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दिवंगत अधिवक्ताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि दी मुख्यमंत्री ने, परिवार को दिया आर्थिक संबल

गोरखपुर हर जरूरतमंद के साथ आत्मिक संवेदना रखते हुए भरपूर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार शाम दिवंगत अधिवक्ताओं आलोक कुमार अस्थाना और संजय सिंह के परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया। दोनों अधिवक्ताओं की 6 सितंबर को आकाशीय बिजली की चपेट में आकर दुखद मृत्यु हो गई थी। गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने दोनों अधिवक्ताओं के घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिजनों को 15-15 लाख रुपये के चेक सौंपे। कल्याण मंडपम का लोकार्पण करने के बाद मुख्यमंत्री राप्तीनगर विस्तार कॉलोनी में दिवंगत अधिवक्ता आलोक कुमार अस्थाना के घर पहुंचे। यहां उन्होंने स्मृतिशेष अस्थाना के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिजनों को 10 लाख रुपये की धनराशि का चेक मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तथा 5 लाख रुपये का चेक अधिवक्ता कल्याण कोष से प्रदान किया। इसके बाद वह शक्ति नगर में दिवंगत अधिवक्ता संजय सिंह के घर गए। उनके चित्र पर पुष्पार्चन कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने संजय सिंह के परिवार को 10 लाख रुपये की राशि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तथा 5 लाख रुपये की धनराशि अधिवक्ता कल्याण कोष से प्रदान की। उन्होंने दोनों अधिवक्ताओं के परिजनों को आश्वस्त किया कि दुख की इस घड़ी में वह परिवार के साथ हैं। उल्लेखनीय है कि सीएम योगी के निर्देश पर दोनों अधिवक्ताओं के परिजनों को पूर्व में भी 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता आपदा कोष से दी गई थी।

सिवानी से फतेहाबाद-पातड़ा तक बिछेंगी 400 केवी लाइनें, 12 हजार करोड़ की योजना

 फतेहाबाद  राजस्थान के मरुस्थल में तैयार हो रही सस्ती और हरित सौर ऊर्जा जल्द ही हरियाणा और पंजाब के शहरों तक पहुंचाने की तैयारी है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत बीकानेर से 400 केवी की हाई वोल्टेज बिजली लाइनें सिवानी मंडी तक पहुंचेंगी और यहां से अलग-अलग रूट के जरिए आगे भेजी जाएंगी। इसी कड़ी में फतेहाबाद जिले में सिवानी-पातड़ा 400 केवी और सिवानी-फतेहाबाद पावर ग्रिड परियोजनाओं पर काम चल रहा है। दोनों परियोजनाओं के तहत जिले में कुल 138 लोकेशन पर कार्य से संबंधित गतिविधियां की जानी हैं। बुधवार को डीसी डॉ. विवेक भारती ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) की बैठक में इन परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में तय मानदंडों के अनुसार गुणवत्तापूर्वक कार्य पूरा करने और विभिन्न विभागों व एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल रखने के निर्देश दिए।ॉ सिवानी-फतेहाबाद रूट पर 51 लोकेशन बैठक में पावर ग्रिड के अधिकारियों ने बताया कि सिवानी-पातड़ा 400 केवी परियोजना के तहत टोहाना और भूना क्षेत्र के 11 गांवों में 87 लोकेशन शामिल हैं। वहीं सिवानी-फतेहाबाद पावर ग्रिड परियोजना के तहत चार गांवों में 51 लोकेशन पर कार्य किया जाना है। सिवानी मंडी से फतेहाबाद तक प्रस्तावित लाइन की कुल लंबाई 165 किलोमीटर होगी और इस मार्ग पर 197 बड़े बिजली टावर लगाए जाएंगे। इनमें 57 पोल सिवानी क्षेत्र, 89 हिसार जिले की सीमा और 51 पोल फतेहाबाद जिले में लगाए जाएंगे। परियोजना के तहत फतेहाबाद शहर के बस स्टैंड के समीप स्थित 220 केवी सब-स्टेशन तक बिजली लाइन पहुंचाने की योजना है। पातड़ा तक जाएगा दूसरा 400 केवी रूट दूसरी 400 केवी लाइन सिवानी से पंजाब के पातड़ा तक जाएगी। इसकी कुल लंबाई 281 किलोमीटर होगी और पूरे रूट पर 354 बड़े बिजली पोल लगाए जाएंगे। योजना के अनुसार भिवानी में 57, हिसार में 118, फतेहाबाद में 85 और जींद में आठ स्थानों पर पोल स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद लाइन पंजाब में प्रवेश करेगी, जहां संगरूर में 48 और पातड़ा क्षेत्र में 38 स्थानों पर टावर खड़े किए जाएंगे। राजस्थान में बड़े स्तर पर सोलर सिस्टम और पार्क स्थापित होने के बाद वहां अतिरिक्त हरित ऊर्जा का उत्पादन बढ़ा है। इसी अतिरिक्त ऊर्जा को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए नई 400 केवी लाइन बिछाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार लाइन के पूरी तरह चालू होने से जिले सहित पूरे उत्तर भारत में बिजली की सप्लाई सुदृढ़ होगी। मुख्य सचिव ने भी वीसी के माध्यम से की समीक्षा मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रगति की बैठक में जिले में चल रही पावर ग्रिड परियोजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति, कार्यों की समयसीमा और संबंधित विभागों व एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा की। डीसी डॉ. विवेक भारती ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं की नियमित मानिटरिंग की जाए और किसी भी स्तर पर प्रशासनिक, तकनीकी या अन्य समस्या सामने आने पर आपसी समन्वय से उसका शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

