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अंगिका और अन्य स्थानीय भाषाओं को परीक्षा में जगह देने पर मंथन शुरू

 महगामा  झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में अंगिका सहित क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। महागामा विधायक और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। 13 अप्रैल को मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर अंगिका, संथाली, मगही, मैथिली, भोजपुरी, कुड़माली और खोरठा जैसी स्थानीय भाषाओं को परीक्षा में विकल्प के रूप में शामिल करने की मांग की थी। मंत्री ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन में बताया कि संथालपरगना समेत राज्य के कई क्षेत्रों में अंगिका और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं। परीक्षा व्यवस्था में इन भाषाओं का अभाव स्थानीय युवाओं को अवसरों से वंचित कर रहा है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर छात्रों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ी थी। इसके बाद, राज्य सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने 5 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। यह समिति राज्य के विभिन्न जिलों में भाषाई स्थिति, जनभावनाओं और व्यावहारिक पक्षों का अध्ययन कर सरकार को अनुशंसा सौंपेगी। समिति में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को समन्वयक बनाया गया है, जबकि श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल मंत्री योगेन्द्र प्रसाद और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सदस्य हैं। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में समावेश झारखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। अंगिका साहित्य कला मंच और अन्य सामाजिक संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। अब छात्रों और भाषा प्रेमियों की नजर समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले निर्णय पर है।  

Punjab टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट में हजारों अभ्यर्थी शामिल, परीक्षा केंद्रों पर हलचल

अमृतसर. स्टेट कौंसिल ऑफ रिसर्च ट्रेनिंग की ओर से पंजाब राज्य अध्यापक योग्यता के दूसरे चरण की परीक्षा का आयोजन रविवार को किया जा रहा है। इस परीक्षा में कुल चार हजार से अधिक विद्यार्थी बैठे हैं और पंजाब राज्य अध्यापक योग्यता परीक्षा के लिए अपने आपको आंक रहे हैं. इस परीक्षा में सभी उम्मीदवार शिक्षा विभाग में कार्यरत अध्यापकों को ही शामिल किया गया है। इससे पहले पंद्रह मार्च को पंजाब राज्य अध्यापक योग्यता परीक्षा का आयोजन किया गया था। तब नए उम्मीदवारों को भी परीक्षा पास करने का अवसर दिया गया था। 26 अप्रैल को होने वाली पंजाब राज्य अध्यापक योग्यता परीक्षा को लेकर अध्यापक संगठनों में काफी बवाल मचा हुआ था। पहले यह परीक्षा 19 अप्रैल को आयोजित की जानी थी। लेकिन इसके लिए अध्यापकों को करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर सेंटर बनाए गए थे, जिस कारण अध्यापक संगठनों में विरोध पनप गया था। अध्यापकों के विरोध को देखते हुए पंजाब सरकार ने संबंधित अध्यापकों के शहर में ही अब परीक्षा केंद्रों का गठन कर दिया गया है। 26 अप्रैल को होने वाली परीक्षा में संबंधित जिले में बनाए गए परीक्षा केंद्रों में इन सर्विस अध्यापक परीक्षा देंगे। इस परीक्षा के लिए जिले में कुल पांच परीक्षा केंद्र बनाए गए है। बनाए गए परीक्षा केंद्रों में सुबह व शाम के सेशन में टाउन हाल स्कूल ऑफ एमिनेंस सारागढ़ी, खालसा कालेज सीसे स्कूल ब्वॉयज, खालसा सीसे स्कूल गर्ल्स, गुरु नानक स्कूल घी मंडी में दोनों सेशन में 480-480 उम्मीदवार परीक्षा देंगे। वहीं, छेहरटा सीसे स्कूल ऑफ एमिनेंस में 200-200 उम्मीदवार परीक्षा के लिए बैठेंगे। पहले सेशन की परीक्षा सुबह साढे नौ बजे से 12 बजे तक होगी। व दूसरी शिफ्ट दोपहर ढाई बजे से पांच बजे तक होगी। संबंधित सकूल का स्टाफ परीक्षा को सुचारू रूप से करवाएगा। संबंधित स्कूल में बनाए गए परीक्षा केंद्र का मुखी कंट्रोलर होंगे। इसके अलावा शिक्षा विभाग ने हर परीक्षा केंद्र में बाहरी स्कूलों से सुपरिटेडेंट तैनात किए है। सुबह सात बजे से माल रोड कंट्रोल रूम से परीक्षा प्रश्न पत्र मिलने शुरू हो जाएंगे। परीक्षा प्रश्न पत्र कलेक्ट करने की जिम्मेदारी कंट्रोलर को दी गई है। एससीईआरटी की ओर से परीक्षा केंद्रों पर आब्जर्वर तैनात किए गए है। इसके अलावा नकल को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के बाहर व अंदर जैमर, कैमरे लगाए गए है। इसके अलावा उम्मीदवारों की बायोमैट्रिक की जाएगी। ताकि कोई बाहरी उम्मीदवार परीक्षा केंद्र में सेंध न लगा सके। परीक्षा की सभी तैयारियां पूरी: डीईओ डिप्टी डीईओ सेकेंडरी राजेश खन्ना ने बताया कि परीक्षा को लेकर सभी तरह की तैयारियां पूरी कर ली गई है। स्टाफ को ड्यूटी आवंटित की गई है। किसी भी परीक्षा केंद्र में नकल को रोकने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए है। संबंधित कंट्रोलरों व स्टाफ को डयूटी आवंटित करते समय विशेष गाइडलाइन दी गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से परीक्षा को सुचारू रूप से करवाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए है। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के बाहर सुरक्षा को बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग को लिखा गया है। ताकि वहां पर पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाए।

