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बारिश के मौसम में बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने पर जोर, कर्मचारियों के लिए भी जारी हुए सख्त निर्देश

मॉनसून में उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के सभी प्रबंध करें अनुमति उपरांत ही मुख्यालय छोड़ें कार्मिक भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों में विद्युत आपूर्ति और ऑपरेशन एंड मेन्टीनेंस से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नियंत्रणकर्ता अधिकारी से अनुमति लेकर ही कार्यस्थल / मुख्यालय छोड़ें। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि प्री-मॉनसून बारिश की बौछारें शुरू हो गईं हैं और अनेक बार आँधी और चक्रवाती तूफान और प्राकृतिक आपदा को देखते हुए कंपनी के मैदानी अफसरों से कहा गया है कि वे विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें। कोई कार्मिक अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। कंपनी ने कहा है कि गत वर्षों में पूरे जून माह की शिकायतों के आकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने सभी मैदानी कार्मिकों को उपभोक्ताओं को अनवरत् और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में विद्युत आपूर्ति बहाल रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। किसी भी आकस्मिक स्थिति में उपभोक्ता कंपनी के कॉल सेन्टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।  मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाइनमैनों के मोबाइल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखी जाए। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाये रखें। बारिश के दौरान इन बातों का रखे ध्यान मॉनसूनी मौसम के दौरान हवा में नमी के कारण करंट लगने की आशंका ज्यादा रहती है। करंट से लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन ज्यादातर मौतों को टाला जा सकता है। ज्यादातर मौतें घरों में अर्थिंग नहीं होने या कमजोर अर्थिंग की वजह से होती है। अर्थिंग या तो स्थानीय स्रोत से प्राप्त की जा सकती है या घर पर ही गहरा गढ़डा खोदकर खुद बनाई जा सकती है।     बारिश में बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें           घर में अर्थिंग की उचित व्यवस्था करें।          हरे रंग के तार को हमेशा याद रखें। इसके बिना कभी बिजली उपकरण का प्रयोग न करें। खास कर जब यह पानी के स्रोत को छू रहा हो। पानी करंट के प्रवाह की गति को बढ़ा देता है, इसलिए नमी वाले माहौल में अतिरिक्त सावधानी रखें।          दो पिन वाले बिना अर्थिंग के उपकरणों का प्रयोग न करें।          तीन पिन वाले प्लग का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि तीनों तार जुड़े हों और पिनें खराब न हों।          तारों को सॉकेट में लगाने के लिए माचिस की तीलियों का प्रयोग न करें।          किसी भी तार को तब तक न छुएं, जब तक बिजली बंद न कर दी गई हो ।          अर्थिग के तार को न्यूट्रल के विकल्प के तौर पर प्रयोग न करें।          सभी जोड़ों पर बिजली वाली टेप लगाएं, न कि सेलोटेप या बेंडेड ।          गीज़र के पानी का प्रयोग करने से पहले गीज़र बंद कर दें।          हीटर प्लेट का प्रयोग नंगी तार के साथ न करें।          घर पर सूखी रबर की चप्पलें पहनें।          घर पर मिनी सर्किट ब्रेकर और अर्थ लीक सर्किट ब्रेकर का प्रयोग करें।          मेटलिक बिजली उपकरण पानी के नल के पास न रखें।          रबर के मैट और रबर की टांगों वाले कूलर स्टैंड बिजली उपकरणें को सुरक्षित बना सकते हैं।          केवल सुरक्षित तारें और फ्यूज का ही प्रयोग करें।          अर्थिंग की जांच हर छह महीने में करते रहें।          किसी भी आम टेस्टर से करंट के लीक होने का पता लगाया जा सकता है।          फ्रिज के हैंडल पर कपड़ा बांध कर रखें।          प्रत्येक बिजली उपकरण के साथ बताए गए निर्देश पढ़ें।  

