व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित
भोपाल
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसआई) ने 5 जून को भोपाल के गांधी भवन में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मणिपुर, असम, ओड़ीशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और पानी एवं वैश्विक गर्मी जैसे चार सत्रों में इस चर्चा को आयोजित किया गया।
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में काम से जुड़ी सेहत और सुरक्षा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, लाखों मजदूर उद्योगों, खनन, निर्माण, घरेलू काम और दूसरे अनौपचारिक क्षेत्रों में खतरनाक हालात का सामना करते हुये काम कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने मजदूरों की सेहत की सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों, काम से जुड़ी सुरक्षा के मानकों को बेहतर ढंग से लागू करने और संगठित प्रयास करने की जरूरत पर चर्चा की। सिलिकोसिस से प्रभावित कुछ मजदूरों ने अपनी कहानियां और मदद पाने में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया। ऐसे सम्मेलनों के महत्व को बताते हुए, अमूल्य निधि ने कहा कि हमें अपनी जागरूकता बढ़ानी होगी और पर्यावरण की रक्षा तथा काम से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाव के लिए मिलकर काम करना होगा।
व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ जगदीश पटेल ने कहा कि काम से जुड़े स्वास्थ्य खतरों के मामले में हर जगह जोखिम है, और हमें उनकी पहचान करने की जरूरत है। 90 से ज्यादा ऐसे काम हैं जिनसे सिलिकोसिस हो सकता है। 70 से ज्यादा देशों ने एस्बेस्टस पर रोक लगा दी है, भारत ने सिर्फ एस्बेस्टस की माइनिंग पर रोक लगाई है, लेकिन इसके इंपोर्ट की इजाजत है। काम से जुड़े खतरों के बारे में बात करते हुए सुश्री चुन्नी ने कहा कि काम के दौरान मजदूरों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। वे अपने अंग खो देते हैं और कुछ हादसों में उनकी जान भी चली जाती है। हम उन्हें मुआवजा और दूसरी तरह की मदद दिलाने में सहायता करते हैं।
दूसरा मुख्य सत्र "पर्यावरण, जलवायु और स्वास्थ्य" पर केंद्रित था, जिसमें खनन और उससे जुड़े उद्योगों में काम से जुड़े खतरों, पर्यावरण को हो रहे नुकसान, सुरक्षित पानी की चुनौतियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के असर पर चर्चा की गई। अरावली बचाने के संघर्ष में शामिल कैलाश मीणा ने कहा कि हमे अपने संसाधनों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हुये उसे संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। अरावली पहाड़ को जिस प्रकार से काटा गया है वो एक संकट पैदा कर रहा है। अपने विचार रखते हुए राजकुमार ने कहा कि हम तेजी से अपने प्राकृतिक संसाधन खो रहे हैं। 50 साल पहले हमारे पास 15 हजार नदियां थी जिसमे से 4500 नदियां खत्म हो चुकी है। भारत में वायु प्रदूषण से लगभग 20 लाख मौतें प्रत्येक वर्ष होती है। हमने हवा, पानी और मिट्टी केपी जहरीला बना दिया जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर होता है। राकेश दीवान ने कहा कि हमें आत्महंता समाज बनते जा रहे है, हमे उनसे सीखना होगा जिंहोने जंगल को आज हैती बचा कर रखा है हमें उस पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए, जिसने हमारे पर्यावरण की रक्षा की है।
आखिरी सत्र में भविष्य की व्यावसायिक स्वास्थ्य रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिसमें राज्य-स्तर पर किए जाने वाले कामों को मजबूत करना प्रमुख रहा। अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस 10 दिसंबर 2026 को जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में घोषणा पत्र जारी करते हुये आगामी कार्ययोजना कि रूपरेखा भी बताई गई जिसमें व्यावसायिक स्वास्थ्य की स्थितियों का अंकलन रिपोर्ट प्रस्तुत करना,घातक उद्योगों में कार्यरत मजदूरों के लिए बने कानून, नीति एवं सुरक्षा संबंधी प्रभावों का अंकलन रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। देश के 5 राज्यों में विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का स्वास्थ्य सर्वे कर स्थिति रिपोर्ट जारी किया जाएगा। साथी ही स्वास्थ्य सेवाओं और ईएसआई कि स्थिति का सर्वे भी किया जाएगा।
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा इस वर्ष देश के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में स्वास्थ्य दिवस अभियान चलाया गया था जिसे और मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन में निर्णय लिया गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार कोर्स चलाया जाएगा, जिसका पहला कार्यक्रम श्रीनगर में 1-7 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के उत्तरप्रदेश संजीव सिन्हा, ओड़ीशा के गोरांग महापात्रा, छत्तीसगढ़ के चंद्रकांत यादव, पुनिता कुमार, प्रकाश गार्डिया, दिल्ली से इफत राग, जम्मू कश्मीर के रही रियाज, राजस्थान कि हेमलता कंसोटिया, असम के मुकुट लोचन, मणिपुर के ऋषिकान्त आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।





