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मखाना-लीची की वैश्विक पहचान, फिर भी बिहार के निर्यात में कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी बेहद कम

 पटना निर्यात के मोर्चे पर बिहार की स्थिति कभी अच्छी रही नहीं। औद्योगिक आधार नहीं होना इसका प्रमुख कारण है। दूसरा कारण व्यवस्थागत सुस्ती है। अगर ऐसा नहीं होता तो कृषि और वानिकी के कई उत्पाद विदेशी बाजार में आज धूम मचा रहे होते। इस श्रेणी में अलबत्ता मखाने का नाम लिया जाएगा, जो कि राजनीति का सुपर फूड हो गया है। यही कारण है कि निर्यात का सारा ढिंढोरा मखाने तक सिमट जा रहा। वास्तविकता यह है कि बिहार के कृषि व सहवर्ती उत्पाद और निर्यात में मखाने की मात्रा एक प्रतिशत भी नहीं। 2025-26 में बिहार से 18713.10 करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए गए। उसमें सर्वाधिक निर्यात पेट्रोलियम उत्पाद का हो रहा। फल और सब्जी की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत से भी कम रही। मखाना और लीची इसी ढाई प्रतिशत के अंश हैं। मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी मखाना और लीची की पहचान बिहार से जुड़ी हुई है। इनके अलावा भी कृषि-वानिकी के कई और उत्पाद हैं, जिनके उत्पाद में बिहार बादशाह है। मक्का, सिंघाड़ा, लौकी, मशरूम आदि इसी श्रेणी में हैं। प्रसंस्करण, वैल्यू एड, विपणन और निर्यात आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसा तब जबकि बिहार की निर्यात प्रोत्साहन नीति भी है। वाणिज्यिक प्रतिस्पर्द्धा की कमतर स्थिति के कारण यह नीति बहुत प्रभाव नहीं छोड़ पा रही। इसके अलावा व्यवस्था को लालफीताशाही की आदत-सी हो गई है। बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास बहरहाल देश के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत के आसपास झूल रही। पिछले एक दशक से यही स्थिति बनी हुई है। इससे आगे निकलने के प्रयास में जब कभी विफल हुए, तो सीधा बहाना लैंड-लॉक्ड राज्य होने का रहा। तब हम हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की उपलब्धि को भूल गए, जो लैंड-लाक्ड होने के बावजूद निर्यात में बिहार से कोसों आगे हैं। हालांकि, अब सरकार के स्तर से इसके लिए पहल हो रही, लेकिन वर्षों की जड़ता को तोड़ने की चुनौती बनी हुई है। अभी सिडबी की ओर से जगत साह बिहार के उद्यमियों-व्यापारियों को निर्यात के तौर-तरीके सिखा रहे। उनका कहना है कि उद्योग-उत्पाद के लिए रॉ-मेटेरियल चाहिए होता है। हम भूल जाते हैं कि निर्यात भी वस्तुत: रा-मेटेरियल ही है। बिहार को यही हुनर सीखना होगा। दो की धूम मखाना: देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार मेंं होता है। प्रतिवर्ष लगभग 40,000 टन प्रोसेस्ड मखाना का उत्पादन है। मिथिला मखाना को जीआइ टैग प्राप्त है। देश से मखाना का कुल निर्यात लगभग 25,130 टन है। यह अमेरिका, यूएई, कनाडा, आस्ट्रेलिया, नेपाल और ब्रिटेन आदि देशों को निर्यात होता है। लीची: देश में लीची के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से तनिक अधिक है। इसी कारण बिहार को लीची का ''राजधानी'' कहा जाता है। प्रतिवर्ष 3,00,000 टन से कुछ अधिक लीची का उत्पादन होता है। शाही लीची को जीआई टैग मिला हुआ है। भारत से प्रतिवर्ष 5000 से 7000 टन लीची निर्यात की जाती है। जीआई टैग प्राप्त बिहार के उत्पाद मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मखाना, शाही लीची, जर्दालु आम, कतरनी चावल, मगही पान, सिलाव का खाजा, मिर्चा धान, भागलपुर सिल्क , सुजनी कढ़ाई, खटवा (एप्लिक वर्क), सिक्की घास उत्पाद, मंजूषा कला, बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट, पिड़िया चित्रकला निर्यात (करोड़ रुपये में) वित्तीय वर्ष     बिहार (करोड़ रुपये)     भारत (करोड़ रुपये)     देश के निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी 2021-22     17,219.63     31,47,021.49     0.55% 2022-23     20,895.04     36,21,549.88     0.58% 2023-24     16,760.79     36,18,952.27     0.46% 2024-25     17,283.18     37,03,412.02     0.47% 2025-26     18,713.10     39,03,730.60     0.48% बिहार से निर्यात में हिस्सेदारी     पेट्रोलियम उत्पाद : 55.48%     भैंसा का मांस : 10.18%     चावल (बासमती से इतर) : 6.63%     ग्रेफाइट, विस्फोटक आदि : 5.03%     चावल से इतर अनाज : 4.01%     रेलवे परिवहन उपकरण : 3.48%     दवा फार्मूलेशन, बायोलॉजिकल्स : 2.01%     ताजा सब्जियां : 1.37%     टायर-ट्यूब : 1.13%     ताजा फल : 0.96% कमी के कारण     बंदरगाहों के काफी दूर होने से परिवहन लागत अधिक     अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना नहीं     स्थानीय स्तर पर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड की कमी     उच्च मूल्य के औद्योगिक-तकनीकी उत्पाद वाले बड़े उद्योग कम     मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन) का अभाव अपेक्षित पहल     बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति का प्रभावी क्रियान्वयन     एयर कार्गो और ड्राई पोर्ट का विकास     मेगा फूड पार्क्स और फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर बनें     निर्यातकों के लिए प्रशिक्षण और जागरुकता     सप्लाई चेन के जोखिमों को कम करना प्रोत्साहन की व्यवस्था बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने और निर्यात को गति देने के लिए बनाई गई है। इसके अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण हस्तशिल्प और जीआइ टैग वाले उत्पादों को विशेष प्राथमिकता देने की व्यवस्था है। एक्सपोर्ट हब: हर जिले को एक ‘एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित करना, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल सके। बुनियादी ढांचा: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) और निर्यात पैक हाउस जैसी आधुनिक लाजिस्टिक्स व बुनियादी सुविधाओं का विकास। राहत अनुदान: बंदरगाह या एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचने वाले पात्र उत्पादों के लिए फ्री आन बोर्ड मूल्य का एक प्रतिशत तक (सात वर्षों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 20 लाख रुपये तक) निर्यात सब्सिडी। पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक निर्यात वृद्धि प्राप्त करने वाली इकाइयों के लिए वृद्धिशील फ्री आन बोर्ड मूल्य पर अतिरिक्त एक प्रतिशत प्रतिपूर्ति (प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक)।  