एक तरफ Layoffs, दूसरी तरफ AI पर भारी खर्च! Amazon की रणनीति पर उठे सवाल

 नई दिल्ली दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक ऐमेजॉन इस समय एक अजीब दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है. एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरी जा रही है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐमेजॉन ने करीब 30,000 नौकरियां खत्म कर दी हैं. लेकिन इसी दौरान कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश जारी रखा है. यही वजह है कि अब कंपनी के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है।  अमेरिका के सिएटल शहर में हुई एक सिटी काउंसिल हियरिंग में ऐमेजॉन के कुछ इंजीनियर्स ने खुलकर अपनी ही कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि जिस समय कंपनी बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर बना रही है, उसी समय कर्मचारियों की छंटनी करना गलत है।  रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स निवेश कर रहा है. ऐसे में 30 हजार लोगों की छंटनी पर कई सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि ये पूरे वर्कगफोर्स का 8.6% है जो काफी ज्यादा है।  इन इंजीनियर्स ने सिर्फ नौकरी कटौती पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि  डेटा सेंटर को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि ये डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और संसाधन खपत करते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर पड़ता है।  दरअसल, Amazon ही नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री इस समय AI रेस में लगी हुई है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एनवीडिया जैसी कंपनियां भी इसी दौड़ में हैं. हर कंपनी चाहती है कि वह AI में आगे निकले, और इसके लिए अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं।  लेकिन इस दौड़ की कीमत कौन चुका रहा है? यही सवाल अब कर्मचारियों और आम लोगों के बीच उठने लगा है. Amazon के अंदर जो विरोध दिख रहा है, वह एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है।  हाल के दिनों में अमेरिका और यूरोप में एआई और डेटा सेंटर के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं. लोगों को डर है कि AI नौकरियां खत्म करेगा और साथ ही पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालेगा।  Amazon के मामले में यह विरोध इसलिए और खास है क्योंकि यह कंपनी के अंदर से ही उठ रहा है. आम तौर पर कर्मचारी अपनी कंपनी के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाते, लेकिन यहां मामला अलग है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई पर हो रहा भारी खर्च अभी कंपनियों के लिए कमाई में नहीं बदल पा रहा है. यानी कंपनियां पहले पैसा लगा रही हैं, लेकिन उसका फायदा तुरंत नहीं मिल रहा. ऐसे में लागत कम करने के लिए नौकरी कटौती का रास्ता अपनाया जा रहा है।  यही वजह है कि अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या AI का यह मॉडल टिकाऊ है या नहीं. Amazon की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है. यह उस पूरी टेक दुनिया की तस्वीर दिखाती है, जहां भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए आज के कर्मचारियों की कीमत चुकाई जा रही है।  आने वाले समय में यह साफ होगा कि AI वाकई उतना बड़ा बदलाव लाता है जितना दावा किया जा रहा है, या फिर यह भी एक महंगा प्रयोग साबित होता है. लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि Amazon के अंदर उठी यह आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है।   

