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खूबसूरती और प्रतिभा का जलवा: सागर की बेटी अब कनाडा में करेगी भारत का प्रतिनिधित्व

सागर  शहर की बेटी अपूर्वा दुबे ने हाल ही में इंदौर में हुई मिसेज एशिया पैसिफिक वर्ल्ड प्रतियोगिता जीतकर ना सिर्फ सागर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है. प्रतियोगिता जीतने के बाद सागर अपने मायके पहुंची अपूर्वा का जोरदार स्वागत किया गया. अब अपूर्वा कनाडा में आयोजित होने वाली काॅस्मो वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता में शिरकत करेंगी. जिसकी तैयारियों में वो जुट गयी है. उनका कहना है कि सागर में पढ़ाई के दौरान वो कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रही है, इसलिए स्टेज पर जाने में हिचक नहीं थी और मैंने आत्मविश्वास के साथ अपने आप को पेश किया, जिसके कारण ये खिताब जीत पायी।  इंदौर में हुई प्रतियोगिता सागर शहर की बेटी और अपूर्वा दुबे वैद्य ने मिसेज एशिया पैसेफिक वर्ल्ड खिताब जीतकर शहर के साथ अपने परिवार का नाम रोशन किया है. सागर यूनिवर्सिटी के शिक्षक गिरीश मोहन दुबे की बेटी अपूर्वा ने बताया कि "उन्हें इस प्रतियोगिता की जानकारी एक दोस्त के जरिए मिली थी. उनके पास समय कम था, लेकिन सागर में पढ़ाई के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्टेज एक्टिविटीज में सक्रिय रहने के कारण आत्मविश्वास के चलते प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 22 से 24 मई तक इंदौर के एक होटल में आयोजित प्रतियोगिता में जीत हासिल की।  कई चरणों में हुई प्रतियोगिता अपूर्वा दुबे वैद्य ने बताया कि तीन दिन तक अलग-अलग सेशन में प्रतियोगिता आयोजित की गयी. अलग-अलग 9 चरणों में ग्रूमिंग सेशन, रैंप वॉक ट्रेनिंग, व्यक्तित्व विकास, शिष्टाचार और प्रश्न उत्तर सत्र आयोजित किए गए. प्रतियोगिता में दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, पुणे, रतलाम सहित देश के कई शहरों की महिला प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इन 9 चरणों के प्रदर्शन के आधार पर फिनाले में पहुंची और वहां के प्रदर्शन के आधार पर खिताब जीता।  ट्रेडिशनल लहंगा और मां लक्ष्मी के स्वरूप में मिली जीत अपूर्वा ने बताया कि फिनाले में इंट्रोडक्शन, इंडियन एथेनिक और इंडिया गाॅड्स राउंड हुए. जिसमें उन्होंने इंडियन एथेनिक राउंड में पारंपरिक लहंगा पहना और जबकि इंडियन गॉड्स राउंड में मां लक्ष्मी का स्वरूप प्रस्तुत किया।  इस तरह उन्होंने टॉप 15 में जगह बनायी और इसके बाद सबसे आखिर में क्वश्चन राउंड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मिसेज एशिया पैसिफिक वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पति राहुल वैद्य, पिता डॉ गिरीश मोहन दुबे और माता संध्या दुबे सहित परिवार के सदस्यों को दिया। 

खाद्य सुरक्षा पर पंजाब सरकार सख्त, स्टेट फ़ूड कमीशन ने की ऑनलाइन समीक्षा

फरीदकोट. पंजाब स्टेट फ़ूड कमीशन के बाल मुकंद शर्मा ने आज अलग-अलग अधिकारियों के साथ ऑनलाइन मीटिंग की। मीटिंग में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (RD) डॉ. संदीप मल्होत्रा ​​और अलग-अलग अधिकारी मौजूद थे। मीटिंग के दौरान उन्होंने फ़ूड सेफ्टी से जुड़े काम का रिव्यू किया। उन्होंने मीटिंग के दौरान मिली कमियों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गलतियों को जल्द से जल्द दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी सेंटरों और स्कूलों में मौसमी सब्जियां लगाई जाएं, ताकि बच्चों की सेहत का ध्यान रखते हुए उन्हें साफ़-सुथरा खाना दिया जाए। बच्चों के खाने की समय-समय पर चेकिंग की जाए और साफ़-सफ़ाई से जुड़े कैंप भी लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सेहत, न्यूट्रिशन और फ़ूड सेफ्टी से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मौके पर गुरजीत सिंह DFSC, पवन कुमार डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर, डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर नवदीप सिंह, चमकौर सिंह फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, हरिंदर पाल शर्मा एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ऑफिसर, कुलदीप सिंह डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिस मौजूद थे।