बालोतरा में LPG चोरी का भंडाफोड़, पिकअप से 64 सिलेंडर जब्त; टैंकर चालक जांच के घेरे में

बाड़मेर  राजस्थान के बालोतरा जिले की हाईटेक पचपदरा रिफाइनरी से निकलने वाली एलपीजी गैस की सप्लाई के दौरान टैंकर चालकों की मिलीभगत से गैस चोरी कर सिलेंडरों में भरने का बड़ा मामला सामने आया है। बालोतरा जिला पुलिस की डीएसटी ने मंगलवार देर रात कुड़ी शरद में कार्रवाई करते हुए एक पिकअप वाहन से करीब 64 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए। इनमें गैस भरकर अवैध रूप से चोरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि टैंकर चालकों की मिलीभगत से रास्ते में टैंकर की सील तोड़कर एलपीजी गैस सिलेंडरों में भरकर चोरी की जाती थी। रिफाइनरी शुरू होने के बाद एलपीजी गैस अलग-अलग डिपो तक टैंकरों के माध्यम से भेजी जा रही थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर टैंकर चालकों की मिलीभगत से रास्ते में टैंकर की सील तोड़ी जाती थी और गैस सिलेंडरों में भरकर चोरी की जा रही थी। लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार की सूचना मिलने के बाद डीएसटी ने कार्रवाई को अंजाम दिया। अंधेरे में चल रहा था खेल डीएसटी ने एक बंद पड़ी होटल के पीछे कार्रवाई करते हुए एलपीजी से भरे टैंकर, पिकअप वाहन और सिलेंडरों को अपने कब्जे में लिया। पुलिस के अनुसार होटल केवल दिखावे के तौर पर संचालित हो रही थी, जबकि पीछे सुनसान स्थान पर अंधेरे में गैस की अवैध रिफिलिंग का कारोबार चल रहा था। डीएसटी प्रभारी आईदान राम ने बताया कि बंद पड़ी होटल के पीछे टैंकरों से गैस चोरी कर सिलेंडरों में भरने की गतिविधि चल रही थी। पुलिस की कार्रवाई देर रात तक जारी रही। नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कार्रवाई के बाद पुलिस अब इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों और टैंकर चालकों की भूमिका की जांच में जुटी है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर लंबे समय से चल रहे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्रवाई पूरी होने के बाद पुलिस मामले का विस्तृत खुलासा कर सकती है। इससे अवैध कारोबार से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। साथ ही नेटवर्क से जुड़े लोगो की तलाश के लिए जगह-जगह छापेमारी की कार्रवाई चल रही है।