17 सितंबर को रायपुर में होगा भव्य राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलनश्, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे शिरकत

रायपुर  भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर कल यानी 17 सितंबर को राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में एक भव्य राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में प्रदेशभर के श्रमवीरों के सम्मान और उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय इस महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन करेंगे। इस गरिमामयी आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा और मंत्री  केदार कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। आयोजन का उद्देश्य भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रम, कौशल, निर्माण और सृजन की शक्ति का प्रतीक है। निर्माण से लेकर उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र में अपने पसीने से प्रदेश के विकास की मजबूत नींव तैयार करने वाले श्रमिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए यह महासम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। यह आयोजन प्रदेश के श्रमवीरों के परिश्रम और छत्तीसगढ़ के विकास में उनके योगदान का सार्वजनिक अभिव्यक्तिकरण है।  राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मंत्री  रामविचार नेताम,  दयालदास बघेल,  श्याम बिहारी जायसवाल,  ओ.पी. चौधरी,  लक्ष्मी राजवाड़े,  टंकराम वर्मा,  गजेन्द्र यादव,  गुरु खुशवंत साहेब,  राजेश मूणत,  मोतीलाल साहू,  पुंदर मिश्रा,  अनुज शर्मा,  इंद्र कुमार साहू, डॉ. रामप्रताप सिंह,  योगेश दत्त मिश्रा,  किशोर महानंद, रायपुर महापौर  मीनल चौबे और जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक सहभागिता करेंगे।

