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हरियर छत्तीसगढ़’ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण सबकी जिम्मेदारी: वन मंत्री केदार कश्यप

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप विश्व पर्यावरण दिवस पर वन मंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बधाई, पौधा लगाने का किया आह्वान एक पेड़ मां के नाम अभियान बना जनआंदोलन उदंती-सीतानदी में दूधराज का घोंसला समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक रायपुर विश्व पर्यावरण दिवस के गरिमामय अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, अनुपम जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश का एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। वर्तमान में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। जनआंदोलन बना एक पेड़ मां के नाम अभियान          वन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण सहित हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कई प्रभावी योजनाएं चलाई जा रही हैं। ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में राज्य में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है। आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से अब यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी         मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है, जो हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा है। वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से इस हरित आवरण को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। सुरक्षित हुए प्राकृतिक आवास, बढ़ा जल स्तर       कश्यप ने वन्यजीवों के संरक्षण पर बात करते हुए बताया कि राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में वन्यप्राणियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य देखा गया है, जो हमारी सुरक्षित एवं अनुकूल पर्यावरण प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके अलावा, वन क्षेत्रों में हज़ारों जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से वन्यजीवों को सालभर पानी मिल रहा है और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका को बढ़ावा          वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लें।

समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है दीक्षांत समारोह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता : राज्यपाल रमेन डेका समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है दीक्षांत समारोह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में 9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि यह सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करता है। राज्यपाल डेका आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के कुल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7 हजार 545 स्नातक, 1 हजार 645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी उपाधिधारी शामिल हैं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया। राज्यपाल डेका ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है। राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। जिस प्रकार वे राज्यपाल के रूप में प्रदेश की जनता के हितों के प्रति उत्तरदायी हैं, उसी प्रकार चिकित्सकों का दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए और मरीज का हित सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ‘नेबरहुड डॉक्टर’ और पारिवारिक चिकित्सक की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में चिकित्सक की त्वरित निर्णय क्षमता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग के छात्र हैं। विज्ञान निरंतर प्रगति कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का भी अवसर है। विद्यार्थियों को प्राप्त उपाधियां और सम्मान उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज को नवस्नातक चिकित्सकों से बड़ी अपेक्षाएं हैं और वे प्रदेश के स्वास्थ्य प्रहरी हैं। विशेष रूप से जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से करुणा, नवाचार, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों के साथ चिकित्सा सेवा प्रदान करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करे, यह हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है। प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नया रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है, जिसमें 5 हजार से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था होगी। यह परियोजना प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रमुख केंद्र बनेगी। इसके अतिरिक्त रायगढ़ और सरगुजा संभाग में भी नए अस्पतालों की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध हों, ताकि उन्हें उपचार के लिए बाहर न जाना पड़े। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है, जिससे लंबे समय तक विकास से वंचित रहे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और बस्तरवासियों के सहयोग से नक्सल उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे, वहां अब ‘सेवा डेरा’ विकसित कर लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं तथा ‘अग्रणी बस्तर योजना’ के तहत अधिकारी गांवों में रुककर समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करना सेवा का सर्वोत्तम अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र … Read more

