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यूपी पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ा, अब ₹9 हजार मिलेगी सैलरी

लखनऊ प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के लिए कई अहम निर्णय लेने की तैयारी कर ली है। वर्तमान में 6000 रुपये प्रतिमाह मानदेय पाने वाले पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर 9000 रुपये किया जाएगा। साथ ही मानदेय का भुगतान सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से करने, महिला पंचायत सहायकों को नियमानुसार मातृत्व अवकाश देने और पंचायत सहायकों को रखने व हटाने से जुड़े मामलों में जिलाधिकारी की भूमिका सुनिश्चित करने की बात कही गई है। आंदोलन और मांगों से जुड़े मुकदमों की समीक्षा कर नियमानुसार उन्हें वापस लेने की कार्रवाई भी होगी। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की अध्यक्षता में पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए गए। मानदेय में तीन हजार रुपये की मासिक बढ़ोतरी होने से पंचायत सहायकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा। डीबीटी की व्यवस्था होगी लागू प्रदेश में 57 हजार से अधिक पंचायत सहायक हैं। अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि ग्राम प्रधान स्तर से मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति की शिकायतों के समाधान के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति से संबंधित मामलों में जिलाधिकारी की भूमिका व अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे। महिला पंचायत सहायकों को शासन के नियमों के अनुसार मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा। पंचायत सहायकों के आंदोलन व उनकी मांगों से संबंधित दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर विधिक प्रक्रिया के तहत वापसी की कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि पंचायत सहायक पंचायती राज व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। पंचायतीराज मंत्री की वार्ता के बाद धरना दे रहे पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है।  

सतत विकास लक्ष्यों को गति देने में यूपी की पहल, स्वास्थ्य-शिक्षा और पोषण पर योगी सरकार का फोकस

लखनऊ  सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के क्षेत्रों में योजनाओं को प्रभावी बनाने के साथ डेटा, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में बुधवार को होटल क्लार्क्स अवध में सशक्त भविष्य: शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को गति विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, डिजिटल हेल्थ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कौशल विकास और सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रमुख आधार हैं। सफल प्रयासों और नवाचारों को साझा कर प्रभावी रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। डेटा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के बेहतर उपयोग से योजनाओं के परिणामों को प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के पहले सत्र में स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बेहतर परिणामों के लिए डेटा, तकनीक और नवाचार के प्रभावी इस्तेमाल को जरूरी बताया। अपर मुख्य सचिव, बाल विकास एवं पुष्टाहार लीना जौहरी ने बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके पॉल ने स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में निवेश को मानव विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। पैनल चर्चा में रोकथाम योग्य मौतों, बच्चों में कम वजन और अविकसित शारीरिक विकास जैसी चुनौतियों पर विचार हुआ। स्वास्थ्य ढांचे और डेटा व्यवस्था को एआई से मजबूत करने पर हिमांशु बुराड, पीयूष एंटनी ,डॉ. कनिका अग्रवाल और डॉ आलोक सक्सेना ने विचार साझा किए। दूसरे सत्र में शिक्षा और कौशल विकास पर जोर रहा। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सतत विकास लक्ष्यों की आधारशिला बताया। प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरि ओम ने शिक्षा के साथ कौशल विकास को युवाओं के रोजगार और बेहतर अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। वहीं शंकर नारायणन, विनोद कराटे, सुनील कुमार, प्रेम रंजन सिंह और विष्णुकांत पांडेय ने नामांकन, बच्चों को विद्यालयों में बनाए रखने, डिजिटल कौशल और सीखने के बेहतर परिणामों पर चर्चा की। चौथी औद्योगिक क्रांति के अनुरूप कौशल, रोजगार और करियर में बदलाव पर प्रो. बलवंत सिंह मेहता, डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, डॉ. अनन्या समाजदार, प्रणव बंसोडे और दीपक कुमार सिंह ने विचार रखे। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों को गति देने पर भी मंथन हुआ।