बस्तर की बेटियों की बड़ी उड़ान, रुद्राणी और डालेश्वरी बनीं अंचल की नई पहचान

रायपुर.  आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों को मात देकर बस्तर जिले की दो बेटियों ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से ताल्लुक रखने वाली रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने माता-पिता, गांव और पूरे बस्तर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों में गढ़ी सफलता की कहानी बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की निवासी रुद्राणी कश्यप ने सेजेस (स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय) करपावंड से और डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार से पढ़ाई करते हुए यह शानदार उपलब्धि हासिल की है। दोनों छात्राओं ने साबित कर दिया है कि यदि लगन और अनुशासन हो, तो प्रतिभा किसी भी अभाव की मोहताज नहीं होती। शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिली नई उड़ान तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित श्शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दोनों छात्राओं को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। हाल ही में ग्राम उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान बस्तर सांसद महेश कश्यप ने दोनों होनहार बेटियों को प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए। इस मौके पर सांसद ने दोनों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्मृति स्वरूप पौधे भी भेंट किए। माता-पिता ने जताया आभार, बेटियों के सपनों को मिले पंख रुद्राणी कश्यप की माता श्रीमती कुंती कश्यप ने बताया कि बेटी की रुचि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) में है और पूरा परिवार उसकी आगे की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग करेगा। वहीं, डालेश्वरी बघेल के पिता लम्बोदर बघेल ने इस सफलता का पूरा श्रेय बेटी की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन को दिया। श्रमसाध्य जीवन जीने वाले परिवारों की इन बेटियों की यह कामयाबी आज ग्रामीण अंचल के हज़ारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। सरकार की इस योजना ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया है, बल्कि उनके सपनों को एक नई और मजबूत दिशा भी दी है।

बस्तर की बेटियों ने रचा सफलता का इतिहास, रुद्राणी और डालेश्वरी ने बढ़ाया अंचल का मान

बस्तर की बेटियों ने पेश की सफलता की मिसाल, तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की रुद्राणी और डालेश्वरी ने बढ़ाई अंचल की शान शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिला संबल, हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में बेटियों ने लहराया परचम सांसद महेश कश्यप ने सुशासन तिहार में सौंपे 15-15 हजार रुपये के चेक, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं रायपुर, आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों को मात देकर बस्तर जिले की दो बेटियों ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से ताल्लुक रखने वाली रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने माता-पिता, गांव और पूरे बस्तर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों में गढ़ी सफलता की कहानी              बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की निवासी रुद्राणी कश्यप ने सेजेस (स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय) करपावंड से और डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार से पढ़ाई करते हुए यह शानदार उपलब्धि हासिल की है। दोनों छात्राओं ने साबित कर दिया है कि यदि लगन और अनुशासन हो, तो प्रतिभा किसी भी अभाव की मोहताज नहीं होती। शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिली नई उड़ान             तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित श्शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दोनों छात्राओं को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। हाल ही में ग्राम उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने दोनों होनहार बेटियों को प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए। इस मौके पर सांसद ने दोनों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्मृति स्वरूप पौधे भी भेंट किए।            माता-पिता ने जताया आभार, बेटियों के सपनों को मिले पंख रुद्राणी कश्यप की माता श्रीमती कुंती कश्यप ने बताया कि बेटी की रुचि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) में है और पूरा परिवार उसकी आगे की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग करेगा। वहीं, डालेश्वरी बघेल के पिता श्री लम्बोदर बघेल ने इस सफलता का पूरा श्रेय बेटी की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन को दिया।          श्रमसाध्य जीवन जीने वाले परिवारों की इन बेटियों की यह कामयाबी आज ग्रामीण अंचल के हज़ारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। सरकार की इस योजना ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया है, बल्कि उनके सपनों को एक नई और मजबूत दिशा भी दी है।

CM योगी की मुस्कान के पीछे छिपा बड़ा इशारा! ‘टोटी चोरी’ वाले बयान से किस पर साधा निशाना?

