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विगत 05 दिनों में 1 करोड़ 45 लाख रूपये से अधिक के मादक पदार्थ एवं संपत्ति जप्त

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विभिन्न जिलों में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए विगत 05 दिनों में 01 करोड़ 45 लाख रूपए से अधिक मूल्‍य के अवैध मादक पदार्थ सहित संपत्ति जब्‍त की हैं। इन कार्रवाइयों में गांजा, स्मैक, अफीम, एमडी ड्रग्स एवं डोडाचूरा जैसे मादक पदार्थों की बड़ी खेप जब्‍त करते हुए अनेक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। बड़वानी जिले के वरला थाना पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पांजरिया से 01 क्विंटल 47 किलोग्राम गांजा जब्‍त कर लगभग 32 लाख 34 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। प्रकरण में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना की जा रही है। शिवपुरी जिले में पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 11.53 ग्राम एवं 106 ग्राम स्मैक, 52 हजार नगद तथा मोटरसाइकिल सहित लगभग 30 लाख 52 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दतिया जिले की बसई थाना पुलिस ने 86.85 किलोग्राम गांजा एवं कार सहित लगभग 20 लाख रूपये की संपत्ति जप्‍त कर एक तस्कर को गिरफ्तार किया। गुना जिले के मृगवास थाना पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 100.59 ग्राम स्मैक एवं 10 किलोग्राम से अधिक गांजा जप्त कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। तस्करी में प्रयुक्त वाहन सहित लगभग 17 लाख रूपये की संपत्ति जप्‍त की है। दमोह जिले में पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में 115.95 ग्राम स्मैक तथा 3 किलोग्राम गांजा जप्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों कार्रवाइयों में लगभग 12 लाख 35 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है। आगर मालवा जिले के थाना बड़ौद पुलिस ने 102किलो250 ग्राम अवैध डोडाचूरा, एक कार एवं मोटरसाइकिल सहित कुल 11 लाख 60 हजार रूपये की संपत्ति जप्त की। रतलाम जिले के माननखेड़ा चौकी पुलिस ने 3 किलो150ग्राम अवैध अफीम के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 6 लाख 30 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है। इंदौर जिले में द्वारकापुरी एवं चंदन नगर थाना पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाइयों में 4 किलो83ग्राम गांजा तथा 18.59 ग्राम एमडी ड्रग्स जप्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने लगभग 5 लाख 81 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है। मंदसौर जिले में पुलिस ने 1 किलोग्राम अफीम, वाहन एवं मोबाइल फोन सहित लगभग 2 लाख 50 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। हरदा जिले में कोतवाली पुलिस ने 9.06 ग्राम एमडी पाउडर के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 56 हजार रूपये की संपत्ति बरामद की है। खंडवा जिले में पुलिस ने 12.5 किलोग्राम गांजा एवं घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 1 लाख 78 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है। साथ ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उज्जैन जिलेकी तराना पुलिस ने 11 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 60 हजार रूपये की संपत्ति जप्‍त की है। भोपाल क्राइम ब्रांच ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 2 किलो681ग्राम गांजा, मोटरसाइकिल एवं मोबाइल फोन जप्त कर लगभग 1 लाख 41 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।साथ ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सीधी जिले में थाना मड़वास पुलिस ने ऑपरेशन “प्रहार 2.0” के तहत 3.722 किलोग्राम गांजा कीमत लगभग 55 हजार रूपये जप्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई निरंतर जारी है तथा इस प्रकार के अवैध कार्यों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है।मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना अथवा डायल-112 को दें। 

इंदौर के डायल-112 हीरोज इलेक्ट्रिक व्हीकल शो-रूम में लगी आग, संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर बिल्डिंग में फँसे लोगों की बचाई जान