ओजोन संरक्षण को जलवायु परिवर्तन से जोड़ने की जरूरत, मुख्य सचिव ने जनभागीदारी पर दिया जोर

जयपुर विश्व ओजोन दिवस के अवसर मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने सचिवालय में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के  पोस्टर का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक कवच है। इसके संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयास यह दर्शाते हैं कि विज्ञान आधारित नीतियों, प्रभावी क्रियान्वयन और सामूहिक भागीदारी के माध्यम से बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि आज ओजोन संरक्षण को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखने की आवश्यकता है। बढ़ते तापमान और शीतलन की बढ़ती जरूरत के बीच ऐसी तकनीकों एवं प्रणालियों को बढ़ावा देना जरूरी है, जो ऊर्जा की बचत के साथ पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालें। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों, युवाओं, शिक्षकों, उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों और आमजन को पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से जोड़कर ही व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। मुख्य सचिव ने कहा कि मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के बाद से ही पर्यावरण रक्षा के गंभीर प्रयास जारी है। ओजोन दिवस का संदेश केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसे आमजन के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सतत शीतलन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता : अध्यक्षा, आरएसपीसीबी कार्यक्रम में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्षा श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि ओजोन परत का संरक्षण केवल एक वैश्विक पर्यावरणीय दायित्व नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा विषय है। वर्तमान में बढ़ते तापमान के कारण शीतलन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल शीतलन तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। अरोरा ने कहा कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जन-जागरूकता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उद्योगों एवं आमजन को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अरोरा ने कहा कि ओजोन संरक्षण की सफलता हमें यह संदेश देती है कि जब सरकार, उद्योग और समाज एक साझा उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हैं तो पर्यावरणीय बदलाव संभव है। पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सफल बनाने के लिए आमजन की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। ऊर्जा की बचत, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, पर्यावरण अनुकूल शीतलन साधनों को प्राथमिकता तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपना कर प्रत्येक नागरिक अपना योगदान दे सकता है। जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को और प्रभावी बनाने की जरूरत : एसीएस, वन एवं पर्यावरण अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार ने कहा कि ओजोन संरक्षण वैश्विक पर्यावरणीय सहयोग की एक महत्वपूर्ण सफलता का उदाहरण है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और उसके तहत किए गए प्रयासों ने यह साबित किया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं निरंतर प्रतिबद्धता के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए पर्यावरण सचिव शैलजा देवल ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भविष्यगामी एप्रोच के साथ काम कर रही है। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, पर्यावरण प्रदूषण का सीधा असर पड़ा है। प्रजातियां नष्ट हो रही है तो नेपाल त्रासदी जैसी घटनाएं हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें उर्जा दक्षता, रिसाइक्लिंग और पानी की बूंद बूंद बचत की और ध्यान देना होगा। इस दौरान मैसर्स एसआरएफ लिमिटेड, भिवाड़ी के सहायक उपाध्यक्ष पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मुकेश किरार ने “ओजोन परत का संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन में कमी” विषय पर ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के प्रभाव तथा उनके नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। वहीं मैसर्स डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नीमराना के प्रबंधक पर्यावरण एवं स्थायित्व शिवदीप सिंह ने “सतत शीतलन की आवश्यकता” विषय पर ऊर्जा दक्ष शीतलन तकनीकों, पर्यावरण अनुकूल प्रशीतकों तथा सतत शीतलन समाधानों की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। गौरतलब है कि विश्व ओजोन दिवस 2026 की थीम “शीतल ग्रह के लिए वैश्विक कार्यवाही” का मूल संदेश ओजोन परत की सुरक्षा और जलवायु संरक्षण के लिए वैश्विक प्रतिबद्धताओं को स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई में बदलना है। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि ओजोन संरक्षण केवल वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों या सरकारी विभागों का विषय नहीं है, बल्कि हर नागरिक से जुड़ा दायित्व है। विद्यार्थियों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, उद्योगों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक और नीति-निर्माताओं से लेकर आम परिवारों तक सभी की सहभागिता पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूत कर सकती है। ऊर्जा बचत, पर्यावरण अनुकूल शीतलन उपकरणों का चयन, उपकरणों का उचित रखरखाव तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने जैसे छोटे-छोटे कदम सामूहिक रूप से बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। इस अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल, विष्णु दत्त पुरोहित, मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी शीबा, अतिरिक्त पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर सहित मंडल के अन्य अधिकारी, विशेषज्ञ, औद्योगिक प्रतिनिधि एवं प्रतिभागी मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने ओजोन परत के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा पर्यावरण अनुकूल शीतलन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर विचार साझा किए।