बिहार में बसेंगे नए स्मार्ट शहर, ग्रीनफील्ड टाउनशिप की प्लानिंग में CEPT की मदद

 पटना बिहार में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर काम में तेजी ला दी गई है. इस प्रोजेक्ट के तहत कई जिलों में नए शहर बसाए जायेंगे. यहां लोगों को घर, बाजार, सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी, विकास और पर्यावरण के साथ-साथ अन्य सुविधाएं मिलेंगी. शहर की प्लानिंग में एक्सपर्ट को किया शामिल जानकारी के मुताबिक, इसके लिए अब बिहार सरकार ने शहरी विकास की प्लानिंग में एक्सपर्ट को शामिल किया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने अहमदाबाद स्थित सेंटर फॉर इनवायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी एडवाइजरी फाउंडेशन यानी CEPT के साथ तकनीकी सहायता इकाई यानी TSU स्थापित करने के लिए समझौता किया है. नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में समझौता हुआ साइन नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में इस समझौते पर साइन किया गया. विभाग की ओर से विशेष सचिव-सह-बिहार नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवल किशोर चौधरी और CEPT एडवाइजरी फाउंडेशन के निदेशक दर्शन पारिख ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार भी मौजूद रहे. पूरा खाका किया जाएगा तैयार बताया जा रहा है कि तकनीकी सहायता इकाई के जरिए नए शहरी इलाकों की प्लानिंग कई लेवल पर किए जायेंगे. सबसे पहले यह देखा जाएगा कि कहां आवासीय इलाके हों, कहां व्यावसायिक इलाके विकसित किए जाएं और कहां दूसरी जरूरी सुविधाएं बनाई जाए. इसके साथ ही सड़क, आधारभूत ढांचे और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी का भी पूरा खाका तैयार किया जाएगा. इससे साफ है कि लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही सभी सुविधाएं तय की जायेंगी. डेटा आधारित होगी पूरी योजना इस पूरी योजना की खास बात यह बताई जा रही है कि यह पूरी तरह डेटा आधारित होगा. शहरी विकास की योजनाएं वैज्ञानिक अध्ययन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाएंगी. टाउनशिप में आधुनिक सुविधाएं देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर रहेगा. सड़क, परिवहन, कनेक्टिविटी और दूसरी नागरिक सुविधाओं की योजना लोगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी. मंत्री नीतीश मिश्रा ने क्या कहा? इस योजना को लेकर मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि समृद्ध बिहार के विजन के अनुरूप भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए शहरी इलाकों का विकास किया जा रहा है. CEPT जैसी विशेषज्ञ संस्था के सहयोग से ग्रीनफील्ड टाउनशिप को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद मिलेगी.

कवर्धा के पीवीजीटी क्षेत्र में बाल अधिकारों की गूंज, डॉ. वर्णिका शर्मा ने लगाई बाल चौपाल 2.0