भोपाल इंदौर जिले के थाना लसूड़िया क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, साहस एवं सूझबूझ से एक बड़े हादसे को टालते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल शो-रूम में लगी आग के दौरान बिल्डिंग में फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। डायल-112 एवं फायर ब्रिगेड के संयुक्त रेस्क्यू अभियान से कई लोगों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी। 05 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना लसूड़िया क्षेत्र अंतर्गत स्कीम नंबर-136 स्थित एक इलेक्ट्रिक व्हीकल शो-रूम में आग लग गई है तथा कुछ लोग बिल्डिंग के अंदर फँसे हुए हैं। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल थाना लसूड़िया क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक नरेंद्र मंडेलिया, आरक्षक  राधेश्याम कुशवाहा, आरक्षक रितेश पाटीदार, पायलट  राजेश यादव एवं  पवन दांगी तत्काल मौके पर पहुँचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए त्वरित रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। जवानों ने साहस एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए बिल्डिंग में फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड दल के साथ समन्वय स्थापित कर आग बुझाने की कार्यवाही कराई गई। संयुक्त प्रयासों से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया और एक संभावित बड़ी जनहानि को टाल दिया गया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आगजनी, दुर्घटना एवं अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में भी त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। संकट की हर घड़ी में डायल-112 जवान साहस, संवेदनशीलता एवं सेवा भाव के साथ लोगों की सहायता कर रहे हैं।  

स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर और पारदर्शी बनाएगा राज्य वित्त आयोग : अध्यक्ष पवैया

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग 6 जून को नर्मदापुरम संभाग की समीक्षा करेगा, जिसमें संबंधित जिलों के कलेक्टर्स, नगर पालिका अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। राज्य वित्त आयोग ने शुक्रवार को मंत्रालय में वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं वाणिज्यिक कर विभाग की समीक्षा बैठक की। देश में स्थानीय स्व शासन और जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए राज्य वित्त आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग के अध्यक्ष  जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व स्रोतों और बजटीय प्रबंधन को लेकर मैराथन मंथन हुआ। बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य  के.के. सिंह एवं सदस्य सचिव  वीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे। महत्वपूर्ण बैठक में वित्त विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। आयोग के अध्यक्ष  पवैया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों की दीर्घकालिक वित्तीय सुदृढ़ता के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक तथ्यों और आंकड़ों का संकलन कर विस्तृत अनुशंसाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अध्यक्ष  पवैया ने केंद्रीय और राज्य वित्त आयोगों द्वारा अनुशंसित अनुदानों के हस्तांतरण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्थानीय निकायों की लेखांकन और ऑडिट व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया। बैठक में आगामी सोलहवें वित्त आयोग के लिए आवश्यक वित्तीय आंकड़ों और रणनीतिक व्यवस्थाओं पर भी विभागों के साथ विस्तृत चर्चा हुई, जिससे केंद्र से मिलने वाले संसाधनों का राज्यों को अधिकतम लाभ मिल सके। समीक्षा में स्थानीय निकायों को प्रदान की जाने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति और संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत प्राप्त राशि के हस्तांतरण पर भी विचार-विमर्श किया गया। वाणिज्यिक कर विभाग ने बैठक में राज्य के कर राजस्व, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के प्रभाव और इसके लागू होने के बाद प्राप्त क्षतिपूर्ति का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत किया। इस बात पर विचार किया गया कि जीएसटी युग में स्थानीय निकायों के राजस्व को कैसे सुदृढ़ किया जाए। इसके अलावा, संपत्ति अंतरण पर लगने वाले अतिरिक्त मुद्रांक शुल्क और अन्य कराधान प्रावधानों की भी समीक्षा की गई, जिससे निकायों की आंतरिक आय में वृद्धि की जा सके। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर पंचम, पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग से प्राप्त राशि और उसके उपयोग की स्थिति जांची गई। बैठक में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों और ग्राम स्तर पर सेवा प्रदायगी की समीक्षा हुई। आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पंच-परमेश्वर योजना के तहत बुनियादी ढांचे का विकास और ई-पंचायत व्यवस्था के जरिए होने वाले डिजिटलाइजेशन की प्रगति देखी। साथ ही, पंचायतों की आय के आंतरिक स्रोत, कर संग्रहण क्षमता और शेल्टर टैक्स से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। आयोग द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि स्थानीय निकायों की केवल अनुदानों पर निर्भरता को कम कर उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना होगा। इसके लिए कर संग्रहण क्षमता को सुदृढ़ करने, वित्त आयोग के अनटाइड अनुदानों के प्रभावी एवं परिणामोन्मुख उपयोग और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए सभी संबंधित विभागों से व्यावहारिक सुझाव प्राप्त किए गए हैं, जिनके आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।  