‘IPL खत्म, अब भविष्य देखो’— Googleई की उड़ान और उदय कोटक के बयान ने खींचा ध्यान

मुंबई  दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां भविष्य की दिशा आज लिए जा रहे फैसलों से तय हो रही है. टेक्नोलॉजी,पूंजी और निवेश का खेल अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है. इसी संदर्भ में गूगल का हालिया कदम बेहद महत्वपूर्ण है. जिस कंपनी के पास पहले से ही भारी नकद भंडार है. जिसने लगातार मुनाफे के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. वही कंपनी बाजार से अतिरिक्त 80 अरब डॉलर जुटाने जा रही है. उदय कोटक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस तरफ ध्यान दिलाया है और देसी कंपनियों को चेताया है. आईपीएल का मजा खत्म हुआ, अब भविष्य की तरफ देख लो. गूगल के आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं. सालाना मुनाफा लगभग 160 अरब डॉलर, एक तिमाही का मुनाफा 62 अरब डॉलर और कुल मार्केट वैल्यू 4.5 खरब डॉलर. इतना मार्केट कैप तो निफ्टी 50 और सेंसेक्स की कंपनियों को मिलाकर भी नहीं है।  यहां सबसे अहम सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी और मजबूत कंपनी भी भविष्य को लेकर इतनी आक्रामक तैयारी कर रही है तो हम क्या कर रहे हैं. क्या हम भी उसी स्तर की तत्परता और दूरदृष्टि दिखा रहे हैं? हम अपनी स्थिति को देखें तो एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आता है. एक तरफ राजनीतिक स्थिरता और ताकत अपने चरम पर है. मजबूत नेतृत्व,लगातार चुनावी जीत और लगभग एकदलीय प्रभुत्व जैसी स्थिति है. कुल मिलाकर मोदी सरकार बेहद स्थिर है. दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ईरान वॉर ने चुनौतियां और बढ़ा दी है. विकास दर भले ही स्थिर दिखती हो लेकिन तीन चीजें चिंता पैदा कर रही है।  कुछ लोगों को आर्थिक स्थिति गिरने की बात पचती नहीं है. वे तुरंत बताने लगते हैं कि भारत बड़ी इकॉनमी में सबसे तेज बढ़ने वाला देश है. हमारी जीडीपी 6 परसेंट के ऊपर है. लेकिन सच्चाई इतनी चमकीली नहीं है. अगर दुनिया के सभी देशों के देखें तो भारत से ज्यादा जीडीपी वृद्धि दर नाइजर और इथियोपिया की है. प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के मामले में भी हम आठवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश हमसे आगे है. हाल ही में पश्चिम एशिया जंग के कारण रुपया पिछले एक साल में लगभग 12% गिरा है और यह लगातार सातवां साल है जब इसमें गिरावट आई है. यह एक अजीब स्थिति है. महंगाई काबू में है. चालू खाता घाटा संतुलित है. विकास की गति भी ठीक है फिर भी मुद्रा कमजोर बनी हुई है।  आर्थिक विकास का असली इंजन निवेश होता है. खासतौर पर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और विदेशी निवेश (FDI). यही निवेश नई टेक्नोलॉजी लाता है,रोजगार पैदा करता है और देश को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ता है. लेकिन अपने देश में प्राइवेट सेक्टर का निवेश उतनी तेजी से बढ़ नहीं रहा है. सरकार ने बजट में विकास के काम के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है लेकिन सिर्फ सरकारी निवेश से काम नहीं चलेगा. इस पूरी तस्वीर को अगर गूगल के उदाहरण के साथ जोड़कर देखें तो फर्क साफ दिखाई देता है. वहां कंपनियां यह मानकर चल रही हैं कि भविष्य अनिश्चित है, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और टेक्नोलॉजी तेजी से बदलेगी. इसलिए अभी से निवेश बढ़ाना जरूरी है. वहीं भारत में कई बार यह धारणा दिखती है कि हमारा बाजार इतना बड़ा है कि निवेशक खुद ही आएंगे. लेकिन वास्तविकता यह है कि निवेशक भरोसे और रिटर्न की गारंटी मिलने पर ही आते हैं।  सीआईआई रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर ने सितंबर में 7.7 लाख करोड़ निवेश किया है. ये अच्छा संकेत है. लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़े को देखें तो कॉरपोरेट निवेश जीडीपी के 12 प्रतिशत पर स्थिर है. इसे हर हाल में बढ़ाना होगा. हमारे पास एक विशाल बाजार, युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक अहमियत है. लेकिन इन फायदों को वास्तविक आर्थिक ताकत में बदलने की जरूरत है। 

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, आनंदपुर साहिब में हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना की खास बातें