कवर्धा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की माननीय अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 16 सितंबर 2026 को कवर्धा जिले के दौरे के दौरान दूरस्थ आदिवासी अंचल के बैगा समुदाय से लेकर जिला मुख्यालय तक बाल अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर व्यापक निरीक्षण एवं समीक्षा की। उन्होंने बैरख तहसील के विशेष जनजाति बैगा आदिवासी क्षेत्र में बाल चौपाल 2.0 के माध्यम से बच्चों से सीधे संवाद किया, विभिन्न शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थानों का निरीक्षण किया तथा जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टर सभागृह में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ योजनाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र के बच्चे प्रतिभाशाली और होनहार हैं तथा उन्हें बेहतर अवसर, तकनीकी संसाधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराकर उनके भविष्य को और मजबूत किया जा सकता है। विभिन्न संस्थाओं का निरीक्षण तत्काल सुधार के निर्देश निरीक्षण के दौरान आदिवासी बालक आश्रम बैरख एवं अन्य संस्थानों में साफ-सफाई की कमी, भंडार गृह में गंदगी, शिक्षकों की कमी तथा मलेरिया से बचाव की व्यवस्थाओं में कमियां सामने आईं। आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मलेरिया से बचाव के लिए नई मच्छरदानियां उपलब्ध कराने, शिक्षकों की कमी के संबंध में उपस्थित ABEO को उचित पत्राचार कर आयोग को अवगत कराने तथा संस्थानों में स्वच्छता और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। हाई स्कूल में साइंस इक्विपमेंट की कमी और अव्यवस्था पाए जाने पर भी उसे तत्काल ठीक कराने की सख्त हिदायत दी गई। शासकीय बालक गृह कवर्धा का भी निरीक्षण किया गया, जहां आयोग अध्यक्ष ने बच्चों के साथ रात्रि भोजन किया तथा बाल गृह के एक बच्चे का जन्मदिन भी मनाया। बाल चौपाल 2.0 में खुलकर बोले बैरख के बच्चे कवर्धा मुख्यालय से दूरस्थ विशेष जनजातीय आदिवासी अंचल की तहसील बैरख में आयोजित बाल चौपाल 2.0 में बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बच्चों ने अपनी झिझक दूर करते हुए आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के सामने खुलकर अपनी बात रखी और अपने अनुभव साझा किए। चौपाल में क्विज, बाल अधिकारों पर आधारित सांप-सीढ़ी जैसे रोचक खेलों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। बच्चों ने प्रेरणादायक कहानियां और अपने जीवन से जुड़ी यादें भी साझा कीं। गुड टच-बैड टच, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और बाल विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी बच्चों की जागरूकता पर चर्चा हुई। आयोग अध्यक्ष ने बच्चों की प्रतिभा और उत्साह को देखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया मुहिम से जोड़कर डिजिटल अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। एकलव्य विद्यालय तरेगांव में बच्चों संग मनाया प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन एकलव्य आवासीय विद्यालय तरेगांव में आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने  विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर बच्चों ने प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के प्रति अपनी प्रेरणा व्यक्त करते हुए कहा कि वे उनके संघर्ष और राष्ट्र के लिए समर्पण से प्रभावित हैं। विद्यार्थियों ने बेहतर भविष्य के निर्माण के साथ राष्ट्र सेवा में अपना हर संभव योगदान देने का संकल्प लिया। एकलव्य विद्यालय तरेगांव में उन्होंने बच्चों से विभिन्न विषयों पर संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्य जाने। डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों की समस्याओं को समय रहते सामने लाने के लिए समय-समय पर काउंसलिंग एवं आवश्यक सैंपलिंग की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया, ताकि बच्चे बिना झिझक अपनी बात रख सकें। कलेक्टर सभागृह में कड़ी समीक्षा कवर्धा मुख्यालय स्थित कलेक्टर सभागृह में आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने जिले से जुड़े विभिन्न बाल अधिकार एवं विभागीय विषयों की समीक्षा की। बैठक में सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान बच्चों से जुड़े मामलों, संस्थागत व्यवस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर जानकारी ली गई। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को बाल अधिकारों से जुड़े प्रकरणों में संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करने तथा बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। योजना वार समीक्षा के दौरान आश्रम शालाओं और छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने हेतु आदिवासी विकास विभाग को निर्देश दिए गए। स्कूल में स्थाई शिक्षक की नियुक्ति होने तक अतिथि शिक्षक की व्यवस्था हेतु निर्देश दिए गए, मुख्यत गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषयों के शिक्षक की व्यवस्था हेतु निर्देश दिए गए। Cotpa एक्ट और बालश्रम अधिनियम अंतर्गत विभिन्न विभागों के मध्य निरंतर अनुश्रवण के माध्यम से अभियान का संचालन करने के निर्देश दिए गए। पीसीपीएनडीटी act के सही संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए। महिला बाल विकास और श्रम विभाग द्वारा सतत समन्वय स्थापित कर PMMVY और मिनीमाता महतारी जतन योजना के हितग्राहियों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

दिवंगत अधिवक्ताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि दी मुख्यमंत्री ने, परिवार को दिया आर्थिक संबल

गोरखपुर हर जरूरतमंद के साथ आत्मिक संवेदना रखते हुए भरपूर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार शाम दिवंगत अधिवक्ताओं आलोक कुमार अस्थाना और संजय सिंह के परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया। दोनों अधिवक्ताओं की 6 सितंबर को आकाशीय बिजली की चपेट में आकर दुखद मृत्यु हो गई थी। गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने दोनों अधिवक्ताओं के घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिजनों को 15-15 लाख रुपये के चेक सौंपे। कल्याण मंडपम का लोकार्पण करने के बाद मुख्यमंत्री राप्तीनगर विस्तार कॉलोनी में दिवंगत अधिवक्ता आलोक कुमार अस्थाना के घर पहुंचे। यहां उन्होंने स्मृतिशेष अस्थाना के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिजनों को 10 लाख रुपये की धनराशि का चेक मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तथा 5 लाख रुपये का चेक अधिवक्ता कल्याण कोष से प्रदान किया। इसके बाद वह शक्ति नगर में दिवंगत अधिवक्ता संजय सिंह के घर गए। उनके चित्र पर पुष्पार्चन कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने संजय सिंह के परिवार को 10 लाख रुपये की राशि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तथा 5 लाख रुपये की धनराशि अधिवक्ता कल्याण कोष से प्रदान की। उन्होंने दोनों अधिवक्ताओं के परिजनों को आश्वस्त किया कि दुख की इस घड़ी में वह परिवार के साथ हैं। उल्लेखनीय है कि सीएम योगी के निर्देश पर दोनों अधिवक्ताओं के परिजनों को पूर्व में भी 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता आपदा कोष से दी गई थी।