सड़क और परिवहन नेटवर्क के साथ हरित विकास पर भी फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में सड़क एवं परिवहन नेटवर्क निर्माण के साथ हरित विकास को दिया जा रहा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सड़क निर्माण में पर्यावरण संरक्षण के लिये 7,871 वृक्षों के स्थान पर 80 हजार पौधों का होगा रोपण अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाये जायेंगे 10 हजार पौधे मुख्यमंत्री के विजन को साकार करेगा अयोध्या बायपास परियोजना का ग्रीन मॉडल मुख्य सचिव जैन ने की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के दिये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को पर्यावर्णीय संवेदनशीलता और दीर्घकालिक सतत विकास की अवधारणा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता आधुनिक सड़क एवं परिवहन नेटवर्क के निर्माण के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अयोध्या बायपास परियोजना इस सोच का उदाहरण है, जहाँ विकास और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगभग 10 हजार पौधे लगाकर इसे एक हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावर्णीय संतुलन को सुदृढ़ करने के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी नया आयाम प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बेहतर सड़क अधोसंरचना का निर्माण करना नहीं है, बल्कि ऐसी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना है जो आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों को भी पूरा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अयोध्या बायपास परियोजना प्रदेश में सतत एवं समावेशी विकास के मॉडल के रूप में स्थापित होगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य शासन द्वारा परियोजना के विभिन्न पहलुओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, उन्नयन एवं विस्तार कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान भोपाल की महत्वपूर्ण अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में अयोध्या बायपास की डिज़ाइन क्षमता लगभग 40 हजार वाहन प्रतिदिन की है, जबकि इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 45 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है। भोपाल के तेजी से हो रहे शहरीकरण और आसपास विकसित हो रहे नए आवासीय क्षेत्रों के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में बायपास का चौड़ीकरण न केवल यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह राजधानी क्षेत्र की भावी आवश्यकताओं को भी पूरा करेगा। विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलित मॉडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन को मूर्त रूप देते हुए अयोध्या बायपास परियोजना के अंतर्गत व्यापक पौधरोपण एवं हरित विकास योजना तैयार की गई है। परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। इनमें से लगभग 10 हजार पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे, जिससे यह मार्ग भविष्य में एक आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा। इसके अतिरिक्त झिरनिया एवं झगरिया खुर्द क्षेत्रों में लगभग 70 हजार पौधों के रोपण की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। आगामी मानसून में प्रस्तावित यह व्यापक पौधरोपण अभियान भोपाल क्षेत्र में हरित आवरण के विस्तार और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पौधों के संरक्षण, देखभाल एवं अनुरक्षण की जिम्मेदारी आगामी 15 वर्षों तक एनएचएआई द्वारा वहन की जाएगी। इसके लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक अधोसंरचना निर्माण और पर्यावरणीय दायित्व एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता मुख्य सचिव जैन ने अयोध्या बायपास परियोजना में भोपाल की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने के लिए की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन को अवगत कराया गया कि एनएचएआई और भोपाल नगर निगम के बीच निरंतर समन्वय स्थापित कर कार्य योजना तैयार की गई है। इसमें पाइप लाइन शिफ्टिंग सहित सभी तकनीकी कार्य चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। नगर निगम के तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में कार्य संपादित किए जाने से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान नागरिकों को पेयजल आपूर्ति संबंधी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक में बताया गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा एनएचएआई द्वारा प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक गतिविधियों, निवेश, पर्यटन तथा औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन अधोसंरचना के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।  

एनएमडीसी की परिक्षेत्र विकास निधि बैठक संपन्न, विकास कार्यों की प्रगति पर हुई समीक्षा

एनएमडीसी की परिक्षेत्र विकास निधि की बैठक सम्पन्न रायपुर, मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम परिक्षेत्र विकास निधि की बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने एनएमडीसी परिक्षेत्र विकास निधि के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने स्वीकृत कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए है।           बैठक में एनएमडीसी सीएसआर मद के अंतर्गत बस्तर संभाग के 6 जिले दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बस्तर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर से प्राप्त 49 करोड़ 95 लाख 65 हजार रुपए की प्रस्तुत कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सीएसआर मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु नवीन कार्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित कार्यों में पोषण आहार, स्वास्थ्य, शिक्षा, अधोसंरचना, सांस्कृतिक एवं अन्य निर्माण कार्यों को स्वीकृत किया गया। इसमें बस्तर जिले के 29, कोण्डागांव के 18, नारायणपुर के 14, दंतेवाड़ा के 17, बीजापुर के 86, सुकमा के 106 कार्य शामिल है।            बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री एवं खनिज विकास विभाग के सचिव पी.दयानंद, एनएमडीसी के सीएमडी सहित खनिज विभाग के अन्य अधिकारी एवं दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बस्तर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर जिले के कलेक्टर शामिल हुए।

इको-फ्रेंडली उत्पादों के निर्माण से बढ़ी आय, ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया अवसर