लखनऊ. पांच जून को सीएम योगी का जन्मदिन था और विश्व पर्यावरण दिवस भी। इस मौके पर लखनऊ में 'एक पेड़ मां के नाम' पौधरोपण महाभियान-2026 के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे सीएम योगी ने विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर लोगों को संबोधित किया। सीएम योगी का भाषण जारी ही था कि बोलते-बोलते सीएम योगी कुछ ऐसा कह गए कि वह खुद ही मुस्कुराने लगे। सीएम योगी ने इशारों ही इशारों में विपक्ष पर निशाना भी साध गए। हर घर जल नल योजना का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा, हमने योजना को आगे बढ़ाया तो पता लगा कि कोई टोटी ही चोरी कर ले जा रहा है तो कोई दूसरे तरीके से नुकसान कर रहा है। कहीं नल खुला है तो खुला ही पड़ा है। इतना कहते ही मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कुराहट नजर आ गई। दरअसल सीएम योगी का इशारा सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर था। हालांकि पूरे भाषण में सीएम योगी ने अखिलेश का नाम नहीं लिया। लेकिन अपने भाषण के दौरान टोटी चोरी का जिक्र करते हुए सीएम योगी खुद को मुस्कुराने से रोक नहीं पाए। नौ साल में यूपी में लगाए गए 242 करोड़ पौधे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि नौ वर्षों में प्रदेश के अंदर वन महोत्सव के अवसर पर पौधारोपण के क्रम में अब तक 242 करोड़ पौधरोपण के एक बड़े कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा चुका है। योगी ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने प्रकृति और मातृभूमि के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए 'एक पेड़ मां के नाम' कार्यक्रम की शुरुआत तीन वर्ष पहले की थी। उसी अभियान की कड़ी में आज फिर उप्र में यह आयोजन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा 'जननी और जन्मभूमि के प्रति कृतज्ञता हर नागरिक का दायित्व है। पर्यावरण की रक्षा मातृभूमि के प्रति हमारे सर्वोच्‍च दायित्वों में से एक है।' उन्‍होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करने के लिए एक ओर वृहद पैमाने पर पौधरोपण करना और दूसरी ओर पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए कई कदम उठाए गए हैं। एकल उपयोग प्लास्टिक पर रोक लगाने पर जोर देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, एकल उपयोग प्लास्टिक को हतोत्साहित करने और उसके स्थान पर वैकल्पिक रूप में मिट्टी के बर्तन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। जल संरक्षण के लिए उठाए गए कई कदम सीएम योगी ने विस्तार से बताते हुए कहा कि इसके लिए माटी कला बोर्ड की स्थापना करना, अप्रैल से जून तक हर गांव के तालाब को प्रजापति और कुम्हार समाज के लोगों को निशुल्क मिट्टी उपलब्‍ध कराना, सोलर चाक देना जैसे काम प्रदेश में सफलतापूर्वक किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए भी प्रदेश में अनेक कदम उठाए गए और अनेक मॉडल प्रस्तुत किए गए। उन्होंने कहा कि विकास प्राधिकरण ने निश्चित क्षेत्रफल से बड़े क्षेत्र में बनने वाले आवासीय भवनों व कमर्शियल परिसरों के लिए वर्ष जल संरक्षण को अनिवार्य किया है। मुख्यमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत सभी लोगों से पौधे लगाने और उनका संरक्षण किए जाने की अपील की। सीएम योगी ने एक पेड़ मां के नाम अभियान किया शुरू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को कुकरैल रेंज अवध वन प्रभाग में 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने यहां कपूर का पौधा लगाया जबकि वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण सक्सेना ने आंवला, वन राज्यमंत्री केपी मलिक ने नीम तथा विधायक ओपी श्रीवास्तव ने आंवला का पौधा रोपित किया। मुख्यमंत्री ने यहां महर्षि चरक औषधि वन की भी स्थापना की। योगी ने जल संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि बरसात के पानी की एक-एक बूंद को सुरक्षित करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि पेड़ को क्षति न पहुंचाएं और हर महत्वपूर्ण आयोजन पर एक पेड़ अवश्य लगाएं।

पर्यावरण संरक्षण की ओर बड़ा कदम, श्री दुखनिवारन साहिब ने अपनाए कम्पोस्टेबल प्रसाद लिफाफे