इसमें 77 हजार भर्तियां अकेले पुलिस व होमगार्ड विभाग में की जाएंगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। इनमें 77 हजार भर्तियां सिर्फ पुलिस व होमगार्ड विभाग में होंगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होने जा रही है। सीएम ने वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं व दिव्यांगजन को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन दी जाती है। जल्द ही पेंशन की धनराशि और लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी। विकास व जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। सीएम योगी बुधवार को गोरखपुर के वार्ड नंबर-53 उर्वरक नगर के अंतर्गत जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम सहित गोरखपुर विकास प्राधिकरण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और नगर निगम की करीब 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी गांव या शहर में नागरिकों के जीवन स्तर का पता विकास और वहां उपलब्ध जनोपयोगी सुविधाओं से चलता है। इसके लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। 2017 के बाद गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में कानून का राज सुनिश्चित कर विकास एवं सुविधाओं की नई श्रृंखला खड़ी की गई है। माफिया या तो जेल में है या दूसरे लोक की यात्रा पर जा चुका है। आज हर व्यक्ति के लिए सुरक्षा तथा पर्व-त्योहारों के लिए बेहतरीन वातावरण की गारंटी है। यूपी अब देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन मुख्यमंत्री ने सुदृढ़ कानून व्यवस्था के चलते हुए विकास और इससे आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। बल्कि अब यह देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। 2017 के पहले यहां खराब कानून व्यवस्था, लूट-खसोट, अराजकता के कारण कोई बाहरी व्यक्ति काम नहीं करना चाहता था, जबकि आज यहां आने को हर कोई लालायित है। उत्तर प्रदेश देश की सबसे तेज अर्थव्यवस्था में एक है। यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, कल-कारखानों की नई श्रृंखला और सुदृढ़ कनेक्टिविटी के लिए जाना जा रहा है।  अराजकता फैलाना विभाजक राजनीति करने वालों की फितरत सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और जन कल्याण से सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे में समाज को बांटने वालों से सावधान रहना होगा। विकास समाज की एकजुटता का परिणाम है। यदि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बटेंगे तो बांटने वाले फिर कर्फ्यू-दंगे का माहौल बनाएंगे। असुरक्षा का अंधकार मचाएंगे। अराजकता फैलाना समाज को बांटने वालों की फितरत है। शानदार वर्तमान और बेहतरीन भविष्य के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है।  मच्छर व माफिया को समाप्त कर दिलाई नई पहचान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यूपी और गोरखपुर में 2017 के बाद से दिख रहे बदलाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस, मच्छर व माफिया को समाप्त कर इंफ्रास्ट्रक्चर से गोरखपुर और उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई गई है। पिछली सरकारों के निकम्मेपन से 2017 के पहले तक हर साल इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों मौतें होती थी। तब सपा या कांग्रेस का कोई मंत्री या मुख्यमंत्री गरीबों को देखने बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं आता था। मुझे आंदोलन करना पड़ता था। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने 40 वर्ष की बीमारी को दो वर्ष में समाप्त कर दिया। सीएम ने गोरखपुर में बंद पड़े खाद कारखाने के दोबारा चलने, चहुंओर फोरलेन कनेक्टिविटी, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज के निर्माण, रामगढ़ताल के पर्यटन स्थल बनने, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थिति शानदार बनाने के साथ एम्स की सौगात मिलने का जिक्र कर कहा कि आज गोरखपुर की चमचमाती पहचान से हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति करता है। 2017 के पूर्व गोरखपुर की गंदगी और बीमारी दरअसल सपा व कांग्रेस सरकारों की गंदी मानसिकता का परिणाम थी।  अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी सीएम योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में नौजवानों को नौकरी की गारंटी है। हमारी सरकार ने अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। और, चुनाव की घोषणा से पहले, सरकार अगले छह माह में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। 2017 के पहले सरकारी भर्ती निकलने पर सैफई सिंडिकेट वसूली करने निकल पड़ता था। तब नौजवानों का भविष्य खतरे में पड़ता था। हमारी सरकार में गोरखपुर के गीडा में 500 कारखाने लगे, जिससे अकेले गीडा में 50 हजार नौजवानों को रोजगार मिला और इस क्षेत्र को पलायन से मुक्ति मिली। डबल इंजन की सरकार ने युवाओं के सामने पहचान का संकट भी दूर किया है। 7 अक्टूबर से विशेष शिविर, मिलेगा योजनाओं का लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिना भेदभाव सबको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। हर पात्र को आवास, शौचालय, राशन, रसोई गैस, बेटियों की पढ़ाई और विवाह से जुड़ी योजनाओं से लाभान्वित किया गया है। योजनाओं में यदि किसी कारण से कोई वंचित रह गया है तो उसे भी संतृप्त करने के लिए एक सप्ताह का विशेष शिविर लगने जा रहा है। यह शिविर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 7 अक्टूबर से लगेगा।  सीएम योगी की दूरदर्शिता का परिचायक है कल्याण मंडपम: डॉ. मंगलेश समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी जब भी गोरखपुर आते हैं, यहां के लोगों को उनके हाथों कुछ न कुछ सौगात जरूर मिलती है। कल्याण मंडपम आमजन को उत्कृष्ट सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का परिचायक है। एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 2017 के पहले पिछड़े व बीमारू राज्य की पहचान वाले उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास के बेहतरीन मॉडल के रूप में निखार दिया है। इस अवसर पर विधायक श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता, स्थानीय पार्षद आनंद कुमार साहनी, जीडीए बोर्ड के सदस्य राधेश्याम श्रीवास्तव, पवन त्रिपाठी, दुर्गेश बजाज, बीरू … Read more