बिहान योजना से मिली नई पहचान, लटोरी की महिलाएं हस्तशिल्प के जरिए बन रहीं आत्मनिर्भर इको-फ्रेंडली उत्पादों के निर्माण से बढ़ी आय, ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया अवसर रायपुर, ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत लटोरी की स्व-सहायता समूह की महिलाएं इस पहल का सफल उदाहरण बनकर उभरी हैं। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के बल पर यहां की महिलाओं ने हस्तशिल्प आधारित स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। बिहान योजना के तहत महामाया एवं रेखा स्व-सहायता समूह की 20 महिलाओं को छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा तीन माह का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने प्राकृतिक संसाधनों से आकर्षक एवं उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने की तकनीक सीखी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद महिलाएं अब डलिया, टोकरी, सजावटी गुलदस्ते, पूजा ट्रे तथा फ्रूट बास्केट जैसे इको-फ्रेंडली उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन हस्तनिर्मित उत्पादों को स्थानीय बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है। बढ़ती मांग के कारण समूह की महिलाओं की आय में भी वृद्धि हो रही है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। स्वरोजगार के इस माध्यम ने महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने का अवसर भी प्रदान किया है। रेखा स्व-सहायता समूह की सदस्या श्रीमती कौशल्या राजवाड़े बताती हैं कि पहले उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। बिहान योजना से जुड़ने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि समूह की सभी महिलाएं मिलकर अपने हस्तशिल्प व्यवसाय का विस्तार करना चाहती हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मिले और उनके गांव की पहचान भी बने। महिलाओं ने उन्हें प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने की यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण को गति दे रही है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। आज लटोरी की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।

मान सरकार का ऐतिहासिक कदम: ठेका प्रथा पर रोक, अब सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर मिलेंगी नौकरियां

मोहाली. पंजाब की AAP सरकार ने अलग-अलग डिपार्टमेंट में खाली पदों को भरने और सरकारी डिपार्टमेंट में सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों को रखने के लिए कदम उठाए हैं। महंगाई को देखते हुए नए भर्ती हुए कर्मचारियों की सैलरी भी पहले से बढ़ाई जा रही है। गौरतलब है कि 30 मई को मुख्यमंत्री भगवंत मान की लीडरशिप में हुई पंजाब कैबिनेट मीटिंग में राज्य सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम खत्म करने का अहम फैसला लिया था। इससे प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टरों की मनमानी खत्म हो गई है और नई भर्ती के तहत सरकार अपने लेवल पर सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों को रखेगी। इस तरह बिचौलियों का रैकेट भी खत्म हो गया है। सरकार के इस फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है। जानकारी के मुताबिक, पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने 14 खाली पोस्ट भरने के लिए 11 मेडिकल लैब टेक्नीशियन और तीन काउंसलर की कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति के लिए एप्लीकेंट्स से एप्लीकेशन मंगाई हैं। डॉ. विशाल गर्ग ने बताया कि मेडिकल लैब, टेक्नीशियन और काउंसलर को हर एक को 21,000 रुपये महीने की सैलरी दी जाएगी, जबकि पहले इन पोस्ट के लिए सिर्फ़ 14,000 रुपये दिए जाते थे। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को सैलरी देने का पूरा फंड केंद्र सरकार देगी। जो लोग इच्छुक हैं, वे 15 जून तक अप्लाई कर सकते हैं। इसी तरह, डायरेक्टर जनरल ने मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया फेज़-1 में मौजूद नॉर्दर्न इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नोलॉजी में प्रिंसिपल की नियुक्ति के लिए इच्छुक लोगों से एप्लीकेशन मंगाई हैं। यह पोस्ट कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर भरी जाएगी और प्रिंसिपल को हर महीने 1,44,000 रुपये की फिक्स्ड सैलरी दी जाएगी। इस पोस्ट के लिए अप्लाई करने वाले लोग 25 जून तक डायरेक्टर के ऑफिस में अपनी एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। पंजाब सरकार का यह इंस्टिट्यूशन आईके गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, जालंधर से एफिलिएटेड है। इसी तरह, पंजाब स्पोर्ट्स मेडिकल सर्विसेज़ में तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर स्पोर्ट्स मेडिसिन स्पेशलिस्ट 8, एक्यूप्रेशरिस्ट 1, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट 2, बायोमैकेनिक असिस्टेंट 13 और नर्सिंग असिस्टेंट/क्लिनिकल असिस्टेंट 1 के पद के लिए आवेदकों से आवेदन मांगे गए हैं। उम्मीदवार एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट के साथ 22 जून तक फॉर्म भर सकते हैं। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की लिस्ट और इंटरव्यू शेड्यूल और दूसरी संबंधित डिटेल्स 25 जून तक डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएंगी। जानकारी के मुताबिक, स्पोर्ट्स मेडिसिन स्पेशलिस्ट को 1 लाख 15 हजार रुपये, एक्यूप्रेशर स्पेशलिस्ट को 45 हजार रुपये, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट को 45 हजार रुपये, बायोमैकेनिक असिस्टेंट को 40 हजार रुपये और नर्सिंग असिस्टेंट/क्लिनिकल असिस्टेंट को 40 हजार रुपये एकमुश्त महीने की सैलरी दी जाएगी। गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट मानकपुर शरीफ (जिला मोहाली) को सेशन 2025-26 तक या रेगुलर इंस्ट्रक्टर का अरेंजमेंट होने तक गेस्ट फैकल्टी उम्मीदवारों को रखना है। इन कैंडिडेट्स को इलेक्ट्रीशियन 2, मैकेनिक डीज़ल 2, प्लंबर 2, फिटर 2, रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशन 1, कंप्यूटर हार्डवेयर और नोट 2 वगैरह ट्रेड्स के लिए इंस्ट्रक्टर कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर रखा जाएगा और उन्हें 15 हज़ार रुपये महीने का फिक्स्ड मानदेय दिया जाएगा। ये पोस्ट टेम्पररी गेस्ट फैकल्टी बेसिस पर होंगी। इंटरेस्टेड कैंडिडेट्स अपनी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के ओरिजिनल सर्टिफिकेट और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट 11 जून को सुबह 11 बजे गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट, मानकपुर शरीफ में खुद जाकर जमा कर सकते हैं।