18 सितंबर को डूसू चुनाव, दिल्ली यूनिवर्सिटी में सुरक्षा बढ़ी; कॉलेजों में तैनात होंगे शिक्षक

 नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में शिक्षकों की भूमिका और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त संदेश दिया है। कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके शिक्षकों के लिए सभी विद्यार्थी बराबर हैं। इसलिए शिक्षक किसी भी तरह के पक्षपात से बचें। उन्होंने डूसू चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी संबंधित पक्षों को पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी। बुधवार को कुलगुरु की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अधिकारियों, कॉलेजों के प्राचार्यों, छात्रावासों के प्रोवोस्ट और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक हुई। इसमें चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। पुलिस समन्वय के लिए हर कॉलेज में नियुक्त होगा शिक्षक कुलगुरु ने सभी प्राचार्यों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने कॉलेजों में अगले तीन-चार दिनों तक सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए रखें। प्रत्येक कॉलेज में एक शिक्षक को पुलिस के साथ समन्वय के लिए नियुक्त किया जाएगा। चुनाव प्रबंधन में शिक्षकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। कुलगुरु ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया बेहतर तरीके से संपन्न कराने में मदद मिलेगी। 17 को पहुंचेंगी ईवीएम, 18 को मतदान बैठक में बताया गया कि मतदान से एक दिन पहले 17 सितंबर को कॉलेजों में ईवीएम पहुंचाई जाएंगी। इसके लिए सुबह आठ बजे से प्रक्रिया शुरू होगी और नियुक्त मास्टर ट्रेनर ईवीएम पहुंचाएंगे। 18 सितंबर को डे-क्लास के विद्यार्थियों के लिए सुबह 8:30 बजे से दोपहर एक बजे तक और इवनिंग-क्लास के विद्यार्थियों के लिए दोपहर तीन बजे से शाम 7:30 बजे तक मतदान होगा। मतदान के बाद ईवीएम को छात्र प्रतिनिधियों और चुनाव अधिकारियों की मौजूदगी में सील कर मल्टीपर्पस हॉल (यूनिवर्सिटी इंडोर स्टेडियम) में जमा कराया जाएगा। 19 सितंबर को इसी हॉल में मतगणना होगी। संवेदनशील स्थानों पर रात में गश्त, महिला कॉलेजों में विशेष सुरक्षा चुनाव के दौरान संवेदनशील स्थानों पर हिंसा रोकने के लिए 18 सितंबर तक रात में पुलिस गश्त जारी रहेगी। मतदान के दिन कॉलेजों, विभागों और संस्थानों के बाहर पुलिस तैनात रहेगी। महिला कॉलेजों में महिला पुलिसकर्मियों की व्यवस्था भी की जाएगी। बैठक में डीन ऑफ कॉलेज प्रो. बलराम पाणी, साउथ कैंपस निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता, मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. राज किशोर शर्मा, मुख्य रिटर्निंग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह समेत विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, छात्रावासों के प्रोवोस्ट-वार्डन और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

मखाना-लीची की वैश्विक पहचान, फिर भी बिहार के निर्यात में कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी बेहद कम