अमेज़न ई-कारीगर से जुड़ेंगे जनजातीय कलाकार

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गोंड चित्रकला हमारे जनजातीय समाज की एक प्राचीन और गौरवशाली कला है। बुधवार को डिंडौरी जिले के कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित 'अमेज़न ई-कारीगर' मंच के शुभारंभ और समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह सहित विभाग एवं जिले के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वैश्विक पहचान और जीआई टैग पर जोर मंत्री  पटेल ने कहा कि गोंडी कला आधारित उत्पादों को अमेज़न ई-कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध करने से इस कला को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे न केवल चित्रकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान मिलेगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विशेष पहचान बनेगी। उन्होंने इस पुरातन और जीवंत कला को 'जीआई टैग' (GI Tag) दिलाने के लिए भी आवश्यक प्रयास करने की बात कही। आर्थिक सशक्तिकरण और कला संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र डिंडौरी के पाटनगढ़ ग्राम के कलाकारों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कार्यक्रम में "आजीविका ग्राम संगठन" पाटनगढ़ और "डॉट्स एंड डैशेज" संस्था के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। ग्राम पाटनगढ़ के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक गोंडी कला का संरक्षण, संवर्धन और बाजार का विस्तार करना है। आय में 10 गुना वृद्धि और ग्रामीण उद्यमिता का लक्ष्य यह समझौता कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 'डॉट्स एंड डैशेज' के व्यवस्थित विपणन सहयोग से वर्तमान में चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय 35 हजार रूपये से बढ़कर 70 हजार रूपये तक पहुंच गई है। अब उत्पादों को ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध कराने से इनकी वैश्विक मांग बढ़ेगी, जिससे आगामी समय में कलाकारों की आय में 10 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है। यह पहल डिंडौरी जिले में कला आधारित आजीविका का एक सफल उदाहरण स्थापित करेगी।  

स्थानीय सामग्री और आधुनिक हरित तकनीक से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा, कार्बन फुटप्रिंट घटाने पर ज़ोर

भोपाल प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को भविष्योन्मुखी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार हरित आवास तकनीक का उपयोग करने जा रही है। इस नवाचार से स्वच्छ और स्वस्थ भारत के संकल्प को बल मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आवास बनाए जाएंगे, जो स्थानीय संस्कृति और भू-जलवायु परिस्थितियों के पूरी तरह अनुकूल होंगे। हरित आवासों के माध्यम से जहाँ एक ओर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इन आवासों के ज़रिए सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ संसाधनों की रीसाइकलिंग भी हो सकेगी। सीएसईबी तकनीक को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण भवन निर्माण में हरित तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 'कंप्रेस्ड स्टेबलाइज्ड अर्थ ब्लॉक्स' के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। महात्मा गांधी ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर के साथ क्षेत्रीय केंद्रों – जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सिवनी तथा नौगाँव-में सीएसईबी ब्लॉक बनाने वाली मशीनों की स्थापना की गई है। इन संस्थानों में राजमिस्त्रियों, जनपद अधिकारियों और कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे इन ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण कर सकें। भोपाल और इंदौर के केंद्रों द्वारा उक्त ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण भी किया जा चुका है। इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत में न्यूनतम 25 आवास सीएसईबी ब्लॉक्स से बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सीईओ जिला पंचायत और सीईओ जनपद पंचायत के साथ ही आजीविका मिशन एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को इसके सफल क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। हरित आवासों के निर्माण में बांस, स्थानीय मिट्टी और अन्य संसाधनों का विशेष रूप से उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे न केवल कमरे का तापमान (इनडोर थर्मल कम्फर्ट) और आर्द्रता बेहतर होंगी और गर्मी से राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय सामग्री के उपयोग के चलते कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी।  