मौसम विभाग का पूर्वानुमान: अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ होगी वर्षा।

भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां अभी पूरी तरह थमी नहीं हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल के कई जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना जताई है। दूसरी ओर पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने के आसार हैं। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटे में नर्मदापुरम, चंबल और जबलपुर संभागों के कुछ स्थानों पर बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, शहडोल और सागर संभागों में भी कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई, जबकि प्रदेश के शेष हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा। सेवढ़ा में चार इंच बारिश मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक दतिया जिले के सेवढ़ा में सर्वाधिक 100 मिमी यानी करीब चार इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा शाहपुरा-जबलपुर में 75.3 मिमी, मंडला में 25.3 मिमी और जबलपुर में 12.9 मिमी वर्षा दर्ज हुई। इन जिलों में बौछारें पड़ने के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 24 घंटे में सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, पन्ना और मैहर जिलों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। वहीं विदिशा, रायसेन, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पांढुर्णा सहित कई जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना है। इन इलाकों में हो सकती है बूंदाबांदी भोपाल, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर और नीमच में अगले 24 घंटे के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। 19 सितंबर के आसपास मानसून की विदाई के संकेत मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर के आसपास वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में अभी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। ये वेदर सिस्टम सक्रिय फिलहाल सौराष्ट्र और उससे लगे पूर्वोत्तर अरब सागर के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इसके अलावा उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर की ओर पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो आगे चलकर दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

UP के 57 हजार पंचायत सहायकों का बढ़ा मानदेय, ₹6 हजार से बढ़कर ₹9 हजार होगी मासिक राशि