 पटना निर्यात के मोर्चे पर बिहार की स्थिति कभी अच्छी रही नहीं। औद्योगिक आधार नहीं होना इसका प्रमुख कारण है। दूसरा कारण व्यवस्थागत सुस्ती है। अगर ऐसा नहीं होता तो कृषि और वानिकी के कई उत्पाद विदेशी बाजार में आज धूम मचा रहे होते। इस श्रेणी में अलबत्ता मखाने का नाम लिया जाएगा, जो कि राजनीति का सुपर फूड हो गया है। यही कारण है कि निर्यात का सारा ढिंढोरा मखाने तक सिमट जा रहा। वास्तविकता यह है कि बिहार के कृषि व सहवर्ती उत्पाद और निर्यात में मखाने की मात्रा एक प्रतिशत भी नहीं। 2025-26 में बिहार से 18713.10 करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए गए। उसमें सर्वाधिक निर्यात पेट्रोलियम उत्पाद का हो रहा। फल और सब्जी की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत से भी कम रही। मखाना और लीची इसी ढाई प्रतिशत के अंश हैं। मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी हुई है। इनके अलावा भी कृषि-वानिकी के कई और उत्पाद हैं, जिनके उत्पाद में बिहार बादशाह है। मक्का, सिंघाड़ा, लौकी, मशरूम आदि इसी श्रेणी में हैं। प्रसंस्करण, वैल्यू एड, विपणन और निर्यात आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसा तब जबकि बिहार की निर्यात प्रोत्साहन नीति भी है। वाणिज्यिक प्रतिस्पर्द्धा की कमतर स्थिति के कारण यह नीति बहुत प्रभाव नहीं छोड़ पा रही। इसके अलावा व्यवस्था को लालफीताशाही की आदत-सी हो गई है। बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास बहरहाल देश के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास झूल रही। पिछले एक दशक से यही स्थिति बनी हुई है। इससे आगे निकलने के प्रयास में जब कभी विफल हुए, तो सीधा बहाना लैंड-लॉक्ड राज्य होने का रहा। तब हम हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की उपलब्धि को भूल गए, जो लैंड-लाक्ड होने के बावजूद निर्यात में बिहार से कोसों आगे हैं। हालांकि, अब सरकार के स्तर से इसके लिए पहल हो रही, लेकिन वर्षों की जड़ता को तोड़ने की चुनौती बनी हुई है। अभी सिडबी की ओर से जगत साह बिहार के उद्यमियों-व्यापारियों को निर्यात के तौर-तरीके सिखा रहे। उनका कहना है कि उद्योग-उत्पाद के लिए रॉ-मेटेरियल चाहिए होता है। हम भूल जाते हैं कि निर्यात भी वस्तुत: रा-मेटेरियल ही है। बिहार को यही हुनर सीखना होगा। दो की धूम मखाना: देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार मेंं होता है। प्रतिवर्ष लगभग 40,000 टन प्रोसेस्ड मखाना का उत्पादन है। मिथिला मखाना को जीआइ टैग प्राप्त है। देश से मखाना का कुल निर्यात लगभग 25,130 टन है। यह अमेरिका, यूएई, कनाडा, आस्ट्रेलिया, नेपाल और ब्रिटेन आदि देशों को निर्यात होता है। लीची: देश में लीची के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से तनिक अधिक है। इसी कारण बिहार को लीची का ''राजधानी'' कहा जाता है। प्रतिवर्ष 3,00,000 टन से कुछ अधिक लीची का उत्पादन होता है। शाही लीची को जीआई टैग मिला हुआ है। भारत से प्रतिवर्ष 5000 से 7000 टन लीची निर्यात की जाती है। जीआई टैग प्राप्त बिहार के उत्पाद मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मखाना, शाही लीची, जर्दालु आम, कतरनी चावल, मगही पान, सिलाव का खाजा, मिर्चा धान, भागलपुर सिल्क , सुजनी कढ़ाई, खटवा (एप्लिक वर्क), सिक्की घास उत्पाद, मंजूषा कला, बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट, पिड़िया चित्रकला निर्यात (करोड़ रुपये में) वित्तीय वर्ष     बिहार (करोड़ रुपये)     भारत (करोड़ रुपये)     देश के निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी 2021-22     17,219.63     31,47,021.49     0.55% 2022-23     20,895.04     36,21,549.88     0.58% 2023-24     16,760.79     36,18,952.27     0.46% 2024-25     17,283.18     37,03,412.02     0.47% 2025-26     18,713.10     39,03,730.60     0.48% बिहार से निर्यात में हिस्सेदारी     पेट्रोलियम उत्पाद : 55.48%     भैंसा का मांस : 10.18%     चावल (बासमती से इतर) : 6.63%     ग्रेफाइट, विस्फोटक आदि : 5.03%     चावल से इतर अनाज : 4.01%     रेलवे परिवहन उपकरण : 3.48%     दवा फार्मूलेशन, बायोलॉजिकल्स : 2.01%     ताजा सब्जियां : 1.37%     टायर-ट्यूब : 1.13%     ताजा फल : 0.96% कमी के कारण     बंदरगाहों के काफी दूर होने से परिवहन लागत अधिक     अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना नहीं     स्थानीय स्तर पर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड की कमी     उच्च मूल्य के औद्योगिक-तकनीकी उत्पाद वाले बड़े उद्योग कम     मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन) का अभाव अपेक्षित पहल     बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति का प्रभावी क्रियान्वयन     एयर कार्गो और ड्राई पोर्ट का विकास     मेगा फूड पार्क्स और फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर बनें     निर्यातकों के लिए प्रशिक्षण और जागरुकता     सप्लाई चेन के जोखिमों को कम करना प्रोत्साहन की व्यवस्था बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने और निर्यात को गति देने के लिए बनाई गई है। इसके अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण हस्तशिल्प और जीआइ टैग वाले उत्पादों को विशेष प्राथमिकता देने की व्यवस्था है। एक्सपोर्ट हब: हर जिले को एक ‘एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित करना, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल सके। बुनियादी ढांचा: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) और निर्यात पैक हाउस जैसी आधुनिक लाजिस्टिक्स व बुनियादी सुविधाओं का विकास। राहत अनुदान: बंदरगाह या एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचने वाले पात्र उत्पादों के लिए फ्री आन बोर्ड मूल्य का एक प्रतिशत तक (सात वर्षों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 20 लाख रुपये तक) निर्यात सब्सिडी। पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक निर्यात वृद्धि प्राप्त करने वाली इकाइयों के लिए वृद्धिशील फ्री आन बोर्ड मूल्य पर अतिरिक्त एक प्रतिशत प्रतिपूर्ति (प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक)।  