TET परीक्षा पर नए आदेश, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर चर्चा, विभाग तय करेगा आवश्यक शिक्षकों का चयन

भोपाल  मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर असर डालने वाली TET परीक्षा को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग नया आदेश जारी करेगा। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश में टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता और छूट की स्थिति स्पष्ट की जाए। आयुक्त ने कहा कि नए आदेश में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य होगी और किन्हें नियमानुसार छूट या सरलीकरण मिलेगा। शासकीय अधिवक्ता से अभिमत की प्रक्रिया जारी विभाग ने बताया कि मामले में शासकीय अधिवक्ता से अभिमत प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। अभिमत मिलने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। सोमवार को लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें कई प्रशासनिक निर्णय लिए गए। वेतनवृद्धि और समयमान के मामलों में शीघ्र आदेश बैठक में तय हुआ कि जिन शिक्षकों को वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान का लाभ मिलना है, उनके प्रकरणों में शीघ्र कार्रवाई कर आदेश जारी किए जाएंगे। यदि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं, तो परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण व सिलेबस आधारित मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डीपीआई स्तर पर परामर्श बैठक आयोजित होगी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर परामर्शदात्री बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ, शिक्षक कांग्रेस और राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और महामंत्री उपस्थित रहे। बैठक से एक वर्ग असंतुष्ट इधर, लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह की बैठक से शिक्षक संगठनों का एक वर्ग असंतुष्ट नजर आया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि बैठक के लिए घटक संगठनों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन मोर्चा ने इसमें शामिल होने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक अचानक बुलाई गई थी, जिससे सभी संगठनों के अध्यक्षों का उपस्थित होना संभव नहीं था। मोर्चा ने शासन को अवगत कराया है कि शिक्षक आंदोलन से जुड़े किसी भी मुद्दे पर चर्चा केवल अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ ही की जाए, अन्य संगठनों के साथ हुई वार्ता के निर्णय उन्हें मान्य नहीं होंगे। मध्यप्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रांत अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने भी बैठक पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बैठक में पात्रता परीक्षा कराने पर सहमति बनी और इसके लिए जल्द कार्यक्रम जारी किए जाने की बात सामने आई है। उनके अनुसार जिन संगठनों के साथ बैठक हुई, वे पात्रता परीक्षा से प्रभावित नहीं हैं, जबकि प्रभावित संगठन इसमें शामिल नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को निर्देश दिया था कि अब टीच‍िंग सर्विस से जुड़े सभी शिक्षकों को अपनी सर्विस में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्‍ट यानी TET पास करना जरूरी होगा।  क्‍या है TET एग्‍जाम टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी TET एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जो यह तय करती है कि कोई अभ्यर्थी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8 तक) में टीचर बनने के योग्य है या नहीं। यह परीक्षा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 2010 में अनिवार्य की गई थी।