पंचायत सहायकों को मुख्यमंत्री योगी की बड़ी सौगात, मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी   छह हजार की जगह अब हर माह मिलेंगे नौ हजार रुपये, 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ   डीबीटी से सीधे खाते में आएगा मानदेय, कैबिनेट से ली जाएगी स्वीकृति   प्रधान और सचिव नहीं हटा सकेंगे, डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ही करेगी फैसला   आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस, हटाए गए पंचायत सहायकों की होगी बहाली   महिलाओं को मातृत्व अवकाश, उपचार के लिए मिलेगी कैशलेस सुविधा   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को बड़ी सौगात दी है। उनके मानदेय में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अभी पंचायत सहायकों को छह हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर नौ हजार रुपये किया जाएगा। इस तरह मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी मिलेगी।   पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और उन्हें बुलाया। इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।   अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद नौ हजार रुपये का मानदेय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसका लाभ प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा।   प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे पंचायत सहायक पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी।   आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। इस दौरान कार्रवाई कर जिन पंचायत सहायकों को हटाया गया है, उन्हें दोबारा बहाल किया जाएगा।   महिलाओं को मातृत्व अवकाश, कैशलेस इलाज महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ भी दिया जाएगा।   मंत्री से वार्ता के बाद धरना समाप्त अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों से पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बातचीत की। प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ वार्ता की गई। इसके बाद पंचायत सहायकों के प्रतिनिधि मंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिए गए फैसलों की जानकारी मिलने के बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

सपा सरकार की नीतियों पर बृजलाल का हमला, फैसलों को बताया ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’

सपा सरकार की नीतियां थीं ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ : बृजलाल   राज्यसभा सांसद ने पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों पर उठाए सवाल   मुस्लिम बेटियों को अनुदान और कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के फैसले का किया जिक्र   आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का लगाया आरोप   मैनाठेर हिंसा, पीएसी की कंपनियों और खालिद मुजाहिद प्रकरण को लेकर भी सपा को घेरा   लखनऊ  पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला बोलते हुए उसकी नीतियों को ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ करार दिया है। उन्होंने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम बेटियों को अनुदान, कब्रिस्तानों की चहारदीवारी, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश और पीएसी की कंपनियों को निष्क्रिय करने समेत कई फैसलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए।   बृजलाल ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि सपा सरकार बनते ही केवल मुस्लिम बेटियों को 30 हजार रुपये का अनुदान देने की व्यवस्था की गई। उन्होंने सवाल किया कि पिछड़े, दलित और अन्य वर्गों की बेटियों के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बृजलाल ने इसे सपा सरकार की ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताया।   उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार की प्राथमिकताओं में आतंकवाद से जुड़े मुकदमों को वापस लेना भी शामिल था। बृजलाल ने दावा किया कि 22 जनवरी, पांच मार्च, 15 अप्रैल और 18 अप्रैल 2013 को आतंकवाद से जुड़े 14 मुकदमे वापस लेने की कोशिश की गई। इसमें दो पाकिस्तानी नागरिकों और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण सरकार इसमें सफल नहीं हो सकी और बाद में आरोपियों को सजा हुई।   कब्रिस्तानों की चहारदीवारी पर उठाए सवाल बृजलाल ने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के लिए सरकारी धन दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य समुदायों के श्मशान और कब्रगाहों को ऐसी प्राथमिकता नहीं दी गई। दावा किया कि इस फैसले की आड़ में कई स्थानों पर ग्राम समाज और सरकारी जमीन पर कब्जे हुए।   मैनाठेर हिंसा का किया जिक्र राज्यसभा सांसद ने छह जुलाई 2011 के मुरादाबाद के मैनाठेर प्रकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान थाना-चौकी और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया तथा तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ पर जानलेवा हमला हुआ। बृजलाल ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद सपा सरकार ने इस प्रकरण से जुड़े मुकदमे वापस लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया और बाद में 16 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई।   पीएसी और एटीएस को लेकर भी साधा निशाना बृजलाल ने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने पीएसी की 46 कंपनियों को निष्क्रिय किया और एटीएस को भी कमजोर किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पीएसी में भर्ती करने के साथ तीन नई महिला पीएसी बटालियन बनाई हैं।   खालिद मुजाहिद प्रकरण भी उठाया पूर्व डीजीपी ने खालिद मुजाहिद की मौत से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार में उनके और 38 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। बृजलाल ने इसे भी ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद यह कार्रवाई समाप्त हुई।   बृजलाल ने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में नागरिकों को समान कानूनी अधिकार देने की व्यवस्था है। इससे लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश संविधान और उसके अंतर्गत बने कानूनों से चलता है।

श्रमदान कर ऐतिहासिक पोखरे की सफाई करने वाले युवाओं की मुख्यमंत्री योगी ने की सराहना