सिवानी से फतेहाबाद-पातड़ा तक बिछेंगी 400 केवी लाइनें, 12 हजार करोड़ की योजना

 फतेहाबाद  राजस्थान के मरुस्थल में तैयार हो रही सस्ती और हरित सौर ऊर्जा जल्द ही हरियाणा और पंजाब के शहरों तक पहुंचाने की तैयारी है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत बीकानेर से 400 केवी की हाई वोल्टेज बिजली लाइनें सिवानी मंडी तक पहुंचेंगी और यहां से अलग-अलग रूट के जरिए आगे भेजी जाएंगी। इसी कड़ी में फतेहाबाद जिले में सिवानी-पातड़ा 400 केवी और सिवानी-फतेहाबाद पावर ग्रिड परियोजनाओं पर काम चल रहा है। दोनों परियोजनाओं के तहत जिले में कुल 138 लोकेशन पर कार्य से संबंधित गतिविधियां की जानी हैं। बुधवार को डीसी डॉ. विवेक भारती ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) की बैठक में इन परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में तय मानदंडों के अनुसार गुणवत्तापूर्वक कार्य पूरा करने और विभिन्न विभागों व एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल रखने के निर्देश दिए।ॉ सिवानी-फतेहाबाद रूट पर 51 लोकेशन बैठक में पावर ग्रिड के अधिकारियों ने बताया कि सिवानी-पातड़ा 400 केवी परियोजना के तहत टोहाना और भूना क्षेत्र के 11 गांवों में 87 लोकेशन शामिल हैं। वहीं सिवानी-फतेहाबाद पावर ग्रिड परियोजना के तहत चार गांवों में 51 लोकेशन पर कार्य किया जाना है। सिवानी मंडी से फतेहाबाद तक प्रस्तावित लाइन की कुल लंबाई 165 किलोमीटर होगी और इस मार्ग पर 197 बड़े बिजली टावर लगाए जाएंगे। इनमें 57 पोल सिवानी क्षेत्र, 89 हिसार जिले की सीमा और 51 पोल फतेहाबाद जिले में लगाए जाएंगे। परियोजना के तहत फतेहाबाद शहर के बस स्टैंड के समीप स्थित 220 केवी सब-स्टेशन तक बिजली लाइन पहुंचाने की योजना है। पातड़ा तक जाएगा दूसरा 400 केवी रूट दूसरी 400 केवी लाइन सिवानी से पंजाब के पातड़ा तक जाएगी। इसकी कुल लंबाई 281 किलोमीटर होगी और पूरे रूट पर 354 बड़े बिजली पोल लगाए जाएंगे। योजना के अनुसार भिवानी में 57, हिसार में 118, फतेहाबाद में 85 और जींद में आठ स्थानों पर पोल स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद लाइन पंजाब में प्रवेश करेगी, जहां संगरूर में 48 और पातड़ा क्षेत्र में 38 स्थानों पर टावर खड़े किए जाएंगे। राजस्थान में बड़े स्तर पर सोलर सिस्टम और पार्क स्थापित होने के बाद वहां अतिरिक्त हरित ऊर्जा का उत्पादन बढ़ा है। इसी अतिरिक्त ऊर्जा को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए नई 400 केवी लाइन बिछाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार लाइन के पूरी तरह चालू होने से जिले सहित पूरे उत्तर भारत में बिजली की सप्लाई सुदृढ़ होगी। मुख्य सचिव ने भी वीसी के माध्यम से की समीक्षा मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रगति की बैठक में जिले में चल रही पावर ग्रिड परियोजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति, कार्यों की समयसीमा और संबंधित विभागों व एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा की। डीसी डॉ. विवेक भारती ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं की नियमित मानिटरिंग की जाए और किसी भी स्तर पर प्रशासनिक, तकनीकी या अन्य समस्या सामने आने पर आपसी समन्वय से उसका शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