मार्च में टेट परीक्षा करवाएगी पंजाब सरकार

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश भर में 2011 टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टैट) ज़रूरी होने से पहले भर्ती हुए टीचरों को अब अपनी नौकरी बचाने टैट की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। कई राज्यों ने परीक्षा ले भी ली है। वहीं, पंजाब इसके लिए कानूनी विकल्प की तलाश कर रहा है। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस का कहना हैं, सरकार टीचरों के साथ खड़ी है। इसके लिए कानूनी विकल्प ढूंढे जा रहे हैं। क्योंकि इस फैसले के कारण पंजाब के 50 फीसदी स्कूलों में प्रिंसिपलों को नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि शिक्षकों की तरक्की प्रभावित हुई है। वहीं सीधी भर्ती पर भी प्रभाव पड़ा है।  पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरजोत बैंस ने कहा कि सरकार टैट परीक्षा करवाने के लिए तैयार है। इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। साथ की सरकार रिव्यू पिटीशन डालने के कानूनी प्रावधानों की भी तलाश कर रही है। 40 हजार के करीब टीचर प्रभावित बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राज्य के 19,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में काम कर रहे एक लाख से अधिक टीचरों में से करीब 40,000 टीचर प्रभावित होंगे। रिटायरमेंट से पहले जिनकी सर्विस पांच साल से कम बची है, उन्हें इससे छूट दी गई है। यह आदेश उन लोगों के प्रमोशन पर भी रोक लगाता है जो टेस्ट पास नहीं कर पाते हैं। सरकार कानूनी विकलप ढूंढ रही मंत्री ने कहा कि वह नहीं चाहते कि 20-25 साल से पढ़ाने वाले शिक्षकों की नौकरी जाए। इसलिए सरकार कानूनी विकल्प ढूंढ रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले पंजाब सरकार ने भी फरवरी माह में टैट की परीक्षा करवाने की तैयारी की थी लेकिन अब इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। बता दें कि कई राज्यों में टैट परीक्षा की प्रक्रिया या तो पूर्ण हो गई है या अंतिम चरण में हैं। बता दें कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक 2011 से पहले भर्ती हुए टीचरों को 31 अगस्त, 2027 तक यह टेस्ट पास करना होगा। अन्यथा उन्हें सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।

टीईटी परीक्षा अब अनिवार्य, पास न करने पर दो साल में खत्म होगी नौकरी

बांदा परिषदीय विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें दो वर्ष के अंदर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य कर दिया है।  शिक्षक जिन्होंने आरटीई अधिनियम लागू होने के पहले से नौकरी कर रहे हैं और सेवानिवृत्त होने से पांच वर्ष से अधिक का समय बचा है। उन्हें यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने पर उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। जिले के 4765 शिक्षक 1725 परिषदीय विद्यालयों में 1,62,399 बच्चों के अध्ययन-अध्यापन में कार्यरत हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले के बाद उन शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।  ऐसे शिक्षक जिन्होंने आरटीई अधिनियम एक अप्रैल 2010 के लागू होने से पूर्व नियुक्ति मिली थी, उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा पास होगी।  दरअसल आरटीई (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम लागू होने में शिक्षकों की योग्यता को लेकर भी संशोधन हुआ था। जिसमें शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया था।  इसमें वर्ष 2010 के बाद जितनी भी नियुक्तियां हुईं, सभी अर्हता के तहत टीईटी परीक्षा पास की थी। लेकिन जाे शिक्षक 2010 के पहले नियुक्ति पाकर स्कूलों में तैनात हैं, उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टीईटी परीक्षा पास करना होगा।  इनके लिए दो वर्ष का समय भी दिया गया है। यदि दो वर्ष में टीईटी की परीक्षा नहीं पास कर पाते हैं तो ऐसे शिक्षकों की नौकरी जा सकती है। यानी सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए काेई भी शिक्षक बच्चों के भविष्य को नहीं सवारेंगा। पहले उसे उस योग्य बनना होगा। अभी नहीं तैयार किया डाटा बेसिक शिक्षा विभाग के पास टीईटी योग्यता व बिना टीईटी योग्यता धारी शिक्षकों का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। नियुक्ति में भी जिनकी वर्ष 2010 से पहले हुई थी और जिनके सेवानिवृत्त के पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, ऐसा भी डाटा नहीं है।  सामान्यत: पूरे जिले भर के शिक्षकों का डाटा तो है। पूरे जिले में 4765 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें अनुमान है कि करीब एक हजार से 1500 के बीच ऐसे शिक्षकों की संख्या होगी। इन शिक्षकों को नौकरी बचाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा दो वर्ष के अंदर पास करनी होगी। स्थिति स्पष्ट के लिए करना होगा इंतजार यदि शिक्षक नियुक्तियों की बात की जाए तो वर्ष 2006 से लेकर 2008 तक ज्यादा हुईं। इसमें कुछ ऐसी भी भर्ती तो आरटीई अधिनियम आने के पहले हुई, लेकिन नियुक्ति आइटीई लागू होने के बाद मिली।  हालांकि, यह बात तो स्पष्ट है कि जिन शिक्षकों के पास शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें यह परीक्षा पास कर प्रमाण पत्र हासिल करना होगा। देश की सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद शिक्षक संघ भी पशोपेश की स्थिति में है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर शिक्षकों के फोन शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के पास आते रहे, जिसको लेकर वह भी कुछ बोलने से बचते रहे। पदाधिकारियों ने फैसले के विधिवत अध्ययन के बाद शिक्षक हित में हर संवभ प्रयास करने का भरोसा देते रहे।