NEET UG 2026 की तैयारियां तेज: मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिए अहम दिशा-निर्देश

’नीट यूजी 2026 परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिये दिशा-निर्देश   मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न  रायपुर मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आगामी 21 जून को नीट (यू जी) 2026 की पुनः परीक्षा के सुचारु संचालन हेतु बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान केन्द्र सरकार एवं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा जारी दिशा- निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने कहा है।  नीट पुनः परीक्षा 21 जून को               मुख्य सचिव ने कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परीक्षा के पहले ही परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण करने और परीक्षा के लिए की गई तमाम तैयारियों के बारे जानकारी लेने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस है इसे ध्यान में रखते हुये परीक्षा संचालन में  कहीं पर कोई दिक्कत नहीं हो यह सुनिश्चित कर लिया जाये। परीक्षा केन्द्रों पर आने जाने के लिए समुचित व्यवस्था हो। उन्होंने योगा दिवस से संबंधित गतिविधियों के कारण किसी भी परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा संचालन प्रभावित नहीं हो यह सुनिश्चित करने कहा है।              मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा देने जा रहे बच्चें घबराये नही- परीक्षा अच्छे से दें। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की संयुक्त टीम बच्चों की काउंसलिंग करें कि उन्हें किसी भी तरह परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्य सचिव ने परीक्षा के एक दिन पहले 20 जून को परीक्षा संचालन के लिए तमाम व्यवस्थाओं के लिए माकड्रिल एक्सरसाइज करने के निर्देश दिए है। उन्होंने माकड्रिल की तैयारी पहले से करने कहा है। परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कहा गया है। परीक्षा के प्रश्न-पत्र एवं ओएमआर शीट एयर फोर्स के माध्यम से मूव होंगे। इन्हें सुरक्षा के साथ रखने कलेक्टर, एसपी को पहले से ही पर्याप्त तैयारी करने कहा गया है। प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने एवं परीक्षा दिवस पर सक्रिय रखने कहा गया है, जिससे परीक्षा संचालन का प्रभावी निगरानी की जा सकें। नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए             वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में होगी। परीक्षा के लिए कुल 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए है। सिंह ने सभी जिला र्प्रशासन के अधिकारियों से परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां करने एवं सहयोग और समन्वय करने का अनुरोध किया।           बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस. सहित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा नामित छत्तीसगढ़ राज्य नोडल अधिकारी पीयुष शुक्ला सहित छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा संचालनालय, पुलिस विभाग तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारी सहित सरगुजा, बालोद, बीजापुर, बिलासपुर, दुर्ग, दंतेवाड़ा, धमतरी, बस्तर, जांजगीर-चापा, कांकेर, कोण्डागांव, कोरबा, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, नारायणपुर, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव एवं सुकमा के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