श्री आनंदपुर साहिब पंजाब सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए श्री आनंदपुर साहिब के संशोधित हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों की उच्च स्तरीय बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दी गई। यह परियोजना न केवल श्री आनंदपुर साहिब की ऐतिहासिक पहचान को और मजबूत करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहतर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव भी सुनिश्चित करेगी। क्या है हेरिटेज स्ट्रीट प्लान? संशोधित योजना के अनुसार, प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट किला आनंदगढ़ साहिब के निकट स्थित गोल चौक से शुरू होगी और तख्त श्री केसगढ़ साहिब पार्क, गुरुद्वारा सीसगंज साहिब तथा गुरुद्वारा भोरा साहिब तक विकसित की जाएगी। इस हेरिटेज कॉरिडोर का उद्देश्य श्री आनंदपुर साहिब के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक सुव्यवस्थित मार्ग से जोड़ना है, ताकि श्रद्धालुओं को इन पवित्र स्थलों के दर्शन के दौरान एकीकृत आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव मिल सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह परियोजना श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत अनुभव को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। इसके माध्यम से सिख इतिहास और विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच आसान होगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन से पहले सभी आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियां प्राप्त की जाएंगी। साथ ही, इसके डिजाइन को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और अन्य सक्षम प्राधिकरणों से अनुमोदित कराया जाएगा। निगरानी के लिए हाई-पावर कमेटी सरकार ने परियोजना के सुचारू और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति (हाई-पावर कमेटी) गठित करने का भी निर्णय लिया है। यह समिति परियोजना की निगरानी करेगी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी। विरासत संरक्षण पर सरकार का फोकस पंजाब सरकार का मानना है कि श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी पंजाब की समृद्ध धार्मिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

मुख्यमंत्री 5 जून को निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों का करेंगे सम्मान, प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

मुख्यमंत्री 5 जून को पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को करेंगे सम्मानित मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत बोर्ड परीक्षा के टॉप-10 छात्रों का होगा सम्मान रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आगामी शुक्रवार 5 जून को दोपहर 2.30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को सम्मानित करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ           योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक मेधावी छात्र को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए दोपहिया वाहन  क्रय करने हेतु 1  लाख रुपये का विशेष अनुदान देने का भी प्रावधान है। इस प्रकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को कुल रुपये 2,00,000/- का चेक वितरण कर लाभान्वित किया जाना है।  पात्रता एवं नियम          छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं। हितग्राही श्रमिक का श्रम कल्याण मंडल में कम से कम 90 दिन पूर्व से पंजीकृत होना आवश्यक है। यह वार्षिक प्रोत्साहन राशि पंजीकृत निर्माण श्रमिक के केवल प्रथम दो बच्चों को ही देय होगी। इस योजना का लाभ एक शैक्षणिक वर्ष में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह कल्याणकारी योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक बड़ा संबल प्रदान कर रही है।