17 सितंबर को रायपुर में होगा भव्य राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलनश्, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे शिरकत

रायपुर  भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर कल यानी 17 सितंबर को राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में एक भव्य राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में प्रदेशभर के श्रमवीरों के सम्मान और उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय इस महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन करेंगे। इस गरिमामयी आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा और मंत्री  केदार कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। आयोजन का उद्देश्य भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रम, कौशल, निर्माण और सृजन की शक्ति का प्रतीक है। निर्माण से लेकर उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र में अपने पसीने से प्रदेश के विकास की मजबूत नींव तैयार करने वाले श्रमिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए यह महासम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। यह आयोजन प्रदेश के श्रमवीरों के परिश्रम और छत्तीसगढ़ के विकास में उनके योगदान का सार्वजनिक अभिव्यक्तिकरण है।  राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मंत्री  रामविचार नेताम,  दयालदास बघेल,  श्याम बिहारी जायसवाल,  ओ.पी. चौधरी,  लक्ष्मी राजवाड़े,  टंकराम वर्मा,  गजेन्द्र यादव,  गुरु खुशवंत साहेब,  राजेश मूणत,  मोतीलाल साहू,  पुंदर मिश्रा,  अनुज शर्मा,  इंद्र कुमार साहू, डॉ. रामप्रताप सिंह,  योगेश दत्त मिश्रा,  किशोर महानंद, रायपुर महापौर  मीनल चौबे और जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक सहभागिता करेंगे।