भगवंत मान सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, हजारों श्वास रोगियों का बिना खर्च हुआ उपचार

चंडीगढ़. पंजाब की खास मुख्यमंत्री सेहत योजना ने निमोनिया, अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) और रेस्पिरेटरी फेलियर जैसी सांस की बीमारियों के इलाज पर करीब ₹86 लाख खर्च किए हैं, जिससे राज्य भर में 3,000 से ज़्यादा मरीज़ों को फ़ायदा हुआ है। जानकारी देते हुए, हेल्थ और फ़ैमिली वेलफ़ेयर मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस स्कीम के तहत अब तक कुल 3,019 सांस से जुड़े इलाज दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "शुरू होने के बाद से पांच महीनों में करीब 46 लाख लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत रजिस्टर किया है।" हर परिवार को सालाना ₹10 लाख तक का कैशलेस हेल्थ कवर देने वाली यह स्कीम, समय पर मेडिकल मदद की ज़रूरत वाले मरीज़ों, खासकर आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के लोगों के लिए एक अहम सपोर्ट सिस्टम बनकर उभरी है। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, "अगर इलाज में देरी हो तो सांस की बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के ज़रिए, परिवारों को अब मेडिकल इमरजेंसी के दौरान पैसे का इंतज़ाम करने की चिंता नहीं करनी पड़ती। मरीज़ कैशलेस इलाज पा सकते हैं और बिना देर किए देखभाल पा सकते हैं।" उन्होंने कहा कि सांस की बीमारियां पंजाब में अस्पताल में भर्ती होने के सबसे आम कारणों में से एक हैं, खासकर मौसमी बदलावों और ज़्यादा एयर पॉल्यूशन के समय में। उन्होंने आगे कहा, "जो अक्सर खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ़ से शुरू होता है, अगर इलाज न किया जाए तो यह जल्दी ही एक गंभीर मेडिकल कंडीशन बन सकता है।" मंत्री ने कहा कि पैसे की तंगी की वजह से पारंपरिक रूप से कई परिवारों को अस्पताल जाना टालना पड़ता था, जिससे अक्सर दिक्कतें होती थीं और इलाज का खर्च बढ़ जाता था। उन्होंने आगे कहा, "2,300 से ज़्यादा प्रोसीजर और इलाज के लिए कैशलेस कवरेज उपलब्ध होने के साथ, यह स्कीम मरीज़ों को बीमारी के शुरुआती स्टेज में हेल्थकेयर पाने में मदद कर रही है।" किफ़ायती हेल्थकेयर के लिए सरकार के वादे को दोहराते हुए, डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, "यह स्कीम परिवारों पर पैसे का बोझ कम कर रही है, साथ ही समय पर मेडिकल मदद को बढ़ावा दे रही है और पूरे पंजाब में हेल्थ के नतीजों में सुधार कर रही है।" पटियाला के माता कौशल्या सरकारी हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जोरावर सिंह ने कहा कि सांस की देखभाल में देर से हॉस्पिटल में भर्ती होना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा, "सांस की कई बीमारियों का जल्दी इलाज होने पर बेहतर असर होता है। हालांकि, मरीज़ अक्सर अपनी हालत बिगड़ने के बाद आते हैं क्योंकि परिवार पैसे का इंतज़ाम करने में मुश्किल महसूस कर रहे होते हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस इलाज इस कमी को पूरा करने में मदद कर रहा है।"

श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री

कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि 28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान रायपुर, श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं। मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं। अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें। इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी … Read more