गोरखपुर मां तरकुलहा देवी धाम परिसर स्थित ऐतिहासिक पोखरे के कायाकल्प की उम्मीद जगी है। लंबे समय से पोखरे में जमा जलकुंभी और गंदगी से श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी से दो युवाओं ने निजात दिलाई। गांव भाऊपुर (बंजारी देवी, चौरीचौरा) के युवा अनुपम गुप्ता और करन निषाद ने स्वप्रेरणा से सफाई का बीड़ा उठाया। दोनों युवाओं ने पांच सितंबर से प्रतिदिन श्रमदान कर पोखरे से जलकुंभी और गंदगी हटाना शुरू किया। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने भी श्रद्धा और सेवा भाव से किए जा रहे इस कार्य को देखकर युवाओं की सराहना की। वहीं मंदिर ट्रस्ट ने भी उनके सेवा भाव और समर्पण की प्रशंसा की। युवाओं की इस पहल की जानकारी शासन तक पहुंची तो बुधवार (16 सितंबर) की सुबह करीब नौ बजे एसडीएम चौरीचौरा ने अनुपम गुप्ता और करन निषाद से फोन पर संपर्क साधा। उन्होंने युवाओं को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलने के लिए बुलाया है। इसके बाद एसडीएम ने दोनों युवाओं को एनेक्सी भवन पहुंचाया। दोनों करीब 10 बजे एनेक्सी भवन पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों युवाओं से मुलाकात की। उनके साथ फोटो खिंचवाई और आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने दोनों युवाओं की भूरि भूरि प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने पोखरे की सफाई के लिए उनके द्वारा किए जा रहे श्रमदान और सेवा भाव की सराहना करते हुए उनके योगदान को अनुकरणीय बताया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन भी दिया कि मां तरकुलहा देवी धाम के सामने स्थित प्राचीन पोखरे का सुंदरीकरण और स्थायी जीर्णोद्धार जल्द कराया जाएगा।

राजा दाहिर, संत कंवरराम और शहीद हेमू कालानी की जीवनी अब पाठ्यक्रम में शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंधी समाज का कठिनाईयों से भरा लंबा संघर्ष रहा है। उनकी जीवटता और कर्मठता हर किसी को प्रभावित करती है। उनकी मधुर बोली और स्वभाव सबका दिल जीत लेती है। सिंधी समाज ने विभाजन की विभिषिका झेली है। उन्होंने अपनी जन्म भूमि-घर और व्यापार छोड़ा लेकिन अपने संस्कार के साथ धर्म और हौसला नहीं खोया। प्राचीनतम सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास हम सभी को एक गौरवशाली अतीत से परिचित करवाता है। स्वाभिमान से जीवन जीने के प्रतीक बन चुके सिंधी समाज की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। अनेकों बार चुनौतियों को अवसर में बदलकर अपनी पहचान और गौरव को संजोए रखने वाले सिंधी समाज पर प्रदेशवासियों को गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास से इंदौर में आयोजित सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर में सिंधु कला केंद्र का भव्य और दिव्य भवन बनकर तैयार होगा, जो सिंधी समाज की कला, संस्कृति और विरासत से भविष्य की पीढ़ियों को परिचित कराएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधी समाज के महापुरुषों की जीवनी जिनमें वीर राजा दाहिर, समाज सुधारक और संत कंवरराम और शहीद हेमू कालानी शामिल हैं,  स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर राज्य सरकार ने अपना वादा निभाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान झूलेलाल का जयकारा लगाते हुए भूमि-पूजन कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को आश्वासन दिलाया कि वे सिंधु कला केंद्र के लोकार्पण कार्यक्रम में जरूर आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर 17 सितम्बर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इंदौर पधार रहे हैं। वे लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की नगरी से एक माह तक चलने वाले सेवा से संकल्प अभियान, स्वामित्व योजना का शुभारंभ करेंगे एवं विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इंदौर में भूमि-पूजन कार्यक्रम के अवसर पर स्थानीय सांसद शंकर लालवानी, ईश्वर झामनानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सिंधी समाज के प्रतिष्ठित जन उपस्थित थे।  