सभी 194 निकायों में एक ही दिन होगी बैठक, नोडल अधिकारी निकायों के कार्यों की करेंगे समीक्षा

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव  शंगीता आर. ने गुरुवार को राज्य के सभी 194 नगरीय निकायों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सहित पांच प्रमुख शहरी विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रगति, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तथा निर्धारित समय-सीमा के अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान आवास निर्माण की प्रगति, आधिपत्य की स्थिति तथा हितग्राहियों के साथ समन्वय जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव  शंगीता आर. ने स्पष्ट किया कि पीएम आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत सितंबर 2026 अंतिम समय-सीमा है और इसके बाद किसी प्रकार की समयवृद्धि नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा के पश्चात केंद्र अथवा राज्य शासन से कोई अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं होगी। ऐसे में परियोजनाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय भार संबंधित नगरीय निकायों को स्वयं वहन करना होगा। सचिव ने सभी नगरीय निकायों को निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण करने तथा पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाने, हितग्राहियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा हितग्राही अंश की वसूली को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। साथ ही योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, नियमित समीक्षा और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कमजोर प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को कार्यों में तेजी लाने तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना तथा अन्य शहरी विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इस दौरान भूमि उपलब्धता, परियोजनाओं की प्रगति तथा निर्माण गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। सचिव ने सभी बाधाओं के त्वरित निराकरण, प्रक्रियाओं के मानकीकरण तथा जलापूर्ति, स्वच्छता और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। योजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए सभी राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों को अपने-अपने आवंटित जिलों के नगरीय निकायों का नियमित भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। पहली बार 6 जून को सभी नोडल अधिकारी अपने जिलों में पहुंचकर योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे। इस पहल का उद्देश्य योजनाओं की प्रभावी निगरानी, समस्याओं के त्वरित समाधान तथा मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। बैठक में वार्ड-स्तरीय डेटा मॉनिटरिंग को मजबूत करने, स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा जिला प्रशासन और नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष बल दिया गया। सचिव  शंगीता आर. ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निर्मित परिसंपत्तियों के अधिकतम उपयोग और परिणाम-आधारित कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

साइबर सिक्योरिटी एवं एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन 400 से अधिक विद्यार्थी हुए शामिल

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गौतम टेटवाल ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार हैं। वर्तमान डिजिटल युग में डेटा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा बन चुका है।इसके संरक्षण और सुरक्षित उपयोग में साइबर सुरक्षा की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सैनिक देश की भौतिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राष्ट्र की डिजिटल सीमाओं के प्रहरी हैं। मंत्री  टेटवाल शुक्रवार को ग्लोबल स्किल पार्क, भोपाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 के दूसरे दिन आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न तकनीकी एवं इंजीनियरिंग संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मंत्री  टेटवाल ने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नवाचार को अपनाने, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने, रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजक बनने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और तकनीकी रूप से सशक्त मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। एमपीएसईडीसी की मुख्य महाप्रबंधक सु शिवांगी जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश को प्रौद्योगिकी एवं नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एसएसआरजीएसपी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गिरीश शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा उद्योगोन्मुख कौशल विकास पर बल दिया। एसएसआरजीएसपी-गोप के वरिष्ठ निदेशक  नीरज सहाय ने ग्लोबल स्किल पार्क को भारत का पहला एकीकृत बहु-कौशल प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य वैश्विक मानकों के अनुरूप दक्ष एवं भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना है। कार्यक्रम के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में “साइबर डिफेंस फंडामेंटल्स” विषय पर विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों, साइबर खतरों तथा सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को मालवेयर, रैनसमवेयर, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और इनसाइडर रिस्क जैसे प्रमुख साइबर खतरों से अवगत कराया गया। साथ ही साइबर किल चेन फ्रेमवर्क के माध्यम से साइबर हमलों की प्रक्रिया और उन्हें रोकने के उपायों की जानकारी भी दी गई। सत्र में ‘डिफेंस इन डेप्थ’ की अवधारणा, सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, साइबर हाइजीन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट एवं पैचिंग जैसी सुरक्षा प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं करियर अवसरों, विशेष रूप से एसओसी एनालिस्ट जैसी उभरती भूमिकाओं की जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है।  