एनएचएआई का पर्यावरण-हितैषी निर्माण पर जोर

रायपुर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आधुनिक सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। प्रकृति, वन्य जीव और आधुनिकता के बीच बेहतरीन संतुलन स्थापित करने का यह अनूठा मॉडल विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की विभिन्न परियोजनाओं में धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देकर पर्यावरण-अनुकूल सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। औद्योगिक कचरे की रिसाइक्लिंग से राजमार्गों का निर्माण राजमार्ग निर्माण में थर्मल पावर प्लांट की फ्लाई-ऐश (राख) का उपयोग करके एनएचएआई ने पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है, जिसका बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ की बिजली परियोजनाओं से निकलने वाले कचरे को खपाने में काम आ रहा है। छत्तीसगढ़ में विभिन्न परियोजनाओं में वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 2.17 करोड़ मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई-ऐश को सड़क निर्माण में खपाया गया, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लगभग 20 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश का उपयोग किया जा चुका है। इतना ही नहीं, स्टील उद्योग के अपशिष्ट यानी स्लैग, अनुपयोगी टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी वैकल्पिक सामग्रियों को रिसायकल कर वर्ष 2024-25 में 30,477 मीट्रिक टन तथा वर्ष 2025-26 में 2691 मीट्रिक टन सामग्रियों का उपयोग करके ग्रीन-हाइवे की परिकल्पना को साकार किया गया है। जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के प्रयास सड़क निर्माण के साथ-साथ जल संरक्षण और भूजल संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर सुधर सके। छत्तीसगढ़ के राजमार्गों के आस-पास के ग्रामीण अंचलों सहित देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 13 अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार और निर्माण किया गया है। वर्षा जल संचयन को गति देने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या को वर्ष 2024-25 में 14 से बढ़ाकर अगले ही वर्ष 105 कर दिया गया। निर्माण कार्यों और पौधों की सिंचाई में पीने योग्य साफ पानी की बर्बादी रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से प्राप्त 323 किलोलीटर शोधित जल का उपयोग किया गया, जो जल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। संवेदनशील वनों में इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए एनएचएआई ने छत्तीसगढ़ की विभिन्न परियोजनाओं में बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में अत्याधुनिक इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य के संवेदनशील क्षेत्र में करीब 3 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक सुरंग इसका नायाब उदाहरण है। इस निर्माण से वाहनों का आवागमन भूमिगत होगा और जंगल के शांत माहौल पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। इस क्षेत्र में विशेष ध्वनि-अवरोधक (साउंड बैरियर्स) लगाए जा रहे हैं, ताकि वन्य जीव और पक्षी वाहनों के शोर से विचलित न हों। साथ ही, पेड़ों पर रहने वाले जीवों के लिए सड़क के ऊपर मंकी-कैनोपी और हाथियों व अन्य वन्य जीवों के बेरोकटोक विचरण के लिए विशेष एलिफेंट-पास एवं एनिमल-अंडर विकसित किए जा रहे हैं। बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क से स्थानीय समृद्धि हाइवे को एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने छत्तीसगढ़ के मैदानी और वनांचल मार्गों के किनारों पर एनएचएआई द्वारा कई अनोखे प्रयोग किए जा रहे हैं। सड़कों के किनारे विशेष बी-कॉरिडोर (मधुमक्खी गलियारा) विकसित किया जाएगा, जिससे आसपास के खेतों में प्राकृतिक परागण बढ़ेगा और स्थानीय किसानों की फसल उत्पादकता में वृद्धि होगी। वहीं, बंजर और खाली पड़ी जमीनों पर मेडिसीन पार्क (औषधि वन) तैयार कर नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे हजारों औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, एनएचएआई ने "एक पेड़ माँ के नाम 2.0" अभियान के अंतर्गत बीते वर्ष छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे और डिवाइडर्स पर ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण कर हरित राजमार्ग का एक नया कीर्तिमान रचा है।

MP के 5 जिलों की बदलेगी तस्वीर, 4415 करोड़ की लागत से दो हाईवे परियोजनाओं को मंजूरी

भोपाल   प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्ष्ता में दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में आयोजित की गई। इस मीटिंग में मध्य प्रदेश के रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े प्रस्ताव पास किए गए। मीटिंग में मध्य प्रदेश को दो हाईवे की सौगात देने का फैसला लिया गया। केंद्रीय कैबिनेट बैठक में नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग हिस्सों को अपग्रेड करने और चौड़ीकरण का फैसला लिया है। इस प्रोजेक्ट की लागत 4415 करोड़ रुपए होगी। प्रोजेक्ट की लंबाई 233.635 किमी होगी जिसमे प्रदेश के कई बड़े जिले शामिल होंगे। कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने दी। बता दें कि, 6 जून को पीएम मोदी का नरसिंहपुर दौरा प्रस्तावित है। एमपी में दो मिलेंगे दो नए हाईवे मोदी कैबिनेट ने नेशनल हाईवे 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने का फैसला लिया है। पहला हिस्सा हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूढ़ी सेक्शन के 125 किमी पर मौजूद नैरो लेन को दो लेन में अपग्रेड किया जाएगा। दूसरा हिस्सा 108.643 किमी के देशगांव-जुलवानिया सेक्शन है जिसे टू-लेन से फोरलेन किए जाने फैसला लिया गया है। इसके अलावा खरगोन में ट्रैफिक कम करने के लिए 16.20 किमी का ग्रीनफ़ील्ड बाईपास के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट से बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिले को बड़ा फायदा मिलेगा। पीएम गति शक्ति का हिस्सा है प्रोजेक्ट रेल मंत्री के अनुसार 347B (NH-347B) के दो अलग-अलग हिस्सों को अपग्रेड और चौड़ा करने वाल प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति पहल का हिस्सा है जिसमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक इंडस्ट्रियल पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। यह खंडवा और बड़वानी जिलों के साथ-साथ बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे आदिवासी जिलों सहित पांच सामाजिक नोड्स को भी जोड़ेगा। एमपी आने वाले है पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मध्यप्रदेश के दौरे पर आ सकते हैं। इस बार प्रधानमंत्री का दौरा नरसिंहपुर जिले का प्रस्तावित है, जहां वे गाडरवारा तहसील में सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन विस्तार परियोजना के विस्तार के लिए भूमिपूजन करने आ सकते हैं। सीएम ने प्रधानमंत्री को गाडरवारा आने का न्योता दिया था। पीएम के संभावित दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल दौरा प्रस्तावित है, आधिकारिक आदेश नहीं आया है।