इसमें 77 हजार भर्तियां अकेले पुलिस व होमगार्ड विभाग में की जाएंगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। इनमें 77 हजार भर्तियां सिर्फ पुलिस व होमगार्ड विभाग में होंगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होने जा रही है। सीएम ने वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं व दिव्यांगजन को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन दी जाती है। जल्द ही पेंशन की धनराशि और लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी। विकास व जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। सीएम योगी बुधवार को गोरखपुर के वार्ड नंबर-53 उर्वरक नगर के अंतर्गत जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम सहित गोरखपुर विकास प्राधिकरण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और नगर निगम की करीब 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी गांव या शहर में नागरिकों के जीवन स्तर का पता विकास और वहां उपलब्ध जनोपयोगी सुविधाओं से चलता है। इसके लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। 2017 के बाद गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में कानून का राज सुनिश्चित कर विकास एवं सुविधाओं की नई श्रृंखला खड़ी की गई है। माफिया या तो जेल में है या दूसरे लोक की यात्रा पर जा चुका है। आज हर व्यक्ति के लिए सुरक्षा तथा पर्व-त्योहारों के लिए बेहतरीन वातावरण की गारंटी है। यूपी अब देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन मुख्यमंत्री ने सुदृढ़ कानून व्यवस्था के चलते हुए विकास और इससे आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। बल्कि अब यह देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। 2017 के पहले यहां खराब कानून व्यवस्था, लूट-खसोट, अराजकता के कारण कोई बाहरी व्यक्ति काम नहीं करना चाहता था, जबकि आज यहां आने को हर कोई लालायित है। उत्तर प्रदेश देश की सबसे तेज अर्थव्यवस्था में एक है। यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, कल-कारखानों की नई श्रृंखला और सुदृढ़ कनेक्टिविटी के लिए जाना जा रहा है।  अराजकता फैलाना विभाजक राजनीति करने वालों की फितरत सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और जन कल्याण से सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे में समाज को बांटने वालों से सावधान रहना होगा। विकास समाज की एकजुटता का परिणाम है। यदि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बटेंगे तो बांटने वाले फिर कर्फ्यू-दंगे का माहौल बनाएंगे। असुरक्षा का अंधकार मचाएंगे। अराजकता फैलाना समाज को बांटने वालों की फितरत है। शानदार वर्तमान और बेहतरीन भविष्य के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है।  मच्छर व माफिया को समाप्त कर दिलाई नई पहचान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यूपी और गोरखपुर में 2017 के बाद से दिख रहे बदलाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस, मच्छर व माफिया को समाप्त कर इंफ्रास्ट्रक्चर से गोरखपुर और उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई गई है। पिछली सरकारों के निकम्मेपन से 2017 के पहले तक हर साल इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों मौतें होती थी। तब सपा या कांग्रेस का कोई मंत्री या मुख्यमंत्री गरीबों को देखने बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं आता था। मुझे आंदोलन करना पड़ता था। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने 40 वर्ष की बीमारी को दो वर्ष में समाप्त कर दिया। सीएम ने गोरखपुर में बंद पड़े खाद कारखाने के दोबारा चलने, चहुंओर फोरलेन कनेक्टिविटी, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज के निर्माण, रामगढ़ताल के पर्यटन स्थल बनने, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थिति शानदार बनाने के साथ एम्स की सौगात मिलने का जिक्र कर कहा कि आज गोरखपुर की चमचमाती पहचान से हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति करता है। 2017 के पूर्व गोरखपुर की गंदगी और बीमारी दरअसल सपा व कांग्रेस सरकारों की गंदी मानसिकता का परिणाम थी।  अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी सीएम योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में नौजवानों को नौकरी की गारंटी है। हमारी सरकार ने अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। और, चुनाव की घोषणा से पहले, सरकार अगले छह माह में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। 2017 के पहले सरकारी भर्ती निकलने पर सैफई सिंडिकेट वसूली करने निकल पड़ता था। तब नौजवानों का भविष्य खतरे में पड़ता था। हमारी सरकार में गोरखपुर के गीडा में 500 कारखाने लगे, जिससे अकेले गीडा में 50 हजार नौजवानों को रोजगार मिला और इस क्षेत्र को पलायन से मुक्ति मिली। डबल इंजन की सरकार ने युवाओं के सामने पहचान का संकट भी दूर किया है। 7 अक्टूबर से विशेष शिविर, मिलेगा योजनाओं का लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिना भेदभाव सबको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। हर पात्र को आवास, शौचालय, राशन, रसोई गैस, बेटियों की पढ़ाई और विवाह से जुड़ी योजनाओं से लाभान्वित किया गया है। योजनाओं में यदि किसी कारण से कोई वंचित रह गया है तो उसे भी संतृप्त करने के लिए एक सप्ताह का विशेष शिविर लगने जा रहा है। यह शिविर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 7 अक्टूबर से लगेगा।  सीएम योगी की दूरदर्शिता का परिचायक है कल्याण मंडपम: डॉ. मंगलेश समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी जब भी गोरखपुर आते हैं, यहां के लोगों को उनके हाथों कुछ न कुछ सौगात जरूर मिलती है। कल्याण मंडपम आमजन को उत्कृष्ट सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का परिचायक है। एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 2017 के पहले पिछड़े व बीमारू राज्य की पहचान वाले उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास के बेहतरीन मॉडल के रूप में निखार दिया है। इस अवसर पर विधायक श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता, स्थानीय पार्षद आनंद कुमार साहनी, जीडीए बोर्ड के सदस्य राधेश्याम श्रीवास्तव, पवन त्रिपाठी, दुर्गेश बजाज, बीरू … Read more