सरकारी भर्ती के लिए सख्त होंगे मानदंड, नैतिक पतन से जुड़े मामलों को भी किया जाएगा शामिल

भोपाल  राज्य सरकार 65 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। वर्ष 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण को लेकर बड़ा फैसला परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए। अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है।   वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा।  

ऊर्जा मंत्री तोमर ने विषम परिस्थितियों में बिजली कार्मिकों द्वारा व्‍यवधानों के त्‍वरित निराकरण और उपभोक्‍ताओं के धैर्य की सराहना की

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ने बीते गुरूवार की शाम राजधानी में तेज आंधी, तूफान एवं बारिश के दौरान प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न विद्युत व्यवधान के दौरान बिजली उपभोक्‍ताओं के अपार धैर्य और परिपक्वता की प्रशंसा की है। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के दौरान उपभोक्‍ताओं का सहयोग सराहनीय है। आमजन और बिजली उपभोक्‍ताओं का यह विश्वास ही बिजली कार्मिकों को विपरीत परिस्थितियों में भी त्वरित कार्य करने की ऊर्जा देता है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने भोपाल शहर की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बहाली के दौरान बिजली उपभोक्‍ताओं द्वारा किए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने सभी उपभोक्‍ताओं को अनवरत बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए कृतसंकल्पित है। प्रबंध संचालक ने बिजली कंपनी के सभी मैदानी अधिकारियो एवं कर्मचारियों की तत्परता सजगता और सक्रियता से न्यूनतम समय मे बिजली आपूर्ति बहाल करने पर प्रशंसा की है। भोपाल शहर की विद्युत आपूर्ति सामान्‍य  भोपाल शहर में बीते गुरूवार को सायं लगभग 7:30 बजे 70-80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली अत्यंत तेज आंधी एवं भारी वर्षा के कारण बाधित हुई विद्युत आपूर्ति को बहाल कर दिया गया है। तेज हवाओं के चलते बड़ी संख्या में वृक्ष उखड़कर एवं उनकी शाखाएं टूटकर विद्युत लाइनों पर गिरने से अनेक स्थानों पर विद्युत लाइनें एवं पोल क्षतिग्रस्त होने के कारण शहर के 350 से अधिक 11 केवी फीडर बाधित हुए थे।   मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मैदानी अमले ने चुनौतीपूर्ण एवं विकट परिस्थितियों के बावजूद तत्‍परता से युद्धस्तर पर कार्य करते हुए चरणबद्ध तरीके से विद्युत आपूर्ति बहाल की गई। रात्रि 8:30 बजे तक 165 फीडरों की आपूर्ति पुनः प्रारंभ कर दी गई। इसके पश्चात रात्रि 9:30 बजे तक अतिरिक्त 66 फीडरों की विद्युत आपूर्ति भी बहाल कर दी गई। पूरी रात सतत कार्य करते हुए सुबह तक सभी प्रभावित 11 केवी फीडरों के अधिकांश भागों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई। कंपनी की 10 से अधिक विशेष टीमों ने  विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावित विद्युत आपूर्ति शुक्रवार दोपहर तक पूरी तरह बहाल कर दिया।  कंपनी की लगभग 30 से अधिक टीमों ने उपभोक्‍ताओं की व्‍यक्तिगत शिकायतों (एफओसी) को भी शत-प्रतिशत निराकृत कर दिया है।   

नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य, बनेगी ‘पीपल सिटी’