बालोतरा में LPG चोरी का भंडाफोड़, पिकअप से 64 सिलेंडर जब्त; टैंकर चालक जांच के घेरे में

बाड़मेर  राजस्थान के बालोतरा जिले की हाईटेक पचपदरा रिफाइनरी से निकलने वाली एलपीजी गैस की सप्लाई के दौरान टैंकर चालकों की मिलीभगत से गैस चोरी कर सिलेंडरों में भरने का बड़ा मामला सामने आया है। बालोतरा जिला पुलिस की डीएसटी ने मंगलवार देर रात कुड़ी शरद में कार्रवाई करते हुए एक पिकअप वाहन से करीब 64 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए। इनमें गैस भरकर अवैध रूप से चोरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि टैंकर चालकों की मिलीभगत से रास्ते में टैंकर की सील तोड़कर एलपीजी गैस सिलेंडरों में भरकर चोरी की जाती थी। रिफाइनरी शुरू होने के बाद एलपीजी गैस अलग-अलग डिपो तक टैंकरों के माध्यम से भेजी जा रही थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर टैंकर चालकों की मिलीभगत से रास्ते में टैंकर की सील तोड़ी जाती थी और गैस सिलेंडरों में भरकर चोरी की जा रही थी। लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार की सूचना मिलने के बाद डीएसटी ने कार्रवाई को अंजाम दिया। अंधेरे में चल रहा था खेल डीएसटी ने एक बंद पड़ी होटल के पीछे कार्रवाई करते हुए एलपीजी से भरे टैंकर, पिकअप वाहन और सिलेंडरों को अपने कब्जे में लिया। पुलिस के अनुसार होटल केवल दिखावे के तौर पर संचालित हो रही थी, जबकि पीछे सुनसान स्थान पर अंधेरे में गैस की अवैध रिफिलिंग का कारोबार चल रहा था। डीएसटी प्रभारी आईदान राम ने बताया कि बंद पड़ी होटल के पीछे टैंकरों से गैस चोरी कर सिलेंडरों में भरने की गतिविधि चल रही थी। पुलिस की कार्रवाई देर रात तक जारी रही। नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कार्रवाई के बाद पुलिस अब इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों और टैंकर चालकों की भूमिका की जांच में जुटी है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर लंबे समय से चल रहे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्रवाई पूरी होने के बाद पुलिस मामले का विस्तृत खुलासा कर सकती है। इससे अवैध कारोबार से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। साथ ही नेटवर्क से जुड़े लोगो की तलाश के लिए जगह-जगह छापेमारी की कार्रवाई चल रही है।

ओजोन संरक्षण को जलवायु परिवर्तन से जोड़ने की जरूरत, मुख्य सचिव ने जनभागीदारी पर दिया जोर