पटियाला. वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे 2026 के मौके पर, पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB), पटियाला की लगातार कोशिशों के तहत, पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देने और प्लास्टिक के लिफाफों के सस्टेनेबल विकल्पों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, PPCB के अधिकारियों ने श्री दुखनिवारन साहिब, पटियाला का दौरा किया और गुरुद्वारा मैनेजमेंट से मुलाकात की ताकि कड़ाह प्रसाद के डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसपोर्टेशन के लिए प्लास्टिक के लिफाफों के बजाय कम्पोस्टेबल लिफाफों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके। श्री दुखनिवारन साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी प्रणाम सिंह ने पटियाला के लोगों से प्लास्टिक के लिफाफों का इस्तेमाल न करने और गुरुद्वारे से कड़ाह प्रसाद ले जाने के लिए बायोडिग्रेडेबल लिफाफे दान करने और इस्तेमाल करने की अपील की। श्री दुखनिवारण साहिब के मैनेजर भाग सिंह ने भी हेड ग्रंथी की इस अपील का सपोर्ट किया और संगत से सिख गुरुओं की शिक्षाओं के अनुसार पर्यावरण को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से बचकर और सस्टेनेबल विकल्प अपनाकर पर्यावरण बचाने में मदद की जा सकती है, जैसा कि श्री हरमंदिर साहिब (श्री दरबार साहिब), अमृतसर में किया जा रहा है। इसके बाद, जागरूकता कैंपेन के तहत, ज्ञानी प्रणाम सिंह, भाग सिंह और PPCB अधिकारियों ने गुरुद्वारे में आने वाली संगत को कम्पोस्टेबल लिफाफे बांटे। इस मौके पर गुरकरण सिंह, एनवायरनमेंटल इंजीनियर, PPCB; नवतेश सिंगला, एनवायरनमेंटल इंजीनियर, PPCB; दविंदर सिंह, JE; और डॉ. गुरशगन कंधोला, सीनियर फेलो, PPCB मौजूद थे।

लोक भवन में तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर का समापन

रायपुर राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर लोक भवन में आयोजित तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। शिविर के अंतिम दिन हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को प्रार्थना के माध्यम से ध्यान की विधि की जानकारी दी तथा ध्यान का अभ्यास भी कराया।           शिविर के दौरान लोक भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए मेडिटेशन के विभिन्न पहलुओं को समझा और नियमित अभ्यास के महत्व को जाना। प्रशिक्षकों ने बताया कि ध्यान मानसिक शांति, एकाग्रता और तनाव प्रबंधन का प्रभावी माध्यम है, जिसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर बेहतर कार्यक्षमता और संतुलित जीवन प्राप्त किया जा सकता है। इस शिविर में प्रतिभागियों ने ध्यान की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास किया और इसके सकारात्मक प्रभावों का अनुभव किया।

पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – रमेन डेका पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री 9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधि रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।           राज्यपाल रमेन डेका ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन  में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियांे को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।           राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।           राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने।          डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।         विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।           मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।           साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।          लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महती जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी।         अध्यक्ष, राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली एवं दीक्षांत समारोह अभिभाषक डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।

विकसित छत्तीसगढ़ का नया सपना: पारंपरिक डिग्रियों से आगे बढ़कर ग्लोबल करियर की ओर युवाओं का रुख

विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ‘ग्लोबल करियर’ की ओर बढ़ते युवाओं के कदम सिर्फ साक्षरता नहीं, सक्षमता का नया दौर रायपुर        छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, घने वनों और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है,एक ज्ञान-आधारित, प्रगतिशील राज्य। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वह समाज सफल होगा जिसके पास अत्याधुनिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार की शक्ति हो। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence) योजना’ शुरू की है। यह पहल पारंपरिक उच्च शिक्षा मॉडल को बदलकर कॉलेजों को युवाओं के लिए आधुनिक लॉन्चपैड बनाने की महत्वाकांक्षा रखती है। कौशल और रोजगार के बीच की खाई      छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रही है। परिणामस्वरूप, युवाओं को डिग्रियाँ मिलती रहीं पर उद्योग की बदलती तकनीकी मांगों—जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किलिंग और डेटा एनालिटिक्स—और वास्तविक कौशल के बीच एक गहरी खाई बन गई। खासकर वनांचल और ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र आधुनिक संसाधनों, प्रयोगशालाओं और वैश्विक मार्गदर्शन के अभाव में पिछड़ जाते थे। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की दिशानिर्देशों को अपनाते हुए, सरकार ने इसी खाई को पाटने और बहुसांस्कृतिक, अनुसंधान-उन्मुख संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है।       यह योजना दावे भर नहीं है—इसके पीछे ठोस बजटीय प्रावधान और चरणबद्ध रोडमैप मौजूद है। राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों जिनमें 3,000 से अधिक नामांकन हैं,उसे ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। प्रारम्भिक चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं और अगले चरण में प्रमुख कॉलेजों के लिए 15 करोड़ रुपए तक का विशेष वित्तीय प्रावधान रखा गया है। साथ ही ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ जैसी पहलें प्राध्यापकों और छात्रों को वैश्विक मानक के अनुसंधान के लिए वित्तीय व प्रशासनिक सहायता देंगी। फाइव‑पिलर आर्किटेक्चर: शिक्षा के पाँच स्तंभ       ये उत्कृष्टता केंद्र सिर्फ भौतिक सुविधाएँ नहीं होंगे; इनके कार्य-तत्व पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित होंगे, जो छात्रों को विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेंगे। अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ             विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, तकनीकी और कृषि विषयों में अंतरराष्ट्रीय मानक की लैब सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे थ्योरी के साथ ‘करके सीखना’ सुनिश्चित होगा।डिजिटल लर्निंग सेंटर: हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई‑लाइब्रेरी के जरिए दूरस्थ और वनांचल के छात्र भी वैश्विक ज्ञान स्रोतों से जुड़ सकेंगे। रिसर्च एवं इनोवेशन लैब: स्थानीय कृषि, जनजातीय कला, हर्बल चिकित्सा और माइनिंग जैसे क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए शोध को प्रेरित किया जाएगा, ताकि ‘लोकल’ शोध को ‘ग्लोबल’ पहचान मिल सके।  रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण       कोडिंग, आईटी कौशल, उद्यमिता और स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेल्स के माध्यम से छात्रों को मार्केट-रेडी बनाया जाएगा।  करियर एवं प्लेसमेंट गाइडेंस      इन‑हाउस काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, CGPSC, बैंकिंग) की तैयारी के लिए संरचित मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।  जमीनी असर: लाभ किस तरह पहुंचेगा?      यह योजना व्यक्तिगत छात्रवृत्ति या लोन नहीं, बल्कि संस्थागत सशक्तिकरण पर आधारित है। चयनित उत्कृष्टता केंद्रों के नियमित छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। कौशल विकास, रिसर्च और इनक्यूबेशन प्रोग्राम्स के लिए विस्तृत परवर्ती पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी, जो सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र कागजी बाधाओं में न फ़ँसें। बौद्धिक पलायन पर अंकुश और आर्थिक सशक्तिकरण      जब राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ और वैश्विक मानक का शिक्षण वातावरण छात्रों के अपने जिलों में उपलब्ध होगा तो दूर के महानगरों की ओर पलायन कम होगा। यह युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही नई उद्यमी गतिविधियाँ आरम्भ करने और नये रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में जीतेगी। मुख्यमंत्री का विजन: रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभाशाली हैं; उन्हें सही अवसर और आधुनिक संसाधन मिले तो वे न केवल नौकरी पाएँगे बल्कि नये उद्यम भी खोलकर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यही इस योजना की आत्मा है।युवाओं को रोजगार संचयित करने की बजाय रोजगार सृजन के लिये सक्षम बनाना है।          ‘उत्कृष्टता केंद्र योजना’ छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक इतिहास में एक निर्णायक मील का पत्थर है। यह राज्य को परंपरागत ‘उपभोक्ता’ पहचान से उठाकर एक ‘नॉलेज स्टेट’ में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों से निकले प्रशिक्षित युवा केवल कागजी प्रमाणपत्र नहीं लेकर बाहर जाएंगे; उनके पास आधुनिक कौशल, नवाचार की चाह और आत्मनिर्भरता की भावना होगी। यह पहल निःसंदेह छत्तीसगढ़ को समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में मजबूती देगी।

महाराष्ट्र सीमा से सटे गांव में पहुंची सुविधाओं की धार, जल जीवन मिशन बना बदलाव का आधार