मौसम विभाग का पूर्वानुमान: अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ होगी वर्षा।

भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां अभी पूरी तरह थमी नहीं हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल के कई जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना जताई है। दूसरी ओर पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने के आसार हैं। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटे में नर्मदापुरम, चंबल और जबलपुर संभागों के कुछ स्थानों पर बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, शहडोल और सागर संभागों में भी कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई, जबकि प्रदेश के शेष हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा। सेवढ़ा में चार इंच बारिश मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक दतिया जिले के सेवढ़ा में सर्वाधिक 100 मिमी यानी करीब चार इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा शाहपुरा-जबलपुर में 75.3 मिमी, मंडला में 25.3 मिमी और जबलपुर में 12.9 मिमी वर्षा दर्ज हुई। इन जिलों में बौछारें पड़ने के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 24 घंटे में सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, पन्ना और मैहर जिलों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। वहीं विदिशा, रायसेन, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पांढुर्णा सहित कई जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना है। इन इलाकों में हो सकती है बूंदाबांदी भोपाल, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर और नीमच में अगले 24 घंटे के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। 19 सितंबर के आसपास मानसून की विदाई के संकेत मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर के आसपास वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में अभी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। ये वेदर सिस्टम सक्रिय फिलहाल सौराष्ट्र और उससे लगे पूर्वोत्तर अरब सागर के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इसके अलावा उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर की ओर पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो आगे चलकर दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

UP के 57 हजार पंचायत सहायकों का बढ़ा मानदेय, ₹6 हजार से बढ़कर ₹9 हजार होगी मासिक राशि

पंचायत सहायकों को मुख्यमंत्री योगी की बड़ी सौगात, मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी   छह हजार की जगह अब हर माह मिलेंगे नौ हजार रुपये, 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ   डीबीटी से सीधे खाते में आएगा मानदेय, कैबिनेट से ली जाएगी स्वीकृति   प्रधान और सचिव नहीं हटा सकेंगे, डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ही करेगी फैसला   आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस, हटाए गए पंचायत सहायकों की होगी बहाली   महिलाओं को मातृत्व अवकाश, उपचार के लिए मिलेगी कैशलेस सुविधा   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को बड़ी सौगात दी है। उनके मानदेय में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अभी पंचायत सहायकों को छह हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर नौ हजार रुपये किया जाएगा। इस तरह मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी मिलेगी।   पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और उन्हें बुलाया। इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।   अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद नौ हजार रुपये का मानदेय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसका लाभ प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा।   प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे पंचायत सहायक पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी।   आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। इस दौरान कार्रवाई कर जिन पंचायत सहायकों को हटाया गया है, उन्हें दोबारा बहाल किया जाएगा।   महिलाओं को मातृत्व अवकाश, कैशलेस इलाज महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ भी दिया जाएगा।   मंत्री से वार्ता के बाद धरना समाप्त अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों से पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बातचीत की। प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ वार्ता की गई। इसके बाद पंचायत सहायकों के प्रतिनिधि मंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिए गए फैसलों की जानकारी मिलने के बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।