जयपुर विश्व ओजोन दिवस के अवसर मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने सचिवालय में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के  पोस्टर का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक कवच है। इसके संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयास यह दर्शाते हैं कि विज्ञान आधारित नीतियों, प्रभावी क्रियान्वयन और सामूहिक भागीदारी के माध्यम से बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि आज ओजोन संरक्षण को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखने की आवश्यकता है। बढ़ते तापमान और शीतलन की बढ़ती जरूरत के बीच ऐसी तकनीकों एवं प्रणालियों को बढ़ावा देना जरूरी है, जो ऊर्जा की बचत के साथ पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालें। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों, युवाओं, शिक्षकों, उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों और आमजन को पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से जोड़कर ही व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। मुख्य सचिव ने कहा कि मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के बाद से ही पर्यावरण रक्षा के गंभीर प्रयास जारी है। ओजोन दिवस का संदेश केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसे आमजन के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सतत शीतलन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता : अध्यक्षा, आरएसपीसीबी कार्यक्रम में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्षा श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि ओजोन परत का संरक्षण केवल एक वैश्विक पर्यावरणीय दायित्व नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा विषय है। वर्तमान में बढ़ते तापमान के कारण शीतलन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल शीतलन तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। अरोरा ने कहा कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जन-जागरूकता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उद्योगों एवं आमजन को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अरोरा ने कहा कि ओजोन संरक्षण की सफलता हमें यह संदेश देती है कि जब सरकार, उद्योग और समाज एक साझा उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हैं तो पर्यावरणीय बदलाव संभव है। पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सफल बनाने के लिए आमजन की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। ऊर्जा की बचत, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, पर्यावरण अनुकूल शीतलन साधनों को प्राथमिकता तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपना कर प्रत्येक नागरिक अपना योगदान दे सकता है। जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को और प्रभावी बनाने की जरूरत : एसीएस, वन एवं पर्यावरण अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार ने कहा कि ओजोन संरक्षण वैश्विक पर्यावरणीय सहयोग की एक महत्वपूर्ण सफलता का उदाहरण है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और उसके तहत किए गए प्रयासों ने यह साबित किया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं निरंतर प्रतिबद्धता के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए पर्यावरण सचिव शैलजा देवल ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भविष्यगामी एप्रोच के साथ काम कर रही है। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, पर्यावरण प्रदूषण का सीधा असर पड़ा है। प्रजातियां नष्ट हो रही है तो नेपाल त्रासदी जैसी घटनाएं हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें उर्जा दक्षता, रिसाइक्लिंग और पानी की बूंद बूंद बचत की और ध्यान देना होगा। इस दौरान मैसर्स एसआरएफ लिमिटेड, भिवाड़ी के सहायक उपाध्यक्ष पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मुकेश किरार ने “ओजोन परत का संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन में कमी” विषय पर ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के प्रभाव तथा उनके नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। वहीं मैसर्स डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नीमराना के प्रबंधक पर्यावरण एवं स्थायित्व शिवदीप सिंह ने “सतत शीतलन की आवश्यकता” विषय पर ऊर्जा दक्ष शीतलन तकनीकों, पर्यावरण अनुकूल प्रशीतकों तथा सतत शीतलन समाधानों की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। गौरतलब है कि विश्व ओजोन दिवस 2026 की थीम “शीतल ग्रह के लिए वैश्विक कार्यवाही” का मूल संदेश ओजोन परत की सुरक्षा और जलवायु संरक्षण के लिए वैश्विक प्रतिबद्धताओं को स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई में बदलना है। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि ओजोन संरक्षण केवल वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों या सरकारी विभागों का विषय नहीं है, बल्कि हर नागरिक से जुड़ा दायित्व है। विद्यार्थियों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, उद्योगों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक और नीति-निर्माताओं से लेकर आम परिवारों तक सभी की सहभागिता पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूत कर सकती है। ऊर्जा बचत, पर्यावरण अनुकूल शीतलन उपकरणों का चयन, उपकरणों का उचित रखरखाव तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने जैसे छोटे-छोटे कदम सामूहिक रूप से बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। इस अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल, विष्णु दत्त पुरोहित, मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी शीबा, अतिरिक्त पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर सहित मंडल के अन्य अधिकारी, विशेषज्ञ, औद्योगिक प्रतिनिधि एवं प्रतिभागी मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने ओजोन परत के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा पर्यावरण अनुकूल शीतलन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर विचार साझा किए।

18 सितंबर को डूसू चुनाव, दिल्ली यूनिवर्सिटी में सुरक्षा बढ़ी; कॉलेजों में तैनात होंगे शिक्षक

 नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में शिक्षकों की भूमिका और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त संदेश दिया है। कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके शिक्षकों के लिए सभी विद्यार्थी बराबर हैं। इसलिए शिक्षक किसी भी तरह के पक्षपात से बचें। उन्होंने डूसू चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी संबंधित पक्षों को पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी। बुधवार को कुलगुरु की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अधिकारियों, कॉलेजों के प्राचार्यों, छात्रावासों के प्रोवोस्ट और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक हुई। इसमें चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। पुलिस समन्वय के लिए हर कॉलेज में नियुक्त होगा शिक्षक कुलगुरु ने सभी प्राचार्यों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने कॉलेजों में अगले तीन-चार दिनों तक सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए रखें। प्रत्येक कॉलेज में एक शिक्षक को पुलिस के साथ समन्वय के लिए नियुक्त किया जाएगा। चुनाव प्रबंधन में शिक्षकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। कुलगुरु ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया बेहतर तरीके से संपन्न कराने में मदद मिलेगी। 17 को पहुंचेंगी ईवीएम, 18 को मतदान बैठक में बताया गया कि मतदान से एक दिन पहले 17 सितंबर को कॉलेजों में ईवीएम पहुंचाई जाएंगी। इसके लिए सुबह आठ बजे से प्रक्रिया शुरू होगी और नियुक्त मास्टर ट्रेनर ईवीएम पहुंचाएंगे। 18 सितंबर को डे-क्लास के विद्यार्थियों के लिए सुबह 8:30 बजे से दोपहर एक बजे तक और इवनिंग-क्लास के विद्यार्थियों के लिए दोपहर तीन बजे से शाम 7:30 बजे तक मतदान होगा। मतदान के बाद ईवीएम को छात्र प्रतिनिधियों और चुनाव अधिकारियों की मौजूदगी में सील कर मल्टीपर्पस हॉल (यूनिवर्सिटी इंडोर स्टेडियम) में जमा कराया जाएगा। 19 सितंबर को इसी हॉल में मतगणना होगी। संवेदनशील स्थानों पर रात में गश्त, महिला कॉलेजों में विशेष सुरक्षा चुनाव के दौरान संवेदनशील स्थानों पर हिंसा रोकने के लिए 18 सितंबर तक रात में पुलिस गश्त जारी रहेगी। मतदान के दिन कॉलेजों, विभागों और संस्थानों के बाहर पुलिस तैनात रहेगी। महिला कॉलेजों में महिला पुलिसकर्मियों की व्यवस्था भी की जाएगी। बैठक में डीन ऑफ कॉलेज प्रो. बलराम पाणी, साउथ कैंपस निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता, मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. राज किशोर शर्मा, मुख्य रिटर्निंग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह समेत विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, छात्रावासों के प्रोवोस्ट-वार्डन और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

मखाना-लीची की वैश्विक पहचान, फिर भी बिहार के निर्यात में कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी बेहद कम