धार भोजशाला फैसले का असर, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ी; सरस्वती लोक को मिलेगी रफ्तार

धार  धार भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद वहां धार्मिक पर्यटन बढ़ गया है। आसपास के जिलों से लोग मंदिर को देखने आने लगे हैं। आम दिनों के अलावा रविवार और शनिवार को भोजशाला में ज्यादा भीड़ रहती है। फैसला आने के बाद मंगलवार और शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में दूसरे जिलों से लोग आने लगे हैं। जो पर्यटक मांडू देखने आ रहे हैं, उनमें से कई अपने प्लान में धार भोजशाला को भी शामिल कर रहे हैं, क्योंकि धार भोजशाला का पुरातत्व महत्व भी है। उधर, मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में धार में सरस्वती लोक बनाने की मंजूरी मिल चुकी है और जल्दी ही इसके निर्माण की कवायद शुरू होगी। महाकाल लोक की तर्ज पर इसे बनाया जाएगा। लोक में सरस्वती माता की प्रतिमा, उनकी महिमा के भित्ति चित्र के अलावा राजा भोज शोध संस्थान भी बनाया जाना है। विद्युत सज्जा के अलावा भव्य गेट भी भोजशाला परिसर में बनाया जाएगा। जो मूर्तियां संग्रहालय में रखी गई है। उन्हें भी वापस भोजशाला में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।    मालवा–निमाड़ के पर्यटक ज्यादा मंदिर जैसी गतिविधियां शुरू होने के बाद भोजशाला में मालवा–निमाड़ के पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। भोजशाला मामले का केस जीतने वाले याचिकाकर्ता आशिष गोयल बताते हैं कि पहले की तुलना में लोगों की भोजशाला में आने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जब यह लोक के रूप में विकसित होगा तो धार्मिक पर्यटन की गतिविधियां और बढ़ेंगी भोजशाला के अलावा धार में प्राचीन कालका माता मंदिर भी काफी लोगों को आकर्षित करता है। सरकार पर्यटकों की सुविधा के इंतजाम भी भोजशाला में करेगी।

हाईकोर्ट का अहम फैसला: रेल हादसे में पोती खोने वाले दादा को मिलेगा मुआवजा, 28 साल बाद न्याय