ESB के असमर्थता जताने के बाद बदली परीक्षा एजेंसी, ऑफलाइन माध्यम से होगी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा।

भोपाल मध्य प्रदेश में बिना पात्रता परीक्षा दिए भर्ती हुए करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अब माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) कराएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा आयोजन की अधिसूचना जारी कर दी है। पहले इसकी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) को दी गई थी, लेकिन बाद में उसने परीक्षा आयोजन को लेकर असमर्थता जता दी। ESB ने परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और 18 सितंबर आवेदन की अंतिम तिथि निर्धारित थी। हालांकि शिक्षकों की मांग के बाद परीक्षा ऑनलाइन के बजाय पारंपरिक ऑफलाइन माध्यम से कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद परीक्षा एजेंसी बदलनी पड़ी। शिक्षकों के विरोध के बाद बदला परीक्षा का तरीका दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के आदेश के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों के लिए विशेष TET आयोजित की जानी है, जिन्होंने पात्रता परीक्षा पास किए बिना शिक्षक के रूप में नियुक्ति पाई है। परीक्षा कराने की जिम्मेदारी पहले ESB को दी गई थी। पिछले महीने ESB ने ऑनलाइन परीक्षा के लिए आवेदन मांगे। इसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने ऑनलाइन परीक्षा का विरोध करते हुए ऑफलाइन मोड में परीक्षा कराने की मांग की। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा, जिसके बाद परीक्षा पारंपरिक ऑफलाइन तरीके से कराने के निर्देश दिए गए। स्कूल शिक्षा विभाग ने ESB से ऑफलाइन परीक्षा कराने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ESB ने इससे असमर्थता जता दी। अब माशिमं जारी करेगा नया शेड्यूल ESB के मुताबिक उसकी परीक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए तैयार है। ऐसे में विशेष TET कराने की जिम्मेदारी अब माध्यमिक शिक्षा मंडल को सौंप दी गई है। मंगलवार शाम विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। ESB ने इस परीक्षा के लिए 12 अक्टूबर की संभावित तारीख तय की थी। एजेंसी बदलने के बाद अब परीक्षा का कार्यक्रम नए सिरे से तैयार होगा। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा दिसंबर तक आयोजित किए जाने की संभावना है। माशिमं अगले एक-दो दिन में बैठक कर परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया तय करेगा। इसके बाद आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा की जाएगी। पहले आवेदन कर चुके शिक्षकों को राहत परीक्षा एजेंसी बदलने के बावजूद जिन शिक्षकों ने ESB के पोर्टल पर पहले ही आवेदन कर दिया है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, जिन शिक्षकों ने अब तक आवेदन नहीं किया है, उनके लिए माशिमं नए सिरे से आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा। इसकी तारीख और अन्य दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से स्वैच्छिक रक्तदान की अपील की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत प्रदेशवासियों से स्वैच्छिक रक्तदान में सक्रिय सहभागिता की अपील की है। उन्होंने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। गर्भवती महिलाओं, सिकल सेल, थैलेसीमिया, एनीमिया, डायलिसिस एवं कैंसर से पीड़ित मरीजों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अभियान के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों में सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं, युवा संगठनों, क्लबों तथा औद्योगिक एवं व्यावसायिक संस्थानों की सहभागिता होगी। उन्होंने कहा कि रक्तदान शिविरों की निगरानी भारत सरकार के e-RaktKosh पोर्टल के माध्यम से की जाएगी तथा रक्तदाताओं का ABHA ID के माध्यम से पंजीयन किया जाएगा। चिकित्सकीय पात्रता के अनुसार 18 से 65 वर्ष की आयु के स्वस्थ व्यक्ति, जिनका वजन 45 किलोग्राम से अधिक है, स्वैच्छिक रक्तदान कर सकते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेष रूप से युवाओं से अभियान से जुड़ने और नियमित स्वैच्छिक रक्तदाता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नागरिक अपने मोबाइल में e-RaktKosh App डाउनलोड कर अपने आसपास आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और रक्तदान के लिए पंजीयन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश का प्रत्येक स्वस्थ युवा नियमित रूप से रक्तदान करे, तो जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।