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित भोपाल  विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसआई) ने 5 जून को भोपाल के गांधी भवन में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मणिपुर, असम, ओड़ीशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और पानी एवं वैश्विक गर्मी जैसे चार सत्रों में इस चर्चा को आयोजित किया गया।   सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में काम से जुड़ी सेहत और सुरक्षा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, लाखों मजदूर उद्योगों, खनन, निर्माण, घरेलू काम और दूसरे अनौपचारिक क्षेत्रों में खतरनाक हालात का सामना करते हुये काम कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने मजदूरों की सेहत की सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों, काम से जुड़ी सुरक्षा के मानकों को बेहतर ढंग से लागू करने और संगठित प्रयास करने की जरूरत पर चर्चा की। सिलिकोसिस से प्रभावित कुछ मजदूरों ने अपनी कहानियां और मदद पाने में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया। ऐसे सम्मेलनों के महत्व को बताते हुए, अमूल्य निधि ने कहा कि हमें अपनी जागरूकता बढ़ानी होगी और पर्यावरण की रक्षा तथा काम से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाव के लिए मिलकर काम करना होगा। व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ जगदीश पटेल ने कहा कि काम से जुड़े स्वास्थ्य खतरों के मामले में हर जगह जोखिम है, और हमें उनकी पहचान करने की जरूरत है। 90 से ज्यादा ऐसे काम हैं जिनसे सिलिकोसिस हो सकता है। 70 से ज्यादा देशों ने एस्बेस्टस पर रोक लगा दी है, भारत ने सिर्फ एस्बेस्टस की माइनिंग पर रोक लगाई है, लेकिन इसके इंपोर्ट की इजाजत है। काम से जुड़े खतरों के बारे में बात करते हुए सुश्री चुन्नी ने कहा कि काम के दौरान मजदूरों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। वे अपने अंग खो देते हैं और कुछ हादसों में उनकी जान भी चली जाती है। हम उन्हें मुआवजा और दूसरी तरह की मदद दिलाने में सहायता करते हैं। दूसरा मुख्य सत्र "पर्यावरण, जलवायु और स्वास्थ्य" पर केंद्रित था, जिसमें खनन और उससे जुड़े उद्योगों में काम से जुड़े खतरों, पर्यावरण को हो रहे नुकसान, सुरक्षित पानी की चुनौतियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के असर पर चर्चा की गई। अरावली बचाने के संघर्ष में शामिल कैलाश मीणा ने कहा कि हमे अपने संसाधनों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हुये उसे संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। अरावली पहाड़ को जिस प्रकार से काटा गया है वो एक संकट पैदा कर रहा है। अपने विचार रखते हुए राजकुमार ने कहा कि हम तेजी से अपने प्राकृतिक संसाधन खो रहे हैं। 50 साल पहले हमारे पास 15 हजार नदियां थी जिसमे से 4500 नदियां खत्म हो चुकी है। भारत में वायु प्रदूषण से लगभग 20 लाख मौतें प्रत्येक वर्ष होती है। हमने हवा, पानी और मिट्टी केपी जहरीला बना दिया जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर होता है। राकेश दीवान ने कहा कि हमें आत्महंता समाज बनते जा रहे है, हमे उनसे सीखना होगा जिंहोने जंगल को आज हैती  बचा कर रखा है हमें उस पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए, जिसने हमारे पर्यावरण की रक्षा की है।  आखिरी सत्र में भविष्य की व्यावसायिक स्वास्थ्य रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिसमें राज्य-स्तर पर किए जाने वाले कामों को मजबूत करना प्रमुख रहा। अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस 10 दिसंबर 2026 को जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में घोषणा पत्र जारी करते हुये आगामी कार्ययोजना कि रूपरेखा भी बताई गई जिसमें व्यावसायिक स्वास्थ्य की स्थितियों का अंकलन रिपोर्ट प्रस्तुत करना,घातक उद्योगों में कार्यरत मजदूरों के लिए बने कानून, नीति एवं सुरक्षा संबंधी प्रभावों का अंकलन रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। देश के 5 राज्यों में विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का स्वास्थ्य सर्वे कर स्थिति रिपोर्ट जारी किया जाएगा। साथी ही स्वास्थ्य सेवाओं और ईएसआई कि स्थिति का सर्वे भी किया जाएगा।   जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा इस वर्ष देश के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में स्वास्थ्य दिवस अभियान चलाया गया था जिसे और मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन में निर्णय लिया गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार कोर्स चलाया जाएगा, जिसका पहला कार्यक्रम श्रीनगर में 1-7 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।    कार्यक्रम को सफल बनाने में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के उत्तरप्रदेश संजीव सिन्हा, ओड़ीशा के गोरांग महापात्रा, छत्तीसगढ़ के चंद्रकांत यादव, पुनिता कुमार, प्रकाश गार्डिया, दिल्ली से इफत राग, जम्मू कश्मीर के रही रियाज, राजस्थान कि हेमलता कंसोटिया, असम के मुकुट लोचन, मणिपुर के ऋषिकान्त आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।