 पटना निर्यात के मोर्चे पर बिहार की स्थिति कभी अच्छी रही नहीं। औद्योगिक आधार नहीं होना इसका प्रमुख कारण है। दूसरा कारण व्यवस्थागत सुस्ती है। अगर ऐसा नहीं होता तो कृषि और वानिकी के कई उत्पाद विदेशी बाजार में आज धूम मचा रहे होते। इस श्रेणी में अलबत्ता मखाने का नाम लिया जाएगा, जो कि राजनीति का सुपर फूड हो गया है। यही कारण है कि निर्यात का सारा ढिंढोरा मखाने तक सिमट जा रहा। वास्तविकता यह है कि बिहार के कृषि व सहवर्ती उत्पाद और निर्यात में मखाने की मात्रा एक प्रतिशत भी नहीं। 2025-26 में बिहार से 18713.10 करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए गए। उसमें सर्वाधिक निर्यात पेट्रोलियम उत्पाद का हो रहा। फल और सब्जी की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत से भी कम रही। मखाना और लीची इसी ढाई प्रतिशत के अंश हैं। मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी हुई है। इनके अलावा भी कृषि-वानिकी के कई और उत्पाद हैं, जिनके उत्पाद में बिहार बादशाह है। मक्का, सिंघाड़ा, लौकी, मशरूम आदि इसी श्रेणी में हैं। प्रसंस्करण, वैल्यू एड, विपणन और निर्यात आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसा तब जबकि बिहार की निर्यात प्रोत्साहन नीति भी है। वाणिज्यिक प्रतिस्पर्द्धा की कमतर स्थिति के कारण यह नीति बहुत प्रभाव नहीं छोड़ पा रही। इसके अलावा व्यवस्था को लालफीताशाही की आदत-सी हो गई है। बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास बहरहाल देश के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास झूल रही। पिछले एक दशक से यही स्थिति बनी हुई है। इससे आगे निकलने के प्रयास में जब कभी विफल हुए, तो सीधा बहाना लैंड-लॉक्ड राज्य होने का रहा। तब हम हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की उपलब्धि को भूल गए, जो लैंड-लाक्ड होने के बावजूद निर्यात में बिहार से कोसों आगे हैं। हालांकि, अब सरकार के स्तर से इसके लिए पहल हो रही, लेकिन वर्षों की जड़ता को तोड़ने की चुनौती बनी हुई है। अभी सिडबी की ओर से जगत साह बिहार के उद्यमियों-व्यापारियों को निर्यात के तौर-तरीके सिखा रहे। उनका कहना है कि उद्योग-उत्पाद के लिए रॉ-मेटेरियल चाहिए होता है। हम भूल जाते हैं कि निर्यात भी वस्तुत: रा-मेटेरियल ही है। बिहार को यही हुनर सीखना होगा। दो की धूम मखाना: देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार मेंं होता है। प्रतिवर्ष लगभग 40,000 टन प्रोसेस्ड मखाना का उत्पादन है। मिथिला मखाना को जीआइ टैग प्राप्त है। देश से मखाना का कुल निर्यात लगभग 25,130 टन है। यह अमेरिका, यूएई, कनाडा, आस्ट्रेलिया, नेपाल और ब्रिटेन आदि देशों को निर्यात होता है। लीची: देश में लीची के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से तनिक अधिक है। इसी कारण बिहार को लीची का ''राजधानी'' कहा जाता है। प्रतिवर्ष 3,00,000 टन से कुछ अधिक लीची का उत्पादन होता है। शाही लीची को जीआई टैग मिला हुआ है। भारत से प्रतिवर्ष 5000 से 7000 टन लीची निर्यात की जाती है। जीआई टैग प्राप्त बिहार के उत्पाद मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मखाना, शाही लीची, जर्दालु आम, कतरनी चावल, मगही पान, सिलाव का खाजा, मिर्चा धान, भागलपुर सिल्क , सुजनी कढ़ाई, खटवा (एप्लिक वर्क), सिक्की घास उत्पाद, मंजूषा कला, बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट, पिड़िया चित्रकला निर्यात (करोड़ रुपये में) वित्तीय वर्ष     बिहार (करोड़ रुपये)     भारत (करोड़ रुपये)     देश के निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी 2021-22     17,219.63     31,47,021.49     0.55% 2022-23     20,895.04     36,21,549.88     0.58% 2023-24     16,760.79     36,18,952.27     0.46% 2024-25     17,283.18     37,03,412.02     0.47% 2025-26     18,713.10     39,03,730.60     0.48% बिहार से निर्यात में हिस्सेदारी     पेट्रोलियम उत्पाद : 55.48%     भैंसा का मांस : 10.18%     चावल (बासमती से इतर) : 6.63%     ग्रेफाइट, विस्फोटक आदि : 5.03%     चावल से इतर अनाज : 4.01%     रेलवे परिवहन उपकरण : 3.48%     दवा फार्मूलेशन, बायोलॉजिकल्स : 2.01%     ताजा सब्जियां : 1.37%     टायर-ट्यूब : 1.13%     ताजा फल : 0.96% कमी के कारण     बंदरगाहों के काफी दूर होने से परिवहन लागत अधिक     अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना नहीं     स्थानीय स्तर पर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड की कमी     उच्च मूल्य के औद्योगिक-तकनीकी उत्पाद वाले बड़े उद्योग कम     मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन) का अभाव अपेक्षित पहल     बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति का प्रभावी क्रियान्वयन     एयर कार्गो और ड्राई पोर्ट का विकास     मेगा फूड पार्क्स और फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर बनें     निर्यातकों के लिए प्रशिक्षण और जागरुकता     सप्लाई चेन के जोखिमों को कम करना प्रोत्साहन की व्यवस्था बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने और निर्यात को गति देने के लिए बनाई गई है। इसके अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण हस्तशिल्प और जीआइ टैग वाले उत्पादों को विशेष प्राथमिकता देने की व्यवस्था है। एक्सपोर्ट हब: हर जिले को एक ‘एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित करना, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल सके। बुनियादी ढांचा: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) और निर्यात पैक हाउस जैसी आधुनिक लाजिस्टिक्स व बुनियादी सुविधाओं का विकास। राहत अनुदान: बंदरगाह या एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचने वाले पात्र उत्पादों के लिए फ्री आन बोर्ड मूल्य का एक प्रतिशत तक (सात वर्षों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 20 लाख रुपये तक) निर्यात सब्सिडी। पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक निर्यात वृद्धि प्राप्त करने वाली इकाइयों के लिए वृद्धिशील फ्री आन बोर्ड मूल्य पर अतिरिक्त एक प्रतिशत प्रतिपूर्ति (प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक)।