैक्टर के आधार पर एकमुश्त रकम ₹3,92,040 बनती है।  पेंशन के लिए अलग से आवेदन नहीं नए नियमों में कर्मचारियों और परिवारों के लिए एक अहम राहत आवेदन की प्रक्रिया को लेकर है. डिसएबिलिटी पेंशन या Extraordinary Family Pension के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. संबंधित केस की जांच और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हेड ऑफ ऑफिस की होगी. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर मामले पर फैसला किया जाएगा. डिसएबिलिटी पेंशन के मामलों में तय समय के भीतर पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी करना होगा।  पेंशन में देरी हुई तो इंटरेस्ट मिलेगा नए नियमों में पेंशन भुगतान में … Read more

त्योहारी सीजन में रेल यात्रियों को राहत, दुर्गा पूजा से छठ तक चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

झाँसी  रेल प्रशासन द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि रेलवे द्वारा दुर्गा पूजा, दीपावली एवं छठ पूजा के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन विशेष ट्रेनों में झाँसी मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए संबंधित विवरण निम्नानुसार है। 1. गाड़ी संख्या 01703/01704 जबलपुर–हरिद्वार–जबलपुर साप्ताहिक विशेष ट्रेन यह विशेष ट्रेन जबलपुर से प्रत्येक गुरुवार तथा हरिद्वार से प्रत्येक शुक्रवार चलेगी। संचालन अवधि: 01703 जबलपुर से 22 अक्टूबर 2026 से 19 नवम्बर 2026 तक 5 फेरे तथा 01704 हरिद्वार से 23 अक्टूबर 2026 से 20 नवम्बर 2026 तक 5 फेरे। 2. गाड़ी संख्या 01707/01708 जबलपुर–नई दिल्ली/हज़रत निजामुद्दीन–जबलपुर साप्ताहिक विशेष ट्रेन यह विशेष ट्रेन जबलपुर से प्रत्येक शनिवार तथा हज़रत निजामुद्दीन से प्रत्येक रविवार चलेगी। संचालन अवधि: 01707 जबलपुर से 17 अक्टूबर 2026 से 14 नवम्बर 2026 तक 5 फेरे तथा 01708 हज़रत निजामुद्दीन से 18 अक्टूबर 2026 से 15 नवम्बर 2026 तक 5 फेरे। यात्रियों के लिए अपील: यात्रा से पहले अपनी गाड़ी, तिथि एवं समय की पुष्टि कर लें तथा निर्धारित समय से पर्याप्त पहले स्टेशन पहुँचें। ट्रेन संख्या 01703/01704 – जबलपुर–हरिद्वार विशेष ट्रेन स्टेशन    01703 जबलपुर–हरिद्वार    01704 हरिद्वार–जबलपुर     आगमन    प्रस्थान    आगमन    प्रस्थान जबलपुर    17.10    15.30    16.20    — कटनी मुरवारा    17.17    17.15    14.20    14.30 दमोह    18.40    18.42    12.20    12.22 सागर    19.50    19.55    11.15    11.20 बीना मालखेड़ी    21.00    21.02    10.00    10.02 अगासोद    —    21.45    —    08.30 वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी    00.05    00.10    05.55    06.00 ग्वालियर जंक्शन    02.15    02.20    04.20    04.25 आगरा कैंट    04.20    04.25    01.40    01.45 मितावली    —    05.40    —    00.30 अलीगढ़ जंक्शन    07.03    07.05    23.15    23.17 खुर्जा जंक्शन    08.00    08.02    22.05    22.07 हापुड़    09.30    09.35    20.10    20.15 मेरठ सिटी    10.30    10.35    19.30    19.35 टपरी    —    12.10    —    17.15 रुड़की    13.15    13.17    16.20    16.22 हरिद्वार    14.20    —    —    15.10 ट्रेन संख्या 01707/01708 – जबलपुर–नई दिल्ली साप्ताहिक विशेष ट्रेन स्टेशन    01707 जबलपुर–नई दिल्ली    01708 नई दिल्ली–जबलपुर     आगमन    प्रस्थान    आगमन    प्रस्थान जबलपुर    —    20.20    09.30    — कटनी मुरवारा    21.35    21.40    06.10    06.15 दमोह    22.55    22.57    04.40    04.42 सागर    00.15    00.20    03.30    03.35 अगासोद    —    03.00    —    02.30 वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी    05.55    06.00    00.05    00.10 ग्वालियर जंक्शन    07.30    07.35    22.40    22.45 धौलपुर जंक्शन    08.50    08.52    21.45    21.47 आगरा कैंट    09.35    09.40    20.30    20.35 मथुरा जंक्शन    10.35    10.40    19.35    19.40 कोसी कलां    11.10    11.12    17.15    17.17 पलवल    —    13.20    —    16.42 नई दिल्ली    14.25    —    —    15.45 यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण अपील पटाखे साथ न लाएँ — सुरक्षित यात्रा अपनाएँ। ज्वलनशील वस्तुओं से दूरी रखें — स्वयं और दूसरों की सुरक्षा करें। कम सामान, सुखद सफर — आवश्यक सामान के साथ ही यात्रा करें