रायपुर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा राजधानी रायपुर में आयोजित संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव मती आर. संगीता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विकसित सीजी निगरानी पोर्टल, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन विषयक फिल्म, मंडल की 25 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म, मंडल की नवीन वेबसाइट तथा ईको क्लब गतिविधियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण किया गया। भारतीय संस्कृति प्रकृति के संरक्षण और सह-अस्तित्व पर आधारित             मंत्री  ओपी चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का मूल कारण प्रकृति के साथ असंतुलित विकास मॉडल है। भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के संरक्षण और उसके साथ सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित रही है। यहां नदियों, पर्वतों, वृक्षों और जीव-जंतुओं तक को पूजनीय माना गया है। हमारी परंपरा प्रकृति के उपयोग की बात करती है, शोषण की नहीं।          मंत्री  चौधरी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों तक विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था रहा, लेकिन उस दौर में पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि विकास का आधार प्रकृति के साथ संतुलन था। औद्योगिक क्रांति के बाद दुनिया ने जिस विकास मॉडल को अपनाया, वह प्रकृति के अत्यधिक दोहन पर आधारित रहा और आज उसके दुष्परिणाम पूरी मानवता भुगत रही है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की चुनौती बन चुका है। असामान्य वर्षा, बढ़ती गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। प्रकृति के साथ अन्याय का परिणाम अंततः मानव समाज को ही भुगतना पड़ता है। पर्यावरण संरक्षण में तकनीक का उपयोग बढ़ाया           मंत्री  चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरणीय निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऑनलाइन निगरानी के लिए आधुनिक प्रणाली विकसित की गई है, जिससे प्रदूषण स्तर बढ़ते ही विभाग को तत्काल जानकारी मिलती है और त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐश के सुरक्षित परिवहन और निपटान के लिए जीपीएस आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि अन्य राज्यों का फ्लाई ऐश छत्तीसगढ़ में डंप न किया जाए। खतरनाक अपशिष्टों के प्रबंधन को लेकर भी राज्य सरकार ने सख्त और नैतिक निर्णय लिए हैं, ताकि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। नवा रायपुर बनेगा ‘पीपल सिटी           चौधरी ने वृक्षारोपण की वर्तमान पद्धतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिकता के लिए पौधे लगाने के बजाय स्थानीय और पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीपल, नीम, आम और अन्य देशी वृक्ष पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि रायपुर कलेक्टर रहते हुए उन्होंने “पीपल फॉर पीपल” अभियान प्रारंभ किया था। अब नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के वृक्ष लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां किसी भी दिशा में देखने पर पीपल का वृक्ष दिखाई देगा। बच्चों में विकसित करनी होगी पर्यावरणीय संवेदनशीलता       आवास एवं पर्यावरण मंत्री  चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से           आवास एवं पर्यावरण मंत्री  चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से शुरू होता है। अनावश्यक बिजली की बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, पौधों की सही देखभाल और स्थानीय प्रजातियों के पौधों का वृक्षारोपण जैसी आदतें समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उन्होंने शिक्षकों और ईको क्लब समन्वयकों से आग्रह किया कि वे बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करें। आने वाली पीढ़ी की सोच बदलकर ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है। सस्टेनेबिलिटी में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं           मंत्री  चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास आधारित स्टार्टअप भविष्य के सबसे बड़े अवसरों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रोजगार, नवाचार और उद्यमिता का भी बड़ा क्षेत्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने करियर और उद्यमों को सस्टेनेबिलिटी के सिद्धांतों से जोड़ें और पर्यावरणीय चुनौतियों को अवसर में बदलने का प्रयास करें। विविध कार्यक्रमों का हुआ आयोजन             कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण विषयक प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा तुलसी पौधे को जल अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मिशन लाइफ की शपथ दिलाई गई तथा विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक “किस्सा लकड़ी का” ने पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईको क्लब समन्वयकों एवं मास्टर ट्रेनर्स को मिशन लाइफ, ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरणीय गतिविधियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के दौरान पोस्टर प्रतियोगिता एवं विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, विद्यालयों और ईको क्लबों को सम्मानित भी किया गया।            समारोह में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के सदस्य सचिव   राजु अगसिमनि, प्रदेशभर से आए शिक्षकों, ईको क्लब समन्वयकों, विद्यार्थियों, विभागीय अधिकारी कर्मचारी एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।