महाराष्ट्र सीमा से सटे अबूझमाड़ की पदमकोट पंचायत में विकास की नई धारा: जल जीवन मिशन से बदली ग्रामीणों की जिंदगी ​ ​रायपुर       कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगलों से घिरा दुर्गम रास्ता और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से मीलों की दूरी—यह पहचान रही है छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे अबूझमाड़ क्षेत्र की। लेकिन आज इसी अबूझमाड़ की एक पंचायत विकास की नई इबारत लिख रही है। महाराष्ट्र सीमा से सटी जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत पदमकोट में 'जल जीवन मिशन' ने न केवल हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और आजीविका की तस्वीर भी बदल कर रख दी है।       ​कभी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने वाला यह दूरस्थ वनांचल गांव आज सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति व्यवस्था के जरिए ग्रामीण विकास और समावेशी प्रगति का एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है। ​सौर ऊर्जा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अनूठा संगम       ​अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। बिजली की अनिश्चितता और कठिन रास्तों के बीच जल जीवन मिशन के अंतर्गत एक ऐसी कार्ययोजना तैयार की गई जो आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल हो।       ​गांव में निर्बाध पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी और बुनियादी ढांचे का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। गांव के हर कोने और हर घर को जोड़ने के लिए करीब चार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। बिजली पर निर्भरता खत्म करने के लिए 10-10 हजार लीटर क्षमता की चार सोलर पानी टंकियों का निर्माण किया गया है। इस पूरी व्यवस्था के माध्यम से पंचायत के शत-प्रतिशत परिवारों को उनके घर पर ही नियमित और स्वच्छ पेयजल मिल रहा है। ​महिलाओं के श्रम को मिला सम्मान, बच्चों को मिला शिक्षा का अवसर      ​इस सफलता की कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आया बदलाव है। पहले इस गांव की महिलाओं और बच्चों का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पीने का पानी सहेजने में बीत जाता था। उन्हें मीलों पैदल चलकर जलस्रोतों तक जाना पड़ता था। अब घर के आंगन में ही शुद्ध जल उपलब्ध होने से महिलाओं का समय और श्रम दोनों बच रहा है। इस समय का उपयोग वे स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़कर आजीविका गतिविधियों और सामाजिक कार्यों में कर रही हैं। वहीं, पानी भरने के काम से मुक्त होकर बच्चे अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं और रचनात्मक गतिविधियों में समय बिता रहे हैं। ​स्वास्थ्य, स्वच्छता और 'किचन गार्डन' से पोषण क्रांति    ​पदमकोट में शुद्ध पेयजल सिर्फ प्यास बुझाने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि इसने गांव के समग्र स्वास्थ्य और पोषण के स्तर को ऊपर उठाया है। स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिलने से गांव में डायरिया, पीलिया और पेट से जुड़ी अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में भारी कमी आई है। पर्याप्त पानी की उपलब्धता से ग्रामीणों में व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता के प्रति रुचि बढ़ी है, जिससे घरों का वातावरण स्वच्छ रहने लगा है। नियमित जलापूर्ति का सबसे अनोखा लाभ पोषण के रूप में दिख रहा है। ग्रामीणों ने अपने घरों के पीछे 'किचन गार्डन' (बाड़ी) विकसित कर लिए हैं। नल के पानी का उपयोग कर वे मौसमी और पौष्टिक सब्जियां उगा रहे हैं। इससे परिवारों को ताजी सब्जियां मिल रही हैं, बाजार पर निर्भरता कम हुई है और उनके भोजन में विविधता आई है। प्रशासनिक प्रतिबद्धता और आत्मनिर्भरता का नया मॉडल      ​ग्राम पंचायत पदमकोट की यह सफलता साबित करती है कि अगर प्रशासनिक प्रतिबद्धता, सटीक योजना और सतत निगरानी हो, तो देश के सबसे पिछड़े और सुदूर अंचलों तक भी विकास की धारा पहुंचाई जा सकती है।       ​पदमकोट के ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन ने उन्हें केवल पानी नहीं दिया, बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा की है। आज महाराष्ट्र की सीमा पर बसा अबूझमाड़ का यह आखिरी गांव छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए इस बात का जीवंत उदाहरण है कि स्वच्छ पेयजल किस तरह एक बेहतर जीवन, सुदृढ़ स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार बन सकता है।