चंडीगढ़  वर्ष 1998 के खन्ना रेल दुर्घटना मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। करीब 28 वर्ष बाद पोती की मौत पर उसके दादा को दिए गए चार लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा गया है।  अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की निर्भरता का आकलन केवल आर्थिक आधार पर नहीं किया जा सकता। परिवार के भीतर मिलने वाला प्रेम, स्नेह, देखभाल और भावनात्मक सहारा भी निर्भरता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जस्टिस पंकज जैन ने केंद्र सरकार और उत्तरी रेलवे की अपील खारिज कर दी। उन्होंने रेलवे दावा अधिकरण के आदेश को सही ठहराया। 26 नवंबर 1998 को खन्ना-लुधियाना रेलखंड पर भीषण हादसा हुआ था। इसे देश के सबसे भयावह रेल हादसों में गिना जाता है। इस दुर्घटना में दावेदार की पोती सहित परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। कोलकाता जा रही सियालदह एक्सप्रेस पटरी से उतरे अमृतसर जाने वाली ट्रेन के छह डिब्बों से टकरा गई थी। दोनों ट्रेनों में करीब 2500 यात्री सवार थे। हादसे में करीब 212 लोगों की मौत हुई थी। मुआवजे पर रेलवे का तर्क  पोती की मृत्यु के बाद रेलवे दावा अधिकरण ने दादा के पक्ष में चार लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार और उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक ने इस आदेश को चुनौती दी। उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उनका तर्क था कि रेलवे अधिनियम के तहत केवल वही व्यक्ति मुआवजे का दावा कर सकता है जो मृतक पर आर्थिक रूप से निर्भर हो। निर्भरता की व्यापक अवधारणा सुनवाई के दौरान जस्टिस जैन ने खंडपीठ के एक पूर्व फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि निर्भरता की अवधारणा को संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। परिवार के सदस्यों के बीच भावनात्मक जुड़ाव, स्नेह, संरक्षण और देखभाल भी महत्वपूर्ण है। यह आर्थिक सहायता जितनी ही अहमियत रखती है। अदालत ने निर्भरता को केवल वित्तीय दायरे तक सीमित रखने से इन्कार किया। दादा-पोती का भावनात्मक रिश्ता अदालत ने कहा कि दादा-दादी और पोते-पोतियों के बीच एक विशेष भावनात्मक रिश्ता होता है। ऐसे में दादा अपनी पोती पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं थे, इस आधार पर उन्हें मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। दावेदार का कोई अन्य पोता या पोती नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि दादा-दादी की अपने पोते या पोती पर प्रेम, स्नेह, देखभाल और भावनात्मक सहारे के लिए निर्भरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया मुआवजा पूरी तरह न्यायसंगत है। अदालत ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए चार लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा। 

भोपाल के बाघ बने वैश्विक चर्चा का विषय, काठमांडू सम्मेलन में 42 देशों के विशेषज्ञ जानेंगे उनका व्यवहार

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शहरीकरण के बीच बाघों के जिंदा रहने और इंसानों के साथ उनके अनोखे तालमेल पर हुई एक बेहद अहम स्टडी को नेपाल की राजधानी काठमांडू में पेश किया गया है। काठमांडू में 3 से 5 जून 2026 तक चल रहे छठे कंजर्वेशन एशिया कांग्रेस में इस रिसर्च को दुनिया भर के वैज्ञानिकों के सामने रखा गया। इस ग्लोबल इवेंट को 'सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन बायोलॉजी एशिया रीजन', नेपाल चैप्टर और बुरहान फाउंडेशन मिलकर आयोजित कर रहे हैं, जिसमें 42 देशों के 600 से ज्यादा एक्सपर्ट्स शामिल हुए हैं। खास बात यह है कि इस संस्था के एशिया चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ. कौस्तुभ शर्मा खुद भोपाल के रहने वाले हैं। कैमरा ट्रैप और जीआईएस मैपिंग से खुला राज वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग के सहयोग से हुई इस रिसर्च में बायो-सोशल तरीका अपनाया गया। इसमें फील्ड सर्वे, कैमरा ट्रैप, जीआईएस मैपिंग और स्थानीय लोगों के इंटरव्यू शामिल किए गए। स्टडी में यह जानने की कोशिश की गई कि भोपाल के जंगल, तालाब और हरियाली वाले इलाके कैसे बाघों की आवाजाही में मददगार साबित हो रहे हैं। रिसर्च में सामने आया कि भोपाल में प्राकृतिक जमीन का सही इस्तेमाल, आपस में जुड़े नदी-तालाब और हरियाली (ब्लू-ग्रीन स्पेस), जंगलों में पर्याप्त शिकार, स्थानीय लोगों की स्वीकार्यता और बाघों के बदलते बर्ताव की वजह से ही वे इस शहरी माहौल में भी खुद को बचाए हुए हैं। बढ़ते हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से बड़ा खतरा जहाँ एक तरफ भोपाल में बाघों का बचना बड़ी कामयाबी है, वहीं रिसर्चर्स ने एक गंभीर चेतावनी भी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में तेजी से फैल रही सड़कों और लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे रेलवे लाइन या बिजली के तार की वजह से बाघों के आने-जाने के रास्ते बदल रहे हैं और उनके जंगल छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहे हैं।